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  • कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार, जानिए पूरा मामला और अब आगे क्या होगा ?

    मुंबई: कांदिवली पूर्व के पोईसर इलाके में हफ्ता वसूली और मारपीट के आरोप में मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। समता नगर पुलिस के मुताबिक, यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा और उसकी कथित टोली के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी MCOCA के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी यमेश दरेकर अभी फरार बताया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला 15 जून 2026 की रात करीब 12:30 बजे पोईसर, कांदिवली पूर्व में हुई एक गंभीर मारपीट की घटना से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, फिर्यादी ए.बी.के. ने कथित तौर पर हफ्ता नहीं दिया था। इसी बात को लेकर आरोपियों ने उसके कपड़े उतारकर गालीगलौज की और लोहे की रॉड, लकड़ी के स्टंप और लात-मुक्कों से मारपीट की।

    आरोप है कि यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा ने फिर्यादी को जान से मारने की धमकी भी दी और उसके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया। इस हमले में उसे गंभीर चोटें आईं। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद भी आरोपियों ने इलाज के लिए जमा हुए नागरिकों को धमकाते हुए जान से मारने की धमकी दी।

    घटना के बाद समता नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, इस केस में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम की धाराओं के तहत भी कार्रवाई की गई है।

    दो आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी की तलाश जारी

    इस मामले में रोहित कृष्णप्रताप सिंह, उम्र 33 वर्ष और सागर अनिल राठोड, उम्र 22 वर्ष को 15 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायालयीन हिरासत में हैं।

    पुलिस के मुताबिक, मामले का मुख्य आरोपी यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा अभी फरार है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।

    यमेश दरेकर के खिलाफ पहले से 37 गंभीर मामले

    पुलिस के मुताबिक यमेश दरेकर को गंभीर अपराधों में शामिल आरोपी बताया जा रहा है। समता नगर पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ कुल 37 मामले दर्ज हैं।

    इन मामलों में हत्या की कोशिश, जान से मारने की धमकी, जबरन चोरी, घातक हथियार का डर दिखाकर चोरी, गली गलौज और मारपीट, विनयभंग, गंभीर चोट पहुंचाना, आपराधिक षड्यंत्र, घर में अतिक्रमण और दूसरे गंभीर अपराधों का उल्लेख है।

    पुलिस के अनुसार, यमेश दरेकर के खिलाफ इससे पहले समता नगर पुलिस स्टेशन के माध्यम से दो बार MPDA के तहत स्थानबद्ध करने और दो बार तडीपारी की कार्रवाई भी की जा चुकी है।

    रोहित सिंह और सागर राठोड पर भी गंभीर मामले

    पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी रोहित कृष्णप्रताप सिंह भी यमेश दरेकर की कथित टोली का सदस्य है। उसके खिलाफ समता नगर पुलिस स्टेशन में कुल 13 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इनमें जबरन चोरी, गालीगलौज और मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाना, जान से मारने की धमकी और घर में अतिक्रमण जैसे अपराधों का उल्लेख है।

    दूसरा आरोपी सागर अनिल राठोड भी इसी कथित टोली का सदस्य बताया गया है। उसके खिलाफ दो मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस ने बताया, कि साल 2023 में उसके खिलाफ BNS की संबंधित धारा के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई थी।

    MCOCA की कार्रवाई क्यों हुई?

    पुलिस के मुताबिक, यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली अलग-अलग गंभीर अपराधों के जरिए इलाके में दहशत और वर्चस्व कायम कर आर्थिक फायदा हासिल करने की कोशिश कर रही थी। इसी आधार पर पुलिस ने इस मामले को संगठित अपराध की दिशा में देखा।

    पुलिस उपायुक्त, परिमंडल-03, मुंबई गजानन शिवलिंग राजमाने के मार्गदर्शन में MCOCA के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया गया। यह प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजा गया, जिसके बाद संबंधित मंजूरी मिलने पर यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली के खिलाफ MCOCA के तहत कार्रवाई की गई।

    मामले की आगे की जांच सहायक पुलिस आयुक्त कैलास बर्वे कर रहे हैं।

    MCOCA लगने के बाद अब क्या होगा?

    MCOCA के तहत कार्रवाई होना इस मामले में एक गंभीर कानूनी कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं। अब मामले में पुलिस की आगे की जांच, जरूरी कानूनी प्रक्रिया और अदालत में होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।

    मुख्य आरोपी यमेश दरेकर अभी फरार है, इसलिए पुलिस के सामने उसकी गिरफ्तारी भी एक अहम कदम है। वहीं गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों और मौजूदा केस में उनकी कथित भूमिका की जांच आगे जारी रहेगी।

    पोईसर-कांदिवली के लोगों के लिए यह मामला क्यों अहम है?

    हफ्ता वसूली का आरोप सिर्फ एक व्यक्ति से पैसे मांगने तक सीमित नहीं रहता। अगर किसी इलाके में धमकी, मारपीट और दबाव का माहौल बनता है तो इसका असर आम लोगों, छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, ठेलेवालों और दूसरे स्थानीय लोगों की सुरक्षा की भावना पर पड़ सकता है।

    मुंबई में 2025 के दौरान extortion के 314 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में 199 मामले दर्ज हुए थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में सिर्फ पारंपरिक organised gang extortion ही शामिल नहीं था; sextortion और local goons द्वारा builders, contractors और hawkers से protection money मांगने जैसे मामले भी सामने आए थे। इसलिए हर extortion case को organised gang activity मानना सही नहीं है।

    पोईसर का मौजूदा मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि पुलिस ने यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, कथित लगातार आपराधिक गतिविधियों और मौजूदा मामले को देखते हुए MCOCA के तहत कार्रवाई की है।

    फिलहाल पुलिस का फोकस फरार मुख्य आरोपी यमेश दरेकर को पकड़ने और मामले की आगे की जांच पूरी करने पर है। इस कार्रवाई के बाद पोईसर-कांदिवली इलाके में कथित हफ्ता वसूली और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।

  • Mumbai Crime: ट्रांसजेंडर बनकर पति को ठीक करने के नाम पर घर में घुसा, पानी छिड़का और Air Hostess से रेप का आरोप

    Mumbai Crime: ट्रांसजेंडर बनकर पति को ठीक करने के नाम पर घर में घुसा, पानी छिड़का और Air Hostess से रेप का आरोप

    मुंबई के Powai में पति को काला जादू से ठीक करने का झांसा देकर Air Hostess से रेप का आरोप, 100+ CCTV की मदद से आरोपी Anil Shinde गिरफ्तार।

    मुंबई: अंधेरी पूर्व के Powai इलाके से एक चौंकाने वाली अपराध की घटना सामने आई है। यहां 25 साल की एक Air Hostess ने आरोप लगाया है कि उसके बीमार पति को ठीक करने और उसकी दृष्ट उतारने के नाम पर एक व्यक्ति उसके फ्लैट में घुसा और उसके साथ sexual assault किया। आरोपी ने खुद को transgender होने का भास दिया था। पुलिस ने 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान 28 साल के Anil Shinde के तौर पर हुई है। घटना 19 अगस्त की दोपहर करीब 12:20 से 12:50 बजे के बीच Powai की एक housing society में हुई बताई जा रही है।

    पति को ठीक करने का झांसा देकर Society में पहुंचा

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पहले Society के security guard का भरोसा हासिल किया। इसके बाद वह building के अंदर गया और अलग-अलग flats के doors knock करने लगा। इसी दौरान वह तीसरी मंजिल पर रहने वाली Air Hostess के flat तक पहुंच गया।

    महिला का पति उस समय अस्पताल में इलाज करा रहा था। आरोपी ने दावा किया कि वह उसके पति पर आई बुरी नजर या किसी तरह की परेशानी को दूर कर सकता है। इसी बहाने उसने महिला से घर के अंदर आने की permission ली।

    पानी छिड़का और सिर पर हाथ रखा

    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने घर में आने के बाद उस पर पानी छिड़का और उसके सिर पर हाथ रखा। इसके बाद उसने महिला से आंखें बंद करके बेड पर लेटने को कहा।

    महिला के मुताबिक उस समय उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह संमोहित या hypnotised अवस्था में चली गई हो। इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ sexual assault किया।

    जब महिला को कुछ होश आया तो उसने शोर मचाना शुरू किया। इसके बाद आरोपी ने उससे 200 रुपये लिए और वहां से निकल गया।

    घटना के बाद रात में Police तक पहुंची महिला

    घटना दोपहर में होने के बाद महिला करीब रात 11 बजे Police Station पहुंची। रिपोर्ट के मुताबिक वह काफी परेशान और traumatised थी और शुरुआत में घटना के बारे में बोलने की स्थिति में नहीं थी। एक महिला पुलिस अधिकारी ने उसे भरोसा दिलाया, जिसके बाद उसने पूरी घटना पुलिस को बताई।

    इसके बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की।

    Powai से Kalwa तक 100 से ज्यादा CCTV खंगाले

    आरोपी घटना के बाद वहां से निकलकर कथित तौर पर rickshaw से Kalwa की तरफ गया था। पुलिस ने उसके movement को track करने के लिए Powai से Kalwa तक लगे 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की footage की जांच की।

    CCTV footage के जरिए पुलिस को आरोपी के route और उसकी पहचान से जुड़े सुराग मिले। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए Anil Shinde को गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक FIR दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई।

    क्या आरोपी ने पहले भी ऐसी वारदात की?

