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बिहार के जमुई में नाबालिगों से बदसलूकी मामले में नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ। हरेराम गिरफ्तार और 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR हुई।
बिहार: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी और अश्लील हरकत के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले के प्रमुख आरोपी नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी, जबकि दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पकड़ लिया गया है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसी मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम जमुई-लखीसराय मार्ग के पास मड़वा पहाड़ क्षेत्र में हुई थी। नाबालिग छात्रा अपने एक नाबालिग दोस्त के साथ कोचिंग से लौट रही थी। दोनों इलाके में गए थे, जहां कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रा के साथ अश्लील हरकत किए जाने का वीडियो भी बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। वाहन के नंबर की मदद से पुलिस पीड़ितों तक पहुंची और इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।
नंदन यादव के पैर में लगी गोली
मामले में फरार चल रहे प्रमुख आरोपी नंदन यादव की तलाश के दौरान पुलिस की उसके साथ मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान नंदन यादव के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जमुई सदर अस्पताल पहुंचाया गया। नंदन यादव जमुई सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है और ट्रैक्टर चलाकर बालू ढोने का काम करता था।
दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। हरेराम यादव भी प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया गया है और उसके ट्रैक्टर चालक होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके पैर में चोट लगने की भी जानकारी है। मामले में दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है।
रामआशीष चौधरी समेत अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई
मामले की जांच में रामआशीष चौधरी नाम के आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा कुछ नाबालिगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस वीडियो में दिखाई दे रहे अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।
पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। जांच में वीडियो बनाने वाले लोगों, घटना में सीधे शामिल आरोपियों और वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर देखी जा रही है।
120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR
जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल घटना में शामिल आरोपियों तक सीमित नहीं रही। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़िता से जुड़ा वीडियो डाउनलोड, शेयर या दोबारा पोस्ट न करें। पुलिस का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध है और वीडियो को आगे प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
FIR में POCSO और BNS की धाराएं
मामले में BNS की धारा 74, 76 और 3(5) के साथ POCSO Act की धारा 8 और 12 के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्राथमिकी जमुई थाना कांड संख्या 428/26 के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी उपलब्ध है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की कार्रवाई के साथ स्पष्ट होगी।
घटना के बाद सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही जांच का विषय नहीं है। घटना जिस इलाके में हुई और जिस समय नाबालिग छात्र-छात्रा वहां मौजूद थे, उस दौरान पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर भी जांच की बात सामने आई है।
महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान
घटना के बाद महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। बिहार महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से मामले का संज्ञान लिए जाने और प्रशासन से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य घटना की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी लेना है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि घटना में कुल कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे, वीडियो किसने बनाया, इसे सोशल मीडिया पर किसने सबसे पहले प्रसारित किया और किन लोगों ने इसे आगे फैलाया। साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना के समय वहां मौजूद अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
फिलहाल नंदन यादव और हरेराम यादव पुलिस की गिरफ्त में हैं। नंदन यादव का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। मामले में SIT की जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। वहीं, नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दर्ज मामलों की साइबर जांच भी आगे बढ़ रही है।
डेटिंग एप के जरिए दोस्ती कर युवक को घर बुलाकर 2.15 लाख रुपये की उगाही का आरोप, दिल्ली के छावला में चार गिरफ्तार, 70,500 रुपये बरामद।
दिल्ली: छावला इलाके में डेटिंग एप के जरिए दोस्ती कर एक 44 वर्षीय व्यक्ति को कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसाकर 2.15 लाख रुपये की उगाही करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला पहले उसे ढांसा मेट्रो स्टेशन बुलाकर नजफगढ़ स्थित एक घर ले गई, जहां दो महिलाएं और एक पुरुष मौजूद थे। इसके बाद दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे नकदी और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए रकम ली गई। छावला थाना पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 70,500 रुपये बरामद किए हैं।
14 सितंबर को मथुरा निवासी चंद्रभान सिंह ने छावला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। जानकारी के अनुसार वह फरीदाबाद में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते हैं। चंद्रभान की पहचान QuackQuack एप के जरिए एक महिला से हुई थी। बातचीत के बाद महिला ने उन्हें ढांसा मेट्रो स्टेशन मिलने के लिए बुलाया। वहां से वह उन्हें नजफगढ़ के एक मकान में ले गई।
घर पहुंचने के बाद दो महिलाएं और एक पुरुष वहां मौजूद मिले। आरोप है कि इसी दौरान गिरोह के एक सदस्य ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर चंद्रभान को दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद उनसे पैसे देने के लिए दबाव बनाया गया।
22 हजार रुपये नकद और 1.93 लाख रुपये ऑनलाइन लिए
पुलिस के अनुसार, पीड़ित से कुल 2.15 लाख रुपये लिए गए। इसमें 22 हजार रुपये नकद थे, जबकि 1.93 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई ट्रांजैक्शन के जरिए लिए गए। यानी रकम लेने के लिए आरोपियों ने नकदी के साथ डिजिटल भुगतान का भी इस्तेमाल किया।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने लेनदेन से जुड़े बैंक खातों और अन्य उपलब्ध जानकारियों की जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपियों की पहचान सामने आई और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने इस मामले में गन्नौर, सोनीपत निवासी मनदीप, गाजियाबाद निवासी प्रीति, नजफगढ़ निवासी कमलेश और रितु को गिरफ्तार किया है। मनदीप की उम्र 38 वर्ष, प्रीति की 32 वर्ष, कमलेश की 42 वर्ष और रितु की 40 वर्ष बताई गई है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 70,500 रुपये बरामद किए गए हैं। बाकी रकम से जुड़े अलग-अलग बैंक खातों को होल्ड कराया गया है। पुलिस अब इन खातों में हुए लेनदेन की जांच के साथ बाकी रकम की रिकवरी की कोशिश कर रही है।
जांच में पुलिस ने मनदीप और कमलेश के पुराने आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया है। पुलिस के अनुसार मनदीप के खिलाफ सोनीपत और दिल्ली में पहले के मामले दर्ज हैं, जबकि कमलेश के खिलाफ द्वारका नॉर्थ थाने में 2023 का मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इन पुराने मामलों की प्रकृति और मौजूदा मामले से उनका संबंध जांच का विषय है।
डेटिंग एप से शुरू होकर धमकी तक पहुंचा मामला
इस मामले में घटनाक्रम एक सामान्य ऑनलाइन संपर्क से शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही समय में यह कथित वित्तीय उगाही में बदल गया। महिला से एप पर दोस्ती होने के बाद पीड़ित को पहले सार्वजनिक स्थान यानी ढांसा मेट्रो स्टेशन बुलाया गया और वहां से निजी मकान तक ले जाया गया। घर में अन्य लोगों की मौजूदगी के बाद कथित तौर पर पुलिस और दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी गई।
यही तरीका इस मामले को सामान्य ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से अलग बनाता है। इसमें ऑनलाइन पहचान और बातचीत के बाद आमने-सामने की मुलाकात और फिर कथित धमकी के जरिए पैसे लेने का आरोप है।
दिल्ली में पहले भी सामने आया था डेटिंग एप हनी ट्रैप
दिल्ली में मई 2026 में भी डेटिंग एप से जुड़े एक अलग हनी ट्रैप और उगाही के मामले का खुलासा हुआ था। उस मामले में fake Tinder/QuackQuack महिला प्रोफाइल के जरिए पुरुषों से संपर्क कर मुलाकात के लिए बुलाने और बाद में पुलिस कार्रवाई या आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे वसूलने का आरोप सामने आया था।
मौजूदा छावला मामले को उस पुराने मामले से सीधे जोड़ने का कोई आधार अभी सामने नहीं आया है। हालांकि दोनों मामलों में डेटिंग एप के जरिए संपर्क, आमने-सामने मुलाकात और पुलिस या आपराधिक मामले के नाम पर कथित दबाव बनाने जैसी समानताएं जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
अगर डेटिंग एप की मुलाकात के बाद धमकी मिले तो क्या करें?
ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस अधिकारी होने का दावा करना अपने आप में उसकी पहचान का प्रमाण नहीं है। यदि कोई व्यक्ति आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे मांगता है, तो घबराकर तुरंत भुगतान करने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाना और उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।
यदि पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर हो चुके हैं, तो वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर दी जा सकती है। National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी, यूपीआई आईडी, मोबाइल नंबर, चैट, कॉल डिटेल से संबंधित उपलब्ध जानकारी और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखना जांच में उपयोगी हो सकता है।
छावला थाना पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित उगाही में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं, क्या किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरीके से निशाना बनाया गया और 2.15 लाख रुपये में से शेष रकम का कितना हिस्सा बरामद किया जा सकता है। बैंक खातों को होल्ड कराने के बाद वित्तीय लेनदेन की जांच भी आगे बढ़ाई जा रही है।
मुंबई में Facebook-Instagram Ads, Fake Calls, Job Offer और APK के जरिए तीन लोगों से ₹7.55 लाख की ठगी हुई। जानें Scam का तरीका और बचाव के उपाय।
मुंबई: Facebook और Instagram पर दिखने वाले Ads और Social Media Posts को आधार बनाकर तीन अलग-अलग मामलों में एक कारोबारी, होटल का वेटर और एक सेल्समैन से कुल ₹7,55,734 की साइबर ठगी सामने आई है। तीनों मामलों में ठगी का तरीका अलग था, लेकिन एक बात समान रही—पहले सोशल मीडिया के जरिए भरोसा बनाया गया और उसके बाद Fake Call, WhatsApp, Personal Details या APK File के जरिए पीड़ित को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
इन मामलों में 58 वर्षीय Andheri निवासी कारोबारी Ketan Shah से ₹3,34,534, होटल में काम करने वाले Ramesh Singh Anand Singh Asnal से ₹2,41,200 और मॉल में सेल्समैन Salim Ibrahim Patel से ₹1,80,000 की ठगी हुई।
Facebook पर Credit Card Ad, फिर Fake HSBC Customer Care Call
58 वर्षीय कारोबारी Ketan Shah ने Facebook पर HSBC Credit Card से संबंधित एक Advertisement देखा। Advertisement पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने अपना नाम और मोबाइल नंबर दिया।
14 अगस्त को उन्हें Rahul नाम के व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को HSBC Customer Care Executive बताया। कॉल के दौरान उन्हें एक Link भेजा गया और मौजूदा Bank Cards की जानकारी देने को कहा गया।
Shah ने IndusInd Bank और ICICI Bank से संबंधित Card Details दर्ज कीं। इसके कुछ ही समय बाद उनके IndusInd Bank Account से ₹3,34,534 निकाल लिए गए।
Transaction के बाद उनका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया। दोबारा फोन चालू करने पर उन्हें Transaction Alerts मिले। उन्होंने तुरंत Card Block कराया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
यह मामला दिखाता है कि Credit Card या Banking Service का नाम इस्तेमाल करने वाला कोई भी Caller अपने आप वास्तविक Bank Executive नहीं बन जाता। Social Media Advertisement पर दिया गया Mobile Number बाद में Social Engineering के लिए इस्तेमाल किए जाने का जोखिम भी पैदा करता है।
दूसरे मामले में होटल वेटर Ramesh Singh Anand Singh Asnal विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे थे। उन्होंने Celebrity Chef Shubham Rawat से जुड़ी एक पोस्ट Instagram और Facebook पर देखी और नौकरी की उम्मीद में Comment Section में अपना Mobile Number डाल दिया।
27 अगस्त को उन्हें WhatsApp पर Sohan Bhandari नाम के व्यक्ति का Call आया। उसने दावा किया कि Chef Shubham Rawat ने उनका नंबर उसे दिया है और Dubai में नौकरी की व्यवस्था हो गई है।
इसके बाद Visa Processing, Medical Test और Offer Letter के नाम पर पैसे मांगे गए। Asnal ने 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच 18 अलग-अलग Transactions में कुल ₹2,41,200 भेज दिए।
जब नौकरी का Offer Letter नहीं आया और संपर्क भी बंद हो गया, तब उन्हें ठगी का पता चला। जांच में सामने आया कि Shubham Rawat का इस ठगी से कोई संबंध नहीं था। कथित तौर पर उनकी Profile Photograph का इस्तेमाल Fake WhatsApp Account बनाकर भरोसा कायम करने के लिए किया गया था। पुलिस ने Sohan Bhandari बनकर संपर्क करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
इस मामले में सबसे बड़ा खतरा Social Media Impersonation का है। किसी व्यक्ति की Profile Photo, नाम या किसी परिचित की पहचान का इस्तेमाल होने से यह साबित नहीं होता कि WhatsApp Account वास्तव में उसी व्यक्ति का है।
Instagram पर ICICI Credit Card Ad, WhatsApp से आया APK
तीसरे मामले में मॉल में काम करने वाले Salesman Salim Ibrahim Patel ने Instagram पर ICICI Bank Credit Card का Advertisement देखा। Credit Card की जरूरत होने के कारण उन्होंने Advertisement पर Click किया।
अगली सुबह एक Unknown Number से Call आया। Caller ने खुद को ICICI Credit Card Department का कर्मचारी बताया और कहा कि KYC Process पूरी करनी होगी।
इसके बाद WhatsApp पर “ICICI CREDIT CARD.apk” नाम की File भेजी गई। Patel को इसे Open करने और PAN Card तथा मौजूदा SBI Credit Card की जानकारी दर्ज करने के लिए कहा गया।
निर्देशों का पालन करने के कुछ ही मिनट बाद उनके SBI Credit Card से दो Transactions के जरिए ₹1,80,000 निकाल लिए गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले में Unknown Cyber Fraudster के खिलाफ जांच चल रही है।
Social Media Ad से WhatsApp तक पहुंच रहा है Scam
इन तीनों मामलों को साथ देखने पर ठगी का एक स्पष्ट Pattern सामने आता है।
Facebook या Instagram पर Ad या Post दिखाई देता है। User किसी जरूरत के कारण उस पर प्रतिक्रिया देता है। इसके बाद Mobile Number या अन्य जानकारी के जरिए संपर्क बनाया जाता है। फिर Scammer Bank Executive, Recruiter या किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान इस्तेमाल करता है। बातचीत अक्सर WhatsApp तक पहुंचती है और यहीं से Payment, Card Details, PAN Details या App Installation के जरिए ठगी आगे बढ़ती है।
यानी Scam की शुरुआत हमेशा पैसे मांगने से नहीं होती। कई बार शुरुआत केवल Mobile Number, Comment या Credit Card Enquiry से होती है।
APK File को लेकर क्यों बढ़ी चिंता
“ICICI CREDIT CARD.apk” जैसे नाम से भेजी गई File सामान्य KYC प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानी जानी चाहिए। खासकर जब कोई Unknown Caller WhatsApp पर APK भेजकर उसे Install करने के लिए कहे।
सितंबर 2026 में Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की ओर से Malicious Android Applications के जरिए Financial Fraud बढ़ने को लेकर चेतावनी सामने आई थी। Facebook और Instagram पर ऐसे Advertisements के जरिए Users को Suspicious Websites और APK Files तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई। कुछ Malicious Apps Device Accessibility Permissions का दुरुपयोग करके Smartphone पर नियंत्रण हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं।
देश भर में APK आधारित ठगी के मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए किसी Bank, Credit Card, KYC, Pension या Refund के नाम पर WhatsApp से भेजी गई APK File को Install करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
मुंबई में Online Fraud का कितना बड़ा खतरा है
मुंबई में 2026 के पहले सात महीनों में 3,689 Online Fraud Cases दर्ज किए गए। इनमें Credit Card और अन्य Digital Fraud के 914 मामले सबसे बड़े दर्ज किए गए Categories में रहे। इन 914 मामलों में 142 मामलों का Detection हुआ और 81 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
इसी अवधि में Fake Social Media Profiles और Email/SMS Morphing से जुड़े 136 मामले तथा Phishing, Man-in-the-Middle और Spoofing से जुड़े 103 मामले दर्ज हुए। Job Fraud के 70 और Fake Websites के 72 मामले भी सामने आए। कुल 3,689 मामलों में 847 मामलों का Detection और 637 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है।
इन आंकड़ों के बीच Facebook-Instagram से जुड़े मौजूदा मामले यह दिखाते हैं कि Cyber Fraud अब केवल Unknown Phone Calls तक सीमित नहीं है। Social Media Advertising, Fake Profiles, Messaging Apps और Digital Payment Systems एक ही Fraud Chain का हिस्सा बन सकते हैं।
2,898 SIM Cards और ₹24 करोड़ के Transaction का जांच कनेक्शन
मुंबई पुलिस की Crime Branch ने सितंबर में एक अलग Cyber Fraud Network की जांच में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में 2,898 SIM Cards और 10 Bank Accounts के जरिए करीब ₹24 करोड़ के Transactions का Financial Trail सामने आया। पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि इन Transactions के अंतिम Beneficiaries कौन थे और नेटवर्क कितना बड़ा था।
यह मामला मौजूदा तीन ठगी की घटनाओं से सीधे जुड़ा हुआ नहीं है, लेकिन इससे यह समझ आता है कि Cyber Fraud में इस्तेमाल होने वाले Phone Numbers, SIM Cards और Bank Accounts के पीछे अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाला नेटवर्क हो सकता है।
अगर Social Media Scam में पैसा कट जाए तो तुरंत क्या करें ?
Cyber Fraud में समय बहुत महत्वपूर्ण है। पैसा कटने के बाद सबसे पहले Bank या Card Issuer को तुरंत सूचना देकर Card या संबंधित Account को सुरक्षित कराना चाहिए।
इसके बाद Financial Cyber Fraud की शिकायत के लिए 1930 Helpline पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है और National Cyber Crime Reporting Portal पर Complaint दर्ज की जा सकती है।
Caller का Mobile Number, WhatsApp Chat, Advertisement का Screenshot, Website Link, APK का नाम, Transaction ID, Bank Alert और अन्य उपलब्ध Evidence सुरक्षित रखना चाहिए। इन्हें Delete करने के बजाय जांच के लिए सुरक्षित रखना अधिक उपयोगी है।
यदि किसी संदिग्ध APK को Install किया गया है, तो उस Device से आगे Banking Activity करने से बचना और Device तथा संबंधित Accounts की Security जांच कराना जरूरी है।
सिर्फ अपना पैसा नहीं, Scammer की जानकारी भी Report करें
National Cyber Crime Reporting Portal पर Suspicious Phone Numbers, WhatsApp Numbers, Telegram Handles, Email IDs, URLs और Social Media Accounts से संबंधित जानकारी Report करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
इसलिए किसी Scam का सामना होने पर केवल Transaction Dispute तक सीमित रहने के बजाय उपलब्ध Digital Evidence के साथ संदिग्ध Number, Account या Link की भी जानकारी देना महत्वपूर्ण है।
Facebook और Instagram पर शुरू हुई इन तीन घटनाओं में कुल ₹7.55 लाख का नुकसान हुआ है। मामलों की जांच जारी है, लेकिन घटनाओं का तरीका एक स्पष्ट चेतावनी देता है—Social Media पर दिखने वाला Ad, WhatsApp Profile या फोन पर बताई गई पहचान अपने आप भरोसे का प्रमाण नहीं है। Cyber Fraud से बचने के लिए किसी भी Payment, KYC, Job Processing या App Installation से पहले स्वतंत्र Verification करना सबसे जरूरी कदम है।
मुंबई के मुलुंड में Snapchat और सोशल मीडिया के जरिए महिला को निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देने के आरोप में 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार।
मुंबई: मुलुंड में सोशल मीडिया के जरिए एक महिला को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने और निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगने के मामले में पुलिस ने पंजाब से 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान Satnam Mandeep Singh के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, महिला द्वारा आगे की मांग मानने से इनकार करने के बाद आरोपी ने उसका एक वीडियो उसके रिश्तेदारों और अन्य लोगों को भेज दिया।
मुलुंड पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से महिला से संपर्क किया और धीरे-धीरे उसके साथ परिचय बढ़ाया। इसके बाद उसके पास मौजूद महिला के निजी फोटो और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसों की मांग की गई। मामला तब गंभीर हो गया जब महिला ने आरोपी की आगे की मांग पूरी करने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर उसने वीडियो दूसरे लोगों तक पहुंचा दिया।
इसके बाद महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की पहचान और लोकेशन का पता लगाया गया, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई पंजाब तक पहुंची और Satnam Mandeep Singh को गिरफ्तार किया गया।
मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) और 351(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(E) और 67(A) के तहत कार्रवाई की गई है।
इन धाराओं में कथित जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, निजता के उल्लंघन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रसारण से जुड़े अपराध शामिल हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपी ने महिला से कुल कितनी रकम मांगी थी या अब तक कितनी रकम हासिल की गई थी। इसी तरह आरोपी ने महिला के निजी फोटो और वीडियो किस माध्यम से हासिल किए, इसकी पूरी जानकारी भी सामने नहीं आई है। इन पहलुओं की जांच का परिणाम आगे की पुलिस कार्रवाई में स्पष्ट हो सकता है।
मुलुंड का यह मामला उस साइबर अपराध के पैटर्न को सामने लाता है जिसमें किसी व्यक्ति की निजी या संवेदनशील तस्वीरों और वीडियो को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में आरोपी अक्सर सामग्री सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे या दूसरी मांगें पूरी कराने की कोशिश करता है।
मुंबई और आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में निजी डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल कर कथित ब्लैकमेल और उगाही के अलग-अलग मामले सामने आए हैं। अगस्त 2026 में एक अलग मामले में मुंबई की 35 वर्षीय महिला पर ठाणे के एक व्यक्ति से निजी फोटो-वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर कथित तौर पर करीब 1.39 करोड़ रुपये की उगाही करने का मामला दर्ज हुआ था।
सितंबर 2026 में मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक अन्य कथित सेक्सटॉर्शन मामले में 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। उस मामले में निजी WhatsApp चैट सार्वजनिक करने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर 64 लाख रुपये लेने का आरोप है। यह मुलुंड मामले से अलग घटना है और दोनों मामलों को एक ही नेटवर्क से जोड़ने की कोई पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अगर निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी मिले तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में सबसे पहले आरोपी की धमकी के दबाव में आकर चैट या अन्य डिजिटल सबूत मिटाने से बचना चाहिए। बातचीत के स्क्रीनशॉट, आरोपी का मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया प्रोफाइल या यूजरनेम, वीडियो या फोटो, संबंधित URL और अगर कोई ऑनलाइन भुगतान हुआ है तो उसकी रसीद या बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन अपराध की शिकायत दर्ज की जा सकती है। पोर्टल के अनुसार शिकायत के दौरान चैट, स्क्रीनशॉट, वीडियो, फोटो, URL और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य उपयोगी हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को संबंधित प्लेटफॉर्म पर भी रिपोर्ट किया जा सकता है।
अगर मामला आर्थिक साइबर धोखाधड़ी या ऑनलाइन पैसे के तत्काल ट्रांसफर से जुड़ा हो तो साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के जरिए भी सहायता ली जा सकती है।
जांच में आगे क्या सामने आ सकता है?
मुलुंड पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा यह हो सकता है कि आरोपी ने महिला के निजी कंटेंट का इस्तेमाल किस तरह किया, क्या उसके पास अन्य लोगों की ऐसी सामग्री भी थी और मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में ऐसे किसी अतिरिक्त आरोपी या दूसरे पीड़ित की पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस की जांच के साथ यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपी ने महिला से कितनी रकम की मांग की थी, कोई भुगतान हुआ था या नहीं और निजी वीडियो कितने लोगों तक भेजा गया। इन तथ्यों की पुष्टि होने के बाद मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल मुलुंड पुलिस की कार्रवाई ने एक महत्वपूर्ण बात सामने रखी है। निजी फोटो या वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर दबाव बनाने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया के पीछे छिपा हो, तब भी तकनीकी जांच के जरिए उसकी पहचान और लोकेशन तक पहुंचा जा सकता है।
ISRO EOS-05 Launch: GSLV-F17 आज रात 2:55 बजे Sriharikota से उड़ान भरेगा। जानिए 36,000 KM ऊपर से भारत को मिलने वाली नई satellite eye कितनी खास है।
नई दिल्ली: भारत की नजर अब आसमान में 36 हजार किलोमीटर ऊपर जाने वाली एक नई ‘आंख’ पर है। ISRO का GSLV-F17 रॉकेट 4 सितंबर की सुबह 2:55 बजे यानी आज देर रात EOS-05 Earth Observation Satellite को लेकर Sriharikota से उड़ान भरने वाला है। यह भारत का पहला imaging satellite है जिसे Geosynchronous Orbit से Earth observation के लिए तैनात किया जाएगा।
इस मिशन की खासियत सिर्फ satellite को अंतरिक्ष में पहुंचाना नहीं है। EOS-05 को ऐसी orbit में काम करने के लिए बनाया गया है जहां से यह भारत और आसपास के बड़े इलाके को बार-बार observe कर सकेगा। इसी वजह से इसे weather monitoring, disaster management, agriculture, environment और strategic surveillance के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
EOS-05, जिसे GISAT-1A के नाम से भी जाना जाता है, करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाली Geosynchronous Orbit में काम करेगा। सामान्य Low Earth Orbit satellites पृथ्वी के चारों तरफ घूमते रहते हैं और किसी इलाके को देखने के बाद वहां दोबारा पहुंचने में समय लग सकता है। EOS-05 का orbital design एक बड़े क्षेत्र को ज्यादा frequent तरीके से observe करने के लिए तैयार किया गया है।
भारतीय अंतराळ संशोधन संस्था (ISRO) ने अंतराळ मोहिमांमध्ये पुन्हा एकदा आपले निर्विवाद वर्चस्व सिद्ध केले आहे!
