Category: Political News

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  • भारत का GDP ग्रोथ रेट घटने के कारण क्या है?

    भारत का GDP ग्रोथ रेट घटने के कारण क्या है?

    भारत की GDP ग्रोथ रेट दो साल में सबसे नीचे 5.4% पर आ गई है। यह पिछले अनुमानों क्रमशः 6.9 फीसदी और 5 फीसदी से कम है। राहुल गांधी ने इसके लिए सरकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। कहा, कि स्थिति में सुधार के लिए बिना समय गंवाए एक नई सोच और बिज़नेसेस के लिए एक नई डील की भारत को ज़रूरत है। (What is the reason for the decline in India’s GDP growth rate?)

    उन्होंने कहा, बात साफ है, कि भारतीय अर्थव्यवस्था तब तक तरक्की नहीं कर सकती, जब तक इसका फ़ायदा सिर्फ़ गिने-चुने अरबपतियों को मिल रहा हो और किसान, मज़दूर, मध्यमवर्ग और ग़रीब तरह-तरह की आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हों। (What is the reason for the decline in India’s GDP growth rate?)

    इन तथ्यों पर एक नज़र डालिए, देखिए स्थिति कितनी चिंताजनक है:

    • खुदरा महंगाई दर बढ़कर 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.21% पर पहुंच गई है। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में इस वर्ष आलू और प्याज़ की क़ीमत लगभग 50% बढ़ गई है।
    • रुपया 84.50 के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
    • बेरोज़गारी पहले ही 45 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है।
    • पिछले 5 सालों में मज़दूरों, कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों की आमदनी या तो ठहर गई है या काफी कम हो गई है।
    • आमदनी कम होने से मांग में भी कमी आई है। 10 लाख से कम क़ीमत वाले कारों की बिक्री में हिस्सेदारी घटकर 50% से कम हो गई है, जो 2018-19 में 80% थी।
    • सस्ते घरों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी घटकर क़रीब 22% रह गई है, जो पिछले साल 38% थी। FMCG प्रोडक्ट्स की मांग पहले से ही कम होती जा रही है।
    • कॉरपोरेट टैक्स का हिस्सा पिछले 10 सालों में 7% कम हुआ है, जबकि इनकम टैक्स 11% बढ़ा है।
    • नोटबंदी और GST की मार से अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा घटकर 50 वर्षों में सबसे कम सिर्फ़ 13% रह गया है। ऐसे में नई नौकरियों के अवसर कैसे बनेंगे?

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    राहुल गांधी ने भारत सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा, कि भारत की अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए एक नई सोच चाहिए और बिज़नेसेस के लिए एक नई डील उसका अहम भाग है। सबको समान रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, तभी हमारी अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ेगा।

    अर्थव्यवस्था का बुरा हाल, जनता का हाल बेहाल – इस स्थिति में सुधार के लिए बिना समय गंवाए एक नई सोच और बिज़नेसेस के लिए एक नई डील की ज़रूरत है।

    S&P ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 में जीडीपी ग्रोथ रेट 5 फीसदी रहेगी। (What is the reason for the decline in India’s GDP growth rate?)

  • महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में लगेंगे एक साथ 2 EVM

    महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में लगेंगे एक साथ 2 EVM

    महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए नाशिक जिले में कुछ क्षेत्र ऐसे है जहां उम्मीदवारों की संख्या अधिक है। ऐसे में वोटिंग के लिए कई जगहों पर 2 ईवीएम मशीनों (EVM Machine) का उपयोग किया जाएगा।

    न्यूज़ डेस्क
    नाशिक-
     महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए नाशिक जिले में चुनाव की तैयारी राजनैतिक पार्टियों के अलावा लोगों ने इतने जोरों पर किया है, कि कहीं कम तो कहीं सबसे अधिक उम्मीदवारों की संख्या सामने आई है। ऐसे में चुनाव में कई जगहों पर 2 ईवीएम (EVM) मशीनों का उपयोग किया जाने वाला है। चुनाव आयोग ने इसकी जानकारी दी। (2 EVMs will be installed simultaneously in Maharashtra Assembly elections)

    नाशिक जिले की 15 विधानसभा सीटों पर 196 उम्मीदवार चुनाव के मैदान उतर गए हैं। मालेगांव बाहर, बागलाण और इगतपुरी विधानसभा के प्रत्येक क्षेत्र में 17 उम्मीदवार होने के कारण यहां 2 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें लगाई जाने वाली है। इससे भी अधिक महाराष्ट्र के नांदेड़ उत्तर सीट पर 33 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं वही नंदुरबार के शहादा में सबसे कम सिर्फ 3 तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। (2 EVMs will be installed simultaneously in Maharashtra Assembly elections)

    नाशिक की बात करें तो मालेगांव बाहर, बागलाण और इगतपुरी के अलावा बची हुई 12 विधानसभा क्षेत्रों में आवश्यता के अनुसार एक ही EVM मशीन के द्वारा वोटिंग होने वाले है। चुनाव के लिए अधिक मतदान मशीनों की आवश्यकता वाले क्षेत्रों के लिए मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिले में मालेगांव बाहर, बागलाण और इगतपुरी विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक 17-17 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। जिले में इसके विपरीत, कलवण में सबसे कम 7 और निफाड में 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।

    क्यों लगाए जाएंगे 2 EVM मशीन

    ईवीएम मशीन पर अधिक जानकारी देते हुए बता दें कि मतदान मशीन पर एक बार में 16 उम्मीदवारों के नाम दिखाई देते हैं। इसके बाद नोटा (कोई नहीं) का विकल्प रहता है। यानी मशीन में कुल 17 विकल्पों के साथ अलग-अलग बटन होते हैं। इसके साथ ही नाशिक पश्चिम विधानसभा सीट के लिए 15 उम्मीदवार होने के कारण मतपत्रिका में 15 नाम और 16वें स्थान पर नोटा रहने वाला है। (2 EVMs will be installed simultaneously in Maharashtra Assembly elections)

    कितने होंगे मतदान केंद्र?

