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महाराष्ट्र में मराठी सख्ती के दूसरे दिन 1,499 ऑटो-कैब ड्राइवरों को नोटिस मिला। मराठी नहीं सीखने पर बैज 3 महीने के लिए सस्पेंड होगा।
मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और कैब ड्राइवरों के लिए व्यवहारिक मराठी को लेकर परिवहन विभाग की सख्ती अब तेज हो गई है। अभियान के दूसरे दिन मुंबई महानगर क्षेत्र और राज्य के दूसरे हिस्सों में कुल 9,153 व्यावसायिक वाहन चालकों की जांच की गई। इनमें 1,499 ड्राइवर व्यवहारिक मराठी के टेस्ट में पर्याप्त जानकारी नहीं दिखा सके, जिसके बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया है।
परिवहन विभाग की यह जांच मुहिम 20 अगस्त से शुरू हुई है और 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी। इस दौरान ऑटो-रिक्शा और कैब समेत व्यावसायिक वाहन चलाने वाले ड्राइवरों के मराठी भाषा के व्यवहारिक ज्ञान की जांच की जा रही है।
मुंबई में 722 ड्राइवरों को नोटिस
मुंबई महानगर क्षेत्र में दूसरे दिन 3,942 ड्राइवरों की जांच की गई। इनमें 722 चालक व्यवहारिक मराठी के मामले में निर्धारित स्तर पर खरे नहीं उतर पाए। इन सभी को नोटिस जारी किया गया है।
परिवहन विभाग के मुताबिक ड्राइवरों से रोजमर्रा के काम और यात्रियों से बातचीत में इस्तेमाल होने वाली मराठी समझने और बोलने की क्षमता देखी जा रही है।
Mumbai, Maharashtra: RTO action against non-Marathi auto-rickshaw and taxi drivers continued for the second consecutive day, with officials conducting basic Marathi language tests outside Borivali East railway station and taking action against drivers unable to speak the… pic.twitter.com/0DcQVvFpWS
मुंबई महानगर क्षेत्र के बाहर महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में 5,211 ड्राइवरों की जांच हुई। यहां 777 चालक व्यवहारिक मराठी के पर्याप्त ज्ञान के बिना पाए गए और उन्हें भी नोटिस दिया गया।
इस तरह दूसरे दिन हुई कुल 9,153 जांच में 1,499 चालकों को नोटिस जारी किया गया।
क्षेत्र
जांच किए गए ड्राइवर
नोटिस
मुंबई महानगर क्षेत्र
3,942
722
शेष महाराष्ट्र
5,211
777
कुल
9,153
1,499
नोटिस के बाद मिलेगा एक महीने का समय
मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने पर तुरंत बैज सस्पेंड नहीं किया जाएगा। पहले संबंधित चालक को नोटिस दिया जाएगा और उसके बाद मराठी सीखने के लिए एक महीने की अवधि मिलेगी।
इस दौरान चालक को व्यवहारिक मराठी का जरूरी ज्ञान हासिल करना होगा। निर्धारित समय पूरा होने के बाद परिवहन विभाग दोबारा यह देखेगा कि चालक भाषा के स्तर को पूरा करता है या नहीं।
मराठी नहीं सीखी तो 3 महीने के लिए बैज सस्पेंड
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि नोटिस मिलने के बाद एक महीने के भीतर मराठी नहीं सीखने वाले चालक के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निर्धारित अवधि के बाद भी व्यवहारिक मराठी का ज्ञान साबित नहीं करने पर संबंधित चालक का बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जाएगा।
इसका मतलब यह है कि पहले चरण में नोटिस, दूसरे चरण में मराठी सीखने के लिए समय और उसके बाद भी नियम पूरा नहीं करने पर बैज सस्पेंशन की कार्रवाई होगी।
परिवहन विभाग की मौजूदा जांच मुहिम 20 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। इस दौरान राज्य में व्यावसायिक वाहन चालकों के व्यवहारिक मराठी ज्ञान की जांच की जाएगी।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए मराठी का ज्ञान सिर्फ नियमों से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से भी संबंधित है। विभाग की ओर से ड्राइवरों को भाषा सीखने के लिए समय दिया जा रहा है।
फिलहाल दूसरे दिन की कार्रवाई में 1,499 चालकों को नोटिस मिलने के बाद अब इन ड्राइवरों के लिए अगले एक महीने की अवधि अहम होगी। इस दौरान उन्हें व्यवहारिक मराठी का जरूरी ज्ञान हासिल करना होगा, वरना नियम के अगले चरण में बैज तीन महीने के लिए सस्पेंड किया जा सकता है।
मुंबई के दहिसर में सुमन ठाकुर पर चाकू से हमला हुआ। नाबालिग का कथित वीडियो सामने आया। FIR में 3 आरोपी, एक गिरफ्तार; गांजा विवाद की जांच जारी।
मुंबई: दहिसर West के गणपत पाटिल नगर में गुरुवार रात एक महिला पर चाकू से हमला किए जाने से हड़कंप मच गया। इस मामले में एक नाबालिग समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने एक आरोपी साहिल श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है। घायल महिला की पहचान सुमन ठाकुर के रूप में हुई है और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस के मुताबिक उनकी हालत stable है।
इस मामले को लेकर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि हमले के बाद नाबालिग द्वारा कथित तौर पर एक वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की बात सामने आई है। वीडियो में उसने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। हालांकि पुलिस अभी इस वीडियो की authenticity verify कर रही है।
गणपत पाटिल नगर की गली नंबर 4 में रात करीब 9 बजे हमला
घटना दहिसर West के गणपत पाटिल नगर की गली नंबर 4 में हुई। जानकारी के मुताबिक गुरुवार रात करीब 9 बजे सुमन ठाकुर पर चाकू से हमला किया गया। उनके गर्दन के पास गंभीर चोट आई और उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल उनकी हालत stable बताई जा रही है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद बोरीवली पश्चिम कि MHB Police मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ मामले से जुड़े दूसरे सबूतों की भी जांच कर रही है।
इस मामले में पुलिस ने तीन युवकों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें एक नाबालिग है। पुलिस ने साहिल श्रीवास्तव नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि बाकी आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।
नाबालिग की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
हमले के बाद वीडियो रिकॉर्ड करने का दावा
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू हमले के बाद सामने आया कथित वीडियो है। खबर के मुताबिक नाबालिग ने घटना के बाद camera पर अपना बयान रिकॉर्ड किया और महिला पर हमला करने की बात कही।
वीडियो में नाबालिग ने दावा किया कि उसने और उसके परिवार ने इलाके में गांजा उगाए जाने की शिकायत की थी। उसके मुताबिक इसके बाद सुमन ठाकुर की तरफ से उसे और उसके परिवार को कथित तौर पर धमकियां मिलने लगी थीं। इसी विवाद के बाद उसने महिला पर हमला करने का दावा किया।
हालांकि यह बयान वीडियो में आरोपी द्वारा किया गया कथित दावा है। पुलिस वीडियो की authenticity और उसमें कही गई बातों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है।
कुछ दिन पहले इसी इलाके में खुला था गांजा cultivation का मामला
इस घटना का connection कुछ दिन पहले सामने आए एक दूसरे मामले से जोड़ा जा रहा है। Indian FastTrack ने 15 अगस्त को गणपत पाटिल नगर, गली नंबर 4 में एक घर के अंदर कथित hydroponic गांजा cultivation का मामला रिपोर्ट किया था। उस कार्रवाई में MHB पुलिस ने बब्बू सोनू कामत को गिरफ्तार किया था, जबकि दो अन्य आरोपियों के फरार होने की जानकारी सामने आई थी।
पुलिस की उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उस घर से करीब 54 ग्राम सूखा गांजा और करीब 179 ग्राम जीवित पौधे बरामद किए गए थे। इसके अलावा LED lights, AC, fans, water pump, pH meter, TDS meter, grow tent और दूसरे cultivation equipment व chemicals भी मिले थे। पूरी जब्ती की अनुमानित कीमत करीब 6.07 लाख रुपये बताई गई थी।
इसी पुराने मामले के बाद अब महिला पर हुए हमले को लेकर दोनों घटनाओं के बीच connection की जांच की जा रही है।
गांजा cultivation की जानकारी पुलिस तक पहुंचने को लेकर विवाद
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सुमन ठाकुर के बेटे को पहले उनके घर में marijuana cultivation के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सुमन ठाकुर को शक था कि इलाके के कुछ युवकों ने पुलिस को इस cultivation की जानकारी दी थी। इसी बात को लेकर विवाद होने की बात सामने आई है।
इसके अलावा सुमन ठाकुर और नाबालिग के परिवार के बीच electricity meter को लेकर भी विवाद होने की जानकारी पुलिस के सामने आई है।
नाबालिग के वीडियो में क्या दावा किया गया?