जानेवारी २०२६ मधील मोहिमेनंतर केवळ ८ महिन्यांतच इस्रोने लाँच पॅडवर दणक्यात पुनरागमन केले. श्रीहरिकोटा येथील सतीश धवन अंतराळ केंद्रावरून पहाटे 'GSLV-F17' या महाकाय… pic.twitter.com/5tYv9q94xC
ISRO के अनुसार यह भारत का पहला imaging satellite है जो Geosynchronous Orbit से काम करेगा। GSLV-F17 इसे सीधे अंतिम operational orbit में नहीं पहुंचाएगा, बल्कि पहले Sub-Geosynchronous Transfer Orbit यानी Sub-GTO में छोड़ेगा। इसके बाद satellite अपने onboard propulsion system की मदद से अपनी orbit को धीरे-धीरे बदलकर अंतिम Geosynchronous position तक पहुंचेगा।
इस Sub-GTO की planned orbit लगभग 170 किलोमीटर perigee और 28,934 किलोमीटर apogee वाली elliptical orbit बताई गई है। वहां से satellite अपनी propulsion system का इस्तेमाल करके करीब 35,786 किलोमीटर की final geosynchronous altitude की ओर बढ़ेगा।
EOS-05 की सबसे बड़ी उपयोगिता frequent Earth observation है। इसके जरिए बड़े इलाके में मौसम और environmental changes को ज्यादा बार देखा जा सकेगा। इससे cyclone, flood, forest fire और दूसरी natural disasters के दौरान तेजी से information मिलने में मदद हो सकती है। Agriculture और land/environment monitoring में भी इसके data का इस्तेमाल किया जा सकता है।
Satellite में multispectral और hyperspectral imaging capabilities से जुड़े payloads हैं। उपलब्ध technical विवरणों के मुताबिक इसके imaging system में Visible and Near-Infrared (VNIR) और Short-Wave Infrared (SWIR) bands में observation की क्षमता शामिल है। GISAT programme के technical specifications में 700 mm Ritchey–Chrétien telescope और अलग-अलग spectral bands में imaging का उल्लेख मिलता है।
Multispectral VNIR imaging के लिए 42 metre spatial resolution का आंकड़ा भी technical sources में दिया गया है। Hyperspectral VNIR और SWIR sensors की resolution अलग है, इसलिए 42 metre को satellite की हर तरह की imaging की एक समान resolution समझना सही नहीं होगा।
Border surveillance का भी मिलेगा फायदा?
यही EOS-05 का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला strategic angle है।
Geosynchronous orbit से एक ही बड़े geographical region को लगातार और ज्यादा frequent तरीके से observe करने की क्षमता conventional low-orbit Earth observation satellites से अलग है। इसी वजह से इसे India की border और strategically important areas की monitoring के लिए भी अहम बताया गया है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि satellite जमीन पर मौजूद हर छोटी चीज को 36,000 किलोमीटर ऊपर से लगातार high-resolution में देख पाएगा। इसका primary classification Earth Observation है और इसके applications में weather, disaster, agriculture, environment तथा strategic monitoring शामिल हैं।
GSLV-F17 की अपनी भी बड़ी परीक्षा
EOS-05 के साथ GSLV-F17 की performance भी इस मिशन का अहम हिस्सा है। यह GSLV की 19वीं flight है और इसमें 4-metre diameter का Ogive composite payload fairing इस्तेमाल किया गया है। Launch Sriharikota के Satish Dhawan Space Centre के Second Launch Pad से होगा।
GSLV को ISRO के भीतर उसके शुरुआती दौर की कुछ unpredictable performances के कारण ‘Naughty Boy’ nickname भी मिला था। पहले 18 GSLV missions में छह missions full mission success हासिल नहीं कर पाए थे, हालांकि बाद के वर्षों में vehicle ने कई सफल flights भी की हैं।
इस बार एक जरूरी distinction भी समझना होगा। हाल के PSLV failures को सीधे GSLV-F17 की technical failure risk से जोड़ना सही नहीं होगा। GSLV Mk II और PSLV की propulsion architecture और प्रमुख propulsion systems अलग हैं।
2021 की असफलता से जुड़ा है इस मिशन का इतिहास
EOS-05 की कहानी नई नहीं है। इसके पहले GISAT-1 यानी EOS-03 को GSLV-F10 से 12 अगस्त 2021 को लॉन्च किया गया था, लेकिन वह mission सफल नहीं हुआ। ISRO के official mission records में EOS-03 को “Launch unsuccessful” दर्ज किया गया है।
अब EOS-05 यानी GISAT-1A उसी broad geosynchronous imaging concept को आगे बढ़ाता है। करीब पांच साल बाद इस capability के लिए replacement satellite को launch किया जा रहा है। इसी वजह से शुक्रवार का मिशन केवल routine satellite launch नहीं बल्कि ISRO के लिए एक महत्वपूर्ण technology और confidence test के रूप में देखा जा रहा है।
इसके अलावा जनवरी 2026 में PSLV-C62/EOS-N1 launch unsuccessful रहा था। ISRO के official records में EOS-N1 को भी “Launch unsuccessful” दर्ज किया गया है। GSLV-F17 इसलिए लगभग आठ महीने के launch gap के बाद ISRO के launch programme की वापसी का भी महत्वपूर्ण मिशन बन गया है।
Launch कब और कहां होगा?
ISRO के official schedule के मुताबिक:
जानकारी
विवरण
Mission
GSLV-F17 / EOS-05
Launch date
4 सितंबर 2026
Launch time
सुबह 2:55 बजे IST
Launch site
Second Launch Pad, Satish Dhawan Space Centre, Sriharikota
Rocket
GSLV-F17
GSLV flight number
19वीं
Satellite
EOS-05
Satellite type
Earth Observation
Initial orbit
Sub-Geosynchronous Transfer Orbit
ISRO ने mission की official live streaming व्यवस्था भी जारी की है। Live coverage launch से पहले शुरू होने वाली है और mission को ISRO के official platforms पर follow किया जा सकता है।
अब सबसे अहम इंतजार 2:55 बजे के liftoff का है। इसके बाद पहला बड़ा milestone होगा GSLV-F17 का EOS-05 को निर्धारित Sub-GTO में सफलतापूर्वक पहुंचाना। इसके बाद satellite की अपनी propulsion system के जरिए final Geosynchronous Orbit तक पहुंचने की प्रक्रिया शुरू होगी।
अगर mission planned sequence के मुताबिक पूरा होता है, तो भारत के पास पहली बार Geosynchronous Orbit से dedicated imaging capability होगी—यानी ऐसी satellite eye जो बड़े क्षेत्र को बार-बार देख सकेगी और मौसम, disaster management, agriculture, environment तथा strategic monitoring जैसे कामों के लिए ज्यादा frequent observation उपलब्ध करा सकेगी।
मुंबई में ₹17.42 लाख की MGL ठगी की जांच में 1,100 VPS users का नेटवर्क सामने आया। पुलिस ने हरियाणा से 10वीं पास आरोपी को गिरफ्तार किया।
मुंबई: ₹17.42 लाख की साइबर ठगी की जांच करते-करते मुंबई पुलिस ऐसे सर्वर नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके करीब 1,100 users सामने आए हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 10वीं पास प्रवीण ने YouTube और ऑनलाइन tutorials से RDP और VPS की तकनीक सीखी और बाद में server किराये पर देने का काम शुरू किया।
जांच में सामने आया है कि उसके customers से जुड़े कुछ मोबाइल नंबर पहले से लगभग 30 cybercrime complaints में दर्ज हैं। अब Crime Branch यह पता लगाने में जुटी है कि इन 1,100 users में कितने लोग वास्तव में cyber fraud से जुड़े थे और प्रवीण को उनकी गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।
₹17.42 लाख की ठगी से खुली server की कड़ी
इस पूरे मामले की शुरुआत एक MGL Gas Bill Update वाले fraud से हुई। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को Mahanagar Gas Limited के नाम से message भेजा गया और bill update करने के नाम पर एक APK install करने के लिए कहा गया।
APK मोबाइल में install होने के बाद उसमें मौजूद malware ने फोन की sensitive information तक पहुंच बनाई। इसी दौरान करीब ₹17.42 लाख की बैंकिंग ठगी हुई।
साउथ रीजन साइबर पुलिस ने जब इस मामले की technical investigation शुरू की तो फर्जी APK के पीछे इस्तेमाल हो रहे server का IP address सामने आया। इसी digital trail को आगे बढ़ाते हुए जांचकर्ता server provider Hostinger तक पहुंचे और वहां से मिली जानकारी के आधार पर VPS operation का connection प्रवीण हुकुम चंद तक पहुंचा।
YouTube से सीखी RDP-VPS की तकनीक
पुलिस के मुताबिक, प्रवीण ने computer या IT की कोई formal technical education नहीं ली थी। उसने YouTube videos और internet पर उपलब्ध tutorials से web development, Remote Desktop Protocol यानी RDP और Virtual Private Server यानी VPS चलाना सीखा।
इसके बाद उसने rdpwale.in नाम से website शुरू की और VPS तथा RDP services उपलब्ध कराने लगा। पुलिस का आरोप है कि customers से KYC या पहचान की पर्याप्त जानकारी लिए बिना server उपलब्ध कराए जाते थे। जांच के मुताबिक, अलग-अलग configurations के लिए ₹1,699 से ₹13,199 महीने तक charge किया जाता था।
Server का इस्तेमाल सिर्फ website चलाने के लिए नहीं हुआ?
