Category: Political News

Read the latest political news, election updates and in-depth reports from India and around the world. Stay informed with coverage on government policies, political parties, leaders, parliament, elections, public issues and major political developments, only on Indian FastTrack.

  • विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान, 5 राज्यों के समीकरण | सेमीफाइनल या रिहर्सल

    विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान, 5 राज्यों के समीकरण | सेमीफाइनल या रिहर्सल

    देश के पांच राज्यों में 7 नवंबर से शुरू होकर 30 नवंबर तक कुल चार चरणों में मतदान होंगे। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में, जबकि बाकी राज्यों में एक ही दिन वोट डाले जाएंगे। नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे। साल के ये आखिरी चुनाव सेमीफाइनल तो नहीं, लेकिन 2024 के आम चुनाव के लिए रिहर्सल जैसे जरूर हैं।

    वी बी माणिक
    नई दिल्ली
    – देश की राजनीति में सेमीफाइनल मैच का बिगुल बज चुका है। इसके तहत देश के पाँच राज्यो में सभी दलों के रण बाकुरो की टोली ताल ठोकना शुरू कर दिया है। इस चुनावी खेल में कौन पहलवान जीतेगा? कौन हारेगा? ये समय बतायेगा। इस समय जाति गणना की माँग जोरो पर चल रही है। पर अधिकांश नेता अपनी जाति के बारे में कुछ नही बोल रहे है।

    देश में महिलाओ के साथ बलात्कार की घटना में काफी बढ़ोतरी हुई है। जिस पर राज्य सरकारें चुप्पी साध कर बैठी है। सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह समाप्ति की ओर बढ़ती जा रही है। रणबाँकुरों की ओर से टिकट के लिये जोर आजमाइश की जा रही है। चाहे वह कितना बड़ा अपराधी हो, इसको पार्टियां नही देख रही है। जितने दोषी राजनीतिक पार्टियां है उससे ज्यादा दोषी चुनाव आयोग है।

    इसे भी पढ़ें:- Mumbai: महिला पुलिस कांस्टेबल से छेड़छाड़ नाबालिग लड़क गिरफ्तार..

    देश के पांच राज्यों में चुनाव

    मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार से देश की जनता कई माध्यमों सवाल करती आ रही है, कि क्योंकि चुनाव आयोग इस बात की जाँच क्यों नही करता कि जो भी नेता चुनाव लड़ रहा है उस के खिलाफ आपराधिक कितने केस दर्ज है? न्यायालय में कितने में दोषी पाया गया है और कितने केस विचाराधीन है? अगर है तो चुनाव लड़ने के योग्य नही है। चुनाव आयोग एकदम निष्पक्ष नही है क्योंकि चुनाव आयोग से रिटायर्ड होने के बाद ये भी किसी राजनीतिक पार्टी से चुनाव लड़कर या पीछे के रास्ते से लोकसभा-राज्यसभा में पहुँच जाते है। और आजीवन मलाई खाते है।

    चुनाव,
    चुनावी समीकरण को दर्शाती हुई तस्वीर

    पांचो राज्यों में कुल चार चरणों में वोटिंग होगी। सिर्फ छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान होंगे बाकी राज्यों में एक ही चरण में वोट डाले जाएंगे। शुरुआत मिजोरम से 7 नवंबर को होगी, जबकि आखिरी चरण में तेलंगाना विधानसभा के लिए 30 नवंबर को वोट डाले जाएंगे – सभी राज्यों में मतगणना 3 नवंबर को होगी।

    अब राजीनीतिक पार्टीयो के पहलवानो मे से ये पहलवान चुनाव जीतने के बाद पाँच वर्ष तक अपने एरिया में अपने चमचो के साथ केवल दहशत पैदा करना। पुलिस थानों को अपनी रखैल बनाकर रखना। दुकानदारों व्यापारियों और अन्य कारोबारियों से अवैध धन उगाही का काम करते है और ठेकेदारों से हर कार्य का कमीशन लेना, सरकारी दफ्तरों में वसूली करना, कर्मचारियों को धमकी देना, यही काम करते है। चुनाव आयोग इसकी जाँच क्यों नही करवाता है? बहुत गरीब वर्ग इन विधायकों द्वारा ठगी के शिकार हुए होते है इस पर कोई कार्रवाई नही होती है। अब देखना है, कि 3 दिसंबर को इस सेमीफाइनल मुकाबले का क्या रिजल्ट आता है।

    चुनाव तारीखों की घोषणा तो अब हुई है, लेकिन राजनीतिक पार्टियां काफी पहले से ही चुनाव कैंपेन शुरू कर चुकी हैं। अब तक का हाल तो यही बता रहा है कि 3 राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है, जबकि तेलंगाना और मिजोरम में क्षेत्रीय दलों का दबदबा है।

    Live video on indian fasttrack news channel

    इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान, 5 राज्यों के समीकरण समझिये

  • चुनाव लड़ने के लिए अपने ही समाज से पैसे लेकर अब उन्हीं को धमका रहा है अपनादल का विधायक

    चुनाव लड़ने के लिए अपने ही समाज से पैसे लेकर अब उन्हीं को धमका रहा है अपनादल का विधायक

    अपनादल के विधायक विनय कुमार वर्मा  स्वर्णकार समाज की लुटिया डूबा रहे है और समाज के कथित ठेकेदार वर्मा की जय जय कार कर रहे है।