खबर के मुताबिक नाबालिग ने अपने वीडियो में दावा किया कि उसने और उसके परिवार ने गांजा cultivation के खिलाफ शिकायत की थी। उसका आरोप था कि शिकायत के बाद सुमन ठाकुर ने उसे और उसके परिवार के लोगों को लगातार धमकाया।
वीडियो में कथित तौर पर नाबालिग ने हमले की जिम्मेदारी लेने की बात कही है। लेकिन पुलिस अभी इस वीडियो और उसमें किए गए दावों की जांच कर रही है।
पुलिस अब किन बातों की जांच कर रही है?
MHB पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि महिला पर हमला किस वजह से किया गया और इसके पीछे गांजा cultivation से जुड़े पुराने विवाद की भूमिका कितनी थी।
पुलिस इनवेस्टिगेशन कि तस्वीर
पुलिस वीडियो की authenticity verify करने के साथ आरोपियों की भूमिका, कथित धमकियों और दोनों परिवारों के बीच पहले से चल रहे विवाद की भी जांच कर रही है।
इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि तीनों आरोपियों की इस हमले में क्या-क्या भूमिका थी और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आगे क्या कार्रवाई की जा रही है।
पहले गांजा cultivation, अब knife attack; दहिसर की इस घटना में जुड़ रही हैं दो कड़ियां
गणपत पाटिल नगर में कुछ दिन पहले सामने आया कथित hydroponic गांजा cultivation case और अब उसी इलाके में महिला पर हुआ knife attack पुलिस जांच में अलग-अलग कड़ियों के तौर पर सामने हैं।
फिलहाल पुलिस इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि दोनों घटनाओं के बीच सीधा connection है या पुराना विवाद ही हमले की वजह बना। इस जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।
इस मामले में महिला का इलाज जारी है और पुलिस तीनों आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार, जानिए पूरा मामला और अब आगे क्या होगा ?
मुंबई: कांदिवली पूर्व के पोईसर इलाके में हफ्ता वसूली और मारपीट के आरोप में मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। समता नगर पुलिस के मुताबिक, यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा और उसकी कथित टोली के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी MCOCA के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी यमेश दरेकर अभी फरार बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला 15 जून 2026 की रात करीब 12:30 बजे पोईसर, कांदिवली पूर्व में हुई एक गंभीर मारपीट की घटना से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, फिर्यादी ए.बी.के. ने कथित तौर पर हफ्ता नहीं दिया था। इसी बात को लेकर आरोपियों ने उसके कपड़े उतारकर गालीगलौज की और लोहे की रॉड, लकड़ी के स्टंप और लात-मुक्कों से मारपीट की।
आरोप है कि यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा ने फिर्यादी को जान से मारने की धमकी भी दी और उसके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया। इस हमले में उसे गंभीर चोटें आईं। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद भी आरोपियों ने इलाज के लिए जमा हुए नागरिकों को धमकाते हुए जान से मारने की धमकी दी।
घटना के बाद समता नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, इस केस में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम की धाराओं के तहत भी कार्रवाई की गई है।
दो आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी की तलाश जारी
इस मामले में रोहित कृष्णप्रताप सिंह, उम्र 33 वर्ष और सागर अनिल राठोड, उम्र 22 वर्ष को 15 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायालयीन हिरासत में हैं।
पुलिस के मुताबिक, मामले का मुख्य आरोपी यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा अभी फरार है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।
यमेश दरेकर के खिलाफ पहले से 37 गंभीर मामले
पुलिस के मुताबिक यमेश दरेकर को गंभीर अपराधों में शामिल आरोपी बताया जा रहा है। समता नगर पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ कुल 37 मामले दर्ज हैं।
इन मामलों में हत्या की कोशिश, जान से मारने की धमकी, जबरन चोरी, घातक हथियार का डर दिखाकर चोरी, गली गलौज और मारपीट, विनयभंग, गंभीर चोट पहुंचाना, आपराधिक षड्यंत्र, घर में अतिक्रमण और दूसरे गंभीर अपराधों का उल्लेख है।
पुलिस के अनुसार, यमेश दरेकर के खिलाफ इससे पहले समता नगर पुलिस स्टेशन के माध्यम से दो बार MPDA के तहत स्थानबद्ध करने और दो बार तडीपारी की कार्रवाई भी की जा चुकी है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी रोहित कृष्णप्रताप सिंह भी यमेश दरेकर की कथित टोली का सदस्य है। उसके खिलाफ समता नगर पुलिस स्टेशन में कुल 13 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इनमें जबरन चोरी, गालीगलौज और मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाना, जान से मारने की धमकी और घर में अतिक्रमण जैसे अपराधों का उल्लेख है।
दूसरा आरोपी सागर अनिल राठोड भी इसी कथित टोली का सदस्य बताया गया है। उसके खिलाफ दो मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस ने बताया, कि साल 2023 में उसके खिलाफ BNS की संबंधित धारा के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई थी।
MCOCA की कार्रवाई क्यों हुई?
पुलिस के मुताबिक, यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली अलग-अलग गंभीर अपराधों के जरिए इलाके में दहशत और वर्चस्व कायम कर आर्थिक फायदा हासिल करने की कोशिश कर रही थी। इसी आधार पर पुलिस ने इस मामले को संगठित अपराध की दिशा में देखा।
पुलिस उपायुक्त, परिमंडल-03, मुंबई गजानन शिवलिंग राजमाने के मार्गदर्शन में MCOCA के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया गया। यह प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजा गया, जिसके बाद संबंधित मंजूरी मिलने पर यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली के खिलाफ MCOCA के तहत कार्रवाई की गई।
मामले की आगे की जांच सहायक पुलिस आयुक्त कैलास बर्वे कर रहे हैं।
MCOCA लगने के बाद अब क्या होगा?
MCOCA के तहत कार्रवाई होना इस मामले में एक गंभीर कानूनी कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं। अब मामले में पुलिस की आगे की जांच, जरूरी कानूनी प्रक्रिया और अदालत में होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।
मुख्य आरोपी यमेश दरेकर अभी फरार है, इसलिए पुलिस के सामने उसकी गिरफ्तारी भी एक अहम कदम है। वहीं गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों और मौजूदा केस में उनकी कथित भूमिका की जांच आगे जारी रहेगी।
पोईसर-कांदिवली के लोगों के लिए यह मामला क्यों अहम है?
हफ्ता वसूली का आरोप सिर्फ एक व्यक्ति से पैसे मांगने तक सीमित नहीं रहता। अगर किसी इलाके में धमकी, मारपीट और दबाव का माहौल बनता है तो इसका असर आम लोगों, छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, ठेलेवालों और दूसरे स्थानीय लोगों की सुरक्षा की भावना पर पड़ सकता है।
मुंबई में 2025 के दौरान extortion के 314 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में 199 मामले दर्ज हुए थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में सिर्फ पारंपरिक organised gang extortion ही शामिल नहीं था; sextortion और local goons द्वारा builders, contractors और hawkers से protection money मांगने जैसे मामले भी सामने आए थे। इसलिए हर extortion case को organised gang activity मानना सही नहीं है।
पोईसर का मौजूदा मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि पुलिस ने यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, कथित लगातार आपराधिक गतिविधियों और मौजूदा मामले को देखते हुए MCOCA के तहत कार्रवाई की है।
फिलहाल पुलिस का फोकस फरार मुख्य आरोपी यमेश दरेकर को पकड़ने और मामले की आगे की जांच पूरी करने पर है। इस कार्रवाई के बाद पोईसर-कांदिवली इलाके में कथित हफ्ता वसूली और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।
मुंबई के Powai में पति को काला जादू से ठीक करने का झांसा देकर Air Hostess से रेप का आरोप, 100+ CCTV की मदद से आरोपी Anil Shinde गिरफ्तार।
मुंबई: अंधेरी पूर्व के Powai इलाके से एक चौंकाने वाली अपराध की घटना सामने आई है। यहां 25 साल की एक Air Hostess ने आरोप लगाया है कि उसके बीमार पति को ठीक करने और उसकी दृष्ट उतारने के नाम पर एक व्यक्ति उसके फ्लैट में घुसा और उसके साथ sexual assault किया। आरोपी ने खुद को transgender होने का भास दिया था। पुलिस ने 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान 28 साल के Anil Shinde के तौर पर हुई है। घटना 19 अगस्त की दोपहर करीब 12:20 से 12:50 बजे के बीच Powai की एक housing society में हुई बताई जा रही है।
पति को ठीक करने का झांसा देकर Society में पहुंचा
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पहले Society के security guard का भरोसा हासिल किया। इसके बाद वह building के अंदर गया और अलग-अलग flats के doors knock करने लगा। इसी दौरान वह तीसरी मंजिल पर रहने वाली Air Hostess के flat तक पहुंच गया।
महिला का पति उस समय अस्पताल में इलाज करा रहा था। आरोपी ने दावा किया कि वह उसके पति पर आई बुरी नजर या किसी तरह की परेशानी को दूर कर सकता है। इसी बहाने उसने महिला से घर के अंदर आने की permission ली।
पानी छिड़का और सिर पर हाथ रखा
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने घर में आने के बाद उस पर पानी छिड़का और उसके सिर पर हाथ रखा। इसके बाद उसने महिला से आंखें बंद करके बेड पर लेटने को कहा।
महिला के मुताबिक उस समय उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह संमोहित या hypnotised अवस्था में चली गई हो। इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ sexual assault किया।
जब महिला को कुछ होश आया तो उसने शोर मचाना शुरू किया। इसके बाद आरोपी ने उससे 200 रुपये लिए और वहां से निकल गया।
घटना दोपहर में होने के बाद महिला करीब रात 11 बजे Police Station पहुंची। रिपोर्ट के मुताबिक वह काफी परेशान और traumatised थी और शुरुआत में घटना के बारे में बोलने की स्थिति में नहीं थी। एक महिला पुलिस अधिकारी ने उसे भरोसा दिलाया, जिसके बाद उसने पूरी घटना पुलिस को बताई।
इसके बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की।
Powai से Kalwa तक 100 से ज्यादा CCTV खंगाले
आरोपी घटना के बाद वहां से निकलकर कथित तौर पर rickshaw से Kalwa की तरफ गया था। पुलिस ने उसके movement को track करने के लिए Powai से Kalwa तक लगे 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की footage की जांच की।
CCTV footage के जरिए पुलिस को आरोपी के route और उसकी पहचान से जुड़े सुराग मिले। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए Anil Shinde को गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक FIR दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई।
Anil Shinde से पूछताछ के दौरान पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उसने इससे पहले भी इसी तरह किसी महिला को निशाना बनाया था।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बताया है कि उसका परिवार transgender का भास बनाकर begging करता था। इस दावे की भी पुलिस जांच कर रही है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि आरोपी ने पहले भी इसी तरह की कोई वारदात की है।
Hypnosis को लेकर क्या सामने आया?
