Borivali-Malad Sewer Tunnel का ब्रेक-थ्रू पूरा, प्रोजेक्ट 90% तैयार। BMC ने 31 जुलाई 2027 की डेडलाइन रखी, जानें किन इलाकों को मिलेगी राहत।
मुंबई: बोरिवली से मालाड तक बनाई जा रही 5.8 किलोमीटर लंबी भूमिगत सीवेज टनल का अंतिम ब्रेक-थ्रू 9 अक्टूबर 2026 को डॉन बॉस्को स्कूल जंक्शन, बोरिवली में सफलतापूर्वक पूरा हो गया। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मुताबिक, Priority Sewer Tunnel Phase 1 का 90% काम पूरा हो चुका है और पूरे प्रोजेक्ट को 31 जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस टनल से पश्चिमी उपनगरों में ओवरलोड सीवेज नेटवर्क का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, टनल का ब्रेक-थ्रू पूरा होने का मतलब यह नहीं है कि सीवेज की समस्या अभी से खत्म हो गई है।
इस प्रोजेक्ट का सीधा संबंध दहिसर, बोरिवली, गोराई, शिंपोली, चारकोप, कांदिवली और मालाड जैसे इलाकों की मलजल निकासी व्यवस्था से है। मौजूदा नेटवर्क पर बढ़ते दबाव के कारण कई जगह सीवेज पाइपलाइनें अपनी क्षमता से अधिक लोड पर चल रही हैं। नई टनल इसी समस्या को कम करने के लिए बनाई जा रही है।
5.8 किलोमीटर लंबी टनल में क्या है खास?
बोरिवली के डॉन बॉस्को स्कूल जंक्शन से मालवणी-मालाड स्थित नए मालाड इनफ्लुएंट पंपिंग स्टेशन (IPS) तक इस भूमिगत टनल का निर्माण किया जा रहा है। इसका आंतरिक व्यास 3.2 मीटर है और इसकी घोषित मलजल वहन क्षमता 1,182 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) है।
टनल की खुदाई मालाड की तरफ से बोरिवली की दिशा में की गई। इसके निर्माण में सेगमेंटल लाइनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। प्रोजेक्ट में कुल पांच शाफ्ट, तीन ड्रॉप शाफ्ट और छह स्क्रीन चेंबर शामिल हैं।
ब्रेक-थ्रू का मतलब है कि सुरंग की खुदाई अपने निर्धारित अंतिम बिंदु तक पहुंच गई है। इसके बाद भी बाकी निर्माण कार्य, जरूरी कनेक्शन, उपकरणों की जांच और पूरी व्यवस्था की कमीशनिंग महत्वपूर्ण चरण होंगे। BMC ने अभी इस प्रेस नोट में सीवेज का नियमित प्रवाह शुरू होने की अलग तारीख नहीं बताई है।
दहिसर से चारकोप तक सीवेज ओवरफ्लो का दबाव घटने की उम्मीद
पश्चिमी उपनगरों में मौजूदा मलजल नेटवर्क की क्षमता बढ़ते प्रवाह के मुकाबले कम पड़ रही है। इसके कारण सीवेज पाइपलाइनें अधिभारित यानी Surcharge स्थिति में रहती हैं। नई टनल इस अतिरिक्त मलजल को नए मालाड इनफ्लुएंट पंपिंग स्टेशन तक पहुंचाने की व्यवस्था का हिस्सा है।
BMC के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से दहिसर, बोरिवली, गोराई, शिंपोली और चारकोप क्षेत्र में मलजल वहन क्षमता बढ़कर 1,136 MLD तक पहुंचने में मदद मिलेगी। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा टनल की 1,182 MLD की घोषित क्षमता से अलग है। दोनों आंकड़े अलग तकनीकी संदर्भों में दिए गए हैं और इनके बीच के अंतर की विस्तृत गणना उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।
प्रोजेक्ट पूरा होने और व्यवस्था चालू होने के बाद मौजूदा सीवेज पाइपलाइनों पर दबाव घटने की उम्मीद है। इससे ओवरलोडिंग के कारण होने वाली समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अलग-अलग इलाकों में वास्तविक राहत कितनी मिलेगी, यह नई व्यवस्था के परिचालन और स्थानीय नेटवर्क की स्थिति पर निर्भर करेगा।
चार पंपिंग स्टेशनों के रखरखाव खर्च में बचत का दावा
इस प्रोजेक्ट के तहत गोराई, शिंपोली, चारकोप और मालाड के मौजूदा पंपिंग स्टेशनों की जरूरत समाप्त होने की योजना बताई गई है। इन स्टेशनों पर नियमित रखरखाव और मरम्मत के लिए होने वाला खर्च कम हो सकता है।
