Category: Corruption

Read the latest corruption news, investigations and in-depth reports from India and around the world. Stay informed with coverage on scams, bribery, financial fraud, government irregularities, public accountability and anti-corruption actions, only on Indian FastTrack.

  • Mumbai: 6, 200 करोड़ BMC संपत्ति टैक्स का घोटाला

    Mumbai: 6, 200 करोड़ BMC संपत्ति टैक्स का घोटाला

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने अपने ठेकेदार जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड से 550 करोड़ रूपये से अधिक का संपत्ति कर की मांग की है। जो पिछले कई सालों से बकाया चल रहा है। इसके साथ ही 6, 200 करोड़ रुपये का टैक्स घोटाला उजागर हो रहा है। (Mumbai Rs 6,200 crore BMC property tax scam)

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई- 
    बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) को अपने ठेकेदार जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड पर बकाया 550 करोड़ रुपये के संपत्ति कर के बारे में पत्र लिखा है। इस मामले को लेकर एमएमआरडीए और जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड (J Kumar Infrastructure Limited) दोनों ही एक दूसरे पर जिम्मेदारी धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। इसको लेकर समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने मनपा को सख्त रुख़ अपनाने का आग्रह किया है। (Mumbai Rs 6,200 crore BMC property tax scam)

    रेग्युलर पत्र व्यवहार के बावजूद, जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स ने अपने समझौते में एक खंड का हवाला दिया, जो संपत्ति कर भुगतान की जिम्मेदारी एमएमआरडीए पर डालता है, ऐसी खबरें प्रकाशित हो रही है। पिछले महीने भेजे गए एक पत्र में, मूल्यांकन और संग्रह विभाग से बीएमसी के संयुक्त नगर आयुक्त ने इस विवाद को उजागर करते हुए समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही संपत्ति टैक्स के 6, 200 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हो रहा है। (Mumbai Rs 6,200 crore BMC property tax scam)

    कौन है जिम्मेवार ?

    आप को बता दें कि जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड को चल रहे मेट्रो निर्माण के लिए आवश्यक कास्टिंग यार्ड और रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लॉन्ट की स्थापना के लिए विभिन्न बीएमसी वार्डों-एच/ईस्ट, एच/वेस्ट, के/ईस्ट, पी/नॉर्थ और एम/वेस्ट में सात भूखंड आवंटित किए गए हैं। बीएमसी के अनुसार, निविदा के खंड 2.7 में कहा गया है कि एमएमआरडीए को कास्टिंग यार्ड के रूप में आवंटित भूमि के लिए संपत्ति कर वहन करना होगा, जबकि ठेकेदार अन्य करों के लिए जिम्मेदार है। (Mumbai Rs 6,200 crore BMC property tax scam)

    क्या है घोटाला ?

    हालांकि, लीज एग्रीमेंट की शर्त संख्या 5 में जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स पर टैक्स भुगतान की जिम्मेदारी रखी गई थी, जिसके कारण ठेकेदार के नाम पर मूल्यांकन किया गया। कंपनी वर्तमान में मुंबई मेट्रो लाइन 2बी (डी एन नगर से मंडले) सहित प्रमुख मेट्रो परियोजनाओं में शामिल है। कई फॉलो-अप के दौरान, जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स ने कहा कि एमएमआरडीए भुगतान के लिए उत्तरदायी है, जिसके कारण बीएमसी ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किए जाने की मांग की है। (Mumbai Rs 6,200 crore BMC property tax scam)

    6200 करोड़ रूपये का बकाया

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि बकाया राशि को बिना किसी देरी के जिम्मेदार पक्ष द्वारा निपटाया जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने बीएमसी से जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स सहित प्रमुख संपत्ति कर चूककर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है। “इस वित्तीय वर्ष के लिए बीएमसी का संपत्ति कर लक्ष्य 6,200 करोड़ रुपये है, जिसका भुगतान दिसंबर तक किया जाना है।” (Mumbai Rs 6,200 crore BMC property tax scam)

    देरी से भुगतान पर जुर्माना

    विधायक रईस शेख ने कहा कि “देरी से भुगतान के लिए 2% जुर्माना के बावजूद, कई बड़े चूककर्ताओं ने अभी तक अपना बकाया नहीं चुकाया है। उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जो भुगतान करने में सक्षम हैं, लेकिन टैक्स की चोरी करना जारी रखते हैं।” इस बीच, एमएमआरडीए के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मेट्रो कार्य के लिए जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स को आवंटित खाली भूमि अस्थायी रूप से आवंटित की गई है और प्राधिकरण की शर्तों के अनुसार, ठेकेदार संपत्ति कर का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है। (Mumbai Rs 6,200 crore BMC property tax scam)

  • Mumbai: महिला IPS अधिकारी के पति पर 25 करोड़ की ठगी का आरोप

    Mumbai: महिला IPS अधिकारी के पति पर 25 करोड़ की ठगी का आरोप

    ईडी की गिरफ्त में एक महिला ips अधिकारी के पति पर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 25 करोड़ रुपये की ठगी का अपराधिक मामला दर्ज किया है। आरोपी पहले से एक मामले में ईडी की गिरफ्त में है। (Mumbai Woman IPS officer’s husband accused of fraud of Rs 25 crore)