इस मामले में पानी छिड़कने और महिला को hypnotised करने की बात सामने आई है। लेकिन पुलिस के सामने महिला ने बताया है कि उसे उस वक्त संमोहित जैसा महसूस हुआ था। इसे ऐसे नहीं समझना चाहिए कि पानी छिड़कने से किसी व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह दूसरे व्यक्ति के control में चला जाता है।
घटना में आरोपी ने कथित तौर पर डर, भरोसे और पति को ठीक करने के दावे का इस्तेमाल करके महिला को अपने झांसे में लिया। इसलिए इस मामले में “hypnotised” शब्द को पीड़िता के अनुभव के तौर पर समझना ज्यादा सही है।
Maharashtra में Black Magic के नाम पर क्या कानून है?
महाराष्ट्र में अंधविश्वास और Black Magic के नाम पर लोगों को धोखा देने और उनका शोषण करने के खिलाफ Maharashtra Prevention and Eradication of Human Sacrifice and Other Inhuman, Evil and Aghori Practices and Black Magic Act, 2013 लागू है।
इस कानून के तहत Schedule में बताए गए प्रतिबंधित अंधविश्वासी और कथित supernatural practices को करना, बढ़ावा देना या लोगों को उनके जरिए गुमराह करना अपराध हो सकता है। ऐसे मामलों में 6 महीने से 7 साल तक की सजा और 5,000 से 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
इस मामले में पुलिस ने Black Magic से जुड़ी कानूनी provisions के तहत भी कार्रवाई की बात कही है। आरोपी के खिलाफ अंतिम आरोप और अदालत में मामला किस तरह आगे बढ़ता है, यह जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से साफ होगा।
Bharatiya Nyaya Sanhita यानी BNS में rape और उसकी punishment को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। कानून में consent यानी सहमति का मतलब voluntary और साफ agreement है। सिर्फ किसी महिला के physical resistance नहीं करने को consent नहीं माना जाता।
इस मामले में पुलिस ने महिला के बयान के आधार पर sexual assault की शिकायत दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आगे की कार्रवाई investigation, medical evidence और court proceedings के आधार पर होगी।
Transgender community को लेकर एक जरूरी बात
इस घटना में आरोपी पर आरोप है कि उसने transgender होने का भास किया था। इसे पूरी transgender community से जोड़ना सही नहीं होगा।
किसी आरोपी द्वारा किसी पहचान या वेश का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करना उस पूरी community के बारे में निष्कर्ष निकालने का आधार नहीं हो सकता। इस मामले में जांच का फोकस आरोपी के कथित deception, घर में entry लेने और महिला के साथ किए गए अपराध पर है।
Mumbai की Housing Societies के लिए इस घटना से क्या सीख?
इस घटना के बाद housing societies में visitor verification को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसी अनजान व्यक्ति को सिर्फ किसी धार्मिक, इलाज, दृष्ट उतारने या काला जादू दूर करने के दावे पर building या flat तक पहुंच नहीं मिलनी चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति पति-पत्नी या परिवार के किसी सदस्य की बीमारी ठीक करने, दृष्ट उतारने या किसी supernatural ताकत से परेशानी दूर करने का दावा करता है, तो पहले उसकी पहचान verify करना जरूरी है।
Society security को भी बिना verification किसी stranger को अंदर भेजने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर resident से phone या intercom पर confirmation लिया जा सकता है।
अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति घर में आने की कोशिश करे तो दरवाजा खोलने के बजाय security guard, Society management या Police को इसकी जानकारी देना ज्यादा सुरक्षित है।
मुंबई लोकल यात्रियों के लिए जरूरी अपडेट: दिवा स्टेशन पर FOB काम के चलते 21/22, 22/23 और 23/24 अगस्त की रात कलवा-डोंबिवली रूट पर बदलाव रहेगा। जानें रूट डिटेल!
मुंबई: मुंबई की लोकल से देर रात सफर करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी अपडेट है। दिवा स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज यानी FOB के निर्माण कार्य के चलते मध्य रेल ने 21/22, 22/23 और 23/24 अगस्त की रात विशेष ट्रैफिक और पावर ब्लॉक लेने का फैसला किया है। यह ब्लॉक रात 1:20 बजे से सुबह 3:20 बजे तक रहेगा।
इस दौरान कलवा और डोंबिवली के बीच अप और डाउन स्लो लाइन पर लोकल ट्रेन की आवाजाही प्रभावित रहेगी। इसलिए अगर आप रात की आखिरी लोकल या देर रात की यात्रा करने वाले हैं, तो घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का रूट और ठहराव जरूर चेक कर लें।
इस block का मकसद निर्माण कार्य को सुरक्षित तरीके से पूरा करना है, इसलिए देर रात के उस समय में संबंधित स्लो लाइन पर ट्रेन संचालन को नियंत्रित किया जाएगा।
Kasara और Karjat जाने वाली इन दो लोकल का रूट बदलेगा
ब्लॉक के दौरान CSMT से चलने वाली दो रात की उपनगरीय ट्रेनों पर खास असर पड़ेगा।
CSMT से रात 12:08 बजे कसारा जाने वाली लोकल को ठाणे और कल्याण के बीच डाउन फास्ट लाइन से डायवर्ट किया जाएगा।
इसी तरह CSMT से रात 12:12 बजे कर्जत जाने वाली लोकल को भी ठाणे और कल्याण के बीच डाउन फास्ट लाइन से चलाया जाएगा।
इस बदलाव की वजह से दोनों ट्रेनें ठाकुर्ली और कोपर स्टेशन पर नहीं रुकेंगी।
यानी अगर आपका उतरने का स्टेशन ठाकुर्ली या कोपर है और आप इन दोनों रात की लोकल में सफर करने वाले हैं, तो इस बदलाव को नजरअंदाज न करें।
इन दोनों स्टेशनों पर ट्रेन का halt नहीं होने की वजह से यात्रियों को अपनी यात्रा पहले से plan करनी होगी।
खासकर देर रात ऑफिस, होटल, दुकान, हॉस्पिटल या दूसरे काम से घर लौटने वाले यात्रियों को यह देखना जरूरी है कि जिस लोकल में वे सवार होने वाले हैं, उसमें ठाकुर्ली या कोपर का ठहराव है या नहीं।
सिर्फ “कसारा लोकल” या “कर्जत लोकल” देखकर ट्रेन में न चढ़ें। 21/22, 22/23 और 23/24 अगस्त की रात के इस block के दौरान संबंधित ट्रेन का route बदल रहा है।
क्या कलवा-डोंबिवली की सभी लोकल बंद रहेंगी?
