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  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR विवाद के बीच 2.07 करोड़ मतदाताओं पर नजर

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR विवाद के बीच 2.07 करोड़ मतदाताओं पर नजर

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR को लेकर विवाद तेज। महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम और 12 अक्टूबर की समयसीमा जानिए।

    मुंबई: मुंबई और दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन हुए। मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ का आह्वान किया, जबकि दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। विरोध का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर है। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया के तहत करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हुए हैं, हालांकि यह संख्या अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की नहीं है।

    मुंबई में शिवाजी पार्क के बाहर कड़ी सुरक्षा

    मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद सीजेपी ने शुक्रवार शाम 4 बजे शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 के पास आंदोलन करने का ऐलान किया। पुलिस ने शिवाजी पार्क में सभा से जुड़े न्यायिक निर्देश, आवश्यक स्थानीय अनुमति, यातायात, शोर और आसपास के अस्पतालों तक पहुंच जैसे कारणों का हवाला दिया है। प्रदर्शन को देखते हुए शिवाजी पार्क और दादर रेलवे स्टेशन के आसपास बैरिकेडिंग तथा अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।

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    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन को देशव्यापी अभियान की शुरुआत बताया है। उनके साथ सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका भी अभियान में सक्रिय हैं। सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर पर रोक, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को आधार बनाकर चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा नागरिक समाज की भागीदारी की मांग रखी है। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की है।

    अभिजीत दीपके को लेकर हिरासत की खबर पर भी स्थिति स्पष्ट हुई। एक दिन पहले मरीन ड्राइव के पास उन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी, लेकिन सीजेपी ने इसका खंडन किया और दीपके ने कार के भीतर से अपनी तस्वीर साझा की।

    शिवाजी पार्क में स्थानीय लोगों की आपत्ति

    प्रदर्शन को लेकर दादर के कुछ स्थानीय निवासियों ने भी आपत्ति जताई है। सुनील भगवत ने कहा कि शिवाजी पार्क में लगातार प्रदर्शनों से आम लोगों की परेशानी बढ़ती है। स्थानीय निवासी रविंद्र ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान भीड़, यातायात और आसपास के स्कूलों तथा अस्पताल पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाया। ये स्थानीय निवासियों की आपत्तियां हैं और इन्हें पूरे इलाके की सामूहिक राय के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और हिरासत

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    दिल्ली में जंतर-मंतर के पास एसएफआई और डीवाईएफआई के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। एएपी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। बाद की जानकारी में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की संख्या 500 से अधिक बताई गई। आरजेडी सांसद मनोज झा भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल बताए गए हैं।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई। इसके तहत बिना लिखित अनुमति के सभा, जुलूस, प्रदर्शन, धरना, नारेबाजी और भाषण पर प्रतिबंध लगाया गया। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस तथा सुरक्षा बल तैनात किए गए और कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई।

    एसआईआर विवाद के केंद्र में महाराष्ट्र के 2.07 करोड़ मतदाता

    महाराष्ट्र में एसआईआर के कारण मतदाता सूची को लेकर सबसे बड़ा सवाल 2.07 करोड़ नामों का है। राज्य में एसआईआर से पहले करीब 9.79 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में करीब 7.72 करोड़ नाम शामिल हुए। लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के गणना प्रपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके नाम प्रारूप सूची में नहीं आए।

    हालांकि, 2.07 करोड़ का आंकड़ा अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं है। पात्र मतदाता दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम शामिल करा सकते हैं। चुनाव आयोग ने ऐसे छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।

    1.22 करोड़ मतदाताओं का मामला क्या है?

    महाराष्ट्र में करीब 1.22 करोड़ मतदाता ऐसे भी हैं जिन्हें उनके पुराने चुनावी रिकॉर्ड से जुड़े विवरण में विसंगति या मैपिंग नहीं होने के कारण नोटिस प्रक्रिया में चिन्हित किया गया है। इनमें करीब 62.48 लाख मामले ऐसे हैं जिनमें पुराने रिकॉर्ड में रिश्तेदारों की जानकारी को लेकर तार्किक विसंगति बताई गई, जबकि करीब 59.76 लाख मतदाता पुराने रिकॉर्ड में रिश्तेदार से मैप नहीं हो सके।

    यह आंकड़ा 2.07 करोड़ से अलग है। इसलिए 1.22 करोड़ और 2.07 करोड़ को जोड़कर या दोनों को ‘हटाए गए मतदाता’ बताकर देखना सही नहीं होगा।

    नोटिस मिला है तो क्या करना होगा?

    एसआईआर प्रक्रिया में ‘नो मैपिंग’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ से जुड़े नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने प्रक्रिया आसान की है। अब सामान्य स्थिति में ऐसे मतदाता को हर मामले में व्यक्तिगत रूप से निर्वाचन कार्यालय जाकर सुनवाई में उपस्थित होना जरूरी नहीं है।

    बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज ले सकता है और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड किया जा सकता है। कुछ मामलों में जरूरत पड़ने पर सुनवाई ऑनलाइन भी की जा सकती है और परिवार का कोई वयस्क सदस्य मतदाता की ओर से उपस्थित हो सकता है।

    चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर एसआईआर 2026 के लिए नाम खोजने, प्रारूप मतदाता सूची देखने, नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने और बीएलओ से संपर्क करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पात्र व्यक्ति लगातार चलने वाली मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास आवेदन भी कर सकते हैं।

    महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक दावा-आपत्ति

    महाराष्ट्र में एसआईआर से संबंधित दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। नोटिस, दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर तक रखी गई है और संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जानी है।

    इसका मतलब है कि प्रारूप सूची में नाम नहीं मिलने या एसआईआर नोटिस मिलने वाले मतदाताओं के लिए अभी प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है। चुनाव आयोग की व्यवस्था के अनुसार ऐसे मामलों में दावा, आपत्ति और दस्तावेज जमा करने का अवसर उपलब्ध है।

    ईसीआई के भीतर कथित मतभेद पर भी विवाद

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध का एक कारण चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल भी हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से करीब 10 महीने में कम से कम 14 अवसरों पर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।

    इनमें मतदाता सूची, नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनाव आयोग की तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विषय शामिल बताए गए। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर सहित उसके महत्वपूर्ण फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।

    मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और एसआईआर को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत में उठाई गई मांगों को अभी न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

    4 अक्टूबर को मुंबई में फिर बड़ा मार्च

    2 अक्टूबर के आंदोलन के बाद महाराष्ट्र में विरोध का अगला बड़ा कार्यक्रम 4 अक्टूबर को प्रस्तावित है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के संयुक्त मार्च में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) भी शामिल होने की घोषणा कर चुकी हैं।

    मार्च भायखला से शुरू होकर बीएमसी मुख्यालय तक जाने का कार्यक्रम है। कांग्रेस की ओर से नाना पटोले और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की ओर से सुप्रिया सुले ने भागीदारी की पुष्टि की है।

    आगे क्या होगा?

    मुंबई में सीजेपी ने आंदोलन को गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत दूसरे शहरों तक ले जाने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने भी एसआईआर और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अलग-अलग कार्यक्रमों की घोषणा की है।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर दो स्तरों पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध देश के कई हिस्सों में फैल रहा है, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के लाखों मतदाताओं के लिए एसआईआर प्रक्रिया में अपने नाम और दस्तावेज की स्थिति जांचना महत्वपूर्ण हो गया है। महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर की दावा-आपत्ति समयसीमा और 16 नवंबर की प्रस्तावित अंतिम मतदाता सूची अब इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है।

  • मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    Mumbai Airport पर तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश से उड़ानें प्रभावित हुईं। 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट हुईं, 1,255 यात्री सुरक्षित रहे।

    मुंबई : मुंबई एयरपोर्ट पर मंगलवार 29 सितंबर की शाम खराब मौसम ने हवाई परिचालन को प्रभावित कर दिया। गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश के बीच मुंबई आने वाली कई उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर मोड़ना पड़ा। इनमें सूरत डायवर्ट की गई 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री सवार थे। सभी विमानों ने सूरत एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। वहीं, व्यापक स्तर पर मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ानों की देरी और कुछ उड़ानों के रद्द होने की भी जानकारी सामने आई है।

    मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे से मुंबई जाने वाली उड़ानों के डायवर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। सबसे पहले तिरुचिरापल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-2017 सूरत पहुंची। इसमें 182 यात्री सवार थे। इसके कुछ ही मिनट बाद दिल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-864 को भी सूरत डायवर्ट किया गया। इस विमान में 122 यात्री थे।

    इसके बाद दिल्ली से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2941 सूरत पहुंची। इस विमान में 186 यात्री सवार थे। चेन्नई से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5104 और गोवा से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2746 को भी सूरत भेजा गया। AI-2746 में 135 यात्री सवार थे।

    बेंगलुरु से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5255 करीब 7:47 बजे सूरत पहुंची। इसमें 135 यात्री थे। इसके लगभग तीन मिनट बाद चेन्नई से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-640 ने सूरत में लैंडिंग की। इसमें 112 यात्री सवार थे। सबसे आखिर में भोपाल से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5312 करीब 8 बजे सूरत पहुंची। इस विमान में 204 यात्री सवार थे।

    इस तरह सूरत डायवर्ट की गई इन 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री थे। सूरत एयरपोर्ट पर सभी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई और यात्रियों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। सूरत एयरपोर्ट के निदेशक आनंद नारायण शर्मा ने भी इन उड़ानों के डायवर्जन और सुरक्षित लैंडिंग की पुष्टि की थी।

    सिर्फ सूरत ही नहीं, दूसरे एयरपोर्ट भी बने वैकल्पिक ठिकाने

    मुंबई में मौसम बिगड़ने के बाद सूरत के अलावा दूसरे एयरपोर्ट का भी इस्तेमाल वैकल्पिक लैंडिंग के लिए किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कम-से-कम 11 से 12 मुंबई आने वाली उड़ानों के डायवर्जन की स्थिति सामने आई, हालांकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर रहा। एक अपडेट में 8 उड़ानों के सूरत और 4 उड़ानों के वडोदरा पहुंचने की जानकारी दी गई। वडोदरा पहुंचने वाली उड़ानों में Air India की AI 2447, AI 599, AI 1780 और IndiGo की 6E 329 शामिल थीं।

    वहीं एक अन्य अपडेट में 11 उड़ानों के डायवर्ट होने की जानकारी सामने आई, जिनमें 6 उड़ानों को सूरत और 3 को अहमदाबाद भेजे जाने का विवरण दिया गया। इनमें IndiGo की 6E864, 6E2017 और 6E5104, Air India की AI2941, AI640 और AI2746 शामिल थीं। अहमदाबाद के लिए QP1150, 6E5259 और 6E5163 को डायवर्ट किए जाने की जानकारी दी गई।

    इस अंतर की वजह से डायवर्ट हुई कुल उड़ानों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग आंकड़े सामने आए। हालांकि इतना स्पष्ट है कि मुंबई के खराब मौसम का असर कई मुंबई-बाउंड उड़ानों पर पड़ा और उन्हें सुरक्षित रूप से वैकल्पिक एयरपोर्ट पर उतारा गया।

    213 उड़ानों में देरी, 16 रद्द होने की भी जानकारी

    मौसम का असर सिर्फ डायवर्ट हुई उड़ानों तक सीमित नहीं रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुंबई एयरपोर्ट पर 213 उड़ानों में देरी हुई, जबकि 16 उड़ानें रद्द हुईं। डायवर्जन के कारण सूरत और दूसरे वैकल्पिक एयरपोर्ट पर भी यात्रियों और विमानों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी।

    मुंबई में क्यों बिगड़ा मौसम?

    मंगलवार शाम मुंबई के कई हिस्सों में अचानक बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखा गया। मुलुंड, कुर्ला और अंधेरी समेत कई इलाकों में बारिश हुई और कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति भी बनी। अंधेरी क्षेत्र में जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुंबई-पवई पूर्वानुमान में 29 सितंबर को बादल छाए रहने के साथ बारिश या गरज-चमक की संभावना दर्ज थी। 30 सितंबर के लिए भी एक-दो दौर की बारिश या गरज-चमक का पूर्वानुमान दिया गया था।

    हवाई परिचालन पर मौसम का सीधा असर पड़ा। तेज हवाओं, बिजली चमकने और गरज-चमक जैसी परिस्थितियों में मुंबई में विमानों की लैंडिंग प्रभावित होने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आने वाली उड़ानों को वैकल्पिक एयरपोर्ट की ओर भेजा। सभी डायवर्ट विमान सुरक्षित उतरे।

    सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए क्या इंतजाम?

    डायवर्ट किए गए विमानों के यात्रियों को वैकल्पिक एयरपोर्ट पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए पीने के पानी और रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की गई। वडोदरा में पहुंचे कुछ विमानों के यात्रियों को तत्काल विमान से बाहर नहीं उतारा गया था और आगे की उड़ान के लिए मौसम तथा परिचालन की स्थिति का इंतजार किया जा रहा था।

    अब यात्रियों को मुंबई कब पहुंचाया जाएगा?