    नाशिक के मालेगांव बाहर, इगतपुरी और बागलाण विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक 17 उम्मीदवार और एक नोटा होने के कारण 2 मतदान मशीनों का उपयोग होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान जिले में 4922 मतदान केंद्र निर्धारित किए गए हैं। मतदान केंद्रों की संख्या के अनुसार 10882 बैलेट यूनिट, 6247 कंट्रोल यूनिट और 6739 वीवीपैट तैयार की गई हैं। व्यवस्थापन के बाद ये मशीनें निर्वाचन अधिकारियों के पास सौंप दी गई हैं। ये मशीनें विधानसभा क्षेत्रों में बनाए गए विशेष सुरक्षा कक्ष में सुरक्षित रखी गई हैं।

    चुनाव अधिकारी ने क्या कहा?

    नाशिक के उपजिला चुनाव अधिकारी डॉ. शशिकांत मंगरुले ने कहा, कि “जिन निर्वाचन क्षेत्रों में 2 वोटिंग मशीनों की आवश्यकता है, वहां मंगलवार को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में अतिरिक्त वोटिंग मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिले के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में आवश्यक संख्या में वोटिंग मशीनें और बाकी उपकरण उपलब्ध हैं। (2 EVMs will be installed simultaneously in Maharashtra Assembly elections)

  • गद्दार पार्टी में आकर खुद्दार हो जाते हैं- भाजपा

    गद्दार पार्टी में आकर खुद्दार हो जाते हैं- भाजपा

    भाजपा जिला अध्यक्ष प्रदीप रामचंदानी के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में खलबली मचा दिया है। महायुति गठबंधन में और पार्टीयों से आए नेताओं के अलावा सीधे तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ही निशाना बना दिया।

    न्यूज़ डेस्क
    ठाणे-
    मुंबई से सटे ठाणे जिले का उल्हासनगर विधानसभा सीट महायुति गठबंधन के लिए राजनैतिक खलबली का विषय बन गया है। यहां भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रदीप रामचंदानी ने ही महायुति गठबंधन में शामिल दलों और पार्टी में बाहर से आए नेताओं के अलावा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ ही जहर उगल दिया। इसके बाद से शिंदे गुट के शिवसैनिक कार्यकर्ताओं की नाराजगी के कारण मामला बिगड़ते देख रामचंदानी ने कहा कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया है। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

    चुनावी सभा में हंगामा

    उल्हासनगर में एक चुनावी सभा के दौरान भाजपा कार्यकर्ता द्वारा दिए बयान के बाद से महाराष्ट्र की सियासत गर्म हो गई है। दरअसल, उल्हासनगर से भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रदीप रामचंदानी ने कहा, कि “जिन्हें गद्दार कहा जाता है वह मुख्यमंत्री बन जाते हैं और भाजपा में आकर सब खुद्दार हो जाते हैं। बदलते समय के साथ राजनीति की परिभाषा बदल गई है।” भाजपा जिला अध्यक्ष के इस बयान से शिंदे गुट के शिवसैनिक कार्यकर्ता काफी नाराज हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा जिला अध्यक्ष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी गई है। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

    माहौल बिगड़ता देख लिया यू टर्न

    हालांकि, जिला अध्यक्ष के विवादित बयान के बाद से भाजपा के बड़े नेताओं ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, बयान के बाद माहौल गर्म होता देख भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा, उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। बता दें कि उल्हासनगर विधानसभा सीट पर कुमार आयलानी को महायुति की ओर से चुनावी उम्मीदवार की घोषणा की गई है।मौजूदा समय में यहां से कुमार आयलानी विधायक भी है। शनिवार को विधानसभा चुनाव प्रचार के मद्देनजर भाजपा की ओर से एक सभा आयोजित की गई थी। इस सभा में भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रदीप रामचंदानी ने विवादित बयान दिया। इसके बाद से यहां माहौल गर्म हो गया है। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

    कब होगा चुनाव ?

    महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए राज्य में एक ही बार 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। 23 नवंबर को चुनाव आयोग परिणाम घोषित करेगा। चुनाव आयोग ने इस बार एक ही टप्पे में चुनाव कार्य निपटाने का फैसला किया है। विधानसभा चुनाव को लेकर महाविकास अघाड़ी गठबंधन का दावा है कि इस बार उनकी सरकार बन रही है। वहीं, एकनाथ शिंदे (Shivsena) अजित पवार गुट (NCP)और भाजपा (BJP) की महायुति गठबंधन का दावा है कि दूसरी बार भी उनकी ही सरकार बनेगी। हालांकि पिछ्ली बार महाविकास अघाडी गठबंधन को ही जीत मिली थी। बाद में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को तोड़ कर भाजपा ने सरकार बना ली। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

    कौन है गद्दार ?

    हालांकि की शिवसैनकों को तोड़कर सरकार गिराने वाले एकनाथ शिंदे को गद्दार कहा जा रहा था। लेकिन भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया। दूसरी तरफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को तोड़कर आए अजित पवार को उप मुख्यमंत्री बना दिया। फिलहाल एक बार फिर महाविकास अघाडी गठबंधन में शामिल काग्रेस, शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट, समाजवादी पार्टी और अन्य सहयोगी दल महाराष्ट्र में सरकार बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। 23 नवंबर के बाद ही इसके परिणाम सामने आएंगे। (Maharashtra Assembly Election Traitors become selfish after joining BJP)

  • बांद्रा रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ 9 लोग हुए घायल

    बांद्रा रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ 9 लोग हुए घायल

    मुंबई के बांद्रा टर्मिनस पर ट्रेन पकड़ने के चक्कर में भगदड़ में 9 लोग घायल हो गए हैं। इस हादसे को लेकर उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना नेता संजय राउत ने रेल मंत्री को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मोदी सरकार पर भी सवाल उठाए है।

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई-
    बांद्रा टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर रविवार सुबह एक ट्रेन में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की के दौरान भगदड़ मच गई। इस भगदड़ के चलते 9 लोग घायल हो गए है। बांद्रा स्थित भाभा अस्पताल के डाक्टरों द्वारा दो लोगों की क्रिटिकल हालत बताई जा रही है। इस घटना को लेकर शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने भाजपा को जिम्मेदार ठहरा है। (Stampede at Mumbai Bandra Terminus Railway Station, 9 people injured)

    शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल के दौरान होने वाले रेल हादसों को याद करते हुए रेल मंत्री को घटना का जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही उन्होंने मोदी सरकार के दौरान बने रेल मंत्री पर सवाल करते हुए, उन्हें भी इस तरह के हादसे का जिम्मेदार ठहराया है।