नहीं। इस जानकारी का मतलब यह नहीं है कि तीनों रातों में कलवा और डोंबिवली के बीच चलने वाली हर लोकल पूरी तरह बंद रहेगी।
मुख्य असर रात 1:20 बजे से सुबह 3:20 बजे के block window में अप और डाउन स्लो लाइन पर रहेगा। वहीं CSMT-कसारा और CSMT-कर्जत की ऊपर बताई गई दोनों services को अलग route से चलाया जाएगा।
इसलिए यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी specific train का running status और route देखकर ही स्टेशन के लिए निकलें।
सुबह की पहली लोकल को लेकर क्या करें?
ब्लॉक सुबह 3:20 बजे तक निर्धारित है। लेकिन अगर आप सुबह की शुरुआती लोकल पकड़ने वाले हैं, तो स्टेशन पहुंचने से पहले live running status और रेलवे की announcement जरूर check करें।
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद traffic normal करने की प्रक्रिया भी जरूरी होती है, इसलिए सिर्फ block खत्म होने का समय देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर ट्रेन बिल्कुल उसी समय अपने normal schedule पर आ जाएगी।
इस विशेष block की उपलब्ध जानकारी में मुख्य बदलाव suburban local services से जुड़ा है। इसलिए अगर आप Mail या Express ट्रेन से सफर करने वाले हैं, तो अपनी specific train का status अलग से check करें।
किसी दूसरी train के timetable को देखकर अपनी यात्रा का फैसला न करें।
देर रात सफर करने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
अगर आपकी यात्रा 1:20 बजे से 3:20 बजे के बीच या उसके आसपास है, तो स्टेशन निकलने से पहले कुछ मिनट निकालकर train status check करना बेहतर रहेगा।
अपनी ट्रेन का destination, route और बीच में आने वाले station जरूर देख लें।
ठाकुर्ली या कोपर जाना है तो खास तौर पर यह confirm करें कि आपकी ट्रेन वहां रुक रही है या नहीं।
अगर रात की यात्रा के लिए कोई alternative transport लेना पड़े, तो official railway information और available public transport को देखकर ही फैसला करें।
अकेले सफर करने वाले यात्रियों, खासकर महिलाओं के लिए देर रात route change होने पर बिना जानकारी के किसी अनजान जगह उतरने से बचना ज्यादा जरूरी है। मुंबई suburban railway से जुड़े gender studies में भी station access, safety और सुविधाओं को women commuters के लिए महत्वपूर्ण travel concerns माना गया है।
यात्रियों को असुविधा क्यों झेलनी पड़ रही है?
देर रात का यह block कुछ यात्रियों के लिए परेशानी वाला जरूर हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी shift देर रात खत्म होती है या जिन्हें रात की आखिरी local से घर पहुंचना होता है।
लेकिन यह block दिवा स्टेशन के infrastructure work को सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए लिया जा रहा है। रात के समय traffic और passenger movement comparatively कम होने की वजह से ऐसे कामों के लिए night block लिया जाता है।
इसलिए अगले तीन रात देर से सफर करने वाले passengers के लिए सबसे जरूरी चीज है कि वे अपनी ट्रेन की जानकारी पहले से check करके निकलें।
दिवा स्टेशन पर काम पूरा होने के बाद क्या फायदा होगा?
FOB जैसे infrastructure work का सीधा मकसद स्टेशन पर passengers की movement को बेहतर बनाना है। रेलवे की मौजूदा station-upgradation policy में wider FOB, बेहतर connectivity, passenger movement और accessibility पर जोर दिया जा रहा है।
दिवा जैसे busy suburban station पर infrastructure का काम पूरा होने के बाद यात्रियों के लिए platform से आने-जाने की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है।
फिलहाल इस काम को पूरा करने के लिए 21/22, 22/23 और 23/24 अगस्त की रात में विशेष block रखा गया है।
निकलने से पहले यह जरूर check करें
रात की यात्रा है तो सबसे पहले अपनी specific local का running status देखें।
अगर आप Kasara या Karjat जाने वाली रात की local पकड़ रहे हैं, तो route diversion ध्यान में रखें।
ठाकुर्ली या कोपर उतरना है तो खास तौर पर train का halt confirm करें।
रात 1:20 से 3:20 बजे के बीच यात्रा है तो block window को ध्यान में रखकर निकलें।
स्टेशन पर पहुंचने के बाद announcement और display board पर latest update जरूर देखें।
मध्य रेल का यह night block तीन रातों के लिए है, लेकिन इसका असर हर यात्री पर एक जैसा नहीं होगा। इसलिए “लोकल बंद है” मानकर परेशान होने के बजाय अपनी specific train, destination और timing check करना सबसे सही तरीका रहेगा।
कांदिवली पश्चिम में क्राइम ब्रांच ने 651 ग्राम हेरोइन बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जब्त सामान की कुल कीमत 3.28 करोड़ रुपये बताई गई है।
मुंबई: कांदिवली पश्चिम में मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 11 ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 651 ग्राम हेरोइन बरामद हुई है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ 25 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है। कार्रवाई के दौरान नकदी, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किया गया है।
कांदिवली में पुलिस ने ऐसे बिछाया जाल
मुंबई पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर मुंबई और उपनगरों में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की टीम को कांदिवली पश्चिम में हेरोइन की तस्करी से जुड़ी अहम जानकारी मिली थी।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कांदिवली पश्चिम में बीएमसी गार्डन के सामने खजुरिया रोड के पास जाल बिछाया। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दो लोगों को पकड़ा गया।
तलाशी में 651 ग्राम हेरोइन मिली
पुलिस ने दोनों आरोपियों की तलाशी ली तो उनके पास से 651 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस के अनुसार, इस हेरोइन की अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ 25 लाख 50 हजार रुपये है।
इसके अलावा आरोपियों के पास से 2 लाख 10 हजार रुपये नकद, दो मोबाइल फोन और करीब 50,400 रुपये कीमत का अन्य सामान भी जब्त किया गया।
पुलिस के मुताबिक, बरामद हेरोइन, नकदी और अन्य सामान समेत जब्त किए गए सामान की कुल कीमत 3 करोड़ 28 लाख 10 हजार 400 रुपये है।
इस मामले में कांदिवली पुलिस स्टेशन में गु.र.क्र. 110/2026 नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 8(ए), 21(ए) और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर रही है।
मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर
अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क की जांच
पुलिस की शुरुआती जांच में हेरोइन की तस्करी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह की संभावित भूमिका सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह ड्रग्स कहां से लाई गई थी और मुंबई में इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
मामले में आगे की जांच जारी है और पूछताछ के आधार पर ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती के मार्गदर्शन में की गई। क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों जैसे सह-आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कृष्णकांत उपाध्याय, पुलिस उपायुक्त नवनाथ ढवळे और दिनकर शिलवाते की निगरानी में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
कार्रवाई में क्राइम ब्रांच यूनिट-11 के वरिष्ठ निरीक्षक शशिकांत जगदाळे, निरीक्षक विश्वास पाटिल, एसपी एन. दादासाहेब बनसोडे, एसपी एन. अमित पाटिल, निरीक्षक बालासाहेब शिंदे और उनकी टीम के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कांदिवली में NRI के लॉकर से 610 ग्राम सोना गायब हुआ। पुलिस ने पूर्व डिप्टी मैनेजर को गिरफ्तार कर पूरी jewellery बरामद कर ली।
मुंबई: कांदिवली में बैंक लॉकर से करीब 82 लाख रुपये के सोने के गहने गायब होने के मामले ने बैंकिंग सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में पुलिस ने बैंक के ही पूर्व डिप्टी ब्रांच मैनेजर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने NRI ग्राहक के लॉकर में रखे सोने के गहनों को कथित तौर पर अलग-अलग गोल्ड मॉर्गेज फर्मों के पास गिरवी रख दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान पूरे 610 ग्राम गहने बरामद करने का दावा किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप रामचंद साहनी के तौर पर हुई है।
मामला कांदिवली पश्चिम के MG Road स्थित IndusInd Bank की शाखा का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता 74 वर्षीय NRI हैं और लंबे समय से दुबई में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनका मुंबई में घर और इसी बैंक में अकाउंट है। उन्होंने 22 मार्च 2024 को बैंक के लॉकर में करीब 610 ग्राम सोने के गहने रखे थे। उस समय इन गहनों की कीमत करीब 81.80 लाख रुपये बताई गई थी।
विदेश में लंबे समय तक रहने की वजह से शिकायतकर्ता नियमित रूप से अपना लॉकर चेक नहीं कर पाए। करीब दो साल बाद जब वह मुंबई आए और बैंक जाकर लॉकर खोला, तो अंदर रखा पूरा सोना गायब मिला। इसके बाद उन्होंने बैंक अधिकारियों से जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पुलिस से शिकायत की।
12 अगस्त को शिकायत दर्ज होने के बाद कांदिवली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इतने पुराने मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सोना आखिर लॉकर से कब और कैसे बाहर निकला।
पुलिस की नजर बैंक के डिप्टी मैनेजर पर क्यों गई?
