Explore the latest technology and AI news, innovations and insights from India and around the world. Stay updated with artificial intelligence, gadgets, smartphones, software, cybersecurity, digital trends, emerging technologies and how technology is transforming everyday life on Indian FastTrack.
मुंबई में दो cyber fraud मामलों में senior citizens से ₹14.48 लाख की ठगी का आरोप है। Dahisar Police ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
Mumbai Crime News: मुंबई में senior citizens को निशाना बनाकर किए गए cyber fraud के दो अलग-अलग मामलों में Dahisar Police ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों मामलों में पीड़ितों से कुल ₹14.48 लाख की ठगी का आरोप है। एक मामले में 68 वर्षीय Borivali निवासी को Mahanagar Gas Limited MGL का प्रतिनिधि बनकर फोन किया गया और gas bill update करने के नाम पर APK file install कराई गई। दूसरे मामले में 71 वर्षीय Dahisar महिला को money-laundering case में फंसाने और arrest करने की धमकी देकर ₹4.5 लाख transfer कराए गए।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका इन मामलों तक सीमित थी या इनके पीछे कोई बड़ा cyber fraud network भी सक्रिय है।
पहला मामला Borivali East में रहने वाले 68 वर्षीय senior citizen से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, 25 जुलाई को उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया। उसने अपना नाम Vinay Sharma बताया और खुद को Mahanagar Gas Limited का प्रतिनिधि बताया।
कॉलर ने कथित तौर पर senior citizen से कहा कि उनका gas connection बंद हो सकता है और bill details update करनी होंगी।
इसके बाद उन्हें एक APK file भेजी गई। कथित तौर पर बताया गया कि gas bill की जानकारी update करने के लिए इस application को mobile में install करना जरूरी है।
Senior citizen ने APK install कर ली। इसके बाद पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने उनके mobile और banking activity तक अनधिकृत पहुंच हासिल की और transactions के जरिए उनके बैंक खातों से करीब ₹9.98 लाख निकाल लिए।
दूसरा मामला: 71 वर्षीय महिला को बनाया ‘Digital Arrest’ का शिकार
दूसरा मामला Dahisar की 71 वर्षीय महिला से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 2 और 3 जुलाई के बीच महिला को ऐसे लोगों के calls आए, जिन्होंने खुद को senior police officials बताया।
इनमें से एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपना नाम Rajesh Mishra बताया और महिला से कहा कि उनके खिलाफ money-laundering का मामला दर्ज हुआ है।
कॉल करने वालों ने कथित तौर पर महिला को arrest करने की धमकी दी। पुलिस के अनुसार, इसके बाद WhatsApp video calls के जरिए महिला को लगातार निगरानी में रहने का दबाव बनाया गया।
आरोपियों ने कथित तौर पर महिला के bank accounts और balances की जानकारी भी हासिल की।
Arrest के डर से महिला ने आरोपियों के निर्देश पर ₹4.5 लाख एक IndusInd Bank account में transfer कर दिए। यह account Mahakal Enterprises से जुड़ा बताया गया है।
Email ID और mobile phone की जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस
इस मामले की जांच में पुलिस ने उस bank account और उससे जुड़े email ID की जानकारी हासिल की।
Technical investigation और field-level investigation के बाद पुलिस ने Dhirajkumar Kesaram Prajapati (28) को गिरफ्तार किया।
पुलिस का आरोप है कि ₹4.5 लाख की रकम से जुड़े bank account और email ID का संबंध Prajapati के mobile phone से सामने आया। पुलिस के अनुसार, email ID को उसके mobile phone का इस्तेमाल करके बनाया और access किया गया था।
मामले में पुलिस अब अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है।
Dahisar Police की इन दो कार्रवाइयों से cyber fraud के दो अलग-अलग तरीके सामने आते हैं।
पहले मामले में fraudsters ने MGL के नाम और gas bill update का सहारा लेकर APK application install कराई।
दूसरे मामले में आरोपियों ने police और money-laundering case का डर पैदा करके महिला से पैसे transfer कराए।
दोनों मामलों में तरीका अलग था, लेकिन senior citizens को भरोसे और डर के जरिए financial fraud का शिकार बनाया गया।
APK File: WhatsApp पर आई तो गलती से भी install न करें
Cyber fraudsters कई बार bank KYC, electricity bill, gas connection, delivery, government service या account update जैसे बहानों का इस्तेमाल कर APK file भेजते हैं।
किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK file को mobile में install नहीं करना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति application install करने का दबाव बनाए, तो पहले संबंधित company या विभाग की official website या customer-care channel से इसकी पुष्टि करें।
‘Digital Arrest’ के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान
अगर कोई व्यक्ति phone या video call पर खुद को police अधिकारी बताकर criminal case, money laundering या arrest की धमकी देता है और पैसे transfer करने को कहता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
ऐसे मामलों में caller को bank details, OTP, PIN, password या अन्य confidential information नहीं देनी चाहिए।
सबसे जरूरी बात—डर के कारण तुरंत पैसा transfer न करें।
मुंबई पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के कथित links की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास जारी है कि इन cyber fraud मामलों में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण: इस रिपोर्ट में आरोपियों के संबंध में दी गई जानकारी पुलिस जांच और पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोप साबित होना अभी और आगे न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
सुप्रीम कोर्ट ने बिना इंश्योरेंस वाहनों पर ANPR से e-challan और ‘No Insurance, No Fuel’ pilot का निर्देश दिया है। जानें कार-बाइक owners पर असर।
नई दिल्ली: अगर आपके पास कार, बाइक, स्कूटर या कोई दूसरा वाहन है, तो Vehicle Insurance पर सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस सड़कों पर चल रहे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई को और सख्त बनाने के लिए technology-based व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत Automatic Number Plate Recognition यानी ANPR कैमरों के जरिए वाहनों की पहचान, insurance records से verification और automatic e-challan की व्यवस्था की दिशा में काम किया जाएगा।
कोर्ट ने इसके साथ ही insurance status को पेट्रोल-डीजल की बिक्री से जोड़ने वाले “No Insurance, No Fuel” pilot project को विकसित करने का निर्देश भी दिया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आज से पूरे देश के हर पेट्रोल पंप पर बिना इंश्योरेंस वाहन को पेट्रोल मिलना बंद हो गया है। यह अभी pilot project के स्तर पर है।
सुप्रीम कोर्ट ने वाहन इंश्योरेंस पर क्यों लिया सख्त रुख?
यह मामला National Insurance Company Limited बनाम Smt. Thungala Dhana Laxmi & Others से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने देश में mandatory motor insurance के कमजोर अनुपालन का मुद्दा सामने आया।
कोर्ट ने पाया कि कानून के तहत third-party insurance अनिवार्य होने के बावजूद बड़ी संख्या में वाहन बिना valid insurance के चल रहे हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए Court ने insurance compliance को technology, vehicle databases और enforcement mechanisms से जोड़ने की दिशा में कई निर्देश दिए हैं।
इसका उद्देश्य केवल uninsured vehicles पर चालान करना नहीं है। Motor insurance का एक बड़ा उद्देश्य सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को compensation मिलने की व्यवस्था को मजबूत करना भी है।
बिना इंश्योरेंस वाहन कैमरे से कैसे पकड़े जाएंगे?