पुलिस की जांच में आरोप है कि प्रवीण से लिए गए कुछ VPS का इस्तेमाल malicious APK चलाने वाले operators ने command-and-control यानी C2 server की तरह किया।
सरल भाषा में समझें तो ऐसे server को fraudsters अपने malware और compromised मोबाइल के बीच communication के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे संक्रमित फोन से मिलने वाला sensitive data attacker तक पहुंच सकता है।
Cyber forensic expert Nishant Salunkhe के मुताबिक, ऐसे fraudulent APK SMS, notifications और accessibility जैसी permissions का गलत इस्तेमाल करके OTP और दूसरी sensitive जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि OTP को technically crack करने के बजाय compromised device से intercept किया जा सकता है। APK, उसके permissions, network connections और server infrastructure की जांच से investigators fraud की पूरी digital chain को समझ सकते हैं।
1,100 customers का मतलब 1,100 cyber criminals नहीं
इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि प्रवीण से server लेने वाले करीब 1,100 लोगों में वास्तव में कितने cybercrime में शामिल थे।
पुलिस ने अभी सभी customers को cyber criminals घोषित नहीं किया है। जांच में सिर्फ इतना सामने आया है कि इन customers से जुड़े कुछ mobile numbers लगभग 30 NCRP cybercrime complaints में दिखाई दिए हैं।
Crime Branch अब इन 1,100 users को अलग-अलग cybercrime cases से match कर रही है। साथ ही subscription के जरिए प्रवीण को मिली रकम, customer details, server logs और IP addresses की भी जांच हो रही है।
जांच के बीच rdpwale.in की public website भी उपलब्ध है। Website पर RDP plans ₹699 महीने से शुरू होते दिख रहे हैं। अलग-अलग plans में Windows Server, dedicated/private IP और full admin access जैसी सुविधाएं दी गई हैं। Website के “About RDPWALE” हिस्से में इसे “Owned by Praveen” बताया गया है और Bhiwani, Haryana का address दिया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आता है। पुलिस की रिपोर्ट में उस समय उपलब्ध कराई गई services की कीमत ₹1,699 से ₹13,199 महीने बताई गई है, जबकि current public website पर ₹699, ₹899 और ₹1,499 जैसे plans दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों pricing details के बीच अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में MGL के नाम पर fake APK वाले कई cyber fraud cases सामने आ चुके हैं।
अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक महीने में 100 से ज्यादा MGL consumers और applicants से करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी की गई थी। Victims में 26 से 83 साल तक के लोग शामिल थे। Fraudsters gas connection बंद होने या bill update नहीं होने का डर दिखाकर APK download करवाते थे।
यानी इस मामले में ₹17.42 लाख की एक ठगी सिर्फ एक isolated incident नहीं थी। इसी तरह के APK-based fraud में पहले भी लोगों के मोबाइल और banking information को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
पुलिस ने प्रवीण के पास से laptop और mobile phone जब्त किया है। अब इन devices से customer records, server logs, payment details, IP addresses और communications की जांच की जा रही है।
सबसे अहम सवाल यह है कि प्रवीण को अपने servers के इस्तेमाल की जानकारी कितनी थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसने जानबूझकर cybercrime operators को infrastructure दिया या customers की गतिविधियों को नजरअंदाज किया।
अगर server logs और payment records से customers का connection अलग-अलग cyber fraud cases से साबित होता है, तो यह जांच सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। 1,100 users की mapping से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे cybercrime cases के बीच नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल इन सभी connections की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
Ox Alpha AI आखिर क्या है और इतना चर्चा में क्यों आया? जानिए 1M Context, Free Access, Coding Performance और इसके पीछे की पूरी कहानी।
AI की दुनिया में अचानक चर्चा में आए Ox Alpha AI का राज अब खुल गया है। जिस AI model को शुरुआत में बिना किसी बड़े नाम के users ने इस्तेमाल किया, वह चीन की AI कंपनी Z.ai का GLM-5.3-Flash निकला। शुरुआती preview में इसे free में आजमाने का मौका मिला और coding में इसकी performance ने developers का ध्यान खींच लिया।
सबसे ज्यादा चर्चा इसकी 1 million-token context क्षमता को लेकर हुई। आसान भाषा में कहें तो यह AI एक साथ बहुत बड़ी मात्रा में information के साथ काम कर सकता है। यही वजह है कि coding, बड़े documents और complex AI tasks के लिए इसे लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी।
Ox Alpha कोई अलग AI company नहीं थी। Z.ai ने अपने नए AI model को launch से पहले anonymous नाम से test किया था।
जब यह model सामने आया तो इसके पीछे कौन है, यह साफ नहीं था। लेकिन developers ने इसे coding और दूसरे मुश्किल कामों में इस्तेमाल करना शुरू किया। धीरे-धीरे इसकी performance की चर्चा बढ़ी और लोग जानना चाहते थे कि आखिर इसे बनाया किसने है।
इसके बाद Z.ai ने बताया कि Ox Alpha असल में उसका GLM-5.3-Flash model है।
यानी जिस AI को लोग mysterious model समझकर test कर रहे थे, वह चीन की Z.ai का नया model निकला।
Ox Alpha के शुरुआती preview की एक खास बात यह थी कि users इसे free में आजमा सकते थे।
इससे developers को बिना पैसे खर्च किए model की coding और problem-solving ability check करने का मौका मिला। ज्यादा लोगों ने इसे इस्तेमाल किया और इसी वजह से इसकी चर्चा तेजी से फैल गई।
हालांकि यहां एक जरूरी बात है। Free access Ox Alpha के शुरुआती preview phase से जुड़ा था। अब यही model GLM-5.3-Flash के नाम से officially उपलब्ध है, इसलिए आज इसे सीधे “पूरी तरह free AI” कहना सही नहीं होगा।
1M Context का फायदा क्या है?
यही वह feature है जो आम user के लिए भी समझना जरूरी है।
1 million-token context का मतलब है कि AI बहुत बड़ी मात्रा में information को एक साथ समझकर काम कर सकता है।
मान लीजिए आपके पास कोई बहुत लंबा document है, बड़ा codebase है या किसी project की बहुत सारी जानकारी है। ऐसे काम में AI को बार-बार छोटे हिस्सों में information देने की जरूरत कम हो सकती है।
Coding में इसका फायदा खास तौर पर developers को मिल सकता है। पूरा project समझने, पुराने code को देखकर बदलाव करने और लंबे AI workflows में model ज्यादा information को context में रख सकता है।
Coding में क्यों मचा हंगामा?
Ox Alpha की शुरुआती popularity का बड़ा कारण इसकी coding performance थी।
एक शुरुआती test में 10 में से 8 coding tasks solve होने के बाद 80% का आंकड़ा सामने आया। इस result ने model को लेकर काफी चर्चा पैदा की।
बाद के बड़े tests में performance इससे कम रही। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि Ox Alpha ने सभी AI models को हरा दिया।
लेकिन coding और AI-agent tasks में इसकी performance ने इसे बड़े AI models के सामने एक serious competitor जरूर बना दिया।
इसका बड़ा context, complex tasks संभालने की क्षमता और text के साथ image और video को समझने की सुविधा इसे दूसरे AI tools के मुकाबले interesting बनाती है।
खासकर उन users के लिए जो AI से सिर्फ सवाल-जवाब नहीं, बल्कि लंबे और multi-step काम करवाना चाहते हैं, यह model ज्यादा useful हो सकता है।
आखिर इसे बनाया किसने?
