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SIR में वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Mumbai से Bangladesh भेजने के आरोप पर Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा। जानिए पूरा मामला।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की Sahida Fakir को मुंबई से Bangladesh भेजे जाने के मामले में Supreme Court ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। Sahida के बेटे Sahin Fakir ने अदालत में याचिका दाखिल कर अपनी मां को भारत वापस लाने और उनके खिलाफ किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है।
Chief Justice of India Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से Senior Advocate S. Muralidhar पेश हुए। मामला Sahin Fakir v. Union of India & Ors., WP(Crl) No. 372/2026 के रूप में सामने आया है।
याचिका में Sahida Fakir को भारतीय नागरिक बताया गया है। उनके बेटे के अनुसार उनका स्थायी संबंध उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल के Gobindapur से है। परिवार का कहना है कि उनके दादा Badshah Gazi का नाम 1952 की मतदाता सूची में और माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज रहे हैं।
Sahida करीब 20 साल पहले अपने पति के साथ काम की तलाश में मुंबई आई थीं और यहां घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं। याचिका के अनुसार 19 जुलाई 2026 को कुछ लोग, जिन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया, उन्हें मुंबई में अपने साथ ले गए। उन्हें Chembur के एक holding centre में रखा गया और उनका Aadhaar कार्ड तथा मोबाइल फोन भी कथित तौर पर ले लिया गया।
परिवार का आरोप है कि Sahida को 100 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया और इस दौरान उन्हें किसी Judicial Magistrate के सामने पेश नहीं किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि उन्हें हिरासत के आधार की जानकारी और परिवार से संपर्क का प्रभावी अवसर नहीं मिला।
इसके बाद Sahida को Border Security Force (BSF) को सौंपे जाने और करीब 20 अन्य लोगों के साथ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की ओर ले जाकर Bangladesh सीमा के पार भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि इसके बाद Sahida ने Bangladesh में अपनी मौजूदगी की जानकारी परिवार तक पहुंचाई और फिलहाल अस्थायी मानवीय आश्रय में रह रही हैं।
Sahida के मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर है। याचिका के अनुसार Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया और इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील लंबित है।
परिवार का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटना अपने आप किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त होने का फैसला नहीं है। Supreme Court ने भी 17 जुलाई 2026 को West Bengal SIR से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि electoral roll से नाम हटने का मतलब अपने आप नागरिकता खत्म होना नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार Election Commission के पास नहीं है।
यही बिंदु Sahida Fakir की याचिका में भी महत्वपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि उनकी नागरिकता पर अंतिम निर्णय हुए बिना और SIR से नाम हटाने के खिलाफ उनकी अपील लंबित रहते हुए उन्हें Bangladesh भेज दिया गया।
परिवार ने कौन से दस्तावेज बताए?
याचिका में Sahida की भारतीय पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि के समर्थन में कई दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। इनमें पुराने electoral records के अलावा पहचान और नागरिक दस्तावेज शामिल हैं।
पहले सामने आए दस्तावेजों में 2008 का voter identity card, 1988 का birth certificate, school certificate और Gobindapur में जमीन से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। परिवार का कहना है कि इन दस्तावेजों को अधिकारियों के सामने रखा गया था।
हालांकि, इन दस्तावेजों का उल्लेख याचिका और परिवार के दावों के संदर्भ में है। Supreme Court ने अभी Sahida की नागरिकता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
याचिका में deportation प्रक्रिया पर भी सवाल
Sahida के बेटे की याचिका केवल उनकी मां को वापस लाने तक सीमित नहीं है। इसमें 2 मई 2025 को जारी उस Standard Operating Procedure (SOP) को भी चुनौती दी गई है, जो कथित अवैध Bangladeshi nationals और Rohingya के deportation की प्रक्रिया से संबंधित है।
याचिका में Immigration and Foreigners Order, 2025 के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी व्यक्ति को विदेशी या अवैध प्रवासी मानकर देश से बाहर भेजने से पहले उसकी nationality की उचित verification और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।
याचिका में विशेष रूप से SOP के Para 9(iv) और Immigration and Foreigners Order, 2025 के Para 12(4)(C) के बीच प्रक्रिया संबंधी अंतर का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि Sahida के मामले में nationality verification और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
इस स्तर पर Supreme Court ने केवल केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि Sahida भारतीय नागरिक हैं, उनका Bangladesh भेजा जाना अवैध था या उन्हें तत्काल भारत वापस लाने का अंतिम आदेश दिया गया है।
अदालत के सामने फिलहाल याचिकाकर्ता के आरोप, Sahida की कथित हिरासत और सीमा पार भेजे जाने की परिस्थितियां तथा nationality verification से जुड़े कानूनी सवाल हैं। केंद्र सरकार का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
SIR से जुड़े मामलों में पहले भी Supreme Court ने उठाए सवाल
