पार्टिसिपेट मुंबई के जरिए 450 से अधिक परियोजनाओं में नागरिक, कंपनियां और संस्थाएं जुड़ेंगी। बीएमसी शिकायत निवारण और सेवाओं में भी सुधार करेगी।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका मंगलवार 6 अक्टूबर को ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ परियोजना का औपचारिक लोकार्पण करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में होने वाले इस कार्यक्रम के साथ महानगरपालिका और समग्र संस्था के बीच नागरिक सेवाओं में सुधार को लेकर समझौता भी किया जाएगा। इस पहल के जरिए एक तरफ मुंबई की 450 से अधिक नागरिक परियोजनाओं को कंपनियों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों की क्षमता से जोड़ने की व्यवस्था होगी, वहीं दूसरी तरफ शिकायत निवारण, आपातकालीन प्रतिक्रिया और नागरिक सेवाओं को आसान बनाने के लिए प्रशासनिक बदलाव किए जाएंगे।
कार्यक्रम सुबह 11 बजे महानगरपालिका मुख्यालय स्थित महानगरपालिका सभागार में होगा। इसमें उपमुख्यमंत्री तथा मुंबई शहर के पालकमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, विधानसभा अध्यक्ष तथा स्थानीय विधायक राहुल नार्वेकर, कौशल, रोजगार, उद्यमिता व नवाचार मंत्री तथा मुंबई उपनगर के सह पालकमंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और सूचना प्रौद्योगिकी व सांस्कृतिक कार्य मंत्री तथा मुंबई उपनगर के पालकमंत्री आशीष शेलार मौजूद रहेंगे।
महापौर रितू तावडे और उपमहापौर संजय घाडी की प्रमुख उपस्थिति रहेगी। विधायक अमित साटम विशेष अतिथि होंगे। स्थानीय सांसद अरविंद सावंत तथा विधायक सुनील शिंदे और राजहंस सिंह भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।
कार्यक्रम में महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे, सभागृह नेता गणेश खणकर, स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे, विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर, शिवसेना गटनेता अमेय घोले, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गटनेता अशरफ आजमी, एआईएमआईएम के गटनेता विजय उबाळे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के गटनेता यशवंत किल्लेदार और समाजवादी पार्टी की गटनेता अमरीन अब्रहानी भी उपस्थित रहेंगी।
इसके अलावा सुधार समिति अध्यक्ष संध्या दोशी-सक्रे, शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर, बेस्ट समिति अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव, ए, बी और ई प्रभाग समिति अध्यक्ष ज्ञानराज निकम, स्थापत्य समिति शहर अध्यक्ष यामिनी जाधव, स्थापत्य समिति उपनगर अध्यक्ष संगीता शर्मा, सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष हरिष भांदीर्गे, बाजार एवं उद्यान समिति अध्यक्ष हेतल गाला, विधि समिति अध्यक्ष दीक्षा कारकर, महिला एवं बाल कल्याण समिति अध्यक्ष मीनल तुर्डे, स्थानीय नगरसेविका हर्षिता नार्वेकर, अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे और उपायुक्त प्रशांत सपकाळे सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।
450 से अधिक परियोजनाओं के लिए एक मंच
‘पार्टिसिपेट मुंबई’ को महानगरपालिका की नागरिक जरूरतों और समाज तथा उद्योग जगत में उपलब्ध ज्ञान, कौशल, तकनीक, सामग्री, उपकरण, सेवाओं और मानव संसाधन को जोड़ने वाले एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया गया है। आधिकारिक मंच पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, उद्यान, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों की परियोजनाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसका मतलब यह है कि किसी कंपनी को केवल आर्थिक योगदान ही नहीं करना होगा। वह अपनी तकनीकी विशेषज्ञता, उपकरण, सामग्री, सेवाएं या विशेषज्ञ उपलब्ध कराकर भी किसी परियोजना से जुड़ सकती है। आम नागरिक और विशेषज्ञ भी स्वयंसेवक के रूप में अपना समय और कौशल दे सकते हैं।
आधिकारिक मंच पर परियोजनाओं को क्षेत्र के अनुसार देखा जा सकता है और कई परियोजनाओं के साथ उनका अनुमानित मूल्य तथा भागीदारी से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध है। स्वयंसेवी भागीदारी के लिए भी अलग व्यवस्था है, जिसमें समुद्र तट सफाई, पौधरोपण, स्वास्थ्य शिविर और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम जैसे काम शामिल हैं।
कंपनियां अपनी परियोजनाएं भी सुझा सकेंगी
इस पहल को केवल बीएमसी द्वारा तैयार परियोजनाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। कंपनियां, स्वयंसेवी संस्थाएं और अन्य भागीदार मुंबई के लिए अपनी नई योजनाएं, तकनीकी समाधान या सामाजिक पहल भी प्रस्तावित कर सकेंगे।
इन प्रस्तावों की संबंधित महानगरपालिका विभाग तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच करेंगे। परियोजना की उपयोगिता, व्यवहार्यता और मुंबई की वास्तविक जरूरत से उसका संबंध देखने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एचयूएल, आरपीजी, सीएमएस और नारायणा जैसी संस्थाओं की ओर से अपनी विशेषज्ञता के आधार पर प्रस्ताव दिए जाने की जानकारी दी गई है। इन प्रस्तावों पर संबंधित विभागों की ओर से आगे की प्रक्रिया चल रही है।