Ox Alpha के पीछे चीन की AI कंपनी Z.ai है।
कंपनी ने पहले इसे anonymous नाम से real users के बीच test किया और बाद में GLM-5.3-Flash के नाम से officially सामने लाया।
Z.ai ने model के weights भी public किए हैं। इसका फायदा developers को यह मिलता है कि वे compatible setup के साथ model को अपने environment में इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं।
क्या यह सिर्फ Coding के लिए है?
नहीं।
GLM-5.3-Flash text के अलावा images और video को भी समझ सकता है। इसलिए इसका इस्तेमाल सिर्फ programming तक सीमित नहीं है।
बड़े documents को समझना, information का analysis करना और ऐसे AI tools बनाना जहां अलग-अलग तरह का data इस्तेमाल होता है—इन कामों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
China के AI chips वाली बात क्यों महत्वपूर्ण है?
Z.ai ने यह भी दावा किया है कि GLM-5.3-Flash को Chinese-made AI chips पर test किया गया।
अगर यह capability बड़े scale पर साबित होती है, तो AI industry के लिए यह महत्वपूर्ण development हो सकता है। इसका मतलब होगा कि AI companies model को ज्यादा efficient बनाकर अलग hardware पर भी बड़े workloads चलाने की कोशिश कर सकती हैं।
हालांकि इस specific claim की पूरी independent confirmation अभी सीमित है, इसलिए इसे Z.ai के दावे के तौर पर ही देखना सही है।
भारत में AI coding tools और assistants इस्तेमाल करने वाले developers के लिए यह एक और option है।
बड़े code, लंबे documents और complex AI tasks पर काम करने वालों को 1M context का फायदा मिल सकता है। वहीं सामान्य users के लिए image, video और बड़े amount of information के साथ काम करने की capability ज्यादा useful हो सकती है।
यानी Ox Alpha की चर्चा सिर्फ AI developers तक सीमित रहने वाली बात नहीं है। जैसे-जैसे ऐसे models ज्यादा आसानी से उपलब्ध होंगे, इनका इस्तेमाल अलग-अलग तरह के कामों में बढ़ सकता है।
अब Ox Alpha का क्या होगा?
Ox Alpha के mysterious model होने का दौर खत्म हो चुका है। अब इसकी पहचान GLM-5.3-Flash के रूप में सामने आ चुकी है।
शुरुआती free access और coding performance ने इसे तेजी से popular बनाया, लेकिन अब असली test यह होगा कि developers इसे लंबे समय तक इस्तेमाल करते हैं या नहीं।
अगर इसका बड़ा context, coding performance और दूसरे features real-world कामों में लगातार useful साबित होते हैं, तो GLM-5.3-Flash AI market में अपनी अलग जगह बना सकता है।
फिलहाल Ox Alpha ने इतना जरूर दिखा दिया है कि किसी नए AI model को popular होने के लिए सिर्फ बड़ा नाम जरूरी नहीं। अगर model practical काम अच्छी तरह करे और users को कुछ ऐसा दे जो दूसरे tools में आसानी से नहीं मिलता, तो वह बहुत कम समय में AI community का ध्यान खींच सकता है।
मुंबई Eid-e-Milad clash के viral video पर 3 Instagram accounts के खिलाफ FIR हुई है। Police अब video source और account operators की जांच कर रही है।
मुंबई: Parel-Chinchpokli इलाके में Eid-e-Milad procession के दौरान हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। 26 अगस्त की घटना के बाद सामने आए एक viral video को लेकर Kalachowki Police ने 3 Instagram accounts के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि video कहां से आया, इसे किसने upload किया और इसके साथ किया गया दावा असल घटना से कितना मेल खाता है।
यानी मामला अब सिर्फ सड़क पर हुए clash तक नहीं है। पुलिस की नजर उस video को social media पर फैलाने के तरीके पर भी है।
क्या हुआ था Parel-Chinchpokli में?
26 अगस्त को Eid-e-Milad procession के बाद Parel-Chinchpokli इलाके में दो groups के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद धक्कामुक्की और तनाव की स्थिति बनी और पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े।
घटना के बाद social media पर कई तरह के videos और claims सामने आए। इसी वजह से पुलिस ने लोगों से बिना पुष्टि किसी भी जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की थी।
Joint Commissioner of Police (Law and Order) Manoj Sharma ने उस समय कहा था कि senior police officers मौके पर मौजूद हैं और situation control में है। उन्होंने लोगों से rumours से बचने की अपील की थी।
Original clash में पहले क्या कार्रवाई हुई?
इस विवाद के मामले में पहले पुलिस ने तीन लोगों को book किया था। Rehan Masood Sayyad, Adil Khan Ahmed Khan और Miraj Mohammad Firoz Rais के नाम सामने आए थे।
पुलिस दूसरे लोगों की पहचान को लेकर भी जांच कर रही थी। लेकिन अब इस मामले में social media से जुड़ा एक अलग angle सामने आया है।
29 अगस्त को Police की नजर पड़ी Viral Video पर
Kalachowki Police के Cyber Squad में तैनात Police Constable Vikram Khaire की complaint के मुताबिक, 29 अगस्त को social-media monitoring के दौरान पुलिस की नजर एक video पर पड़ी।
Complaint के अनुसार यह video करीब तीन दिन पहले Instagram पर upload किया गया था। Video में दो groups के बीच confrontation दिखाई देता है और police personnel भीड़ को control करते नजर आते हैं।
लेकिन पुलिस की जांच का सबसे अहम point video के साथ लिखा गया caption है।
Ganpati banner को लेकर क्या दावा किया गया?
Police complaint के मुताबिक video के साथ लगाए गए caption में दावा किया गया था कि Parel-Lalbaug इलाके में Ganpati banner को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के reaction में यह confrontation हुआ।
पुलिस को आशंका है कि इस तरह घटना को धार्मिक angle से जोड़कर पेश करने वाला post लोगों के बीच गलतफहमी या तनाव बढ़ा सकता है।
Complaint में video के background में “Jalwa Re Jalwa” song इस्तेमाल किए जाने का भी जिक्र है।
यहीं से सवाल उठता है कि video में जो घटना दिखाई गई, क्या उसके साथ लगाया गया दावा भी सही था?
Kalachowki Police ने complaint के आधार पर 3 Instagram accounts को जांच के दायरे में लिया है। पुलिस का आरोप है कि इन accounts से allegedly ऐसा material circulate किया गया, जिसे misleading और inflammatory माना गया।
पुलिस यह जांच रही है कि footage असल में कब और कहां record हुआ, उसका original source क्या है और उसे Instagram पर किसने upload किया।
Police अब किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
सवाल
पुलिस की जांच
Video कहां का है?
Original footage का source पता किया जा रहा है
Video किसने upload किया?
3 Instagram accounts चलाने वालों की पहचान
Video कब बना?