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई-
    आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक आईपीएस अधिकारी के पति पुरषोत्तम चव्हाण और अन्य के खिलाफ सरकारी कोटे के फ्लैट कम कीमत पर देने का झांसा देकर 25 करोड़ रुपये की ठगी का अपराधिक मामला दर्ज किया है। (Mumbai Woman IPS officer’s husband accused of fraud of Rs 25 crore)

    फ्लैट और प्लॉट देने का झांसा

    न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी पुरषोत्तम चव्हाण पहले से ही एक अन्य मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्त में हैं. अब उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी दफ्तरों में अपने संपर्कों का हवाला देकर मुंबई के प्रभादेवी, दादर, परेल, ठाणे और पुणे में सरकारी कोटे के फ्लैट और प्लॉट कम दामों में दिलाने का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठ लिए हैं। (Mumbai Woman IPS officer’s husband accused of fraud of Rs 25 crore)

    फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप

    चव्हाण के अलावा इस मामले में उनके कुछ साथियों, परेल-शिवड़ी स्टांप रजिस्ट्रेशन कार्यालय के एक सहायक और अन्य अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। इन पर फर्जी बिक्री दस्तावेज तैयार करने में मदद करने का आरोप है। (Mumbai Woman IPS officer’s husband accused of fraud of Rs 25 crore)

    कारोबारी से 3.37 करोड़ की ठगी

    केदार डेगवेकर (57) नाम के एक कारोबारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मे फरियादी ने बताया कि जुलाई 2020 में चव्हाण ने उन्हें उनकी पत्नी के आधिकारिक निवास, जो कोलाबा पुलिस स्टेशन के ऊपर स्थित है, वहां बुलाया था। वहां उन्होंने खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले कुछ लोगों की मौजूदगी में डेगवेकर से एक बिक्री अनुबंध पर हस्ताक्षर करवाए और 3.37 करोड़ रुपये ले लिए। हालांकि, उन्हें अब तक वह तीन बीएचके फ्लैट नहीं मिला, जिसका वादा किया गया था। (Mumbai Woman IPS officer’s husband accused of fraud of Rs 25 crore)

    कोई गिरफ्तारी नहीं

    पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है। (Mumbai Woman IPS officer’s husband accused of fraud of Rs 25 crore)

  • BMC: मुंबई की सरकारी अस्पतालों में अब नहीं मिलेगी दवाई

    BMC: मुंबई की सरकारी अस्पतालों में अब नहीं मिलेगी दवाई

    बम्बई के सरकारी अस्पतालों में दवाओं को लेकर संकट गहरा रहा है। 120 करोड़ रूपये का बकाया नही मिलने के कारण दवाई आपूर्ति करने वाले कंपनियों ने सप्लाई पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई-
    बम्बई शहर और आस-पास के गरीब तबके के लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं पर इलाज के लिए एक मात्र सरकारी अस्पताल इन दिनों दवाई संकट से जूझ रहा है। जबकि यहां बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) द्वारा संचालित अस्पतालों की दवाइयां हमेशा से ही लोगों के इलाज में सटीक साबित हुई। प्राइवेट अस्पतालों के मुकाबले सरकारी अस्पताल के एक ही डोज से मरीज ठिक हो जाया करता है। लेकिन इन सरकारी अस्पतालों में दवाइयां उपलब्ध नही होने के कारण शहर भर के लोगों पर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा मंडराने लगा है। (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)

    क्या है पूरा मामला?

    मुंबई के बीएमसी द्वारा संचालित अस्पतालों को दवा आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने 120 करोड़ रुपये के बकाया नही मिलने के कारण डिलीवरी को निलंबित (Suspended) करने की धमकी दी है। यह कृष्णा डायग्नोस्टिक्स द्वारा आपली चिकित्सा योजना के तहत अपनी पैथोलॉजी सेवाओं को बंद करने के कुछ समय बाद हुआ है, जिसमें बकाया भुगतान नही किए जाने का का हवाला दिया गया था। (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)

    सोमवार से नही होगी दवाई की सप्लाई

    बीएमसी अस्पतालों में दवाई सप्लाई करने वाली 150 से अधिक कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली ऑल फूड एंड ड्रग्स लाइसेंस होल्डर फाउंडेशन (AFDLH Fondation) ने सोमवार 13 जनवरी यानी कल से दवाइयों की सप्लाई रोकने की घोषणा की है। कहा, कि यदि उनके चार महीने से लंबित 120 करोड़ रूपये का भुगतान नहीं किया जाता है। तो कोई भी कंपनी सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की सप्लाई नही करेगा। इस निर्णय के कारण बम्बई के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह से बाधित कर सकता है। इसमें बम्बई ही नही बम्बई और आस-पास को लोग भी स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करवा रहे हैं। (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)

    AFDLH Fondation के अध्यक्ष अभय पांडे ने आपूर्तिकर्ताओं के सामने मौजूद गंभीर वित्तीय स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमारे सदस्य वित्तीय बर्बादी के कगार पर हैं।” पश्चिमी उपनगरों के एक विक्रेता ने स्थिति पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “भुगतान में देरी असहनीय हो गई है। बीएमसी अस्पतालों को आपूर्ति करना एक निरंतर संघर्ष बन गया है, बार-बार याद दिलाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।” (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)

    BMC ने क्या कहा?