    डायवर्ट किए गए विमानों की मुंबई वापसी वहां के मौसम और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मिलने वाली अनुमति पर निर्भर रही। मौसम सामान्य होने और मुंबई एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद विमानों को मुंबई भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। इसलिए जिन यात्रियों की उड़ान प्रभावित हुई है, उनके लिए वास्तविक यात्रा समय एयरलाइन और फ्लाइट स्टेटस के अनुसार बदल सकता है।

    30 सितंबर को भी मौसम पर नजर

    मुंबई में 30 सितंबर को भी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। ऐसे में मुंबई से उड़ान भरने या मुंबई पहुंचने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट का ताजा स्टेटस जांचना महत्वपूर्ण है। मौसम की स्थिति के अनुसार देरी, रूट में बदलाव या डायवर्जन जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है।

    मंगलवार की घटना में राहत की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि डायवर्ट की गई उड़ानों की लैंडिंग सुरक्षित रही और किसी यात्री के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई। अब यात्रियों की आगे की यात्रा और उड़ानों के सामान्य संचालन की स्थिति मुंबई के मौसम तथा एयर ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करेगी।

  • ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे में IV सेट, सिरिंज और कैथेटर की खरीद कीमत और MRP में भारी अंतर मिला। केंद्र ने अब मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर समीक्षा शुरू की।

    मुंबई: महाराष्ट्र में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों में सामने आया बड़ा अंतर अब केंद्र सरकार की निगरानी तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र FDA के सर्वे में एक IV इन्फ्यूजन सेट 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत पर मिलने के बावजूद 325 रुपये की छपी MRP वाला पाया गया। इस अंतर को 2,841 प्रतिशत तक बताया गया है। इसके बाद अब केंद्र सरकार अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा कर रही है। हालांकि, सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान कीमत सीमा लागू करने का अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    IV सेट से सिरिंज और कैथेटर तक बड़ी कीमत तफावत

    महाराष्ट्र FDA के जुलाई 2026 के सर्वे में मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों की जांच की गई। जांच में ट्रेड या खरीद कीमत और छपी MRP के बीच कई मामलों में बड़ा अंतर सामने आया।

    सबसे बड़ा उदाहरण IV इन्फ्यूजन सेट का है। इसकी ट्रेड कीमत 11.05 रुपये मिली, जबकि उस पर MRP 325 रुपये छपी थी। इसी तरह 6.75 रुपये में खरीदी गई 10 एमएल सिरिंज की MRP 57.20 रुपये और 29.41 रुपये की खरीद कीमत वाले कैथेटर की MRP 310 रुपये पाई गई।

    सर्वे में IV सेट, सिरिंज, कैथेटर, नेब्युलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को देखा गया। कुछ अन्य वस्तुओं में भी खरीद कीमत और MRP के बीच काफी अंतर पाया गया।

    2,841 प्रतिशत का आंकड़ा आखिर बताता क्या है?

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत और 325 रुपये की MRP के बीच 2,841 प्रतिशत का अंतर है, लेकिन इसका अर्थ यह सीधे नहीं है कि पूरा अंतर अस्पताल का शुद्ध मुनाफा है।

    किसी मेडिकल वस्तु की अंतिम कीमत तक पहुंचने में निर्माता, आयातक, वितरक, स्टॉकिस्ट और अस्पताल जैसे अलग-अलग स्तर शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अस्पतालों की ओर से स्टोरेज, स्टेराइल हैंडलिंग, इन्वेंटरी, संक्रमण नियंत्रण और अन्य संचालन लागतों का भी तर्क दिया जाता है। इसी वजह से केंद्र अब अस्पतालों और दूसरे हितधारकों से कीमत और बिलिंग की पूरी व्यवस्था समझने की कोशिश कर रहा है।

    इसलिए सामने आया 2,841 प्रतिशत का आंकड़ा मुख्य रूप से खरीद कीमत और घोषित MRP के बीच के अंतर को दिखाता है। इसे हर मामले में सीधे अस्पताल के मुनाफे के बराबर मानना सही नहीं होगा।

    तुकाराम मुंढे ने केंद्र से क्या मांग की?

    महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस कीमत अंतर के बाद केंद्रीय औषध विभाग और राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी NPPA के सामने मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की समीक्षा का मुद्दा उठाया है।

    उनकी मांग में ट्रेड मार्जिन के लिए स्पष्ट व्यवस्था, जरूरी मेडिकल उपकरणों की कीमतों की निगरानी और खरीद कीमत तथा घोषित MRP के बीच स्वीकार्य अंतर को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश की जरूरत शामिल है। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली किसी वस्तु की वास्तविक खरीद कीमत मरीज को आमतौर पर पता नहीं होती।

    महाराष्ट्र FDA ने अस्पतालों की बिलिंग दरें तय करने का अधिकार अपने स्तर पर होने का दावा नहीं किया है। मुद्दा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत निर्धारण व्यवस्था और उसके नियमन से जुड़ा है।

    अब केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया?

    मामले के सामने आने के बाद केंद्र ने NPPA से कीमतों में इस तरह के अंतर को लेकर रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ consultation की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत और मार्जिन तय करते समय अस्पतालों की वास्तविक लागत, सप्लाई चेन और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

    19 सितंबर तक स्थिति यह है कि सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान price cap लगाने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आगे का नियामक फैसला अलग-अलग उत्पादों और उनकी कीमत संरचना की समीक्षा के बाद लिया जाना है।

    क्या हर मेडिकल डिवाइस की कीमत NPPA तय करता है?

    नहीं। मेडिकल डिवाइस के लिए मौजूदा नियामक व्यवस्था अलग-अलग श्रेणियों में काम करती है।

    NPPA के अनुसार कुछ मेडिकल डिवाइस price-control व्यवस्था के तहत आते हैं, जबकि अन्य non-scheduled medical devices के मामले में सीधे ceiling price तय नहीं होता। DPCO 2013 के तहत ऐसे non-scheduled products की MRP में एक साल में 10 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि की निगरानी का प्रावधान है। कुछ विशेष मामलों में NPPA ने non-scheduled medical devices की कीमत या ट्रेड मार्जिन को भी नियंत्रित किया है।

    इससे मौजूदा विवाद का मूल सवाल सामने आता है कि जिन जरूरी hospital consumables पर सीधी ceiling price व्यवस्था नहीं है, उनमें खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर उचित माना जाए।

    पहले भी मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर हस्तक्षेप हो चुका है

    मेडिकल डिवाइस की कीमतों को लेकर सरकारी हस्तक्षेप नया नहीं है। NPPA ने coronary stents और knee implants की कीमतों को नियंत्रित किया है। कोविड काल में oxygen concentrators, pulse oximeters, blood pressure monitoring machines, nebulisers, digital thermometers और glucometers समेत छह मेडिकल डिवाइस पर 70 प्रतिशत तक trade margin की सीमा लागू की गई थी।

    NPPA के पुराने दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि कुछ मेडिकल डिवाइस में अस्पतालों को कम कीमत पर उत्पाद मिलने और मरीजों की बिलिंग में छपी MRP के इस्तेमाल के बीच अंतर pricing regulation के लिए चिंता का विषय रहा है।

    अस्पतालों की कीमत में क्या-क्या शामिल हो सकता है?

    मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से लिया गया अंतिम शुल्क हमेशा एक ही चीज नहीं होता। अस्पतालों की ओर से उपचार की पूरी व्यवस्था में स्टोरेज, स्टेराइल प्रोसेसिंग, संक्रमण नियंत्रण, नर्सिंग, इन्वेंटरी और बर्बादी जैसी लागतों को ध्यान में रखने की बात कही गई है।

    इसी वजह से आगे होने वाली सरकारी चर्चा में केवल MRP और खरीद कीमत की तुलना के बजाय पूरे pricing chain और hospital billing structure को देखना महत्वपूर्ण होगा।

    दूसरे राज्यों से भी सामने आईं ऐसी चिंताएं

    यह मुद्दा केवल महाराष्ट्र तक सीमित रहने के संकेत नहीं दे रहा है। पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के औषध नियंत्रण तंत्र से भी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों से जुड़ी समान शिकायतें या representations मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में मामला राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल डिवाइस pricing framework की समीक्षा तक पहुंच सकता है।

    हालांकि, महाराष्ट्र के सर्वे में सामने आए 2,841 प्रतिशत के आंकड़े को पूरे देश के सभी अस्पतालों या सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर लागू करना सही नहीं होगा।

    मरीजों के लिए सबसे अहम सवाल क्या है?

    अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिल में इस्तेमाल की गई वस्तु का नाम, मात्रा, MRP और बिल की गई राशि स्पष्ट हो। किसी मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से ली गई राशि में बड़ा अंतर होने की स्थिति में itemised bill और संबंधित विवरण देखना मरीज के लिए उपयोगी हो सकता है।

    लेकिन 11.05 रुपये की खरीद कीमत और 325 रुपये की MRP सामने आने का मतलब यह भी नहीं है कि हर अस्पताल हर मरीज से उसी MRP पर पैसा ले रहा है। वास्तविक बिलिंग अस्पताल की व्यवस्था, पैकेज, बीमा और इस्तेमाल की गई वस्तुओं के आधार पर अलग हो सकती है।

    अब आगे क्या होगा?

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे और तुकाराम मुंढे की पहल के बाद मामला अब केंद्र के स्तर पर पहुंच चुका है। NPPA से रिपोर्ट, अस्पतालों और अन्य stakeholders के साथ consultation तथा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों और मार्जिन की समीक्षा अगले चरण हैं।

    आगे की चुनौती यह तय करने की होगी कि जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स के लिए कीमतों की निगरानी किस तरह की जाए, खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर स्वीकार्य हो, supply chain में किस स्तर पर मार्जिन जोड़ा जा रहा है और मरीजों के लिए बिलिंग में कितनी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

    फिलहाल 11.05 रुपये के IV सेट की 325 रुपये MRP और 2,841 प्रतिशत के अंतर ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली छोटी दिखने वाली लेकिन बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों को राष्ट्रीय नियामक बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Mumbai से Bangladesh भेजने के आरोप पर Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा। जानिए पूरा मामला।

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की Sahida Fakir को मुंबई से Bangladesh भेजे जाने के मामले में Supreme Court ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। Sahida के बेटे Sahin Fakir ने अदालत में याचिका दाखिल कर अपनी मां को भारत वापस लाने और उनके खिलाफ किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है।

    Chief Justice of India Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से Senior Advocate S. Muralidhar पेश हुए। मामला Sahin Fakir v. Union of India & Ors., WP(Crl) No. 372/2026 के रूप में सामने आया है।

    याचिका में Sahida Fakir को भारतीय नागरिक बताया गया है। उनके बेटे के अनुसार उनका स्थायी संबंध उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल के Gobindapur से है। परिवार का कहना है कि उनके दादा Badshah Gazi का नाम 1952 की मतदाता सूची में और माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज रहे हैं।

    Sahida करीब 20 साल पहले अपने पति के साथ काम की तलाश में मुंबई आई थीं और यहां घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं। याचिका के अनुसार 19 जुलाई 2026 को कुछ लोग, जिन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया, उन्हें मुंबई में अपने साथ ले गए। उन्हें Chembur के एक holding centre में रखा गया और उनका Aadhaar कार्ड तथा मोबाइल फोन भी कथित तौर पर ले लिया गया।

    परिवार का आरोप है कि Sahida को 100 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया और इस दौरान उन्हें किसी Judicial Magistrate के सामने पेश नहीं किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि उन्हें हिरासत के आधार की जानकारी और परिवार से संपर्क का प्रभावी अवसर नहीं मिला।

    इसके बाद Sahida को Border Security Force (BSF) को सौंपे जाने और करीब 20 अन्य लोगों के साथ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की ओर ले जाकर Bangladesh सीमा के पार भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि इसके बाद Sahida ने Bangladesh में अपनी मौजूदगी की जानकारी परिवार तक पहुंचाई और फिलहाल अस्थायी मानवीय आश्रय में रह रही हैं।

    SIR में नाम हटने का मामला क्या है?

    Sahida के मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर है। याचिका के अनुसार Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया और इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील लंबित है।

    परिवार का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटना अपने आप किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त होने का फैसला नहीं है। Supreme Court ने भी 17 जुलाई 2026 को West Bengal SIR से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि electoral roll से नाम हटने का मतलब अपने आप नागरिकता खत्म होना नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार Election Commission के पास नहीं है।

    यही बिंदु Sahida Fakir की याचिका में भी महत्वपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि उनकी नागरिकता पर अंतिम निर्णय हुए बिना और SIR से नाम हटाने के खिलाफ उनकी अपील लंबित रहते हुए उन्हें Bangladesh भेज दिया गया।

    परिवार ने कौन से दस्तावेज बताए?

    याचिका में Sahida की भारतीय पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि के समर्थन में कई दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। इनमें पुराने electoral records के अलावा पहचान और नागरिक दस्तावेज शामिल हैं।

    पहले सामने आए दस्तावेजों में 2008 का voter identity card, 1988 का birth certificate, school certificate और Gobindapur में जमीन से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। परिवार का कहना है कि इन दस्तावेजों को अधिकारियों के सामने रखा गया था।

    हालांकि, इन दस्तावेजों का उल्लेख याचिका और परिवार के दावों के संदर्भ में है। Supreme Court ने अभी Sahida की नागरिकता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

    याचिका में deportation प्रक्रिया पर भी सवाल

    Sahida के बेटे की याचिका केवल उनकी मां को वापस लाने तक सीमित नहीं है। इसमें 2 मई 2025 को जारी उस Standard Operating Procedure (SOP) को भी चुनौती दी गई है, जो कथित अवैध Bangladeshi nationals और Rohingya के deportation की प्रक्रिया से संबंधित है।

    याचिका में Immigration and Foreigners Order, 2025 के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी व्यक्ति को विदेशी या अवैध प्रवासी मानकर देश से बाहर भेजने से पहले उसकी nationality की उचित verification और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।

    याचिका में विशेष रूप से SOP के Para 9(iv) और Immigration and Foreigners Order, 2025 के Para 12(4)(C) के बीच प्रक्रिया संबंधी अंतर का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि Sahida के मामले में nationality verification और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

    Supreme Court ने अभी क्या आदेश दिया है?