Sahida Fakir का मामला ऐसे समय Supreme Court पहुंचा है जब West Bengal में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं। 25 अगस्त 2026 को अदालत को बताया गया था कि SIR से संबंधित करीब 38.1 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें लगभग 7 लाख अपीलें उन लोगों की थीं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और जिन्होंने नाम बहाल करने की मांग की थी।
Supreme Court पहले ही यह अंतर स्पष्ट कर चुका है कि electoral roll में नाम होना या हटना और किसी व्यक्ति की citizenship का अंतिम निर्धारण दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। Sahida Fakir मामले में अब यही सवाल और गंभीर रूप से सामने आया है कि किसी व्यक्ति की nationality पर विवाद होने की स्थिति में उसे देश से बाहर भेजने से पहले कौन-सी verification और procedural safeguards लागू होंगे।
अब केंद्र के जवाब पर नजर
Supreme Court के नोटिस के बाद केंद्र सरकार को Sahida Fakir की हिरासत, nationality verification, Bangladesh भेजे जाने की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे किस तरह की सुनवाई और राहत पर विचार किया जाना है।
पूजा से पहले 100 से ज्यादा महिलाओं की जमा पूंजी फंसने का आरोप है। ज्यादा ब्याज का भरोसा देकर पैसे जमा कराने वाली महिला के लापता होने की शिकायत पुलिस से की गई।
पश्चिम बंगाल: पूजा का त्योहार करीब है, लेकिन 100 से ज्यादा महिलाओं के सामने अपनी वर्षों की जमा पूंजी को लेकर चिंता खड़ी हो गई है। आरोप है कि अधिक ब्याज देने का भरोसा देकर मासिक फंड के नाम पर महिलाओं से लाखों रुपये जमा कराए गए, लेकिन रकम वापस मांगने पर भुगतान नहीं किया गया। जिस महिला पर पैसे जमा कराने का आरोप है, उसके कथित तौर पर लापता होने के बाद पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास पहुंचीं।
ज्यादा ब्याज का भरोसा देकर जमा कराए पैसे
मामला पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले का बताया जा रहा है। महिलाओं का आरोप है कि चंपा बाउरी नाम की महिला पिछले कई वर्षों से मासिक फंड के जरिए उनसे पैसे जमा करवा रही थी। उन्हें जमा रकम पर अधिक ब्याज के साथ पैसा वापस करने का भरोसा दिया गया था।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, 100 से अधिक महिलाएं इस फंड में नियमित रूप से पैसे जमा करती थीं। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई और वर्षों की बचत इस व्यवस्था में लगाई थी।
रकम वापस मांगने पर बढ़ी परेशानी
कुछ समय पहले जब महिलाओं ने अपनी जमा रकम वापस मांगनी शुरू की तो कथित तौर पर परेशानी बढ़ गई। महिलाओं ने चंपा बाउरी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि इसके बाद वह उपलब्ध नहीं हुई।
महिलाओं ने उसके परिवार से भी संपर्क कर उसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि वे उसके पति और मां के घर भी पहुंचीं, लेकिन वहां से भी चंपा के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
इसके बाद शनिवार रात बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट होकर कोकओवन थाने पहुंचीं। महिलाओं ने चंपा बाउरी के खिलाफ लिखित शिकायत देकर मामले की जांच और उनकी जमा रकम वापस दिलाने की मांग की।
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने कई वर्षों तक नियमित रूप से पैसे जमा किए थे और अब रकम वापस नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।
पूजा से पहले पैसों की चिंता
त्योहार नजदीक होने के कारण महिलाओं की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि पूजा के समय घरेलू जरूरतों और अन्य खर्चों के लिए उन्हें अपनी बचत की जरूरत है, लेकिन जमा रकम वापस नहीं मिलने से परिवारों के सामने मुश्किल पैदा हो गई है।
फिलहाल शिकायत के आधार पर पुलिस से पूरे मामले की जांच और जमा रकम से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की मांग की गई है। मामले में आरोपों की वास्तविकता, कुल जमा राशि और कितनी महिलाओं की रकम प्रभावित हुई है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मुंबई के कांदिवली में इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने से 13 नाबालिग मुक्त कराए गए। पुलिस के मुताबिक बच्चे 9-10 घंटे काम करते और वहीं रहते थे। जांच जारी है।
मुंबई: कांदिवली पश्चिम में चारकोप पुलिस ने बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इमिटेशन ज्वेलरी बनाने वाले एक कारखाने से 13 नाबालिगों को मुक्त कराया है। बच्चों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, इन बच्चों से कथित तौर पर रोजाना 9 से 10 घंटे तक काम कराया जाता था और उन्हें उचित मजदूरी भी नहीं दी जाती थी।
कार्रवाई चारकोप इंडस्ट्रियल एरिया के ‘जहारा फैशन एरा’ नमक इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने में की गई। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी उत्तर परिमंडल-2 के पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे और चारकोप पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश बळवंतराव की ओर से दी गई।
कारखाने में काम के साथ रह भी रहे थे बच्चे
पुलिस के मुताबिक, कारखाने में नाबालिगों से इमिटेशन ज्वेलरी और चूड़ियां बनाने का काम कराया जा रहा था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बच्चे जिस जगह काम करते थे, वहीं पर रह रहे थे।
मुक्त कराए गए सभी 13 बच्चे पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, कारखाने के मालिक और संचालक बच्चों की उम्र साबित करने वाले जरूरी दस्तावेज भी पेश नहीं कर सके।
मालिक और संचालक हिरासत में
पुलिस ने कारखाने के मालिक अंकित कुमार महेंद्र रावल और संचालक समीनुर मोतियार रहमान शेख को हिरासत में लिया है। दोनों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नाबालिगों को कारखाने में काम पर रखने की प्रक्रिया क्या थी और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
पश्चिम बंगाल से मुंबई कौन लेकर आया?
