घाटकोपर के बर्वेनगर में खेल रहे नाबालिग की गर्दन में कथित तौर पर इंजेक्शन टोचा गया। अस्पताल में इलाज जारी, पुलिस जांच में जुटी।
मुंबई: घाटकोपर स्थित बर्वेनगर इलाके में स्कूल के पास खेल रहे एक नाबालिग बच्चे की गर्दन में कथित तौर पर इंजेक्शन टोचे जाने की घटना से इलाके में चिंता बढ़ गई है। बच्चा अपने दोस्तों के साथ मैदान में खेल रहा था, तभी वहां मौजूद नशा करने वाले लोगों के समूह ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ मारपीट करने के बाद गर्दन में इंजेक्शन टोच दिया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे संत मुक्ताबाई महानगरपालिका सर्वसाधारण अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
मामला बर्वेनगर में महापालिका स्कूल क्रमांक 3 के पास स्थित मैदान का बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्चा दोस्तों के साथ खेलने गया था। इसी दौरान वहां नशा कर रहे लोगों के एक समूह से उसका सामना हुआ। बच्चे को पकड़कर उसके साथ मारपीट की गई और उसकी गर्दन में इंजेक्शन लगाया गया। कुछ ही देर बाद उसे चक्कर आने लगा और वह मैदान में गिर पड़ा। साथ मौजूद बच्चों ने घटना की जानकारी उसके परिवार को दी, जिसके बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।
इंजेक्शन में क्या था, अभी साफ नहीं
घटना का सबसे अहम सवाल यह है कि बच्चे की गर्दन में टोचे गए इंजेक्शन में आखिर कौन सा पदार्थ था। अभी इसकी कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इंजेक्शन में किसी खास नशीले पदार्थ के होने का अभी तक कोई दावा सामने नहीं आया है। पुलिस की जांच और मेडिकल जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इंजेक्शन में क्या था और बच्चे की तबीयत बिगड़ने की वजह क्या रही।
इस्तेमाल की गई सुई या सिरिंज अगर पहले किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में इस्तेमाल हुई थी, तो संक्रमण का खतरा भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूषित सुई से हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एचआईवी जैसे रक्त से फैलने वाले संक्रमण का जोखिम हो सकता है। ऐसे में बच्चे की मेडिकल जांच और डॉक्टरों की निगरानी इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण है।
स्कूल के पास नशेड़ियों का जमावड़ा क्यों?
बर्वेनगर के जिस इलाके में घटना हुई, वहां लंबे समय से नशा करने वाले लोगों की मौजूदगी को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। मैदान के आसपास का कुछ हिस्सा अपेक्षाकृत सुनसान बताया जाता है। आसपास खड़े पुराने या भंगार वाहनों में भी नशा करने वालों के बैठने की बात सामने आई है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इसी क्षेत्र के पास महापालिका स्कूल है और बच्चे यहां खेलने आते हैं। ऐसे में मैदान की सुरक्षा, रोशनी, सीसीटीवी, नियमित निगरानी और पुलिस गश्त को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुंबई के पार्क और मैदान पहले से निगरानी में
मुंबई के सार्वजनिक उद्यानों और खुले मैदानों में नशा करने वालों की मौजूदगी का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। इस साल मार्च में सार्वजनिक उद्यानों और खुले स्थानों में नशे के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए बीएमसी और मुंबई पुलिस की संयुक्त कार्रवाई की बात सामने आई थी। इसमें उद्यानों और खेल मैदानों में अचानक जांच और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया था।
अप्रैल में भी मुंबई के उद्यानों में नशा, शराब और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतों के बीच रात की पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग उठी थी। जुलाई में राज्य सरकार की ओर से ड्रग्स-फ्री मुंबई अभियान भी शुरू किया गया था। ऐसे में बर्वेनगर की यह घटना सार्वजनिक मैदानों में इन उपायों की जमीनी निगरानी पर सवाल खड़े करती है।
एक दिन पहले मालाड में भी सामने आया था इंजेक्शन का मामला
मुंबई में सार्वजनिक जगहों पर नशे से जुड़ी घटनाओं को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि एक दिन पहले मालाड पूर्व के आप्पापाड़ा इलाके के एक बीएमसी गार्डन में 19 वर्षीय अमन सोनी की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया था। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि कुछ युवक उसे गार्डन ले गए थे और वहां ड्रग्स का इंजेक्शन दिया गया। पुलिस ने चार युवकों को हिरासत में लेकर जांच शुरू की थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की बात सामने आई थी।
मालाड और घाटकोपर की घटनाओं के बीच किसी तरह का सीधा संबंध अभी सामने नहीं आया है। दोनों मामलों को एक ही गिरोह या एक ही नशीले पदार्थ से जोड़ने का भी कोई आधार नहीं है। लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने मुंबई के सार्वजनिक उद्यानों और मैदानों में नशे की समस्या तथा बच्चों और युवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ाई है।
पुलिस जांच में अब इन सवालों के जवाब अहम
घाटकोपर पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि बच्चे पर हमला करने वाले कितने लोग थे, उनकी पहचान हुई या नहीं, घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है या नहीं और इस्तेमाल की गई सिरिंज बरामद हुई या नहीं।
इसके साथ ही पुलिस और बीएमसी के स्तर पर यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि इस मैदान में पहले नशे से जुड़ी कोई शिकायत मिली थी या नहीं, वहां नियमित गश्त होती है या नहीं और बच्चों के खेलने वाले इस स्थान पर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं।
फिलहाल बच्चे का इलाज जारी है और घटना में इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन की वास्तविक प्रकृति तथा आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
