आवासीय इलाके में बिना मंजूरी कारोबार चलाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सील करने का निर्देश दिया है। जानें किन संपत्तियों पर कार्रवाई होगी और किसे फिलहाल राहत है।
नई दिल्ली: आवासीय इलाके में घर या संपत्ति का दुकान, कार्यालय या दूसरे व्यावसायिक काम के लिए इस्तेमाल करने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 के आदेश में स्थिति स्पष्ट कर दी है। जिन इलाकों को स्पष्ट रूप से केवल आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है और जहां स्वीकृति भी आवासीय उपयोग की है, वहां व्यावसायिक गतिविधि पाए जाने पर संबंधित परिसर को पहली कार्रवाई के तौर पर सील किया जा सकता है। हालांकि, यह आदेश हर घर में चल रहे हर कारोबार पर स्वतः लागू नहीं होता। भूमि उपयोग, स्वीकृत भवन योजना और संबंधित क्षेत्र के नियम इसके लिए अहम होंगे।
यह मामला लॉगनाथन बनाम तमिलनाडु सरकार से जुड़ा है। इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ कर रही है। मामले की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा को न्याय मित्र बनाया गया है। अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी और राज्यों तथा संबंधित प्राधिकरणों को उससे एक सप्ताह पहले अद्यतन स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी है।
आवासीय इलाके में कारोबार मिला तो पहले होगा सील
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जिन क्षेत्रों को विशेष रूप से आवासीय घोषित किया गया है और जहां राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकरण ने केवल आवासीय उपयोग की अनुमति दी है, वहां व्यावसायिक गतिविधि नहीं चलनी चाहिए। ऐसी गतिविधि मिलने पर परिसर को पहली कार्रवाई के तौर पर सील किया जाना है।
इसमें केवल सड़क किनारे बनी बड़ी दुकानें ही नहीं, बल्कि आवासीय संपत्ति का स्वीकृत उपयोग बदलकर चलाया जा रहा अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल भी जांच के दायरे में आ सकता है। कोचिंग केंद्र, कार्यालय, पीजी और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े मामले भी इस व्यापक भूमि उपयोग जांच का हिस्सा रहे हैं।
हर घर में दुकान चलाने पर तुरंत कार्रवाई नहीं
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि केवल किसी घर में कोई व्यावसायिक गतिविधि दिखाई देने से यह निष्कर्ष नहीं निकलेगा कि उसे तुरंत सील कर दिया जाएगा।
सबसे पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित जमीन या इलाका किस उपयोग के लिए निर्धारित है। इसके बाद स्वीकृत भवन योजना और सक्षम प्राधिकरण से मिली अनुमति की स्थिति देखी जाएगी। यदि क्षेत्र स्पष्ट रूप से आवासीय है और भवन का उपयोग भी केवल आवासीय उद्देश्य के लिए स्वीकृत है, लेकिन वहां नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, तो सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है।
मिश्रित उपयोग वाले इलाकों में फिलहाल राहत
ऐसे इलाके जहां भूमि उपयोग स्पष्ट रूप से केवल आवासीय या केवल व्यावसायिक निर्धारित नहीं है, वहां स्थिति अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ऐसे मामलों में जमीन पर मौजूदा स्थिति नहीं बदलने का निर्देश दिया है। हालांकि संबंधित प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही कागजों पर जारी रह सकती है।
इसके साथ ही आप को बता दें, कि मिश्रित उपयोग वाले इलाके में दुकान चलाने वाले हर व्यक्ति के लिए तत्काल सील का खतरा नहीं है। यहां संबंधित क्षेत्र का मास्टर प्लान और लागू नियम देखना जरूरी होगा।
मालिकाना विवाद भी नहीं बनेगा अपने आप बचाव
यदि किसी मकान, जमीन या इमारत को लेकर अदालत में मुकदमा चल रहा है, तो केवल मुकदमा लंबित होने से कार्रवाई अपने आप नहीं रुकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि संपत्ति का वास्तविक उपयोग उस उद्देश्य के खिलाफ है जिसके लिए जमीन या भवन आवंटित किया गया था और सक्षम प्राधिकरण ने जिस योजना को मंजूरी दी थी, तो लंबित मुकदमा होने के बावजूद परिसर को सील किया जा सकता है।
बिना किसी मंजूरी का निर्माण मिला तो सील होगा या ध्वस्तीकरण
सुप्रीम कोर्ट ने उन संरचनाओं को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिया है जो पूरी तरह बिना किसी सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बनाई गई हैं। ऐसी संरचनाओं के मामले में कानून के अनुसार सील या ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है।