आने वाली व्यवस्था को आसान भाषा में समझें तो इसका तरीका कुछ ऐसा होगा:
गाड़ी सड़क पर चली → ANPR कैमरे ने नंबर प्लेट पढ़ी → vehicle database से जानकारी मिली → insurance status verify हुआ → insurance valid नहीं मिला → e-challan की कार्रवाई।
सुप्रीम कोर्ट ने Automatic Number Plate Recognition यानी ANPR cameras को insurance information और vehicle registration databases के साथ integrate करने की दिशा में व्यवस्था विकसित करने को कहा है।
इसका फायदा यह होगा कि हर uninsured vehicle को पकड़ने के लिए traffic police को हर बार वाहन रोकना जरूरी नहीं रह सकता। Technology के जरिए vehicle insurance compliance की निगरानी ज्यादा automated हो सकती है।
राज्य पुलिस को भी real-time insurance verification के लिए handheld devices या applications उपलब्ध कराने की दिशा में निर्देश दिए गए हैं, ताकि मौके पर ही वाहन का insurance status देखा जा सके।
“No Insurance, No Fuel” क्या आज से लागू हो गया?
नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी petrol pumps पर तत्काल nationwide insurance checking शुरू करने का आदेश नहीं दिया है। Court ने संबंधित authorities को consultation के जरिए एक pilot project तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत valid third-party insurance को fuel supply से जोड़ा जा सकता है।
यानी भविष्य में technology के जरिए यह जांच संभव बनाने की कोशिश होगी कि पेट्रोल या डीजल लेने वाले वाहन का mandatory insurance valid है या नहीं।
इसलिए अगर सोशल मीडिया पर कोई यह दावा करता है कि “सुप्रीम कोर्ट के आदेश से आज से बिना इंश्योरेंस पेट्रोल मिलना बंद हो गया”, तो यह दावा भ्रामक होगा।
अभी की स्थिति: No Insurance, No Fuel एक pilot project है, nationwide लागू नियम नहीं।
16.54 करोड़ uninsured वाहनों का आंकड़ा क्या है?
इस फैसले की खबरों में लगभग 56 प्रतिशत वाहनों के uninsured होने की बात प्रमुखता से सामने आई है। लेकिन इस आंकड़े को समझना जरूरी है।
भारत सरकार ने 20 मार्च 2023 को लोकसभा में दिए जवाब में बताया था कि MoRTH से प्राप्त जानकारी के अनुसार देश का estimated vehicle fleet 30.48 करोड़ था, जिसमें 16.54 करोड़ वाहन uninsured थे। इस आंकड़े में मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और लक्षद्वीप का data शामिल नहीं था।
16.54 करोड़ को 2026 में uninsured वाहनों की नई सरकारी गिनती नहीं है। यह 2023 के सरकारी आंकड़ों पर आधारित संख्या है, जिसका सुप्रीम कोर्ट ने अपने मामले में संदर्भ लिया।
उपलब्ध सरकारी आंकड़े 16.54 करोड़ को 30.48 करोड़ के मुकाबले करीब 54 से 56 प्रतिशत दिखाते हैं।
Third-party vehicle insurance पहले से अनिवार्य है
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कुछ लोगों को लग सकता है कि वाहन का insurance पहली बार mandatory किया गया है। लेकिन ऐसा नहीं है।
भारत में public roads पर चलने वाले motor vehicles के लिए third-party liability insurance पहले से अनिवार्य है। IRDAI की policyholder guidance में भी motor third-party insurance की अनिवार्यता स्पष्ट की गई है।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट के ताजा हस्तक्षेप का बड़ा हिस्सा नया insurance obligation बनाने के बजाय existing mandatory insurance की compliance और enforcement को मजबूत करना है।
बिना इंश्योरेंस गाड़ी चलाने पर कितना जुर्माना है?
Motor Vehicles Act की Section 196 के तहत बिना insurance वाहन चलाने पर मौजूदा कानून में पहली बार अपराध के लिए तीन महीने तक की imprisonment या ₹2,000 तक fine या दोनों का प्रावधान है।
दोबारा अपराध होने पर तीन महीने तक की imprisonment या ₹4,000 तक fine या दोनों हो सकते हैं।
इसलिए अगर कहीं ₹10,000 के fine को तुरंत लागू नया नियम बताया जा रहा है, तो उसे सावधानी से पढ़ना चाहिए। Proposed changes और वर्तमान लागू penalty को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।
नई कार और बाइक खरीदने वालों के लिए भी बड़ा बदलाव
Supreme Court के इस फैसले में नए vehicles के third-party insurance tenure को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश हैं।
नई private cars के लिए mandatory third-party insurance cover की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल और नए two-wheelers के लिए 5 साल से बढ़ाकर 6 साल करने का निर्देश दिया गया है।
इसका मतलब नई car या bike खरीदने वाले ग्राहकों के लिए mandatory third-party cover की शुरुआती अवधि पहले से लंबी होगी।
लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए—third-party insurance और comprehensive insurance एक ही चीज नहीं हैं।
क्या अब comprehensive insurance लेना जरूरी होगा?
नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का मतलब यह नहीं है कि हर car या bike owner के लिए comprehensive insurance mandatory कर दिया गया है।
Mandatory requirement third-party liability cover की है। इसके अलावा own-damage, personal accident और अन्य अतिरिक्त covers अलग insurance protection दे सकते हैं।
इसलिए vehicle owner को policy खरीदते समय यह देखना चाहिए कि उसके insurance में कौन-कौन से risks covered हैं और कौन से नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने insurance policy को भी आसान बनाने की बात कही
Court ने motor insurance products को ज्यादा स्पष्ट और consumer-friendly बनाने की दिशा में भी निर्देश दिए हैं।
इसमें अलग-अलग insurance layers और customer को optional covers चुनने के लिए स्पष्ट विकल्प देने जैसी व्यवस्था शामिल है। इसका उद्देश्य यह है कि policyholder को यह समझने में परेशानी न हो कि उसने किस प्रकार का insurance लिया है और दुर्घटना की स्थिति में कौन-सा risk covered है।
यह बदलाव खासतौर पर उन vehicle owners के लिए महत्वपूर्ण है जो केवल policy document में “insurance” लिखा देखकर यह मान लेते हैं कि उनकी हर तरह की vehicle damage automatically covered है।
बिना इंश्योरेंस वाहन से accident हुआ तो क्या होगा?
Mandatory third-party insurance का महत्व केवल चालान से नहीं जुड़ा है।
यदि किसी uninsured vehicle से सड़क दुर्घटना होती है, तो accident victim या उसके परिवार के लिए compensation की प्रक्रिया ज्यादा मुश्किल हो सकती है। Third-party insurance व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य इसी financial liability को cover करना है।
यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने uninsured vehicles की समस्या को केवल traffic violation के रूप में नहीं देखा, बल्कि road safety और accident victims के compensation से भी जोड़ा है।
Vehicle Insurance enforcement में अब technology की भूमिका बढ़ेगी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सबसे बड़ा practical असर यही हो सकता है कि insurance checking धीरे-धीरे manual verification से technology-based enforcement की तरफ बढ़े।
कल्पना कीजिए कि आपकी गाड़ी सड़क पर जा रही है और ANPR camera उसकी number plate पढ़ता है। यदि system vehicle registration और insurance database से जुड़ा हुआ है, तो vehicle का insurance status automatically verify किया जा सकता है।
अगर insurance valid है तो कोई समस्या नहीं। लेकिन अगर mandatory insurance expired है, तो electronic enforcement mechanism के जरिए आगे कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि यह व्यवस्था किस राज्य में कब और किस तरीके से लागू होगी, यह implementation के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए इसे अभी हर शहर और हर सड़क पर लागू व्यवस्था मानना सही नहीं होगा।
तीसरी बात: ANPR cameras, vehicle databases और insurance information को जोड़कर automatic e-challan की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
चौथी बात: “No Insurance, No Fuel” अभी देशभर में लागू नियम नहीं है। इसके लिए pilot project तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
पांचवीं बात: नई private cars और नए two-wheelers के third-party insurance tenure में बदलाव किया गया है।
गाड़ी है तो Insurance Status जरूर Check करें
सुप्रीम कोर्ट के इस Vehicle Insurance Supreme Court Order 2026 का सबसे बड़ा संदेश यह है कि mandatory insurance की compliance को अब केवल कागजी औपचारिकता के रूप में नहीं देखा जा रहा है।
ANPR cameras, vehicle databases और automatic e-challan जैसी technology के इस्तेमाल से uninsured vehicles की पहचान ज्यादा आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं “No Insurance, No Fuel” pilot आगे चलकर लागू होता है तो vehicle owners के लिए insurance renewal को नजरअंदाज करना और भी मुश्किल हो सकता है।
Google Search के ‘Past Hour’ फ़िल्टर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यूज़र्स का दावा है कि पिछले एक घंटे की जगह कई दिन और महीनों पुराने रिज़ल्ट दिखाई दे रहे हैं। जानिए पूरी रिपोर्ट।
Google Search और Google News के “Past Hour” फ़िल्टर को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया, ऑनलाइन फ़ोरम और टेक कम्युनिटी में बहस तेज़ हो गई है। कई यूज़र्स का दावा है कि “पिछले एक घंटे” का विकल्प चुनने के बावजूद उन्हें कई घंटे, कई दिन और कुछ मामलों में कई महीने पुराने रिज़ल्ट दिखाई दे रहे हैं।
यह समस्या सिर्फ़ न्यूज़ इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है। इसका असर उन करोड़ों लोगों पर पड़ रहा है जो हर दिन ताज़ा जानकारी के लिए Google Search पर निर्भर रहते हैं।
आखिर क्या है पूरा मामला?
