दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध जताया। जानें नए प्रदर्शन स्थल और पूरा मामला।
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थलों के रूप में नामित किया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध जताते हुए कहा, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।”
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित मतदाता सूची अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन हुए। CJP ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी थी।
दिल्ली पुलिस ने कौन-से तीन प्रदर्शन स्थल तय किए?
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के आदेश के अनुसार, जंतर-मंतर की जगह तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं:
- रामलीला मैदान
- बुराड़ी मैदान
- CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली
यह निर्णय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है।
अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने पर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन की निर्धारित जगह से हटा दिया गया है और अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा। उनके बयान में सरकार और व्यवस्था के खिलाफ राजनीतिक आलोचना भी शामिल थी।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और विरोध दर्ज कराने के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जंतर-मंतर को सूची से हटाने से पहले संबंधित पक्षों से सलाह ली गई थी या नहीं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कानूनी स्थिति
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक तथा बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर संविधान के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने से जुड़े मामले पर 13 अक्टूबर 2026 को सुनवाई निर्धारित की गई थी। प्रदर्शन के दौरान कथित उत्पीड़न से संबंधित एक अन्य याचिका भी सुनवाई के लिए रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में भी दिल्ली में प्रदर्शन के प्रबंधन और उससे जुड़े प्रतिबंधों के मुद्दे पर कार्यवाही हुई।
इस मामले में निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने और हर परिस्थिति में सभी प्रकार के शांतिपूर्ण विरोध पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बीच अंतर करना जरूरी है। वास्तविक कानूनी स्थिति संबंधित आदेश, अनुमति प्रक्रिया और अदालतों के निर्देशों पर निर्भर करेगी।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर CJP और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद के बीच अब तीन वैकल्पिक स्थलों की व्यवस्था लागू की गई है। अभिजीत दीपके का “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा” वाला बयान इसी फैसले के विरोध में आया है।