    इस स्तर पर Supreme Court ने केवल केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि Sahida भारतीय नागरिक हैं, उनका Bangladesh भेजा जाना अवैध था या उन्हें तत्काल भारत वापस लाने का अंतिम आदेश दिया गया है।

    अदालत के सामने फिलहाल याचिकाकर्ता के आरोप, Sahida की कथित हिरासत और सीमा पार भेजे जाने की परिस्थितियां तथा nationality verification से जुड़े कानूनी सवाल हैं। केंद्र सरकार का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

    SIR से जुड़े मामलों में पहले भी Supreme Court ने उठाए सवाल

    Sahida Fakir का मामला ऐसे समय Supreme Court पहुंचा है जब West Bengal में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं। 25 अगस्त 2026 को अदालत को बताया गया था कि SIR से संबंधित करीब 38.1 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें लगभग 7 लाख अपीलें उन लोगों की थीं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और जिन्होंने नाम बहाल करने की मांग की थी।

    Supreme Court पहले ही यह अंतर स्पष्ट कर चुका है कि electoral roll में नाम होना या हटना और किसी व्यक्ति की citizenship का अंतिम निर्धारण दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। Sahida Fakir मामले में अब यही सवाल और गंभीर रूप से सामने आया है कि किसी व्यक्ति की nationality पर विवाद होने की स्थिति में उसे देश से बाहर भेजने से पहले कौन-सी verification और procedural safeguards लागू होंगे।

    अब केंद्र के जवाब पर नजर

    Supreme Court के नोटिस के बाद केंद्र सरकार को Sahida Fakir की हिरासत, nationality verification, Bangladesh भेजे जाने की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे किस तरह की सुनवाई और राहत पर विचार किया जाना है।

    फिलहाल Sahida Fakir की वापसी की मांग Supreme Court के सामने लंबित है और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।

  • महिला के इरादे ना भांप सका युवक: एप पर दोस्ती, मेट्रो स्टेशन पर बुलाकर ले गई घर, फिर शख्स को मिला ऐसा दर्द

    महिला के इरादे ना भांप सका युवक: एप पर दोस्ती, मेट्रो स्टेशन पर बुलाकर ले गई घर, फिर शख्स को मिला ऐसा दर्द

    डेटिंग एप के जरिए दोस्ती कर युवक को घर बुलाकर 2.15 लाख रुपये की उगाही का आरोप, दिल्ली के छावला में चार गिरफ्तार, 70,500 रुपये बरामद।

    दिल्ली: छावला इलाके में डेटिंग एप के जरिए दोस्ती कर एक 44 वर्षीय व्यक्ति को कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसाकर 2.15 लाख रुपये की उगाही करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला पहले उसे ढांसा मेट्रो स्टेशन बुलाकर नजफगढ़ स्थित एक घर ले गई, जहां दो महिलाएं और एक पुरुष मौजूद थे। इसके बाद दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे नकदी और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए रकम ली गई। छावला थाना पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 70,500 रुपये बरामद किए हैं।

    14 सितंबर को मथुरा निवासी चंद्रभान सिंह ने छावला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। जानकारी के अनुसार वह फरीदाबाद में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते हैं। चंद्रभान की पहचान QuackQuack एप के जरिए एक महिला से हुई थी। बातचीत के बाद महिला ने उन्हें ढांसा मेट्रो स्टेशन मिलने के लिए बुलाया। वहां से वह उन्हें नजफगढ़ के एक मकान में ले गई।

    घर पहुंचने के बाद दो महिलाएं और एक पुरुष वहां मौजूद मिले। आरोप है कि इसी दौरान गिरोह के एक सदस्य ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर चंद्रभान को दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद उनसे पैसे देने के लिए दबाव बनाया गया।

    22 हजार रुपये नकद और 1.93 लाख रुपये ऑनलाइन लिए

    पुलिस के अनुसार, पीड़ित से कुल 2.15 लाख रुपये लिए गए। इसमें 22 हजार रुपये नकद थे, जबकि 1.93 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई ट्रांजैक्शन के जरिए लिए गए। यानी रकम लेने के लिए आरोपियों ने नकदी के साथ डिजिटल भुगतान का भी इस्तेमाल किया।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने लेनदेन से जुड़े बैंक खातों और अन्य उपलब्ध जानकारियों की जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपियों की पहचान सामने आई और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

    चार आरोपी गिरफ्तार, 70,500 रुपये बरामद

    पुलिस ने इस मामले में गन्नौर, सोनीपत निवासी मनदीप, गाजियाबाद निवासी प्रीति, नजफगढ़ निवासी कमलेश और रितु को गिरफ्तार किया है। मनदीप की उम्र 38 वर्ष, प्रीति की 32 वर्ष, कमलेश की 42 वर्ष और रितु की 40 वर्ष बताई गई है।

    पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 70,500 रुपये बरामद किए गए हैं। बाकी रकम से जुड़े अलग-अलग बैंक खातों को होल्ड कराया गया है। पुलिस अब इन खातों में हुए लेनदेन की जांच के साथ बाकी रकम की रिकवरी की कोशिश कर रही है।

    मनदीप और कमलेश के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज

    जांच में पुलिस ने मनदीप और कमलेश के पुराने आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया है। पुलिस के अनुसार मनदीप के खिलाफ सोनीपत और दिल्ली में पहले के मामले दर्ज हैं, जबकि कमलेश के खिलाफ द्वारका नॉर्थ थाने में 2023 का मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इन पुराने मामलों की प्रकृति और मौजूदा मामले से उनका संबंध जांच का विषय है।

    डेटिंग एप से शुरू होकर धमकी तक पहुंचा मामला

    इस मामले में घटनाक्रम एक सामान्य ऑनलाइन संपर्क से शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही समय में यह कथित वित्तीय उगाही में बदल गया। महिला से एप पर दोस्ती होने के बाद पीड़ित को पहले सार्वजनिक स्थान यानी ढांसा मेट्रो स्टेशन बुलाया गया और वहां से निजी मकान तक ले जाया गया। घर में अन्य लोगों की मौजूदगी के बाद कथित तौर पर पुलिस और दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी गई।

    यही तरीका इस मामले को सामान्य ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से अलग बनाता है। इसमें ऑनलाइन पहचान और बातचीत के बाद आमने-सामने की मुलाकात और फिर कथित धमकी के जरिए पैसे लेने का आरोप है।

    दिल्ली में पहले भी सामने आया था डेटिंग एप हनी ट्रैप

    दिल्ली में मई 2026 में भी डेटिंग एप से जुड़े एक अलग हनी ट्रैप और उगाही के मामले का खुलासा हुआ था। उस मामले में fake Tinder/QuackQuack महिला प्रोफाइल के जरिए पुरुषों से संपर्क कर मुलाकात के लिए बुलाने और बाद में पुलिस कार्रवाई या आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे वसूलने का आरोप सामने आया था।

    मौजूदा छावला मामले को उस पुराने मामले से सीधे जोड़ने का कोई आधार अभी सामने नहीं आया है। हालांकि दोनों मामलों में डेटिंग एप के जरिए संपर्क, आमने-सामने मुलाकात और पुलिस या आपराधिक मामले के नाम पर कथित दबाव बनाने जैसी समानताएं जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

    अगर डेटिंग एप की मुलाकात के बाद धमकी मिले तो क्या करें?

    ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस अधिकारी होने का दावा करना अपने आप में उसकी पहचान का प्रमाण नहीं है। यदि कोई व्यक्ति आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे मांगता है, तो घबराकर तुरंत भुगतान करने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाना और उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

    यदि पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर हो चुके हैं, तो वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर दी जा सकती है। National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी, यूपीआई आईडी, मोबाइल नंबर, चैट, कॉल डिटेल से संबंधित उपलब्ध जानकारी और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखना जांच में उपयोगी हो सकता है।

    मामले की जांच जारी

    छावला थाना पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित उगाही में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं, क्या किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरीके से निशाना बनाया गया और 2.15 लाख रुपये में से शेष रकम का कितना हिस्सा बरामद किया जा सकता है। बैंक खातों को होल्ड कराने के बाद वित्तीय लेनदेन की जांच भी आगे बढ़ाई जा रही है।

  • Vimal Elaichi विवाद: 14 सितंबर को Delhi HC तय करेगा केस की सुनवाई का अधिकार

    Vimal Elaichi विवाद: 14 सितंबर को Delhi HC तय करेगा केस की सुनवाई का अधिकार

    Vimal Elaichi विवाद में Delhi HC 14 सितंबर को तय करेगा कि महाराष्ट्र FDA के नोटिस पर PB Agro की याचिका दिल्ली में सुनी जाएगी या नहीं।

    नई दिल्ली: Vimal Elaichi के विज्ञापन को लेकर चल रहे विवाद में सोमवार, 14 सितंबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट का अहम आदेश आने वाला है। कोर्ट यह तय करेगा कि महाराष्ट्र FDA की ओर से Shah Rukh Khan, Ajay Devgn और Tiger Shroff को जारी किए गए शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली PB Agro LLP की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर सकता है या नहीं। फिलहाल मामला विज्ञापन की वैधता के अंतिम फैसले तक नहीं पहुंचा है; 7 सितंबर को कोर्ट ने territorial jurisdiction के मुद्दे पर सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था।

    14 सितंबर को कोर्ट के सामने क्या सवाल है?

    इस मामले में तत्काल सवाल यह नहीं है कि Vimal Elaichi का विज्ञापन वास्तव में surrogate advertising है या नहीं। सबसे पहले यह तय होना है कि महाराष्ट्र FDA के खिलाफ दायर PB Agro की याचिका को Delhi High Court सुन सकता है या नहीं।

    PB Agro ने अदालत में महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि FDA ने उसके ब्रांड एंबेसडरों को नोटिस जारी किया, जबकि कंपनी स्वयं इस कार्रवाई से सीधे प्रभावित है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कंपनी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया और विज्ञापन अभियान लागू कानूनों के अनुरूप है।

    दूसरी ओर, महाराष्ट्र से जुड़े regulatory action को लेकर jurisdiction पर आपत्ति उठाई गई है। इसलिए 14 सितंबर का आदेश यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि इस कानूनी विवाद की अगली सुनवाई दिल्ली में होगी या कंपनी को किसी अन्य उपयुक्त forum का रुख करना पड़ सकता है।

    Maharashtra FDA ने Shah Rukh Khan, Ajay Devgn और Tiger Shroff को नोटिस क्यों दिया?

    महाराष्ट्र FDA ने 11 अगस्त 2026 को तीनों अभिनेताओं को Vimal Elaichi के विज्ञापन से जुड़े शो-कॉज नोटिस जारी किए थे। FDA की आपत्ति यह है कि भले ही विज्ञापन Elaichi उत्पाद का दिखाई देता हो, लेकिन उसके जरिए Vimal brand की ऐसी promotion हो सकती है जो प्रतिबंधित Pan Masala product की indirect या surrogate promotion का माध्यम बनती हो।

    FDA ने जिस regulatory background का हवाला दिया है, उसमें महाराष्ट्र में 13 जुलाई 2026 से लागू prohibition order भी शामिल है। इस आदेश के तहत राज्य में प्रतिबंधित tobacco और nicotine-containing products के manufacture, storage, transportation, distribution और sale पर रोक लागू की गई है। FDA ने Vimal brand के advertisement को इसी broader regulatory framework में देखा है।

    आप को बता दें, कि surrogate advertising का आरोप अभी अदालत की ओर से साबित किया गया तथ्य नहीं है। यह महाराष्ट्र FDA की regulatory आपत्ति है, जिस पर आगे कानूनी प्रक्रिया होनी है।

    Ajay Devgn और Tiger Shroff ने FDA को जवाब दिया, Shah Rukh Khan की स्थिति क्या है?

    मामले में एक अहम ताजा घटनाक्रम यह भी है कि Ajay Devgn और Tiger Shroff ने महाराष्ट्र FDA को अपने जवाब सौंप दिए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार FDA को दोनों के responses मिल चुके हैं, जबकि Shah Rukh Khan का जवाब अभी लंबित बताया गया था।

    हालांकि, इन दोनों अभिनेताओं के जवाबों की पूरी substantive सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इन जवाबों के हवाले से ये पता नहीं है कि उन्होंने FDA के आरोपों को स्वीकार किया है या खारिज किया है।

    PB Agro का क्या कहना है?

    PB Agro LLP, जो Vimal Elaichi से जुड़ा master licensee बताया गया है, ने Delhi High Court में कहा है कि वह Elaichi जैसे non-tobacco product के promotion के लिए प्रमुख अभिनेताओं की सेवाएं लेता है और उसके advertising campaigns लागू कानूनों का पालन करते हैं। कंपनी ने FDA की कार्रवाई पर कई कानूनी आपत्तियां उठाई हैं।

    कंपनी की याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि regulatory action का सीधा असर कंपनी के commercial campaign पर पड़ रहा है, तो केवल celebrities को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया कितनी उचित है और कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया।

    क्या Vimal Elaichi पर पहले भी कानूनी विवाद हुआ है?

    यह विवाद पूरी तरह नया नहीं है। जनवरी 2024 में भी Delhi High Court के सामने Vimal Elaichi से जुड़े surrogate advertising का मामला आया था। उस मामले में DGHS ने 2018 में जारी किए गए शो-कॉज नोटिस के खिलाफ कंपनियों को मिली stay को चुनौती दी थी। Delhi High Court ने trial court की stay को बरकरार रखा था।

    उस मामले में अदालत ने यह भी कहा था कि किसी brand name का इस्तेमाल Elaichi या Pan Masala जैसे उत्पादों के प्रचार में करना प्रतिबंधित tobacco या gutka की indirect या surrogate advertising है या नहीं, यह evidence का विषय हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं था कि अदालत ने Vimal Elaichi को surrogate advertising से अंतिम तौर पर clean chit दे दी थी।

    यही पुराना legal background मौजूदा विवाद को और महत्वपूर्ण बनाता है।

    यह मामला celebrities के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

    मौजूदा विवाद का असर केवल Vimal brand या इन तीन अभिनेताओं तक सीमित नहीं हो सकता। मामला यह सवाल भी उठाता है कि किसी celebrity को किसी ऐसे brand के advertisement में शामिल होने से पहले product और brand architecture की कितनी due diligence करनी चाहिए, खासकर तब जब उसी brand name से जुड़े दूसरे products regulatory restrictions के दायरे में हों।

    महाराष्ट्र FDA ने अपने notices के जरिए advertisement और उससे जुड़े regulatory compliance पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, actors के responses और PB Agro की legal challenge से आगे यह तय होना है कि इस तरह के endorsement में individual celebrity की जिम्मेदारी किस सीमा तक बनती है।

    14 सितंबर के बाद क्या होगा?