Google Search में किसी भी ताज़ा घटना, ब्रेकिंग न्यूज़, मौसम अपडेट, शेयर बाज़ार की जानकारी या सरकारी घोषणा को खोजने के लिए यूज़र्स आमतौर पर News → Tools → Past Hour फ़िल्टर का इस्तेमाल करते हैं।
इस फ़िल्टर का उद्देश्य पिछले 60 मिनट के भीतर प्रकाशित सामग्री दिखाना है। लेकिन कई यूज़र्स ने शिकायत की है कि “Past Hour” चुनने के बावजूद उन्हें 2 घंटे पहले, 3 घंटे पहले, 1 दिन पहले और यहां तक कि 1 महीने पहले की खबरें दिखाई दे रही हैं।
अगर Google का “Past Hour” फ़िल्टर वास्तव में सही काम नहीं कर रहा है, तो इसका असर सिर्फ़ न्यूज और मौसम का हाल की खोज पर ही नहीं बल्कि कई अन्य आम लोगों पर भी पड़ सकता है।
1. आम यूज़र्स
लोग मौसम, ट्रैफिक, ब्रेकिंग न्यूज़ और स्थानीय घटनाओं की जानकारी के लिए Google Search का इस्तेमाल करते हैं।
2. छात्र और प्रतियोगी परीक्षार्थी
एडमिट कार्ड, रिज़ल्ट, परीक्षा नोटिस और सरकारी घोषणाओं की ताज़ा जानकारी प्रभावित हो सकती है।
3. निवेशक और ट्रेडर्स
शेयर बाज़ार और क्रिप्टो मार्केट में कुछ मिनटों की देरी भी बड़ा नुकसान करा सकती है।
4. बिज़नेस और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स
कंपनियां ट्रेंडिंग टॉपिक्स और ब्रेकिंग अपडेट्स पर अपनी रणनीति बनाती हैं।
5. रिसर्चर और फैक्ट-चेकर
पुराने डेटा के कारण रिसर्च और तथ्य-जांच पर असर पड़ सकता है।
तकनीकी वजह क्या हो सकती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
Google के इंडेक्सिंग सिस्टम में देरी।
Search Algorithm में बदलाव।
Data Centers के बीच सिंक्रोनाइज़ेशन की समस्या।
Cached Pages को प्राथमिकता मिलना।
Search Freshness सिस्टम में अस्थायी बग।
हालांकि, इन संभावनाओं की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मुंबई साइबर पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल और कई बैंक दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में देशभर के 84 साइबर अपराधों से कनेक्शन सामने आया है।
मुंबई साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, म्यूल अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश
मुंबई साइबर पुलिस के मध्य विभाग ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल फोन, 22 चेकबुक, 23 सिम कार्ड और कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से है।
गिरफ्तार आरोपियों के साथ केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की तस्वीर
गुप्त सूचना के बाद बोरीवली में बिछाया जाल
मुंबई साइबर पुलिस थाना, मध्य विभाग, वर्ली को 29 जुलाई 2026 को गुप्त सूचना मिली थी कि सलमान पठान और उसके साथी इंडियन ओवरसीज बैंक की बोरीवली और माहिम शाखा में खोले गए म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने आने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक, चंदावरकर रोड, बोरीवली (पश्चिम) में जाल बिछाया।
करीब तीन बजे सलमान पठान और उसके साथी बैंक से 10 लाख रुपये निकाल चुके थे और अन्य 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस जांच में पता चला कि सलमान पठान के भाईंदर पश्चिम स्थित केजीएन एंटरप्राइजेज और मीरा रोड के शांति शॉपिंग सेंटर स्थित रिचा एंटरप्राइजेज कार्यालयों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने दोनों जगहों पर छापेमारी कर चार अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खाते खोलकर चेक के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालते थे।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का संबंध भारत के विभिन्न राज्यों में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
मुंबई साइबर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 106/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(4), 61(2), 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया है।
म्यूल अकाउंट क्या होता है?
म्यूल अकाउंट (Mule Account) वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से कमाए गए पैसे को एक जगह से दूसरी जगह भेजने या निकालने के लिए करते हैं।
आसान भाषा में समझें तो साइबर ठग सीधे अपने बैंक खाते में पैसे नहीं मंगवाते। वे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर बैंक खाता खुलवाते हैं या किसी लालच में फंसाकर उसका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को ही “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।
साइबर अपराधी म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे करते हैं?
साइबर अपराधी पहले लोगों को फर्जी कॉल, निवेश योजना, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन नौकरी या लॉटरी जैसे झांसे में फंसाकर पैसे ठगते हैं। इसके बाद यह रकम सीधे उनके खाते में न जाकर म्यूल अकाउंट में भेजी जाती है।
इसके बाद आरोपी—
बैंक से नकद रकम निकाल लेते हैं।
रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।
चेक और एटीएम कार्ड के जरिए पैसे निकालते हैं।
कई बैंक खातों के जरिए पैसों का स्रोत छिपाने की कोशिश करते हैं।
लोग अनजाने में कैसे बन जाते हैं म्यूल अकाउंट होल्डर?
कई बार अपराधी लोगों को हर महीने कमीशन देने का लालच देकर उनका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं।
आमतौर पर अपराधी लोगों से कहते हैं—
“आपके खाते में पैसा आएगा, आपको सिर्फ़ निकालकर देना है।”
“घर बैठे कमाई का मौका है।”
“कंपनी के लिए बैंक अकाउंट चाहिए।”
“किराये पर बैंक खाता दीजिए।”
ऐसे मामलों में खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।
इस मामले में म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे किया गया?