मामले में पुलिस की जांच अब इस सवाल पर भी केंद्रित है कि पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों से ये बच्चे मुंबई के कांदिवली तक कैसे पहुंचे।
पुलिस यह पता कर रही है कि क्या बच्चों को काम दिलाने के नाम पर मुंबई लाया गया था, क्या किसी बिचौलिए की भूमिका थी और उन्हें कारखाने तक पहुंचाने में किसकी मदद ली गई।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले के पीछे बाल श्रम से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। फिलहाल इस संबंध में जांच जारी है और पुलिस की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
13 नाबालिगों को संबंधित विभाग को सौंपा गया
कार्रवाई के बाद सभी 13 नाबालिगों को आगे की देखभाल और जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को सौंप दिया गया है।
अब बच्चों की उम्र, पहचान और परिवार से जुड़ी जानकारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उनके परिजनों से संपर्क और बच्चों को सुरक्षित तरीके से परिवार तक पहुंचाने को लेकर भी आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी संबंधित विभाग की ओर से आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
बाल श्रम कानून में क्या प्रावधान है?
बाल श्रम कानून के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष की उम्र के किशोरों को खतरनाक काम या प्रक्रिया में लगाने पर रोक है।
मुंबई से रेप के आरोपी सब-इंस्पेक्टर अजमल हक गिरफ्तार। सॉल्ट लेक गेस्ट हाउस केस में बिधाननगर पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया।
मुंबई: पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक में महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे सब-इंस्पेक्टर अजमल हक को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जाया गया है और अब उसे बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक इलाके में एक महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे पुलिस अधिकारी को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजमल हक के रूप में हुई है, जो बीरभूम जिले के नलहाटी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था।
पुलिस ने आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय अदालत में पेश किया। वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे कोलकाता ले गई है। अब आरोपी सब-इंस्पेक्टर को बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है।
सॉल्ट लेक के गेस्ट हाउस में रेप का आरोप
पुलिस के मुताबिक, मामला पिछले साल का बताया जा रहा है। महिला ने जुलाई में बिधाननगर ईस्ट थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सब-इंस्पेक्टर अजमल हक महिला को सॉल्ट लेक के सीएल ब्लॉक स्थित एक गेस्ट हाउस में लेकर गया था, जहां उसके साथ रेप किया गया।
शिकायत मिलने के बाद बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी पुलिस अधिकारी की तलाश की।
जमानत मिलने के बाद हो गया था फरार
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में आरोपी सब-इंस्पेक्टर को पहले जमानत मिल गई थी। इसके बाद जब बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने बीरभूम जिला पुलिस से आरोपी अधिकारी के संबंध में संपर्क किया, तो उसके गायब होने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी।
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी मुंबई में मौजूद है। सूचना के आधार पर बिधाननगर ईस्ट पुलिस की टीम ने कार्रवाई की और उसे मुंबई से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की परिस्थितियां क्या थीं और मामले से जुड़े कौन-कौन से सबूत उपलब्ध हैं। जांच के दौरान पुलिस आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच करेगी।
फिलहाल आरोपी पर लगाए गए रेप के आरोप जांच का विषय हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।
E Shram Card Benefits 2026: ₹2 lakh insurance, ₹3,000 pension, PM-JAY access, eligibility, claim process, payment status, and latest updates.
What Is the E Shram Card in 2026?
The E Shram Card is a national identity card launched by the Ministry of Labour and Employment for unorganised sector workers across India. It helps the government create a centralized database of labourers, gig workers, daily wage earners, construction workers, domestic workers, street vendors, agricultural workers, and platform workers.
The scheme operates through the official e-Shram Portal.
Every registered worker receives:
A 12-digit UAN (Universal Account Number)
Access to government welfare schemes
Accident insurance benefits
Social security support
Future DBT-linked scheme eligibility
As of 2026, more than 31 crore workers have already registered under the E Shram portal.
In 2026, the Indian government is focusing heavily on labour welfare digitisation. The E Shram database is becoming the foundation for future benefits including:
Health insurance
Pension programs
Skill development
Housing schemes
Emergency financial support
Gig worker welfare programs
Workers registered on the portal are expected to receive priority access whenever new welfare schemes are launched.
Workers can also retrieve the card using Aadhaar-linked verification.
Download by UAN Number
The UAN number can also be used for card retrieval.
How to Check E Shram Card Payment Status
Workers searching for payment updates should:
Method 1
Check linked bank account balance.
Method 2
Visit:
PFMS portal
State labour welfare websites
Method 3
Contact labour department helplines.
How to Check E Shram Card Balance
There is no separate “E Shram wallet balance.”
Workers should check:
DBT transactions
Bank SMS alerts
Passbook entries
E Shram Card New Updates 2026
Gig Workers Included
Platform workers including:
Ola drivers
Uber drivers
Swiggy delivery partners
Zomato riders
Amazon logistics workers
are receiving increased government focus in 2026.
PM-JAY Expansion
The government announced expanded healthcare access for workers under welfare integrations.
Digital Labour Database Expansion
The E Shram system is becoming India’s largest labour welfare database.
This may influence:
Employment programs
Insurance distribution
Emergency support systems
Skill development opportunities
State-Wise E Shram Benefits
Maharashtra
Workers in Maharashtra may receive additional labour welfare support through state labour boards.
