महाराष्ट्र में निजी अस्पतालों को इलाज और सुविधाओं के रेट मराठी व अंग्रेजी में प्रदर्शित करने होंगे। स्वास्थ्य विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को परिपत्र जारी किया।
मुंबई: महाराष्ट्र में निजी अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों को अब इलाज और उपलब्ध सुविधाओं की रेट लिस्ट मरीजों को आसानी से दिखाई देने वाली जगह पर लगानी होगी। राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च का अंदाजा लगाने और अपने बजट की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
अस्पतालों को रेट लिस्ट मराठी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में प्रदर्शित करनी होगी। साथ ही, सेवाओं के शुल्क में बदलाव होने पर सूची को तुरंत अपडेट करना भी जरूरी होगा।
इलाज और सुविधाओं के रेट दिखाना जरूरी
इस व्यवस्था के तहत मुंबई परिचर्या गृह पंजीकरण अधिनियम, 1949 के अंतर्गत पंजीकृत निजी अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों को महाराष्ट्र परिचर्या गृह नियमावली, 2021 की अनुसूची तीन में शामिल सेवाओं और सुविधाओं के रेट प्रदर्शित करने होंगे।
नियमों के अनुसार, अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाओं और अस्पताल से जुड़ी सुविधाओं के शुल्क को सार्वजनिक रूप से दिखाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसका उद्देश्य मरीजों को उपलब्ध सेवाओं के संभावित खर्च की जानकारी देना है, ताकि इलाज के दौरान शुल्क को लेकर अनावश्यक भ्रम की स्थिति न बने।
अस्पताल में ऐसी जगह लगानी होगी रेट लिस्ट
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के अनुसार, रेट लिस्ट अस्पताल परिसर में किसी ऐसे प्रमुख स्थान पर लगानी होगी, जहां मरीजों और उनके परिजनों की आसानी से नजर पड़े। सूची ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां पहुंचकर उसे बिना परेशानी के पढ़ा जा सके।
अस्पतालों को यह भी ध्यान रखना होगा कि रेट लिस्ट स्पष्ट और आसानी से पढ़ने योग्य हो। यदि किसी सेवा या सुविधा का शुल्क बदलता है, तो पुरानी दरों वाली सूची को तत्काल अपडेट करना होगा, ताकि मरीजों को गलत या पुरानी जानकारी के आधार पर खर्च का अनुमान न लगाना पड़े।
केंद्र सरकार के निर्देश के बाद जारी हुआ परिपत्र
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में निर्देश दिए थे। इन्हीं निर्देशों के अनुरूप महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 16 अक्टूबर को परिपत्र जारी किया।
इस व्यवस्था से मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं और उनके शुल्क की जानकारी पहले से मिल सकेगी। इससे इलाज के खर्च की योजना बनाना आसान होगा और मरीजों तथा अस्पताल प्रशासन के बीच शुल्क को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