    वी बी माणिक
    लखनऊ-
    उत्तरप्रदेश के शोहरतगढ़ से अपनादल अनुप्रिया पटेल गुट के विधायक विनय कुमार वर्मा ने अपने स्वर्णकार समाज के कई लोगो से चुनाव लड़ने के नाम पर उधारी के तौर पर लिए गए करोड़ो रूपये का घपला कर दिया है। जिन-जिन लोगो ने पैसा दिया है, वह अपना पैसा मांगते है, तो वर्मा धमकी देकर सीधा कहता है, “मैं पैसा नही दूंगा। जो करते बने कर लो।”

    इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान अपनादल के वर्मा ने जिससे अपने लिए चार बॉडी गार्ड लिया था। उसका भी लाखों रुपये डकार गया है। उन सभी चारो बॉडी गार्डो का भी पैसा नही दिया है। कुल 4 महीना इक्कीस दिन तक बॉडीगार्डों ने चौबीसों घंटे अपनादल के वर्मा की सुरक्षा में तैनात थे। सभी बॉडीगार्ड अपने मालिक से पैसे के लिए झगड़ा कर रहे है। मालिक ने समाज के ठेकेदारों से इसकी शिकायत किया, कि ऐसे समाज के नेता जो गरीबो का ही खून पीकर विधायक बने है।

    इसे भी पढ़े:- Mumbai: महिला पुलिस कांस्टेबल से छेड़छाड़ में नाबालिग गिरफ्तार।

    अपनादल,
    अपना दल का विधायक विनय वर्मा की फाइल तस्वीर

    अपनादल का विधायक ..

    अब सुरक्षा गार्ड कंपनी का मालिक दर-दर भटक कर समाज के ठेकेदारों के सामने गुहार लगा रहा है। ऐसे विधायक को चुल्लूभर पानी मे डूब मरना चाहिए। विनय कुमार वर्मा  स्वर्णकार समाज की लुटिया डूबा रहे है और समाज के कथित ठेकेदार वर्मा की जय जय कार कर रहे है।

    क्या ऐसे लोग समाज के लिए योग्य है? क्या समाज ऐसे लोगो का सामाजिक बहिष्कार करेगा? या ऐसे विधायको का सत्कार करेगा और अवैध कारोबार को बढ़ावा देगा? इस पर समाज को विचार करना है। समाज के अंदर काफी तोश व्याप्त है। लोग अपनादल के विधायक के नाम से डर रहे है। क्या अनुप्रिया पटेल इस विधायक पर कार्रवाई करेंगी या ऐसे विधायको का सत्कार करेंगी? जो लूटपाट, बेईमानी, ठगी में माहिर हो खबर लिखने के बाद क्या कार्रवाई होगी? ये नागरिकों और समाज को जानकारी मिलनी चाहिए सुर सभी गरीबो का पैसा वापस मिलना चाहिए।

    Live video on indian fasttrack news channel
  • महाराष्ट्र: गणेशोत्सव मंडलों को अगले पांच वर्षों के लिए एक बार उत्सव की अनुमति लेनी होगी: एकनाथ शिंदे

    महाराष्ट्र: गणेशोत्सव मंडलों को अगले पांच वर्षों के लिए एक बार उत्सव की अनुमति लेनी होगी: एकनाथ शिंदे

    • Ganesh utsav 2023: एक Permission
    • मुख्यमंत्री अध्यक्षता में अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।
    • आने वाले वर्षों के लिए बेहतर योजना…
    • जमीन नाममात्र का किराया रु. 100/

    सुरेंद्र राय
    मुंबई-
    गणेशोत्सव मंडलों को अगले पांच वर्षों के लिए एक बार उत्सव की अनुमति लेनी होगी। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई बैठक में ऐसी अनुमति देने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय से उन उत्कृष्ट गणेशोत्सव मंडलों को राहत मिली है जिन्होंने सभी नियमों, कानूनों का पालन किया है और पिछले दस वर्षों में कोई शिकायत नहीं थी। साथ ही वे आने वाले वर्षों के लिए बेहतर योजना बना सकेंगे। (Ganesh utsav 2023 Permission)

    Ganesh utsav 2023 एक Permission ..

    इसे भी पढ़े :- पुलिस थाने के पीछे ही रहता था 2 साल से मुंबई का तड़ीपार चोर

    मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वश्रेष्ठ गणेशोत्सव मंडलों को प्रोत्साहित करने के लिए अगले पांच साल के लिए एक बार अनुमति देने की मांग की गई। इस दौरान एक याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा दिये गये निर्देश की ओर भी ध्यान दिलाया गया। इस बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये निर्देश के अनुरूप नगर विकास विभाग ने सरकारी निर्णय की घोषणा कर दी है। इस निर्णय के अनुसार, सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को 19 सितंबर, 2023 से शुरू होने वाले गणेशोत्सव में अगले पांच वर्षों के लिए सरकारी नियमों और कानूनों का पालन करने वाले सर्वश्रेष्ठ गणेशोत्सव मंडलों को अनुमति देने के लिए कार्रवाई करनी होगी। (Ganesh utsav 2023 Permission)

    Ganesh utsav, Permission, 2023
    महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी की तैयारी की तस्वीर

    नियमानुसार ..