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त भूषण गगरानी को लिखे एक औपचारिक पत्र में संस्था ने वित्तीय तनाव की रूपरेखा प्रस्तुत की। पत्र में कहा गया है, कि “बकाया राशि के कारण हमारे सदस्य भारी दबाव में हैं। बार-बार संपर्क करने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ है। भुगतान पूरा होने तक आपूर्ति स्थगित करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।” इस बीच, बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग के उपायुक्त संजय कुर्हाड़े ने आश्वासन दिया, कि “इस मुद्दे को सुलझाने और संकट को हल करने के लिए प्रयास जारी हैं।” (BMC News Medicines will no longer be available in government hospitals of Mumbai)

  • मालवनी कच्चा रोड़ और एवरशाइन को जोड़ने वाला ब्रिज क्यों तोडना है जरूरी?

    मालवनी कच्चा रोड़ और एवरशाइन को जोड़ने वाला ब्रिज क्यों तोडना है जरूरी?

    मालाड़ पश्चिम के मालवनी कच्चा रोड़ से एवरशाइन नगर को जोड़ने वाले ब्रिज को लेकर भारतीय जनता पार्टी बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए लोगों की मुलभुत सुविधाओं से खिलवाड़ कर रही है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    मालाड़ पश्चिम के एक छोटे से ब्रिज को लेकर राजनीती तेज हो गई है। लेकिन इस राजनीतिक खेल में अकेले भारतीय जनता पार्टी लोगों के मुलभुत सुविधाओं के साथ खेल कर रही है और दूसरी पार्टियों के स्थानीय दिग्गज नेता मुकदर्शी बने तमाशा देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि ये सारा खेल एवरशाइन नगर के किनारे खाली पड़ी जमीन के बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। जबकि यही जमीन कभी मैंग्रोवस से भरी हुआ करती थी। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    भाजपा की दोहरी राजनीति से लोग परेशान

    खबर के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा मुंबई अध्यक्ष तेजिंदर सिंह तिवाना एवरशाइन नगर के निवासियों की आवाज बनकर मालवनी कच्चा रोड़ और एवरशाइन नगर को जोड़ने वाले ब्रिज को तोड़ने की मांग कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर कहा जा रहा है कि इस ब्रिज पर बाइक सवारों की वजह से दुर्घटना का खतरा है। जबकि एक समाजसेवक को यह जानने की जरूरत है कि इस ब्रिज के कारण लाखों लोगों को सफर करने में सहूलियत मिलती है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो शहर में कोई भी किसी भी रोड़ और रास्ते को बंद करने की मांग को लेकर आंदोलन पर बैठ जाएगा और दूसरी तरफ अगर इस ब्रिज को तोड़ दिया गया तो लाखों लोगों को मालवनी से बाहर निकलने के लिए लंबा और ट्रेफिक से जाम का सफर तय करना पडेगा। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    आम लोगों ने क्या कहा?

    दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी को मालवनी की जनता से कोई लेना देना नही है वो अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकती है। लेकिन हमारे इलाके के विधायक क्यों खामोश हैं। एक तरफ इसी ब्रिज को बनाने के लिए सरकारी खजाने का करोड़ों रूपया खर्च किया जाता है और दूसरी तरफ बेतूके कारण बता कर उसे तोड़कर आम लोगों का नुकसान किया जाता है। ये तो आम जनता के साथ सरासर अन्याय है। बता दें कि भाजपा के तेजिंदर सिंह तिवाना बेतूके कारण बताकर आंदोलन का इशारा दे रहे हैं। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    क्या है पूरा मामला?

    तेजिंदर सिंह ने बताया कि एवरशाइन नगर के निवासियों ने पुल पर अवैध रूप से बनाए गए रैंप को ध्वस्त करने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम और मुंबई पुलिस को अल्टीमेटम देने का फैसला किया है। निवासियों ने इस पैदल यात्री पुल का उपयोग करने वाले दोपहिया वाहन सवारों के लिए खतरे पर चर्चा करने के लिए शनिवार शाम को एक सार्वजनिक बैठक का आयोजन किया। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    निवासियों द्वारा BMC और पुलिस को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि रैंप के कारण कई दुर्घटनाएँ हुई हैं, जिनमें से कई में वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं। निवासियों ने बाइकर्स को प्रवेश की अनुमति देने वाले रैंप को ध्वस्त करने, FOB पर बाइकर्स को इसका उपयोग करने से रोकने के लिए ट्रैफ़िक पुलिस को तैनात करने और बाइकर्स को पुल पर जाने से रोकने के लिए बोलार्ड लगाने की मांग की है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    विरोध प्रदर्शन की योजना

    निवासियों ने 20 जनवरी तक की समयसीमा तय की है, जिसके विफल होने पर वे एक बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं, जिसमें एवरशाइन नगर के निवासी और भाजपा कार्यकर्ता तजिंदर सिंह तिवाना द्वारा अनिश्चितकालीन अनशन भी शामिल है। बैठक में तिवाना ने कहा, “हमने इन अवैध रैंपों को गिराने के लिए बीएमसी और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