    बुलेट ट्रेन की बात

    संजय राउत कहते, “जब से मोदी सरकार तीसरी बार सत्ता में आई है और रेल मंत्री को फिर से जिम्मेदारी सौंपी है, तब से देश में 25 से अधिक बड़ी रेल दुर्घटनाएं हुई हैं। जिनमें 100 से अधिक लोगों की जान गई है।” इसके साथ ही उन्होंने कहा, कि “आप बुलेट ट्रेन, मेट्रो और हाई-स्पीड ट्रेनों की बात करते हैं और नितिन गडकरी हवा में बसें चलाने की बात करते हैं। लेकिन, जमीन पर हकीकत क्या है? जिस तरह से यात्री घायल हुए, क्या इसके लिए रेल मंत्री जिम्मेदार नहीं हैं?” (Stampede at Mumbai Bandra Terminus Railway Station, 9 people injured)

    बांद्रा-गोरखपुर एक्सप्रेस की घतना

    बता दें कि रविवार की सुबह मुंबई में बांद्रा रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की के दौरान मची भगदड़ में 9 लोग घायल हो गए। बृहन्मुंबई महानगर पालिका के एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा, कि यह घटना बांद्रा टर्मिनस के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि गाड़ी संख्या 22921 बांद्रा-गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन पर चढ़ने के लिए यात्रियों की भारी भीड़ थी। घटना के बाद सभी घायलों को तुरंत भाभा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

    Mumbai Bandra Terminus Railway Station Accident news image
    Mumbai Bandra Terminus Railway Station Accident news image

    घायलों की पहचान ..

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायलों की पहचान 40 वर्षीय शबीर अब्दुल रहमान, 28;वर्षीय परमेश्वर सुखदर गुप्ता, 30 वर्षीय रवींद्र हरिहर चूमा, 29 वर्षीय रामसेवक रवींद्र प्रसाद प्रजापति, 27 वर्षीय संजय तिलकराम कांगे, 18 वर्षीय दिव्यांशु योगेंद्र यादव, 25 वर्षीय मोहम्मद शरीफ शेख, 19 वर्षीय इंद्रजीत सहानी और 18 वर्षीय नूर मोहम्मद शेख के रूप में की गयी है। इसमें नूर मोहम्मद और इंद्रजीत सहानी की हालत गंभीर बताई जा रही है। (Stampede at Mumbai Bandra Terminus Railway Station, 9 people injured)

  • Baba Siddiqui: मर्डर केस में 5 आरोपी और गिरफ्तार

    Baba Siddiqui: मर्डर केस में 5 आरोपी और गिरफ्तार

    Baba Siddiqui Murder case: बाबा सिद्दीकी मर्डर के सिलसिले में जांच कर रही मुंबई पुलिस को आज शुक्रवार एक बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने पनवेल में छापेमारी करते हुए 5 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कहते हैं कि गिरफ्तार आरोपियों का बिश्नोई गैंग से था संपर्क

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई-
    NCP के नेता बाबा सिद्दीकी मर्डर केस में मुंबई पुलिस लगातार जांच कर गिरफ्तारी कर रही है। पुलिस ने आज इस मामले में छापेमारी करते हुए 5 और लोगों को गिरफ्तार किए है। इसके साथ ही सिद्दीकी हत्याकांड में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर अब 9 हो गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि इस मर्डर केस में सभी के संपर्कों को खंगाला कर जांच की जा रही है। (Baba Siddiqui Murder Case Update)

    मुखबिर की सूचना पर हुई छापेमारी

    मुंबई पुलिस ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर आज शुक्रवार को रायगढ़ जिले के पनवेल इलाके में छापेमारी की गई। इस ऑपरेशन में मुंबई क्राइम ब्रांच के साथ पनवेल और कर्जत यूनिटों ने भाग लिया। जिन 5 आरोपियों को दबोचा गया है, उनके नाम 32 वर्षीय नितिन गौतम सप्रे डोंबिवली का रहने वाला, 44 वर्षीय संभाजी किशन पारबी अंबरनाथ का रहने वाला, 43 वर्षीय राम फूलचंद कन्नौजिया पनवेल का रहने वाला, 37 वर्षीय प्रदीप तोंबर अंबरनाथ का रहने वाला और 33 वर्षीय चेतन दिलीप पारधी अंबरनाथ का रहने वाला बताया जा रहा है। (Baba Siddiqui Murder Case Update)

    हथियार पहुंचाने का आरोप

    पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नितिन और राम कनौजिया बाबा सिद्दीकी ह्त्या कांड के गिरफ्तार सभी आरोपियों के मुखिया थे। इसी ग्रुप ने गोली चलाने वाले आरोपियों को हथियार पहुंचाए थे। पुलिस की तरफ से ऐसा बताया गया है कि ये दोनों, शूटर धर्मराज कश्यप और शिवकुमार के साथ भी टच में थे। कर्जत में आरोपियों के साथ 2 महीने तक रहे भी थे। इन्होंने आरोपियों को पैसे और लोकल मदद दिलवाने में मदद कराई थी। (Baba Siddiqui Murder Case Update)

    संपर्क और अपराध का खुलासा

    सूत्रों का कहना है कि पकड़े गए पांचों आरोपी जीशान अख्तर और शुभम लोनकर के टच में भी थे। गिरफ्तार किए गए आरोपी नितिन के खिलाफ इस केस के अलावा और भी 3 अपराधिक मामले दर्ज है। इसके खिलाफ मर्डर, हाफ मर्डर, और आर्म्स एक्ट शामिल हैं। वहीं राम कुमार पर भी कुछ आरोप दर्ज हैं। इन लोगों ने सितंबर के आसपास आरोपियों को हथियार सप्लाई किए थे। जिसके बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के मेन शूटर्स ने कई दिन की रेकी करने के बाद हत्याकांड को अंजाम दे दिया। (Baba Siddiqui Murder Case Update)

  • Maharashtra Election : महायुती में महासंग्राम? गरमाया वोट जिहाद

    Maharashtra Election : महायुती में महासंग्राम? गरमाया वोट जिहाद

    Maharashtra Election : महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी पारा गरमाया गया है। एक ओर जहां सीट शेयरिंग को लेकर सत्ता पक्ष की महायुती के दोनों खेमों में बातचीत चल रही है। वहीं अब वोट जिहाद वाले देवेंद्र फडणवीस के बयान के मद्देनजर महायुती में खटपट की आहट सुनाई दे रही है।