    अगर Delhi High Court territorial jurisdiction स्वीकार करता है, तो PB Agro की याचिका पर आगे substantive सुनवाई का रास्ता खुल सकता है। इसके बाद court को FDA के notices, regulator की powers और surrogate advertising से जुड़े वास्तविक कानूनी सवालों पर विचार करना पड़ सकता है।

    अगर Delhi High Court jurisdiction स्वीकार नहीं करता, तो इसका अर्थ यह नहीं होगा कि अदालत ने Vimal Elaichi advertisement को surrogate advertising घोषित कर दिया या तीनों अभिनेताओं को किसी उल्लंघन का दोषी माना। इसका तत्काल प्रभाव केवल forum से जुड़ा होगा और PB Agro को अपने कानूनी उपाय के लिए दूसरे उचित forum का रुख करना पड़ सकता है।

    यानी 14 सितंबर का आदेश इस विवाद का अंतिम फैसला नहीं, बल्कि आगे की कानूनी लड़ाई की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम होगा।

    फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि Delhi High Court महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई के खिलाफ PB Agro की याचिका सुनने का अधिकार स्वीकार करता है या नहीं। इसके बाद ही Vimal Elaichi advertisement की legality, surrogate promotion के आरोप और celebrity endorsement की जिम्मेदारी जैसे मूल सवालों पर विवाद आगे बढ़ेगा।

  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पर बड़ा खुलासा: 41 FIR, 178 ट्रेनिंग सेंटर ब्लैकलिस्ट और 34 लाख भुगतान अटके, CAG रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पर बड़ा खुलासा: 41 FIR, 178 ट्रेनिंग सेंटर ब्लैकलिस्ट और 34 लाख भुगतान अटके, CAG रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में 41 FIR, 178 ट्रेनिंग सेंटर ब्लैकलिस्ट और 34 लाख भुगतान अटके। CAG की रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं।

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना यानी युवाओं को skill training देकर job और self-employment के मौके देने वाली देश की बड़ी सरकारी schemes में से एक अब गंभीर सवालों के घेरे में है। CAG की audit findings से लेकर 2026 में दर्ज हुई 41 FIR, 178 Training Centres की blacklisting और NSDC के करीब 20 current और former employees को भेजे गए show-cause notices तक, इस पूरी scheme को लेकर लगातार कार्रवाई सामने आ रही है।

    सबसे बड़ा सवाल उन युवाओं का है जिन्होंने इस scheme के तहत training ली, certificate हासिल किया और payment या job का इंतजार किया। क्या training सही तरीके से हुई? क्या beneficiary का record सही था? Payment क्यों अटका? और certificate मिलने के बाद नौकरी कितनों को मिली?

    41 FIR और 178 Training Centres पर कार्रवाई

    2026 में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से जुड़े मामलों में 167 cases को FIR के लिए identify किया गया और 41 FIR दर्ज की गईं।

    वहीं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के तहत 178 Training Centres को blacklist किया गया। इन centres के खिलाफ आगे की payments रोकने और नियमों के उल्लंघन से जुड़े payments की recovery शुरू करने के निर्देश दिए गए।

    हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि FIR दर्ज होना किसी मामले में आरोप या investigation की शुरुआत है, conviction नहीं। इसी तरह 178 blacklisted centres को सीधे 178 “fake centres” कहना भी सही नहीं होगा। Blacklisting scheme guidelines और inspection findings के आधार पर की गई कार्रवाई है।

    34 लाख से ज्यादा candidates का payment क्यों अटका?

    इस पूरी कहानी का सबसे सीधा असर उन candidates पर पड़ता है जिन्होंने training पूरी की लेकिन उनका payment नहीं पहुंचा।

    CAG के मुताबिक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के दूसरे और तीसरे phase में 34 लाख candidates के DBT payments outstanding थे।

    पहले phase में भी करीब ₹40 करोड़ की DBT राशि incorrect या incomplete bank और Aadhaar details की वजह से beneficiaries तक नहीं पहुंच सकी थी।

    यानी अगर किसी candidate ने training और certification पूरा किया है, लेकिन उसके खाते में पैसा नहीं आया, तो सिर्फ “payment pending” देखकर मामला खत्म नहीं होता। Bank details, Aadhaar linking और beneficiary record में mismatch भी इसकी वजह हो सकता है।

    एक bank account से 2,106 candidates का record

    CAG audit में bank details की जांच के दौरान एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई।

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के दूसरे और तीसरे phase के data में 12,122 unique bank accounts ऐसे पाए गए जो एक से ज्यादा candidates के लिए इस्तेमाल हुए थे।

    इन accounts से कुल 52,381 candidates जुड़े हुए थे।

    सबसे चौंकाने वाला मामला एक ऐसे account का था जिसे 2,106 candidates के records में इस्तेमाल किया गया था।

    कुछ records में 11111111111, zeros, blank और दूसरे apparently invalid entries भी मिले।

    इसका मतलब यह नहीं कि इन सभी candidates को fake घोषित कर दिया गया। लेकिन beneficiary और payment data की verification system पर गंभीर सवाल जरूर खड़े हुए। CAG ने कहा कि उपलब्ध bank-account data से beneficiaries की identity को लेकर पर्याप्त assurance नहीं मिल रही थी।

    क्या training centre सच में चल रहा था?

    CAG की जांच में कुछ Training Centres physical inspection के दौरान बंद मिले।

    कुछ जगह training records और ground reality के बीच mismatch भी सामने आया। Candidate photographs के repeat होने और attendance तथा identity verification में gaps की findings भी सामने आईं।

    यानी सवाल यह भी है कि जिस candidate के नाम पर training और certification का record बना, क्या वह candidate वास्तव में उस training में मौजूद था?

    यहां भी हर irregular record को सीधे fake candidate मानना सही नहीं है। Audit findings मुख्य रूप से verification और monitoring system में मौजूद कमजोरियों की तरफ इशारा करती हैं।

    “Ghost Candidate” का मतलब क्या है?

    अगर किसी व्यक्ति का नाम scheme के record में मौजूद है, लेकिन उसकी identity, attendance, bank details या training participation properly verify नहीं हो पाती, तो मामला questionable या ghost beneficiary verification तक पहुंच सकता है।

    CAG ने candidate eligibility को लेकर भी सवाल उठाए।

    कुछ records में age, education और दूसरे eligibility criteria की proper checking नहीं होने की बात सामने आई।

    यानी scheme में सिर्फ यह देखना काफी नहीं था कि candidate का नाम system में दर्ज है। यह भी जरूरी था कि वह candidate scheme के लिए eligible था और उसकी identity सही तरीके से verify हुई थी।

    Certificate मिला, लेकिन नौकरी कितनों को मिली?

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का असली मकसद सिर्फ training और certificate देना नहीं था। इसका final outcome रोजगार और बेहतर income से जुड़ा था।

    लेकिन CAG की audit में पुराने phases के Short Term Training component में certified candidates की placement करीब 41 प्रतिशत के आसपास पाई गई।

    सरकार की बाद की reporting में PMKVY 3.0 तक reported placement करीब 43 प्रतिशत बताई गई।

    इसका सीधा मतलब है कि training या certificate और actual job एक ही चीज नहीं हैं।

    यही वजह है कि किसी भी candidate के लिए सबसे जरूरी सवाल यह होना चाहिए कि course पूरा करने के बाद उसे वास्तव में job या self-employment का फायदा मिला या नहीं।

    कुछ बड़े Training Providers में placement 10% से भी कम

    CAG की detailed जांच में training providers के performance में काफी बड़ा difference सामने आया।

    Top training providers में भी 114 providers ऐसे पाए गए जिनका placement rate 10 प्रतिशत से कम था।

    इन providers ने करीब 5.88 लाख candidates को certify किया, लेकिन लगभग 20,000 candidates ही placement तक पहुंच पाए।

    इससे साफ होता है कि सिर्फ overall placement percentage देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। अलग-अलग Training Providers का actual performance काफी अलग रहा।

    Training Providers को इतने बड़े targets कैसे मिले?

    CAG ने Training Providers को मिले targets और certifications को भी examine किया।

    PMKVY 2.0 में top 10 प्रतिशत Training Providers ने करीब 83 प्रतिशत batches और 85.61 प्रतिशत certifications संभालीं।

    PMKVY 3.0 में top 10 प्रतिशत providers ने करीब 82 प्रतिशत batches और 85.31 प्रतिशत certifications संभालीं।

    इसके मुकाबले bottom 50 प्रतिशत providers का share काफी कम था।

    इससे यह सवाल उठता है कि scheme के बड़े targets कुछ Training Providers के पास इतने concentrated क्यों हुए और उनके performance की monitoring कितनी प्रभावी थी।

    Certificate मिलने में सालों की देरी

    Training पूरी होने के बाद candidate के लिए अगला जरूरी step assessment और certification होता है।

    लेकिन CAG की जांच में selected states में कुछ cases में training पूरी होने के बाद assessment में 1,270 दिनों तक की देरी सामने आई।

    Assessment के बाद certification में भी 1,257 दिनों तक की delay दर्ज हुई।

    करीब 23.87 लाख candidates ऐसे थे जिनके certification में सात दिनों से ज्यादा की delay पाई गई।

    जिस युवा को certificate के आधार पर job या आगे की career opportunity तलाशनी हो, उसके लिए इतनी लंबी delay का सीधा असर पड़ सकता है।

    Inspection system पर भी सवाल

    CAG ने inspection records के timestamps को भी examine किया।

    295 cases में एक ही inspector द्वारा अलग-अलग locations पर inspection शुरू करने के बीच पांच मिनट से भी कम का gap पाया गया।

    Ministry ने इन discrepancies को technical issues से जोड़ते हुए बाद में photo-upload और monitoring controls मजबूत करने की जानकारी दी।

    इसलिए इसे सीधे fake inspection कहना सही नहीं होगा, लेकिन audit ने ऐसी discrepancy जरूर दर्ज की जिसे system level पर explain और correct करना जरूरी था।

    RPL में भी सामने आईं गड़बड़ियां

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का Recognition of Prior Learning यानी RPL component उन लोगों की existing skills को certify करने के लिए है जो पहले से किसी trade या काम में skilled हैं।

    CAG ने RPL-BICE component में भी कई irregularities दर्ज कीं।

    एक मामले में Radiate Designs ने करीब 15,218 candidates को certify किया था। CAG के मुताबिक company 2014-15 के बाद ROC returns file नहीं कर रही थी और ROC records में struck off थी। Audit team को दिए गए address पर एक shop मिली, जहां company का visible signboard नहीं था।

    CAG ने इस तरह के records के आधार पर certification process की verification पर सवाल उठाए।

    एक दूसरे fitness trainer से जुड़े case में 10,000 candidates की placement और 30,000 employees की capacity का दावा किया गया था, जबकि संबंधित gyms में Ministry के records के अनुसार employees की संख्या काफी कम थी।

    Jharkhand में 8,922 certifications में से 7,145 East Singhbhum में और Rajasthan में सभी 5,444 certifications Churu district में concentrated थीं।

    Audit ने employee-employer relationship की proper verification के बिना certifications किए जाने पर सवाल उठाए।

    PMKVY 4.0 में भी data से जुड़े सवाल

    यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा।

    CAG की मुख्य audit findings प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के पहले तीन phases से जुड़ी हैं। PMKVY 4.0 बाद में शुरू हुई और इसमें technology-based verification को मजबूत किया गया है।

    लेकिन CAG ने PMKVY 4.0 के उपलब्ध data की भी कुछ जांच की।

    इसमें:

    • 175 invalid mobile numbers
    • 2,263 repeated mobile numbers
    • करीब 2.72 लाख null email addresses
    • करीब 3.08 लाख repeated email addresses

    मिले।

    इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं कि इतने candidates fake थे। लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि digital system में भी data validation को लगातार मजबूत रखने की जरूरत है।

    अब सरकार ने क्या बदला?

    PMKVY 4.0 में beneficiary verification और monitoring के लिए कई technology-based controls बढ़ाए गए हैं।

    इनमें:

    • Aadhaar-based verification
    • Face Authentication
    • AEBAS attendance
    • e-KYC
    • duplicate candidate checks
    • digital monitoring
    • physical inspections
    • geo-tagged evidence
    • candidate feedback
    • third-party assessment

    जैसे measures शामिल हैं।

    PMKVY 4.0 में AI, drones, robotics, green energy, semiconductor manufacturing और दूसरे new-age sectors से जुड़े courses पर भी ज्यादा focus किया जा रहा है।

    जून 2026 तक सरकार के मुताबिक PMKVY 4.0 के तहत 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 738 जिलों में 28.17 लाख candidates train किए जा चुके थे। इसके implementation ecosystem में 16,900 से ज्यादा institutions और 6,800 से ज्यादा Skill Hubs शामिल थे।

    PMKVY 4.0 को लेकर सरकार के आंकड़े क्या कहते हैं?

    पुरानी phases की CAG findings के बावजूद PMKVY 4.0 के impact को लेकर सरकार ने positive results भी जारी किए हैं।

    29 जुलाई 2026 को सरकार ने independent impact evaluation का हवाला देते हुए बताया कि Short Term Training candidates में employed और self-employed लोगों का combined share training से पहले 26.6 प्रतिशत था, जो training के बाद 45.4 प्रतिशत हो गया।

    यानी 18.8 percentage points का increase दर्ज किया गया।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 41.4 प्रतिशत STT candidates और 48.9 प्रतिशत RPL candidates ने training और certification के बाद income बढ़ने की बात भी बताई।

    इसलिए आज की स्थिति को सिर्फ पुरानी CAG findings से देखना पूरी तस्वीर नहीं देगा। पुराने phases में गंभीर implementation problems सामने आईं, जबकि PMKVY 4.0 को लेकर सरकार के पास employment और income outcomes में improvement का evaluation data भी है।

    Maharashtra और Mumbai के युवाओं के लिए क्या जरूरी है?

    महाराष्ट्र भी PMKVY की implementation और audit scrutiny में शामिल रहा है।

    अगर आपने Mumbai या Maharashtra में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत training ली है, तो अपने record को जरूर verify करें।

    क्या आपका Training Centre अभी भी active है?

    क्या आपकी attendance सही दर्ज है?

    क्या Aadhaar और bank details सही हैं?

    क्या DBT payment मिला है?

    क्या certificate में आपका सही job role है?

    क्या Training Centre ने placement का दावा किया था?