    महानगरपालिकाएं, नगरपरिषदों व ग्राम पंचायतों की जमीन नाममात्र का किराया रु. 100/ गणेशोत्सव या अन्य उत्सव मंडलों से जमा कराएंगी। साथ ही, उत्सव मंडलों को त्योहार के लिए समय-समय पर निर्धारित सरकारी निर्णयों और आदेशों के अनुसार नियम और शर्तों का पालन करना होगा। बोर्डों को स्थानीय पुलिस स्टेशन से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा और ऑनलाइन माध्यम से संबंधित स्थानीय निकायों को अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। (Ganesh utsav 2023 Permission)

    Live video on indian fasttrack news channel
  • सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्णय

    सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्णय

    • जाति प्रमाणपत्र के लिए राष्ट्रीय दस्तावेज होने जरूरी….!
    • न्यायमूर्ति रिटायर्ड संदीप शिंदे की अध्यक्षता में गठित करने हेतु सरकार ने दी मंजूरी

    सुरेंद्र राय
    मुंबई-
    महाराष्ट्र सरकार ने मराठवाड़ा में मराठा कुनबी समुदाय, कुनबी मराठा समुदाय को जाति प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें कई कागजात साक्ष्य के रूप में मान्य होंगे, निजाम काल के अनिवार्य साक्ष्य, वंशावली, शैक्षिक साक्ष्य, राजस्व साक्ष्य, निजाम काल में किए गए समझौते, निजाम काल के संस्थानों द्वारा दिए गए चार्टर, राष्ट्रीय दस्तावेज होने ज़रूरी होंगे। इसमें निजाम शाही के समय के प्रमाण सरकारी कागजातों में होंगे। सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। (Maratha Arakshan News)

    मिलेगा जाति प्रमाणपत्र ..

    सरकारी निर्णय संख्या MASU -2023/P.No.03/16A दिनांक 07/सितंबर 2023, मैडम कामा मार्ग, हुतात्मा राजगुरू चौक, मंत्रालय,मुंबई के अनुसार महाराष्ट्र सरकार शिक्षा एवम समाज कल्याण विभाग, सरकारी निर्णय दिनांक 13 अक्तूबर 1967, महाराष्ट्र अनुसूचित जाति, जनजाति, विमुक्त जाति, घुमंतू जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, जाति प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन का विनियमन अधिनियम, महाराष्ट्र सरकार का सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक कार्य, खेल और विशेष सहायता विभाग के निर्णय दिनांक 1 जून 2004, महाराष्ट्र सरकार का सामाजिक न्याय ईवीएम विशेष सहायता विभाग दिनांक 1 सितंबर 2012, महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग की अधिसूचना 5 परिपत्र दिनांक 28 फरवरी 2018, क्रमांक दिनांक 29 मई 2023, पिछड़ावर्ग और विशेष पिछड़ावर्ग जातिप्रमानपत्र जारी और सत्यापन का बिनयनम अधिनियम 2000 के अनुसार किया जाता है। (Maratha Arakshan News)

    जाति प्रमाणपत्र, Maratha Arakshan,
    मराठा आरक्षण पर प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर

    इसे भी पढ़ें :- मुंबई की अंधेरी में लगी आग दो नवजात शिशु सहित 33 लोगों को बचाया

    13 अक्तूबर 1967 निर्णय संख्या 1 के तहत उल्लखित राज्य में अन्य पिछड़ावर्ग की सूचीनुसार (अ) (स) 83 पर कुनबी जाति का उल्लेख है। सरकारी निर्णय 2004 को जारी किया गया, उसके द्वारा मराठा कुनबी के समान कुनबी मराठा को (ए) (न) 83 पर कुनबी जाति के समान जाति के रूप में शामिल किया गया है। यह भी कहा गया, कि सक्षम प्राधिकारी पुराने अभिलेखों साक्ष्यों के आधार पर जांच कर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्णय लेना चाहिए। (Maratha Arakshan News)

    समिति गठित करने का निर्णय..

    सरकार की पहल पर न्यायमूर्ति रिटायर्ड संदीप शिंदे की अध्यक्षता में गठित करने के लिए सरकार ने मंजूरी दी है। समिति के अन्य सदस्य मुख्य सचिव राजस्व, प्रधानसचिव विधि एवम न्याय, अतिरिक्त मुख्यसचिव संबंधित जिलों के कलेक्टर, विभागीय आयुक्त औरंगाबाद।
    आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक विभागो के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रमुख सचिव को बैठक में आमंत्रित किया जाना चाहिए। (Maratha Arakshan News)

    Live Video On Indian Fasttrack News Channel
  • बिना पैसा दिए करार रद्द कराने के लिए ग्लोबल म्यूजिक प्रा. लि. के सीईओ राजकुमार सिंह का अपहरण

    बिना पैसा दिए करार रद्द कराने के लिए ग्लोबल म्यूजिक प्रा. लि. के सीईओ राजकुमार सिंह का अपहरण

    • शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी ..
    • स्टैंप पेपर पर दस्तखत कराकर जानलेवा धमकी देकर छोड़ा विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे राज सुर्वे ने।
    • ली थी मनोज मिश्रा से अपहरण की सुपारी।