Uttar Pradesh
Uttar Pradesh has previously announced welfare support for registered workers during emergencies.
Tamil Nadu
Tamil Nadu workers actively search for Tamil-language E Shram information due to strong labour participation.
West Bengal
West Bengal labour welfare systems may integrate with E Shram data in future phases.
Rajasthan
Rajasthan construction workers often use E Shram registration alongside labour board registration.
Common E Shram Problems and Solutions
OTP Not Received
Solutions
Wait for network refresh
Recheck Aadhaar-linked mobile number
Retry after 10 minutes
Aadhaar Mobile Number Not Linked
Workers must update mobile linkage through Aadhaar service centers.
Registration Rejected
Possible reasons:
Incorrect Aadhaar details
Duplicate registration
Wrong occupation data
Existing EPFO/ESIC records
UAN Number Not Generated
Usually caused by:
Server issues
Incomplete registration
Failed Aadhaar authentication
E Shram Card Helpline Number
Workers can contact:
14434
1800-889-6811
for official support.
Important Tips for E Shram Workers
Registration is completely free
Never pay agents large fees
Use only official portals
Keep Aadhaar and bank details updated
Avoid fake YouTube claims
Save UAN number safely
Frequently Asked Questions
What are the benefits of E Shram Card in 2026?
Workers receive accident insurance, pension access, welfare scheme integration, and future social security benefits.
Is E Shram Card registration free?
Yes. Registration is completely free through the official portal and CSC centers.
Does E Shram Card give monthly money?
No guaranteed monthly cash payment exists for all workers.
How much insurance does E Shram Card provide?
Up to ₹2 lakh accidental insurance coverage.
Can gig workers apply for E Shram Card?
Yes. Many platform workers are now eligible.
Can pregnant women apply for E Shram Card?
Yes, eligible women workers can register.
What documents are required?
Aadhaar card, mobile number, and bank details are required.
What is UAN in E Shram Card?
UAN stands for Universal Account Number — a unique 12-digit worker identification number.
How can I download my E Shram Card?
Visit the official portal and login using Aadhaar or mobile verification.
Is E Shram linked with Ayushman Bharat?
Government integration efforts are ongoing for eligible workers.
Conclusion
The E Shram Card has become one of India’s most important labour welfare initiatives. In 2026, the scheme is evolving beyond simple worker registration and moving toward a larger social security ecosystem for unorganised workers.
The biggest benefits include:
₹2 lakh accident insurance
Pension access through PM-SYM
Future welfare scheme eligibility
Health and housing integration opportunities
Government-recognised worker identity
However, workers must also understand the reality behind the scheme. The E Shram Card is not a guaranteed monthly cash payment program. Instead, it acts as a gateway to multiple welfare systems that may expand significantly in the coming years.
For workers in India’s unorganised sector, registering on the official portal is still one of the smartest steps toward future social security protection.
This article is published for educational and informational purposes only.
We are not affiliated with the Government of India or any government authority.
Readers are advised to verify official information through government portals before making decisions.
NEET Paper Leak मामले में CBI ने लातूर के RCC संचालक को गिरफ्तार किया। मोबाइल में पेपर मिलने से जांच में बड़ा खुलासा हुआ।
मुंबई: देशभर में चर्चा का विषय बने NEET UG Examination Paper Leak मामले में अब महाराष्ट्र का लातूर भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) ने लातूर के चर्चित ‘रेणुकाई करिअर सेंटर’ (RCC) के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगावकर को गिरफ्तार किया है।
CBI की शुरुआती जांच में सामने आया है कि लीक हुआ NEET पेपर सीधे उनके मोबाइल फोन में मिला था। इसी खुलासे के बाद पूरे शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।
NEET Paper Leak में कैसे हुआ बड़ा खुलासा?
CBI अधिकारियों के अनुसार, शिवराज मोटेगावकर को 17 मई 2026 की शाम पुणे से गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी NEET पेपर लीक करने वाले संगठित नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था।
जांच में जो बातें सामने आईं, वे बेहद गंभीर मानी जा रही हैं:
परीक्षा से पहले ही प्रश्न और उत्तर हासिल किए गए
23 अप्रैल 2026 को पेपर आरोपी तक पहुंच चुका था
मोबाइल फोन में लीक प्रश्नों के डिजिटल सबूत मिले
परीक्षा के बाद डेटा डिलीट करने की कोशिश की गई
लाभार्थी छात्रों के नाम बताने से आरोपी ने कथित तौर पर बचने की कोशिश की
CBI ने 14 मई को लातूर स्थित आरोपी के घर पर छापा मारा था। सूत्रों के मुताबिक मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में NEET UG परीक्षा के प्रश्न और संबंधित सामग्री बरामद हुई।
जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल ट्रेल इस पूरे नेटवर्क की सबसे बड़ी कड़ी साबित हो सकती है। फिलहाल मोबाइल डेटा रिकवरी और चैट हिस्ट्री की जांच जारी है।
कौन हैं शिवराज मोटेगावकर?