मुंबई साइबर पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी इंडियन ओवरसीज बैंक की बोरीवली और माहिम शाखा में खोले गए म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकाल रहे थे। आरोपियों के बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से पाया गया है।
साइबर पुलिस की चेतावनी
मुंबई साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। अगर कोई व्यक्ति साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले खाते का मालिक पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इन अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती के नेतृत्व में की गई। इस ऑपरेशन में संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कृष्णकांत उपाध्याय, पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) बजरंग बनसोडे और सहायक पुलिस आयुक्त सुवर्णा शिंदे का मार्गदर्शन रहा।
कार्रवाई को सफल बनाने में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चिमाजी आढाव, पुलिस निरीक्षक रविकिरण डोरले, सहायक पुलिस निरीक्षक अतुल सानप, मानसिंग वचकले, सविता कावरे, पुलिस हवलदार अभिजीत गोंजारी, नवनाथ वेताले, विकास तटकरे, किरण पाटिल, श्रीकांत पोंल, नंदकिशोर महाजन, तनिषा मयेकर और कैलाश बाबरे ने अहम भूमिका निभाई।
मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर ठगों को सप्लाई करने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 92 APK फाइलों से ₹63 करोड़ की ठगी हुई, जबकि 967 नई फाइलों से ₹1000 करोड़ तक की संभावित साइबर ठगी की आशंका थी।
मुंबई: मुंबई पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा करते हुए फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर ठगों तक पहुंचाने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी की बनाई गई APK फाइलों का इस्तेमाल कर अब तक करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी की जा चुकी है। जांच के दौरान आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें भी बरामद हुई हैं। पुलिस का कहना है कि यदि इनका इस्तेमाल हो जाता, तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।
मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एक साइबर फ्रॉड मामले की जांच के दौरान सामने आई है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
कैसे खुला पूरे नेटवर्क का राज?
इस मामले की शुरुआत दक्षिण मुंबई के एक व्यक्ति के साथ हुई साइबर ठगी से हुई। पीड़ित को महानगर गैस (MGL) का बिल भरने के नाम पर एक लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक कर APK फाइल डाउनलोड करते ही उसके बैंक खाते से करीब ₹70 हजार निकाल लिए गए।
मामले की जांच करते-करते मुंबई पुलिस सीधे उस व्यक्ति तक पहुंची, जो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी APK फाइलें तैयार करता था। इसी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
मुंबई पुलिस की डीसीपी राजसुधा आर. के अनुसार गिरफ्तार आरोपी केवल फर्जी APK फाइलें ही नहीं बनाता था, बल्कि साइबर ठगों को संभावित शिकारों का डेटा भी उपलब्ध कराता था।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 37,200 लोगों का बैंकिंग और व्यक्तिगत डेटा भी बरामद किया है। इस डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
मुंबई पुलिस के अनुसार जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
92 फर्जी APK फाइलें देशभर के साइबर अपराधियों को बेची गईं।
इनसे जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी सामने आई।
देशभर से 2,993 शिकायतें दर्ज हुईं।
इनमें 512 शिकायतें महाराष्ट्र और मुंबई की हैं।
आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें बरामद हुईं, जिनके इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की आशंका जताई गई है।
पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी जारी है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।
जांच के अनुसार आरोपी प्रत्येक APK फाइल ₹15,000 से ₹20,000 में बेचता था। इन फाइलों की वैधता लगभग 40 से 45 दिन होती थी। समय पूरा होने पर साइबर अपराधियों को नई APK फाइल खरीदनी पड़ती थी।
पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।
कैसे काम करती हैं ये फर्जी APK फाइलें?
साइबर अपराधी लोगों को गैस बिल, RTO चालान, KYC अपडेट, बिजली बिल, बैंक वेरिफिकेशन या अन्य सरकारी सेवाओं के नाम पर लिंक भेजते थे।
जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक से APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करता, उसके मोबाइल की कई महत्वपूर्ण अनुमतियां ठगों के हाथ में चली जाती थीं। इसके बाद बैंकिंग जानकारी, OTP और अन्य संवेदनशील डेटा का दुरुपयोग कर खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।
कौन है गिरफ्तार आरोपी?
मुंबई पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान एस.के. मंडल के रूप में हुई है। उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। वह मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने साइंस से पढ़ाई की थी और सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कोडिंग सीखी। इसके बाद उसने फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर अपराधियों को बेचना शुरू कर दिया।
मुंबई पुलिस अब उन साइबर अपराधियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस आरोपी से APK फाइलें खरीदी थीं। जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य राज्यों या अंतरराज्यीय गिरोहों के लिंक सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आम लोगों के लिए जरूरी सलाह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड न करें। Android फोन में केवल Google Play Store जैसे अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही ऐप इंस्टॉल करें। गैस, बैंक, बिजली, KYC या सरकारी विभाग के नाम पर आए किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से पुष्टि जरूर करें।
Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), Ministry of Home Affairs – https://i4c.mha.gov.in/
FAQ
Q1. मुंबई पुलिस ने किसे गिरफ्तार किया है?
मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर अपराधियों को बेचने वाले कथित मास्टरमाइंड एस.के. मंडल को गिरफ्तार किया है।
Q2. APK फ्रॉड क्या होता है?
यह ऐसा साइबर फ्रॉड है जिसमें फर्जी Android ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल और बैंकिंग डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई जाती है।
Q3. अब तक कितनी साइबर ठगी सामने आई है?
मुंबई पुलिस के अनुसार आरोपी की APK फाइलों से जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की ठगी सामने आई है। पुलिस ने यह भी कहा है कि बरामद 967 नई फाइलों का इस्तेमाल होता तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।
Q4. इस तरह की ठगी से कैसे बचें?
केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करें, किसी अनजान लिंक से APK फाइल इंस्टॉल न करें और बैंकिंग या KYC संबंधी संदेशों की आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।
मुंबई में NEET पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन WhatsApp, Instagram और लाइव लोकेशन के जरिए बड़ा आंदोलन बन गया। जानिए कैसे युवाओं ने इसे आगे बढ़ाया।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में NEET पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब केवल एक जगह तक सीमित नहीं रहा। आजाद मैदान में छात्रों के बीच शुरू हुआ संपर्क WhatsApp ग्रुप, Instagram अपडेट और लाइव लोकेशन के जरिए तेजी से फैलता गया। पुलिस हिरासत, FIR और नोटिस के बावजूद छात्र, युवा कर्मचारी, अभिभावक और अन्य नागरिक अलग-अलग जगहों पर जुटते रहे। इस आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि इसे किसी एक नेता या राजनीतिक बैनर ने नहीं चलाया।
आजाद मैदान से शुरू हुई पहल कैसे बढ़ती गई?