    समाज सेवकों से अपील

    इस ब्रिज को जबरन अगर प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। तो मालवनी और मालाड़ के लाखों समाजसेवकों और आरटीआइ कार्यकर्ताओं से अनुरोध है कि एवरशाइन से सटे रिक्त भूखंड पर क्या होने वाला है उस पर नजर बनाए रखें। बता दें कि इसके पहले यहाँ मैंग्रोवस की घनी झाडियां हुआ करती थी। कुछ साल पहले इसी ब्रिज के अचानक गिर जाने की वजह से काफी सारे लोग घायल हुए थे। उसी समय धडल्ले से यहा अवैध मिट्टी की भरनी कर मैंग्रोवस को नष्ट कर दिया गया। इस अवैध भरनी की शिकायत पर भरनी माफिया चौरसिया के खिलाफ मालवनी पुलिस थाने में एफआईआर भी दर्ज है। जबकि ध्यान देने बात यह है कि आज भी यहां मैंग्रोवस की झाड़ियां मौजूद है। (Why is it necessary to break the bridge connecting Malvani Kachha Road and Evershine?)

  • IT Commissioner निकला छठी पास, 40 लोगों की लूट, 2 करोड़ का चूना

    IT Commissioner निकला छठी पास, 40 लोगों की लूट, 2 करोड़ का चूना

    मुंबई में आयकर विभाग का कमिश्नर बनकर 40 से अधिक लोगों को धोखा देने वाले छठी पास बदमाश को क्राईम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और सीबीआई में नौकरी दिलाने के बहाने 40 लोगों को 2 करोड़ रुपये चूना लगाने वाले बदमाश के पास से पुलिस ने फर्जी आईडी कार्ड, नियुक्ति पत्र और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।

    न्यूज़ डेस्क
    मुंबई
    – महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के पास से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक छठी क्लास पास बदमाश ने खुद को आयकर विभाग का अधिकारी बताया और 40 लोगों को चूना लगा दिया। आरोपी ने इन चालीस लोगों से करीब 2 करोड़ रुपये ठगे हैं। शातिर बदमाश को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा पुलिस ने उसके पास से आयकर विभाग की 28 फर्जी ID कार्ड बरामद की है। वहीं, पुलिस ने फर्जी नियुक्ति पत्र, लेटर हेड और अन्य डॉक्यूमेंट भी बरामद किए हैं।

    दरअसल, मुंबई से सटे नालासोपारा क्राइम ब्रांच की यूनिट-3 ने एक फर्जी आयकर अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया, कि आरोपी आयकर विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 40 से ज्यादा बेरोजगार लोगों से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का पैसा ठग चुका है।

    सिर्फ छठी क्लास पढ़ा है आरोपी

    क्राइम ब्रांच यूनिट-3 ने इस फर्जी अधिकारी को नवी मुंबई के तलोजा इलाके से पकड़ा है। गिरफ्तार आरोपी का नाम रिंकू जीतू शर्मा बताया जा रहा है, जिसकी उम्र 33 साल है। वह पेशे से ड्राइविंग का काम करते हैं और केवल छठी क्लास पास है। इसके बावजूद, बेरोजगारों से वादा करता था कि उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में उच्च पदों पर नौकरी दिलाएगा। इसी वादे का झांसा देकर लोगों से मुंह मांगी कीमत मांग लेता था। ऐसा करते हुए उसने कई बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसा लिया और बाद में फर्जी नियुक्ति पत्र और आईडी कार्ड भी दिया।

    IT डिपार्टमेंट और CBI की फर्जी आईडी बरामद

    क्राइम ब्रांच ने तकनीकी विश्लेषण और गुप्त सूचना के आधार पर 7 जनवरी को नवी मुंबई के तलोजा फेज-2 से उसे हिरासत में लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से 28 फर्जी पहचान पत्र बरामद किए हैं। इनमें आयकर विभाग के सहायक आयुक्त, गृह विभाग के सहायक आयुक्त और सीबीआई विभाग के पुलिस आयुक्त जैसे पदों के फर्जी आईडी कार्ड शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि इसके अलावा, उसके पास से फर्जी स्टांप, नियुक्ति पत्र, और लेटर हेड सहित अन्य दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

    कब हुआ ठगी का खुलासा ?

    12 दिसंबर 2024 को पेल्हार पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने आयकर कमिश्नर होने का नाटक करते हुए शिकायतकर्ता की बेटी को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। उसने 15 लाख रुपये ऐंठने के बाद फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र दिए। जब बेटी की नौकरी नहीं लगी, तब धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

    पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को आज यानी बुधवार, 8 जनवरी, वसई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 13 जनवरी तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया। पुलिस मामले की और अधिक तहकीकात कर रही है।

  • Mumbai- समुद्री तट पर प्रॉपर्टी लीगल करने के लिए सरकारी दस्तावेजों से हेरफेर, 4 गिरफ्तार 18 अधिकारियों से पूछताछ

    Mumbai- समुद्री तट पर प्रॉपर्टी लीगल करने के लिए सरकारी दस्तावेजों से हेरफेर, 4 गिरफ्तार 18 अधिकारियों से पूछताछ