शिवराज रघुनाथ मोटेगावकर लातूर के शिक्षा क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम माने जाते हैं। वे Renukai Career Center (RCC) से जुड़े हुए थे।
लातूर लंबे समय से मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग हब के रूप में जाना जाता है। ऐसे में इस मामले ने राज्य के कोचिंग सेक्टर पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
CBI ने आरोपी पर कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
भारतीय न्याय संहिता (BNS)
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act)
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी पर:
धोखाधड़ी
आपराधिक साजिश
राष्ट्रीय परीक्षा में गड़बड़ी
जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
क्या छात्रों तक पहुंचा था लीक पेपर?
CBI को शक है कि लीक प्रश्न कई छात्रों और अन्य लोगों तक पहुंचाए गए थे। हालांकि अब तक लाभार्थियों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि:
कितने छात्रों तक पेपर पहुंचा
इसके बदले कितने पैसे लिए गए
क्या दूसरे राज्यों तक भी नेटवर्क फैला था
Maharashtra Coaching Network भी जांच के दायरे में
इस मामले के बाद महाराष्ट्र के कई निजी कोचिंग नेटवर्क भी जांच एजेंसियों की नजर में आ गए हैं। विशेष रूप से मेडिकल एंट्रेंस कोचिंग से जुड़े संस्थानों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
मुंबई और पुणे में भी कुछ डिजिटल कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं।
NEET देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। ऐसे में पेपर लीक की खबर ने लाखों छात्रों और अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है।
सोशल मीडिया पर कई लोग परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
FAQ
Q1. NEET Paper Leak मामले में किसे गिरफ्तार किया गया?
CBI ने लातूर के RCC संचालक शिवराज मोटेगावकर को गिरफ्तार किया है।
Q2. जांच में सबसे बड़ा सबूत क्या मिला?
आरोपी के मोबाइल फोन में कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र से जुड़े डिजिटल सबूत मिले।
Q3. आरोपी को कहां से गिरफ्तार किया गया?
उन्हें पुणे से गिरफ्तार किया गया।
Q4. क्या छात्रों को भी पेपर पहुंचाया गया था?
CBI को संदेह है कि पेपर कई छात्रों तक पहुंचाया गया था, जांच जारी है।
Q5. इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
पूरे मामले की जांच CBI कर रही है।
NEET Paper Leak मामले में लातूर कनेक्शन सामने आने के बाद जांच अब और गंभीर हो गई है। मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों ने जांच एजेंसियों को बड़ा आधार दिया है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल देशभर के छात्र और अभिभावक इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
Murshidabad Blast Case में मुंबई क्राइम ब्रांच ने बोरिवली स्टेशन से दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया। West Bengal Police को सौंपा गया।
मुंबई: Mumbai Crime Branch ने पश्चिम बंगाल के चर्चित Murshidabad Blast Case में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो फरार आरोपियों को मुंबई के Borivali Railway Station इलाके से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हुए बम हमले के बाद फरार चल रहे थे।
मुंबई पुलिस को यह सफलता तब मिली जब West Bengal Police ने इन आरोपियों के मुंबई भागने की खुफिया जानकारी साझा की। इसके बाद Crime Intelligence Unit (CIU) ने कई दिनों तक निगरानी कर दोनों को जाल बिछाकर पकड़ा।
Borivali Station के पास कैसे पकड़े गए आरोपी?
मुंबई क्राइम ब्रांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान:
रॉकी खान (24) — पेशे से ड्राइवर
शाहादत सरकार (35) — मजदूर
के रूप में हुई है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों आरोपी Gitanjali Express से मुंबई पहुंचे थे। मोबाइल लोकेशन और तकनीकी निगरानी के आधार पर CIU टीम ने उनकी लोकेशन ट्रैक की।
जैसे ही दोनों आरोपी बोरिवली स्टेशन के आसपास पहुंचे, पुलिस टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
Murshidabad Blast Case क्या है?
यह मामला पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेरहामपुर इलाके में एक आश्रम के बाहर हुए बम हमले से जुड़ा है। शिकायतकर्ता पशुपतिनाथ साहा ने आरोप लगाया कि:
अली हुसैन उर्फ ‘लादेन’
हसन शेख
और अन्य सहयोगियों
ने शहर में बम रखने की साजिश रची थी।
पुलिस के मुताबिक 12 मई को आश्रम के पास लगे दुर्गा मंदिर के पोस्टर फाड़े गए थे। इसके बाद 13 मई की रात आरोपियों ने कथित तौर पर ‘सॉकेट बम’ फेंके, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
शिकायत के अनुसार 14 मई की सुबह आरोपी दोपहिया वाहन से फिर इलाके में पहुंचे और शिकायतकर्ता को धमकाया कि यदि पुलिस में रिपोर्ट की गई तो इससे भी बड़ा धमाका किया जाएगा।
इसके बाद मामला दर्ज होते ही आरोपी राज्य छोड़कर फरार हो गए।
Mumbai Crime Branch को कैसे मिला इनपुट?