मुंबई में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत आजाद मैदान में हुई, जहां NEET से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर लोग जुटे थे। शुरुआत में प्रदर्शन में शामिल कुछ युवाओं ने एक-दूसरे से फोन नंबर साझा किए।
इसके बाद एक छोटा WhatsApp ग्रुप बनाया गया। कुछ ही समय में यह ग्रुप बढ़ता गया और प्रदर्शन से जुड़े लोगों के बीच सूचना साझा करने का माध्यम बन गया। आगे चलकर ऐसे कई ग्रुप बनाए गए, जिनमें प्रदर्शन की जगह, पुलिस कार्रवाई और नई गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा की जाने लगी।
मुंबई में आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल केवल लोगों को बुलाने के लिए नहीं किया, बल्कि बदलती परिस्थितियों की जानकारी देने के लिए भी किया। इसी वजह से प्रदर्शन का स्वरूप एक तय मंच से निकलकर अलग-अलग जगहों पर फैलता गया।
सोशल मीडिया ने प्रदर्शन का तरीका बदल दिया
मुंबई के इन प्रदर्शनों में डिजिटल नेटवर्किंग की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। WhatsApp ग्रुपों के जरिए लोग एक-दूसरे को अपडेट देते रहे, जबकि Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो तेजी से फैलते रहे।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जब किसी जगह पुलिस की कार्रवाई या हिरासत की जानकारी सामने आती थी, तो अन्य लोग अपने कार्यक्रम और पहुंचने के तरीके को उसी हिसाब से बदलते थे। लाइव लोकेशन साझा करने से अलग-अलग इलाकों में मौजूद लोग एक-दूसरे से जुड़ते रहे।
इसी डिजिटल नेटवर्क के कारण आंदोलन का कोई एक चेहरा या केंद्रीय नेतृत्व दिखाई नहीं दिया। एक जगह कार्रवाई होने के बाद भी दूसरे स्थानों पर लोग जुटते रहे। मुंबई में शिवाजी पार्क, चेंबूर, पवई, मानखुर्द और घाटकोपर समेत कई इलाकों में प्रदर्शन की खबरें सामने आईं।
पुलिस कार्रवाई के बावजूद भीड़ कम नहीं हुई
प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया और अलग-अलग मामलों में FIR तथा नोटिस की कार्रवाई भी की। कुछ मामलों में पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं होने का हवाला दिया।
शिवाजी पार्क में हुए एक प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने आयोजकों के खिलाफ कथित गैरकानूनी जमावड़े का मामला दर्ज किया था। इसके बाद कई प्रतिभागियों को पुलिस की ओर से नोटिस भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई।
हालांकि, कार्रवाई के बावजूद विरोध प्रदर्शन पूरी तरह रुका नहीं। कई युवाओं का कहना था कि वे केवल किसी राजनीतिक दल के समर्थन में नहीं, बल्कि परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने के लिए प्रदर्शन में शामिल हुए।
युवाओं के साथ अभिभावक और कामकाजी लोग भी जुड़े
मुंबई के प्रदर्शन में केवल NEET की तैयारी करने वाले छात्र ही शामिल नहीं थे। कई युवा कर्मचारी, अभिभावक और अन्य नागरिक भी प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचे।
कुछ प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें लगता है कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे केवल परीक्षा देने वाले छात्रों तक सीमित नहीं हैं। उनका असर परिवारों और पूरे समाज पर पड़ता है।
इसी वजह से प्रदर्शन में ऐसे लोग भी दिखाई दिए, जिनका खुद NEET परीक्षा से सीधा संबंध नहीं था। उनका तर्क था कि किसी समस्या के खिलाफ आवाज उठाने के लिए यह जरूरी नहीं कि उसका सीधा असर पहले खुद पर पड़े।
22 जुलाई के प्रदर्शन की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई
मुंबई के एक प्रदर्शन के दौरान एक युवती का पुलिस वाहन के सामने खड़े होने का वीडियो और तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, वह उस वाहन के सामने खड़ी हो गई जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों को ले जाया जा रहा था।
इस घटना ने आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर बहस को और तेज कर दिया। घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गईं और यह प्रदर्शन से जुड़ी सबसे चर्चित दृश्यात्मक घटनाओं में शामिल हो गई।
राजनीतिक दल जुड़े, लेकिन युवाओं का आंदोलन अलग बना रहा
बाद के चरण में शिवसेना (UBT), MNS और उनके नेताओं की मौजूदगी ने प्रदर्शन को राजनीतिक ध्यान भी दिलाया। आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत राजनीतिक नेताओं ने छात्रों के मुद्दे पर समर्थन जताया।
हालांकि, प्रदर्शन में शामिल कई युवाओं ने यह स्पष्ट किया कि उनकी भागीदारी किसी राजनीतिक पार्टी के समर्थन से ज्यादा शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। कुछ प्रदर्शनों में राजनीतिक बैनर से दूर रहने की अपील भी की गई।
यही कारण है कि इस आंदोलन का एक हिस्सा राजनीतिक समर्थन मिलने के बावजूद खुद को किसी एक पार्टी से अलग रखता दिखाई दिया।
मुंबई में विरोध का नया डिजिटल मॉडल?
मुंबई के NEET विरोध प्रदर्शनों ने यह दिखाया कि आज किसी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा एक केंद्रीय संगठन या बड़ा नेता जरूरी नहीं है।
एक छोटे समूह से शुरू हुई बातचीत, लगातार बढ़ते WhatsApp नेटवर्क, सोशल मीडिया अपडेट और मौके के हिसाब से लोगों के जुटने की क्षमता ने प्रदर्शन को तेजी से विस्तार दिया। इस मॉडल में सूचना का प्रसार पारंपरिक मंचों के बजाय मोबाइल फोन और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए हुआ।
हालांकि, ऐसे आंदोलनों में गलत जानकारी और अपुष्ट दावों के फैलने का जोखिम भी रहता है। इसलिए किसी भी प्रदर्शन की जगह, पुलिस कार्रवाई या कानूनी स्थिति से जुड़ी जानकारी को आधिकारिक पुष्टि के बाद ही विश्वसनीय माना जाना चाहिए।
मुंबई में NEET से जुड़े विरोध प्रदर्शन अब एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां छात्र मुद्दे के साथ-साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और नागरिक अधिकारों पर भी बहस तेज हो गई है। आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है, यह आने वाले दिनों की घटनाओं और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
प्रदर्शनकारी NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे हैं।
मुंबई का NEET Protest कैसे बड़ा आंदोलन बना?
आजाद मैदान में छात्रों के बीच फोन नंबर साझा करने से शुरू हुई पहल WhatsApp ग्रुप, Instagram अपडेट और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए तेजी से फैलती गई।
क्या मुंबई के प्रदर्शन का कोई एक नेता था?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन का एक बड़ा हिस्सा किसी एक केंद्रीय नेता के नेतृत्व में नहीं चल रहा था। अलग-अलग समूह सोशल मीडिया और आपसी संपर्क के जरिए जुड़े रहे।
क्या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई?
हां। विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान हिरासत, FIR और पुलिस नोटिस की कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई है। कार्रवाई की प्रकृति अलग-अलग मामलों में अलग रही।
Mumbai Boss Scam में फर्जी WhatsApp प्रोफाइल से कंपनी के अधिकारी को फंसाकर 10.40 करोड़ रुपये ठगे गए। पुलिस ने 5.63 करोड़ रुपये फ्रीज किए।
मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच ने कथित WhatsApp इम्पर्सोनेशन से जुड़े एक बड़े ‘Boss Scam’ का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को उसके वरिष्ठ अधिकारी के नाम और तस्वीर वाले फर्जी WhatsApp अकाउंट से निर्देश भेजे गए, जिसके बाद 63 ट्रांजैक्शन में 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर हुई। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कराई गई है।
मुंबई में साइबर ठगी का तरीका लगातार बदल रहा है। अब हर फ्रॉड में OTP, बैंकिंग पासवर्ड या फिशिंग लिंक की जरूरत नहीं पड़ती। मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने आए इस मामले में कथित तौर पर ठगों ने तकनीकी हैकिंग के बजाय कंपनी के अंदर मौजूद भरोसे और वरिष्ठ अधिकारी के नाम का इस्तेमाल किया। इसी वजह से इस तरह की ठगी को ‘Boss Scam’ कहा जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी से WhatsApp के जरिए संपर्क किया और खुद को कंपनी के डायरेक्टर के रूप में पेश किया। फर्जी प्रोफाइल पर वरिष्ठ अधिकारी की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था।
कथित तौर पर आरोपी ने अधिकारी को बताया कि डायरेक्टर एक महत्वपूर्ण मीटिंग में व्यस्त हैं और कुछ जरूरी कारोबारी भुगतान तत्काल करने हैं। संदेशों को वास्तविक समझकर अधिकारी ने कंपनी के बैंक खाते से अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।
जांच के अनुसार, इस तरह कुल 63 ट्रांजैक्शन में 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर हुई। बाद में जब अधिकारी ने वास्तविक डायरेक्टर से संपर्क किया, तब कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।
इस मामले की खास बात यह है कि उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, ठगी का मुख्य तरीका किसी OTP या बैंकिंग क्रेडेंशियल को हासिल करना नहीं था। ठगों ने कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारी की पहचान और कारोबारी भरोसे का इस्तेमाल कर भुगतान के निर्देश मनवाए।
शिकायत मिलने के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने बैंकिंग ट्रेल और पैसों के लेन-देन की जांच शुरू की। जांच के दौरान रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजे जाने का पता चला।
पुलिस की कार्रवाई के बाद 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज कराई गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की और छह लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस कथित मास्टरमाइंड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
ठगी की रकम से खरीदा जाता था सोना
जांच में कथित तौर पर ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजने और उसके बाद सोना खरीदने का तरीका सामने आया। पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य पैसों के डिजिटल ट्रेल को जटिल बनाना और रकम की सीधी पहचान मुश्किल करना था।
रिपोर्टों के मुताबिक, कथित तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और महाराष्ट्र में अलग-अलग ज्वेलरी शोरूम से सोना खरीदा गया। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस प्रक्रिया में किन लोगों और खातों का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस ने जांच के दौरान मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर कथित मनी ट्रेल और आरोपियों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है।
बॉस स्कैम से कंपनियों को क्यों है बड़ा खतरा?