    मुंबई समुद्र तटीय क्षेत्र में बड़े जमीन घोटाले का खुलासा हुआ है। 102 फर्जी प्रॉपर्टी नकशे के आधार पर अवैध निर्माण किए गए। चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बीएमसी तथा भूमि रिकॉर्ड विभाग के 18 अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया था। एसआईटी ने जांच में खुलासा किया है कि उसने मुंबई समुद्र तटरेखा के किनारे मालाड़ पश्चिम के मार्वे, मढ़ आइलैंड और वर्सोवा के तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) और नो डेवलपमेंट जोन (NDZ) की जमीन पर बड़े स्तर पर कंस्ट्रक्शन पाया। इतना ही नहीं जमीन में निर्माण के लिए संपत्ति रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई। जांच के बाद सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी के साथ बड़े स्तर पर जमीन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र तट के किनारे कम से कम 102 प्रॉपर्टी नकशे से जुड़े घोटाले के लिए पिछले सप्ताह दो पूर्व सरकारी कर्मचारियों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा कुल मिलाकर, बीएमसी और भूमि रिकॉर्ड अनुभाग के 18 सरकारी कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    कहाँ हुआ जमीन घोटाला

    इस घोटाले में कथित तौर पर एस्टेट एजेंट, सरकारी कर्मचारी और ठेकेदार शामिल हैं, जिन्होंने मालाड़ पश्चिम के मार्वे, मढ़ आइलैंड, वर्सोवा और अन्य पर्यावरण के लिए संवेदनशील स्थानों में भूमि रिकॉर्ड में बदलाव किया। मालाड़ पश्चिम एरंगल के एक किसान वैभव ठाकुर ने सबसे पहले इस हेराफेरी के मामले को उजागर किया। वैभव एक खानदानी किसान है और एक खेती की जमीन के मालिक भी हैं। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    एफआईआर पर गिरफ्तारी नही हुई

    वैभव ठाकुर ने 2021 में अपने प्लॉट और आस-पास की जमीनों पर अवैध निर्माण के खिलाफ गोरेगांव पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। ठाकुर ने पाया कि CRZ और NDZ भूखंडों को बनाने के लिए क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में जालसाजी की गई थी। हालांकि, BMC और गोरेगांव पुलिस सहित अन्य अधिकारियों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    फिर से उछला मामला

    कुछ समय के बाद भूमि अभिलेख उपाधीक्षक नितिन सालुंखे ने 2021 में एक और FIR दर्ज कराइ। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए 2012 और 2020 के बीच नक्शे और दस्तावेजों में जालसाजी की गई है। यह मामला 2022 में विधानसभा में गूंजा और सरकार को एक जांच समिति गठित करनी पड़ी। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    कैसे हुई गिरफ्तारी?

    समिति के निष्कर्ष बॉम्बे हाई कोर्ट में तब प्रस्तुत किए गए जब मूल शिकायतकर्ता वैभव ठाकुर ने सरकार के निष्कर्षों के बावजूद निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की। अक्टूबर 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर गठित SIT को कुल चार FIR की जांच करने का काम सौंपा गया था। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम के नेतृत्व में चार गिरफ्तारियां की हैं। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    आरटीआइ के आड़ मे घोटाले

    एसआईटी के अनुसार, चारों आरोपियों ने सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर पिछले कुछ वर्षों में 102 प्रॉपर्टी नकशे और अभिलेखों में हेराफेरी की। इसमें फर्जी सिटी सर्वे नंबर, गैर-मौजूद निर्माण और बदली हुई सीमाएं जैसे गलत विवरण शामिल थे। आरटीआई अनुरोध दाखिल करने की आड़ में जाली मानचित्र वितरित किए गए। बीएमसी अधिकारियों ने कथित तौर पर इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निर्माण और बिक्री को मंजूरी दी, इन सरकारी विभाग मे भ्रष्ट अधिकारियों के कारण सरकार को काफी हद तक राजस्व का नुकसान और पर्यावरण को क्षति पहुंचाने का काम हुआ है। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    1955 से 1984 के दस्तावेजों में हेरफेर

    जांच में पाया गया कि उप अधीक्षक के कार्यालय में रखे गए 1955-1984 के 884 स्थायी गणना मानचित्रों में से 102 फर्जी थे। इन मानचित्रों के आधार पर निर्माण किया गया, जो 1964 से पहले अस्तित्व में ही नहीं थे। महाराष्ट्र सरकार ने एसआईटी के निष्कर्षों के बाद, शहरी विकास के प्रमुख सचिव और पुणे में भूमि अभिलेखों के निदेशक को सार्वजनिक अभिलेखों में हेराफेरी करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    नागपुर से मूल मानचित्र जब्त

    एसआईटी ने नागपुर में महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर से सभी 884 मूल मानचित्र और उनकी डिजिटल प्रतियां जब्त कर ली हैं। आगे की जांच में अतिरिक्त संदिग्धों की पहचान करने और सभी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पिछले गुरुवार को, एसआईटी ने 50 वर्षीय अवैध ठेकेदार नरशिम पुत्तवल्लू को गिरफ्तार किया, जो सभी चार एफआईआर में आरोपी है, साथ ही सिटी सर्वे ऑफिस के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों देवदास जाधव और मरडे और रियल एस्टेट एजेंट इमाम शेख को भी गिरफ्तार किया है। उन पर बीएमसी और भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से रिकॉर्ड में जालसाजी करने का मामला दर्ज किया गया था। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    पुलिस ने क्या कहा?