West Bengal Police ने मुंबई पुलिस को गोपनीय जानकारी दी थी कि आरोपी मुंबई भाग सकते हैं। इसके बाद मुंबई पुलिस ने रेलवे स्टेशन, लॉज और संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी।
मुंबई क्राइम ब्रांच की Crime Intelligence Unit ने:
Transit Remand के बाद Bengal Police को सौंपे गए आरोपी
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मुंबई पुलिस ने दो दिन का ट्रांजिट रिमांड लिया।
इसके बाद दोनों आरोपियों को आगे की जांच के लिए West Bengal Police को सौंप दिया गया।
मुख्य आरोपी की तलाश जारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले का मुख्य आरोपी अभी फरार है। पश्चिम बंगाल पुलिस कई स्थानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को संवेदनशील मान रही हैं क्योंकि इसमें कथित तौर पर विस्फोटक सामग्री और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की आशंका जुड़ी हुई है।
Mumbai Police की सतर्कता से टला बड़ा जोखिम
मुंबई पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते सूचना पर कार्रवाई नहीं की जाती तो आरोपी लंबे समय तक फरार रह सकते थे।
मुंबई जैसे बड़े महानगर में बाहरी राज्यों से आने वाले संदिग्धों की पहचान और tracking सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती है।
FAQ
Q1. Murshidabad Blast Case में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?
मुंबई क्राइम ब्रांच ने दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
Q2. आरोपियों को कहां से पकड़ा गया?
दोनों आरोपियों को मुंबई के बोरिवली रेलवे स्टेशन इलाके से पकड़ा गया।
Q3. मामला किस राज्य से जुड़ा है?
यह मामला पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से जुड़ा है।
Q4. आरोपियों पर क्या आरोप हैं?
आरोप है कि उन्होंने आश्रम के बाहर बम फेंके और शिकायतकर्ता को धमकी दी।
Q5. क्या मुख्य आरोपी गिरफ्तार हुआ?
नहीं, मुख्य आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है।
मुर्शिदाबाद ब्लास्ट केस में मुंबई क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस गिरफ्तारी से जांच एजेंसियों को मामले की कड़ियां जोड़ने में मदद मिलेगी। फिलहाल मुख्य आरोपी की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
Did all Muslims vote for Pakistan in 1946? जानिए पूरा सच—British India, limited voting rights, Muslim League, Cabinet Mission Plan और Partition की असली कहानी।
1946 Elections, Pakistan Vote, और Muslim League—को दशकों से एक बड़ा नैरेटिव बनाया गया कि “मुसलमानों ने पाकिस्तान बनवाया।” लेकिन जब हम पूरे historical context को देखते हैं, तो कहानी एकदम अलग निकलती है। सच ये है कि उस समय की voting system, political agenda, और constitutional negotiations को समझे बिना ये दावा करना अधूरा और भ्रामक है। आइए, इस पूरे मुद्दे को उसी अंदाज़ में समझते हैं, जैसे आपने सवाल उठाया है—बिना कुछ छोड़े, पूरे विस्तार के साथ।
क्या हुआ? (1946 Elections का पूरा घटनाक्रम)
1946 में हुए चुनाव आज के भारत जैसे नहीं थे। उस समय देश की भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति पूरी तरह अलग थी।
उस समय भारत दो हिस्सों में बंटा हुआ था:
11 British Provinces (ब्रिटिश प्रांत)
लगभग 565 Princely States (रियासतें)
चुनाव सिर्फ इन 11 प्रांतों में हुए थे, जिनमें शामिल थे:
बंगाल
पंजाब
संयुक्त प्रांत (UP)
बिहार
बॉम्बे प्रांत
मद्रास
मध्य प्रांत और बरार
असम
उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP)
सिंध
उड़ीसा
जबकि 565 रियासतें—जैसे हैदराबाद, जम्मू-कश्मीर, जूनागढ़, भोपाल, त्रावणकोर, मैसूर, बड़ोदा—इनमें चुनाव हुए ही नहीं।
मतलब साफ है: इन रियासतों में रहने वाले 100% मुसलमानों का 1946 चुनाव से कोई लेना-देना नहीं था।
कहाँ हुआ? (Election Coverage Reality)
चुनाव का दायरा बेहद सीमित था पूरे भारत की बड़ी आबादी इस प्रक्रिया से बाहर थी
इसलिए यह कहना कि “पूरे भारत के मुसलमानों ने वोट दिया” पूरी तरह गलत और भ्रामक है
किसे मिला वोट देने का अधिकार? (Voting Rights Reality)
आज की तरह उस समय हर व्यक्ति को वोट देने का अधिकार नहीं था।
उस समय universal adult franchise लागू नहीं था
वोट देने के लिए जरूरी शर्तें थीं:
जमीन या संपत्ति
टैक्स देना
शिक्षा
इतिहासकारों के अनुसार: केवल 10-12% आबादी को ही वोट देने का अधिकार था
यानी:
100 में से सिर्फ 10 लोग वोट दे सकते थे
बाकी 90% (मुसलमान समेत) वोट नहीं दे सकते थे
इसलिए यह कहना कि “मुसलमानों ने वोट दिया”— अधिकांश मुसलमानों ने तो वोट ही नहीं दिया क्योंकि अधिकार ही नहीं था
क्या सभी मुसलमान मुस्लिम लीग के साथ थे? (Ground Reality of Muslim Politics)
यह भी एक बड़ा भ्रम है कि सभी मुसलमान Muslim League के साथ थे
इसके उलट, कई बड़े और प्रभावशाली संगठन लीग के खिलाफ थे:
जमीयत उलेमा-ए-हिंद
मजलिस-ए-अहरार-ए-इस्लाम
ऑल इंडिया आज़ाद मुस्लिम कॉन्फ्रेंस
ये सभी संगठन: पाकिस्तान के विचार के विरोध में थे एक संयुक्त भारत के पक्षधर थे
यानी मुस्लिम समाज के भीतर भी गहरा मतभेद था
चुनाव का असली मतलब क्या था? (Election Narrative vs Reality)
यह सच है कि मुस्लिम रिजर्व सीटों पर Muslim League को भारी सफलता मिली
लेकिन: इसका मतलब यह नहीं कि हर वोट “पाकिस्तान” के लिए था
असल मुद्दा था:
आज़ाद भारत में मुसलमानों की स्थिति क्या होगी?