    इस्माइल शेख
    मुंबई-
    नेता हो या अभिनेता, सबको आवश्यक है। किंतु यदि वे अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों को निभाते हुए, अपनी संतानों को अच्छे संस्कार नहीं देते हैं तो उनकी संताने शॉर्ट कट का रास्ता अपनाकर असामाजिक व अनैतिक कार्य करने लगती है। ऐसा ही एक मामला विधायक प्रकाश सुर्वे के साथ भी घटित हुआ है, जहां उनके बेटे राज सुर्वे, उसके साथी विक्की शेट्टी सुपारी देने वाले मनोज मिश्रा व उनके 10,12 अज्ञात गुंडे टाइप साथियों के विरुद्ध म्यूजिक कंपनी के मालिक राजकुमार सिंह ने वनराई पुलिस थाने में प्राथमिकी नामजद एफआईआर दर्ज कराई है। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)

    Live video on Indian fasttrack news channel

    पुलिस में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार गोरेगांव (पूर्व) में चिंतामणि क्लासिक बिल्डिंग इको हाउस के पास, विश्वेश्वर नगर रोड़ के फ्लैट नंबर 302, 303, 403 तीसरा व चौथे मजले पर’ ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन प्रा. लि. नाम की कंपनी का कार्यालय है। वहीं आरोपी मनोज मिश्रा (30) वर्ष वाय – 503, एग्जीबिशन रोड़, गन अपार्टमेंट चौक के समीप ही पटना, बिहार की भी आदिशक्ति प्रा. लि. नाम की म्यूजिक कंपनी है। मनोज मिश्रा ने उसके 1.5 करोड़ फॉलोअर्स बताया है। उसे पैसे की आवश्यकता थी अपनी आदिशक्ति कंपनी को बढ़ाने के लिए, इसलिए उसने ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन के सीईओ राजकुमार सिंह से अपनी कंपनी ‘ आदिशक्ति प्रा. लि. डिजिटल लाइसेंस पर वर्ष 2019 में ओटीटी प्लेटफार्म के संबंध में आवश्यक करार पत्र लेकर राजकुमार सिंह ने एक वर्ष का ही करार किया था।

    Indian fasttrack news
    अपहरण, सुपारी, शिवसेना,
    विधायक प्रकाश सुर्वे की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ फाइल तस्वीर

    अपहरण की सुपारी ..

    किंतु कंपनी का व्यवहार अच्छा रहा। इसी कारण वर्ष – 2021 में मनोज मिश्रा ने यूट्यूब चैनल के लिए 8 करोड़ रुपए एडवांस में लिया और 5 वर्ष का करारनामा लिखा, जिसका लॉकिंग पीरियड 3 वर्ष का था। यह करारनामा वर्ष – 2026 में अपने पांच वर्ष पूर्ण करता। चैनल डेवलपमेंट के लिए मनोज मिश्रा ने कंटेंट न बनाकर उक्त पैसे को अन्यत्र खर्च किया, जिससे राजकुमार सिंह को मिलने वाले नियमित लाभ में कमी आने लगी। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)

    शिकायत के मुताबिक यूट्यूब चैनल का कंटेंट बनाने के लिए मनोज मिश्रा ने और पैसे की मांग की, जिसे राजकुमार सिंह ने इनकार कर दिया। किंतु मनोज मिश्रा ने वर्ष -2022 से करारनामा रद्द करने के लिए राजकुमार सिंह पर दबाव डालने लगा। राजकुमार सिंह ने समझौते के लिए उससे कहा कि वह उसे जून व जुलाई 2023, में एक करोड़ रुपए उसकी कंपनी के बैंक खाते में दे चुका है। वह उसका पैसा वापस करके करार रद्द कर सकता है।किंतु मनोज मिश्रा ने ऐसा न करते हुए, पद्माकर, राज सुर्वे को करार रद्द कराने की सुपारी दे दी। दिनांक – 09/08/2023 को 10 – 15 लोग राजकुमार सिंह के कार्यालय में आए और उसे विधायक प्रकाश सुर्वे के कार्यालय में ले गए, फिर कुछ दूर स्थित एक अन्य बिल्डिंग में ले गए, जहां उसके मोबाइल पर वनराई पुलिस का फोन आया, किंतु अपहरण कर्ताओं के दबाव के कारण राजकुमार सिंह ने पुलिस को जवाब नहीं दे पाया। फिर अपहरण कर्ताओं ने राजकुमार सिंह को दहिसर स्थित एक कार्यालय में लाया गया। जहां पद्माकर, राज सुर्वे पहले से ही मौजूद था। (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)

    Live video on Indian fasttrack news channel

    उसने जानलेवा धमकियां दी। उसके साथी विकी शेट्टी ने मनोज मिश्रा द्वारा लाए गए 100 / – के स्टैंप पेपर पर राजकुमार सिंह से जबरन करारनामा रद्द करने के लिए दस्तखत कराया और राजकुमार सिंह को जानलेवा धमकियां देते हुए, पुलिस में न जाने की ताकीद कर छोड़ दिया। फिर राजकुमार सिंह ने वनराई पुलिस स्टेशन जाकर मनोज मिश्रा, पद्माकर, राज सुर्वे, विकी शेट्टी व 10,12 अज्ञात लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुंबई एयरपोर्ट से फरार होने की कोशिश कर रहे मनोज मिश्रा व उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। अब देखना यह है कि पुलिस विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे राज सुर्वे को भी गिरफ्तार करती है या नहीं? (शिवसेना कार्यालय अपहरण की सुपारी)