    नितिन तोरस्कर (मंत्रालय प्रतिनिधि)
    मुंबई-
    महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। साल के आखिर में होने वाले चुनाव से पहले ही सत्ता पक्ष की महायुती सरकार में खटपट की आहट सुनाई दे रही है। वोट जिहाद के बयान पर महायुती में आपसी मतभेद की लकीरें खिंचती दिख रही हैं। देवेंद्र फडणवीस के वोट जिहाद वाले बयान से सियासी पारा ऐसा चढ़ा कि विरोधी तो हमला कर ही रहे हैं। अब अपने भी पवार बंधू तेवर दिखा रहे हैं। महायुती में जहां भाजपा वोट जिहाद की बात कर रही है, वहीं अजित पवार वाली राष्ट्रपति कांग्रेस पार्टी (NCP) मुस्लिमों को टिकट देने की बात कह रही है। इसे लेकर अब महायुती पर विरोधी भी हमलावर हो रहे हैं। महायुति में भाजपा, एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना और अजित पवार वाली एनसीपी शामिल है।

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    वोट जिहाद का बवाल…

    महाराष्ट्र में वोट जिहाद का विवाद कहां से उत्पन्न हुआ? वोट जिहाद वाले बयान से ही महायुती में विवाद की खबरों को बल मिल रहा है। भाजपा नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणसीव ने लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए वोट जिहाद को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से 14 सीटों पर ‘वोट जिहाद’ देखा गया।’ कोल्हापुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया कि एक विशेष समुदाय के लोगों ने हिंदुत्व उम्मीदवारों को हराने के लिए सामूहिक रूप से मतदान किया। 14 निर्वाचन क्षेत्रों में वोट जिहाद का पैटर्न देखा गया। हालांकि, उन्होंने किसी शख्स या समुदाय का नाम नहीं लिया। लेकिन इस बयान के बाद से महाराष्ट्र के राजनीतिक गरमा गई है।

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    अजित पवार की राजनीति

    देवेंद्र फडणवीस के इसी बयान पर महाराष्ट्र की सियासत में बवाल मचा है। वोट जिहाद वाले बयान के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने एक ऐसा ऐलान किया, जिसके बाद से महायुती में खटपट की खबरों को बल मिल रहा है। बीजेपी के नेता देवेंद्र फडणवीस के वोट जिहाद वाले बयान के बाद उनकी सहयोगी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता अजीत पवार ने कहा कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में अपने खाते की सीटों में से 10 प्रतिशत सीटें मुस्लिम उम्मीदवारों को देगी। अजित पवार ने कहा, कि ‘हमें नया समाज बनाना है। आने वाले विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की तरफ से माइनॉरिटी को 10 फीसदी सीट देंगे।’ ऐसा उन्होंने ऐलान किया।

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    विपक्ष को मिला मौका

    देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के बयान को अब मतभेद के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी पार्टियों ने इसे सियासी कैच के तौर पर लपक लिया है और अब महायुति में महासंग्राम का दावा कर रहे हैं। उद्धव गुट के शिवसेना नेता आनंद दुबे ने कहा, कि ‘इस समय महयुती में नूरा कुश्ती चल रही है। देवेंद्र फडणवीस जैसे बड़े नेता बोलते हैं कि वोट जिहाद हुआ है। मुसलमानों पर टिप्पणी करते हैं। वहीं दूसरी तरफ उनके साथी अजीत पवार बोलते हैं कि वो चुनाव में मुस्लिमों को 10 प्रतिशत टिकट देंगे। ये लोग देश की जनता को गुमराह कर रहे हैं। लोगों को बाट रहे हैं। इनको पता चल गया है कि इनकी सरकार जा रही है। इसलिए यह सब बयानबाजी हो रही है। यह सब प्लानिंग कर रहे हैं। लेकिन विधान सभा चुनाव में इनकी प्लानिंग कुछ काम नहीं आने वाली है।

    मोदी सरकार जवाबदेही से भागती है।

    गुजरातियों का वोट जिहाद ..

    उद्धव ठाकरे गुट शिवसेना के नेता संजय राउत ने भी देवेंद्र फडणवीस के बयान को लेकर हमला बोला है। उन्होंने पूछा है, कि ‘क्या होता है वोट जिहाद? हिंदू, मुस्लिम, जैन, पारसी सभी इस देश के नागरिक हैं। अगर आपको वोट करता है तो चलता है। अगर वो जिहाद है तो आप लोग मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक कानून क्यों लाए? आपको और बाकी समाज के लोग वोट देते हैं, तो उन्हें क्या कहेंगे, महाराष्ट्र में गुजरात के लोग बीजेपी को वोट देते हैं तो क्या उसे गुजरातियों का वोट जिहाद कहेंगे? भाजपा के लोग इस देश को फिर एक बार तोड़ना चाहते है, लेकिन ये गांधी का देश है।’

  • भारत से अलग हुए बांग्लादेश की क्या है कहानी ?

    भारत से अलग हुए बांग्लादेश की क्या है कहानी ?

    भारत का पड़ोसी बना बांग्लादेश 1971 में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत से अलग करके बांग्लादेश बनाया। भारत के कई राज्य को मिलाकर बांगलादेश की स्थापना।

    The world History (न्यूज़ डेस्क)
    भारत-
    पाकिस्तान और बांग्लादेश का एक अजब कहानी है जो धर्म के नाम पर दोनों देश बने। भारत देश से हिंदू और मुस्लिम के नाम पर बांग्लादेश और पाकिस्तान को बनाया गया था।
    1947 में पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू और जिन्ना की मिलीभगत से दो देश बनाए गए थे। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के दो अलग-अलग प्रधानमंत्री हो सकें। 1947 में भारत और पाकिस्तान अलग होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू भारत के प्रधानमंत्री बने और जिन्ना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने से पहले, उनकी मृत्यु हो गई।

    The world History

    16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान की सेना के भारत के सामने आत्मसमर्पण करने के साथ ही ये संघर्ष खत्म हुआ। 16 दिसंबर को बांग्लादेश में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली तो इसके दो टुकड़े भी हुए। मोहम्मद अली जिन्ना की मांग के मुताबिक मुस्लिम बहुल आबादी के लिए अलग राष्ट्र पाकिस्तान बना
    1947 के समय में भी बंगाल राज्य में मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा बंगाल खाड़ी स्थित कई गांवों को मिलाकर अलग से बंगाल देश बनाने की मांग की थी मगर उस समय बंगाल भारत का राज्य हुआ करता था।

    भारत के बंगाल राज्य को अलग करने के लिए बांग्लादेशी कट्टरपंथियों ने भी मांग उठाई। उस समय मांग में कहा जा रहा था, कि जिस राज्य में ज्यादा मुसलमान है उसे मुस्लिम देश घोषित कर देना चाहिए। उसी समय भारत और पाकिस्तान का बटवारा हुआ था। उसके कुछ साल बाद 1971 में इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश को एक अलग देश बना दिया।

    बांग्लादेश भारत से अलग क्यों हुआ?