    Anil Shinde से पूछताछ के दौरान पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उसने इससे पहले भी इसी तरह किसी महिला को निशाना बनाया था।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बताया है कि उसका परिवार transgender का भास बनाकर begging करता था। इस दावे की भी पुलिस जांच कर रही है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि आरोपी ने पहले भी इसी तरह की कोई वारदात की है।

    Hypnosis को लेकर क्या सामने आया?

    इस मामले में पानी छिड़कने और महिला को hypnotised करने की बात सामने आई है। लेकिन पुलिस के सामने महिला ने बताया है कि उसे उस वक्त संमोहित जैसा महसूस हुआ था। इसे ऐसे नहीं समझना चाहिए कि पानी छिड़कने से किसी व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह दूसरे व्यक्ति के control में चला जाता है।

    घटना में आरोपी ने कथित तौर पर डर, भरोसे और पति को ठीक करने के दावे का इस्तेमाल करके महिला को अपने झांसे में लिया। इसलिए इस मामले में “hypnotised” शब्द को पीड़िता के अनुभव के तौर पर समझना ज्यादा सही है।

    Maharashtra में Black Magic के नाम पर क्या कानून है?

    महाराष्ट्र में अंधविश्वास और Black Magic के नाम पर लोगों को धोखा देने और उनका शोषण करने के खिलाफ Maharashtra Prevention and Eradication of Human Sacrifice and Other Inhuman, Evil and Aghori Practices and Black Magic Act, 2013 लागू है।

    इस कानून के तहत Schedule में बताए गए प्रतिबंधित अंधविश्वासी और कथित supernatural practices को करना, बढ़ावा देना या लोगों को उनके जरिए गुमराह करना अपराध हो सकता है। ऐसे मामलों में 6 महीने से 7 साल तक की सजा और 5,000 से 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने Black Magic से जुड़ी कानूनी provisions के तहत भी कार्रवाई की बात कही है। आरोपी के खिलाफ अंतिम आरोप और अदालत में मामला किस तरह आगे बढ़ता है, यह जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से साफ होगा।

    Rape के मामले में कानून क्या कहता है?

    Bharatiya Nyaya Sanhita यानी BNS में rape और उसकी punishment को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। कानून में consent यानी सहमति का मतलब voluntary और साफ agreement है। सिर्फ किसी महिला के physical resistance नहीं करने को consent नहीं माना जाता।

    इस मामले में पुलिस ने महिला के बयान के आधार पर sexual assault की शिकायत दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आगे की कार्रवाई investigation, medical evidence और court proceedings के आधार पर होगी।

    Transgender community को लेकर एक जरूरी बात

    इस घटना में आरोपी पर आरोप है कि उसने transgender होने का भास किया था। इसे पूरी transgender community से जोड़ना सही नहीं होगा।

    किसी आरोपी द्वारा किसी पहचान या वेश का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करना उस पूरी community के बारे में निष्कर्ष निकालने का आधार नहीं हो सकता। इस मामले में जांच का फोकस आरोपी के कथित deception, घर में entry लेने और महिला के साथ किए गए अपराध पर है।

    Mumbai की Housing Societies के लिए इस घटना से क्या सीख?

    इस घटना के बाद housing societies में visitor verification को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसी अनजान व्यक्ति को सिर्फ किसी धार्मिक, इलाज, दृष्ट उतारने या काला जादू दूर करने के दावे पर building या flat तक पहुंच नहीं मिलनी चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति पति-पत्नी या परिवार के किसी सदस्य की बीमारी ठीक करने, दृष्ट उतारने या किसी supernatural ताकत से परेशानी दूर करने का दावा करता है, तो पहले उसकी पहचान verify करना जरूरी है।

    Society security को भी बिना verification किसी stranger को अंदर भेजने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर resident से phone या intercom पर confirmation लिया जा सकता है।

    अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति घर में आने की कोशिश करे तो दरवाजा खोलने के बजाय security guard, Society management या Police को इसकी जानकारी देना ज्यादा सुरक्षित है।

    इस मामले में अभी क्या पता है?

    Powai में 25 वर्षीय Air Hostess ने sexual assault की शिकायत की है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पति को ठीक करने और बुरी नजर दूर करने का बहाना बनाया था।

    आरोपी ने transgender होने का भास किया था।

    महिला के बयान के मुताबिक पानी छिड़कने और सिर पर हाथ रखने के बाद उसे संमोहित जैसा महसूस हुआ।

    आरोपी पर sexual assault का आरोप है और उसे गिरफ्तार किया जा चुका है।

    Police ने 100 से ज्यादा CCTV cameras की मदद से उसके movement को trace किया।

    आरोपी के पुराने criminal activities या इसी तरह की किसी दूसरी वारदात में शामिल होने की जांच अभी जारी है।

    मामला अब आगे की police investigation और कानूनी प्रक्रिया में है।

  • कांदिवली में 3.28 करोड़ की हेरोइन के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

    कांदिवली में 3.28 करोड़ की हेरोइन के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

    कांदिवली पश्चिम में क्राइम ब्रांच ने 651 ग्राम हेरोइन बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जब्त सामान की कुल कीमत 3.28 करोड़ रुपये बताई गई है।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम में मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 11 ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 651 ग्राम हेरोइन बरामद हुई है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ 25 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है। कार्रवाई के दौरान नकदी, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किया गया है।

    कांदिवली में पुलिस ने ऐसे बिछाया जाल

    मुंबई पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर मुंबई और उपनगरों में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की टीम को कांदिवली पश्चिम में हेरोइन की तस्करी से जुड़ी अहम जानकारी मिली थी।

    सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कांदिवली पश्चिम में बीएमसी गार्डन के सामने खजुरिया रोड के पास जाल बिछाया। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दो लोगों को पकड़ा गया।

    तलाशी में 651 ग्राम हेरोइन मिली

    पुलिस ने दोनों आरोपियों की तलाशी ली तो उनके पास से 651 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस के अनुसार, इस हेरोइन की अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ 25 लाख 50 हजार रुपये है।

    इसके अलावा आरोपियों के पास से 2 लाख 10 हजार रुपये नकद, दो मोबाइल फोन और करीब 50,400 रुपये कीमत का अन्य सामान भी जब्त किया गया।

    पुलिस के मुताबिक, बरामद हेरोइन, नकदी और अन्य सामान समेत जब्त किए गए सामान की कुल कीमत 3 करोड़ 28 लाख 10 हजार 400 रुपये है।

    NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

    इस मामले में कांदिवली पुलिस स्टेशन में गु.र.क्र. 110/2026 नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 8(ए), 21(ए) और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर रही है।

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    मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर

    अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क की जांच

    पुलिस की शुरुआती जांच में हेरोइन की तस्करी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह की संभावित भूमिका सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह ड्रग्स कहां से लाई गई थी और मुंबई में इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

    मामले में आगे की जांच जारी है और पूछताछ के आधार पर ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

    वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई

    यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती के मार्गदर्शन में की गई। क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों जैसे सह-आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कृष्णकांत उपाध्याय, पुलिस उपायुक्त नवनाथ ढवळे और दिनकर शिलवाते की निगरानी में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    कार्रवाई में क्राइम ब्रांच यूनिट-11 के वरिष्ठ निरीक्षक शशिकांत जगदाळे, निरीक्षक विश्वास पाटिल, एसपी एन. दादासाहेब बनसोडे, एसपी एन. अमित पाटिल, निरीक्षक बालासाहेब शिंदे और उनकी टीम के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस मामले में ड्रग्स की सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • कांदिवली के बैंक लॉकर से ₹82 लाख का सोना गायब, डिप्टी मैनेजर गिरफ्तार; 9 करोड़ के ट्रांजैक्शन ने चौंकाया

    कांदिवली के बैंक लॉकर से ₹82 लाख का सोना गायब, डिप्टी मैनेजर गिरफ्तार; 9 करोड़ के ट्रांजैक्शन ने चौंकाया

    कांदिवली में NRI के लॉकर से 610 ग्राम सोना गायब हुआ। पुलिस ने पूर्व डिप्टी मैनेजर को गिरफ्तार कर पूरी jewellery बरामद कर ली।

    मुंबई: कांदिवली में बैंक लॉकर से करीब 82 लाख रुपये के सोने के गहने गायब होने के मामले ने बैंकिंग सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में पुलिस ने बैंक के ही पूर्व डिप्टी ब्रांच मैनेजर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने NRI ग्राहक के लॉकर में रखे सोने के गहनों को कथित तौर पर अलग-अलग गोल्ड मॉर्गेज फर्मों के पास गिरवी रख दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान पूरे 610 ग्राम गहने बरामद करने का दावा किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप रामचंद साहनी के तौर पर हुई है।

    कांदिवली में NRI के लॉकर से कैसे गायब हुआ सोना?

    मामला कांदिवली पश्चिम के MG Road स्थित IndusInd Bank की शाखा का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता 74 वर्षीय NRI हैं और लंबे समय से दुबई में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनका मुंबई में घर और इसी बैंक में अकाउंट है। उन्होंने 22 मार्च 2024 को बैंक के लॉकर में करीब 610 ग्राम सोने के गहने रखे थे। उस समय इन गहनों की कीमत करीब 81.80 लाख रुपये बताई गई थी।

    विदेश में लंबे समय तक रहने की वजह से शिकायतकर्ता नियमित रूप से अपना लॉकर चेक नहीं कर पाए। करीब दो साल बाद जब वह मुंबई आए और बैंक जाकर लॉकर खोला, तो अंदर रखा पूरा सोना गायब मिला। इसके बाद उन्होंने बैंक अधिकारियों से जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पुलिस से शिकायत की।

    12 अगस्त को शिकायत दर्ज होने के बाद कांदिवली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इतने पुराने मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सोना आखिर लॉकर से कब और कैसे बाहर निकला।

    पुलिस की नजर बैंक के डिप्टी मैनेजर पर क्यों गई?