जांच के दौरान पुलिस ने लॉकर से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की। इसी दौरान सामने आया कि शिकायतकर्ता को लॉकर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तत्कालीन डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी की भूमिका थी।
इसके बाद पुलिस ने सिर्फ बैंक रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय आरोपी के पिछले करीब दो साल के financial transactions की जांच शुरू की।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के बैंक खातों में करीब 9 करोड़ रुपये तक के transactions मिले। इन transactions का एक बड़ा हिस्सा ऐसी कंपनियों से जुड़ा था जो सोना गिरवी रखकर loan या mortgage का कारोबार करती हैं। पुलिस ने इन transactions की जांच आगे बढ़ाई तो उसे उन firms तक पहुंच मिली जहां आरोपी द्वारा कथित तौर पर सोने के गहने गिरवी रखे गए थे।
फोटो से हुआ गहनों का मिलान
पुलिस ने संबंधित gold mortgage firms से pledged jewellery की तस्वीरें मांगीं। तस्वीरों की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे गहने दिखाई दिए जो NRI ग्राहक के लॉकर में रखे गए गहनों से मेल खाते थे।
इसके बाद पुलिस ने उन गहनों की पहचान और बरामदगी की कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता के 610 ग्राम सोने के गहने बरामद कर लिए गए।
पुलिस ने FIR दर्ज होने के कुछ ही दिनों के भीतर आरोपी तक पहुंचने और गहने बरामद करने में सफलता हासिल की। इसके बाद कुलदीप साहनी को गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित वारदात में उसके साथ कोई और बैंक कर्मचारी या दूसरा व्यक्ति शामिल था या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल: दो साल तक बैंक को पता क्यों नहीं चला?
इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मार्च 2024 में लॉकर में रखे गए गहने आखिर कब गायब हुए।
शिकायतकर्ता करीब दो साल बाद मुंबई लौटे। इसका मतलब यह भी है कि पुलिस को यह पता लगाना होगा कि लॉकर को किस तारीख और किस तरीके से access किया गया था। इसके लिए locker operation records, access details, CCTV और बैंक के internal records जांच का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
RBI के locker framework में banks को locker area की security, unauthorized access रोकने के उपाय और CCTV व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। Common areas और strong-room entry/exit की CCTV recording कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखने का प्रावधान है। अगर customer unauthorized access या theft की शिकायत करता है, तो संबंधित CCTV footage को police investigation और dispute settlement पूरा होने तक preserve किया जाना चाहिए।
हालांकि इस मामले में पुलिस को दो साल पुरानी कौन-कौन सी CCTV या access recording मिली है, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। फिलहाल investigation में financial transactions एक अहम सुराग बनकर सामने आए हैं।
अगर बैंक कर्मचारी ही locker से gold निकाल दे तो जिम्मेदारी किसकी?
यही सवाल इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।
RBI के revised locker rules में bank employee के fraud से होने वाले loss को भी liability framework में शामिल किया गया है। अगर loss bank की negligence या deficiency से जुड़ा है और prescribed conditions पूरी होती हैं, तो bank की liability prevailing annual locker rent के 100 गुना तक हो सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि अगर locker में 82 लाख रुपये का gold रखा था तो bank automatically 82 लाख रुपये customer को देगा।
उदाहरण के लिए अगर किसी locker का annual rent 5,000 रुपये है, तो 100 गुना रकम 5 लाख रुपये होगी। Actual compensation का सवाल case के facts, bank की liability और लागू कानूनी प्रक्रिया पर depend करेगा।
यानी locker में रखा gold जितना महंगा है, bank की regulatory liability उसी proportion में बढ़ती जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।
Supreme Court भी bank locker को लेकर क्या कह चुका है?
Bank locker disputes में Supreme Court का 2021 का फैसला भी महत्वपूर्ण है। Amitabha Dasgupta बनाम United Bank of India मामले में Supreme Court ने banks की duty of care को लेकर महत्वपूर्ण observations दिए थे। Court ने यह माना कि bank सिर्फ यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह नहीं बच सकता कि उसे locker के अंदर रखी चीजों की जानकारी नहीं थी।
लेकिन locker में वास्तव में कितना gold या दूसरा सामान रखा था और उसकी exact value कितनी थी, यह अलग evidentiary issue हो सकता है। यानी ग्राहक को अपने valuables के ownership और value को साबित करने के लिए documents और दूसरे evidence की जरूरत पड़ सकती है।
इसीलिए bank locker में महंगी jewellery रखने वाले ग्राहकों के लिए purchase bills, valuation records, jewellery की photographs, hallmark details और insurance documents जैसे records संभालकर रखना काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या देश में पहले भी bank lockers से gold गायब होने के मामले आए हैं?
कांदिवली का यह मामला अकेला नहीं है। पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से bank lockers में रखे gold और valuables के गायब होने के मामले सामने आए हैं।
Kanpur में एक महिला ने आरोप लगाया था कि करीब 17 साल बाद SBI locker खोलने पर उसमें रखी लगभग 50 लाख रुपये की jewellery गायब थी। इस मामले में लंबे समय तक locker operate नहीं किए जाने और bank records से जुड़े सवाल सामने आए।
Bengaluru में एक bank assistant manager पर customers के lockers से करीब 2.7 किलो gold jewellery चोरी करने का आरोप लगा था। उस मामले में भी कथित तौर पर jewellery को pawn किया गया था और जांच में bank employee की भूमिका सामने आई।
Kolkata में एक former bank employee पर करीब 571 ग्राम gold jewellery से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई थी। वहां भी jewellery को loan collateral के तौर पर इस्तेमाल किए जाने और documents/signature से जुड़े सवाल जांच का हिस्सा बने।
Pune में भी bank locker से करोड़ों रुपये के gold, silver, diamond jewellery और दूसरे valuables गायब होने का मामला सामने आ चुका है, जिसमें bank employees की कथित भूमिका की जांच हुई थी।
इन मामलों को देखकर एक बात साफ है कि bank locker से जुड़े disputes सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं हैं। कई मामलों में locker access, employee control, documentation, dormant lockers और pledged jewellery का trail भी जांच का हिस्सा बनता है।
क्या भारत में bank locker theft बहुत आम है?
इस सवाल का जवाब भी आंकड़ों से समझना जरूरी है।
केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि 31 मार्च 2025 तक Public Sector Banks में करीब 1.10 करोड़ lockers operational थे। FY2020-21 से FY2024-25 के बीच Public Sector Banks में 40 established locker theft cases सामने आए थे। RBI के पास सभी banks के locker theft cases का consolidated database नहीं है।
बाद के 2026 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक FY2021-22 से FY2025-26 तक Public Sector Banks में 40 established locker theft cases दर्ज हुए। FY2025-26 में 12 Public Sector Banks में established locker theft का कोई मामला reported नहीं हुआ।
इन पांच साल के आंकड़ों में Maharashtra में 5 established cases दर्ज हुए थे। लेकिन यह आंकड़ा Public Sector Banks का है। कांदिवली का मौजूदा मामला IndusInd Bank जैसे private sector bank से जुड़ा है, इसलिए इसे इन सरकारी PSB आंकड़ों में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
यानी available data के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि देश के bank lockers में चोरी आम बात है। लेकिन यह भी साफ है कि locker को पूरी तरह risk-free मानना ठीक नहीं है।
NRI customers के लिए यह मामला क्यों ज्यादा महत्वपूर्ण है?
कांदिवली की घटना NRI customers के लिए खास warning लेकर आई है।
जो लोग साल में एक-दो बार ही भारत आते हैं, उनके लिए locker की physical checking नियमित रूप से करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में लंबे समय तक locker operate नहीं होने पर किसी unauthorized access या दूसरे dispute का पता काफी देर से चल सकता है।
RBI के locker framework में ऐसे customers का भी ध्यान रखा गया है जो NRI हैं या job transfer जैसी वजह से लंबे समय तक locker operate नहीं कर पाते।
इसलिए विदेश में रहने वाले customers के लिए bank में mobile number, email और address जैसे contact details updated रखना, locker records की जानकारी संभालकर रखना और संभव हो तो trusted family arrangement के बारे में bank के applicable rules समझना जरूरी है।
अगर आपके bank locker से jewellery गायब मिले तो क्या करें?
सबसे पहले locker की स्थिति की photographs और video अपने पास रखें। इसके बाद तुरंत bank को written complaint दें और complaint की acknowledgement लें।
इसके साथ police complaint करना भी जरूरी है। Locker access records, CCTV, locker operation records और bank से जुड़े documents सुरक्षित रखने के लिए लिखित request देना भी उपयोगी हो सकता है।
अगर jewellery के bills, valuation certificate, photographs, hallmark details या insurance documents हैं तो उन्हें सुरक्षित रखें। यही documents बाद में ownership और value establish करने में काम आ सकते हैं।
यह समझना भी जरूरी है कि bank locker और jewellery insurance एक ही चीज नहीं हैं।
Government ने Parliament में बताया है कि banks को locker-related contingencies से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए Board-approved insurance policies रखने की सलाह दी गई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि customer के locker में रखे हर gold item का पूरा value automatically insured है।
इसलिए बहुत high-value jewellery रखने वाले customers को अपने bank से applicable locker terms और अलग jewellery insurance की जरूरत को समझना चाहिए।
कांदिवली के इस मामले में अब आगे क्या होगा?