    और सबसे जरूरी—

    क्या आपको वास्तव में job या income का फायदा मिला?

    क्योंकि scheme की सफलता सिर्फ certificate से तय नहीं होती।

    अगर आपने PMKVY की training ली है तो ये 8 चीजें check करें

    1. Certificate: आपका certificate official record में मौजूद है या नहीं।

    2. Training Centre: जिस centre से आपने course किया, उसकी status क्या है।

    3. Attendance: आपकी training attendance सही दर्ज है या नहीं।

    4. Aadhaar/e-KYC: आपकी identity details सही हैं या नहीं।

    5. Bank Account: आपके नाम से सही bank details linked हैं या नहीं।

    6. DBT Payment: payment मिला, pending है या transaction fail हुआ।

    7. Placement: अगर placement का दावा किया गया था तो employer और job details verify करें।

    8. Complaint: अगर आपके नाम पर ऐसी training या certification दिखाई दे रही है जो आपने की ही नहीं, या payment/identity में गलती है, तो official grievance mechanism पर complaint करें।

    इस पूरे मामले में अब आगे क्या देखना होगा?

    अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने Training Centres blacklist हुए या कितनी FIR दर्ज हुईं।

    आगे यह देखना ज्यादा जरूरी होगा कि:

    41 FIR की investigation कहां तक पहुंचती है?

    178 blacklisted centres में recovery कितनी होती है?

    34 लाख pending payments में कितने candidates को पैसा मिलता है?

    NSDC के जिन करीब 20 current और former employees को notices दिए गए हैं, उनके खिलाफ आगे क्या action होता है?

    और सबसे बड़ा सवाल—

    क्या PMKVY 4.0 में technology-based safeguards पुराने loopholes को वास्तव में बंद कर पाते हैं?

    प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का असली test यही है कि government records में कितने candidates trained और certified दिखते हैं, इससे आगे जाकर कितने युवाओं को वास्तव में skill, payment, job और बेहतर income मिलती है।

    CAG की findings ने पुराने system की कई कमजोरियां सामने रख दी हैं। 2026 की FIR और blacklisting के जरिए कार्रवाई भी चल रही है। वहीं PMKVY 4.0 के नए evaluation में employment और income outcomes में improvement का दावा किया गया है।

    अब नजर इस बात पर है कि पुरानी गलतियों से सीखकर मौजूदा system कितना मजबूत हुआ है और scheme से जुड़े युवाओं को उसका वास्तविक फायदा कितना मिल रहा है।

  • मेरठ में महिला दरोगा अनु रानी Suspend, वायरल वीडियो ने मचाई हलचल; QR Code को लेकर भी उठे सवाल

    मेरठ में महिला दरोगा अनु रानी Suspend, वायरल वीडियो ने मचाई हलचल; QR Code को लेकर भी उठे सवाल

    मेरठ में महिला दरोगा अनु रानी को वायरल वीडियो मामले में Suspend किया गया। Social Media Activity और QR Code को लेकर उठे सवालों की Cyber Cell जांच कर रही है।

    नई दिल्ली: मेरठ में महिला सब-इंस्पेक्टर अनु रानी से जुड़े सोशल मीडिया वीडियो को लेकर पुलिस विभाग ने बड़ा action लिया है। वायरल हो रहे आपत्तिजनक बताए जा रहे वीडियो और उनकी सोशल मीडिया activity को लेकर अनु रानी को suspend कर दिया गया है। अब इस पूरे मामले की departmental inquiry के साथ Cyber Cell भी जांच कर रही है।

    मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर उनके Live sessions, QR Code और कथित तौर पर पैसे मांगने को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इन सभी दावों को अभी official investigation से confirmed fact नहीं माना जा सकता। पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा यही पता करना है कि वायरल content असली है, edited है या उसके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है।

    मेरठ में आखिर हुआ क्या?

    खबर के मुताबिक अनु रानी मेरठ पुलिस लाइंस में तैनात सब-इंस्पेक्टर थीं और सोशल मीडिया पर भी active थीं। उनकी online profiles पर fitness, gym और personal-life से जुड़ा content होने की जानकारी सामने आई है। खबरों के अनुसार उनके social-media profiles पर UP Police में सब-इंस्पेक्टर होने की पहचान भी दिखाई देती थी।

    इसी दौरान उनसे जुड़ा एक आपत्तिजनक बताया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले ने तेजी तब पकड़ी जब सोशल मीडिया पर इस content को लेकर सवाल उठाए गए और शिकायत की बात सामने आई।

    इसके बाद पुलिस विभाग ने मामले को serious मानते हुए अनु रानी को suspend कर दिया और जांच शुरू करा दी।

    Viral Video में क्या है और क्या दावा किया जा रहा है?

    इस मामले में सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें चल रही हैं। इनमें कथित Live sessions, objectionable content और QR Code दिखाए जाने से जुड़े दावे शामिल हैं।

    लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है—सोशल मीडिया पर किसी दावे का वायरल होना उसकी official confirmation नहीं है।

    खास तौर पर QR Code को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि उसके जरिए पैसे मांगे जाते थे। खबरों के अनुसार कुछ शिकायतों में QR Code का जिक्र है, लेकिन इससे वास्तव में पैसे मांगे गए या कोई payment हुआ, इसका स्वतंत्र और आधिकारिक confirmation अभी सामने नहीं आया है।

    Cyber Cell अब क्या जांचेगी?

    इस मामले में सबसे अहम हिस्सा Cyber investigation है। जांच सिर्फ यह देखने तक सीमित नहीं रहेगी कि वीडियो viral हुआ या नहीं।

    जांच में कई सवालों के जवाब तलाशे जा सकते हैं—

    • वीडियो का original source क्या है?
    • सबसे पहले इसे किस account से upload किया गया?
    • वायरल version original है या edited?
    • वीडियो में कोई manipulation या digital alteration हुई है या नहीं?
    • QR Code किस account से जुड़ा था?
    • वीडियो को social media पर बड़े स्तर पर किसने circulate किया?
    • वायरल content के पीछे original uploader और बाद में उसे फैलाने वाले लोग एक ही हैं या अलग?

    यानी अभी इस मामले का पूरा digital trail सामने आना बाकी है।

    खबर के अनुसार departmental inquiry की जिम्मेदारी सौम्या सिंह को दी गई है, जबकि cyber-related aspects की भी जांच की जा रही है।

    क्या वायरल वीडियो असली है?

    अभी इसका final answer नहीं है।

    यही इस खबर का सबसे important point है।

    वीडियो वायरल होने के बाद suspension जरूर हुआ है, लेकिन इससे यह automatically साबित नहीं होता कि वीडियो में किए जा रहे सभी दावे सही हैं।

    पुलिस की जांच यह भी देख रही है कि content genuine है या उसके साथ editing/manipulation की गई है। इसलिए official investigation पूरी होने से पहले वायरल वीडियो को final evidence मानना सही नहीं होगा।

    UP Police ने Social Media को लेकर पहले से सख्ती क्यों बढ़ाई है?

    मेरठ का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब UP Police पिछले कुछ समय से अपने personnel की social-media activity को लेकर काफी strict हुई है।

    UP Police की Social Media Policy-2023 में पुलिसकर्मियों के social-media इस्तेमाल को लेकर कई restrictions और guidelines हैं। इसमें official work, police identity, confidential information और departmental image से जुड़ी online activity को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है।

    इसके बाद 2026 में social-media violations को लेकर enforcement और ज्यादा दिखाई दी।

    मई 2026 में UP Police Headquarters ने objectionable posts और reels पर नजर रखने, violations का record रखने और departmental action की reporting को लेकर निर्देश जारी किए थे।

    इसके बाद duty के दौरान reels बनाने को लेकर भी police personnel को चेतावनी दी गई।

    यानी मेरठ की कार्रवाई को सिर्फ एक isolated incident की तरह देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। यह UP Police में social-media discipline को लेकर बढ़ती सख्ती के broader trend का भी हिस्सा है।

    क्या पुलिसकर्मी Social Media चला ही नहीं सकते?

    ऐसा नहीं है।

    मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि कोई पुलिसकर्मी Instagram, YouTube या Facebook account रखता है या नहीं।

    असल सवाल यह है कि—

    वह क्या content डाल रहा है, किस situation में डाल रहा है, क्या वह uniform या official identity का इस्तेमाल कर रहा है, क्या departmental rules टूट रहे हैं और क्या उसकी online activity police की professional image को प्रभावित कर रही है।

    यही वजह है कि किसी police officer की personal social-media activity और उसकी सरकारी जिम्मेदारी के बीच balance महत्वपूर्ण हो जाता है।

    क्या Suspension का मतलब नौकरी चली गई?

    नहीं।

    Suspension को सीधे dismissal या नौकरी से बर्खास्तगी नहीं माना जाता। यह departmental proceedings के दौरान की जाने वाली कार्रवाई हो सकती है।

    इस मामले में आगे क्या होगा, यह जांच रिपोर्ट और सामने आने वाले facts पर depend करेगा।

    अगर investigation में departmental violation साबित होता है तो आगे नियमों के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है। वहीं अगर वायरल content को लेकर कोई बड़ा digital manipulation सामने आता है तो investigation का focus दूसरे लोगों और उसके source/circulation की तरफ भी जा सकता है।

    इसलिए अभी final punishment को लेकर कोई conclusion निकालना जल्दबाजी होगी।

    अगर वीडियो Fake या Edited निकला तो?

    यह सवाल इस मामले में खास तौर पर important है।

    अगर Cyber Cell को पता चलता है कि वीडियो digitally manipulated था, तो investigation का focus यह पता लगाने पर जा सकता है कि original content क्या था, उसमें किसने बदलाव किया और manipulated version को viral किसने किया।

    यानी उस स्थिति में कहानी सिर्फ police officer की departmental conduct की नहीं रहेगी, बल्कि digital manipulation और content circulation की भी हो जाएगी।

    लेकिन फिलहाल ऐसा हुआ है, यह कहना भी जल्दबाजी होगी। इसकी पुष्टि investigation के बाद ही हो सकेगी।

    अगर वीडियो Genuine निकला तो?

    अगर investigation में content और उससे जुड़ी social-media activity को genuine पाया जाता है, तो departmental inquiry यह देखेगी कि इसमें कौन-कौन से service rules या social-media guidelines लागू होते हैं।

    इसके बाद suspension के आगे भी departmental action की संभावना rules और inquiry findings पर depend करेगी।

    इसलिए अभी सबसे महत्वपूर्ण चीज है—investigation report।

    क्या वीडियो वायरल करने वालों पर भी Action हो सकता है?

    यह भी जांच का अहम हिस्सा है।

    अगर Cyber Cell सिर्फ officer की social-media activity नहीं बल्कि वीडियो के source और circulation की भी जांच कर रही है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि content originally कहां से आया और किस तरह बड़े स्तर पर circulate हुआ।

    अगर investigation में कोई अलग digital offence सामने आता है, तो उसके आधार पर संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

    लेकिन फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी बताना सही नहीं होगा जब तक official investigation उसके खिलाफ कोई निष्कर्ष नहीं देती।

    क्या 2026 में ऐसे और Police Social Media Cases सामने आए हैं?

    मेरठ का मामला अकेला नहीं है।

    2026 में अलग-अलग राज्यों में police personnel से जुड़े reels, objectionable videos और viral-content मामलों में departmental action की खबरें सामने आई हैं।

    बिहार में एक महिला थाना SHO पर social-media reels से जुड़ी कार्रवाई हुई। उत्तर प्रदेश के मऊ में भी duty के दौरान reel को लेकर महिला police personnel के suspension की रिपोर्ट सामने आई। दूसरी तरफ UP में ऐसे मामले भी सामने आए जहां police misconduct का वीडियो viral होने के बाद संबंधित personnel पर action हुआ।

    इन मामलों को एक साथ देखने पर साफ है कि police departments के लिए social media अब सिर्फ personal entertainment का मामला नहीं रह गया है। यह discipline, public image और accountability से भी जुड़ चुका है।

    इस मामले का Police की Image पर क्या असर पड़ सकता है?

    Police और public के बीच trust बहुत important है।

    अगर किसी serving officer से जुड़ा genuine misconduct सामने आता है, तो लोगों के बीच police department की image पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    लेकिन इसका दूसरा side भी उतना ही important है।

    अगर कोई manipulated या fake video किसी officer को बदनाम करने के लिए viral किया जाता है, तो बिना verification के उसे सच मान लेना भी public trust के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    यानी इस तरह के मामले में तीन चीजों का balance जरूरी है—

    Accountability, Privacy और Verification.

    इसी वजह से मेरठ मामले में Cyber Cell की जांच सिर्फ departmental action के लिए नहीं, बल्कि वायरल content की वास्तविकता समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

    महिला Police Officer से जुड़े मामले में Privacy क्यों जरूरी है?

    सोशल मीडिया पर किसी महिला officer से जुड़ा objectionable content viral होने के बाद मामला अक्सर professional conduct से हटकर personal और abusive commentary तक पहुंच जाता है।

    अब मेरठ मामले में आगे क्या होगा?