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘सीआरजेड और एनडीजेड भूमि पर अवैध निर्माण ने पारिस्थितिकी संतुलन (ecological balance) को बुरी तरह प्रभावित किया है। राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। बीएमसी और भूमि अभिलेख विभाग के कुल 18 अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया के कारण जांच में देरी हुई।’ (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

  • सोने की तस्करी में एयरपोर्ट स्टाफ को रंगे हाथ पकड़ा, 6.05 KG सोना जब्त

    सोने की तस्करी में एयरपोर्ट स्टाफ को रंगे हाथ पकड़ा, 6.05 KG सोना जब्त

    मुंबई एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी करते हुए दो कर्मचारियों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मौके पर एयरपोर्ट में काम करने वाले दो कर्मचारी तस्करी का सोना लेकर एयरपोर्ट से बाहर ले जा रहे थे। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के अधिकारियों ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।

    विशेष संवाददाता
    मुंबईछत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर काम करने वाले दो कर्मचारियों को डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के अधिकारियों ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। ये लोग एयरपोर्ट के ड्यूटी फ्री शॉप मे काम करते थे। इसके साथ ही तस्करी का सोना खरीदने वाले दो ग्राहकों को भी गिरफ्तार किया है। इनके पास से कुल 6.05 किलोग्राम सोना जब्त किया गया है। जिसकी बाज़ार मूल्यांकन लगभग 4.84 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

    मुंबई में सोने की तस्करी

    मुंबई एयरपोर्ट पर डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने सोने की बड़ी तस्करी का खुलासा किया है। डीआरआई ने मुंबई एयरपोर्ट पर काम करने वाले दो कर्मचारियों को सोने की तस्करी करते हुए पकड़ा है। साथ ही 6.05 किलोग्राम सोना भी जब्त किया है। जिसकी कीमत 4.84 करोड़ रुपये बताई जा रही है। एयरपोर्ट के स्टाफ सोना चुराकर गिरफ्तार ग्राहकों को बेचने के लिए जा रहे थे। पुलिस इस मामले को लेकर जांच पड़ताल कर रही है। डीआरआई के सूत्रों के अनुसार इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

    दो एयरपोर्ट स्टाफ और दो ग्राहक गिरफ्तार

    मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर “ड्यूटी फ्री शॉप” मे काम करने वाले गिरफ्तार दोनो कर्मचारी एयरपोर्ट पर काम करने के अलावा सोने की तस्करी भी कर रहे थे। ये लोग सोने की छोटी-छोटी खेप को इंटरनेशनल ट्रांजिट टर्मिनल से निकालकर इकट्ठा करते थे। जिसके बाद उसे बाहर ले जाकर बेच देते थे। डीआरआई के अधिकारियों ने दो एयरपोर्ट स्टाफ मेंबर्स को तस्करी किया हुआ सोना हवाई अड्डे से बाहर ले जाते समय गिरफ्तार किया है। जिसके बाद दो ग्राहकों को भी गिरफ्तार किया गया। ये ग्राहक यानी रिसीवर इन एयरपोर्ट स्टाफ के साथ एक सिंडीकेट बनाकर काम कर रहे थे।

    सोने का पाउडर बरामद

    डीआरआई और एयरपोर्ट के कस्टम्स विभाग ने सोने की जांच मे पांच बड़ी गोलियां और दो पैकेट मे सोने का पाउडर बरामद किया है। डीआरआई ने कहा कि कुल 6.05 किलोग्राम सोना जब्त किया गया है। अधिकारी ने बताया कि कस्टम एक्ट 1962 के तहत तस्करी का सोना जब्त किया गया है। साथ ही सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की और अधिक तहकीकात की जा रही है।

  • MHADA: किराया मांगने गये तो पुलिस की कर दी पिटाई, म्हाडा कार्यालय में हंगामा

    MHADA: किराया मांगने गये तो पुलिस की कर दी पिटाई, म्हाडा कार्यालय में हंगामा

    रिडेवलपमेंट के तहत निर्माण किए जा रहे म्हाडा के प्रोजेक्ट में मकान मालिक को किराये का पैसा देने की जगह म्हाडा के अधिकारी द्वारा मार पीट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जबकि पीड़ित एक पूर्व पुलिस अधिकारी है। ऐसे में आम नागरिकों के साथ कैसा सलुक किया जाता होगा? इसपर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    खेरवाड़ी पुलिस ने म्हाडा के उपाध्यक्ष संजीव जायसवाल और 12 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एक पूर्व पुलिस अधिकारी (शिकायतकर्ता) पर शारीरिक हमला करने और गैरकानूनी तरीके से लोगों को इकट्ठा करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। कथित तौर पर जायसवाल ने म्हाडा कार्यालय में शिकायतकर्ता को थप्पड़ मारा, जिसके बाद सुरक्षा कर्मचारियों और अधिकारियों ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया और उसके साथ मारपीट की। इसके साथ ही जायसवाल ने कथित तौर पर उसे जान से मारने की धमकी दी। मामला 26 दिसंबर को दर्ज हुआ। लेकिन, पुलिस ने अभी तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। (Mumbai news When he went to ask for fare, he beat up the police, commotion in MHADA office)

    क्या है मामला?