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। आरोपी कुलदीप साहनी गिरफ्तार हो चुका है और शिकायतकर्ता के 610 ग्राम gold jewellery की recovery की जानकारी सामने आई है।
अब जांच में यह पता लगाया जाना बाकी है कि jewellery locker से किस तरीके से निकाली गई, उसे अलग-अलग mortgage firms तक कैसे पहुंचाया गया, करीब 9 करोड़ रुपये के financial transactions में इस मामले से जुड़े कौन-कौन से transactions थे और क्या किसी दूसरे व्यक्ति या bank employee ने कथित तौर पर उसकी मदद की।
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बात यही है कि करीब दो साल पुराने locker theft का सुराग CCTV से ज्यादा financial trail से सामने आया। और अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि NRI का 82 लाख का gold कौन ले गया, बल्कि यह भी है कि bank locker में रखी आपकी lifetime savings कितनी सुरक्षित हैं और अगर कभी ऐसी घटना हो जाए तो आपकी legal और financial protection कितनी है। फिलहाल कांदिवली पुलिस की जांच इन सवालों के जवाब तलाश रही है।
नाशिक के लासलगांव में तांबे के तार चोरी का आरोपी गिरफ्तार। पूछताछ में 12 वारदातों का खुलासा, कार समेत ₹4.51 लाख का माल जब्त हुआ। पुराने मामलों की जांच जारी है।
महाराष्ट्र/नाशिक: लासलगांव में तांबे के तार चोरी के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को कार समेत गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, विट्ठलवाड़ी स्थित एक इलेक्ट्रिकल और हार्डवेयर दुकान का शटर तोड़कर करीब ₹3.43 लाख के तांबे के तार चोरी किए गए थे। चोरी के बाद आरोपी कार से माल लेकर निकल रहा था, लेकिन नाकेबंदी के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान खुर्शीद अब्दुल हमीद खान के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में नाशिक जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई 12 चोरी और सेंधमारी की वारदातों का कनेक्शन सामने आने का दावा किया गया है। आरोपी के पास से तांबे के तार, कार और चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजार समेत कुल ₹4,51,716 का माल जब्त किया गया है।
पुलिस के अनुसार, लासलगांव थाना क्षेत्र के विट्ठलवाड़ी गांव में ‘लोणजाईमाता इलेक्ट्रिकल वर्क्स एंड हार्डवेयर’ दुकान को चोरों ने निशाना बनाया था। दुकान से करीब ₹3,43,216 कीमत के तांबे के तार चोरी किए गए।
चोरी के बाद आरोपी खुर्शीद अब्दुल हमीद खान इन तारों को सेंट्रो कार से लेकर निकल रहा था। आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताया गया है और फिलहाल इगतपुरी में रह रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में कार का नंबर MH 03 AM 3467 बताया गया है।
नाकेबंदी के दौरान पुलिस ने पकड़ा
19 अगस्त की तड़के विंचूर तीन पाटी इलाके में पुलिस की नाकेबंदी चल रही थी। इसी दौरान पुलिस कर्मचारियों को एक संदिग्ध कार दिखाई दी। पुलिस ने कार को रोकने की कोशिश की और उसका पीछा किया।
पुलिस के मुताबिक, पीछा किए जाने के दौरान कार डिवाइडर से टकरा गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया। कार की तलाशी लेने पर उसमें तांबे के तार, बोल्ट कटर और लोहे की छड़ मिली।
जब्त सामान में करीब ₹3.43 लाख के तांबे के तार और लगभग ₹1 लाख कीमत की कार शामिल है। पुलिस के अनुसार, सभी सामान की कुल कीमत ₹4,51,716 है।
पूछताछ में 12 चोरी की वारदातों का कनेक्शन
आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस को नाशिक जिले के अलग-अलग इलाकों में हुई 12 चोरी और सेंधमारी की वारदातों के बारे में जानकारी मिलने का दावा किया गया है।
इनमें लासलगांव, सायखेड़ा, पिंपलगांव बसवंत, डिंडोरी, सिन्नर, इगतपुरी, वडनेर भैरव, सटाणा और चांदवड़ समेत कई थाना क्षेत्र शामिल बताए गए हैं।
नाशिक पुलिस के साथ गिरफ्तार आरोपी की तस्वीर
पुलिस अब इन पुराने मामलों की FIR, चोरी हुए सामान और आरोपी के बयान का मिलान कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन वारदातों में आरोपी की सीधी भूमिका कितनी थी और उसके साथ कोई और लोग शामिल थे या नहीं।
₹1 करोड़ से ज्यादा के पुराने मामलों की जांच
पूछताछ में सामने आए पुराने मामलों को जोड़ने पर करीब ₹1 करोड़ से ज्यादा के माल से जुड़े मामलों की जांच की बात सामने आई है।
हालांकि, यहां एक बात साफ है कि ₹1 करोड़ से ज्यादा की रकम अभी बरामद नहीं हुई है। यह पुराने मामलों में चोरी हुए माल और उससे जुड़े संभावित नुकसान की जांच का हिस्सा है। फिलहाल इस कार्रवाई में पुलिस ने ₹4,51,716 का माल जब्त किया है।
अब पुलिस पुराने मामलों में चोरी हुआ माल कहां गया, उसे किसे बेचा गया और इस पूरी कड़ी में और कौन लोग शामिल हैं, इसकी जानकारी जुटा रही है।
पुलिस को अब इन सवालों के जवाब तलाशने हैं
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच सिर्फ इस एक चोरी तक सीमित नहीं है। अब पुराने मामलों की कड़ी जोड़ने पर फोकस है।
पुलिस यह पता लगा रही है कि चोरी का सामान कहां बेचा जाता था, पुराने मामलों में भी इसी तरह के औजार या वाहन इस्तेमाल हुए थे या नहीं, आरोपी के साथ और कौन लोग थे और अलग-अलग जगहों से चोरी किया गया कितना माल बरामद किया जा सकता है।
अगर पूछताछ में दूसरे आरोपियों या चोरी का माल खरीदने वालों के बारे में ठोस 12जानकारी मिलती है, तो इस मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है।
देश के दूसरे हिस्सों में भी सामने आए तांबे की चोरी के मामले
तांबे के तार चोरी की घटनाएं सिर्फ नाशिक तक सीमित नहीं हैं। हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से copper wire, बिजली के केबल और दूसरे electrical infrastructure को निशाना बनाने के मामले सामने आए हैं।
दिल्ली-एनसीआर में पुलिस ने एक interstate copper-wire theft gang को पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह से 18 चोरी के मामलों का खुलासा हुआ था। आरोपियों पर पुलिस की नजर से बचने के लिए walkie-talkie और internet dongle का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगा था।
राजस्थान में भी एक मामले में पुलिस ने बताया था कि आरोपी online search के जरिए बड़े solar plants की जानकारी जुटाकर उन्हें निशाना बनाते थे। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी में भी पुलिस ने copper और iron चोरी के मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर 35 किलो तांबे का तार बरामद किया था।
तांबे की चोरी से आम लोगों को क्या नुकसान?
तांबे के तार की चोरी का नुकसान सिर्फ दुकान या गोदाम के मालिक तक सीमित नहीं रहता। जब यही तार बिजली, रेलवे, टेलीकॉम या दूसरे infrastructure में लगा हो और उसे काटकर चोरी कर लिया जाए, तो उसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ सकता है।
भोपाल में रेलवे signal cables की चोरी के बाद चार passenger trains में 30 से 60 मिनट तक की देरी की रिपोर्ट सामने आई थी। रेलवे infrastructure में इस तरह की चोरी से operation के साथ safety का सवाल भी खड़ा होता है।
मुंबई में भी MTNL की underground copper cables की चोरी का मामला सामने आया था। इस मामले में एक MTNL कर्मचारी पर कथित तौर पर cable locations की जानकारी चोरी करने वाले गिरोह तक पहुंचाने का आरोप लगा था।
इसी तरह खेतों में लगे solar panels और नलकूपों के तार चोरी होने पर किसानों को भी सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। तार चोरी होने के बाद मोटर या solar system बंद हो सकता है और उसे दोबारा चालू कराने में अलग से खर्च करना पड़ता है।
लासलगांव मामले में अब आगे क्या?