    फिलहाल तीन चीजों पर नजर रहेगी—

    पहला: Cyber Cell की जांच में वायरल वीडियो की authenticity और digital trail को लेकर क्या सामने आता है।

    दूसरा: सौम्या सिंह की departmental inquiry में अनु रानी की social-media activity और alleged violations को लेकर क्या findings आती हैं।

    तीसरा: जांच के बाद suspension के आगे कोई departmental action होता है या मामला किसी दूसरे digital angle में बदलता है।

    इसलिए फिलहाल इस मामले का final conclusion निकालना जल्दबाजी होगी।

    मेरठ में महिला SI अनु रानी का suspension हो चुका है, लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी है—वायरल content की असली कहानी क्या है? इसका जवाब अब Cyber Cell और departmental inquiry की रिपोर्ट से सामने आएगा।

  • गोरखपुर से दिल्ली-मुंबई के लिए 2 अमृत भारत, जानें रूट-स्टॉपेज

    गोरखपुर से दिल्ली-मुंबई के लिए 2 अमृत भारत, जानें रूट-स्टॉपेज

    गोरखपुर से दिल्ली और मुंबई के लिए अमृत भारत ट्रेन की तैयारी है। जानें 14045/14046 का रूट, टाइमिंग, स्टॉपेज और मुंबई सेवा की पूरी जानकारी।

    गोरखपुर और पूर्वांचल के रेल यात्रियों के लिए रेलवे की ओर से बड़ी सुविधा सामने आई है। रेलवे बोर्ड ने पूर्वोत्तर रेलवे (NER) को Amrit Bharat की दो Sleeper Class रेक आवंटित की हैं। रेलवे की योजना के मुताबिक इनमें से एक रेक को गोरखपुर-दिल्ली और दूसरी को गोरखपुर-मुंबई रूट पर इस्तेमाल किया जाना है। दोनों रूटों पर यात्रियों की भारी मांग को देखते हुए नई सेवाओं से लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को अतिरिक्त विकल्प मिलने की उम्मीद है। दोनों सेवाओं से करीब 3,200 यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    लेकिन इस खबर में यात्रियों के लिए एक जरूरी बात है। गोरखपुर-दिल्ली Amrit Bharat की ट्रेन संख्या, समय और प्रस्तावित स्टॉपेज की जानकारी सामने आ चुकी है, जबकि गोरखपुर-मुंबई सेवा के अंतिम ट्रेन नंबर, टर्मिनल, पूरे स्टॉपेज और नियमित परिचालन की तारीख को लेकर अभी पूरी स्पष्टता नहीं है। आने वाले समय में रेल मंत्रालय इसकी भी विस्तृत घोषणा करने वाली है।

    गोरखपुर-दिल्ली Amrit Bharat का ट्रेन नंबर क्या है?

    गोरखपुर-दिल्ली के लिए प्रस्तावित Amrit Bharat Express के ट्रेन नंबर 14045 और 14046 हैं।

    14045 गोरखपुर से दिल्ली और 14046 दिल्ली से गोरखपुर की दिशा में है। Railway Board से प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह सेवा साप्ताहिक होगी और मंगलवार के आसपास overnight operation के साथ चलने की योजना बताई गई है।

    प्रस्तावित समय के अनुसार:

    ट्रेनरूटप्रस्थानआगमन
    14045Gorakhpur → Old Delhiरात 9:40 बजेअगले दिन दोपहर 12:50 बजे
    14046Old Delhi → Gorakhpurरात 12:40 बजेअगले दिन दोपहर 3:50 बजे

    इस हिसाब से दोनों दिशाओं में यात्रा का समय करीब 15 घंटे 10 मिनट होने का अनुमान है।

    हालांकि यात्रियों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग online railway platforms पर इस ट्रेन की operational status को लेकर अभी असंगत जानकारी दिखाई देती है। इसलिए actual यात्रा से पहले official railway timetable और booking availability को ही अंतिम मानना बेहतर होगा।

    गोरखपुर-दिल्ली Amrit Bharat किन स्टेशनों पर रुकेगी?

    Railway Board से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नई गोरखपुर-दिल्ली सेवा के लिए 11 intermediate stoppages बताए गए हैं। प्रमुख route इस प्रकार है:

    गोरखपुर → आनंद नगर → सिद्धार्थनगर → बढ़नी → बलरामपुर → गोंडा → बुढ़वल → सीतापुर → शाहजहांपुर → बरेली → मुरादाबाद → गाजियाबाद → Old Delhi

    इस route की खास बात यह है कि नई ट्रेन Barhni और Siddharth Nagar के रास्ते दिल्ली जाएगी। इससे इस क्षेत्र के यात्रियों को दिल्ली के लिए अतिरिक्त direct connectivity मिल सकती है।

    Basti, Lucknow, Kanpur और Agra को लेकर भ्रम क्यों है?

    आपने इस खबर से जुड़ी कई reports में बस्ती, लखनऊ, कानपुर, टूंडला और आगरा जैसे शहरों के नाम देखे होंगे। लेकिन इन स्टेशनों को नई 14045/14046 Gorakhpur-Delhi Amrit Bharat के confirmed stoppages के रूप में नहीं बताया गया है।

    इन स्टेशनों वाला corridor दूसरी Amrit Bharat service से संबंधित है। इसलिए यात्रियों को सिर्फ शहर का नाम देखकर नहीं, बल्कि ट्रेन नंबर देखकर अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

    गोरखपुर से मुंबई के लिए Amrit Bharat का क्या प्लान है?

    रेलवे बोर्ड द्वारा NER को आवंटित दो Amrit Bharat रेक में से एक को गोरखपुर-मुंबई रूट पर चलाने की योजना बताई गई है। खबर के मुताबिक, गोरखपुर से मुंबई के लिए पहले से कई ट्रेनें चलने के बावजूद यात्रियों की मांग काफी ज्यादा है। इसी वजह से अतिरिक्त Amrit Bharat सेवा को उपयोगी माना जा रहा है।

    लेकिन यहां सबसे जरूरी सवाल है—मुंबई ट्रेन का final route क्या होगा?

    फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय जानकारी में Mumbai service के लिए एक साथ ये सभी चीजें स्पष्ट रूप से confirm नहीं हैं:

    • ट्रेन नंबर
    • Mumbai का final terminal
    • गोरखपुर से departure time
    • Mumbai arrival time
    • सप्ताह में कितने दिन चलेगी
    • सभी confirmed stoppages
    • regular commercial operation की तारीख
    • IRCTC booking शुरू होने की तारीख

    क्या Mumbai ट्रेन Kota, Ratlam, Vadodara और Surat होकर जाएगी?

    रेलवे द्वारा दी गई Online जानकारी में गोरखपुर-मुंबई के संभावित route को लेकर अलग-अलग station lists दिखाई गई है। इनमें Kota, Ratlam, Vadodara, Surat और Borivali जैसे स्टेशन भी बताए गए हैं। लेकिन हम इन सभी स्टेशनों की सूची को नई Gorakhpur-Mumbai Amrit Bharat की final official stoppage list के रूप में पुष्टि नहीं कर सकते।

    जब तक Railway Board/Indian Railways का अंतिम timetable सामने नहीं आता, संभावित Mumbai route को confirmed route न मानें।

    गोरखपुर-मुंबई के लिए नई ट्रेन की जरूरत क्यों है?

    खबर के मुताबिक, वर्तमान में गोरखपुर से मुंबई के लिए छह ट्रेनें चल रही है, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों के बीच reservation को लेकर लगातार दबाव रहता है। इसी passenger demand को देखते हुए दो नई Amrit Bharat सेवाओं के लिए रेक उपलब्ध कराने की योजना सामने आई।

    इसका उद्देश्य उन यात्रियों के लिए अतिरिक्त capacity उपलब्ध कराना है जिन्हें लंबी दूरी की यात्रा के लिए affordable Sleeper या General Class विकल्प चाहिए।

    किन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?

    नई सेवाओं का असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ सकता है जो रोजगार, पढ़ाई, इलाज या परिवार से जुड़े कारणों से पूर्वांचल और बड़े महानगरों के बीच नियमित यात्रा करते हैं।

    नौकरी और रोजगार के लिए जाने वाले यात्री

    दिल्ली और मुंबई दोनों देश के बड़े employment centres हैं। पूर्वांचल से इन शहरों की ओर बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए जाते हैं। अतिरिक्त रेल service उन्हें यात्रा का एक और विकल्प दे सकती है।

    प्रवासी कामगार

    कम लागत वाली लंबी दूरी की Sleeper connectivity उन यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो नियमित रूप से काम के लिए दूसरे शहरों में जाते हैं और समय-समय पर अपने घर लौटते हैं।

    छात्र

    Delhi और Mumbai जैसे शहरों में पढ़ने वाले छात्रों को भी अतिरिक्त rail connectivity का फायदा मिल सकता है, खासकर छुट्टियों और परीक्षा के बाद घर लौटने के समय।

    मरीज और उनके परिजन

    बड़े शहरों में इलाज के लिए जाने वाले यात्रियों के लिए affordable long-distance rail service एक महत्वपूर्ण travel option हो सकती है।

    परिवार

    दूसरे शहरों में नौकरी करने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त ट्रेन का मतलब त्योहारों और पारिवारिक अवसरों पर घर आने-जाने का एक और विकल्प हो सकता है।

    Amrit Bharat ट्रेन में क्या खास है?

    Amrit Bharat Express को Indian Railways ने मुख्य रूप से affordable long-distance travel के लिए विकसित किया है।

    सरकारी जानकारी के मुताबिक देश में अबतक 72 Amrit Bharat train services उपलब्ध है। सरकार के अनुसार ये trains affordable long-distance connectivity देने पर केंद्रित हैं और low- तथा middle-income families के लिए उपयोगी हैं।

    Amrit Bharat trains में General और Sleeper Class coaches के साथ passenger-focused सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें CCTV surveillance, fire detection and suppression systems, emergency communication, बेहतर toilets, charging facilities, improved seats और berths तथा Divyangjan-friendly सुविधाएं शामिल हैं।

    इन ट्रेनों का उद्देश्य Vande Bharat जैसी premium service देना नहीं, बल्कि कम और मध्यम आय वाले यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ लंबी दूरी की affordable rail connectivity उपलब्ध कराना है।

    क्या Amrit Bharat में AC coach होता है?

    Amrit Bharat की मौजूदा service configuration मुख्य रूप से non-AC General और Sleeper Class पर आधारित है।

    इसलिए अगर कोई यात्री AC यात्रा की उम्मीद कर रहा है तो उसे Amrit Bharat को Vande Bharat या Rajdhani जैसी AC-focused service से अलग समझना चाहिए।

    नई ट्रेन का किराया कितना होगा?

    गोरखपुर-दिल्ली और प्रस्तावित गोरखपुर-मुंबई service का final fare official booking data के बिना निश्चित रूप से बताना उचित नहीं होगा।

    Amrit Bharat का उद्देश्य affordable travel है, लेकिन किसी specific journey का actual fare दूरी, class, reservation और लागू railway charges के अनुसार तय होता है।

    इसलिए किसी दूसरी Amrit Bharat का किराया देखकर Gorakhpur-Delhi या Gorakhpur-Mumbai का exact fare अनुमान लगाना सही नहीं होगा।

    क्या नई ट्रेनों से मौजूदा ट्रेनों की भीड़ कम होगी?

    इसका सबसे संभावित फायदा passenger capacity बढ़ने के रूप में हो सकता है।

    अगर नई services नियमित रूप से शुरू होती हैं और उनका timetable मौजूदा trains से अलग रहता है, तो कुछ यात्रियों के पास अतिरिक्त विकल्प होगा। इससे खास तौर पर peak travel periods में reservation pressure कम करने में मदद मिल सकती है।

    एक आकलन के मुताबिक, दोनों सेवाओं से करीब 3,200 यात्रियों को सुविधा मिलने का अनुमान लगाया जा सकता है। इसे दोनों सेवाओं से जुड़ी reported passenger benefit के रूप में समझना चाहिए, न कि रोजाना 3,200 नए यात्रियों की गारंटी के रूप में।

    पूर्वांचल पर इसका क्या असर पड़ेगा?

    इसका प्रभाव सिर्फ रेलवे यात्रियों तक सीमित नहीं हो सकता।

    पूर्वांचल और बड़े महानगरों के बीच बेहतर rail connectivity से लोगों की employment mobility, education access, medical travel और family mobility आसान हो सकती है।

    रोजगार के लिए बाहर जाने वाले लोगों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। छात्रों और मरीजों को लंबी दूरी की यात्रा में एक और affordable option मिल सकता है। वहीं त्योहारों और छुट्टियों में घर लौटने वाले यात्रियों के लिए अतिरिक्त capacity उपयोगी हो सकती है।

    रेलवे स्टेशनों के आसपास छोटे कारोबार, स्थानीय transport, food vendors और अन्य passenger-oriented businesses को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है। हालांकि इन संभावित आर्थिक प्रभावों को अभी किसी निश्चित रकम में नहीं बांधा जा सकता।

    क्या गोरखपुर को आगे भी नई Amrit Bharat सेवाएं मिल रही हैं?

    गोरखपुर से जुड़ी Amrit Bharat connectivity को केवल Delhi और Mumbai तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए।

    2026 में Indian Railways देशभर में Amrit Bharat network का विस्तार कर रही है। सरकार इसे affordable long-distance connectivity बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है।

    इसी व्यापक विस्तार के बीच गोरखपुर जैसे बड़े regional railway hub से Delhi और Mumbai जैसे प्रमुख employment और economic centres को जोड़ने की योजना का महत्व और बढ़ जाता है।

    यात्रियों को अभी क्या करना चाहिए?

    अगर आप गोरखपुर से Delhi या Mumbai जाने की योजना बना रहे हैं तो सिर्फ सोशल मीडिया posts या third-party railway websites देखकर टिकट बुक करने की कोशिश न करें।

    खासकर तीन चीजें जरूर जांचें:

    पहली: ट्रेन नंबर।

    दूसरी: official running date और frequency।

    तीसरी: IRCTC/Indian Railways पर वास्तविक booking availability।

    Gorakhpur-Delhi के लिए 14045/14046 की route और timing की जानकारी विभिन्न reports में सामने आ चुकी है, लेकिन online railway listings में इसके operational status को लेकर अभी भी अंतर दिखाई देता है।

    वहीं Gorakhpur-Mumbai service के मामले में अभी final train number, terminal, stoppages और regular start date की official clarity का इंतजार करना बेहतर है।

    एक नजर में पूरी जानकारी

    जानकारीस्थिति
    NER को Amrit Bharat की 2 रेकरिपोर्टेड
    एक रेक Gorakhpur-Delhi के लिएरिपोर्टेड
    दूसरी रेक Gorakhpur-Mumbai के लिएयोजना/रिपोर्टेड
    Gorakhpur-Delhi train number14045/14046
    Delhi service frequencyसाप्ताहिक के रूप में रिपोर्टेड
    Gorakhpur departure21:40
    Old Delhi arrival12:50 अगले दिन
    Delhi departure00:40
    Gorakhpur arrival15:50
    Delhi routeBarhni-Siddharth Nagar side
    Intermediate stoppages11 बताए गए
    Mumbai train numberअभी स्पष्ट नहीं
    Mumbai terminalअभी अंतिम पुष्टि जरूरी
    Mumbai stoppagesfinal timetable का इंतजार
    Mumbai start datefinal operational confirmation जरूरी
    Reported passenger benefitकरीब 3,200

    1. Ministry of Railways / PIB — Amrit Bharat की मौजूदा सेवाओं और ट्रेन नंबरों की आधिकारिक सूची

    PIB — Ministry of Railways: Amrit Bharat Express services

    2. PIB — Amrit Bharat के विस्तार और नई सेवाओं की आधिकारिक जानकारी

    PIB — Ministry of Railways: Amrit Bharat Express expansion

    3. PIB — Banaras–Hadapsar और Mumbai connectivity से संबंधित आधिकारिक जानकारी

    PIB — Ministry of Railways: Amrit Bharat connectivity

    FAQ: Gorakhpur Amrit Bharat Express

    Gorakhpur से Delhi Amrit Bharat का ट्रेन नंबर क्या है?