    बांग्लादेश का स्वतंत्रता संग्राम 1971 में हुआ था। इसे ‘मुक्ति संग्राम’ भी कहते हैं। यह युद्ध वर्ष 1971 में 25 मार्च से 16 दिसम्बर तक चला था। इस रक्तरंजित युद्ध के माध्यम सेे बांलादेश ने पाकिस्तान से स्वाधीनता प्राप्त की। 16 दिसम्बर सन् 1971 को बांग्लादेश बना।

    पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश बनने के बाद बांग्लादेश को भारत से आर्थिक मदद भी दे रही थी। भारत में आम जनता से पैसे की टैक्स वसूली करके बांग्लादेश को इंदिरा गांधी मदद करती रही जो आज भी मदद किया जा रहा है।

    बांग्लादेश के कट्टरपंथी की क्या देन हैं?

    1971 में भारत और बांग्लादेश बनने के बाद में लाखों हिंदू बांग्लादेश से भारत चले आए। कुछ हिंदू वहां पर रह गए थे जिन्होंने अपना जमीन घर मकान नहीं छोड़ा उसी बांग्लादेश में रह गए।

    बांग्लादेश बनने के बाद वहां सबसे ज्यादा माफियागिरी, गुंडागर्दी होता रहा। वहां के रह रहे हिंदुओं को हमेशा धर्म बदलने की हेतु धमकी देना मारपीट करना यही बांग्लादेशियों का कारण रहा है। वहां की आम जनता में इसी प्रकार से उतार-चढ़ाव चल रहा हैं।

    5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में क्या हुआ?

    5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी इस्तीफा दे दी उसके बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़क उठा मिडिया ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक कई मासूम लोगों की हत्याऐं हुई। उसमें सबसे ज्यादा हिंदुओं को मारा गया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी नेता भी मारे गए। उसके बाद बांग्लादेश में काफी हिंसा भड़क गई लगभग 240 लोग मारे गए।

    बांग्लादेश के राजधानी ढाका में क्या हुआ?

    बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफा देने के बाद उनके कार्यालय को जला दिया गया। तोड़फोड़ किया गया। शेख हसीना वहां से कैसे भी भाग कर भारत में अपनी प्राण बचाई ली है। बांग्लादेशी कट्टर उग्रवादी आतंकवादियों ने पूरे बांग्लादेश के सैकड़ो, हजारों हिंदुओं की दुकान जला दिए, लूट लिया। सैकड़ो हिंदू महिलाओं की हत्या करना मौलाना की धमकी हिंदू देश छोड़े याँ इस्लाम धर्म अपना लें। कट्टरपंथी बांग्लादेशियों ने हिंदुओं को धमकी दे रहे हैं। आज भी बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की हाहाकार और आगजनी जैसी हालत है। बांग्लादेश कट्टरपंथी आतंकवादियों के विरोध में बांग्लादेश की कट्टरपंथियों पर सख्त कार्रवाई के लिए अब तक दुनिया के किसी भी देश ने कोई कदम नहीं उठाया।

    भारत बांग्लादेश बटवारे में शेख हसीना के पिता..

    बांग्लादेश में कट्टरपंथी विचार धारा पूर्व व प्रथम राष्ट्रपति शेख मुजीबर रहमान की देन है। शेख हसीना के पिता मुजीबर रहमान ने 1971 में पूर्व इंदिरा गांधी से मिलकर बांग्लादेश का स्थापना किया था। आज शेख हसीना उसी कदम पर अपने स्वार्थ के लिए राजनैतिक बदलाव करते हुए विरोध का शिकार हुई है। इस समय बांगलादेश के लोग प्रधानमंत्री शेख हसीना को मारने के लिए गली गली ढूंढ रहे हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद शेख हसीना अपनी प्राण बचाने के लिए भारत में शरण ले रखी है।

    The world History

    शेख हसीना के पिता कट्टरपंथी थे। आज वही कट्टरपंथी लोगों ने शेख हसीना को मार भगाया। जैसा को तैसा। शेख हसीना के पिता भारत से विद्रोह करके भारत से अलग होकर बांग्लादेश बनाया था और आज वही कट्टरपंथी बने वहां के लोगों ने आज उसी की बेटी को मार भगाया। बांग्लादेश भारत की जमीन है। मगर बांग्लादेश में रह रहे कट्टरपंथी वह उनकी सोच है मगर भारत की संपत्ति थी। और आज वही कट्टरपंथी सोच बांग्लादेश के और भी लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है।

    लोगों पर अन्याय कर रहे हैं, बलात्कार कर रहे हैं, दुकान लूट रहे हैं, घर लूट रहे हैं।

    पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने पाकिस्तान बनाया। नेहरू की बेटी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश बनाया। कट्टरपंथियों के कारण दो देश बने जो धर्म का नाम हिंदू और मुस्लिम देश। मगर इतिहास यही रही है, कि इतिहास के सच्चाई को कोई बताते नहीं हैं। शेख हसीना के पिता बांग्लादेश का प्रथम पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबर रहमान व भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा भारत अलग बांग्लादेश बनाया गया था। अब आज बांग्लादेश में उन्हीं कट्टरपंथियों की देन है जो आज कट्टरपंथी बांग्लादेश को जला रहे हैं। लोगों पर अन्याय कर रहे हैं, बलात्कार कर रहे हैं, दुकान लूट रहे हैं, घर लूट रहे हैं। किसी भी देश का धर्म, जाति या समाज के नाम पर कट्टरपंथी चरम सीमा पर पहुँच जाए, तो उसका खात्मा किया जाना चाहिए ना कि देश छोड़ कर भाग जाना चाहिए।