इस तरह के साइबर फ्रॉड में अपराधी किसी CEO, Director या Senior Executive की पहचान का इस्तेमाल कर सकते हैं। कारोबारी माहौल में वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आने वाले तत्काल भुगतान निर्देशों पर कर्मचारी कई बार बिना अतिरिक्त पुष्टि के भरोसा कर लेते हैं।
इसी भरोसे का फायदा उठाकर कथित ठग:
वरिष्ठ अधिकारी के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर सकते हैं
अलग WhatsApp नंबर को “Personal” या “Private Number” बता सकते हैं
तत्काल भुगतान का दबाव बना सकते हैं
कर्मचारी को निर्देश किसी अन्य व्यक्ति से साझा न करने को कह सकते हैं
रकम को कई बैंक खातों में भेजकर ट्रेल को जटिल बना सकते हैं
मुंबई के इस मामले की जांच से यह संकेत मिलता है कि कंपनियों को केवल OTP और पासवर्ड आधारित साइबर सुरक्षा पर निर्भर रहने के बजाय Payment Verification Protocol भी मजबूत करना होगा।
ऐसे मामलों से बचने के लिए किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आए बड़े या असामान्य भुगतान निर्देश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। केवल WhatsApp मैसेज, प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।
कंपनियां बड़े भुगतान के लिए:
Two-Person Approval System लागू कर सकती हैं
भुगतान से पहले Voice या Video Call Verification कर सकती हैं
नए बैंक अकाउंट पर भुगतान के लिए अतिरिक्त मंजूरी ले सकती हैं
अचानक आए “Urgent” Payment Requests को दोबारा Verify कर सकती हैं
कर्मचारियों को Executive Impersonation और Boss Scam के बारे में प्रशिक्षित कर सकती हैं
यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए और ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करनी चाहिए। त्वरित रिपोर्टिंग से बैंकिंग चैनल के जरिए रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।
जांच जारी, मास्टरमाइंड की तलाश
मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले में कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसी तरह के WhatsApp इम्पर्सोनेशन मॉडल से अन्य कंपनियों या वरिष्ठ अधिकारियों को भी निशाना बनाया गया था।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और जांच पूरी होने तक आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
मुंबई का यह कथित Boss Scam इस बात का संकेत है कि साइबर ठगी अब केवल OTP या फिशिंग लिंक तक सीमित नहीं रही। वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर भरोसे के जरिए किए जाने वाले फर्जी भुगतान से बचने के लिए कंपनियों को हर बड़े वित्तीय निर्देश की स्वतंत्र पुष्टि करनी चाहिए।
Cyber Crime Helpline 1930 — वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन जानकारी।
FAQ
Boss Scam क्या होता है?
Boss Scam में साइबर अपराधी CEO, Director या किसी वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारी से भुगतान या संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
इस मुंबई साइबर फ्रॉड में कितनी रकम की ठगी हुई?
पुलिस जांच से जुड़े उपलब्ध विवरणों के अनुसार, कंपनी के खाते से 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम 63 ट्रांजैक्शन में ट्रांसफर हुई।
क्या इस मामले में कोई रकम फ्रीज हुई है?
हां। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कराई गई है।
साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?
तुरंत 1930 पर कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।
OPPO Reno Land के जरिए OPPO India ने Reno16 Series को नए अनुभव के साथ पेश किया। मुंबई और बेंगलुरु में AI, क्रिएटर्स और यूथ कल्चर का अनोखा संगम।
मुंबई: स्मार्टफोन लॉन्च अब सिर्फ स्टेज, स्पेसिफिकेशन और प्रेजेंटेशन तक सीमित नहीं रह गए हैं। OPPO India ने अपने नए एक्सपीरिएंशियल प्लेटफॉर्म OPPO Reno Land के जरिए Reno16 Series को बिल्कुल अलग अंदाज़ में पेश किया है। कंपनी का कहना है कि यह पहल आज के युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जहां टेक्नोलॉजी, क्रिएटिविटी, म्यूजिक, फैशन, फिटनेस और कम्युनिटी एक ही जगह पर जुड़ते हैं।
2 जुलाई से 12 जुलाई 2026 के बीच मुंबई के मालाड और बेंगलुरु के इंदिरा नगर में आयोजित Reno Land में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। यहां आने वाले विजिटर्स को Reno16 Series के AI फीचर्स, कैमरा इनोवेशन और कनेक्टेड डिवाइस इकोसिस्टम का अनुभव इंटरैक्टिव तरीके से कराया गया।
OPPO ने Reno Land को पारंपरिक लॉन्च इवेंट से अलग बनाया। यहां अलग-अलग थीम वाले अनुभव ज़ोन तैयार किए गए, जिनमें शामिल थे:
Fit Check Alley
Pop Cam Studio
AI Remix Collage Café
Bubble Wrap Zone
IoT Experience Zone
इन सभी ज़ोन का उद्देश्य केवल फीचर्स दिखाना नहीं था, बल्कि लोगों को Reno16 Series की AI तकनीक और कैमरा क्षमताओं का वास्तविक अनुभव देना था।
AI और कैमरा फीचर्स पर रहा खास फोकस
Reno16 Series में कंपनी ने AI आधारित कई नए फीचर्स पेश किए हैं। इनमें AI Remix Collage, AI Snap Key, AI Portrait Camera, AI Editing Toolkit और स्मार्ट कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स शामिल हैं। OPPO का दावा है कि यह डिवाइस केवल स्मार्टफोन नहीं बल्कि क्रिएटिविटी और कंटेंट क्रिएशन के लिए एक ऑल-इन-वन प्लेटफॉर्म है।
सेलेब्रिटीज और लाइव परफॉर्मेंस ने बढ़ाया आकर्षण
इवेंट में सोशल मीडिया पर्सनैलिटी Orry और अभिनेत्री Avneet Kaur ने हिस्सा लिया। इसके अलावा OutStation, Kings United Dance Crew, Danish & Crew और पंजाबी कलाकारों की लाइव परफॉर्मेंस ने भी माहौल को खास बनाया।
Reno Land में आने वाले लोगों के लिए कई इंटरैक्टिव एक्टिविटीज भी आयोजित की गईं। इनमें:
Reno16 Treasure Hunt
Flash Mob Performances
Interactive AI Experience
Live Creator Sessions
जैसी गतिविधियों ने विजिटर्स को पूरे इवेंट में सक्रिय रूप से शामिल रखा।
फिटनेस, म्यूजिक और कैफे कल्चर का भी मिला संगम
OPPO ने Reno Land को केवल टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रखा।
कंपनी ने:
Rove Run Club
Daud Run Club
के साथ Community Runs आयोजित किए।
वहीं Distil और DJ Suggahunny के साथ Coffee Raves आयोजित कर म्यूजिक और कैफे कल्चर को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया।
100 से ज्यादा क्रिएटर्स हुए शामिल
OPPO ने इस अभियान में 100 से अधिक डिजिटल क्रिएटर्स और कॉलेज क्रिएटर्स को शामिल किया। इन क्रिएटर्स ने Reno16 Series का अनुभव लेकर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया, जिससे यह अभियान ऑफलाइन के साथ-साथ डिजिटल दुनिया में भी चर्चा का विषय बना।
कंपनी का कहना है कि Reno Land का उद्देश्य केवल नया स्मार्टफोन लॉन्च करना नहीं बल्कि युवाओं के लिए ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना है जहां वे टेक्नोलॉजी के साथ खुद को जोड़ सकें। OPPO के अनुसार Reno16 Series व्यक्तिगत अभिव्यक्ति (Self Expression), क्रिएटिविटी और कम्युनिटी एक्सपीरियंस को बढ़ावा देने की सोच के साथ विकसित की गई है।
OPPO India ने Reno16 Series के लॉन्च को पारंपरिक इवेंट से आगे बढ़ाकर एक अनुभव आधारित आयोजन में बदलने की कोशिश की है। OPPO Reno Land के जरिए कंपनी ने AI तकनीक, कंटेंट क्रिएशन, फिटनेस, म्यूजिक और युवा संस्कृति को एक मंच पर लाकर अपने ब्रांड की नई रणनीति पेश की है। आने वाले समय में अन्य स्मार्टफोन कंपनियां भी इसी तरह के अनुभव-आधारित लॉन्च मॉडल अपनाती दिखाई दे सकती हैं।
Q1. OPPO Reno Land क्या है? यह OPPO India का नया experiential platform है, जहां स्मार्टफोन लॉन्च को इंटरैक्टिव अनुभव में बदला गया है।
Q2. Reno Land किन शहरों में आयोजित किया गया? मुंबई (मलाड) और बेंगलुरु (इंदिरा नगर) में 2 से 12 जुलाई 2026 के बीच इसका आयोजन हुआ।
Q3. Reno Land में कौन-कौन से अनुभव दिए गए? AI Remix Collage Café, Pop Cam Studio, Fit Check Alley, Bubble Wrap Zone और IoT Zone सहित कई इंटरैक्टिव अनुभव उपलब्ध थे।