लेकिन इन स्टेशनों को वास्तव में कब बंद किया जाएगा, उनकी जगह नई व्यवस्था किस तरह काम करेगी और इससे सालाना कितनी बचत होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे तत्काल लागू हो चुका बदलाव नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट के अपेक्षित लाभ के रूप में देखना चाहिए।
मालाड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की भूमिका भी अहम
सीवेज टनल का काम मलजल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना है, जबकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में उसका उपचार किया जाता है। समुद्र और नदियों में जाने वाले मलजल की गुणवत्ता सुधारने के लिए दोनों व्यवस्थाओं का सही तरीके से काम करना जरूरी है।
मालाड में 454 MLD क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेड भी व्यापक मलजल प्रबंधन योजना का हिस्सा है। इसमें सेकेंडरी ट्रीटमेंट के साथ 227 MLD के लिए अतिरिक्त टर्शियरी ट्रीटमेंट की व्यवस्था प्रस्तावित है। उपलब्ध परियोजना जानकारी में इस अपग्रेड की पूर्णता समयसीमा जुलाई 2028 बताई गई है।
इस समयसीमा और सीवेज टनल की जुलाई 2027 की डेडलाइन को देखते हुए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नई टनल चालू होने पर मलजल किस व्यवस्था से होकर गुजरेगा और उपचार की आवश्यक क्षमता कैसे सुनिश्चित होगी। केवल टनल का निर्माण पूरा होना जल प्रदूषण समाप्त होने की गारंटी नहीं है।
प्रोजेक्ट की लागत और पुरानी डेडलाइन का सवाल
Priority Sewer Tunnel Phase 1 की मूल दर्ज लागत 549.50 करोड़ रुपये थी। BMC के पुराने बजट और परियोजना समीक्षा दस्तावेजों में इसकी पूर्णता की तारीख अगस्त 2026 दर्ज थी, जबकि अब 31 जुलाई 2027 का लक्ष्य सामने आया है।
पुराने दस्तावेजों में GST दर में बदलाव के कारण ठेकेदार की ओर से अतिरिक्त भुगतान का दावा किए जाने का उल्लेख भी मिलता है। लेकिन उपलब्ध जानकारी से यह पुष्टि नहीं होती कि दावा की गई राशि कितनी थी, कितनी मंजूर हुई या परियोजना की मौजूदा संशोधित लागत क्या है।
इसलिए वर्तमान लागत और समयसीमा में बदलाव के कारणों को स्पष्ट करने के लिए नवीनतम संशोधित कार्यादेश, लागत विवरण और प्रगति रिपोर्ट महत्वपूर्ण होंगे। केवल पुरानी और नई तारीखों के अंतर से देरी का कारण या किसी पक्ष की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।
Phase 1 पूरा होने से पूरा नेटवर्क तैयार नहीं होगा
Priority Sewer Tunnel योजना के दूसरे चरण यानी Phase 2 का मार्ग गोरेगांव पंपिंग स्टेशन से नए मालाड इनफ्लुएंट पंपिंग स्टेशन तक प्रस्तावित है। यह Phase 1 से अलग काम है और इसके लिए अलग टेंडर जारी किया गया था।
इसलिए बोरिवली में अंतिम ब्रेक-थ्रू को पूरे पश्चिमी उपनगरों के मलजल नेटवर्क के पूर्ण होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। Phase 2 की मौजूदा प्रगति, संशोधित समयसीमा और लागत की ताजा पुष्टि भी जरूरी है।
BMC की पर्यावरणीय रिपोर्ट में मलजल के निस्तारण के लिए BOD, TSS और Fecal Coliform जैसे गुणवत्ता मानकों का उल्लेख है। प्रोजेक्ट के पर्यावरणीय लाभ को समझने के लिए आगे यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि नई व्यवस्था चालू होने के बाद मलजल का उपचार निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
फिलहाल, 5.8 किलोमीटर टनल का अंतिम ब्रेक-थ्रू एक महत्वपूर्ण निर्माण उपलब्धि है। लेकिन पश्चिमी उपनगरों के निवासियों को सीवेज ओवरफ्लो से वास्तविक राहत कब मिलेगी, इसका स्पष्ट जवाब बाकी निर्माण कार्य, न्यू मालाड पंपिंग स्टेशन की तैयारी और संबंधित मलजल उपचार व्यवस्था के चालू होने के बाद ही मिलेगा। BMC ने पूरे Phase 1 प्रोजेक्ट को 31 जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