    जांच के दौरान पुलिस ने लॉकर से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की। इसी दौरान सामने आया कि शिकायतकर्ता को लॉकर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तत्कालीन डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी की भूमिका थी।

    इसके बाद पुलिस ने सिर्फ बैंक रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय आरोपी के पिछले करीब दो साल के financial transactions की जांच शुरू की।

    यहीं से जांच को बड़ा सुराग मिला।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी के बैंक खातों में करीब 9 करोड़ रुपये तक के transactions मिले। इन transactions का एक बड़ा हिस्सा ऐसी कंपनियों से जुड़ा था जो सोना गिरवी रखकर loan या mortgage का कारोबार करती हैं। पुलिस ने इन transactions की जांच आगे बढ़ाई तो उसे उन firms तक पहुंच मिली जहां आरोपी द्वारा कथित तौर पर सोने के गहने गिरवी रखे गए थे।

    फोटो से हुआ गहनों का मिलान

    पुलिस ने संबंधित gold mortgage firms से pledged jewellery की तस्वीरें मांगीं। तस्वीरों की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे गहने दिखाई दिए जो NRI ग्राहक के लॉकर में रखे गए गहनों से मेल खाते थे।

    इसके बाद पुलिस ने उन गहनों की पहचान और बरामदगी की कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता के 610 ग्राम सोने के गहने बरामद कर लिए गए।

    पुलिस ने FIR दर्ज होने के कुछ ही दिनों के भीतर आरोपी तक पहुंचने और गहने बरामद करने में सफलता हासिल की। इसके बाद कुलदीप साहनी को गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित वारदात में उसके साथ कोई और बैंक कर्मचारी या दूसरा व्यक्ति शामिल था या नहीं।

    सबसे बड़ा सवाल: दो साल तक बैंक को पता क्यों नहीं चला?

    इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मार्च 2024 में लॉकर में रखे गए गहने आखिर कब गायब हुए।

    शिकायतकर्ता करीब दो साल बाद मुंबई लौटे। इसका मतलब यह भी है कि पुलिस को यह पता लगाना होगा कि लॉकर को किस तारीख और किस तरीके से access किया गया था। इसके लिए locker operation records, access details, CCTV और बैंक के internal records जांच का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

    RBI के locker framework में banks को locker area की security, unauthorized access रोकने के उपाय और CCTV व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। Common areas और strong-room entry/exit की CCTV recording कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखने का प्रावधान है। अगर customer unauthorized access या theft की शिकायत करता है, तो संबंधित CCTV footage को police investigation और dispute settlement पूरा होने तक preserve किया जाना चाहिए।

    हालांकि इस मामले में पुलिस को दो साल पुरानी कौन-कौन सी CCTV या access recording मिली है, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। फिलहाल investigation में financial transactions एक अहम सुराग बनकर सामने आए हैं।

    अगर बैंक कर्मचारी ही locker से gold निकाल दे तो जिम्मेदारी किसकी?

    यही सवाल इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।

    RBI के revised locker rules में bank employee के fraud से होने वाले loss को भी liability framework में शामिल किया गया है। अगर loss bank की negligence या deficiency से जुड़ा है और prescribed conditions पूरी होती हैं, तो bank की liability prevailing annual locker rent के 100 गुना तक हो सकती है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि अगर locker में 82 लाख रुपये का gold रखा था तो bank automatically 82 लाख रुपये customer को देगा।

    उदाहरण के लिए अगर किसी locker का annual rent 5,000 रुपये है, तो 100 गुना रकम 5 लाख रुपये होगी। Actual compensation का सवाल case के facts, bank की liability और लागू कानूनी प्रक्रिया पर depend करेगा।

    यानी locker में रखा gold जितना महंगा है, bank की regulatory liability उसी proportion में बढ़ती जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।

    Supreme Court भी bank locker को लेकर क्या कह चुका है?

    Bank locker disputes में Supreme Court का 2021 का फैसला भी महत्वपूर्ण है। Amitabha Dasgupta बनाम United Bank of India मामले में Supreme Court ने banks की duty of care को लेकर महत्वपूर्ण observations दिए थे। Court ने यह माना कि bank सिर्फ यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह नहीं बच सकता कि उसे locker के अंदर रखी चीजों की जानकारी नहीं थी।

    लेकिन locker में वास्तव में कितना gold या दूसरा सामान रखा था और उसकी exact value कितनी थी, यह अलग evidentiary issue हो सकता है। यानी ग्राहक को अपने valuables के ownership और value को साबित करने के लिए documents और दूसरे evidence की जरूरत पड़ सकती है।

    इसीलिए bank locker में महंगी jewellery रखने वाले ग्राहकों के लिए purchase bills, valuation records, jewellery की photographs, hallmark details और insurance documents जैसे records संभालकर रखना काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    क्या देश में पहले भी bank lockers से gold गायब होने के मामले आए हैं?

    कांदिवली का यह मामला अकेला नहीं है। पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से bank lockers में रखे gold और valuables के गायब होने के मामले सामने आए हैं।

    Kanpur में एक महिला ने आरोप लगाया था कि करीब 17 साल बाद SBI locker खोलने पर उसमें रखी लगभग 50 लाख रुपये की jewellery गायब थी। इस मामले में लंबे समय तक locker operate नहीं किए जाने और bank records से जुड़े सवाल सामने आए।

    Bengaluru में एक bank assistant manager पर customers के lockers से करीब 2.7 किलो gold jewellery चोरी करने का आरोप लगा था। उस मामले में भी कथित तौर पर jewellery को pawn किया गया था और जांच में bank employee की भूमिका सामने आई।

    Kolkata में एक former bank employee पर करीब 571 ग्राम gold jewellery से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई थी। वहां भी jewellery को loan collateral के तौर पर इस्तेमाल किए जाने और documents/signature से जुड़े सवाल जांच का हिस्सा बने।

    Pune में भी bank locker से करोड़ों रुपये के gold, silver, diamond jewellery और दूसरे valuables गायब होने का मामला सामने आ चुका है, जिसमें bank employees की कथित भूमिका की जांच हुई थी।

    इन मामलों को देखकर एक बात साफ है कि bank locker से जुड़े disputes सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं हैं। कई मामलों में locker access, employee control, documentation, dormant lockers और pledged jewellery का trail भी जांच का हिस्सा बनता है।

    क्या भारत में bank locker theft बहुत आम है?

    इस सवाल का जवाब भी आंकड़ों से समझना जरूरी है।

    केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि 31 मार्च 2025 तक Public Sector Banks में करीब 1.10 करोड़ lockers operational थे। FY2020-21 से FY2024-25 के बीच Public Sector Banks में 40 established locker theft cases सामने आए थे। RBI के पास सभी banks के locker theft cases का consolidated database नहीं है।

    बाद के 2026 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक FY2021-22 से FY2025-26 तक Public Sector Banks में 40 established locker theft cases दर्ज हुए। FY2025-26 में 12 Public Sector Banks में established locker theft का कोई मामला reported नहीं हुआ।

    इन पांच साल के आंकड़ों में Maharashtra में 5 established cases दर्ज हुए थे। लेकिन यह आंकड़ा Public Sector Banks का है। कांदिवली का मौजूदा मामला IndusInd Bank जैसे private sector bank से जुड़ा है, इसलिए इसे इन सरकारी PSB आंकड़ों में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

    यानी available data के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि देश के bank lockers में चोरी आम बात है। लेकिन यह भी साफ है कि locker को पूरी तरह risk-free मानना ठीक नहीं है।

    NRI customers के लिए यह मामला क्यों ज्यादा महत्वपूर्ण है?

    कांदिवली की घटना NRI customers के लिए खास warning लेकर आई है।

    जो लोग साल में एक-दो बार ही भारत आते हैं, उनके लिए locker की physical checking नियमित रूप से करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में लंबे समय तक locker operate नहीं होने पर किसी unauthorized access या दूसरे dispute का पता काफी देर से चल सकता है।

    RBI के locker framework में ऐसे customers का भी ध्यान रखा गया है जो NRI हैं या job transfer जैसी वजह से लंबे समय तक locker operate नहीं कर पाते।

    इसलिए विदेश में रहने वाले customers के लिए bank में mobile number, email और address जैसे contact details updated रखना, locker records की जानकारी संभालकर रखना और संभव हो तो trusted family arrangement के बारे में bank के applicable rules समझना जरूरी है।

    अगर आपके bank locker से jewellery गायब मिले तो क्या करें?

    सबसे पहले locker की स्थिति की photographs और video अपने पास रखें। इसके बाद तुरंत bank को written complaint दें और complaint की acknowledgement लें।

    इसके साथ police complaint करना भी जरूरी है। Locker access records, CCTV, locker operation records और bank से जुड़े documents सुरक्षित रखने के लिए लिखित request देना भी उपयोगी हो सकता है।

    अगर jewellery के bills, valuation certificate, photographs, hallmark details या insurance documents हैं तो उन्हें सुरक्षित रखें। यही documents बाद में ownership और value establish करने में काम आ सकते हैं।

    बैंक locker में रखा gold क्या insured होता है?

