महाराष्ट्र में खिलाड़ियों के 5% नौकरी आरक्षण की नई नीति मंजूर, पुराने प्रमाणपत्रों का 3 महीने में सत्यापन जरूरी; जानिए किसे मिलेगा लाभ।
मुंबई: महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बड़ा फैसला हुआ है। राज्य मंत्रिमंडल ने सरकारी, अर्ध-सरकारी और अन्य पात्र संस्थाओं में खिलाड़ियों के लिए लागू 5% नौकरी आरक्षण की संशोधित नीति को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव यह है कि आरक्षण का लाभ लेने वाले खिलाड़ियों को अपने Sports Certificate की वैधता का सत्यापन तीन महीने के भीतर कराना होगा।
यह तीन महीने की समयसीमा नए संशोधित शासन निर्णय (GR) के जारी होने की तारीख से लागू होगी। सरकार ने Sports Quota से जुड़े पहले के सभी शासन निर्णयों को रद्द कर एक एकीकृत नीति लागू करने का फैसला किया है। नया GR जल्द जारी किया जाएगा।
5% Sports Quota किन नौकरियों में लागू होगा?
संशोधित नीति के तहत यह आरक्षण मंत्रालयीन विभागों और उनके अधीन सरकारी कार्यालयों के साथ जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, महानगरपालिका, सरकारी उपक्रम, मंडल, महामंडल, विश्वविद्यालय, सरकारी अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान, आश्रमशाला, सहकारी संस्थाओं और सरकारी निधि अथवा अनुदान प्राप्त अन्य पात्र संस्थाओं में सीधी भर्ती के पदों पर लागू रहेगा।
इसमें समूह-अ, समूह-ब, समूह-क और समूह-ड के पद शामिल होंगे।
महाराष्ट्र में 5% Sports Quota की व्यवस्था 30 अप्रैल 2005 से लागू है। क्रीड़ा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 4,949 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में इसका लाभ मिल चुका है।
किस खिलाड़ी को किस पद के लिए पात्रता मिलेगी?
नई नीति में खेल उपलब्धि और प्रतियोगिता के स्तर के आधार पर अलग-अलग समूहों के लिए पात्रता तय की गई है।
समूह-अ: ओलंपिक, एशियन गेम्स, वरिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप/कप, कॉमनवेल्थ गेम्स, टेनिस ग्रैंड स्लैम, ग्रैंडमास्टर स्तर की शतरंज प्रतियोगिताओं और पैरालंपिक सहित अधिकृत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त खिलाड़ी।
समूह-ब राजपत्रित: युवा/कनिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, यूथ ओलंपिक तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय और पैरा प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।
समूह-ब अराजपत्रित: नेशनल गेम्स, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, राष्ट्रीय फेडरेशन कप, पैरा नेशनल गेम्स और राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।
समूह-क: खेलो इंडिया, अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय, राज्य स्तरीय वरिष्ठ/युवा/कनिष्ठ, स्कूल, अंतर-विश्वविद्यालय और पैरा खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।
समूह-ड: निर्धारित खेल योग्यता रखने वाले खिलाड़ी अथवा वरिष्ठ वर्ग की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता, राष्ट्रीय चैंपियनशिप और वरिष्ठ पैरा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ी।
क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो और शतरंज भी पात्र खेलों में
नई नीति में खेलों की पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। 2005 के बाद लगातार तीन ओलंपिक में शामिल खेलों के साथ क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो, शतरंज और मल्लखंब को भी शामिल किया गया है।
ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, पैरा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन ओलंपिक वाली शर्त लागू नहीं होगी।
पात्र खेलों में एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, रोइंग, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, टेनिस, गोल्फ, घुड़सवारी, सेलिंग, स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग और अन्य निर्धारित खेल भी शामिल हैं।
पुराने Sports Certificate वालों के लिए क्या बदलेगा?
नई नीति का यह हिस्सा हजारों खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। पुराने शासन निर्णयों के तहत Sports Quota के पात्र खिलाड़ियों को भी नए GR की तारीख से तीन महीने के भीतर अपने Sports Certificate का verification कराना होगा।
यानी केवल पहले से जारी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसकी वैधता की पुष्टि कराना जरूरी होगा।
‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ से होगी डिजिटल जांच
सरकार Sports Certificate verification के लिए ‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ की डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है। प्रतियोगिता समाप्त होने के सात दिनों के भीतर परिणामों को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ upload करना अनिवार्य होगा।
Blockchain technology के जरिए रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और automated cryptographic hash के माध्यम से उसकी authenticity जांचने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी और छेड़छाड़ किए गए खेल प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना है।
5% आरक्षण का उद्देश्य क्या है?
सरकार के मुताबिक इस नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी रोजगार में अवसर देना और उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मजबूत करना है।
Sports Quota को Mission Lakshyavedh जैसी खेल प्रोत्साहन पहलों के साथ देखने पर इसका व्यापक उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर training और competition के साथ भविष्य की employment security उपलब्ध कराना भी है।
महाराष्ट्र कैबिनेट के अन्य फैसले
PRAGATI Health Project
सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए 2026 से 2031 तक PRAGATI Project लागू करने को मंजूरी दी गई है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹4,250 करोड़ है, जिसमें ₹2,975 करोड़ Asian Development Bank loan और ₹1,275 करोड़ राज्य का हिस्सा होगा।
इसके तहत कोल्हापुर और नांदेड में 500-500 बेड, नागपुर और लातूर में 300-300 बेड तथा पुणे में 200 बेड का विशेष रेफरल अस्पताल प्रस्तावित है। कुल 2,430 पद भी बनाए जाएंगे।
Hyosung India को Capital Grant
छत्रपति संभाजीनगर के Auric City, Shendra में Hyosung India के Spandex/Elastomeric Yarn manufacturing project को Integrated and Sustainable Textile Policy 2023-28 के तहत विशेष मामले में capital grant देने को मंजूरी मिली है। सरकार ने इसे मराठवाड़ा और विदर्भ में निवेश तथा रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है।
Madha में District and Additional Sessions Court
सोलापुर के Madha में नया District and Additional Sessions Court स्थापित होगा। अभी यहां के मामले Barshi court में चलते हैं। नए न्यायालय के लिए 20 नियमित और 6 outsourced पद मंजूर किए गए हैं।
मुंबई में दो भूमि संबंधी फैसले
मुंबई के Bhuleshwar स्थित Kaivalyadham Yogic Centre के भूमि पट्टे का अगले 30 वर्षों के लिए ₹12 सालाना की रियायती दर पर नवीनीकरण मंजूर किया गया है।
वहीं Chembur की Bhikkhu Sangh United Buddhist Mission संस्था को उसके कब्जे में रही 1,735 वर्ग मीटर सरकारी जमीन नाममात्र दर पर lease पर देने को मंजूरी दी गई है।
Koradi में Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को जमीन
नागपुर के Koradi में तीर्थक्षेत्र विकास योजना के तहत विकसित सरकारी जमीन को Shri Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को 30 वर्ष के लिए lease पर देने की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य तीर्थक्षेत्र में सुविधाओं और रखरखाव का बेहतर प्रबंधन करना है।
आगे क्या?
Sports Quota के मामले में अब संशोधित एकीकृत Government Resolution जारी होना सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम है। इसी के बाद verification की औपचारिक प्रक्रिया और तीन महीने की समयसीमा प्रभावी होगी।
खिलाड़ियों के लिए नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव केवल 5% आरक्षण जारी रखना नहीं, बल्कि eligibility, certificate verification और digital authentication को एकीकृत व्यवस्था में लाना है।
