कांदिवली में NRI के लॉकर से 610 ग्राम सोना गायब हुआ। पुलिस ने पूर्व डिप्टी मैनेजर को गिरफ्तार कर पूरी jewellery बरामद कर ली।
मुंबई: कांदिवली में बैंक लॉकर से करीब 82 लाख रुपये के सोने के गहने गायब होने के मामले ने बैंकिंग सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में पुलिस ने बैंक के ही पूर्व डिप्टी ब्रांच मैनेजर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने NRI ग्राहक के लॉकर में रखे सोने के गहनों को कथित तौर पर अलग-अलग गोल्ड मॉर्गेज फर्मों के पास गिरवी रख दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान पूरे 610 ग्राम गहने बरामद करने का दावा किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप रामचंद साहनी के तौर पर हुई है।
कांदिवली में NRI के लॉकर से कैसे गायब हुआ सोना?
मामला कांदिवली पश्चिम के MG Road स्थित IndusInd Bank की शाखा का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता 74 वर्षीय NRI हैं और लंबे समय से दुबई में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनका मुंबई में घर और इसी बैंक में अकाउंट है। उन्होंने 22 मार्च 2024 को बैंक के लॉकर में करीब 610 ग्राम सोने के गहने रखे थे। उस समय इन गहनों की कीमत करीब 81.80 लाख रुपये बताई गई थी।
विदेश में लंबे समय तक रहने की वजह से शिकायतकर्ता नियमित रूप से अपना लॉकर चेक नहीं कर पाए। करीब दो साल बाद जब वह मुंबई आए और बैंक जाकर लॉकर खोला, तो अंदर रखा पूरा सोना गायब मिला। इसके बाद उन्होंने बैंक अधिकारियों से जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पुलिस से शिकायत की।
12 अगस्त को शिकायत दर्ज होने के बाद कांदिवली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इतने पुराने मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सोना आखिर लॉकर से कब और कैसे बाहर निकला।
पुलिस की नजर बैंक के डिप्टी मैनेजर पर क्यों गई?
जांच के दौरान पुलिस ने लॉकर से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की। इसी दौरान सामने आया कि शिकायतकर्ता को लॉकर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तत्कालीन डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी की भूमिका थी।
इसके बाद पुलिस ने सिर्फ बैंक रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय आरोपी के पिछले करीब दो साल के financial transactions की जांच शुरू की।
यहीं से जांच को बड़ा सुराग मिला।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के बैंक खातों में करीब 9 करोड़ रुपये तक के transactions मिले। इन transactions का एक बड़ा हिस्सा ऐसी कंपनियों से जुड़ा था जो सोना गिरवी रखकर loan या mortgage का कारोबार करती हैं। पुलिस ने इन transactions की जांच आगे बढ़ाई तो उसे उन firms तक पहुंच मिली जहां आरोपी द्वारा कथित तौर पर सोने के गहने गिरवी रखे गए थे।
फोटो से हुआ गहनों का मिलान
पुलिस ने संबंधित gold mortgage firms से pledged jewellery की तस्वीरें मांगीं। तस्वीरों की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे गहने दिखाई दिए जो NRI ग्राहक के लॉकर में रखे गए गहनों से मेल खाते थे।
इसके बाद पुलिस ने उन गहनों की पहचान और बरामदगी की कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता के 610 ग्राम सोने के गहने बरामद कर लिए गए।
पुलिस ने FIR दर्ज होने के कुछ ही दिनों के भीतर आरोपी तक पहुंचने और गहने बरामद करने में सफलता हासिल की। इसके बाद कुलदीप साहनी को गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित वारदात में उसके साथ कोई और बैंक कर्मचारी या दूसरा व्यक्ति शामिल था या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल: दो साल तक बैंक को पता क्यों नहीं चला?
इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मार्च 2024 में लॉकर में रखे गए गहने आखिर कब गायब हुए।
शिकायतकर्ता करीब दो साल बाद मुंबई लौटे। इसका मतलब यह भी है कि पुलिस को यह पता लगाना होगा कि लॉकर को किस तारीख और किस तरीके से access किया गया था। इसके लिए locker operation records, access details, CCTV और बैंक के internal records जांच का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
RBI के locker framework में banks को locker area की security, unauthorized access रोकने के उपाय और CCTV व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। Common areas और strong-room entry/exit की CCTV recording कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखने का प्रावधान है। अगर customer unauthorized access या theft की शिकायत करता है, तो संबंधित CCTV footage को police investigation और dispute settlement पूरा होने तक preserve किया जाना चाहिए।
हालांकि इस मामले में पुलिस को दो साल पुरानी कौन-कौन सी CCTV या access recording मिली है, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। फिलहाल investigation में financial transactions एक अहम सुराग बनकर सामने आए हैं।
अगर बैंक कर्मचारी ही locker से gold निकाल दे तो जिम्मेदारी किसकी?
यही सवाल इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।
RBI के revised locker rules में bank employee के fraud से होने वाले loss को भी liability framework में शामिल किया गया है। अगर loss bank की negligence या deficiency से जुड़ा है और prescribed conditions पूरी होती हैं, तो bank की liability prevailing annual locker rent के 100 गुना तक हो सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि अगर locker में 82 लाख रुपये का gold रखा था तो bank automatically 82 लाख रुपये customer को देगा।
उदाहरण के लिए अगर किसी locker का annual rent 5,000 रुपये है, तो 100 गुना रकम 5 लाख रुपये होगी। Actual compensation का सवाल case के facts, bank की liability और लागू कानूनी प्रक्रिया पर depend करेगा।
यानी locker में रखा gold जितना महंगा है, bank की regulatory liability उसी proportion में बढ़ती जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।
Supreme Court भी bank locker को लेकर क्या कह चुका है?
Bank locker disputes में Supreme Court का 2021 का फैसला भी महत्वपूर्ण है। Amitabha Dasgupta बनाम United Bank of India मामले में Supreme Court ने banks की duty of care को लेकर महत्वपूर्ण observations दिए थे। Court ने यह माना कि bank सिर्फ यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह नहीं बच सकता कि उसे locker के अंदर रखी चीजों की जानकारी नहीं थी।
लेकिन locker में वास्तव में कितना gold या दूसरा सामान रखा था और उसकी exact value कितनी थी, यह अलग evidentiary issue हो सकता है। यानी ग्राहक को अपने valuables के ownership और value को साबित करने के लिए documents और दूसरे evidence की जरूरत पड़ सकती है।
इसीलिए bank locker में महंगी jewellery रखने वाले ग्राहकों के लिए purchase bills, valuation records, jewellery की photographs, hallmark details और insurance documents जैसे records संभालकर रखना काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या देश में पहले भी bank lockers से gold गायब होने के मामले आए हैं?
कांदिवली का यह मामला अकेला नहीं है। पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से bank lockers में रखे gold और valuables के गायब होने के मामले सामने आए हैं।
Kanpur में एक महिला ने आरोप लगाया था कि करीब 17 साल बाद SBI locker खोलने पर उसमें रखी लगभग 50 लाख रुपये की jewellery गायब थी। इस मामले में लंबे समय तक locker operate नहीं किए जाने और bank records से जुड़े सवाल सामने आए।
Bengaluru में एक bank assistant manager पर customers के lockers से करीब 2.7 किलो gold jewellery चोरी करने का आरोप लगा था। उस मामले में भी कथित तौर पर jewellery को pawn किया गया था और जांच में bank employee की भूमिका सामने आई।
Kolkata में एक former bank employee पर करीब 571 ग्राम gold jewellery से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई थी। वहां भी jewellery को loan collateral के तौर पर इस्तेमाल किए जाने और documents/signature से जुड़े सवाल जांच का हिस्सा बने।
Pune में भी bank locker से करोड़ों रुपये के gold, silver, diamond jewellery और दूसरे valuables गायब होने का मामला सामने आ चुका है, जिसमें bank employees की कथित भूमिका की जांच हुई थी।
इन मामलों को देखकर एक बात साफ है कि bank locker से जुड़े disputes सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं हैं। कई मामलों में locker access, employee control, documentation, dormant lockers और pledged jewellery का trail भी जांच का हिस्सा बनता है।
क्या भारत में bank locker theft बहुत आम है?