    यह समझना भी जरूरी है कि bank locker और jewellery insurance एक ही चीज नहीं हैं।

    Government ने Parliament में बताया है कि banks को locker-related contingencies से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए Board-approved insurance policies रखने की सलाह दी गई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि customer के locker में रखे हर gold item का पूरा value automatically insured है।

    इसलिए बहुत high-value jewellery रखने वाले customers को अपने bank से applicable locker terms और अलग jewellery insurance की जरूरत को समझना चाहिए।

    कांदिवली के इस मामले में अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। आरोपी कुलदीप साहनी गिरफ्तार हो चुका है और शिकायतकर्ता के 610 ग्राम gold jewellery की recovery की जानकारी सामने आई है।

    अब जांच में यह पता लगाया जाना बाकी है कि jewellery locker से किस तरीके से निकाली गई, उसे अलग-अलग mortgage firms तक कैसे पहुंचाया गया, करीब 9 करोड़ रुपये के financial transactions में इस मामले से जुड़े कौन-कौन से transactions थे और क्या किसी दूसरे व्यक्ति या bank employee ने कथित तौर पर उसकी मदद की।

    इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बात यही है कि करीब दो साल पुराने locker theft का सुराग CCTV से ज्यादा financial trail से सामने आया। और अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि NRI का 82 लाख का gold कौन ले गया, बल्कि यह भी है कि bank locker में रखी आपकी lifetime savings कितनी सुरक्षित हैं और अगर कभी ऐसी घटना हो जाए तो आपकी legal और financial protection कितनी है। फिलहाल कांदिवली पुलिस की जांच इन सवालों के जवाब तलाश रही है।

  • तांबे के तार चोरी मामले में आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ में 12 वारदातों का खुलासा; कार समेत ₹4.51 लाख का माल जब्त

    तांबे के तार चोरी मामले में आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ में 12 वारदातों का खुलासा; कार समेत ₹4.51 लाख का माल जब्त

    नाशिक के लासलगांव में तांबे के तार चोरी का आरोपी गिरफ्तार। पूछताछ में 12 वारदातों का खुलासा, कार समेत ₹4.51 लाख का माल जब्त हुआ। पुराने मामलों की जांच जारी है।

    महाराष्ट्र/नाशिक: लासलगांव में तांबे के तार चोरी के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को कार समेत गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, विट्ठलवाड़ी स्थित एक इलेक्ट्रिकल और हार्डवेयर दुकान का शटर तोड़कर करीब ₹3.43 लाख के तांबे के तार चोरी किए गए थे। चोरी के बाद आरोपी कार से माल लेकर निकल रहा था, लेकिन नाकेबंदी के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान खुर्शीद अब्दुल हमीद खान के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में नाशिक जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई 12 चोरी और सेंधमारी की वारदातों का कनेक्शन सामने आने का दावा किया गया है। आरोपी के पास से तांबे के तार, कार और चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजार समेत कुल ₹4,51,716 का माल जब्त किया गया है।

    दुकान का शटर तोड़कर चोरी किए थे तांबे के तार

    पुलिस के अनुसार, लासलगांव थाना क्षेत्र के विट्ठलवाड़ी गांव में ‘लोणजाईमाता इलेक्ट्रिकल वर्क्स एंड हार्डवेयर’ दुकान को चोरों ने निशाना बनाया था। दुकान से करीब ₹3,43,216 कीमत के तांबे के तार चोरी किए गए।

    चोरी के बाद आरोपी खुर्शीद अब्दुल हमीद खान इन तारों को सेंट्रो कार से लेकर निकल रहा था। आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताया गया है और फिलहाल इगतपुरी में रह रहा था। पुलिस रिकॉर्ड में कार का नंबर MH 03 AM 3467 बताया गया है।

    नाकेबंदी के दौरान पुलिस ने पकड़ा

    19 अगस्त की तड़के विंचूर तीन पाटी इलाके में पुलिस की नाकेबंदी चल रही थी। इसी दौरान पुलिस कर्मचारियों को एक संदिग्ध कार दिखाई दी। पुलिस ने कार को रोकने की कोशिश की और उसका पीछा किया।

    पुलिस के मुताबिक, पीछा किए जाने के दौरान कार डिवाइडर से टकरा गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया। कार की तलाशी लेने पर उसमें तांबे के तार, बोल्ट कटर और लोहे की छड़ मिली।

    जब्त सामान में करीब ₹3.43 लाख के तांबे के तार और लगभग ₹1 लाख कीमत की कार शामिल है। पुलिस के अनुसार, सभी सामान की कुल कीमत ₹4,51,716 है।

    पूछताछ में 12 चोरी की वारदातों का कनेक्शन

    आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस को नाशिक जिले के अलग-अलग इलाकों में हुई 12 चोरी और सेंधमारी की वारदातों के बारे में जानकारी मिलने का दावा किया गया है।

    इनमें लासलगांव, सायखेड़ा, पिंपलगांव बसवंत, डिंडोरी, सिन्नर, इगतपुरी, वडनेर भैरव, सटाणा और चांदवड़ समेत कई थाना क्षेत्र शामिल बताए गए हैं।

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    नाशिक पुलिस के साथ गिरफ्तार आरोपी की तस्वीर

    पुलिस अब इन पुराने मामलों की FIR, चोरी हुए सामान और आरोपी के बयान का मिलान कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन वारदातों में आरोपी की सीधी भूमिका कितनी थी और उसके साथ कोई और लोग शामिल थे या नहीं।

    ₹1 करोड़ से ज्यादा के पुराने मामलों की जांच

    पूछताछ में सामने आए पुराने मामलों को जोड़ने पर करीब ₹1 करोड़ से ज्यादा के माल से जुड़े मामलों की जांच की बात सामने आई है।

    हालांकि, यहां एक बात साफ है कि ₹1 करोड़ से ज्यादा की रकम अभी बरामद नहीं हुई है। यह पुराने मामलों में चोरी हुए माल और उससे जुड़े संभावित नुकसान की जांच का हिस्सा है। फिलहाल इस कार्रवाई में पुलिस ने ₹4,51,716 का माल जब्त किया है।

    अब पुलिस पुराने मामलों में चोरी हुआ माल कहां गया, उसे किसे बेचा गया और इस पूरी कड़ी में और कौन लोग शामिल हैं, इसकी जानकारी जुटा रही है।

    पुलिस को अब इन सवालों के जवाब तलाशने हैं

    आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच सिर्फ इस एक चोरी तक सीमित नहीं है। अब पुराने मामलों की कड़ी जोड़ने पर फोकस है।

    पुलिस यह पता लगा रही है कि चोरी का सामान कहां बेचा जाता था, पुराने मामलों में भी इसी तरह के औजार या वाहन इस्तेमाल हुए थे या नहीं, आरोपी के साथ और कौन लोग थे और अलग-अलग जगहों से चोरी किया गया कितना माल बरामद किया जा सकता है।

    अगर पूछताछ में दूसरे आरोपियों या चोरी का माल खरीदने वालों के बारे में ठोस 12जानकारी मिलती है, तो इस मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है।

    देश के दूसरे हिस्सों में भी सामने आए तांबे की चोरी के मामले

    तांबे के तार चोरी की घटनाएं सिर्फ नाशिक तक सीमित नहीं हैं। हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से copper wire, बिजली के केबल और दूसरे electrical infrastructure को निशाना बनाने के मामले सामने आए हैं।

    दिल्ली-एनसीआर में पुलिस ने एक interstate copper-wire theft gang को पकड़ा था। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह से 18 चोरी के मामलों का खुलासा हुआ था। आरोपियों पर पुलिस की नजर से बचने के लिए walkie-talkie और internet dongle का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगा था।

    राजस्थान में भी एक मामले में पुलिस ने बताया था कि आरोपी online search के जरिए बड़े solar plants की जानकारी जुटाकर उन्हें निशाना बनाते थे। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

    गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी में भी पुलिस ने copper और iron चोरी के मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर 35 किलो तांबे का तार बरामद किया था।

    तांबे की चोरी से आम लोगों को क्या नुकसान?

    तांबे के तार की चोरी का नुकसान सिर्फ दुकान या गोदाम के मालिक तक सीमित नहीं रहता। जब यही तार बिजली, रेलवे, टेलीकॉम या दूसरे infrastructure में लगा हो और उसे काटकर चोरी कर लिया जाए, तो उसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ सकता है।

    भोपाल में रेलवे signal cables की चोरी के बाद चार passenger trains में 30 से 60 मिनट तक की देरी की रिपोर्ट सामने आई थी। रेलवे infrastructure में इस तरह की चोरी से operation के साथ safety का सवाल भी खड़ा होता है।

    मुंबई में भी MTNL की underground copper cables की चोरी का मामला सामने आया था। इस मामले में एक MTNL कर्मचारी पर कथित तौर पर cable locations की जानकारी चोरी करने वाले गिरोह तक पहुंचाने का आरोप लगा था।

    इसी तरह खेतों में लगे solar panels और नलकूपों के तार चोरी होने पर किसानों को भी सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। तार चोरी होने के बाद मोटर या solar system बंद हो सकता है और उसे दोबारा चालू कराने में अलग से खर्च करना पड़ता है।

    लासलगांव मामले में अब आगे क्या?