लासलगांव पुलिस अब आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर पुराने मामलों की जांच आगे बढ़ा रही है। 12 वारदातों में आरोपी की भूमिका, चोरी हुए सामान की बरामदगी और संभावित साथियों की पहचान इस जांच का अगला हिस्सा है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद 21 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। अब आगे की कार्रवाई में पुलिस हिरासत की स्थिति, पुराने मामलों में बरामदगी और दूसरे आरोपियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
इस कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक डॉ. डी. एस. स्वामी, अपर पुलिस अधीक्षक विमला एम. और उपविभागीय पुलिस अधिकारी के. के. पाटिल के मार्गदर्शन में टीम ने कार्रवाई की।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और पुराने 12 मामलों की कड़ी जुड़ने के बाद इस मामले में चोरी के माल की और बरामदगी या अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी सामने आ सकती है।
एक नजर में
घटना: विट्ठलवाड़ी, लासलगांव, नाशिक
चोरी: करीब ₹3,43,216 के तांबे के तार
गिरफ्तार आरोपी: खुर्शीद अब्दुल हमीद खान
बरामद सामान: तांबे के तार, सेंट्रो कार, बोल्ट कटर और लोहे की छड़
कुल जब्ती: ₹4,51,716
पुलिस पूछताछ में सामने आए मामले: 12 चोरी और सेंधमारी की वारदातें
जिन थाना क्षेत्रों का नाम सामने आया: लासलगांव, सायखेड़ा, पिंपलगांव बसवंत, डिंडोरी, सिन्नर, इगतपुरी, वडनेर भैरव, सटाणा और चांदवड़
पुराने मामलों में जांच: ₹1 करोड़ से ज्यादा के माल से जुड़े मामलों की जांच
वसई में 66 साल की महिला को CM Vijay Thalapathy के Deepfake Video से ₹12 लाख की ठगी का शिकार बनाया गया। जानिए पूरा मामला और Cyber Fraud से बचने का आसान रास्ता।
पालघर/ वसई: सोशल मीडिया पर दिखने वाला कोई Video कितना भी असली क्यों न लगे, अब उस पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है। वसई में 66 साल की एक महिला को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय यानी Thalapathy Vijay के नाम और चेहरे से बनाए गए Fake AI Video के जरिए आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया गया और करीब 12 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने Instagram पर एक Reel देखी थी, जिसमें विजय को कथित तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को Financial Assistance देने की बात करते दिखाया गया था। Reel में संपर्क करने के लिए एक Phone Number भी दिया गया था। महिला ने जब उस नंबर पर संपर्क किया तो उन्हें दूसरे नंबर पर बात करने के लिए कहा गया। इसके बाद शुरू हुआ पैसे ऐंठने का पूरा खेल।
मामला 27 जुलाई से शुरू हुआ। महिला की नजर Instagram पर एक ऐसी Reel पर पड़ी जिसमें विजय को लोगों को आर्थिक मदद देने की बात कहते हुए दिखाया गया था।
महिला ने Reel में दिए गए नंबर पर फोन किया। दूसरी तरफ मौजूद लोगों ने उनसे बातचीत शुरू की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें आर्थिक मदद मिल सकती है।
महिला ने करीब 5 लाख रुपये की मदद मांगी। इसके बाद ठगों ने कहा कि मदद की रकम हासिल करने के लिए पहले 5 हजार रुपये Processing Fee जमा करनी होगी।
महिला ने यह रकम दे दी।
यहीं से ठगी का सिलसिला और आगे बढ़ गया।
₹5 हजार के बाद ₹77 लाख का नया झांसा
Processing Fee देने के बाद ठगों ने महिला को बताया कि उन्हें विदेश से करीब 77 लाख रुपये मिलने वाले हैं। इसके लिए Tax और दूसरे Charges के नाम पर लगातार पैसे जमा करने को कहा गया।
मदद की रकम मिलने की उम्मीद में महिला ठगों की बातों पर भरोसा करती रहीं और अलग-अलग समय पर पैसे भेजती रहीं।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने एक Private Credit Society से Loan लिया, अपनी Jewellery गिरवी रखी और अपनी बेटी के Bank Account से भी पैसे निकाले। इसके बाद ठगों की ओर से बताए गए Bank Accounts में कुल करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।
पूरी रकम करीब 10 दिनों के दौरान भेजी गई।
12 लाख देने के बाद भी नहीं मिली मदद
महिला को जब वादा की गई Financial Assistance नहीं मिली और ठग लगातार पैसे मांगते रहे, तब उन्हें शक हुआ।
इसके बाद उन्हें समझ आया कि जिस Video को देखकर उन्होंने भरोसा किया था, वह असली नहीं बल्कि AI से बनाया गया Fake Video था।
मामले में वालिव Police Station में शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act के तहत Cheating का मामला दर्ज किया है।
Police Inspector Gorakshnath Zaid ने मामले की पुष्टि की है। अब पुलिस उन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है जिन्होंने महिला से संपर्क किया और जिन Bank Accounts में रकम ट्रांसफर करवाई गई।
वसई का मामला अकेला नहीं है। हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से Deepfake Video के जरिए Financial Fraud और Blackmail के मामले सामने आए हैं।
पुणे में 38 साल की एक महिला को Instagram पर उद्योगपति रतन टाटा का Deepfake Video दिखाया गया। इस Video में Share Trading से जुड़े निवेश और अच्छे Return का दावा किया गया था। महिला ने Advertisement पर क्लिक किया और बाद में एक App के जरिए कथित Investment Scheme में पैसे लगाए। पुलिस के अनुसार उन्हें करीब 4.09 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
इसके अलावा वहीं, पुणे में ही 56 साल के एक Businessman को Finance Minister Nirmala Sitharaman के Deepfake Video के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया। इसके बाद Fake Forex Trading Platform, Fake Investment Advisor और SpaceX Shares के नाम पर करीब 1.07 करोड़ रुपये की ठगी की गई। Fake Platform पर कथित Profit बढ़ता हुआ दिखाया गया और पैसा निकालने के लिए आगे और रकम मांगी गई।
बेंगलुरु में एक Retired Professor को Facebook पर Nirmala Sitharaman का Deepfake Video दिखाया गया। इसके बाद उन्हें एक Fake Trading Platform, Telegram Chat और Overseas Calls के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया और 61 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।
पटना में Deepfake का इस्तेमाल अलग तरीके से किया गया। एक Hotel Owner को उनके चेहरे से बनाए गए कथित अश्लील AI Videos के जरिए Blackmail किया गया और करीब 97 लाख रुपये की रकम वसूली गई। पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और अंतिम 20 लाख रुपये की किस्त बरामद की गई।
इन मामलों से साफ है कि Deepfake का इस्तेमाल अब सिर्फ Fake News फैलाने के लिए नहीं बल्कि Investment Fraud, Financial Assistance Scam और Blackmail जैसे अपराधों में भी किया जा रहा है।
Video में नेता या Celebrity दिखे तो भी तुरंत भरोसा न करें
AI की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज इस्तेमाल करके ऐसा Video तैयार किया जा सकता है जिसमें वह व्यक्ति ऐसी बात कहता हुआ दिखाई दे सकता है जो उसने वास्तव में कही ही नहीं।
इसलिए अगर किसी Social Media Video में कोई नेता, Celebrity, कारोबारी या सरकारी अधिकारी पैसे, Investment, नौकरी, Lottery या Financial Assistance का दावा करता दिखाई दे और साथ में कोई Mobile Number, WhatsApp Number, Website या Payment Request दी गई हो तो सीधे पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है।
Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C के मुताबिक Financial Cyber Fraud की शिकायत National Helpline Number 1930 पर की जा सकती है। इसके बाद Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की जानकारी पूरी करनी होती है।
शिकायत करते समय Transaction ID, Transaction Date, Bank या Payment App की जानकारी, UPI ID, Account Details, Phone Numbers, Chat और Screenshots जैसी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है।
साथ ही अपने Bank या संबंधित Payment Service Provider को भी तुरंत Fraud Transaction की जानकारी देनी चाहिए।
I4C का Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System Financial Fraud की शिकायतों पर Banks और Payment Intermediaries के साथ कार्रवाई के लिए बनाया गया है।
साइबर फ्रॉड के खिलाफ सरकार की कार्रवाई भी तेज
सरकार के मुताबिक 30 जून 2026 तक CFCFRMS के जरिए 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई गई। इसी अवधि तक I4C ने 3,718 Mobile Apps को भी Block किया था। सरकार ने यह भी बताया कि Suspect Registry के जरिए संदिग्ध Identifiers और Mule Accounts की जानकारी Banks और Financial Institutions के साथ साझा की जा रही है।
अप्रैल 2026 से Money Restoration Module और Grievance Redressal Module भी काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य Cyber Fraud में फंसी रकम की बहाली और Bank Accounts के Freeze या Lien से जुड़ी शिकायतों को तेजी से संभालना है।
Deepfake को लेकर नए नियम भी लागू
भारत सरकार ने 2026 में AI-generated और Deepfake Content से जुड़े नियमों को और मजबूत किया है। फरवरी 2026 में IT Rules में बदलाव करके Synthetically Generated Information यानी AI से तैयार सामग्री से होने वाले नुकसान को लेकर नया regulatory framework लाया गया। इसमें Deepfake और AI-generated content भी शामिल है।
सरकार ने Social Media Platforms के लिए AI-generated content की स्पष्ट पहचान और traceable information से जुड़ी व्यवस्था भी तय की है। Unlawful content की शिकायतों पर Platforms को तेजी से कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अब Social Media पर दिखने वाले Video को लेकर क्या सावधानी रखें?