    Gorakhpur-Delhi Amrit Bharat के लिए 14045 और 14046 ट्रेन नंबर रिपोर्ट किए गए हैं। 14045 Gorakhpur से Delhi और 14046 Delhi से Gorakhpur की दिशा में है।

    Gorakhpur से Delhi Amrit Bharat कितने बजे चलेगी?

    प्रस्तावित timetable के अनुसार 14045 Gorakhpur से रात 9:40 बजे रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 12:50 बजे Old Delhi पहुंचेगी।

    Delhi से Gorakhpur Amrit Bharat कितने बजे चलेगी?

    14046 के लिए Old Delhi से रात 12:40 बजे प्रस्थान और अगले दिन दोपहर 3:50 बजे Gorakhpur पहुंचने का समय बताया गया है।

    Gorakhpur-Delhi Amrit Bharat किन स्टेशनों पर रुकेगी?

    11 intermediate stoppages में आनंद नगर, सिद्धार्थनगर, बढ़नी, बलरामपुर, गोंडा, बुढ़वल, सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद और गाजियाबाद शामिल हैं।

    क्या नई Gorakhpur-Delhi Amrit Bharat Lucknow और Kanpur होकर जाएगी?

    नहीं। उपलब्ध Railway Board-derived route information के अनुसार नई 14045/14046 service का reported route Lucknow और Kanpur होकर नहीं जाता। Basti-Lucknow-Kanpur-Tundla वाला route दूसरी Amrit Bharat service से संबंधित है।

    क्या Gorakhpur से Mumbai के लिए Amrit Bharat चलेगी?

    NER को आवंटित दो Amrit Bharat रेक में से एक को Gorakhpur-Mumbai route पर चलाने की योजना है। लेकिन इसकी final timetable और operational details को अभी official confirmation के आधार पर देखना जरूरी है।

    क्या Gorakhpur-Mumbai Amrit Bharat Kota, Ratlam और Surat होकर जाएगी?

    इन स्टेशनों को लेकर online अलग-अलग route lists उपलब्ध हैं, लेकिन इन्हें अभी नई Gorakhpur-Mumbai Amrit Bharat की final confirmed stoppage list नहीं माना जा सकता।

    Gorakhpur-Mumbai Amrit Bharat कब शुरू होगी?

    दो रेक आवंटित होने और Mumbai service की योजना की रिपोर्ट सामने आई है, लेकिन final commercial start date को official railway notification से confirm करना जरूरी है।

    क्या Amrit Bharat Express AC ट्रेन है?

    मौजूदा Amrit Bharat services मुख्य रूप से non-AC General और Sleeper Class configuration पर आधारित हैं। जुलाई 2026 की PIB जानकारी भी इसकी affordable long-distance positioning और मौजूदा coach composition को रेखांकित करती है।

    Amrit Bharat में कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?

    इन ट्रेनों में CCTV, fire detection और suppression systems, emergency communication, बेहतर toilets, charging facilities, improved seats और berths तथा Divyangjan-friendly सुविधाएं दी जाती हैं।

    क्या नई Amrit Bharat से यात्रियों को फायदा होगा?

    हां, नई सेवाओं से long-distance passenger capacity बढ़ सकती है। खासकर रोजगार, शिक्षा, इलाज और परिवार से जुड़े कारणों से Delhi और Mumbai जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त travel option मिल सकता है। दोनों सेवाओं से करीब 3,200 यात्रियों को सुविधा मिलने की बात कही गई थी।

    गोरखपुर से Delhi और Mumbai के लिए Amrit Bharat connectivity बढ़ाने की योजना पूर्वांचल के यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। रेलवे बोर्ड द्वारा NER को दो Sleeper Class rakes आवंटित किए जाने की रिपोर्ट है, जिनमें एक को Delhi और दूसरी को Mumbai route के लिए इस्तेमाल करने की योजना बताई गई है।

    Gorakhpur-Delhi service के लिए 14045/14046, timing और Barhni-Siddharth Nagar वाले route की जानकारी सामने आ चुकी है। वहीं Mumbai service में अभी सबसे जरूरी चीज final timetable है। इसलिए Kota, Ratlam, Vadodara, Surat या Borivali जैसे संभावित stoppages को official confirmation से पहले अंतिम मानना सही नहीं होगा।

    यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि नई ट्रेन की घोषणा, रेक आवंटन और actual commercial operation तीन अलग-अलग operational stages हो सकते हैं। टिकट बुक करने से पहले official railway timetable और वास्तविक booking availability जरूर जांचें।

    इस तरह नई Amrit Bharat सेवाएं केवल दो नई रेलगाड़ियों का मामला नहीं हैं। इनके जरिए पूर्वांचल को देश के दो बड़े employment और economic centres से affordable long-distance rail connectivity देने की कोशिश दिखाई देती है—और यही इस फैसले का सबसे बड़ा passenger benefit है।

  • IMPCL Sale: ₹145 करोड़ की Net Worth, ₹17.65 करोड़ का Profit… फिर ₹121 करोड़ में क्यों बिकी सरकारी कंपनी?

    IMPCL Sale: ₹145 करोड़ की Net Worth, ₹17.65 करोड़ का Profit… फिर ₹121 करोड़ में क्यों बिकी सरकारी कंपनी?

    IMPCL ₹121 करोड़ में क्यों बिकी? ₹145 करोड़ की Net Worth, ₹17.65 करोड़ Profit, कर्मचारियों, दवाइयों और सरकारी संपत्ति पर उठे बड़े सवाल जानिए।

    नई दिल्ली: सरकार ने जिस IMPCL को ₹121 करोड़ में निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया है, उसके बारे में आम नागरिक का सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इसे किस कंपनी ने खरीदा। असली सवाल इससे कहीं बड़ा है—एक ऐसी सरकारी कंपनी, जो profit में थी, जिसका FY2024-25 net worth ₹145.49 करोड़ था और जिसने ₹17.65 करोड़ का net profit कमाया, उसे ₹121.01 करोड़ में बेचने से देश और जनता को वास्तव में क्या मिला और क्या खोया?

    क्योंकि IMPCL केवल एक सामान्य सरकारी कंपनी नहीं थी। यह Ministry of AYUSH के administrative control वाली Central Public Sector Enterprise थी, जो Ayurvedic और Unani medicines बनाकर CGHS, ESIC, Central और State Government institutions सहित सरकारी healthcare network को supply करती थी। सरकार ने खुद संसद में बताया था कि IMPCL एक profit-making CPSE है।

    अब कंपनी का management और 100% equity shareholding Skymap Pharmaceuticals Private Limited के हाथ में जाने जा रहा है। सरकार के अनुसार approved highest bid ₹121,00,94,400 थी।

    impcl-profit-2024-25

    यहीं से जनता के कई सवाल शुरू हो गए।

    सबसे पहले समझिए—IMPCL में ऐसा क्या था?

    IMPCL की स्थापना 12 जुलाई 1978 को Indian Systems of Medicine के तहत genuine, safe और efficacious Ayurvedic तथा Unani medicines के manufacturing और marketing के उद्देश्य से हुई थी।

    कंपनी CGHS, CCRAS, CCRUM, ESIC और Central तथा State Government institutions को medicines supply करती रही थी। Ministry of AYUSH के तहत IMPCL ही एकमात्र Ayurvedic और Unani medicines बनाने वाला CPSE है।

    यानी यह सिर्फ एक factory नहीं थी।

    यह सरकारी healthcare supply chain का एक हिस्सा थी।

    और यही वजह है कि इसकी sale को केवल “एक PSU की privatization” कहकर छोड़ देना जनता के लिए अधूरी जानकारी होगी।

    ₹121 करोड़ में क्या हुआ?

    26 मई 2026 को वित्त मंत्रालय ने बताया कि Skymap Pharmaceuticals Private Limited को IMPCL का strategic buyer मंजूर किया गया।

    Approved bid:

    ₹121.00944 करोड़

    इस transaction में IMPCL की 100% equity shareholding और management control transfer होना है।

    सरकार के अनुसार प्रक्रिया दो-stage competitive bidding के माध्यम से हुई।

    2023 में Preliminary Information Memorandum जारी हुआ।

    कुल 7 interested parties ने interest दिखाया और सभी को qualified bidders के रूप में shortlist किया गया।

    इसके बाद 1 दिसंबर 2025 को RFP और Share Purchase Agreement के terms जारी किए गए।

    20 जनवरी 2026 तक दो sealed financial bids प्राप्त हुईं।

    दोनों technically qualified पाई गईं और उनमें Skymap Pharmaceuticals की bid सबसे अधिक थी।

    सरकार ने कहा कि यह bid reserve price से भी ऊपर थी।

    इसलिए यह कहना कि “कंपनी बिना किसी bidding process के बेच दी गई” उपलब्ध official record से साबित नहीं होता।

    लेकिन इससे एक अलग और ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल जरूर पैदा होता है:

    क्या competitive process में मिली ₹121 करोड़ की कीमत IMPCL की वास्तविक economic value के लिए पर्याप्त थी?

    इसका जवाब अभी valuation documents के बिना पूरी तरह नहीं दिया जा सकता। इसमें सरकार को पारदर्शिता दिखानी चाहिए थी।

    ₹145.49 करोड़ की Net Worth और ₹121 करोड़ की Sale Price

    IMPCL के FY2024-25 financial figures में:

    • Net Worth — ₹145.49 करोड़
    • Turnover — ₹177.31 करोड़
    • Profit Before Tax — ₹24.19 करोड़
    • Profit After Tax — ₹17.65 करोड़

    दर्ज है।

    अब simple comparison देखिए।

    Reported Net Worth: ₹145.49 करोड़

    Approved Sale Bid: ₹121.01 करोड़

    Difference:

    लगभग ₹24.48 करोड़

    यानी transaction value FY2024-25 की reported net worth से लगभग 16.8% कम थी।

    यहां आप को यह भी बता दें कि,

    Net Worth और Fair Market Value एक चीज नहीं हैं।

    Book value से यह साबित नहीं होता कि company की market value भी ₹145 करोड़ ही थी।

    Fair value निकालने के लिए assets, liabilities, future earnings, cash flows, business risks, land rights, intellectual property और अन्य factors देखे जाते हैं।

    लेकिन यह सवाल पूरी ताकत से पूछा जा सकता है:

    अगर ₹121 करोड़ ही उचित fair value थी, तो independent valuation report और reserve-price calculation जनता के सामने क्यों नही रखी गई?

    कंपनी घाटे में नहीं थी—सरकार ने खुद संसद में माना था

    28 मार्च 2025 को लोकसभा में सरकार से IMPCL के disinvestment पर सवाल पूछा गया था।

    सरकार ने अपने जवाब में साफ कहा:

    “Yes, IMPCL is a profit making CPSE.”

    संसदीय जवाब में पिछले वर्षों के net profit भी दिए गए:

    वित्त वर्षNet Profit
    2019-20₹0.45 करोड़
    2020-21₹11.05 करोड़
    2021-22₹33.76 करोड़
    2022-23₹20.81 करोड़
    2023-24₹12.81 करोड़

    इसलिए यह कहानी “घाटे में चल रही सरकारी कंपनी को बचाने के लिए बेच दिया गया” वाली सरल कहानी नहीं है।

    लेकिन इसका उल्टा भी automatically सही नहीं है कि “profit-making company को बेचना गलत ही है।”

    सरकार strategic disinvestment की अपनी policy के तहत किसी CPSE से बाहर निकल सकती है।

    असल सवाल है:

    क्या taxpayer को उस exit से पर्याप्त और उचित value मिली?

    सरकार को ₹121 करोड़ मिले—लेकिन future income का क्या?

    यह सवाल शायद पूरे मामले का सबसे कम चर्चा किया गया हिस्सा है।

    FY2024-25 में IMPCL ने ₹6.73 करोड़ dividend दिया था।

    इसमें:

    ₹6.60 करोड़ भारत सरकार को मिला।

    अब एक simple calculation समझिए।

    ₹121.01 करोड़ की sale value, FY2024-25 के ₹6.60 करोड़ Government dividend के लगभग 18.3 गुना है।

    इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार को अगले 18 साल तक ₹6.60 करोड़ हर साल मिलता ही रहता।

    Profit और dividend हर साल बदल सकते हैं।

    लेकिन यह जरूर बताता है कि government ownership से आने वाली future dividend income भी इस transaction की economic analysis का हिस्सा होनी चाहिए।

    इसलिए जनता का सवाल है:

    सरकार ने एकमुश्त ₹121 करोड़ लेकर future ownership benefits—जैसे dividend और संभावित future value creation—को valuation में कैसे consider किया?

    अगर valuation report में इसका जवाब है, तो उसे public किया जाना चाहिए।

    अब सबसे बड़ा सवाल—सरकारी कर्मचारियों का क्या होगा?

    यह मुद्दा केवल financial नहीं है।

    28 मार्च 2025 के लोकसभा जवाब के अनुसार 18 मार्च 2025 तक IMPCL में:

    • 74 permanent employees
    • 1 trainee
    • 11 contractual employees

    थे।

    यानी कुल 86 लोग सीधे plant से जुड़े थे।

    इसके अलावा court record में petitioner ने यह भी कहा कि IMPCL के employees, contractual workers और farmers बड़ी संख्या में इसके functioning पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। यह petitioner का दावा है, government finding नहीं।

    अब असली सवाल है:

    Private ownership के बाद इन कर्मचारियों का क्या होगा?