    लासलगांव पुलिस अब आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर पुराने मामलों की जांच आगे बढ़ा रही है। 12 वारदातों में आरोपी की भूमिका, चोरी हुए सामान की बरामदगी और संभावित साथियों की पहचान इस जांच का अगला हिस्सा है।

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद 21 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। अब आगे की कार्रवाई में पुलिस हिरासत की स्थिति, पुराने मामलों में बरामदगी और दूसरे आरोपियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

    इस कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक डॉ. डी. एस. स्वामी, अपर पुलिस अधीक्षक विमला एम. और उपविभागीय पुलिस अधिकारी के. के. पाटिल के मार्गदर्शन में टीम ने कार्रवाई की।

    फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और पुराने 12 मामलों की कड़ी जुड़ने के बाद इस मामले में चोरी के माल की और बरामदगी या अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी सामने आ सकती है।

    एक नजर में

    घटना: विट्ठलवाड़ी, लासलगांव, नाशिक

    चोरी: करीब ₹3,43,216 के तांबे के तार

    गिरफ्तार आरोपी: खुर्शीद अब्दुल हमीद खान

    बरामद सामान: तांबे के तार, सेंट्रो कार, बोल्ट कटर और लोहे की छड़

    कुल जब्ती: ₹4,51,716

    पुलिस पूछताछ में सामने आए मामले: 12 चोरी और सेंधमारी की वारदातें

    जिन थाना क्षेत्रों का नाम सामने आया: लासलगांव, सायखेड़ा, पिंपलगांव बसवंत, डिंडोरी, सिन्नर, इगतपुरी, वडनेर भैरव, सटाणा और चांदवड़

    पुराने मामलों में जांच: ₹1 करोड़ से ज्यादा के माल से जुड़े मामलों की जांच

    मामले की स्थिति: पुलिस जांच जारी

  • CM Vijay Thalapathy का Fake Video दिखाकर ₹12 लाख की ठगी, सरकारी मदद के नाम पर ऐसे बिछाया जाल

    CM Vijay Thalapathy का Fake Video दिखाकर ₹12 लाख की ठगी, सरकारी मदद के नाम पर ऐसे बिछाया जाल

    वसई में 66 साल की महिला को CM Vijay Thalapathy के Deepfake Video से ₹12 लाख की ठगी का शिकार बनाया गया। जानिए पूरा मामला और Cyber Fraud से बचने का आसान रास्ता।

    पालघर/ वसई: सोशल मीडिया पर दिखने वाला कोई Video कितना भी असली क्यों न लगे, अब उस पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी पड़ सकता है। वसई में 66 साल की एक महिला को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय यानी Thalapathy Vijay के नाम और चेहरे से बनाए गए Fake AI Video के जरिए आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया गया और करीब 12 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।

    पुलिस के मुताबिक, महिला ने Instagram पर एक Reel देखी थी, जिसमें विजय को कथित तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को Financial Assistance देने की बात करते दिखाया गया था। Reel में संपर्क करने के लिए एक Phone Number भी दिया गया था। महिला ने जब उस नंबर पर संपर्क किया तो उन्हें दूसरे नंबर पर बात करने के लिए कहा गया। इसके बाद शुरू हुआ पैसे ऐंठने का पूरा खेल।

    Instagram Reel देखकर किया भरोसा

    मामला 27 जुलाई से शुरू हुआ। महिला की नजर Instagram पर एक ऐसी Reel पर पड़ी जिसमें विजय को लोगों को आर्थिक मदद देने की बात कहते हुए दिखाया गया था।

    महिला ने Reel में दिए गए नंबर पर फोन किया। दूसरी तरफ मौजूद लोगों ने उनसे बातचीत शुरू की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें आर्थिक मदद मिल सकती है।

    महिला ने करीब 5 लाख रुपये की मदद मांगी। इसके बाद ठगों ने कहा कि मदद की रकम हासिल करने के लिए पहले 5 हजार रुपये Processing Fee जमा करनी होगी।

    महिला ने यह रकम दे दी।

    यहीं से ठगी का सिलसिला और आगे बढ़ गया।

    ₹5 हजार के बाद ₹77 लाख का नया झांसा

    Processing Fee देने के बाद ठगों ने महिला को बताया कि उन्हें विदेश से करीब 77 लाख रुपये मिलने वाले हैं। इसके लिए Tax और दूसरे Charges के नाम पर लगातार पैसे जमा करने को कहा गया।

    मदद की रकम मिलने की उम्मीद में महिला ठगों की बातों पर भरोसा करती रहीं और अलग-अलग समय पर पैसे भेजती रहीं।

    पुलिस के मुताबिक, महिला ने एक Private Credit Society से Loan लिया, अपनी Jewellery गिरवी रखी और अपनी बेटी के Bank Account से भी पैसे निकाले। इसके बाद ठगों की ओर से बताए गए Bank Accounts में कुल करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।

    पूरी रकम करीब 10 दिनों के दौरान भेजी गई।

    12 लाख देने के बाद भी नहीं मिली मदद

    महिला को जब वादा की गई Financial Assistance नहीं मिली और ठग लगातार पैसे मांगते रहे, तब उन्हें शक हुआ।

    इसके बाद उन्हें समझ आया कि जिस Video को देखकर उन्होंने भरोसा किया था, वह असली नहीं बल्कि AI से बनाया गया Fake Video था।

    महिला ने इसके बाद वालिव पुलिस से संपर्क किया।

    वालिव पुलिस ने दर्ज किया मामला

    मामले में वालिव Police Station में शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act के तहत Cheating का मामला दर्ज किया है।

    Police Inspector Gorakshnath Zaid ने मामले की पुष्टि की है। अब पुलिस उन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है जिन्होंने महिला से संपर्क किया और जिन Bank Accounts में रकम ट्रांसफर करवाई गई।

    Deepfake Video के बाद ऐसे आगे बढ़ा Fraud

    इस मामले में ठगों ने सीधे पैसे की मांग नहीं की। पहले Social Media पर एक भरोसेमंद चेहरे का इस्तेमाल किया गया।

    पहले Fake Video दिखाया गया।

    फिर Video में दिए गए नंबर पर संपर्क करवाया गया।

    इसके बाद आर्थिक मदद का भरोसा दिया गया।

    पहले सिर्फ 5 हजार रुपये की Processing Fee मांगी गई।

    इसके बाद 77 लाख रुपये मिलने का दावा किया गया।

    फिर Tax और दूसरे Charges के नाम पर लगातार Payment करवाया गया।

    आखिर में महिला से करीब 12 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

    यानी Fake Video ने भरोसा बनाया और उसके बाद Phone Call और अलग-अलग Payment के जरिए ठगी को आगे बढ़ाया गया।

    देश में Deepfake से जुड़े ऐसे और मामले

    वसई का मामला अकेला नहीं है। हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से Deepfake Video के जरिए Financial Fraud और Blackmail के मामले सामने आए हैं।

    पुणे में 38 साल की एक महिला को Instagram पर उद्योगपति रतन टाटा का Deepfake Video दिखाया गया। इस Video में Share Trading से जुड़े निवेश और अच्छे Return का दावा किया गया था। महिला ने Advertisement पर क्लिक किया और बाद में एक App के जरिए कथित Investment Scheme में पैसे लगाए। पुलिस के अनुसार उन्हें करीब 4.09 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

    इसके अलावा वहीं, पुणे में ही 56 साल के एक Businessman को Finance Minister Nirmala Sitharaman के Deepfake Video के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया। इसके बाद Fake Forex Trading Platform, Fake Investment Advisor और SpaceX Shares के नाम पर करीब 1.07 करोड़ रुपये की ठगी की गई। Fake Platform पर कथित Profit बढ़ता हुआ दिखाया गया और पैसा निकालने के लिए आगे और रकम मांगी गई।

    बेंगलुरु में एक Retired Professor को Facebook पर Nirmala Sitharaman का Deepfake Video दिखाया गया। इसके बाद उन्हें एक Fake Trading Platform, Telegram Chat और Overseas Calls के जरिए Investment के नाम पर फंसाया गया और 61 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।

    पटना में Deepfake का इस्तेमाल अलग तरीके से किया गया। एक Hotel Owner को उनके चेहरे से बनाए गए कथित अश्लील AI Videos के जरिए Blackmail किया गया और करीब 97 लाख रुपये की रकम वसूली गई। पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और अंतिम 20 लाख रुपये की किस्त बरामद की गई।

    इन मामलों से साफ है कि Deepfake का इस्तेमाल अब सिर्फ Fake News फैलाने के लिए नहीं बल्कि Investment Fraud, Financial Assistance Scam और Blackmail जैसे अपराधों में भी किया जा रहा है।

    Video में नेता या Celebrity दिखे तो भी तुरंत भरोसा न करें

    AI की मदद से किसी व्यक्ति का चेहरा और आवाज इस्तेमाल करके ऐसा Video तैयार किया जा सकता है जिसमें वह व्यक्ति ऐसी बात कहता हुआ दिखाई दे सकता है जो उसने वास्तव में कही ही नहीं।

    इसलिए अगर किसी Social Media Video में कोई नेता, Celebrity, कारोबारी या सरकारी अधिकारी पैसे, Investment, नौकरी, Lottery या Financial Assistance का दावा करता दिखाई दे और साथ में कोई Mobile Number, WhatsApp Number, Website या Payment Request दी गई हो तो सीधे पैसे भेजना जोखिम भरा हो सकता है।