किसी बड़े नेता या Celebrity का Video देखकर सिर्फ इसलिए भरोसा न करें क्योंकि उसमें चेहरा और आवाज बिल्कुल असली जैसी लग रही है।
अगर Video में Financial Assistance, Investment, नौकरी, Lottery या किसी दूसरी आर्थिक मदद का दावा है तो पहले Official Source से जानकारी Verify करें।
Video में दिए गए किसी अनजान Phone Number या Link पर तुरंत संपर्क न करें।
Processing Fee, Tax, Verification Charge या Withdrawal Charge के नाम पर पैसे मांगने पर रुक जाएं।
किसी अनजान Bank Account या UPI ID में Payment न करें।
और अगर गलती से पैसा भेज दिया है तो इंतजार करने के बजाय तुरंत 1930 पर शिकायत करें और Cyber Crime Portal पर मामला दर्ज करें।
वसई की 66 साल की महिला के साथ हुई यह घटना बताती है कि Social Media पर दिखने वाला भरोसेमंद चेहरा भी ठगी का जरिया बन सकता है। यहां 5 हजार रुपये की छोटी Payment से शुरू हुआ मामला करीब 12 लाख रुपये के नुकसान तक पहुंच गया।
इसलिए अगली बार किसी Video में कोई बड़ा नेता, Celebrity या सरकारी व्यक्ति आर्थिक मदद या Investment का दावा करता दिखाई दे तो Video देखकर फैसला लेने के बजाय पहले उसकी सच्चाई Verify करें। यही सावधानी आपके पैसे को ऐसे Deepfake Cyber Fraud से बचा सकती है।
मुंबई के मालाड वेस्ट स्थित Hotel Radha की किचन में जिंदा चूहे और कॉकरोच मिले। FDA ने फूड लाइसेंस तत्काल सस्पेंड कर खाने की बिक्री, स्टोरेज और सप्लाई भी रोक दी
मुंबई: मालाड वेस्ट स्थित Hotel Radha की किचन में जिंदा चूहे और कॉकरोच मिलने के बाद महाराष्ट्र FDA ने होटल का फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। 18 अगस्त को हुई जांच में किचन की सफाई, ड्रेनेज, स्टोरेज और फूड हैंडलिंग को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आईं।
मालाड के Hotel Radha में FDA की अचानक जांच
FDA ने 18 अगस्त को मालाड वेस्ट स्थित Hotel Radha की किचन की जांच की। जांच के दौरान अधिकारियों को किचन में जिंदा चूहे और कॉकरोच मिले। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ चूहे छत के पास दिखाई दिए, जबकि कुछ खुले ड्रेनेज के रास्ते किचन में आते मिले।
किचन के ड्रेनेज खुले और खराब हालत में पाए गए। इससे चूहों और दूसरे कीड़ों के अंदर आने का रास्ता बना हुआ था।
फूड तैयार करने वाले उपकरणों पर कॉकरोच मिले। रिपोर्ट के मुताबिक dough-mixing machine पर भी कॉकरोच दिखाई दिए। काउंटर और बर्तन गंदे थे, जबकि कई बर्तनों पर जंग के निशान मिले।
टोस्टर के ऊपर रखा था खुला Dustbin
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। किचन में खुला dustbin रखा हुआ था और उसके ठीक ऊपर toaster रखा था, जहां खाना तैयार किया जा रहा था।
इसके अलावा कुछ food items धूल और गंदगी के बीच रखे मिले। स्टोरेज बॉक्स और कंटेनर भी साफ नहीं थे। इससे food storage और handling को लेकर भी सवाल उठे।
FDA ने Hotel Radha का फूड लाइसेंस क्यों सस्पेंड किया?
इन गंभीर food safety और hygiene violations के बाद FDA ने Food Safety and Standards Act, 2006 के Section 32(3) के तहत Hotel Radha का food business licence तत्काल प्रभाव से suspend कर दिया।
आदेश के तहत 18 अगस्त से होटल में food की manufacturing, storage, sale और distribution से जुड़ी गतिविधियां रोक दी गई हैं। यानी कार्रवाई सिर्फ warning या सफाई के निर्देश तक सीमित नहीं रही, बल्कि होटल के food business पर तत्काल रोक लगाई गई है।
क्या Hotel Radha में अभी खाना मिल सकता है?
FDA के suspension order के मुताबिक food की manufacturing, storage, sale और distribution वाली गतिविधियां रोकने का आदेश दिया गया है।
इसलिए फिलहाल Hotel Radha के food business को लेकर FDA का suspension लागू है। होटल की बाकी सेवाओं पर क्या असर है, यह food licence suspension से अलग विषय है और उपलब्ध FDA कार्रवाई में मुख्य रोक food-related activities पर है।
क्या Hotel Radha का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द हुआ है?
नहीं। यहां suspension और cancellation को अलग समझना जरूरी है।
FDA ने Hotel Radha का food business licence suspend किया है। उपलब्ध कार्रवाई में licence को हमेशा के लिए cancel करने की बात नहीं कही गई है। आगे compliance और FDA की कार्रवाई के बाद स्थिति में बदलाव हो सकता है।
क्या Hotel Radha का खाना खाने से किसी के बीमार होने की पुष्टि हुई?
अभी सामने आई FDA कार्रवाई में किसी ग्राहक के बीमार होने की पुष्टि नहीं की गई है।
जांच में किचन की hygiene, pest control, drainage, storage और food handling से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आई हैं। इसलिए इसे food safety risk के तौर पर देखा गया है, लेकिन बिना मेडिकल या laboratory confirmation के यह कहना सही नहीं होगा कि होटल का खाना खाने से किसी व्यक्ति को बीमारी हुई।
Hotel Radha पर हुई कार्रवाई अकेली कार्रवाई नहीं है। महाराष्ट्र FDA ने हाल की statewide inspection drive में 31 hotels, restaurants, roadside eateries और दूसरे food establishments की जांच की।
इस कार्रवाई में 22 establishments को improvement notices दिए गए, जबकि पांच food business licences suspend किए गए। करीब 25 लाख रुपये के banned और दूसरे food products जब्त किए गए। 10 लोगों की गिरफ्तारी, आठ FIR और छह establishments को seal किए जाने की जानकारी भी FDA कार्रवाई के बाद सामने आई है।
इसी अभियान के दौरान Hotel Radha, Malad West का नाम भी उन establishments में शामिल रहा जिनका food business licence suspend किया गया। FDA ने इस अभियान को “Safe Food, Safe Maharashtra” के तहत चलाया है।
FDA की हालिया inspections में सिर्फ kitchen की सफाई ही नहीं, बल्कि food storage, temperature control, waste disposal, pest control और food handling जैसी चीजों को भी देखा जा रहा है।
Hotel Radha के मामले में खुले drains, rodents, cockroaches, गंदे utensils, जमा पानी, grease, खराब storage और खुले dustbin जैसी कई कमियां एक साथ सामने आईं।
मालाड में इससे पहले भी food safety पर कार्रवाई
मालाड वेस्ट में इससे पहले FDA ने Blinkit के एक dark store पर भी food safety violations को लेकर कार्रवाई की थी। 7 अगस्त की inspection के बाद वहां cockroaches, expired food, floor पर रखे food items और storage तथा pest-control से जुड़ी कमियां सामने आने की रिपोर्ट आई थी। उस facility का food licence भी suspend किया गया था।
ऐसे में मालाड में लगातार सामने आ रही food safety कार्रवाई ने restaurants और food-storage facilities की hygiene व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Restaurant में खाना खाने से पहले ग्राहक क्या देखें?
बाहर से restaurant कितना भी साफ और अच्छा दिखे, असली food safety kitchen के अंदर की व्यवस्था पर depend करती है।
ग्राहक restaurant में food licence/FSSAI details देख सकते हैं। अगर किसी जगह पर खुले में रखा खाना, गंदे utensils, cockroaches, rats, खराब storage या दूसरी गंभीर hygiene problem दिखाई देती है तो उसकी शिकायत food safety authorities तक की जा सकती है।
Hotel Radha पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर यही सवाल सामने ला दिया है कि restaurant की table और kitchen के बीच food safety की असली तस्वीर क्या है।
फिलहाल FDA की कार्रवाई के बाद Hotel Radha का food business licence suspend है और food की manufacturing, storage, sale और distribution पर रोक लागू है। आगे होटल की compliance और FDA की अगली कार्रवाई से ही पता चलेगा कि licence कब बहाल होता है।