Recording और upload की timeline की जांच
Caption में किया गया दावा
Ganpati banner से जुड़े claim की पड़ताल
Video का पूरा context
घटना में वास्तव में क्या हुआ, इसकी जांच
इस जांच का एक अहम हिस्सा उन लोगों तक पहुंचना है जो इन Instagram accounts को operate कर रहे थे।
Police का पहले भी था साफ message
Parel-Chinchpokli विवाद के बाद Joint Commissioner Manoj Sharma ने लोगों से social media पर चल रहे rumours पर भरोसा नहीं करने को कहा था। पुलिस ने साफ किया था कि senior officers मौके पर मौजूद हैं और हालात control में हैं।
अब उसी घटना से जुड़े viral video पर FIR होने के बाद पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि social media पर सामने आई जानकारी original घटना को सही तरीके से दिखाती है या उसे अलग तरीके से पेश किया गया।
Ganpati Aagman के बीच Parel-Lalbaug में हलचल
इस बीच Parel-Lalbaug-Chinchpokli belt में Ganpati Aagman को लेकर भी बड़ी भीड़ जुट रही है। Chinchpokli Cha Chintamani Aagman के दौरान भारी police deployment की रिपोर्ट सामने आई थी।
Aagman के दौरान करीब 800 से 1,000 police personnel deployment में लगाए गए थे।
हालांकि इस deployment को Instagram FIR से सीधे जोड़ने की कोई official confirmation सामने नहीं आई है।
3 Instagram accounts पर FIR के बाद अब पुलिस video के original source, उसके साथ किए गए claim और accounts चलाने वाले लोगों की पहचान पर आगे बढ़ रही है।
फिलहाल investigation जारी है। इसलिए viral video या उसके caption को पूरी घटना का final सच मानना सही नहीं होगा।
26 अगस्त के Parel-Chinchpokli clash के बाद सामने आया यह नया मामला दिखाता है कि अब पुलिस की जांच सिर्फ मौके पर हुए विवाद तक सीमित नहीं है। Viral video की पूरी कहानी, उसका source और उसके साथ किया गया दावा जांच के बाद ही साफ होगा।
वसई में 66 साल की महिला को CM Vijay Thalapathy के Deepfake Video से ₹12 लाख की ठगी का शिकार बनाया गया। जानिए पूरा मामला और Cyber Fraud से बचने का आसान रास्ता।
पालघर/ वसई: सोशल मीडिया पर दिखने वाला कोई Video कितना भी असली क्यों न लगे, अब उस पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है। वसई में 66 साल की एक महिला को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय यानी Thalapathy Vijay के नाम और चेहरे से बनाए गए Fake AI Video के जरिए आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया गया और करीब 12 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने Instagram पर एक Reel देखी थी, जिसमें विजय को कथित तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को Financial Assistance देने की बात करते दिखाया गया था। Reel में संपर्क करने के लिए एक Phone Number भी दिया गया था। महिला ने जब उस नंबर पर संपर्क किया तो उन्हें दूसरे नंबर पर बात करने के लिए कहा गया। इसके बाद शुरू हुआ पैसे ऐंठने का पूरा खेल।
मामला 27 जुलाई से शुरू हुआ। महिला की नजर Instagram पर एक ऐसी Reel पर पड़ी जिसमें विजय को लोगों को आर्थिक मदद देने की बात कहते हुए दिखाया गया था।
महिला ने Reel में दिए गए नंबर पर फोन किया। दूसरी तरफ मौजूद लोगों ने उनसे बातचीत शुरू की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें आर्थिक मदद मिल सकती है।
महिला ने करीब 5 लाख रुपये की मदद मांगी। इसके बाद ठगों ने कहा कि मदद की रकम हासिल करने के लिए पहले 5 हजार रुपये Processing Fee जमा करनी होगी।
महिला ने यह रकम दे दी।
यहीं से ठगी का सिलसिला और आगे बढ़ गया।
₹5 हजार के बाद ₹77 लाख का नया झांसा
Processing Fee देने के बाद ठगों ने महिला को बताया कि उन्हें विदेश से करीब 77 लाख रुपये मिलने वाले हैं। इसके लिए Tax और दूसरे Charges के नाम पर लगातार पैसे जमा करने को कहा गया।
मदद की रकम मिलने की उम्मीद में महिला ठगों की बातों पर भरोसा करती रहीं और अलग-अलग समय पर पैसे भेजती रहीं।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने एक Private Credit Society से Loan लिया, अपनी Jewellery गिरवी रखी और अपनी बेटी के Bank Account से भी पैसे निकाले। इसके बाद ठगों की ओर से बताए गए Bank Accounts में कुल करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।
पूरी रकम करीब 10 दिनों के दौरान भेजी गई।
12 लाख देने के बाद भी नहीं मिली मदद
महिला को जब वादा की गई Financial Assistance नहीं मिली और ठग लगातार पैसे मांगते रहे, तब उन्हें शक हुआ।
इसके बाद उन्हें समझ आया कि जिस Video को देखकर उन्होंने भरोसा किया था, वह असली नहीं बल्कि AI से बनाया गया Fake Video था।
मामले में वालिव Police Station में शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act के तहत Cheating का मामला दर्ज किया है।
Police Inspector Gorakshnath Zaid ने मामले की पुष्टि की है। अब पुलिस उन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है जिन्होंने महिला से संपर्क किया और जिन Bank Accounts में रकम ट्रांसफर करवाई गई।
वसई का मामला अकेला नहीं है। हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से Deepfake Video के जरिए Financial Fraud और Blackmail के मामले सामने आए हैं।
पुणे में 38 साल की एक महिला को Instagram पर उद्योगपति रतन टाटा का Deepfake Video दिखाया गया। इस Video में Share Trading से जुड़े निवेश और अच्छे Return का दावा किया गया था। महिला ने Advertisement पर क्लिक किया और बाद में एक App के जरिए कथित Investment Scheme में पैसे लगाए। पुलिस के अनुसार उन्हें करीब 4.09 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
इसके अलावा वहीं, पुणे में ही 56 साल के एक Businessman को Finance Minister Nirmala Sitharaman के Deepfake Video के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया। इसके बाद Fake Forex Trading Platform, Fake Investment Advisor और SpaceX Shares के नाम पर करीब 1.07 करोड़ रुपये की ठगी की गई। Fake Platform पर कथित Profit बढ़ता हुआ दिखाया गया और पैसा निकालने के लिए आगे और रकम मांगी गई।
बेंगलुरु में एक Retired Professor को Facebook पर Nirmala Sitharaman का Deepfake Video दिखाया गया। इसके बाद उन्हें एक Fake Trading Platform, Telegram Chat और Overseas Calls के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया और 61 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
पटना में Deepfake का इस्तेमाल अलग तरीके से किया गया। एक Hotel Owner को उनके चेहरे से बनाए गए कथित अश्लील AI Videos के जरिए Blackmail किया गया और करीब 97 लाख रुपये की रकम वसूली गई। पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और अंतिम 20 लाख रुपये की किस्त बरामद की गई।
इन मामलों से साफ है कि Deepfake का इस्तेमाल अब सिर्फ Fake News फैलाने के लिए नहीं बल्कि Investment Fraud, Financial Assistance Scam और Blackmail जैसे अपराधों में भी किया जा रहा है।
Video में नेता या Celebrity दिखे तो भी तुरंत भरोसा न करें
AI की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज इस्तेमाल करके ऐसा Video तैयार किया जा सकता है जिसमें वह व्यक्ति ऐसी बात कहता हुआ दिखाई दे सकता है जो उसने वास्तव में कही ही नहीं।
इसलिए अगर किसी Social Media Video में कोई नेता, Celebrity, कारोबारी या सरकारी अधिकारी पैसे, Investment, नौकरी, Lottery या Financial Assistance का दावा करता दिखाई दे और साथ में कोई Mobile Number, WhatsApp Number, Website या Payment Request दी गई हो तो सीधे पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C के मुताबिक Financial Cyber Fraud की शिकायत National Helpline Number 1930 पर की जा सकती है। इसके बाद Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की जानकारी पूरी करनी होती है।
शिकायत करते समय Transaction ID, Transaction Date, Bank या Payment App की जानकारी, UPI ID, Account Details, Phone Numbers, Chat और Screenshots जैसी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है।
साथ ही अपने Bank या संबंधित Payment Service Provider को भी तुरंत Fraud Transaction की जानकारी देनी चाहिए।
I4C का Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System Financial Fraud की शिकायतों पर Banks और Payment Intermediaries के साथ कार्रवाई के लिए बनाया गया है।
साइबर फ्रॉड के खिलाफ सरकार की कार्रवाई भी तेज
सरकार के मुताबिक 30 जून 2026 तक CFCFRMS के जरिए 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई गई। इसी अवधि तक I4C ने 3,718 Mobile Apps को भी Block किया था। सरकार ने यह भी बताया कि Suspect Registry के जरिए संदिग्ध Identifiers और Mule Accounts की जानकारी Banks और Financial Institutions के साथ साझा की जा रही है।
अप्रैल 2026 से Money Restoration Module और Grievance Redressal Module भी काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य Cyber Fraud में फंसी रकम की बहाली और Bank Accounts के Freeze या Lien से जुड़ी शिकायतों को तेजी से संभालना है।
Deepfake को लेकर नए नियम भी लागू
भारत सरकार ने 2026 में AI-generated और Deepfake Content से जुड़े नियमों को और मजबूत किया है। फरवरी 2026 में IT Rules में बदलाव करके Synthetically Generated Information यानी AI से तैयार सामग्री से होने वाले नुकसान को लेकर नया regulatory framework लाया गया। इसमें Deepfake और AI-generated content भी शामिल है।
सरकार ने Social Media Platforms के लिए AI-generated content की स्पष्ट पहचान और traceable information से जुड़ी व्यवस्था भी तय की है। Unlawful content की शिकायतों पर Platforms को तेजी से कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अब Social Media पर दिखने वाले Video को लेकर क्या सावधानी रखें?