    ऐसी जानकारी को पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था के Official Source से Verify करना जरूरी है।

    सरकारी मदद के नाम पर Processing Fee मांगी जाए तो सावधान

    वसई के मामले में ठगी की शुरुआत सिर्फ 5 हजार रुपये की Processing Fee से हुई। इसके बाद रकम बढ़ती चली गई।

    यही वजह है कि किसी भी Government Scheme या Financial Assistance के नाम पर पहले पैसे जमा करने को कहा जाए तो सावधान रहें।

    किसी अनजान व्यक्ति के बताए Bank Account, UPI ID, Website या App पर Payment करने से पहले उसकी जानकारी Official Government Source से जांचना जरूरी है।

    पैसा चला गया तो तुरंत 1930 पर करें शिकायत

    अगर किसी व्यक्ति के साथ Financial Cyber Fraud हो गया है और उसने पैसे ट्रांसफर कर दिए हैं तो शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C के मुताबिक Financial Cyber Fraud की शिकायत National Helpline Number 1930 पर की जा सकती है। इसके बाद Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की जानकारी पूरी करनी होती है।

    शिकायत करते समय Transaction ID, Transaction Date, Bank या Payment App की जानकारी, UPI ID, Account Details, Phone Numbers, Chat और Screenshots जैसी जानकारी सुरक्षित रखना जरूरी है।

    साथ ही अपने Bank या संबंधित Payment Service Provider को भी तुरंत Fraud Transaction की जानकारी देनी चाहिए।

    I4C का Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System Financial Fraud की शिकायतों पर Banks और Payment Intermediaries के साथ कार्रवाई के लिए बनाया गया है।

    साइबर फ्रॉड के खिलाफ सरकार की कार्रवाई भी तेज

    सरकार के मुताबिक 30 जून 2026 तक CFCFRMS के जरिए 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचाई गई। इसी अवधि तक I4C ने 3,718 Mobile Apps को भी Block किया था। सरकार ने यह भी बताया कि Suspect Registry के जरिए संदिग्ध Identifiers और Mule Accounts की जानकारी Banks और Financial Institutions के साथ साझा की जा रही है।

    अप्रैल 2026 से Money Restoration Module और Grievance Redressal Module भी काम कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य Cyber Fraud में फंसी रकम की बहाली और Bank Accounts के Freeze या Lien से जुड़ी शिकायतों को तेजी से संभालना है।

    Deepfake को लेकर नए नियम भी लागू

    भारत सरकार ने 2026 में AI-generated और Deepfake Content से जुड़े नियमों को और मजबूत किया है। फरवरी 2026 में IT Rules में बदलाव करके Synthetically Generated Information यानी AI से तैयार सामग्री से होने वाले नुकसान को लेकर नया regulatory framework लाया गया। इसमें Deepfake और AI-generated content भी शामिल है।

    सरकार ने Social Media Platforms के लिए AI-generated content की स्पष्ट पहचान और traceable information से जुड़ी व्यवस्था भी तय की है। Unlawful content की शिकायतों पर Platforms को तेजी से कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।

    अब Social Media पर दिखने वाले Video को लेकर क्या सावधानी रखें?

    किसी बड़े नेता या Celebrity का Video देखकर सिर्फ इसलिए भरोसा न करें क्योंकि उसमें चेहरा और आवाज बिल्कुल असली जैसी लग रही है।

    अगर Video में Financial Assistance, Investment, नौकरी, Lottery या किसी दूसरी आर्थिक मदद का दावा है तो पहले Official Source से जानकारी Verify करें।

    Video में दिए गए किसी अनजान Phone Number या Link पर तुरंत संपर्क न करें।

    Processing Fee, Tax, Verification Charge या Withdrawal Charge के नाम पर पैसे मांगने पर रुक जाएं।

    किसी अनजान Bank Account या UPI ID में Payment न करें।

    और अगर गलती से पैसा भेज दिया है तो इंतजार करने के बजाय तुरंत 1930 पर शिकायत करें और Cyber Crime Portal पर मामला दर्ज करें।

    वसई की 66 साल की महिला के साथ हुई यह घटना बताती है कि Social Media पर दिखने वाला भरोसेमंद चेहरा भी ठगी का जरिया बन सकता है। यहां 5 हजार रुपये की छोटी Payment से शुरू हुआ मामला करीब 12 लाख रुपये के नुकसान तक पहुंच गया।

    इसलिए अगली बार किसी Video में कोई बड़ा नेता, Celebrity या सरकारी व्यक्ति आर्थिक मदद या Investment का दावा करता दिखाई दे तो Video देखकर फैसला लेने के बजाय पहले उसकी सच्चाई Verify करें। यही सावधानी आपके पैसे को ऐसे Deepfake Cyber Fraud से बचा सकती है।

  • कांदिवली के इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने में 13 नाबालिग मिले, 9-10 घंटे काम कराने का आरोप

    कांदिवली के इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने में 13 नाबालिग मिले, 9-10 घंटे काम कराने का आरोप

    मुंबई के कांदिवली में इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने से 13 नाबालिग मुक्त कराए गए। पुलिस के मुताबिक बच्चे 9-10 घंटे काम करते और वहीं रहते थे। जांच जारी है।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम में चारकोप पुलिस ने बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इमिटेशन ज्वेलरी बनाने वाले एक कारखाने से 13 नाबालिगों को मुक्त कराया है। बच्चों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, इन बच्चों से कथित तौर पर रोजाना 9 से 10 घंटे तक काम कराया जाता था और उन्हें उचित मजदूरी भी नहीं दी जाती थी।

    कार्रवाई चारकोप इंडस्ट्रियल एरिया के ‘जहारा फैशन एरा’ नमक इमिटेशन ज्वेलरी कारखाने में की गई। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी उत्तर परिमंडल-2 के पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे और चारकोप पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश बळवंतराव की ओर से दी गई।

    कारखाने में काम के साथ रह भी रहे थे बच्चे

    पुलिस के मुताबिक, कारखाने में नाबालिगों से इमिटेशन ज्वेलरी और चूड़ियां बनाने का काम कराया जा रहा था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बच्चे जिस जगह काम करते थे, वहीं पर रह रहे थे।

    मुक्त कराए गए सभी 13 बच्चे पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, कारखाने के मालिक और संचालक बच्चों की उम्र साबित करने वाले जरूरी दस्तावेज भी पेश नहीं कर सके।

    मालिक और संचालक हिरासत में

    पुलिस ने कारखाने के मालिक अंकित कुमार महेंद्र रावल और संचालक समीनुर मोतियार रहमान शेख को हिरासत में लिया है। दोनों के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नाबालिगों को कारखाने में काम पर रखने की प्रक्रिया क्या थी और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

    पश्चिम बंगाल से मुंबई कौन लेकर आया?

    मामले में पुलिस की जांच अब इस सवाल पर भी केंद्रित है कि पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों से ये बच्चे मुंबई के कांदिवली तक कैसे पहुंचे।

    पुलिस यह पता कर रही है कि क्या बच्चों को काम दिलाने के नाम पर मुंबई लाया गया था, क्या किसी बिचौलिए की भूमिका थी और उन्हें कारखाने तक पहुंचाने में किसकी मदद ली गई।

    जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले के पीछे बाल श्रम से जुड़ा कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। फिलहाल इस संबंध में जांच जारी है और पुलिस की ओर से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    13 नाबालिगों को संबंधित विभाग को सौंपा गया

    कार्रवाई के बाद सभी 13 नाबालिगों को आगे की देखभाल और जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को सौंप दिया गया है।

    अब बच्चों की उम्र, पहचान और परिवार से जुड़ी जानकारी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उनके परिजनों से संपर्क और बच्चों को सुरक्षित तरीके से परिवार तक पहुंचाने को लेकर भी आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर भी संबंधित विभाग की ओर से आगे की प्रक्रिया की जाएगी।

    बाल श्रम कानून में क्या प्रावधान है?

    बाल श्रम कानून के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष की उम्र के किशोरों को खतरनाक काम या प्रक्रिया में लगाने पर रोक है।

    इस मामले में बच्चों की उम्र 13 से 17 वर्ष के बीच बताई गई है। इसलिए उनकी सही उम्र और कारखाने में उनसे कराए जा रहे काम की प्रकृति भी जांच का हिस्सा है।

    9 से 10 घंटे काम कराने की जांच

    पुलिस के अनुसार, नाबालिगों से कथित तौर पर रोज 9 से 10 घंटे तक काम कराया जाता था। उन्हें उचित मजदूरी नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।

    जांच में अब यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों से कितने समय तक काम कराया गया, मजदूरी कितनी तय थी और भुगतान किस तरीके से किया जाता था।

    चारकोप पुलिस बच्चों के पश्चिम बंगाल से मुंबई पहुंचने से लेकर कारखाने में काम करने तक की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।

  • मुंबई में 210 ‘भूतिया कर्मचारियों’ के नाम पर ₹4.15 करोड़ का लोन घोटाला, पूर्व CEO समेत 4 पर FIR

    मुंबई में 210 ‘भूतिया कर्मचारियों’ के नाम पर ₹4.15 करोड़ का लोन घोटाला, पूर्व CEO समेत 4 पर FIR

    मुंबई के विले पार्ले में 210 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर ₹4.15 करोड़ का लोन घोटाला सामने आया है। पूर्व CEO समेत 4 पर FIR दर्ज हुई।

