India vs Uruguay: अनिरुद्ध थापा के ऐतिहासिक गोल के बावजूद भारत 1-6 से हार गया। खालिद जमील ने गेम प्लान की कमी मानी, अब नजर नवंबर के न्यूजीलैंड दौरे पर।
India vs Uruguay: अनिरुद्ध थापा के ऐतिहासिक गोल के बावजूद भारत को उरुग्वे के खिलाफ 1-6 की करारी हार झेलनी पड़ी। कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में खेले गए इस इंटरनेशनल फ्रेंडली में भारत ने एक समय 1-1 से बराबरी कर ली थी, लेकिन इसके बाद उरुग्वे ने मैच पर पूरी तरह कब्जा कर लिया। मैच के बाद भारतीय कोच खालिद जमील ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए माना कि उनका गेम प्लान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
भारत के लिए इस मैच का सबसे खास पल 22वें मिनट में आया। रयान विलियम्स के शॉट को उरुग्वे के गोलकीपर थियागो कार्डोजो पूरी तरह रोक नहीं सके और गेंद छूटने के बाद अनिरुद्ध थापा ने मौका नहीं गंवाया। उन्होंने गेंद को गोल में डालकर स्कोर 1-1 कर दिया। यह उरुग्वे के खिलाफ भारत का 44 साल में सिर्फ दूसरा सीनियर इंटरनेशनल गोल था। इससे पहले 1982 में मानस भट्टाचार्य ने गोल किया था।
इससे पहले उरुग्वे ने डार्विन नुनेज की पेनल्टी से बढ़त बनाई थी। भारत के लिए थापा का गोल सिर्फ बराबरी कराने वाला गोल नहीं था, बल्कि भारतीय फुटबॉल के इतिहास में दर्ज होने वाला पल भी था। थापा ने लंबे समय बाद राष्ट्रीय टीम के लिए गोल किया और सॉल्ट लेक स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को मैच में वापसी की उम्मीद दी।
बिजली और खराब मौसम से रुका मैच
1-1 के बाद मुकाबला कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। कोलकाता में बिजली चमकने और खराब मौसम के कारण खिलाड़ियों को मैदान से बाहर जाना पड़ा। यह ब्रेक करीब 34 से 35 मिनट तक चला। मौसम की वजह से मैच की लय जरूर टूटी, लेकिन दोनों टीमों के लिए परिस्थितियां एक जैसी थीं। मैच दोबारा शुरू होने के बाद उरुग्वे ने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
मैच दोबारा शुरू होने के बाद 28वें मिनट में मैक्सिमिलियानो अराउजो ने उरुग्वे को फिर आगे कर दिया। इसके बाद भारत के लिए मुकाबले में वापसी करना लगातार मुश्किल होता गया।
दूसरे हाफ में भारत की डिफेंस बिखरी
दूसरे हाफ में उरुग्वे ने भारत की डिफेंसिव कमजोरियों का पूरा फायदा उठाया। 53वें मिनट में रोड्रिगो सालाजार ने गोल करके बढ़त 3-1 कर दी। छह मिनट बाद अराउजो ने अपना दूसरा गोल किया और स्कोर 4-1 हो गया।
इसके बाद जुआन मैनुअल सनाब्रिया ने 71वें मिनट में उरुग्वे का पांचवां गोल किया, जबकि रोड्रिगो अगुइरे ने 86वें मिनट में गोल करके स्कोर 6-1 कर दिया। उरुग्वे की तरफ से नुनेज, अराउजो, सालाजार, सनाब्रिया और अगुइरे ने गोल किए, जिसमें अराउजो ने दो गोल दागे।
भारत ने शुरुआत में कुछ अच्छे attacking moves बनाए थे। रयान विलियम्स और एडमंड ललरिंदिका ने आगे जाकर मौके बनाने की कोशिश की, जबकि अकाश मिश्रा और अभिषेक सिंह ने भी फ्लैंक से गेंदें बॉक्स में पहुंचाईं। लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, उरुग्वे की गति और पासिंग के सामने भारत की defensive organisation कमजोर पड़ती गई।
उरुग्वे ने खास तौर पर तेज counter-attacks से भारत को परेशान किया। 71वें मिनट का गोल भी तेज हमले के बाद आया। भारत के आगे बढ़ने के दौरान गेंद गंवाने के बाद उरुग्वे ने तेजी से हमला बनाया और सनाब्रिया ने उसे गोल में बदल दिया। यही अंतर दोनों टीमों की quality में साफ नजर आया।