    क्या:

    • permanent employees की service continuity सुरक्षित है?
    • contractual workers के लिए क्या व्यवस्था है?
    • retrenchment पर कोई restriction है?
    • salary और service conditions में क्या बदलाव हो सकता है?
    • pension, gratuity और अन्य statutory benefits का क्या होगा?
    • existing employees को कितने समय तक protection मिलेगा?

    सरकार ने संसद में कहा था कि strategic buyer से applicable law के अधीन manufacturing और supply business को going-concern basis पर जारी रखने की अपेक्षा की है।

    लेकिन “business going concern पर जारी रहेगा” और “हर employee की नौकरी हमेशा सुरक्षित रहेगी”—दो अलग बातें हैं।

    इसलिए employee safeguards के वास्तविक terms जनता के सामने आना जरूरी हैं।

    और यहां आता है सबसे संवेदनशील सवाल—दवाइयों की कीमत

    IMPCL की medicines केवल commercial market के लिए नहीं थीं।

    सरकारी record के अनुसार IMPCL CGHS, CCRAS, CCRUM, ESIC और Central/State government institutions को medicines supply करती थी।

    2021 में PIB ने यह भी बताया था कि IMPCL की Ayurvedic और Unani medicines की prices Ministry of Finance के Department of Expenditure द्वारा vet और finalise की जाती थीं और GeM के जरिए government buyers को उपलब्ध कराई जाती थीं। उस समय GeM पर 311 IMPCL medicines की 31 categories live की गई थीं।

    अब ownership बदल रही है।

    तो जनता का सवाल बिल्कुल स्वाभाविक है:

    क्या private ownership के बाद भी वही pricing safeguards लागू रहेंगे?

    और अगर नहीं, तो:

    impcl-disinvestment

    सरकारी संस्थानों के लिए दवाइयों की कीमत कैसे तय होगी?

    यहां एक बात स्पष्ट होनी चाहिए:

    अभी उपलब्ध documents से यह साबित नहीं होता कि Skymap Pharmaceuticals IMPCL की medicines के दाम बढ़ाने वाली है।

    लेकिन यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि future pricing के लिए कौन-सी binding safeguards लागू होंगी।

    यही वह information है जिसे सरकार को public करना चाहिए।

    अगर दवाइयों के दाम बढ़े तो असर किस पर पड़ेगा?

    मान लीजिए किसी government procurement में IMPCL की medicines पर सालाना खर्च ₹X है।

    अगर future procurement cost में 10% की वृद्धि होती है, तो अतिरिक्त burden होगा:

    ₹X × 10%

    लेकिन यहां ₹X का verified public figure उपलब्ध न होने के कारण कोई वास्तविक national cost estimate देना ईमानदार नहीं होगा।

    इसलिए अभी “देश पर ₹100 करोड़ का बोझ बढ़ेगा” या कोई दूसरा number बताना गलत होगा।

    लेकिन सरकार को यह data सार्वजनिक करना चाहिए:

    1. Government institutions IMPCL से सालाना कितनी medicines खरीदते हैं?
    2. कुल procurement value कितनी है?
    3. कौन-कौन सी medicines सबसे ज्यादा खरीदी जाती हैं?
    4. Current government-approved prices क्या हैं?
    5. Private ownership के बाद pricing mechanism क्या होगा?
    6. Government procurement में price escalation की कोई सीमा है या नहीं?

    इन आंकड़ों के बाद जनता को वास्तविक financial impact बताया जा सकता है।

    क्या private company मुनाफा नहीं कमाएगी?

    यह सवाल भी भावनात्मक नहीं, आर्थिक तरीके से समझना होगा।

    Skymap Pharmaceuticals एक private strategic buyer है।

    Private buyer का सामान्य commercial objective business को profitable और sustainable बनाना होता है।

    लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि buyer निश्चित रूप से medicine prices बढ़ाएगा।

    दाम बढ़ेंगे या नहीं, यह निर्भर करेगा:

    • procurement contracts पर;
    • competition पर;
    • government tender conditions पर;
    • pricing rules पर;
    • product-specific regulation पर;
    • और SPA में मौजूद obligations पर।

    इसलिए सही सवाल यह है:

    सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कौन-से contractual safeguards लगाए हैं कि public healthcare supply महंगी न हो?

    अगर safeguards मजबूत हैं, तो सरकार उन्हें public करे।

    अगर safeguards नहीं हैं, तो सरकार को जनता को इसका कारण बताना चाहिए।

    क्या इससे देश को ₹24.48 करोड़ का नुकसान हुआ?

    अभी यह कहना जल्दबाजी होगी।

    ₹145.49 करोड़ net worth और ₹121.01 करोड़ sale value के बीच लगभग ₹24.48 करोड़ का अंतर है।

    लेकिन:

    Net worth – Sale Price = Actual Loss

    ऐसा financial rule नहीं है।

    अगर independent valuation ₹110 करोड़ निकली थी और ₹121 करोड़ की bid मिली, तो transaction book net worth से नीचे होने के बावजूद fair हो सकती है।

    दूसरी ओर अगर independent valuation ₹180 करोड़ या ₹200 करोड़ थी और reserve price तथा transaction उससे काफी नीचे रहा, तो public asset valuation पर गंभीर सवाल उठेंगे।

    इसलिए:

    Actual public loss जानने के लिए valuation report जरूरी है।

    और यही वह document है जिसे जनता को देखना चाहिए।

    Reserve Price भी क्यों महत्वपूर्ण है?

    सरकार ने खुद कहा है कि ₹121.00944 करोड़ की bid reserve price से ऊपर थी।

    लेकिन public-interest perspective से अगला सवाल है:

    Reserve price कितना था?

    और:

    उसे तय कैसे किया गया?

    अगर reserve price ₹100 करोड़ था, तो ₹121 करोड़ की bid का अर्थ अलग होगा।

    अगर reserve price ₹120 करोड़ था, तो picture अलग होगी।

    और अगर independent valuation उससे काफी ऊपर थी, तो फिर अलग सवाल खड़े होंगे।

    इसलिए केवल यह कहना कि “bid reserve price से ऊपर थी” पर्याप्त transparency नहीं है।

    जनता को reserve price और valuation methodology भी समझनी चाहिए।

    दूसरी bid कितनी थी?

    सरकार ने बताया कि final stage में दो sealed financial bids मिली थीं और Skymap highest bidder रही।

    लेकिन available PIB release में दूसरी financial bid की राशि सार्वजनिक नहीं की गई।

    यह आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण है।

    क्यों?

    क्योंकि इससे पता चल सकता है कि:

    • competition कितना close था;
    • buyer की bid market में कितनी competitive थी;
    • second bidder और successful bidder के बीच कितना अंतर था;
    • और final price के बारे में market discovery क्या संकेत देती है।

    इसलिए:

    Second-highest bid का disclosure भी public scrutiny के लिए महत्वपूर्ण है।

    35.81-acre land का सवाल भी खत्म नहीं हुआ

    IMPCL का manufacturing facility Uttarakhand में leased land पर स्थित है।

    Delhi High Court के judgment में petitioner की pleadings के आधार पर लगभग 36-acre land और उसके use conditions का उल्लेख है। Court ने यह भी record किया कि High Court of Uttarakhand ने 9 January 2025 को कहा था कि जिस उद्देश्य के लिए land दी गई है, disinvestment भी उस condition के अधीन रहेगा।

    यह बहुत महत्वपूर्ण है।

    क्योंकि इसका अर्थ है कि जमीन को simply “सरकार की freehold property” समझना गलत होगा।

    लेकिन इसका दूसरा अर्थ यह भी नहीं कि land का economic value शून्य है।

    Valuation में leasehold rights को कैसे value किया गया?

    यह भी public disclosure का विषय होना चाहिए।

    Court ने क्या कहा?

    IMPCL Karamchari Sangh ने Delhi High Court में strategic disinvestment को चुनौती दी।

    Petitioner ने आरोप लगाया कि:

    • IMPCL undervalued हुई;
    • successful bidder prescribed financial eligibility criteria पूरा नहीं करता था;
    • employees और अन्य stakeholders के लिए पर्याप्त safeguards नहीं थे;
    • disinvestment process में alleged irregularities की जांच होनी चाहिए।

    Petitioner ने investigation की मांग भी की।

    लेकिन यहां बहुत सावधानी जरूरी है।

    Delhi High Court ने इन allegations को साबित नहीं किया।

    22 July 2026 को Delhi High Court ने petition को territorial jurisdiction की कमी के कारण non-maintainable मानते हुए dismiss किया।

    Court ने साफ कहा कि उसके judgment में merits पर कोई opinion नहीं है।

    इसलिए दो बातें गलत होंगी:

    “Court ने IMPCL sale में घोटाला साबित कर दिया।” — गलत।

    और:

    “Court ने सरकार को clean chit दे दी।” — यह भी गलत।

    Court ने merits पर फैसला नहीं दिया।

    यह distinction जनता को बताना जरूरी है।

    सरकार की जिम्मेदारी अब क्या है?

    Strategic disinvestment सरकार का policy decision हो सकता है।

    लेकिन sale के बाद भी public-interest questions खत्म नहीं हो जाते।

    सरकार की जिम्मेदारी अब कम से कम इन सवालों पर transparency सुनिश्चित करने की है:

    1. Valuation

    Independent asset valuation report public की जाए।

    2. Reserve Price

    Reserve price और उसके calculation methodology को स्पष्ट किया जाए।

    3. Bidding

    दूसरे qualified bidder की final bid के disclosure पर स्थिति स्पष्ट की जाए।

    4. Employees

    Employees और contractual workers के safeguards बताए जाएं।

    5. Medicine Supply

    CGHS, ESIC और government institutions को medicine supply continuity की binding व्यवस्था स्पष्ट की जाए।

    6. Medicine Pricing

    Private ownership के बाद government procurement prices कैसे तय होंगे, यह बताया जाए।

    7. Land

    Leasehold land और उसके use restrictions का transaction पर क्या प्रभाव पड़ा, यह स्पष्ट किया जाए।

    8. Public Money

    ₹121 करोड़ की one-time receipt के मुकाबले future dividend और ownership benefits का valuation कैसे किया गया, यह बताया जाए।

    जनता के लिए असली सवाल: सरकार ने क्या बेचा और बदले में क्या पाया?

    इस transaction को केवल ₹121 करोड़ की sale के रूप में देखना अधूरा है।

    एक तरफ सरकार को एकमुश्त transaction value मिली।

    दूसरी तरफ public ownership खत्म हुई।

    इसके साथ future:

    • dividend income,
    • business growth,
    • strategic healthcare role,
    • institutional supply capability,
    • और संभावित future asset value

    पर government ownership समाप्त हो गई।

    यह कहना अभी संभव नहीं कि सरकार ने future में कितना कमाया होता।

    लेकिन यह पूछना बिल्कुल उचित है कि valuation में इन future benefits को किस तरह consider किया गया।

    impcl-skymap-pharmaceuticals

    IMPCL Sale: अब सरकार से जनता को इन 10 सवालों के जवाब चाहिए

    1. IMPCL की independent valuation कितनी थी?

    2. Reserve price कितना तय किया गया था?

    3. Reserve price तय करने की पूरी methodology क्या थी?

    4. दूसरे qualified bidder की final bid कितनी थी?

    5. FY2025-26 की audited financial position क्या थी?

    6. 35.81-acre/लगभग 36-acre leasehold land को valuation में किस तरह consider किया गया?

    7. Employees और contractual workers के लिए SPA में क्या safeguards हैं?

    8. Government institutions को medicines की supply कितने समय तक और किन conditions पर जारी रखनी होगी?

    9. Private ownership के बाद medicine pricing के लिए क्या safeguards हैं?

    10. ₹121 करोड़ की one-time sale value के मुकाबले future dividend और earnings potential का valuation कैसे किया गया?

    सवाल निजीकरण का नहीं, Public Value का है

    IMPCL की sale पर बहस को सिर्फ “सरकार ने सरकारी कंपनी बेच दी” या “सरकार ने सही फैसला किया” तक सीमित करना इस मामले को छोटा कर देगा।

    सरकार के official record के अनुसार process competitive bidding के जरिए हुई। सात interested parties shortlist हुईं, दो qualified financial bids मिलीं और Skymap Pharmaceuticals की ₹121.00944 करोड़ की bid highest रही तथा reserve price से ऊपर थी।

    लेकिन दूसरी तरफ official financial records यह भी बताते हैं कि IMPCL profit-making CPSE थी और FY2024-25 में उसका net worth ₹145.49 करोड़ तथा PAT ₹17.65 करोड़ था।

    Public debate का असली केंद्र

    क्या ₹121 करोड़ सिर्फ एक successful bid थी, या वास्तव में public asset की उचित economic value भी थी?

    इसका जवाब मिलेगा:

    Valuation Report से।

    Reserve Price Calculation से।

    Second Bid से।

    SPA की Conditions से।

    और FY2025-26 के audited financial data से।

    दूसरा बड़ा सवाल healthcare का है।

    अगर IMPCL की ownership private हो गई है, तो जनता यह जानने की हकदार है कि सरकारी healthcare institutions के लिए affordable Ayurvedic और Unani medicines की supply और pricing कैसे सुरक्षित रखी जाएगी।

    क्योंकि अगर future में procurement महंगा होता है, तो उसका खर्च अंततः किसी न किसी public budget से ही आएगा।

    और अगर prices नहीं बढ़तीं तथा private management efficiency, investment और production बढ़ाता है, तो सरकार को उसका भी जवाबदेह परिणाम जनता के सामने रखना चाहिए।

    यानी इस transaction की असली परीक्षा आज ₹121 करोड़ मिलने से खत्म नहीं होती।

    असली परीक्षा आने वाले वर्षों में होगी—क्या जनता को बेहतर, affordable और uninterrupted medicines मिलती रहेंगी, कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहते हैं और taxpayer को इस public asset की उचित value मिली थी या नहीं।

    यही IMPCL Sale की पूरी कहानी है।

    सबसे महत्वपूर्ण sources