उन्हें बराबरी का दर्जा मिलेगा या नहीं?
लीग का चुनावी नारा था: “मुसलमान एक अलग क़ौम हैं—उन्हें बराबरी और सुरक्षा चाहिए, वरना पाकिस्तान एक विकल्प है।”
यानी: पाकिस्तान मुद्दा था लेकिन यह अंतिम समाधान के रूप में पेश किया गया था, न कि तत्काल लक्ष्य
जिन्ना का असली उद्देश्य (Jinnah’s Strategy Explained)
मोहम्मद अली जिन्ना का मुख्य मकसद था:
यह साबित करना कि मुसलमानों का प्रतिनिधित्व सिर्फ मुस्लिम लीग करती है कांग्रेस मुसलमानों की तरफ से बोलने का दावा न करे
क्योंकि कांग्रेस कहती थी: “हम सभी भारतीयों की पार्टी हैं”
जिन्ना चाहते थे: भविष्य की संवैधानिक बातचीत में मुसलमानों की हिस्सेदारी तय करने का अधिकार लीग के पास हो
उस समय का भाव यही था: “Vote हमारा, Representation भी हमारा”
लोगों पर असर (Public Sentiment & Social Impact)
जिन मुसलमानों को वोट का अधिकार था, उन्होंने लीग को इसलिए चुना:
minority insecurity
political representation
भविष्य की सुरक्षा
यह भावना आज भी कई वंचित समुदायों में देखी जाती है
सरकारी अपडेट (Cabinet Mission Plan – पूरा सच)
1946 में ब्रिटिश सरकार ने Cabinet Mission Plan पेश किया
मकसद: भारत को एक ही देश बनाए रखना प्रांतों को अधिक स्वायत्तता देना
Plan की मुख्य बातें:
देश को 3 ग्रुप में बांटना:
Group A – हिंदू बहुल
Group B – पश्चिम के मुस्लिम बहुल (Punjab, Sindh, NWFP)
Group C – पूर्व के मुस्लिम बहुल (Bengal, Assam)
केंद्र सरकार के पास सिर्फ 3 विषय:
रक्षा
विदेश नीति
संचार
बाकी सभी अधिकार प्रांतों के पास
यह मॉडल जिन्ना के लिए परफेक्ट था मुसलमानों के अधिकार भी सुरक्षित और देश भी एकजुट रहता
इसलिए: जिन्ना ने इस प्लान को स्वीकार कर लिया
आगे क्या हुआ? (Turning Point Explained)
जुलाई 1946 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने बयान दिया: “Constituent Assembly किसी भी योजना से बंधी नहीं होगी”
इससे मुस्लिम लीग को डर लगा:
कांग्रेस सत्ता में आकर प्लान बदल देगी
मजबूत केंद्र बना देगी
मुस्लिम बहुल प्रांतों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी
इसे आज के संदर्भ में ऐसे समझिए: जैसे कश्मीर में autonomy का मुद्दा
इसके बाद: जिन्ना ने Cabinet Mission Plan से समर्थन वापस लिया राजनीतिक टकराव बढ़ गया
और यही घटनाएं आगे चलकर 1947 के Partition तक पहुंचीं
Final Truth (साफ-साफ निष्कर्ष)
565 रियासतों में चुनाव नहीं हुए 90% लोगों को वोट देने का अधिकार ही नहीं था सभी मुसलमानों ने वोट नहीं दिया सभी मुसलमान पाकिस्तान के समर्थक नहीं थे मुस्लिम लीग की जीत = पाकिस्तान के लिए सर्वसम्मति नहीं
और सबसे अहम: जिन्ना ने पहले अखंड भारत का विकल्प स्वीकार किया था
FAQ
Q1: क्या 1946 में सभी मुसलमानों ने पाकिस्तान के लिए वोट दिया था?
नहीं, अधिकांश के पास वोट का अधिकार ही नहीं था।
Q2: कितने प्रतिशत लोग वोट दे सकते थे?
लगभग 10-12%।
Q3: क्या मुस्लिम लीग ही सभी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करती थी?
नहीं, कई बड़े संगठन इसके खिलाफ थे।
Q4: क्या पाकिस्तान पहले से तय था?