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  • कैसे होंगे देश के सांसद ..? Election 2024

    कैसे होंगे देश के सांसद ..? Election 2024

    • ए.डी.आर. की रिपोर्ट…!
    • कैसी राजनीति बना दी गयी है भारत की..!
    • अधिकांश विधायक और सांसद अपराधी प्रवृत्ति के…!
    • दुर्भाग्य ही है यह..! कौन कहेगा भारत…

    सुरेंद्र राजभर/ मंसूर शेख
    मुंबई-
    ए.डी.आर. की रिपोर्ट पढ़ने पर सिंगापुर के प्रधानमंत्री का संसद में दिया गया भाषण अक्षरशः सत्य प्रमाणित होता है। उन्होंने कहा था, नेहरू के देश में संसद अपराधियों का गढ़ बन गया है। कैसी राजनीति बना दी गई है भारत की जिसमें अधिकांश विधायक और सांसद अपराधी प्रवृत्ति के होते चले आ रहे हैं। देश का दुर्भाग्य ही है यह। कौन कहेगा भारत राम, कृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर जैन और सिख गुरुओं का है? कौन कहेगा संतों, ऋषियों, महर्षियों, ज्ञानियों, विज्ञानियों का देश है यह भारत? स्वार्थलिप सत्तासुख भोग करने, देश को लूटने वाले राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल अपराधियों को टिकट देंगे। कौन कह सकता है यह वही देश है जहां वेद, शास्त्र, उपनिषद, पुराण लिखे गए? कौन कहेगा कि दुनिया को अशिक्षा के अंधकार से निकालने के लिए ज्ञान विज्ञान का परिचय देने वाला देश है भारत? कौन कहेगा कि यही वह पवित्र भारत की भूमि है जहां गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन का व्यामोह दूर कर कर्तव्य पथ पर लाने के लिए ज्ञान दिया था? कौन कहेगा कि आज का भारत ही सीता, सावित्री, अनुसूया, गार्गी जैसी सती नारियों का देश है? कौन कहेगा आजादी के लिए आंदोलन करने वाले सत्य, अहिंसा के पुजारी गांधी जैसे महात्मा का यह देश है? कौन कहेगा यह अमर क्रांतिकारियों सुभाषचंद्र बोस, शहीदे आजम भगत सिंह, लाहिरी, चंद्रशेखर आजाद, रोशन सिंह, असफाक उलाह खान और सरहदी गांधी का यह देश है? कौन कहेगा रामायण के अमर गायक महर्षि बाल्मीकि, रामचरित मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदास, रघुवंशम महाकाव्य के महाकवि कालीदास, मीरा, सुर जायसी, कबीर, रहीम, संत ज्ञानेश्वर, तुकाराम की धरती है यह? कौन कहेगा आजादी की मशाल जलाने वाले, अंग्रेज की छाती में बंदूक की गोलियां उतारने वाले मंगल पांडेय का भारत है यह? कौन कहेगा गुरूदेव रवींद्र नाथ टैगोर और वंदे मातरम के गायक बंकिम चंद्र की तपोभूमि है भारत?

    शर्म आती है आधुनिक राजनीति में…!

    आधुनिक राजनीति में अपराधियों के राजनीतीकरण करने पर शर्म आती है। उन्हें माननीय बनाने पर, कोफ्त होती है देश की नासमझ जनता की सोच पर जो सच्चे और झूठे, साधु और शैतान, सज्जन और दुर्जन में अंतर न कर पाने की मूढ़ स्थिति पर। कौन कहता है भारत का लोकतंत्र परिपक्व हो चुका है? देश की जनता जागरूक हो चुकी है? वह अपना हित अहित सोच ही नहीं सकती!

    गलती जनता की है जो मुट्ठीभर अन्न और चंद सिक्कों के बदले अपना अमूल्य वोट बेच देती है…! अनपढ़ जनता भेड़ की तरह झुंड, विवेकहीन होती है। तभी अपात्र नेता चुनती और भोगती है। दरअसल पार्टियों में इतना अधिक सत्तामोह है कि कोई भी दागी प्रत्याशी को खड़ा करने में परहेज नहीं करता। ऐसे में जनता का दायित्व है दलबदलु अपराधी और धनवान लोगों को वोट ही न दें।

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    ए डी आर की रिपोर्ट..

    पहले फेज का चुनाव 19 अप्रैल को है जिसमें 19 राज्यों के 102 सीटों पर चुनाव होंगे।
    ए डी आर की रिपोर्ट के अनुसार कुल 102 सीटों के लिए 1618 उम्मीदवार खड़े हैं। जिनमें 16% यानी 252 प्रत्याशियों पर गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं। जिसमें हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे संगीन मामले हैं। 19 ऐसे हैं जिन पर हत्या की कोशिश। 15 पर महिलाओं के साथ रेप और 35 पर भड़काऊ भाषण देकर देश में दंगे फैलाने की कोशिश के मामले दर्ज हैं। अपराधी मानसिकता के लोगों को टिकट देने में कोई भी दल पीछे नहीं है। क्योंकि उनकी जीत 200% पक्की मानी जाती है। जिनमे ए आई डी एम के ने 36% , बी एस पी ने 13% , आर एल डी ने 100% , टी एम सी ने 40% , कांग्रेस ने 34% , डी एम के ने 59% , एस पी ने 43% , बी जे पी ने 36% अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को टिकट दिए हैं। ऐसे कुल केवल एक फेज में 1625 लोग हैं जिनमें 28% धनवान भी शामिल हैं। 10% लोगों पर गंभीर अपराध, और 42 सीटें तो ऐसी हैं जहां तीन और इससे अधिक दागी उम्मीदवार खड़े हैं। 7 हत्या के मामले 19 हत्या की कोशिश और 15 तो ऐसे हैं जिन्हें कोर्ट दोषी करार दे चुका है।

    सांसद,

    याद हो कि सुप्रीमकोर्ट ने दागी या आपराधिक मामलों में लिप्त उम्मीदवार बनाए जाने पर रोक लगाने के लिए संसद से कानून बनाने को कहा था, लेकिन सत्ता लोलूप दलों ने कानून नहीं बनाया। जनता को सोचना और निर्णय करना होगा कि पहले फेज में जब इतने अपराधी उम्मीदवार खड़े हैं तो शेष छः में कितने होंगे और अगर ये चुनकर सांसद के तौर पर संसद में पहुंचे तो कैसा और किसके भले का कानून बनाएंगे? याद रहे कि अपराधी और धनवान जनता की समस्याओं पर सरकार से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें डर लगता रहेगा कि सवाल पूछा तो एन आई ए, आई टी, सी बी आई और ई डी जैसी सरकारी एजेंसियां उनके पीछे लगा दी जाएगी। जिससे उनकी काली कमाई का कच्चा चिट्ठा खुल जायेगा और वे संसद की जगह जेल में होंगे।

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    कैसे करें जनता अपने सांसद का चयन ?

