दहिसर में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में Rapido चालक इरफान हमीद शेख गिरफ्तार हुआ। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन से भिवंडी तक उसका सुराग पाया।
मुंबई: दहिसर में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में 19 वर्षीय Rapido चालक इरफान हमीद शेख को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, नाबालिग लड़की की करीब साढ़े तीन महीने की गर्भावस्था की जानकारी सोनोग्राफी के बाद सामने आई, जिसके बाद उसने परिवार को घटना के बारे में बताया। मामले की शिकायत मिलने पर दहिसर पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी जानकारी तथा मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी तक पहुंची। पुलिस ने उसे भिवंडी से गिरफ्तार किया और अदालत में पेश किया।
Rapido की सवारी के दौरान हुआ संपर्क
पुलिस के अनुसार, आरोपी की नाबालिग से पहचान Rapido की सवारी के दौरान हुई थी। यात्रा पूरी होने के बाद दोनों के बीच संपर्क बना रहा। आरोपी ने कथित तौर पर खुद को सोलापुर का रहने वाला बताया और इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से बातचीत शुरू हुई।
जांच में सामने आया कि दोनों की बाद में कई बार मुलाकात हुई। पुलिस शिकायत के अनुसार, आरोपी ने बाद में नाबालिग को मिलने के लिए बुलाया और वहां उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाने का आरोप है। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए मामले में POCSO कानून के तहत कार्रवाई की गई है।
सोनोग्राफी के बाद परिवार को मिली जानकारी
परिवार को मामले की जानकारी तब हुई जब नाबालिग में गर्भावस्था के संकेत दिखाई दिए। परिवार उसे जांच के लिए लेकर गए, जहां सोनोग्राफी में करीब साढ़े तीन महीने की गर्भावस्था सामने आई।
इसके बाद नाबालिग ने परिवार को आरोपी के बारे में बताया। परिवार ने दहिसर पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
POCSO कानून के तहत बच्चे की पहचान सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है। इसलिए नाबालिग से जुड़ी ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं लाई जा सकती जिससे उसकी पहचान हो सके।
मोबाइल लोकेशन से भिवंडी तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने आरोपी की तलाश के दौरान तकनीकी जानकारी और मोबाइल लोकेशन का इस्तेमाल किया। जांच के दौरान पुलिस टीम आरोपी के परिवार के घर तक भी पहुंची और उसके माता-पिता से पूछताछ की।
पुलिस के अनुसार, आरोपी को छिपाने और उसे मुंबई से बाहर ले जाने की कोशिश किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई। इसी पूछताछ और तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस को आरोपी के भिवंडी में होने की जानकारी मिली। इसके बाद दहिसर पुलिस ने उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई में PSI Archana Wagaj, PSI Hemant Gite और दहिसर पुलिस की डिटेक्शन टीम की भूमिका रही।
जांच में Rapido का डिजिटल रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकता है
इस मामले की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी आरोपी और नाबालिग की पहली मुलाकात बताई जा रही Rapido यात्रा है। Rapido की सेवा में यात्रा के दौरान चालक की लोकेशन को वास्तविक समय में देखने की सुविधा उपलब्ध है और ऐप में यात्रा तथा चालक से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है।
हालांकि, इस मामले में पुलिस ने Rapido से कौन-कौन से रिकॉर्ड हासिल किए और आरोपी तक पहुंचने में ऐप की यात्रा संबंधी जानकारी की कितनी भूमिका रही, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। जांच के दौरान यात्रा का रिकॉर्ड, चालक का खाता, वाहन की जानकारी और डिजिटल संपर्क जैसे पहलू महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।
19 साल के चालक की पात्रता भी जांच का अहम सवाल
महाराष्ट्र के 2025 के बाइक-टैक्सी नियमों में चालक की उम्र 20 से 50 वर्ष निर्धारित की गई थी। नियमों में वैध व्यावसायिक लाइसेंस, सार्वजनिक सेवा वाहन का बैज और पुलिस सत्यापन जैसी शर्तें भी रखी गई थीं। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा के लिए जीपीएस निगरानी, आपात व्यवस्था और चौबीसों घंटे नियंत्रण कक्ष जैसी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया था।
ऐसे में इस मामले की जांच में यह स्पष्ट होना भी महत्वपूर्ण है कि 19 वर्षीय इरफान हमीद शेख किस अनुमति और किस श्रेणी के तहत Rapido सेवा चला रहा था, उसके दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ था और संबंधित वाहन किस नियम के तहत संचालित हो रहा था।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र में 2026 के दौरान Rapido समेत ऐप आधारित परिवहन सेवाओं के लाइसेंस और बाइक-टैक्सी संचालन को लेकर नियामकीय स्थिति में कई बदलाव हुए। मार्च में राज्य सरकार ने Rapido, Ola और Uber की अस्थायी बाइक-टैक्सी अनुमतियां रद्द की थीं। बाद में जुलाई 2026 में नए मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम लागू किए गए और सितंबर में Rapido समेत प्रमुख कंपनियों ने नए लाइसेंस के लिए आवेदन किए।
ऐप आधारित यात्रा की सुरक्षा फिर सवाल
इस घटना के बीच ऐप आधारित परिवहन सेवाओं में चालक सत्यापन, यात्री सुरक्षा और डिजिटल निगरानी का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। महाराष्ट्र के नियमों में चालक सत्यापन और यात्री सुरक्षा के लिए कई व्यवस्थाएं निर्धारित की गई हैं। वहीं सितंबर 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट के सामने भी ऐप आधारित परिवहन सेवाओं में महिलाओं की सुरक्षा, चालक सत्यापन, आपात प्रतिक्रिया और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने जैसे मुद्दे उठे हैं।
इन घटनाक्रमों के बीच दहिसर मामले में यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि आरोपी का चालक के रूप में सत्यापन किस तरह हुआ था और पुलिस को उसे खोजने में कौन-कौन से डिजिटल सुराग मिले।
आगे की जांच में क्या सामने आएगा
दहिसर पुलिस मामले में आरोपी से पूछताछ के साथ नाबालिग के साथ उसके संपर्क, मुलाकातों, मोबाइल और सोशल मीडिया गतिविधियों तथा घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। आरोपी को अदालत में पेश किया जा चुका है।
जांच के अगले चरण में यह स्पष्ट होना बाकी है कि Rapido की संबंधित यात्रा का रिकॉर्ड, चालक के पंजीकरण और सत्यापन संबंधी दस्तावेज तथा डिजिटल संपर्कों से पुलिस को क्या अतिरिक्त जानकारी मिलती है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होगी।