  • नेताओ के आरोप प्रत्यारोप पर चल रहा है देश

    नेताओ के आरोप प्रत्यारोप पर चल रहा है देश

    मणिपुर, राजस्थान, बिहार, छतीसगढ़ में महिलाओं के साथ जो शर्मसार करने वाली घटना हुई है। इस पर कार्रवाई का अभी तक नहीं होना क्या नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप पर देश चल रहा है? ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं।

    वी बी माणिक
    मुंबई-
    आजकल के नेताओ में शर्म, लाज, हया, सब खत्म हो चुका है। कोई हिन्दू शास्त्र का तो कोई कुरान की दुहाई देकर राजनीति को पूरी तरह गंदगी में ढकेल दिया है। दिन पर दिन महिलाओं के इज्जत को तार-तार कर सभी राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जोर-शोर से चल रहा है। टीवी चैनलों पर जमकर कबूतरबाजी चलाकर टीआरपी बटोरी जा रही है। (Indian politics)

    लेकिन मणिपुर, राजस्थान, बिहार, छतीसगढ़ में महिलाओं के साथ जो शर्मसार करने वाली घटना घटित हुई है। उससे केवल राज्य का ही नही पूरे देश का नाम, विश्व पटल नाम काफी खराब हुआ है। मणिपुर और राजस्थान बिहार में महिला को निर्वस्त्र कर उनके साथ दुष्कर्म करने वाले और वहाँ उपस्थित दर्शको के साथ वीडियो बनाने वालों के विरुद्ध कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए था। इसके साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री जो कुम्भकर्णीय की नींद सो रहे थे उनको सलाखों के पीछे ढकेलना चाहिए था। (Indian politics)

    https://indian-fasttrack.com/2023/07/23/due-to-the-vigilance-of-the-mumbai-police-the-maharashtra-police-has-recovered-a-tanker-full-of-rdx-police-is-investigating
    Indian fasttrack news

    Indian Politics ..

    Indian politics,
    प्रतिकारात्मक फ़ाईल तस्वीर

    यह खबर लिखने में हम पत्रकारों का सर शर्म से झुक जाता है। क्योंकि पत्रकारों को लिखने के अलावा कोई अधिकार नही है। यह मुद्दा अब देश की संसद में चला गया है। वहाँ भी नेता अपनी रोटी सेक रहे है। इस पर कार्रवाई की बात कोई नही कर रहा है। बड़ी विडंबना है, कि देश की संसद और विधानसभा में नेता की जगह अपराधियो ने कब्जा कर लिया है। पर इसका जबाबदार है कौन ? (Indian politics)

    Live video on Indian fasttrack news channel

    देश की जनता अपने देश में महिलाओं को दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती के रूप में देखा जाता है और पुरुष वर्ग इन्हीं का अपमान करता है। इन्हीं को शैतानो की तरह नोचता है। इन्हीं के साथ हैवानियत करता है। ऐसे लोगो को चुल्लू भर पानी मे डुब मरना चाहिए। ये जितने दरिंदे है ये सब नेताओ के चमचे है। इसलिए इन पर कार्रवाई नही हो रहा है।
    आईएएस और आईपीएस अधिकारी क्यो चुप बैठे है? देश का दुर्भाग्य है, कि खाकी पर हमेशा खादी भारी पड़ता है। कब सुधरेगा हमारा देश कब वो दिन आएगा जब बहन बेटिया अपने को सुरक्षित महसूस करेंगी और दरिंदो का सर्वनाश होगा। (Indian politics)

  • क्या एक्शन लेंगे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे?

    क्या एक्शन लेंगे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे?

    • BMC कमिश्नर इकबाल सिंह चहल का कार्यालय निरूत्तर।
    • BMC का बहुत बड़ा भ्रष्टाचार
    • मुंबईकरों के साथ छल कपट और धोखा।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि मनपा आयुक्त (BMC Commissioner) इकबाल सिंह चहल के कार्यालय के माध्यम से वर्ष, 2019 और 2021 के मध्य मुंबई को और अधिक खूबसूरत बनाने के नाम पर अनेकों सड़कें कंक्रीट की बनवाई हैं। जो बेहद खराब गुणवत्ता वाली हैं, जिनके विरुद्ध अनेकानेक शिकायतें भेजी गईं लिखित रूप से लेकिन उन पर कान नहीं दिया गया। तो कानूनी कार्रवाई तो बड़ी दूर की बात है। जिससे जान पड़ता है बहुत बड़ा भ्रष्टाचार कर करोड़ों रुपए जेब में भरे गए हैं। जो मुंबईकरों के साथ छल कपट और धोखा है।

    BMC का बहुत बड़ा भ्रष्टाचार।

    Indian fasttrack news
    BMC, भ्रष्टाचार,
    प्रतिकारात्मक ताज़ा तस्वीर

    शिकायतों पर बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) का जवाब नहीं देना और कोई कार्रवाई नहीं करना प्रमाण है, कि खुलकर भ्रष्टाचार किया गया है। महानगर की ये प्रमुख सड़कें हैं, जिसे मेसर्स भव्य एंटरप्राइजेज, मेसर्स प्रगति एंटरप्राइजेज, मेसर्स एम बी ब्रॉडर्स, मेसर्स एम ई इंफ्रा प्रोजेक्ट्स, मेसर्स कमला, मेसर्स आर जे शाह, मेसर्स कोणार्क कंपनी, मेसर्स मुकेश, मेसर्स ए पी आई सिविल कॉन, मेसर्स मनसा कंस्ट्रक्शन, मेसर्स बिकोन, मेसर्स एच बी, मेसर्स आर के मदानी को ठेका दिया गया हैं। जिनके माध्यम से पी एन वॉर्ड, पी साउथ, के वेस्ट, के ईस्ट, एच ईस्ट, एच वेस्ट, आर नॉर्थ, आर सेंट्रल, आर साउथ इन सभी वार्डों में बनवाई गई तमाम सड़कों में खराब गुणवत्ता के मैटिरियल्स लगाए गए, जो उच्च गुणवत्ता के नहीं हैं।

    क्या भ्रष्टाचार को दबा देंगे?