    इन्हीं अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के माननीय बनने से ही उनसे संबंधित गुर्गों सहित लाखों केस कोर्ट में पेंडिंग पड़े रहते हैं। जिसमें दोष न्यायालयों का दिया जाता है। कारण चुनाव जीत कर वह जनता का प्रतिनिधित्व करने वाला माननीय सांसद बन चुका होगा।
    आप लोगों से हम कहना चाहते हैं, कि “हे जनता जनार्दन अपना और अपने देश का भविष्य तुम्हें अपने एक वोट से लिखना है। ऐसे दागी और धनवान लोग ही नहीं दलबदलुओं की जमानत जब्त कराकर उन्हें उनकी सही जगह जेल में भेजें। इसी में जनता और राष्ट्र का भला होगा।”

  • इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल।

    इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल।

    • इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल सामने आते शुरू हुआ देश में राजनैतिक भूचाल।
    • कौन से दल ने कितना किया झोल?
    • रिपोर्ट अभी और बाकी है..
    • Electoral Bond Indian Government Political News

    सुरेन्द्र राय
    मुंबई-
    हम भारतीय अपने जहन में कई वर्षो से लगातार एक जटिल समस्या का हल ढूंढ रहे है और वह जटिल समस्या यह है, कि इंसान अंततः भ्रस्ट क्यों हो रहा है? जबकि हमारे भारतीय समाज में भ्रस्टाचार के वर्चस्व का एक नया स्तंभ स्थापित हो चुका है और हमने इसमें ज्ञान, दौलत और हिंसा की एक ऐसी मिसाल इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे को खड़ी कर दी है, जो भ्रस्टाचार और सत्ता के मध्य अटुट और अतरंग संबंध स्थापित करती नजर आ रही है।

    हालांकि यह सत्ता विमर्श एक गंभीर जिरह की मांग करता है, जो सामाजिक विकास कार्य में अवरुद्ध करने वाला घटक के रूप में साबित हो रहा है, जो एक भ्रस्ट आचरण की पहचान है। जिसकी हमें घोर निंदा की जानी चाहिए।
    अब ऐसे में पिछले पांच वर्षों में कंपनियों ने अपने फ़ायदे के लिए सरकार को इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए कितना पैसा दिया यह पूरी तरह से अभी खुला नहीं है। घाघ लोगों का खुलासा एस बी आई ने नहीं किया। पांच वर्षों में किस कंपनी ने कितना चंदा दिया?

    Indian Fasttrack Political News

    ‘बिजनेस टाइम्स’ मैगज़ीन में छपी खबर के अनुसार भारती एयरटेल में 241 करोड़, तता स्टील ने 175 करोड़, एल एन्ड टी ने 85 करोड़, महेंद्रा एन्ड महिंद्रा ने 39 करोड़, अल्ट्राटेक सीमेंट ने 23 करोड़, बजाज फाईनैंस ने 20 करोड़, मारुति सुज़ुकी ने 20 करोड़, टेक एम ने 15 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे। बीजेपी को पिछले दो वर्षों में यानी 2019 में 216.9 करोड़, 2023/24 में 296.12 करोड़ मिले। जबकि कांग्रेस को 2019 में मात्र 15.85 करोड़ और 2023/24 में 81.1 करोड़ मिले। इसके साथ ही दूसरे दलों को 2019 में 4.55 करोड़ और 2023/24 में 33 करोड़ मिले।

    किसने कितने खरीदे इलेक्टोरल बॉन्ड ?

    पिछले पांच साल इलेक्टोरल बॉन्ड में कितने पैसे मिले हैं इसपर नज़र डालें तो पता चलता है, कि 2019 में 237 करोड़ , 2020 में 46 करोड़, 2021 में 40 करोड़ रुपए मिले। जबकि 2022 में 563 करोड़ और 2023 में 347 करोड़ के साथ दो वर्षों का भारी उछाल देखने को मिला। 2024 में सिर्फ 65 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए।

    इलेक्टोरल बॉन्ड,

    कांग्रेस के चारों एकाउंट आई टी ने फ्रीज किए हैं। इसलिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा गैरकानूनी गैरसंवैधानिक बताए जाने पर बीजेपी के भी खाते सीज करने की मांग की ज़ा रही है। यही न्याय का तकाज़ा भी है।
    प्रकाशित खबर के मुताबिक, फ्यूचर जेमिंग कंपनी द्वारा 149 करोड़ 2020 में, 324 करोड़ 2021 में, 440 करोड़ 2022 में, 321 करोड़ 2023 में और 2024 में 63 करोड़ क्षेत्रीय दलो जिसमें डी एम के, टी एम सी, वाई एस आर कांग्रेस और अन्य को दिए।

    Electoral Bond News

    जबकि 2019 में बीजेपी को 125 करोड़ 2021 में, 33 करोड़ 2022 में, 129 करोड़ और 2023 में, 297 करोड़ रुपये मेघा इंजीनियरिंग ने दिए। क्विक ने भाजपा को 325 करोड़ 2022 में, शिवसेना को 25 करोड़, 2023 में बीजेपी को 50 करोड़ दिए।
    इसके साथ ही लिस्टेड कंपनियों से बीजेपी को 2019 और 2023/24 में 216.9 करोड़ और 298.12 करोड़ रुपए मिले, जबकि कांग्रेस को 15.85 और 81.1 करोड़, अन्य दलों को 4.55 और 33 करोड़ मिले।