    मुंबई: विले पार्ले में बैंक से जुड़े एक बड़े लोन घोटाले का मामला सामने आया है। पुलिस ने मराठा बैंक के पूर्व CEO समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि 210 कथित ‘भूतिया कर्मचारियों’ के नाम पर कुल ₹4.15 करोड़ से ज्यादा का लोन जारी कराया गया।

    पुलिस के मुताबिक, लोन लेने के लिए जिन लोगों के नाम और दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, उन्होंने बाद में इन कंपनियों में काम करने से इनकार किया। मामले में बैंक के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    210 लोगों के नाम पर ऐसे निकाली गई रकम

    एफआईआर के मुताबिक, मुंबई पैरामेडिकल कंपनी के 126 कथित कर्मचारियों के नाम पर करीब ₹2.47 करोड़ के लोन जारी किए गए। वहीं पीपल पैरामेडिकल कंपनी के 84 कथित कर्मचारियों के नाम पर करीब ₹1.68 करोड़ का लोन दिया गया।

    इस तरह कुल 210 लोगों के नाम पर 210 लोन खातों से ₹4,15,05,000 की रकम निकाले जाने का आरोप है।

    लोन के लिए लगाए गए दस्तावेज भी कथित तौर पर फर्जी

    पुलिस की जांच में सामने आया कि लोन के लिए इस्तेमाल किए गए कई दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे।

    इनमें:

    • आईडी कार्ड
    • Salary Slips
    • Salary Certificates
    • Rubber Stamps

    शामिल हैं।

    जिन लोगों के नाम पर लोन लिया गया, उन्होंने कथित तौर पर कंपनियों में काम करने से ही इनकार कर दिया।

    सभी लोन में बताया गया था एक ही कारण

    मामले में खास बात यह सामने आई है कि सभी 210 लोन घर की मरम्मत के नाम पर लिए गए थे।

    इसके लिए Western Construction Engineer और Laxmi Interior के नाम से कथित फर्जी quotations लगाए गए थे।

    एफआईआर के मुताबिक, लोन approve होने वाले दिन ही संबंधित लोगों के savings accounts खोले गए थे।

    बैंक खाते में पैसे आते ही शुरू हुआ cash withdrawal

    लोन की रकम संबंधित खातों में जमा होने के बाद करीब ₹15 हजार से ₹20 हजार तक cash withdrawal किए जाने का आरोप है।

    इसके अलावा कुछ रकम FD में भेजी गई। बची हुई रकम को Pay Order के जरिए एजेंट तक पहुंचाने का आरोप है।

    एफआईआर में कहा गया है कि इन Pay Order पर शाखा प्रमुख गोपाल मुकुंद परब के signatures थे।

    पूर्व CEO समेत 4 लोगों पर FIR

    विले पार्ले पुलिस ने इस मामले में बैंक के चार तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

    FIR में जिन लोगों के नाम हैं:

    1. रमेश विठ्ठल शिरगांवकर — तत्कालीन CEO
    2. दशरथ पुंडलिक नाइक — महाप्रबंधक
    3. वैशाली कृष्णा मायेकर — लोन मैनेजर
    4. गोपाल मुकुंद परब — शाखा प्रमुख

    पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कथित लोन फर्जीवाड़े में इन लोगों की क्या भूमिका थी और इसके पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

    9 से 10 साल तक बकाया रहे कई लोन

    बैंक के मुताबिक, इस मामले से जुड़े कई लोन 9 से 10 साल तक बकाया रहे। आरोप है कि इस दौरान प्रभावी recovery action नहीं लिया गया।

    बाद में लोन की recovery नहीं होने के बाद RBI ने 29 मई 2023 को मराठा बैंक का Cosmos Bank में merger कर दिया।

    Merger के बाद Cosmos Bank की शिकायत पर विले पार्ले पुलिस ने FIR दर्ज की।

    अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में कथित फर्जी documents, 210 loan accounts, पैसों के transactions और इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका को भी देखा जा रहा है।

  • गिरफ्तार महिला को छुड़ाने थाने में घुसी भीड़, पुलिस से मारपीट; 9 गिरफ्तार

    गिरफ्तार महिला को छुड़ाने थाने में घुसी भीड़, पुलिस से मारपीट; 9 गिरफ्तार

    बिहार के पश्चिम चंपारण में गिरफ्तार महिला को छुड़ाने 15-20 लोग नवलपुर थाने में घुसे और पुलिस से मारपीट की। 9 आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी। जानिए घटना अब।

    बिहार: पश्चिम चंपारण जिले में गिरफ्तार एक महिला को पुलिस हिरासत से छुड़ाने की कोशिश ने नवलपुर थाने में हंगामा खड़ा कर दिया। मंगलवार रात करीब 9:40 बजे 15 से 20 लोग अचानक थाना परिसर में पहुंचे और जबरन OD यानी Officer on Duty कक्ष में घुस गए। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट की गई। मौके से पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि कई अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

    आखिर गिरफ्तार महिला कौन है?

    पूरी घटना की शुरुआत करीब 8:30 बजे हुई, जब नवलपुर थाना पुलिस ने चनपटिया थाना क्षेत्र के कैथवलिया गांव निवासी हरेंद्र साह की पत्नी किरण देवी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, किरण देवी किशोरी के अपहरण से जुड़े एक मामले में पिछले करीब सात महीने से फरार चल रही थी।

    नवलपुर पुलिस ने चनपटिया पुलिस की मदद से उसे पकड़ा और फिर नवलपुर थाना लेकर आई। महिला को थाने में महिला पुलिसकर्मी की निगरानी में रखा गया था।

    इसके करीब कुछ देर बाद दो लोग थाना पहुंचे और गिरफ्तार महिला के बारे में पुलिस से उग्र तरीके से पूछताछ करने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि दोनों शांत नहीं हुए।

    फोन कर जुटाई भीड़

    पुलिस के अनुसार, दोनों लोगों ने मोबाइल फोन से संपर्क कर कुछ और लोगों को थाने पर बुला लिया। करीब आधे घंटे के अंदर 15 से 20 लोग मोटरसाइकिल से थाना परिसर के गेट पर पहुंच गए।

    इसके बाद भीड़ जबरन OD कक्ष में घुस गई।

    आरोप है कि वहां ड्यूटी पर तैनात सहायक अवर निरीक्षक मितेंद्र कुमार राम और महिला सिपाही रितु कुमारी के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी।

    बीच-बचाव करने पहुंचे दूसरे पुलिसकर्मियों के साथ भी हाथापाई किए जाने का आरोप है।

    पुलिस अधिकारी भी पहुंचे, फिर बढ़ गया विवाद

    थाने में हंगामे की सूचना मिलने के बाद अपर थानाध्यक्ष मुकेश कुमार पाल, सअनि आसिफ अली खान और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।

    पुलिस के मुताबिक, स्थिति संभालने और बीच-बचाव करने की कोशिश के दौरान उपद्रवियों ने उनके साथ भी मारपीट शुरू कर दी।

    इसके बाद पुलिस बल ने आत्मरक्षा और सरकारी काम जारी रखने के लिए आवश्यक बल का इस्तेमाल किया। कार्रवाई के दौरान मौके से 9 लोगों को पकड़ लिया गया।

    नवलपुर थाने से पकड़े गए 9 आरोपी कौन हैं?

    पुलिस ने जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान:

    • राजू कुमार
    • राम नारायण कुमार
    • प्रकाश कुमार
    • जितेश कुमार
    • मनीष कुमार
    • अनुपम कुमार
    • बलिराम कुमार
    • रवि कुमार
    • नवनीत कुमार

    के रूप में हुई है।

    पुलिस के मुताबिक, इनमें ज्यादातर आरोपी चनपटिया थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। कुछ आरोपी मुफस्सिल और नवलपुर थाना क्षेत्र से भी बताए गए हैं।

    कितने लोग अभी फरार हैं?

    पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान करीब 15 से 20 लोग थाना परिसर में पहुंचे थे। कार्रवाई के दौरान 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि करीब 5 से 10 अन्य लोग मौके से भाग निकले

    नवलपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार के मुताबिक, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। फरार आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए आगे कार्रवाई की जाएगी।

    सात महीने से फरार महिला की गिरफ्तारी के बाद ही क्यों हुआ हंगामा?