नगर निकाय मनमानी कार्रवाई नहीं कर सकते
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ संपत्ति मालिकों और कारोबारियों पर ही ध्यान नहीं दिया है। नगर निकायों और संबंधित अधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कार्रवाई में भेदभाव नहीं होना चाहिए।
यदि समान परिस्थितियों वाली संपत्तियों में से कुछ पर कार्रवाई और कुछ को बिना कारण छोड़ने की शिकायत सामने आती है, तो अदालत ने इसे गंभीरता से लेने की चेतावनी दी है। आदेश में अधिकारियों को किसी भी तरह की चुनिंदा कार्रवाई से बचने को कहा गया है।
भोपाल में सील प्रक्रिया को लेकर भी उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट के सामने भोपाल की कार्रवाई का मामला भी आया। वहां कुछ संपत्तियों को सील करने के बाद थोड़े समय में दोबारा खोलने की स्थिति पर सवाल उठे। अदालत को बताया गया कि कुछ मामलों में सील करने के बाद ऐसा कोई नया घटनाक्रम सामने नहीं आया था, जिससे संपत्ति खोलने का आधार स्पष्ट हो। कोर्ट ने कार्रवाई में एकरूपता और नियमों के पालन पर जोर दिया।
भोपाल का मास्टर प्लान भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। अदालत के सामने यह बताया गया कि वहां मास्टर प्लान लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ था और नया मसौदा तैयार किया गया है। हालांकि संपत्तियों के मौजूदा उपयोग की वैधता जांचते समय लागू मास्टर प्लान और भवन नियमों को आधार बनाने की बात स्पष्ट की गई है।
देशभर में क्यों बढ़ी चिंता
यह मामला मूल रूप से एक बिना स्वीकृति बने जी+1 भवन से जुड़ा था, लेकिन मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे व्यापक स्तर पर लेते हुए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में आवासीय इलाकों के गैर-आवासीय इस्तेमाल की जांच का निर्देश दिया था। संबंधित नगर निकायों को अपने क्षेत्र में ऐसे मामलों की पहचान कर स्थिति अदालत के सामने रखने को कहा गया था।
इसके बाद भूमि उपयोग और अनधिकृत निर्माण से जुड़े मामले दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, मेरठ और अन्य शहरों तक पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जमीन पर की गई वास्तविक कार्रवाई का ब्योरा मांगा है, केवल कागजी अनुपालन को पर्याप्त नहीं माना है।
घर में दुकान चलाने वालों को क्या जांचना चाहिए
ऐसी संपत्ति के मालिक या किरायेदार को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि जमीन और भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है। इसके साथ स्वीकृत भवन योजना, संबंधित क्षेत्र का मास्टर प्लान, भवन उपविधियां और व्यावसायिक उपयोग से जुड़ी अनुमति की स्थिति देखना जरूरी है।
सिर्फ व्यापार संबंधी पंजीकरण या लाइसेंस होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि भवन का भूमि उपयोग भी नियमों के अनुसार है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में स्वीकृत उपयोग और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर को महत्वपूर्ण माना है।
मुंबई में क्या स्थिति है
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद बीएमसी से जुड़ी ऐसी कोई भी प्रक्रिया सामने नहीं आई है।हालांकि मुंबई में आवासीय संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के मामले सामने आ रहे हैं। जुहू में एक आवासीय संपत्ति में व्यावसायिक उपयोग के लिए किए जा रहे काम को लेकर बीएमसी ने स्टॉप वर्क नोटिस जारी किया था। स्थानीय निवासियों ने आपत्ति जताई थी। ऐसे कई मामले देखने को मिल सकते है।
अगली सुनवाई में क्या होगा
लॉगनाथन मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित है। राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को उससे एक सप्ताह पहले अपनी अद्यतन स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी है। न्याय मित्र अजीत कुमार सिन्हा को भी समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आवासीय क्षेत्र में चल रहा कारोबार अपने आप अवैध नहीं माना जाएगा, लेकिन जहां क्षेत्र स्पष्ट रूप से केवल आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है और स्वीकृत उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, वहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत सीलिंग की कार्रवाई का रास्ता साफ है। वहीं मिश्रित या स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किए गए उपयोग वाले क्षेत्रों में फिलहाल जमीनी स्थिति बनाए रखने का निर्देश है।