नहीं, Cabinet Mission Plan के जरिए भारत को एक रखने की कोशिश हुई थी।
इतिहास को आधा पढ़ना सबसे बड़ा भ्रम पैदा करता है। “मुसलमानों ने पाकिस्तान बनवाया”—ये लाइन सुनने में आसान है, लेकिन सच्चाई बेहद जटिल है।
असलियत ये है:
ज्यादातर लोग वोट ही नहीं दे सके
मुसलमानों के अंदर भी मतभेद थे
और राजनीति अधिकार और सुरक्षा की थी, न कि सिर्फ बंटवारे की
इसलिए जरूरी है कि हम इतिहास को facts के साथ समझें—न कि assumptions के आधार पर।
IPL 2026 में Mumbai Indians ने Kolkata Knight Riders को 6 विकेट से हराकर 13 साल बाद सीजन का पहला मैच जीता। Rohit Sharma और Ryan Rickelton की फिफ्टी ने मैच पलट दिया।
मुंबई: Indian Premier League 2026 के दूसरे मुकाबले में Mumbai Indians ने धमाकेदार अंदाज में Kolkata Knight Riders को 6 विकेट से हराकर 13 साल बाद सीजन का पहला मैच जीत लिया। Wankhede Stadium में खेले गए इस हाई-स्कोरिंग मैच में Rohit Sharma और Ryan Rickelton की जबरदस्त बल्लेबाजी ने फैंस का दिल जीत लिया।
🔥 Rohit Sharma का Vintage अंदाज, रिकॉर्ड तोड़ फिफ्टी
Rohit Sharma ने पुराने दिनों की याद दिलाते हुए 38 गेंदों में 78 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली। उन्होंने सिर्फ 23 गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी की, जो IPL में उनकी सबसे तेज फिफ्टी है। यह Rohit की IPL में 50वीं फिफ्टी भी रही, जिससे वह Virat Kohli, David Warner और Shikhar Dhawan जैसे दिग्गजों की लिस्ट में शामिल हो गए।
💥 Ryan Rickelton का तूफान, मैच एकतरफा
Ryan Rickelton ने भी Rohit का पूरा साथ दिया और 43 गेंदों में 81 रन ठोक दिए। उन्होंने 24 गेंदों में फिफ्टी लगाई। दोनों के बीच 72 गेंदों में 148 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप हुई, जिसने मैच पूरी तरह MI के पक्ष में कर दिया।
⚡ 221 रन का टारगेट, MI ने किया आसान
221 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए Mumbai Indians ने 19.1 ओवर में 224/4 बनाकर मैच जीत लिया। Rohit के आउट होने के बाद Suryakumar Yadav (16 रन, 8 गेंद) ने तेज योगदान दिया, जबकि कप्तान Hardik Pandya (18* रन) ने आखिर में चौका मारकर जीत दिलाई। Rickelton 81 रन बनाकर रन आउट हुए।
🎯 Shardul Thakur की गेंदबाजी, KKR को झटके
Shardul Thakur ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3/39 के आंकड़े लिए और KKR को शुरुआत में झटके दिए। उन्होंने अपने पहले तीन ओवर में एक-एक विकेट लेकर मैच में MI की वापसी कराई।
🚀 KKR की धमाकेदार शुरुआत, Rahane-Raghuvanshi का जलवा
Ajinkya Rahane (67 रन) और Angkrish Raghuvanshi (51 रन) ने KKR को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। Finn Allen (37 रन, 17 गेंद) ने भी तेज शुरुआत दी। Powerplay में KKR ने 78/1 बनाए और 23 गेंदों में 50 रन पूरे किए।
🔥 Middle Overs में गिरा KKR का Momentum
Cameron Green (18 रन) जल्दी आउट हो गए। Rahane ने 27 गेंदों में फिफ्टी लगाई, लेकिन Thakur ने उन्हें आउट कर KKR को झटका दिया। आखिर में Rinku Singh (33* रन) ने पारी संभाली और टीम को 220/4 तक पहुंचाया।
IPL 2026 Full Guide in Hindi – Schedule, Teams, Squads, Venues, Match Timings, Tickets, Live Streaming, TV Channels, Format, Groups & More. Complete IPL 2026 details.
मुंबई: अरे भाई, क्रिकेट का सबसे बड़ा त्योहार फिर से आ गया! IPL 2026 आज 28 मार्च से बेंगलुरु के M Chinnaswamy Stadium में शुरू हो रहा है। पहला मुकाबला defending champion RCB vs SRH के बीच रात 7:30 बजे खेला जाएगा। इस बार पूरा सीजन 31 मई तक चलेगा और कुल 74 मैच खेले जाएंगे।
IPL 2026 Dates & Schedule Overview
Start Date: 28 March 2026
Final: 31 May 2026 (Bengaluru)
Total Matches: 74
League Matches: 70 (28 मार्च – 24 मई)
Playoffs: Qualifier 1, Eliminator, Qualifier 2, Final (dates pending)
Match Timing (India Time)
Afternoon Match: 3:30 PM IST
Evening Match: 7:30 PM IST
IPL 2026 Tickets कैसे खरीदें?
टिकट लेने के लिए ये प्लेटफॉर्म यूज कर सकते हो:
BookMyShow
District by Zomato
Team Official Websites & Apps
Tip: मुंबई में Wankhede मैच के टिकट जल्दी sold out हो जाते हैं, जल्दी बुक करो!
IPL 2026 Format – कैसे चलेगा टूर्नामेंट
10 टीम्स, हर टीम 14 मैच खेलेगी
Top 4 टीम्स playoffs में जाएंगी
Top 2 → Qualifier 1
3rd vs 4th → Eliminator
Winner Eliminator vs Loser Q1 → Qualifier 2
Winner Q2 → Final
IPL 2026 Groups (नया ट्विस्ट)
Group A: CSK, KKR, RR, RCB, Punjab Kings
Group B: MI, SRH, GT, DC, LSG
इस बार same group एक बार और दूसरे group दो बार भिड़ेंगे – नया format!