नासिक करेंसी नोट प्रेस में अब्दुल करीम तेलगी के स्टॉप घोटाले के बाद एक बार फिर सेंधमारी होने जा रही थी। इसके लिए कुछ बिहारियों ने पुरी तैयारी कर ली थी। लेकिन समय रहते पुलिस ने सारा खेल समाप्त कर दिया।
मुंबई: पुरानी कहानी फिर एक बार दोहराई जाने वाली थी। लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने खेला कर दिया। खबर नासिक सिक्यूरिटी प्रेस यानी नासिक करेंसी नोट प्रेस और नासिक के सरकारी टकसाल की है। जहां कभी अब्दुल करीम तेलगी ने सेंध लगाई थी। तेलगी ने अपना नेटवर्क तैयार करके अभेद माने जाने वाले प्रेस की पुरानी और खारिज हो चुकीं ‘मशीनें’ खरीदें जिससे स्टांप पेपर पर सुरक्षा चिन्ह (सिक्योरिटी मार्क्स) छापे जा सकें। इसी तरीके के अपराध होने से पहले ही मुंबई पुलिस ने बिहार से 7 लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। जिन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर प्रिंटिंग प्रेस में नौकरी हांसिल की थी।
मामले की तहकीकात
खबर के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने सोमवार को बिहार के नालंदा जिले के सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने फर्जीवाड़ा करके करंसी नोट प्रेस नासिक में नकली सर्टिफिकेट की मदद से योग्यता परीक्षा पास की और नौकरी हासिल कर ली। फिलहाल पवई पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है।
फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर मिलि नौकरी
आरोपियों ने नौकरी पाने के लिए कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्र जमा किए थे। पवई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो इसका खुलासा हुआ। शिकायत के मुताबिक, करेंसी नोट प्रेस नासिक ने 2022-23 में जूनियर टेक्नीशियन (स्टाम्प/कंट्रोल), जूनियर टेक्नीशियन (वर्कशॉप/इलेक्ट्रिकल) और सुपरवाइजर के पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें उचित प्रक्रिया के बाद रिक्त पदों को भर दिया गया था।
सीसीटीवी कैमरे से हुआ खुलासा
कुछ हफ़्ते पहले ही करेंसी नोट प्रेस को सूचना मिली, कि कुछ उम्मीदवारों ने नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी करके परीक्षा पास किया है। जांच शुरू की गई और अधिकारियों ने पवई में आईओएन डिजिटल ज़ोन में परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी फुटेज को स्कैन किया, जहाँ 13 मार्च, 2022 और 4 मार्च, 2023 को परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें पाया गया कि जिन उम्मीदवारों को नौकरी मिली है उनकी जगह पर दूसरे लोगों ने एक्जाम दिया है।
अधिकारियों ने क्या कहा?
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता अधिकारी ने एफआईआर में कहा कि यह पाया गया कि बिहार के सात उम्मीदवारों ने कभी परीक्षा ही नहीं दी थी और उन्होंने फर्जी उम्मीदवार भेजे थे, जिन्होंने उनकी जगह परीक्षा दी। आरोपी उम्मीदवारों की पहचान रवि रंजन कुमार, संदीप कुमार, शिशुपाल कुमार, आयुष्य राज, राजीव सिंह, संदीप कुमार और आशुतोष कुमार के रूप में की गई है। ये सभी बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं। जांच अधिकारियों ने इसके बाद नौकरी पाने वाले और काम कर रहे उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रमाण पत्रों की प्रमाणिकता की जांच की। एफआईआर में कहा गया है कि यह पता चला कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए आईटीआई प्रमाण पत्र और डिप्लोमा प्रमाण पत्र फर्जी हैं।
नासिक पुलिस ने मुंबई को किया ट्रांसफर
एफआईआर में कहा गया है कि इस तरह के धोखाधड़ीपूर्ण कार्यों से आरोपियों ने योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय किया है और करेंसी नोट प्रेस, नासिक के साथ धोखाधड़ी की है। करेंसी नोट प्रेस ने नासिक के उपनगर पुलिस स्टेशन में सात आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। नासिक पुलिस ने डेप्यूटी मैनेजर (लीगल) 30 वर्षीय विक्रमसिंह चौधरी की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज की और मामले को आगे की जांच के लिए पवई पुलिस स्टेशन को ट्रांसफर कर दिया।
आपराधिक षड्यंत्र
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र आदि के लिए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और महाराष्ट्र विश्वविद्यालय बोर्ड और अन्य निर्दिष्ट परीक्षा (कदाचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है और मामले की और अधिक तहकीकात कर रही है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस उन डमी अभ्यर्थियों का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने परीक्षा में आरोपियों की मदद की थी।