Q4. इस कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए? Orry, Avneet Kaur, Kings United Dance Crew सहित 100 से अधिक डिजिटल क्रिएटर्स और कई कलाकारों ने हिस्सा लिया।
Q5. OPPO Reno16 Series की खासियत क्या है? AI Portrait Camera, AI Snap Key, AI Editing Toolkit, AI Remix Collage और उन्नत कैमरा व कनेक्टिविटी फीचर्स इसकी प्रमुख खूबियां हैं।
Explore free Skill India courses with certificates, government schemes, online platforms, salaries, and career opportunities in India.
India’s job market is changing rapidly. Today, companies are hiring candidates based on practical Skill rather than only degrees. Because of this shift, free Skill development courses in India are becoming one of the most searched career opportunities among students, freshers, women, unemployed youth, and working professionals.
The Indian government, private EdTech platforms, and global learning portals now provide free online courses with certificates India students can access from home. These programs cover digital marketing, IT, healthcare, spoken English, retail, finance, coding, construction, beauty, hospitality, agriculture, and many more industries.
This complete guide explains the best free Skill India courses in 2025, including government schemes, online learning platforms, certificate value, salaries after training, registration process, scam alerts, and career opportunities after course completion.
Why Skill Development Courses Are Important in India
Traditional education alone is no longer enough in many industries. Employers now prefer candidates who already have practical Skill training.
Free Skill development courses help candidates:
Improve employability
Learn job-ready abilities
Gain industry certificates
Start freelancing careers
Apply for government and private jobs
Build income opportunities from home
Additionally, India’s digital economy, startup ecosystem, manufacturing sector, healthcare industry, and service businesses are creating strong demand for trained workers.
As a result, Skill India free courses continue growing in popularity across urban and rural India.
What Are Free Skill Development Courses in India
Free Skill development courses are training programs funded either by:
Government schemes
Educational institutions
Private EdTech companies
Corporate Skill initiatives
These courses usually provide:
Video training
Live classes
Practical assignments
Assessments
Digital certificates
Some programs are completely online, while others include classroom training through authorised centres.
Many government and online Skill development programs are completely free. However, some platforms charge optional certification fees.
Which free Skill course is best in India?
Digital marketing, IT, healthcare, coding, and communication Skill courses currently show strong demand.
Is PMKVY certification valid?
Yes. PMKVY certification is government-recognised and linked with NSDC standards.
Can students join Skill India free courses?
Yes. Students, freshers, women, and unemployed youth can apply for many programs.
Which Skill course gives the highest salary?
Technology-related Skill programs like software development, data analytics, and cybersecurity generally offer higher salaries.
Can I do Skill courses online from home?
Yes. Many platforms now provide fully online Skill development courses India wide.
Conclusion
Free Skill development courses in India are creating powerful opportunities for students, freshers, women, unemployed youth, and working professionals who want practical career growth.
Government schemes like PMKVY, SIDH, DDU-GKY, and SWAYAM continue expanding access to affordable Skill education across India. At the same time, platforms like Google Skillshop, Simplilearn SkillUp, and Great Learning help learners build industry-relevant digital capabilities.
Instead of collecting random certificates, focus on Skill programs connected with real job demand. Consistent learning, project building, and practical application remain the strongest path toward long-term career growth in India’s evolving employment market.
Learn how to start a blog in India in 2026 with SEO, WordPress, AdSense, GST, affiliate marketing and real earning strategies step by step.
Blogging in India is no longer just a side hobby. Today, it has become a real digital business model for students, freelancers, working professionals, homemakers, and creators who want to build long-term online income.
Thousands of Indian bloggers are generating revenue through:
Google AdSense
Affiliate marketing
Sponsored collaborations
Digital products
Freelance services
Online consulting
At the same time, blogging is still one of the lowest-investment online businesses in India. You can start a professional blog with a small budget and gradually turn it into a full-time income source.
However, most beginners fail because they choose the wrong niche, use poor SEO strategies, publish low-quality content, or ignore India-specific opportunities.
This guide explains the complete blogging process in India step by step. It covers SEO, hosting, WordPress, monetisation, AdSense, affiliate marketing, GST, tax rules, and long-term growth strategies in a practical format.
By the end of this article, you will understand exactly how to start blogging in India professionally.
Search traffic is growing continuously because millions of users search daily for:
Education guides
AI tools
Finance advice
Government jobs
Product reviews
Cricket updates
Recipes
Career information
Mobile comparisons
Google still depends heavily on quality content. Websites that solve user problems properly continue receiving traffic and revenue.
Unlike social media content, blog articles can rank for years and generate recurring traffic.
That is why blogging remains one of the most scalable online businesses in India.
Why Blogging Works Extremely Well in India
Massive Internet Growth
India has one of the largest internet audiences in the world. Affordable smartphones and cheap data plans continue increasing content consumption daily.
As internet penetration expands into tier-2 and tier-3 cities, regional blogging opportunities are also growing rapidly.
Hindi and Regional Blogging Is Growing Fast
Most websites still focus heavily on English content.
However, millions of users search in:
Hindi
Marathi
Tamil
Bengali
Telugu
Gujarati
This creates a huge SEO opportunity because competition is still lower compared to English blogging.
Most hosting providers now offer one-click WordPress setup.
Basic process:
Login to hosting account
Open WordPress installer
Select domain
Create admin credentials
Install WordPress
Your website becomes live within minutes.