    खेरवाड़ी पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता, 60 वर्षीय विजय चालके, अंधेरी पश्चिम में रहने वाले एक सेवानिवृत्त सहायक पुलिस अधिकारी हैं। जो पहले डीएन नगर में स्थित म्हाडा (महाराष्ट्र आवास और क्षेत्र विकास प्राधिकरण) के तहत मंगलमूर्ति सोसाइटी नामक एक इमारत में रहते थे। इमारत का म्हाडा द्वारा पुनर्विकास किया जा रहा है। 2016 से चालके और 12 अन्य परिवारों को म्हाडा से उनका किराया नहीं मिला है। चालके ने इसको लेकर म्हाडा में शिकायत दर्ज कराई थी।

    शिकायत करने का नतीजा

    26 दिसंबर को चालके और बाकी परिवार के अन्य सदस्य पिछला किराया के बारे में पूछताछ करने म्हाडा कार्यालय गए हुए थे। विजिटिंग रूम में प्रतीक्षा करते समय, जायसवाल शाम करीब 5 बजे पहुंचे और चालके से कहा, कि वह फिर से कार्यालय नहीं आएंगे और अन्य लोगों से बाद में आने के लिए कहा। जब चालके ने इस पर सवाल उठाया, तो कथित तौर पर जायसवाल नाराज हो गए और उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके तुरंत बाद, लगभग 10 से 12 सुरक्षा कर्मचारी और अन्य कर्मचारी विजिटिंग रूम में पहुंचे। वे चालके को दूसरे कमरे (कमरा नंबर 520) में ले गए और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। कथित तौर पर कुछ सुरक्षा गार्डों ने चालके के हाथ और पैर पकड़ लिए, जबकि जायसवाल और अन्य ने उन्हें मुक्कों और लात-घूंसों से पीटा। (Mumbai news When he went to ask for fare, he beat up the police, commotion in MHADA office)

    पुलिस ने लिया जायज़ा

    जायसवाल ने चालके को कथित तौर पर धमकाया और कहा कि वह पुलिस आयुक्त को सूचित करेंगे, उन्हें मुठभेड़ में मार देंगे और उनकी पेंशन बंद कर देंगे। कथित तौर पर आरोपियों ने चालके की सोने की चेन और ईयरफोन भी तोड़ दिए। पुलिस जल्द ही घटनास्थल पर पहुंची और चालके को इलाज के लिए सांताक्रूज ईस्ट के वी.एन. देसाई अस्पताल ले गई। इसके बाद चालके ने जायसवाल और 12 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। (Mumbai news When he went to ask for fare, he beat up the police, commotion in MHADA office)

  • Mumbai: सरकारी अस्पताल में सफाई कर्मचारी ने की ECG, अस्पताल को मिला लिगल नोटिस

    Mumbai: सरकारी अस्पताल में सफाई कर्मचारी ने की ECG, अस्पताल को मिला लिगल नोटिस

    मुंबई के एक सरकारी अस्पताल में सफाई कर्मचारी द्वारा इकोकार्डियोग्राम (ECG) किए जाने के सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पता चला है कि सफाई कर्मचारी ने 29 दिसंबर को एक मरीज पर ईसीजी किया था। इसी सिलसिले में अस्पताल को लिगल नोटिस दिया गया है। (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    सरकारी अस्पताल में गड़बड़ी और लापरवाही की खबर तो हमेशा आती रहती है। लेकिन एक सफाई कर्मचारी डाक्टर बनकर मरीजों का इलाज करने का सनसनीखेज मामला पहली बार सामने आया है। मुंबई के गोवंडी स्थित शताब्दी अस्पताल को एक कानूनी नोटिस मिला है। जिसमें अस्पताल के एक सफाई कर्मचारी ने कथित तौर पर इकोकार्डियोग्राम (ईसीजी) किया है। पता चला है कि सफाई कर्मचारी ने 29 दिसंबर को एक मरीज पर ईसीजी किया था। (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    कैसे मिली जानकारी?

    इस घटना की जानकारी तब प्रकाश में आई जब शहर के वकील आबिद अब्बास सैय्यद ने मुख्यमंत्री और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न राज्य अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। खबर के मुताबिक, एडवोकेट सैय्यद ने इस घटना को मेडिकल प्रोटोकॉल और मरीज सुरक्षा का घोर उल्लंघन बताया है। हालांकि अस्पताल ने इस घटना से इनकार नहीं किया, लेकिन उन्होंने कर्मचारी की हरकत का बचाव करते हुए कहा, कि सफाई कर्मचारी “प्रक्रिया करने के लिए पर्याप्त शिक्षित और योग्य था।” (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    बताया गलतफहमी

    अस्पताल प्रशासन के एक सदस्य ने कहा, “ईसीजी मशीनें सिर्फ़ एक बटन दबाने से काम करती हैं। कर्मचारियों ने सिर्फ़ ईसीजी किया था और उचित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पेशेवर डॉक्टरों ने रिपोर्ट ली थी।” पहले इसी सदस्य ने इस घटना को “गलतफ़हमी” भी बताया। अस्पताल ने आगे कहा कि मरीज़ नियमित जांच के लिए अस्पताल आया था और उसकी हालत गंभीर नहीं थी। हालांकि, अपने नोटिस में अधिवक्ता सैय्यद ने कहा कि इस घटना ने अस्पताल द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मरीज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रशासन की ज़िम्मेदारी पर भी सवाल उठाया है। (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में तत्काल सुधार

    एड्वोकेट सैय्यद ने अधिकारियों से घटना की जांच करने का आग्रह किया है और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में तत्काल सुधार की मांग की है। सैय्यद ने अपने नोटिस में कहा, “मरीजों को उम्मीद है कि उन्हें योग्य स्वास्थ्य सेवा पेशेवर डॉक्टरों द्वारा इलाज किया जाएगा। लेकिन इस तरह की घटनाएं लापरवाही की चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करती हैं।” (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