    Live video on Indian fasttrack news channel

    मुंबईकरों के साथ यह बहुत बड़ा छल किया गया है। जिनमे अधिकांश सड़कें मात्र दो महीने में ही टूट फूट गई। सोचिए कंक्रीट की सड़कें दो महीने भी सही सलामत नहीं रह पाएं तो इसे क्या भ्रष्टाचार का खेल नहीं कहा जाएगा? इस संबंध में तात्कालीन मनपा (BMC) आयुक्त इकबाल सिंह चहल के कार्यालय में अनेकों लिखित शिकायतें दी हैं। मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। ये तमाम सड़कें उन्हीं ठेकेदारों द्वारा पुनः निर्माण उच्च क्वालिटी का कराया जाना ही मुंबईकरों के साथ न्याय होगा। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से आशा की जा सकती है, कि वे न्यायोचित जांच कराकर कानूनी कार्रवाई करेंगे? या भ्रष्टाचार को दबा देंगे?

  • भाजपा मंत्री, बीजेपी सचिव के घर की आगजनी, बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा

    भाजपा मंत्री, बीजेपी सचिव के घर की आगजनी, बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा

    • मणिपुर घटना में अमित शाह लाचार।
    • दरअसल झूठ की भी अपनी हद होती है।
    • पीएम की छवि विदेशों में भी धूमिल।
    • मैती समुदाय को आरक्षण देना गुजरात लॉबी का वादा।
    • मैती समुदाय आक्रामक भूमिका में..
    • कुकी, नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति होगी अत्यंत भयंकर।
    • गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के सांसद, मंत्री चुप।
    • आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    मणिपुर की हिंसा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथ पांव फूला देने के लिए काफी है। पीएम नरेंद्र मोदी मणिपुर जलता छोड़ विदेश चले गए। जो उन्हें देश की नहीं अपनी छवि बनाने की चिंता है। लेकिन छवि बनाते-बनाते कब मटिया मेट हो गई पता नहीं चला। दरअसल झूठ की भी हद होती है। महिला पहलवान अब उनकी और देश की बेटियां नहीं रही। वे अपने बाहुबली आरोपी सांसद को बचाने में लगे रहे इसी बीच विदेशों में भी उनकी छवि धूमिल हो गई।

    ये राहुल गांधी हैं कि अमेरिका में जाकर मोदी की यात्रा के पहले सारा गुड गोबर कर दिए। बीजेपी की ऐसी तैसी कर दी। दूसरी तरफ गुजरात लॉबी द्वारा महिला पहलवानों की उपेक्षा से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और माफियाओं बलात्कारियों को मटियामेट करने का एलान करने वाले यूपी से सीएम योगी आदित्यनाथ की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। उन्हे लगता है गुजरात लॉबी बीजेपी का सत्यानाश कर देगी।

    बाहुबली को पीएम, गृहमंत्री द्वारा दिल्ली पुलिस द्वारा नाबालिग पहलवान के यौनशोषण मामले में क्लीन चिट देकर पॉक्सो कानून से हटाने का असर देश की आधी आबादी यानी महिलाओं पर पड़ेगा। यदि उन्होंने बीजेपी को वोट नहीं दिया तो बीजेपी को खत्म होने से कोई रोक नहीं पाएगा।

    Indian fasttrack news
    मणिपुर, अमित शाह,
    मणिपुर आगजनी की तस्वीर

    गुजरात लॉबी का वादा..

    मणिपुर हिंसा बीजेपी की ही बोई गई है। मैती समुदाय को आरक्षण देने का वादा गुजरात लॉबी का था। तो मणिपुर हिंसा आगजनी का श्रेय भी इन्ही के माथे जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह मणिपुर दौरा कर चुके हैं। लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। बीजेपी मंत्री एवं बीजेपी सचिव के घर की आगजनी बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा है। आरक्षण का पेच कुछ इस तरह फंस गया है, कि अमित शाह के सम्मुख एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। अगर बीजेपी मैती समुदाय को आरक्षण देती है तो यह कुकी, नगा और अन्य आदिवासियों के लिए निर्धारित कोटे में से दिया जाएगा जिसे ये अपने हक पर डाका डालना समझेंगे।

    मणिपुर घटना में अमित शाह लाचार।

    अभी तो मैती समुदाय आक्रामक भूमिका में है। कल कुकी नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति अत्यंत भयंकर होगी। गृहयुद्ध भीषण रूप से फैलेगा। अमित शाह को शायद इसी बात की चिंता हो। उनकी समझ में नहीं आ रहा, कि करें तो क्या करें? मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। जिसमे खुद अब बीजेपी के घर भी जद में आ गए हैं। अमित शाह के बूते का नहीं रहा मणिपुर। पीएम तो विदेश यात्रा के द्वारा अपनी नष्ट हो चुकी छवि को सुधारने में लगे हैं।