27 सामाजिक उत्तरदायित्व भागीदार, 23 संस्थाएं जुड़ीं
महानगरपालिका के अनुसार इस पहल से 27 सामाजिक उत्तरदायित्व भागीदार, 23 स्वयंसेवी संस्थाएं, 56 कार्यान्वयन भागीदार और 500 से अधिक स्वयंसेवक जुड़ चुके हैं।
पहल में सामाजिक उत्तरदायित्व की राशि सीधे महानगरपालिका को हस्तांतरित करने के बजाय वस्तुओं, उपकरणों, तकनीक, सेवाओं, विशेषज्ञ ज्ञान, कौशल और परियोजना क्रियान्वयन जैसे प्रत्यक्ष योगदान को प्राथमिकता दी जा रही है।
हालांकि परियोजनाओं के कुल मूल्य को लेकर उपलब्ध आधिकारिक सामग्री में दो अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं। एक स्थान पर यह मूल्य 180 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है, जबकि बाद के विवरण में करीब 280 करोड़ रुपये का उल्लेख है। इसलिए इस अंतर को स्पष्ट किए बिना किसी एक आंकड़े को अंतिम कुल मूल्य मानना उचित नहीं होगा।
बीएमसी की सेवाओं में भी बदलाव की तैयारी
‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के साथ होने वाला समग्र संस्था के साथ समझौता अलग लेकिन इससे जुड़ा महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। इसका उद्देश्य मुंबई के नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं की प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को अधिक तेज, आसान और जवाबदेह बनाना है।
इसमें नागरिकों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई, अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आग, बाढ़, चिकित्सा आपदा जैसी परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया पर जोर रहेगा।
शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके समाधान तक की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एकीकृत शिकायत प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था विकसित करने की योजना है।
कम होंगे कागजी काम और कार्यालयी चक्कर
नागरिकों और कारोबारियों से जुड़ी सेवाओं की मौजूदा प्रक्रियाओं की समीक्षा कर अनावश्यक दस्तावेज, कार्यालयों के चक्कर और प्रतीक्षा अवधि कम करने पर जोर दिया जाएगा। जहां संभव होगा, सेवाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
नागरिक और कारोबारी सेवाओं के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए प्रक्रियाओं की समीक्षा होगी। प्रभाग स्तर से लेकर महानगरपालिका के वरिष्ठ नेतृत्व तक कामकाज की निगरानी के लिए वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था विकसित की जाएगी।
महानगरपालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने, विभागों के बीच समन्वय सुधारने और जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट करने के लिए बदलाव प्रबंधन की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी।
नागरिकों को क्या फायदा होगा
इस पूरी पहल का सीधा असर नागरिक सेवाओं पर पड़ने की उम्मीद है। शिकायतों के तेजी से निपटारे, आपात स्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया, कम कागजी कार्रवाई, कम प्रतीक्षा और सरल सेवाओं को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया है।
वहीं ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के जरिए स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, उद्यानों, सार्वजनिक स्थानों, स्वच्छता, पर्यावरण और कचरा प्रबंधन जैसी जरूरतों के लिए अतिरिक्त तकनीकी और सामाजिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।
नागरिक स्वयंसेवक के रूप में जुड़ सकेंगे
मुंबई के विकास में योगदान देने के इच्छुक युवा, विद्यार्थी, विशेषज्ञ, पेशेवर और सेवानिवृत्त अनुभवी लोग भी अपनी क्षमता के अनुसार जुड़ सकेंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, तकनीक, जागरूकता, कौशल विकास और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में स्वयंसेवी योगदान की व्यवस्था की गई है।
योगदान देने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रमाणपत्र तथा सार्वजनिक सम्मान देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, ताकि दूसरे नागरिक और संगठन भी शहर के विकास में भाग लेने के लिए प्रेरित हों।
बीएमसी के पास रहेगी प्रशासनिक जिम्मेदारी
समग्र संस्था के साथ समझौते के बावजूद महानगरपालिका ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक जिम्मेदारी, निर्णय लेने की शक्ति और कामकाज की अंतिम जवाबदेही महानगरपालिका के पास ही रहेगी।
सुधार प्रक्रिया को मिशन के रूप में लागू करने की योजना है। नियमित समीक्षा और कार्यप्रदर्शन मापने के जरिए कम और मध्यम अवधि में ऐसे परिणाम हासिल करने पर जोर रहेगा जिन्हें मापा जा सके और जिनका असर नागरिकों को सीधे महसूस हो।
इस पहल की अगली बड़ी परीक्षा यही होगी कि डिजिटल मंच पर उपलब्ध परियोजनाओं में वास्तविक भागीदारी कितनी बढ़ती है और प्रशासनिक सुधारों से शिकायतों के समाधान, सेवा प्राप्त करने में लगने वाले समय तथा नागरिकों के रोजमर्रा के अनुभव में कितना ठोस बदलाव आता है।
