मुंबई पहुंचे आदिवासी छात्रों को हिरासत में लेने के आरोप पर विवाद बढ़ा। कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि पुलिस ने आरोपों से इनकार किया।
मुंबई: आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सोमवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। नासिक समेत महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से मुंबई पहुंचे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई किए जाने का आरोप लगा है। कांग्रेस का दावा है कि देर रात तिलक भवन में ठहरे छात्रों को पुलिस ने जगाकर हिरासत में लिया और प्रदर्शन से पहले छात्रों को रोका गया। वहीं, पुलिस ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में फिलहाल विवाद का केंद्र छात्रों की हिरासत और तिलक भवन में पुलिस कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने तिलक भवन पहुंचकर छात्रों से मुलाकात की और सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में संवैधानिक व्यवस्था है या जंगलराज। गायकवाड़ ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने मुंबई आए छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन उन्हें प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है।
आजाद मैदान में प्रदर्शन की तैयारी के बीच कार्रवाई का विवाद
आदिवासी छात्र अपनी लंबित मांगों को लेकर मुंबई पहुंचे थे। उनका उद्देश्य आजाद मैदान में प्रदर्शन करना था। आंदोलन से जुड़े छात्रों की प्रमुख मांगों में आदिवासी विकास मंत्री अशोक रामाजी उइके और विभागीय आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी शामिल है।
मुंबई पहुंचने से पहले छात्रों के समूह के नासिक से पैदल मार्च करके आने की जानकारी सामने आई थी। छात्रों के तिलक भवन में ठहरने के बाद देर रात पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद शुरू हुआ।
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि रात करीब तीन बजे पुलिस ने छात्रों को रोका, उनके फोटो लिए और उन्हें हिरासत में लिया। छात्रों को लेकर जा रही बस को भी पुलिस द्वारा कब्जे में लेने का दावा किया गया। तिलक भवन में पुलिस के प्रवेश को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए।
हालांकि, पुलिस ने कांग्रेस के इन आरोपों को नकार दिया है। पुलिस की ओर से कार्रवाई के कारण, हिरासत में लिए गए छात्रों की सटीक संख्या और उनके खिलाफ किसी मामले की स्थिति को लेकर फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
वर्षा गायकवाड़ ने सरकार पर साधा निशाना
तिलक भवन में छात्रों से मुलाकात के बाद वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि छात्र न्याय की मांग लेकर मुंबई आए हैं। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को छात्रों से मिलकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए थीं, लेकिन इसके बजाय पुलिस कार्रवाई का रास्ता अपनाया गया।
गायकवाड़ ने पुलिस के तिलक भवन में प्रवेश पर भी सवाल उठाया। उन्होंने राजनीतिक तौर पर सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि देवेंद्र फडणवीस की पुलिस कांग्रेस कार्यालय में प्रवेश कर सकती है, तो क्या कांग्रेस भी मुख्यमंत्री के आवास में प्रवेश कर सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए छात्रों के आंदोलन पर कार्रवाई कर रही है। गायकवाड़ ने यह भी कहा कि तिलक भवन सभी के लिए खुला है, लेकिन पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण वहां का माहौल पुलिस शिविर जैसा बना दिया गया है।
अगस्त से चल रहा है आदिवासी छात्रों का आंदोलन
मुंबई का मौजूदा विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ है। आदिवासी छात्रों का आंदोलन अगस्त से महाराष्ट्र के कई हिस्सों में चल रहा है। पुणे के मांजरी स्थित सरकारी आदिवासी छात्रावास में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लंबे समय तक चला था। अगस्त के दौरान राज्य के कम से कम 25 स्थानों पर छात्रों के आंदोलन की जानकारी सामने आई थी।
छात्रों की मांगों में आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित 12,500 सरकारी पदों को भरना प्रमुख मुद्दा है। इसके अलावा छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने, छात्रों को मिलने वाले भत्तों को महंगाई और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा खाली पदों को भरने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा रही है।
महाराष्ट्र में करीब 490 आदिवासी छात्रावासों में लगभग 59,020 छात्र रहते हैं। छात्रों का कहना है कि छात्रावासों और आश्रम विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं, कर्मचारियों और सुरक्षा से जुड़े सवाल लंबे समय से बने हुए हैं।
छात्रावास नियमों को लेकर भी नाराजगी
आंदोलन के दौरान आदिवासी छात्रों ने छात्रावास प्रवेश से जुड़े नियमों और विभागीय शासनादेशों पर भी आपत्ति जताई थी। उम्र सीमा से जुड़े प्रावधान को लेकर हुए विरोध के बाद सरकार ने इस प्रावधान को स्थगित करने की कार्रवाई की थी, लेकिन छात्रों का कहना था कि उनकी बाकी प्रमुख मांगों पर पर्याप्त समाधान नहीं हुआ।
छात्र बेहतर छात्रावास भवन, रसोई और अध्ययन कक्ष जैसी सुविधाओं के साथ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग करते रहे हैं। महिला आदिवासी छात्रावासों में सुरक्षा और कुछ कथित अनिवार्य चिकित्सा प्रक्रियाओं को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए थे।
गडचिरोली में तीन आदिवासी छात्राओं की सांप के काटने से हुई मौत का मुद्दा भी आंदोलन में प्रमुख रहा। प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग छात्रों ने उठाई थी।
सरकार से बातचीत हुई, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
अगस्त में आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके के साथ छात्रों की कई दौर की बातचीत हुई थी। छात्रों का कहना था कि बैठकों के बावजूद उनकी अधिकांश मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकला। सरकार की ओर से छात्रावास प्रवेश से जुड़े एक प्रमुख मुद्दे पर कार्रवाई की गई थी, जबकि 12,500 पदों सहित कई अन्य मांगों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।
छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन से उनकी समस्याएं दूर नहीं होंगी। इसी वजह से आंदोलन अलग-अलग स्तर पर जारी रहा और अब छात्रों ने मुंबई का रुख किया है।
वर्षा गायकवाड़ ने पुणे के महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग से जुड़े छात्र आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पुणे में भी छात्र कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं और कांग्रेस छात्र आंदोलनों के साथ खड़ी है। हालांकि, महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग का आंदोलन आदिवासी छात्रों के मौजूदा मुंबई आंदोलन से अलग मुद्दा है।
अब सबसे बड़ा सवाल छात्रों की आगे की रणनीति पर
मुंबई में मौजूदा विवाद के बाद अब छात्रों के प्रदर्शन की अगली दिशा महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ छात्र अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं, दूसरी तरफ तिलक भवन में पुलिस कार्रवाई और छात्रों को हिरासत में लेने के आरोपों को लेकर कांग्रेस और पुलिस के बयान अलग-अलग हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट होना बाकी है कि कितने छात्रों को हिरासत में लिया गया, उनके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई हुई और मुंबई में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है। छात्रों की मांगों पर सरकार की अगली औपचारिक कार्रवाई भी इस आंदोलन की दिशा तय करेगी।
