ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR विवाद के बीच 2.07 करोड़ मतदाताओं पर नजर

gyanesh-kumar-protest-sir-voter-list-mumbai-delhi

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR को लेकर विवाद तेज। महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम और 12 अक्टूबर की समयसीमा जानिए।

मुंबई: मुंबई और दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन हुए। मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ का आह्वान किया, जबकि दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। विरोध का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर है। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया के तहत करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हुए हैं, हालांकि यह संख्या अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की नहीं है।

मुंबई में शिवाजी पार्क के बाहर कड़ी सुरक्षा

मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद सीजेपी ने शुक्रवार शाम 4 बजे शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 के पास आंदोलन करने का ऐलान किया। पुलिस ने शिवाजी पार्क में सभा से जुड़े न्यायिक निर्देश, आवश्यक स्थानीय अनुमति, यातायात, शोर और आसपास के अस्पतालों तक पहुंच जैसे कारणों का हवाला दिया है। प्रदर्शन को देखते हुए शिवाजी पार्क और दादर रेलवे स्टेशन के आसपास बैरिकेडिंग तथा अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।

gyanesh-kumar-protest-sir-voter-list-mumbai

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन को देशव्यापी अभियान की शुरुआत बताया है। उनके साथ सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका भी अभियान में सक्रिय हैं। सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर पर रोक, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को आधार बनाकर चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा नागरिक समाज की भागीदारी की मांग रखी है। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की है।

अभिजीत दीपके को लेकर हिरासत की खबर पर भी स्थिति स्पष्ट हुई। एक दिन पहले मरीन ड्राइव के पास उन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी, लेकिन सीजेपी ने इसका खंडन किया और दीपके ने कार के भीतर से अपनी तस्वीर साझा की।

शिवाजी पार्क में स्थानीय लोगों की आपत्ति

प्रदर्शन को लेकर दादर के कुछ स्थानीय निवासियों ने भी आपत्ति जताई है। सुनील भगवत ने कहा कि शिवाजी पार्क में लगातार प्रदर्शनों से आम लोगों की परेशानी बढ़ती है। स्थानीय निवासी रविंद्र ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान भीड़, यातायात और आसपास के स्कूलों तथा अस्पताल पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाया। ये स्थानीय निवासियों की आपत्तियां हैं और इन्हें पूरे इलाके की सामूहिक राय के रूप में नहीं देखा जा सकता।

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और हिरासत

gyanesh-kumar-protest-sir-voter-list

दिल्ली में जंतर-मंतर के पास एसएफआई और डीवाईएफआई के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। एएपी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। बाद की जानकारी में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की संख्या 500 से अधिक बताई गई। आरजेडी सांसद मनोज झा भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल बताए गए हैं।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई। इसके तहत बिना लिखित अनुमति के सभा, जुलूस, प्रदर्शन, धरना, नारेबाजी और भाषण पर प्रतिबंध लगाया गया। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस तथा सुरक्षा बल तैनात किए गए और कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई।

एसआईआर विवाद के केंद्र में महाराष्ट्र के 2.07 करोड़ मतदाता

महाराष्ट्र में एसआईआर के कारण मतदाता सूची को लेकर सबसे बड़ा सवाल 2.07 करोड़ नामों का है। राज्य में एसआईआर से पहले करीब 9.79 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में करीब 7.72 करोड़ नाम शामिल हुए। लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के गणना प्रपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके नाम प्रारूप सूची में नहीं आए।

हालांकि, 2.07 करोड़ का आंकड़ा अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं है। पात्र मतदाता दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम शामिल करा सकते हैं। चुनाव आयोग ने ऐसे छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।

1.22 करोड़ मतदाताओं का मामला क्या है?

महाराष्ट्र में करीब 1.22 करोड़ मतदाता ऐसे भी हैं जिन्हें उनके पुराने चुनावी रिकॉर्ड से जुड़े विवरण में विसंगति या मैपिंग नहीं होने के कारण नोटिस प्रक्रिया में चिन्हित किया गया है। इनमें करीब 62.48 लाख मामले ऐसे हैं जिनमें पुराने रिकॉर्ड में रिश्तेदारों की जानकारी को लेकर तार्किक विसंगति बताई गई, जबकि करीब 59.76 लाख मतदाता पुराने रिकॉर्ड में रिश्तेदार से मैप नहीं हो सके।

यह आंकड़ा 2.07 करोड़ से अलग है। इसलिए 1.22 करोड़ और 2.07 करोड़ को जोड़कर या दोनों को ‘हटाए गए मतदाता’ बताकर देखना सही नहीं होगा।

नोटिस मिला है तो क्या करना होगा?

एसआईआर प्रक्रिया में ‘नो मैपिंग’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ से जुड़े नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने प्रक्रिया आसान की है। अब सामान्य स्थिति में ऐसे मतदाता को हर मामले में व्यक्तिगत रूप से निर्वाचन कार्यालय जाकर सुनवाई में उपस्थित होना जरूरी नहीं है।

बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज ले सकता है और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड किया जा सकता है। कुछ मामलों में जरूरत पड़ने पर सुनवाई ऑनलाइन भी की जा सकती है और परिवार का कोई वयस्क सदस्य मतदाता की ओर से उपस्थित हो सकता है।

चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर एसआईआर 2026 के लिए नाम खोजने, प्रारूप मतदाता सूची देखने, नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने और बीएलओ से संपर्क करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पात्र व्यक्ति लगातार चलने वाली मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास आवेदन भी कर सकते हैं।

महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक दावा-आपत्ति

महाराष्ट्र में एसआईआर से संबंधित दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। नोटिस, दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर तक रखी गई है और संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जानी है।

इसका मतलब है कि प्रारूप सूची में नाम नहीं मिलने या एसआईआर नोटिस मिलने वाले मतदाताओं के लिए अभी प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है। चुनाव आयोग की व्यवस्था के अनुसार ऐसे मामलों में दावा, आपत्ति और दस्तावेज जमा करने का अवसर उपलब्ध है।

ईसीआई के भीतर कथित मतभेद पर भी विवाद

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध का एक कारण चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल भी हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से करीब 10 महीने में कम से कम 14 अवसरों पर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।

इनमें मतदाता सूची, नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनाव आयोग की तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विषय शामिल बताए गए। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर सहित उसके महत्वपूर्ण फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और एसआईआर को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत में उठाई गई मांगों को अभी न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

4 अक्टूबर को मुंबई में फिर बड़ा मार्च

2 अक्टूबर के आंदोलन के बाद महाराष्ट्र में विरोध का अगला बड़ा कार्यक्रम 4 अक्टूबर को प्रस्तावित है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के संयुक्त मार्च में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) भी शामिल होने की घोषणा कर चुकी हैं।

मार्च भायखला से शुरू होकर बीएमसी मुख्यालय तक जाने का कार्यक्रम है। कांग्रेस की ओर से नाना पटोले और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की ओर से सुप्रिया सुले ने भागीदारी की पुष्टि की है।

आगे क्या होगा?

मुंबई में सीजेपी ने आंदोलन को गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत दूसरे शहरों तक ले जाने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने भी एसआईआर और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अलग-अलग कार्यक्रमों की घोषणा की है।

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर दो स्तरों पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध देश के कई हिस्सों में फैल रहा है, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के लाखों मतदाताओं के लिए एसआईआर प्रक्रिया में अपने नाम और दस्तावेज की स्थिति जांचना महत्वपूर्ण हो गया है। महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर की दावा-आपत्ति समयसीमा और 16 नवंबर की प्रस्तावित अंतिम मतदाता सूची अब इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है।

Ismail Shaikh Avatar
Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading