UK में Operation Reckoning के तहत 700 से ज्यादा मोबाइल दुकानों पर कार्रवाई हुई। पुलिस ने चोरी के फोन रोकने के लिए Apple, Google और Samsung से मदद मांगी है।
United Kingdom: UK में चोरी के मोबाइल फोन के खिलाफ अब सिर्फ चोरों को पकड़ने पर नहीं, बल्कि चोरी के फोन की पूरी resale chain को खत्म करने पर फोकस किया जा रहा है। Operation Reckoning के तहत सितंबर में England और Wales की 17 पुलिस फोर्सेज ने second-hand mobile phone market को target किया। इस दौरान 700 से ज्यादा दुकानों पर visits की गईं, जबकि Metropolitan Police की कार्रवाई में 705 arrests और 281 suspected stolen phones बरामद किए गए।
पुलिस अब mobile phone manufacturers से ऐसी technology अपनाने की मांग कर रही है, जिससे चोरी के बाद किसी फोन को reset, activate या दोबारा बेच पाना बेहद मुश्किल हो जाए। इसका सीधा मकसद चोरी के मोबाइल की resale value खत्म करना है, ताकि अपराधियों के लिए फोन चोरी करने से कुछ भी फायदा हासिल न हो।
चोरी के फोन का पूरा नेटवर्क निशाने पर
मोबाइल चोरी केवल सड़क पर फोन छीनने तक सीमित नहीं है। चोरी किए गए फोन robbery, burglary, pickpocketing और delivery networks से चोरी के बाद handlers, second-hand market और international export networks तक पहुंच रहा है।
इस पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई के दौरान second-hand retailers को ID checks, IMEI verification और खरीदारी के proper records रखने की सलाह दी गई। संदिग्ध फोन या संदिग्ध activity की जानकारी पुलिस को देने के लिए भी retailers को कहा गया।
Metropolitan Police की कार्रवाई में 51 warrants execute किए गए और 281 suspected stolen mobile phones recover हुए। कार्रवाई के दौरान cash, drugs, illegal e-bikes, counterfeit सामान और tobacco भी बरामद किया गया।
40 हजार चोरी के फोन China तक पहुंचाने वाला नेटवर्क
चोरी के मोबाइल के international कारोबार का बड़ा उदाहरण London से सामने आए एक organised network का है। जांच में करीब 40,000 stolen phones को UK से China भेजे जाने की कड़ी सामने आई थी।
इस नेटवर्क से जुड़े तीन लोगों को कुल 25 साल की जेल की सजा सुनाई गई। जांच के दौरान 5,000 से ज्यादा फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब £5.5 million बताई गई। इससे साफ होता है कि चोरी का मोबाइल सिर्फ local resale का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे international organised crime network भी काम कर रहा है।
London में मोबाइल चोरी में करीब 19% की कमी
सख्त कार्रवाई के बीच London में phone theft के आंकड़ों में भी गिरावट दर्ज हुई है। जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान 39,793 phone theft और robbery cases दर्ज हुए, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह संख्या 49,136 थी। यानी करीब 9,343 कम मामले दर्ज हुए और गिरावट लगभग 19 प्रतिशत रही।
अगस्त 2026 तक 12 महीने की अवधि में भी London में street phone theft पिछले साल की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत कम रही।
हालांकि, मोबाइल चोरी की समस्या खत्म नहीं हुई है। पुलिस का फोकस अब चोरी के बाद फोन की पहचान, blocking और resale को मुश्किल बनाने पर है।
Apple, Google और Samsung से बदलाव की मांग
मोबाइल चोरी रोकने की strategy में manufacturers की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है। पुलिस Apple, Google और Samsung से ऐसी security व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रही है, जिससे चोरी हुआ फोन दोबारा इस्तेमाल करना आसान न रहे।
Apple के साथ stolen-device identifiers को लेकर intelligence sharing शुरू की गई है। इससे चोरी के फोन दोबारा activate या network पर दिखाई देने पर उनकी पहचान करने में मदद मिल सकती है। Samsung और Google की ओर से भी security changes पर काम किया जा रहा है।
पुलिस visible IMEI जैसी व्यवस्था पर भी जोर दे रही है, ताकि चोरी के फोन की पहचान और verification को आसान बनाया जा सके।
IMEI नंबर क्यों जरूरी है?
IMEI मोबाइल की unique 15-digit पहचान संख्या होती है। फोन चोरी होने की स्थिति में यह नंबर device को identify और block कराने में मदद कर सकता है।
अपना IMEI नंबर *#06# dial करके, phone settings में या original box पर देखा जा सकता है। इसे सुरक्षित जगह पर लिखकर रखना जरूरी है, क्योंकि फोन चोरी होने के बाद यही जानकारी पुलिस और network provider के लिए उपयोगी हो सकती है।
Second-hand phone खरीदने वालों के लिए भी IMEI verification महत्वपूर्ण है। बहुत सस्ता या संदिग्ध source से मिला फोन खरीदने से पहले उसकी device identity और ownership की जांच करना जरूरी है।
फोन secure होने पर criminals का नया तरीका
चोरी के मोबाइल को reset और reuse करना मुश्किल होने के साथ अपराधियों का तरीका भी बदल रहा है। अब चोरी के बाद victim को social engineering के जरिए target करने का खतरा बढ़ रहा है।
अपराधी दूसरे device या किसी trusted organisation का नाम इस्तेमाल करके victim से password, account details या दूसरी sensitive information हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। कुछ मामलों में धमकी या दबाव का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
इसलिए फोन चोरी होने के बाद खतरा सिर्फ handset की कीमत तक सीमित नहीं रहता। Banking apps, email, social media accounts, personal documents और दूसरे financial accounts भी risk में आ सकते हैं।
फोन चोरी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
फोन चोरी होने पर सबसे पहले mobile network provider को जानकारी देकर SIM और device को block कराने की कोशिश करनी चाहिए। फोन में remote lock या Lost Mode उपलब्ध है तो उसे तुरंत activate करना चाहिए।
Bank और financial service providers को भी सूचना देना जरूरी है। इसके बाद महत्वपूर्ण passwords बदलने चाहिए और अपने accounts में किसी suspicious activity की जांच करनी चाहिए। पुलिस को complaint देते समय IMEI number उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
Emergency की स्थिति में 999 और non-emergency crime या suspicious activity के लिए 101 का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अब अगला फोकस क्या होगा?
मोबाइल चोरी के खिलाफ यह कार्रवाई अब street-level arrests से आगे बढ़कर पूरे stolen-device market को target कर रही है। Police, second-hand retailers, technology companies और अन्य partners के बीच information sharing को मजबूत करना इसका अहम हिस्सा है।
2026 के Crime and Policing Act के तहत electronically tracked stolen goods से जुड़े कुछ मामलों में police powers को भी मजबूत किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में कार्रवाई को तेज करना है, जहां चोरी के सामान को जल्दी हटाए जाने या छिपाए जाने का खतरा हो।
आगे की चुनौती यह होगी कि चोरी किए गए फोन को सिर्फ UK में नहीं, बल्कि international resale market में भी बेकार बनाया जाए। अगर stolen device की reset, reactivation और resale value लगातार घटती है, तो पुलिस की रणनीति का सबसे बड़ा लक्ष्य पूरा हो सकता है—मोबाइल चोरी को अपराधियों के लिए कम फायदे वाला बनाना।