    Live video on Indian fasttrack news channel

    आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।

    आश्चर्य नहीं होगा कि आज गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के जो सांसद, मंत्री चुप हैं। मूक दर्शक बने हुए हैं कल सारे के सारे गुजरात लॉबी के विरुद्ध उठ खड़े हों। आसार तो यही नजर आते है, कि बीजेपी आत्मघात के रास्ते पर बहुत आगे निकल गई है जहां से लौटना असंभव है। आरएसएस के सामने अब नहीं तो कभी नहीं की विकट स्थिति आ खड़ी हुई है। देखना मजेदार होगा कि क्या आरएसएस गुजरात लॉबी को बीजेपी से अलग-थलग करेगी या बीजेपी को नष्ट होने देती है।

  • आसान नहीं नितिन गडकरी को पार्टी से निकाल फेंकना।

    आसान नहीं नितिन गडकरी को पार्टी से निकाल फेंकना।

    • सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते है।
    • नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है।
    • महाराष्ट्र के निर्विवाद सबसे बड़े नेता है गडकरी।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    केंद्र की बीजेपी सरकार में पीएम मोदी की कृपा पाने के लिए मंत्री तक हमेशा मोदी के बचाव में अनर्गल प्रलाप करते देखे सुने जाते हैं।
    परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एक ऐसे व्यक्तित्व हैं। जिन पर कभी कोई लांछन नहीं लगा। सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते हैं। इसी कारण वे यदा-कदा अपनी ही सरकार की नीतियों का प्रेस के सामने मुखर विरोध करते हैं। तभी उनके पास भारी और खास मंत्रालयों की भरमार है। उनका कद छोटा करने के लिए उनसे अन्य मंत्रालय छीन लिए गए लेकिन परिवहन मंत्रालय का भारी भरकम मंत्रालय आज भी उनके हाथ में है।

    अन्य मंत्रालय छीन लिए जाने का कारण है। उनकी साफ गोई का स्वभाव। वे अपनी ही सरकार के प्रबल आलोचक हैं। जिस कारण गुजरात लॉबी को वे फूटी आंखों में सुझाते हैं।  अगर बस चलता तो कभी का उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया होता। केंद्र सरकार में एकमात्र मंत्री नितिन गडकरी हैं। जो कार्य करने में नंबर वन बन कर आज भी स्थिर हैं। पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पहले थोड़ा मनमौजी स्वभाव के थे। लेकिन मंत्रालय में जगह नहीं मिलने से अब बेवजह प्रेस के सामने आकर बेवजह विलाप करते हुए विपक्षियों पर आरोप मढ़ते रहते हैं। उन्हे याद रखना होगा कि कितनी भी चाटुकारिता कर लें मंत्री पद नही मिलेगी।

    https://indian-fasttrack.com/2023/06/17/leaders-of-politics-like-nitish-kumar-sharad-yadav-lalu-yadav-mulayam-singh-yadav-emerged-in-the-jaiprakash-movement
    indian fasttrack news
    गडकरी,
    भाजपा परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की फाइल तस्वीर

    नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है।

    गडकरी महाराष्ट्र के निर्विवाद सबसे बड़े नेता हैं। पक्ष-विपक्ष का कोई भी नेता इनसे किसी भी समय मिल सकता है। वे दूसरे नेताओं को आगे बढ़ाते रहते हैं। इसी कारण वे जहां जनता के लाडले हैं वहीं नेताओं द्वारा समापुजित भी हैं। जब मोदी और शाह आरोपी बाहुबली से भयभीत हैं जो मुश्किल से चार या पांच सीटों पर प्रभाव रखता है तो नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है। महाराष्ट्र के सभी नेता इनकी प्रशंसा करते हैं। जिसके उलट फड़नवीस  विदेशी शिक्षा लेकर एलिट बने हुए हैं। उनसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। सभी से तो मिलते भी नहीं। उनकी शिवसेना पार्टी को तोड़ने में बड़ा हाथ रहा। केंद्र की नजदीकियां इन पर भारी पड़ी।

    Live video on Indian fasttrack news channel

    सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते है।

    शाह नहीं चाहते कि महाराष्ट्र या किसी राज्य में कोई नेता ऐसा हो पाए जो उनकी पीएम पद की राह में रोड़ा बनें। मोदी के बाद अमित शाह खुद को नंबर दो बनाने पर लगे हुए हैं। यूपी के सीएम योगी की राह में कांटे उनके बिछाए हुए हैं। लेकिन योगी आज भी मोदी के लिए चैलेंज बने हुए है। लगभग बीस लोकसभा सीटों पर उनकी मजबूत पकड़ है। इसलिए अमित शाह उन्हे अपने जाल में कैद नहीं कर पाए हैं। इन सबसे अलग नितिन गडकरी सुयोग्य शासक बनने के गुणों से भरपुर हैं। भाजपा में यदि पीएम पोस्ट के लिए कोई योग्य व्यक्ति है तो नितिन गडकरी हैं। इसीलिए अमित शाह के लिए उनका पत्ता साफ कर पाना बूते से बाहर है। हर नेता गडकरी नहीं बन पाएगा।