    यह इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा है। पुलिस ने जिस महिला को गिरफ्तार किया था, वह किशोरी के अपहरण से जुड़े मामले में करीब सात महीने से फरार बताई जा रही है।

    ऐसे में पुलिस की कार्रवाई के बाद उसके बारे में जानकारी लेने के लिए पहले दो लोग थाने पहुंचे और फिर कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग वहां जुट गए।

    हालांकि, इन लोगों ने किस वजह से महिला को छुड़ाने की कोशिश की और उन्हें गिरफ्तारी के बारे में क्या जानकारी दी गई थी, इसकी पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही साफ होगी।

    नवलपुर में पुलिस पर हमले का यह पहला मामला नहीं

    नवलपुर थाना क्षेत्र में इससे पहले भी पुलिस टीम पर हमले की घटना सामने आ चुकी है। जून 2025 में एक आरोपी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसके परिजनों और अन्य लोगों द्वारा हमला किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस घटना में नवलपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई थी और पुलिस ने नामजद आरोपियों पर कार्रवाई की थी।

    ऐसे में मौजूदा घटना के बाद नवलपुर थाना क्षेत्र में पुलिस टीम की सुरक्षा और किसी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद संभावित भीड़ को लेकर पुलिस की आगे की कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी।

    अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल पुलिस की कार्रवाई तीन स्तर पर आगे बढ़ेगी। एक तरफ गिरफ्तार किए गए 9 लोगों के खिलाफ दर्ज मामले में कानूनी प्रक्रिया चलेगी, दूसरी तरफ फरार लोगों की पहचान और गिरफ्तारी की कोशिश होगी।

    इसके साथ ही जिस किशोरी के अपहरण मामले में किरण देवी को गिरफ्तार किया गया है, उसकी जांच भी आगे बढ़ेगी।

    मामले में FIR की वास्तविक धाराएं, गिरफ्तार आरोपियों की कोर्ट में पेशी और फरार लोगों की गिरफ्तारी के बाद ही यह साफ होगा कि इस पूरे प्रकरण में आगे कितनी बड़ी कार्रवाई होती है।

    थाने में घुसकर पुलिस की कार्रवाई रोकने और हिरासत में रखे गए व्यक्ति को जबरन छुड़ाने की कोशिश ने इस मामले को सामान्य गिरफ्तारी से आगे बढ़ाकर law and order का मुद्दा बना दिया है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस फरार आरोपियों तक कब पहुंचती है और मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है।

  • वायरल के चक्कर में तिरंगे का अपमान कितना सही? Riya Baliyan की माफी के बाद भी बड़ा सवाल—क्या माफीनामा पर्याप्त है?

    वायरल के चक्कर में तिरंगे का अपमान कितना सही? Riya Baliyan की माफी के बाद भी बड़ा सवाल—क्या माफीनामा पर्याप्त है?

    Riya Baliyan के तिरंगा विवाद पर माफी के बाद सवाल: क्या वायरल होने की कोशिश में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान सही है और क्या सिर्फ माफीनामा पर्याप्त है?

    मुजफ्फरनगर: सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाहत आज कई लोगों को ऐसे कंटेंट की तरफ ले जा रही है, जो कुछ ही घंटों में उन्हें चर्चा में ला देता है। लेकिन जब यह वायरल होने की कोशिश देश के राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ जाए, तो सवाल सिर्फ views और followers का नहीं रह जाता। सवाल यह बन जाता है कि वायरल होने के लिए तिरंगे के सम्मान से समझौता आखिर कहां तक सही है?

    मुजफ्फरनगर की Instagram influencer Riya Baliyan से जुड़े एक वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ। वीडियो में तिरंगे को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रदर्शित किए जाने को लेकर लोगों ने सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद Riya ने वीडियो जारी कर माफी मांगी और संबंधित वीडियो को हटा दिया।

    लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या माफीनामा इस विवाद को खत्म करने के लिए पर्याप्त है?

    गलती थी या वायरल होने की कोशिश?

    Riya ने अपनी सफाई में इसे अनजाने में हुई गलती बताया है। ऐसे में बिना ठोस सबूत यह कहना सही नहीं होगा कि उन्होंने जानबूझकर तिरंगे का गलत इस्तेमाल सिर्फ views या followers बढ़ाने के लिए किया।

    लेकिन सोशल मीडिया का मौजूदा सिस्टम एक दूसरी बहस जरूर खड़ी करता है।

    किसी विवादित वीडियो पर लोग नाराज होते हैं, उसे शेयर करते हैं, स्क्रीन रिकॉर्ड करते हैं, दूसरे pages पर पोस्ट करते हैं और creator का account खोजते हैं। यानी जिस content का विरोध किया जा रहा है, वही content कई बार creator को अतिरिक्त exposure भी दे सकता है।

    यही वजह है कि सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वीडियो क्यों बनाया गया था?

    सवाल यह भी है कि उस विवाद से किसे क्या मिला?

    वीडियो डिलीट हुआ, लेकिन क्या Viral Traffic भी खत्म हो गया?

    यह मान लेना आसान है कि वीडियो delete होने के बाद विवाद खत्म हो गया।

    लेकिन डिजिटल दुनिया में ऐसा जरूरी नहीं है।

    एक बार कोई Reel viral हो जाए तो उसके screenshots, screen recordings, reposts और reaction videos अलग-अलग platforms पर घूम सकते हैं। लोग original creator का नाम search कर सकते हैं और उसके दूसरे content तक पहुंच सकते हैं।

    यानी:

    वीडियो delete हो सकता है, लेकिन उससे पैदा हुई पहचान और digital reach जरूरी नहीं कि delete हो जाए।

    क्या गुस्सा भी किसी Creator की Reach बढ़ा सकता है?

    सोशल मीडिया पर “rage bait” शब्द इसी phenomenon से जुड़ा है—ऐसा provocative content जो लोगों में गुस्सा पैदा करके engagement और traffic हासिल करता है। Oxford University Press ने “rage bait” को 2025 का Word of the Year चुना था और बताया था कि इस term का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि Riya का वीडियो rage bait था।

    लेकिन यह जरूर समझने की जरूरत है कि सोशल मीडिया पर outrage खुद engagement पैदा कर सकता है।

    यानी कभी-कभी audience सोचती है—

    “हम इसका विरोध करके इसे सबक सिखा रहे हैं।”

    लेकिन platform की नजर से वही activity हो सकती है—

    Comment + Share + Profile Visit + Reaction = More Attention

    यही social media की सबसे बड़ी विडंबना है।

    क्या माफी मांगने के बाद भी जवाबदेही जरूरी है?

    माफी मांगना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कदम है।

    अगर कोई व्यक्ति गलती स्वीकार करता है, उसे हटाता है और सार्वजनिक रूप से माफी मांगता है, तो उसे सुनना भी जरूरी है।

    लेकिन राष्ट्रीय ध्वज जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय प्रतीक के मामले में सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ “गलती हो गई” कहना पर्याप्त है?

    कानून और Flag Code National Flag के सम्मानजनक प्रदर्शन और handling से जुड़े नियम निर्धारित करते हैं। National Flag के प्रति disrespect को Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत भी संबोधित किया गया है।

    इसलिए किसी मामले में गलती, लापरवाही और जानबूझकर किए गए अपमान के बीच अंतर करना जरूरी है।

    तिरंगे से जुड़े विवाद सिर्फ Riya Baliyan तक सीमित नहीं

    यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में National Flag से जुड़े कई विवाद सामने आए हैं।

    हाल ही में Fatehpur में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर पांच युवकों के खिलाफ तिरंगे के कथित अपमान को लेकर मामला दर्ज किया गया।

    वहीं दूसरी तरफ Nitin Nabin को लेकर वायरल हुई एक तस्वीर को BJP ने fake बताया और उसके खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई। यानी तिरंगे से जुड़ा हर वायरल दावा वास्तविक घटना हो, यह भी जरूरी नहीं है।

    इसलिए सोशल मीडिया users के लिए दोहरी जिम्मेदारी बनती है—

    गलत तरीके से तिरंगे के इस्तेमाल का विरोध करें, लेकिन किसी unverified तस्वीर या वीडियो को बिना जांचे viral भी न करें।

    असली सवाल: देशभक्ति या सिर्फ Social Media Outrage?

    तिरंगे का सम्मान किसी भी भारतीय के लिए बेहद संवेदनशील विषय है।

    लेकिन देशभक्ति का मतलब सिर्फ किसी वायरल वीडियो पर गुस्सा करना नहीं है।

    अगर कोई गलती करता है तो सवाल उठना चाहिए। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन बिना सबूत किसी व्यक्ति को देशद्रोही कहना, लगातार गाली देना या उसके हर पुराने content को खंगालकर उसे viral करना भी समाधान नहीं है।

    क्योंकि हो सकता है कि जिस account को आप “सबक सिखाने” के लिए search कर रहे हैं, उसी account की reach आप खुद बढ़ा रहे हों।

    Riya Baliyan की माफी के बाद अब क्या?

    Riya ने विवादित वीडियो हटाया है और माफी भी मांगी है।

    अब इस मामले में तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण हैं—

    पहला: क्या यह वास्तव में अनजाने में हुई गलती थी?

    दूसरा: क्या National Flag के display से जुड़े नियमों का उल्लंघन हुआ?

    तीसरा: क्या ऐसी गलती के बाद सार्वजनिक माफी पर्याप्त मानी जानी चाहिए या परिस्थितियों के अनुसार आगे भी कोई जवाबदेही बनती है?

    इन सवालों का जवाब भावनाओं से नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्य और कानून के आधार पर होना चाहिए।

    क्योंकि तिरंगा कोई Viral Content नहीं है

    सोशल मीडिया पर views कुछ घंटों में मिल सकते हैं, followers कुछ दिनों में बढ़ सकते हैं और controversy कुछ हफ्तों में खत्म हो सकती है।

    लेकिन राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान किसी algorithm का हिस्सा नहीं है।

    इसलिए सवाल Riya Baliyan से भी बड़ा है—

    “वायरल होने के चक्कर में तिरंगे का अपमान आखिर कहां तक सही है? और अगर गलती हो भी जाए, तो क्या सिर्फ एक माफीनामा उस गलती की पूरी कीमत चुका देता है?”

    इस विवाद का जवाब सिर्फ Riya Baliyan को नहीं, बल्कि उस पूरी सोशल मीडिया culture को देना होगा जहां attention के लिए outrage और outrage के लिए attention—दोनों एक-दूसरे को viral बनाते हैं।