खालिद जमील ने हार की जिम्मेदारी ली
मैच के बाद खालिद जमील ने खिलाड़ियों पर हार का ठीकरा नहीं फोड़ा। उन्होंने साफ कहा कि उरुग्वे के खिलाफ उनका गेम प्लान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ब्राजील के खिलाफ 0-4 और उरुग्वे के खिलाफ 1-6 की हार के बाद भारत ने दो मैचों में 10 गोल खाए हैं।
जमील ने यह भी माना कि भारत के प्रदर्शन में मैच आगे बढ़ने के साथ गिरावट दिखाई देती है। उनके मुताबिक शुरुआती करीब 30 मिनट में टीम ठीक रहती है, लेकिन उसके बाद फिटनेस या concentration से जुड़ी दिक्कतें नजर आती हैं। उन्होंने खास तौर पर 60 से 70 मिनट के आसपास टीम में ज्यादा समस्याएं दिखने की बात कही।
उरुग्वे के खिलाफ गोल का क्रम भी इसी तरफ इशारा करता है। भारत 1-1 तक मुकाबले में था, लेकिन इसके बाद 53वें, 59वें और 71वें मिनट में तीन गोल खाने के बाद मैच पूरी तरह हाथ से निकल गया।
जमील को चाहिए ज्यादा कैंप
खालिद जमील ने आगे की तैयारी के लिए ज्यादा राष्ट्रीय कैंप की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि टीम में खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा है और आने वाले मैचों में प्रदर्शन के आधार पर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। उन्होंने मजबूत टीमों के खिलाफ खेलने के फैसले का भी बचाव किया और कहा कि सिर्फ नतीजा खराब आने के कारण ऐसे मुकाबलों को गलत नहीं कहा जा सकता।
यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय टीम का अगला बड़ा इंटरनेशनल असाइनमेंट नवंबर में है। भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ 12 नवंबर को ऑकलैंड और 15 नवंबर को क्राइस्टचर्च में खेलना है। न्यूजीलैंड भी 2026 फीफा वर्ल्ड कप खेल चुका है, यानी उरुग्वे और ब्राजील के बाद भारतीय टीम के सामने एक और वर्ल्ड कप स्तर की टीम होगी।
इससे पहले घरेलू स्तर पर इंडियन सुपर लीग का नया सीजन 10 अक्टूबर से शुरू होना है। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को क्लब फुटबॉल और राष्ट्रीय टीम की तैयारियों के बीच तालमेल बनाना होगा।
तीन मैचों की विंडो में भारत का रिकॉर्ड
भारत ने इस इंटरनेशनल विंडो की शुरुआत पनामा के खिलाफ 1-1 ड्रॉ से की थी। इसके बाद ब्राजील ने भारत को 4-0 से हराया और अब उरुग्वे ने 6-1 से जीत दर्ज की।
यानी तीन मैचों में भारत ने एक ड्रॉ और दो हार दर्ज कीं। टीम ने कुल दो गोल किए, जबकि 11 गोल खाए। इनमें थापा का उरुग्वे के खिलाफ गोल भारत के लिए सबसे खास व्यक्तिगत उपलब्धि रहा।
इन तीनों मुकाबलों में भारत को वर्ल्ड कप स्तर की टीमों के खिलाफ अपनी कमियां देखने का मौका मिला। स्कोरलाइन भले भारत के लिए खराब रही, लेकिन अब असली चुनौती इन मैचों से मिली सीख को अगले मुकाबलों में लागू करने की है।
उरुग्वे के खिलाफ भारत के लिए क्या बचा?
6-1 की हार के बावजूद थापा का गोल भारतीय टीम के लिए एक सकारात्मक पल रहा। 44 साल बाद उरुग्वे के खिलाफ भारत के लिए दूसरा सीनियर इंटरनेशनल गोल आया। लेकिन इससे ज्यादा जरूरी सवाल अब भारतीय डिफेंस, मैच के आखिरी हिस्से में प्रदर्शन और मजबूत विपक्ष के दबाव में टीम की प्रतिक्रिया को लेकर है।
खालिद जमील ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है और ज्यादा कैंप की जरूरत भी बताई है। अब नवंबर में न्यूजीलैंड दौरे पर यह देखना होगा कि भारत इन तीन मैचों में सामने आई कमजोरियों पर कितना काम कर पाता है और क्या टीम लंबे समय तक मुकाबले में टिकने की क्षमता दिखा पाती है।