  • महाराष्ट्र सरकार —- हनीमून खत्म

    महाराष्ट्र सरकार —- हनीमून खत्म

    • महाराष्ट्र सरकार की राजनीति।
    • दो घड़ों में बट गए बिल्डर लॉबी और कॉरपोरेट।
    • चाणक्य भूल जाते हैं कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था।
    • महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी।

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    महाराष्ट्र सरकार में यहां भूचाल मचा हुआ है। दो पक्षों की साझेदारी में धीरे-धीरे तनाव उत्पन्न हो रहा है। शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। यह साझेदारी कब तक चलेगी यह कहा नहीं जा सकता।

    दिल्ली बड़ी बेरहम है। जो कोई सत्ता में आता है, खुद को सम्राट समझने लगता है। वहां का सत्ताधारी कभी भी बर्दास्त नहीं करता, कि उसके साम्राज्य में किसी प्रांत का नेता शक्तिशाली बनकर उसे चुनौती देने की स्थिति में आए। इसीलिए यूपी में भाजपा के स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ के पर कतर दिए गए। बिना दांत और नाखून के सीएम बना दिए गए। मजबूरी थी केंद्र की क्योंकि योगी आरएसएस के बेहद करीब हैं। सरकार में उनके दाहिने बाएं तो महावत के रूप में उपमुख्यमंत्री रख दिए गए। संगठन में प्रांतीय अध्यक्ष और प्रभारी दिल्ली ने नियुक्त कर योगी को रोक दिया। लेकिन योगी के बगावती तेवर ने उन्हें शक्तिशाली सीएम बना दिया।

    https://indian-fasttrack.com/2023/06/17/leaders-of-politics-like-nitish-kumar-sharad-yadav-lalu-yadav-mulayam-singh-yadav-emerged-in-the-jaiprakash-movement
    Indian fasttrack news
    महाराष्ट्र, सरकार,
    मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की फाइल तस्वीर

    महाराष्ट्र सरकार की राजनीति ..

    महाराष्ट्र में बकौल पूर्व सीएम फड़णवीस ने ही शिवसेना तोड़ने, शिंदे के साथ अपनी मित्रता निभाने और खुद मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब पाले थे। किंतु चाणक्य ने सस्पेंस रखते हुए एकनाथ शिंदे को सीएम बना दिया। फड़नवीस को बेइज्जत करने के लिए उन्हें डिप्टी सीएम बनने को मजबूर कर दिया।
    अब शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते। जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। शिंदे के प्रभाव के कारण एफआईआर भी नहीं लिखी गई। कितने असहज हो चुके हैं फडणवीस?

    बिल्डर लॉबी,कॉरपोरेट भी दो घड़े में बंट गए हैं। कुछ को शिंदे तो कुछ को फडणवीस का वरद हस्त प्राप्त है। बीजेपी के कार्यकर्ता पीटे जाय। फडणवीस उसके पक्ष में खड़े भी हो जाएं लेकिन शिंदे द्वारा यह कहा जाए कि ठाणे जिले के किसी पुलिस अधिकारी का फडणवीस ट्रांसफर या पोस्टिंग, प्रमोशन नहीं कर सकते। क्योंकि बॉस शिंदे हैं और फडणवीस उनके अधीन हैं। उन्हे शिंदे का आदेश मानना ही पड़ेगा। बेचारे शिंदे करते भी तो क्या ? क्योंकि निरंतर उनका अपमान चाणक्य के फोन आने के बाद किया जाता है।

    आज हालत ऐसे हैं कि कभी अभिन्न मित्र आज आंख में आंख मिलाकर बात तक नहीं करते। जिसका खामियाजा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को ही भुगतना पड़ेगा। यूपी में लोकसभा की 64 सीटें 2019 में बीजेपी जीती थी। वहां योगी को नीचा दिखाया जा रहा और महाराष्ट्र में कुल 41 लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा आगामी चुनाव में दहाई तक का आंकड़ा भी नहीं छूने की स्थिति में रह गई है। जिस बालासाहेब ठाकरे ने 2001 के गुजरात दंगे में सीएम मोदी का साथ दिया था। उन्हीं के बेटे उद्धव ठाकरे को चाणक्य ने लहूलुहान कर मोदी के विजय रथ को रोक दिया है। संभव है चाणक्य खुद पीएम की कुर्सी पाना चाहते हों और मोदी को डोमिनेट करने की महत्त्वाकांक्षा रखते हों।

    Live video on Indian fasttrack news channel

    महाराष्ट्र के मामले में चाणक्य भूल जाते हैं, कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था और यह भी भूल गए कि महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी। शिवसेना के प्रभुत्व का लाभ बीजेपी को मिलता रहा है। लेकिन उद्धव ठाकरे को चोटिल कर चाणक्य ने भाजपा का महाराष्ट्र में सर्वनाश करने का जुगाड कर लिया है। इससे, सबसे बड़ा नुकसान पीएम मोदी का ही होगा और विधानसभा चुनाव में आने वाले समय में बीजेपी को 288 सीटों में बमुश्किल 20 सीटें ही मिलेंगी। शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की ही आगामी सरकार बनेगी। उसी तरह जैसे यूपी की लोकसभा चुनाव में 40 सीटों पर पेंच फसने से आरएसएस चिंतित है।