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    टॉप 10 डोनर्स के 9.6 करोड़ मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गए। जिनमे फ्यूचर जेमिंग के 3, ई सी एल के 2, पैसिफिया इंडिया के 1.25, सिलवेनस बिल्डर के 1, सी मेकर्तिच के 0.4, वेदांता लिमिटेड के 0.3, सुधा कमर्शियल के 0.3, जुपिटर के 0.25, उत्कल अलमुनियम के 0.2 करोड़ रुपए का इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गया। अकेले जालान ग्रुप की कंपनी केवेंटर फूडपार्क ने बीजेपी को 144.5, कांग्रेस को 20, अकाली दल को 0.5, यस पी को 10, टी एम सी को 20 करोड़ रुपये दिए।

    जबकि मदनलाल लिमिटेड ने बीजेपी को एकमुश्त 175 करोड़, कांग्रेस को 10 करोड़ और एम के जे ने कांग्रेस को 69.35, आप को 7, टी एम सी को 18.5, बी आर एस को 10, बीजेपी को 12.5, और बी जे डी को 10 करोड़ रुपए दिए। इसके साथ ही एम के जे ने कांग्रेस को 22.25, टी एम सी को 27.4, बीजेपी को 14.07 करोड़ दिए। सस्मल इंफ्रास्ट्रक्चर ने कांग्रेस को 39 करोड़ और बीजेपी को 5 करोड़ दिए।

  • ठंडे पड़ गये हैं भारतीय जनता पार्टी के नेता

    ठंडे पड़ गये हैं भारतीय जनता पार्टी के नेता

    • भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनावी समर भूमि में ठंडे पड़ गए हैं..
    • बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में पार्टी की नीतियों का हो रहा है खामियाजा..

    सुरेंद्र राय
    मुंबई-
    बड़ा शोर है भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार का लेकिन मोदी को छोड़कर एक भी चुनावी समर भूमि में सक्रिय नेता नहीं है। सबसे बड़ी 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनाव प्रचार में दूर दूर तक नजर नहीं आते। सबसे बड़ा हिंदुत्व चेहरा हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। जिनकी देश में बड़ी मांग है, लेकिन मोदी की तरह वे कहीं भी चुनावी मूड में नहीं दिखते।

    भारतीय जनता पार्टी का युपी में चुनाव प्रचार

    दो दो डिप्टी सीएम हैं जो अपनी खोल से अभी बाहर ही नहीं निकल सके हैं। प्रांतीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी भी कहीं नमूदार नहीं हो रहे। बड़े जोर शोर से ढिंढोरा पिटा गया था, चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी का। उन्हें गाजे बाजे के साथ भारतीय जनता पार्टी में लाया गया। यह सोचकर कि उनके दादा चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर पश्चिमी यूपी की सारी सीटें बिना प्रचार किए भारतीय जनता पार्टी की झोली में आ गिरेंगी। परंतु अभी भी जयंत चौधरी पशोपेश में हैं। किसान बिरादरी उनके बीजेपी में जाने पर उनसे दूरी बना ली है। अब वे किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की तरह किसानों के नेता नहीं रह गए हैं। बिना संख्या बल के वे भारतीय जनता पार्टी को कितनी सीटें दिलाएंगे खुद समझ नहीं पा रहे। चुनाव प्रचार तो बड़ी दूर की कौड़ी है उनके लिए। हालत यह हो गई है, “आधी छोड़ सारी को धावे। आधी मिले न सारी पावे।”

    Election 2024

    तुरूप का इक्का ..

    भारतीय जनता पार्टी के साथी अनुप्रिया पटेल और बड़बोले अस्तित्वहीन ओमप्रकाश राजभर जिनकी अमित शाह ने उत्तर प्रदेश सरकार में ताजपोशी कराई है। छवि बेहद खराब होने से जनता उनसे कन्नी काटने लगी है। मेनका गांधी और संतोष गंगवार यूपी के आठ आठ बार सांसद रहे हैं। लेकिन उनके टिकट ही पक्के नहीं हुए हैं। करें भी तो क्या? टिकट मिलेगा या नहीं? कहा भी नहीं जा सकता। तुरूप का इक्का होने से रहे।

    भारतीय जनता पार्टी,

    बिहार की संसदीय गठबंधन ..

    सांसदों के लिहाज से बिहार में 40 सीटें होने से बिहार का बड़ा महत्त्व है। वहां गठबंधन तुड़ाकर नीतीश कुमार को भारतीय जनता पार्टी अपने पाले में भले ले आई है लेकिन जनता में उनकी पलटू चाचा की छवि बनने से उनकी खुद की छवि को बड़ा धक्का लगा है। जनता में उनकी पूछ नहीं रही। सुशील मोदी ज़रूर बड़ा चेहरा बने थे, लेकिन वे कहीं चुनाव प्रचार करते नहीं दिखते। राजीव प्रसाद रूडी का कहीं अता पता नहीं है। हरदम मोदी नाम की माला जपने और विपक्षी दलों को बुरा भला कहने वाले रवि शंकर प्रसाद नदारत हैं। उनके अलावा सम्राट चौधरी, गिरिराज सिंह और चौबे सांसद रहे हैं। बड़बोले भी लेकिन चुनाव प्रचार में वे दोनो दूर दूर तक नजर नहीं आते। गिरिराज सिंह का हाल यह है, कि उनकी भारतीय जनता पार्टी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुर्दाबाद के नारे लगाए और काले झंडे दिखाकर उन्हें क्षेत्र में आने ही नहीं दिया।

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    महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार ..

    सीट के लिहाज से महाराष्ट्र 48 सीटों वाला बड़ा महत्त्वपूर्ण राज्य है। यहां के सबसे बड़े नेता हैं नितिन गडकरी जो भारतीय जनता पार्टी की नीतियों के धुर विरोधी रहे हैं। मुमकिन नहीं कि वे चुनाव प्रचार करेंगे। शिवसेना और राकांपा तोड़कर शिंदे और अजीत पवार के साथी छगन भुजबल, पटेल आदि पर खुद भारतीय जनता पार्टी ने हजारों करोड़ के घोटाले का मामला उठाकर उन्हें अपने साथ लाकर सरकार तो बना ली लेकिन महाराष्ट्र की जनता उन्हें गद्दार कहकर नफरत करती है। कुछ समय बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। उस चुनाव को याद कर ही सिहरने वाले ये नेता चुनाव प्रचार की हिम्मत भला कैसे दिखाएंगे? अपने ही बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री का कद छोटा कर डिप्टी सी एम बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी उनसे चुनाव में कोई उम्मीद कैसे कर सकती है।