किसी बड़े नेता या Celebrity का Video देखकर सिर्फ इसलिए भरोसा न करें क्योंकि उसमें चेहरा और आवाज बिल्कुल असली जैसी लग रही है।
अगर Video में Financial Assistance, Investment, नौकरी, Lottery या किसी दूसरी आर्थिक मदद का दावा है तो पहले Official Source से जानकारी Verify करें।
Video में दिए गए किसी अनजान Phone Number या Link पर तुरंत संपर्क न करें।
Processing Fee, Tax, Verification Charge या Withdrawal Charge के नाम पर पैसे मांगने पर रुक जाएं।
किसी अनजान Bank Account या UPI ID में Payment न करें।
और अगर गलती से पैसा भेज दिया है तो इंतजार करने के बजाय तुरंत 1930 पर शिकायत करें और Cyber Crime Portal पर मामला दर्ज करें।
वसई की 66 साल की महिला के साथ हुई यह घटना बताती है कि Social Media पर दिखने वाला भरोसेमंद चेहरा भी ठगी का जरिया बन सकता है। यहां 5 हजार रुपये की छोटी Payment से शुरू हुआ मामला करीब 12 लाख रुपये के नुकसान तक पहुंच गया।
इसलिए अगली बार किसी Video में कोई बड़ा नेता, Celebrity या सरकारी व्यक्ति आर्थिक मदद या Investment का दावा करता दिखाई दे तो Video देखकर फैसला लेने के बजाय पहले उसकी सच्चाई Verify करें। यही सावधानी आपके पैसे को ऐसे Deepfake Cyber Fraud से बचा सकती है।
Riya Baliyan के तिरंगा विवाद पर माफी के बाद सवाल: क्या वायरल होने की कोशिश में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान सही है और क्या सिर्फ माफीनामा पर्याप्त है?
मुजफ्फरनगर: सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाहत आज कई लोगों को ऐसे कंटेंट की तरफ ले जा रही है, जो कुछ ही घंटों में उन्हें चर्चा में ला देता है। लेकिन जब यह वायरल होने की कोशिश देश के राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ जाए, तो सवाल सिर्फ views और followers का नहीं रह जाता। सवाल यह बन जाता है कि वायरल होने के लिए तिरंगे के सम्मान से समझौता आखिर कहां तक सही है?
मुजफ्फरनगर की Instagram influencer Riya Baliyan से जुड़े एक वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ। वीडियो में तिरंगे को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रदर्शित किए जाने को लेकर लोगों ने सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद Riya ने वीडियो जारी कर माफी मांगी और संबंधित वीडियो को हटा दिया।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या माफीनामा इस विवाद को खत्म करने के लिए पर्याप्त है?
Riya ने अपनी सफाई में इसे अनजाने में हुई गलती बताया है। ऐसे में बिना ठोस सबूत यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने जानबूझकर तिरंगे का गलत इस्तेमाल सिर्फ views या followers बढ़ाने के लिए किया।
लेकिन सोशल मीडिया का मौजूदा सिस्टम एक दूसरी बहस जरूर खड़ी करता है।
किसी विवादित वीडियो पर लोग नाराज होते हैं, उसे शेयर करते हैं, स्क्रीन रिकॉर्ड करते हैं, दूसरे pages पर पोस्ट करते हैं और creator का account खोजते हैं। यानी जिस content का विरोध किया जा रहा है, वही content कई बार creator को अतिरिक्त exposure भी दे सकता है।
यही वजह है कि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वीडियो क्यों बनाया गया था?
सवाल यह भी है कि उस विवाद से किसे क्या मिला?
वीडियो डिलीट हुआ, लेकिन क्या Viral Traffic भी खत्म हो गया?
यह मान लेना आसान है कि वीडियो delete होने के बाद विवाद खत्म हो गया।
लेकिन डिजिटल दुनिया में ऐसा जरूरी नहीं है।
एक बार कोई Reel viral हो जाए तो उसके screenshots, screen recordings, reposts और reaction videos अलग-अलग platforms पर घूम सकते हैं। लोग original creator का नाम search कर सकते हैं और उसके दूसरे content तक पहुंच सकते हैं।
यानी:
वीडियो delete हो सकता है, लेकिन उससे पैदा हुई पहचान और digital reach जरूरी नहीं कि delete हो जाए।
क्या गुस्सा भी किसी Creator की Reach बढ़ा सकता है?
सोशल मीडिया पर “rage bait” शब्द इसी phenomenon से जुड़ा है—ऐसा provocative content जो लोगों में गुस्सा पैदा करके engagement और traffic हासिल करता है। Oxford University Press ने “rage bait” को 2025 का Word of the Year चुना था और बताया था कि इस term का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
इसका मतलब यह नहीं है कि Riya का वीडियो rage bait था।
लेकिन यह जरूर समझने की जरूरत है कि सोशल मीडिया पर outrage खुद engagement पैदा कर सकता है।
अगर कोई व्यक्ति गलती स्वीकार करता है, उसे हटाता है और सार्वजनिक रूप से माफी मांगता है, तो उसे सुनना भी जरूरी है।
लेकिन राष्ट्रीय ध्वज जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय प्रतीक के मामले में सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ “गलती हो गई” कहना पर्याप्त है?
कानून और Flag Code National Flag के सम्मानजनक प्रदर्शन और handling से जुड़े नियम निर्धारित करते हैं। National Flag के प्रति disrespect को Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत भी संबोधित किया गया है।
इसलिए किसी मामले में गलती, लापरवाही और जानबूझकर किए गए अपमान के बीच अंतर करना जरूरी है।
तिरंगे से जुड़े विवाद सिर्फ Riya Baliyan तक सीमित नहीं
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में National Flag से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं।
हाल ही में Fatehpur में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर पांच युवकों के खिलाफ तिरंगे के कथित अपमान को लेकर मामला दर्ज किया गया।
वहीं दूसरी तरफ Nitin Nabin को लेकर वायरल हुई एक तस्वीर को BJP ने fake बताया और उसके खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई। यानी तिरंगे से जुड़ा हर वायरल दावा वास्तविक घटना हो, यह भी जरूरी नहीं है।
इसलिए सोशल मीडिया users के लिए दोहरी जिम्मेदारी बनती है—
गलत तरीके से तिरंगे के इस्तेमाल का विरोध करें, लेकिन किसी unverified तस्वीर या वीडियो को बिना जांचे viral भी न करें।
असली सवाल: देशभक्ति या सिर्फ Social Media Outrage?
तिरंगे का सम्मान किसी भी भारतीय के लिए बेहद संवेदनशील विषय है।
लेकिन देशभक्ति का मतलब सिर्फ किसी वायरल वीडियो पर गुस्सा करना नहीं है।
अगर कोई गलती करता है तो सवाल उठना चाहिए। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन बिना सबूत किसी व्यक्ति को देशद्रोही कहना, लगातार गाली देना या उसके हर पुराने content को खंगालकर उसे viral करना भी समाधान नहीं है।
क्योंकि हो सकता है कि जिस account को आप “सबक सिखाने” के लिए search कर रहे हैं, उसी account की reach आप खुद बढ़ा रहे हों।
Riya Baliyan की माफी के बाद अब क्या?
Riya ने विवादित वीडियो हटाया है और माफी भी मांगी है।
अब इस मामले में तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण हैं—
पहला: क्या यह वास्तव में अनजाने में हुई गलती थी?
दूसरा: क्या National Flag के display से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ?
तीसरा: क्या ऐसी गलती के बाद सार्वजनिक माफी पर्याप्त मानी जानी चाहिए या परिस्थितियों के अनुसार आगे भी कोई जवाबदेही बनती है?
इन सवालों का जवाब भावनाओं से नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्य और कानून के आधार पर होना चाहिए।
क्योंकि तिरंगा कोई Viral Content नहीं है
सोशल मीडिया पर views कुछ घंटों में मिल सकते हैं, followers कुछ दिनों में बढ़ सकते हैं और controversy कुछ हफ्तों में खत्म हो सकती है।
लेकिन राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान किसी algorithm का हिस्सा नहीं है।
इसलिए सवाल Riya Baliyan से भी बड़ा है—
“वायरल होने के चक्कर में तिरंगे का अपमान आखिर कहां तक सही है? और अगर गलती हो भी जाए, तो क्या सिर्फ एक माफीनामा उस गलती की पूरी कीमत चुका देता है?”
इस विवाद का जवाब सिर्फ Riya Baliyan को नहीं, बल्कि उस पूरी सोशल मीडिया culture को देना होगा जहां attention के लिए outrage और outrage के लिए attention—दोनों एक-दूसरे को viral बनाते हैं।