इस सवाल का जवाब भी आंकड़ों से समझना जरूरी है।
केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि 31 मार्च 2025 तक Public Sector Banks में करीब 1.10 करोड़ lockers operational थे। FY2020-21 से FY2024-25 के बीच Public Sector Banks में 40 established locker theft cases सामने आए थे। RBI के पास सभी banks के locker theft cases का consolidated database नहीं है।
बाद के 2026 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक FY2021-22 से FY2025-26 तक Public Sector Banks में 40 established locker theft cases दर्ज हुए। FY2025-26 में 12 Public Sector Banks में established locker theft का कोई मामला reported नहीं हुआ।
इन पांच साल के आंकड़ों में Maharashtra में 5 established cases दर्ज हुए थे। लेकिन यह आंकड़ा Public Sector Banks का है। कांदिवली का मौजूदा मामला IndusInd Bank जैसे private sector bank से जुड़ा है, इसलिए इसे इन सरकारी PSB आंकड़ों में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
यानी available data के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि देश के bank lockers में चोरी आम बात है। लेकिन यह भी साफ है कि locker को पूरी तरह risk-free मानना ठीक नहीं है।
NRI customers के लिए यह मामला क्यों ज्यादा महत्वपूर्ण है?
कांदिवली की घटना NRI customers के लिए खास warning लेकर आई है।
जो लोग साल में एक-दो बार ही भारत आते हैं, उनके लिए locker की physical checking नियमित रूप से करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में लंबे समय तक locker operate नहीं होने पर किसी unauthorized access या दूसरे dispute का पता काफी देर से चल सकता है।
RBI के locker framework में ऐसे customers का भी ध्यान रखा गया है जो NRI हैं या job transfer जैसी वजह से लंबे समय तक locker operate नहीं कर पाते।
इसलिए विदेश में रहने वाले customers के लिए bank में mobile number, email और address जैसे contact details updated रखना, locker records की जानकारी संभालकर रखना और संभव हो तो trusted family arrangement के बारे में bank के applicable rules समझना जरूरी है।
अगर आपके bank locker से jewellery गायब मिले तो क्या करें?
सबसे पहले locker की स्थिति की photographs और video अपने पास रखें। इसके बाद तुरंत bank को written complaint दें और complaint की acknowledgement लें।
इसके साथ police complaint करना भी जरूरी है। Locker access records, CCTV, locker operation records और bank से जुड़े documents सुरक्षित रखने के लिए लिखित request देना भी उपयोगी हो सकता है।
अगर jewellery के bills, valuation certificate, photographs, hallmark details या insurance documents हैं तो उन्हें सुरक्षित रखें। यही documents बाद में ownership और value establish करने में काम आ सकते हैं।
बैंक locker में रखा gold क्या insured होता है?
यह समझना भी जरूरी है कि bank locker और jewellery insurance एक ही चीज नहीं हैं।
Government ने Parliament में बताया है कि banks को locker-related contingencies से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए Board-approved insurance policies रखने की सलाह दी गई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि customer के locker में रखे हर gold item का पूरा value automatically insured है।
इसलिए बहुत high-value jewellery रखने वाले customers को अपने bank से applicable locker terms और अलग jewellery insurance की जरूरत को समझना चाहिए।
कांदिवली के इस मामले में अब आगे क्या होगा?
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। आरोपी कुलदीप साहनी गिरफ्तार हो चुका है और शिकायतकर्ता के 610 ग्राम gold jewellery की recovery की जानकारी सामने आई है।
अब जांच में यह पता लगाया जाना बाकी है कि jewellery locker से किस तरीके से निकाली गई, उसे अलग-अलग mortgage firms तक कैसे पहुंचाया गया, करीब 9 करोड़ रुपये के financial transactions में इस मामले से जुड़े कौन-कौन से transactions थे और क्या किसी दूसरे व्यक्ति या bank employee ने कथित तौर पर उसकी मदद की।
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बात यही है कि करीब दो साल पुराने locker theft का सुराग CCTV से ज्यादा financial trail से सामने आया। और अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि NRI का 82 लाख का gold कौन ले गया, बल्कि यह भी है कि bank locker में रखी आपकी lifetime savings कितनी सुरक्षित हैं और अगर कभी ऐसी घटना हो जाए तो आपकी legal और financial protection कितनी है। फिलहाल कांदिवली पुलिस की जांच इन सवालों के जवाब तलाश रही है।