    नोटिस में यह भी दावा किया गया है कि खबरों से पता चला है कि शताब्दी अस्पताल और अन्य सरकारी सुविधाओं के कुछ डॉक्टर निजी क्लीनिक चला रहे हैं, जो उन नियमों का उल्लंघन है, जो उन्हें निजी प्रैक्टिस करने से रोकते हैं। (Mumbai Sanitation worker did ECG in government hospital, hospital got legal notice)

  • Mumbai: जनवरी से अगस्त के बीच राज्य में भ्रष्टाचार के 499 मामले दर्ज

    Mumbai: जनवरी से अगस्त के बीच राज्य में भ्रष्टाचार के 499 मामले दर्ज

    राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी अधिकारियों की गिरफ्तारी के आंकड़े चौका देने वाले प्रकाश में आ रहे हैं। इस साल सिर्फ जनवरी से अगस्त के बीच कुल 499 केस दर्ज हुए हैं। जो राज्य में सरकारी महकमों मे भ्रष्टाचार चरम सीमा पर होने का सबूत पेश कर रहा है। (Maharashtra 499 cases of corruption registered in the state between January and August)

    इस्माईल शेख
    मुंबई
    – राज्य में सिर्फ 9 महिनों के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ दर्ज मुकदमे, यहां के सरकारी महकमों के काली कमाई का खुलासा कर रहा है। महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Maharashtra Anti Corruption Bureau) से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक पता चला है कि ज्यादातर रिश्वतखोरी के मामले राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारियों से संबंधित हैं, इसके बाद पुलिस, पंचायत समिति और जिला परिषद के अधिकारी शामिल हैं। इस साल जनवरी से अगस्त के बीच राज्य में भ्रष्टाचार के 499 मामले दर्ज किए गए हैं। जिनमें 472 रिश्वतखोरी, 22 आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े पांच अन्य मामले शामिल हैं। (Maharashtra 499 cases of corruption registered in the state between January and August)

    भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन ..

    सबसे ज्यादा 134 मामले राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। इसके बाद पुलिस 88, पंचायत समिति 42, जिला परिषद 32, महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) 27 और शिक्षा विभाग के खिलाफ 24 केस दर्ज किए गए हैं। (Maharashtra 499 cases of corruption registered in the state between January and August)

    कौन सा विभाग सबसे ज्यादा है भ्रष्ट ?

    महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Anti Corruption Bureau) ने खुलासा करते हुए बताया कि रिश्वतखोरी के मामलों में शामिल ज्यादातर 345 अधिकारी तृतीय श्रेणी के सरकारी अधिकारी हैं। इसके बाद 71 द्वितीय श्रेणी के अधिकारी, 46 प्रथम श्रेणी के अधिकारी और 28 चतुर्थ श्रेणी के अधिकारी हैं। 186 रिश्वतखोरी के मामलों में शामिल रिश्वत की रकम 1.49 करोड़ रुपये है। रिश्वत की सबसे अधिक 41.24 लाख रुपये की राशि पुलिस के अधिकारियों से संबंधित है। उसके बाद राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग 21.13 लाख रुपये, जिला परिषद 14.57 लाख रुपये और पंचायत समिति 9.6 लाख रुपये का जब्त किए गए है। (Maharashtra 499 cases of corruption registered in the state between January and August)

    Related Quires:-

    • Mumbai Anticorruption News
    • कौन सा विभाग सबसे ज्यादा है भ्रष्ट
    • sabse bada vibhag
    • sabse bada vibhag kaun sa hai
    • किसी भी विभाग का सबसे बड़ा मंत्री कौन होता है
    • सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार वाला राज्य
    • आबकारी विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी कौन होता है
    • सबसे बड़ा कौन होता है
    • बिजली विभाग में सबसे बड़ा अधिकारी कौन है
    • सबसे भ्रष्ट विभाग
    • सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार वाला देश
    • उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा अधिकारी कौन है
    • बिजली विभाग में सबसे बड़ा अधिकारी कौन होता है
    • पुलिस विभाग में सबसे बड़ा कौन होता है
    • पुलिस विभाग में सबसे बड़ा अधिकारी कौन है
    • वन विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी कौन है
    • van vibhag ka sabse bada adhikari kaun hota hai
    • दुनिया का सबसे बड़ा पद कौन सा है
    • सिंचाई विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी कौन होता है
    • बिजली विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी
    • bijli vibhag ka sabse bada adhikari
    • विश्व का सबसे बड़ा संगठन कौन सा है
    • थाने में सबसे बड़ा कौन होता है
    • भारत का सबसे बड़ा थाना कौन सा है
    • पुलिस विभाग में सबसे बड़ा पद कौन सा होता है
    • भारत में सबसे बड़ा पद कौन सा होता है
    • भारत में सबसे बड़ा पद कौन सा है
    • सरकारी विभाग कौन-कौन से होते हैं
    • राजस्व विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी कौन है
    • राजस्व विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी कौन होता है
    • राजस्व विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी
    • कितने विभाग होते हैं
    • बिजली विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी कौन है
    • सरकारी विभाग कितने होते हैं