Step 5 — Choose a Fast SEO-Friendly Theme
Themes affect:
Speed
User experience
SEO
Mobile optimisation
Best WordPress Themes for Blogging
Theme
Best For
Astra
Beginners
GeneratePress
SEO blogs
Kadence
Flexible design
Blocksy
Speed optimisation
Why Mobile Optimisation Matters in India
Most Indian users browse websites using mobile devices.
A slow website causes:
Higher bounce rates
Lower rankings
Reduced revenue
Google also prioritises mobile-first indexing.
Step 6 — Install Essential Plugins
Plugins improve website functionality.
Best Plugins for Indian Bloggers
Plugin
Purpose
Rank Math
SEO optimisation
LiteSpeed Cache
Website speed
UpdraftPlus
Backups
WPForms
Contact forms
Wordfence
Security
Avoid unnecessary plugins because they slow websites down.
Step 7 — Create Important Pages
Before applying for AdSense, create:
About Us
Contact Us
Privacy Policy
Disclaimer
Terms & Conditions
These pages improve website trust and professionalism.
Step 8 — Learn SEO for Blogging
SEO is the main traffic source for most successful blogs.
What Is SEO?
SEO means Search Engine Optimisation.
It helps your content rank higher on Google search results.
Types of SEO
SEO Type
Purpose
On-Page SEO
Content optimisation
Technical SEO
Website performance
Off-Page SEO
Backlink building
Keyword Research for Indian Traffic
Search for keywords Indian users actually type.
Examples:
blogging kaise kare
best laptops under 50000
IPL prediction today
AI tools for students
Best Free SEO Tools
Tool
Purpose
Google Trends
Search trends
Google Search Console
Performance tracking
Ubersuggest
Keyword research
Ahrefs Webmaster Tools
SEO analysis
AnswerThePublic
Question keywords
On-Page SEO Checklist
Include keywords in:
Title
URL
Headings
First paragraph
Meta description
Use internal linking properly for better rankings.
Step 9 — Content Strategy for Indian Audience
Publishing random articles rarely works.
A proper content strategy is essential.
Best Content Formats
Content Type
SEO Performance
Tutorials
Excellent
Listicles
Excellent
Reviews
High
Comparisons
High
Case Studies
Excellent
Seasonal Content Strategy in India
Indian search trends change throughout the year.
Important seasons include:
Season
Opportunity
IPL
Cricket traffic
Diwali
Shopping traffic
Board Exams
Education traffic
Budget Season
Finance traffic
Festivals
Lifestyle traffic
Publishing early helps capture search demand before competitors.
Hindi vs English Blogging in India
Both can work extremely well.
Advantages of English Blogging
Higher CPC
Global audience
Better affiliate programs
Advantages of Hindi Blogging
Lower competition
Faster rankings
Strong audience loyalty
Best Modern Strategy
Many creators now combine:
English blog articles
Hindi explanations
Hinglish YouTube support
This strategy works very effectively in India.
Step 10 — Promote Your Blog Properly
SEO takes time. Promotion accelerates growth.
Best Traffic Sources
Platform
Effectiveness
Google SEO
Best long-term
YouTube
Excellent
Quora
Strong
WhatsApp
Very effective
Telegram
Good
Pinterest
Strong for lifestyle blogs
WhatsApp Marketing for Blogs
WhatsApp sharing is extremely common in India.
You can:
Build niche groups
Create broadcast lists
Share useful content
Avoid spammy promotion tactics.
Quora Marketing Strategy
Answer relevant questions in detail.
Then naturally link your article when appropriate.
This strategy helps beginners build initial traffic.
Step 11 — How Bloggers Earn Money in India
There are multiple monetisation methods.
Google AdSense
AdSense pays bloggers for displaying ads.
AdSense RPM in India
Niche
Approx RPM
Finance
₹150–₹800
Tech
₹80–₹300
Education
₹50–₹200
Entertainment
₹20–₹100
AdSense Approval Tips
Before applying:
Publish 20–30 quality articles
Use a custom domain
Improve mobile design
Create policy pages
Avoid copied content
Affiliate Marketing
Affiliate marketing often earns more than display ads.
You recommend products and earn commission from sales.
Best Affiliate Programs in India
Affiliate Program
Best Use
Amazon Associates India
Product blogs
Hostinger Affiliate
Blogging niche
Bluehost Affiliate
Hosting niche
Flipkart Affiliate
Indian shoppers
Meesho Affiliate
Budget audience
Sponsored Posts
Brands pay bloggers to promote products or services.
This income source grows with traffic and authority.
Selling Digital Products
Indian bloggers now sell:
Courses
Templates
E-books
AI prompts
Consulting sessions
Realistic Blogging Income Timeline
Months 1–3
Expected earnings:
₹0–₹1,000
Focus areas:
Content publishing
SEO
Website setup
Months 4–6
Expected earnings:
₹1,000–₹10,000
Possible monetisation:
AdSense
Affiliate income
Months 7–12
Expected earnings:
₹10,000–₹50,000+
Growth depends on:
SEO consistency
Content quality
Keyword targeting
GST for Bloggers in India
Most websites ignore this important topic.
However, taxation matters once blogging income grows.
Is GST Registration Necessary?
GST may become necessary if:
Turnover crosses legal limits
You provide international services
You receive foreign payments
Consult a qualified CA once your earnings grow consistently.
Blogging Income That May Attract GST
Examples include:
Affiliate commissions
Sponsored posts
Freelance writing
Ad revenue
SEO services
Important GST Terms
Term
Meaning
GSTIN
GST registration number
LUT
Used for export services
ITC
Input Tax Credit
Income Tax for Bloggers in India
Blogging income is taxable.
You must maintain proper records.
Taxable Blogging Income
Income Type
Taxable
AdSense
Yes
Affiliate marketing
Yes
Sponsored posts
Yes
Freelancing
Yes
Common Business Expenses Bloggers Claim
Possible deductions include:
Hosting fees
Internet bills
Domain renewals
Software subscriptions
Laptop purchases
Always maintain invoices and payment records.
Common Blogging Mistakes Beginners Make
Choosing Extremely Broad Niches
Avoid publishing random topics on one website.
Ignoring SEO Completely
SEO is the foundation of long-term blogging traffic.
Publishing Thin AI Content
Low-quality content rarely ranks consistently.
Expecting Fast Income
Blogging requires patience and consistency.
Buying Spam Backlinks
Poor backlinks can damage rankings badly.
Blogging Success Stories in India
Harsh Agrawal
Built one of India’s most recognised blogging brands.
Amit Agarwal
Among India’s earliest professional tech bloggers.
Anil Agarwal
Built a successful affiliate marketing business through blogging.
Final Blogging Checklist
Week 1
Choose niche
Buy domain
Purchase hosting
Week 2
Install WordPress
Setup theme
Create pages
Week 3
Publish first 10 articles
Setup Google Search Console
Month 2–3
Improve SEO
Build backlinks
Increase publishing consistency
Month 4–6
Apply for AdSense
Start affiliate marketing
Frequently Asked Questions
Is blogging legal in India?
Yes, blogging is completely legal in India.
Can I start blogging for free?
Yes. You can start using Blogger.com or WordPress.com.
Which language is best for blogging in India?
English, Hindi, and regional languages all work well depending on your target audience.
How long does blogging take to make money?
Most blogs require 6–12 months of consistent work before generating meaningful income.
Which niche is best for blogging in India?
Popular niches include AI tools, finance, education, blogging, cricket, and government jobs.
Conclusion
Blogging in India still offers massive long-term opportunities for creators who focus on quality content, SEO, and audience trust.
The biggest advantage today is not simply creating content. The real opportunity is building helpful, experience-driven, India-focused websites that solve real user problems.
If you choose the right niche, publish consistently, and follow proper SEO practices, blogging can become a scalable online business with multiple income sources.
The earlier you start, the faster you build authority, traffic, and long-term digital assets.