महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित हुआ है। पुणे के 8 तालुकों में राहत उपाय लागू, फसल नुकसान का मुआवजा सर्वे के बाद तय होगा।
मुंबई: महाराष्ट्र के 358 में से 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित कर दी गई है। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में तत्काल राहत उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं। पुणे जिले के भोर, वेल्हे, खेड़, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड और पुरंदर तालुकों को भी सूखा प्रभावित सूची में शामिल किया गया है।
लंबे समय तक बारिश नहीं होने और खरीफ फसलों पर पड़े असर को देखते हुए यह फैसला सूखा प्रबंधन व्यवस्था के तहत लिया गया है। राज्य में प्रभावित तालुकों की संख्या कुल 358 में से करीब 74 प्रतिशत है।
पुणे के 8 तालुकों में सूखे का असर
पुणे जिले के आठ तालुकों में खरीफ मौसम के दौरान बारिश की कमी से फसलों और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। भोर, वेल्हे, खेड़, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड और पुरंदर को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने के बाद इन क्षेत्रों में राहत उपाय लागू होंगे।
कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने दौंड, बारामती और इंदापुर सहित प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसल और पानी की स्थिति का जायजा लिया था। ग्रामीण इलाकों में खरीफ फसलों के नुकसान के साथ पेयजल और पशुओं के लिए पानी तथा चारे को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
किसानों को कर्ज से लेकर बिजली तक राहत
सूखा प्रभावित तालुकों में किसानों को भू-राजस्व में छूट दी जाएगी। अल्पकालिक फसल ऋणों के पुनर्गठन और कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कृषि पंपों के बिजली बिल में भी राहत दी गई है। 7.5 अश्वशक्ति तक के कृषि पंपों के बिजली बिल से जुड़ी राहत पहले से लागू थी। नई व्यवस्था में इससे अधिक क्षमता वाले कृषि पंपों के लिए भी प्रभावित क्षेत्रों में रियायत का प्रावधान किया गया है। सूखा प्रभावित गांवों में बिजली की कमी के कारण कृषि पंपों के बिजली कनेक्शन नहीं काटने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राहत में विद्यार्थियों और मजदूरों को भी शामिल किया गया
सूखा प्रभावित क्षेत्रों के स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क में छूट देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम उपलब्ध कराने के नियमों में ढील दी जाएगी।
फसल खराब होने से कृषि पर निर्भर मजदूरों की आय प्रभावित होने की स्थिति में रोजगार गारंटी के काम उनके लिए वैकल्पिक आय का माध्यम बन सकते हैं।
पानी और चारे की व्यवस्था पर भी जोर
सूखा प्रभावित गांवों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जाएंगे। पशुओं के लिए पानी और पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण के काम शुरू करने और किसानों तथा कृषि मजदूरों के लिए अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
फसल नुकसान का मुआवजा अभी तय नहीं
सूखा घोषित होने के बावजूद किसानों को मिलने वाली फसल नुकसान की अंतिम आर्थिक सहायता की राशि अभी तय नहीं हुई है। इसके लिए पहले खेतों में फसल नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
जिला कलेक्टरों को पंचनामा तैयार करने और सर्वेक्षण किए गए खेतों की तस्वीरों के साथ जीपीएस निर्देशांक दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। यह जानकारी कृषि विभाग के माध्यम से आगे भेजी जाएगी। नुकसान के आकलन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अलग सरकारी निर्णय के जरिए आर्थिक सहायता तय की जाएगी।
इसका मतलब यह है कि सूखा प्रभावित घोषित होने के बाद राहत उपाय तुरंत लागू हो रहे हैं, लेकिन फसल नुकसान का प्रत्यक्ष मुआवजा कितना मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
पुणे में रबी फसल के लिए समय से पहले पानी
खरीफ फसल पर बारिश की कमी का असर पड़ने के बीच पुणे के ग्रामीण इलाकों में रबी फसल के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की तैयारी भी तेज की गई है।
खड़कवासला बांध प्रणाली से मुठा नहर में पानी छोड़ने की प्रक्रिया सामान्य समय से करीब तीन सप्ताह पहले शुरू की गई है। 25 सितंबर से पानी छोड़े जाने की योजना है। इससे दौंड और इंदापुर सहित सिंचाई पर निर्भर ग्रामीण क्षेत्रों को रबी फसल के लिए पानी मिलने की उम्मीद है।
पुणे में बारिश की लंबी कमी
पुणे में इस वर्ष बारिश के लंबे अंतराल ने स्थिति को और गंभीर बनाया है। शिवाजीनगर में 1 अगस्त के बाद 24 सितंबर तक 54 दिनों के दौरान एक दिन भी 10 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश दर्ज नहीं हुई। यह 2018 के बाद वहां ऐसा सबसे लंबा दौर बताया गया है।
राज्य स्तर पर भी 1 जून से 18 सितंबर के बीच सामान्य 932.3 मिलीमीटर के मुकाबले करीब 755.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो लगभग 18.8 प्रतिशत कम है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की कमी एक जैसी नहीं रही और कई इलाकों में स्थिति इससे अधिक गंभीर रही।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे का असर
सूखा घोषित किए गए 265 तालुके राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फैले हैं। विदर्भ में 95, मराठवाड़ा में 74, उत्तर महाराष्ट्र में 49, पुणे संभाग में 35 और कोंकण में 12 तालुके प्रभावित हैं।
खरीफ मौसम में सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तुअर, मूंग और उड़द जैसी फसलों पर बारिश की कमी का असर पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में फसल की स्थिति के साथ कीट और रोग की समस्या भी सामने आई है।
अब किसानों को क्या देखना होगा
अगले चरण में सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया फसल नुकसान का सर्वेक्षण और पंचनामा है। खेतों की स्थिति का दस्तावेजीकरण होने के बाद नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी आकलन के आधार पर आगे आर्थिक सहायता का निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल सरकार की ओर से ऋण, बिजली, भू-राजस्व, पानी, चारा, रोजगार और परीक्षा शुल्क से जुड़े राहत उपाय लागू किए गए हैं। वहीं, फसल नुकसान के लिए मिलने वाली अंतिम आर्थिक सहायता का फैसला सर्वेक्षण और सत्यापन पूरा होने के बाद किया जाना है।
