मुंबई के हीरा कारोबार में ₹4 करोड़ के मामले में कई व्यापारियों की जांच, 983 कैरेट हीरों के भुगतान विवाद पर BKC Police ने केस दर्ज किया।
मुंबई: मुंबई के BKC स्थित Bharat Diamond Bourse से जुड़े हीरा कारोबार में करीब ₹4 करोड़ के कथित भुगतान विवाद ने पुलिस जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एक कारोबारी पर 983 कैरेट के हीरे बिक्री के लिए लेने के बाद उनका भुगतान नहीं करने और माल वापस नहीं करने का आरोप है। इस मामले में BKC Police ने Smit Alpeshbhai Shah के खिलाफ मामला दर्ज किया है और उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपी द्वारा BDB के कुछ अन्य कारोबारियों से भी इसी तरह हीरे लेने की बात सामने आई है।
मामला Stellar Gems Private Limited की शिकायत पर दर्ज किया गया है। कंपनी के sales manager Mrugesh Hasmukh Shah ने पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी की Smit Shah की firm Parshwapadya Diamond के साथ पिछले कुछ महीनों से diamond trading चल रही थी। शुरुआती transactions में payment समय पर मिलने के कारण दोनों के बीच कारोबारी भरोसा बना।
इसके बाद कारोबार का दायरा बढ़ा और Stellar Gems ने कई consignments में 983 कैरेट के diamonds बिक्री के लिए दिए। इनकी कीमत करीब ₹4 करोड़ बताई गई है।
भुगतान का समय आया तो संपर्क टूट गया
शिकायत के मुताबिक, diamonds दिए जाने के बाद तय समय में payment नहीं किया गया। कंपनी की ओर से रकम के लिए आरोपी से संपर्क करने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन payment नहीं मिला। शिकायतकर्ता का आरोप है कि diamonds भी वापस नहीं किए गए।
मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब जून 2026 के बाद आरोपी ने कथित तौर पर फोन कॉल और messages का जवाब देना बंद कर दिया। इसके बाद Stellar Gems की ओर से BKC Police में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो सामने आया कि आरोपी ने Bharat Diamond Bourse से जुड़े कुछ अन्य diamond traders से भी इसी तरह diamonds लिए थे। हालांकि, दूसरे कारोबारियों की संख्या, उनसे लिए गए diamonds की मात्रा और उनकी कुल कीमत अभी जांच का विषय है।
आरोपी तक कारोबारी संपर्क कैसे पहुंचा?
शिकायत में आरोपी और Stellar Gems के बीच बने कारोबारी संबंध की शुरुआत का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता Mrugesh Hasmukh Shah, Shum Diamond Company के proprietor Rajendra Momaya को जानते थे। शिकायत के अनुसार, Momaya ने उनकी पहचान Smit Shah की firm Parshwapadya Diamond से कराई थी।
इसके बाद दोनों firms के बीच diamond trading शुरू हुई। शुरुआत में transactions का payment समय पर होने के कारण कारोबारी संबंध आगे बढ़े। इसी दौरान बाद की consignments में बड़ी मात्रा में diamonds दिए गए।
यानी पुलिस के सामने अब सिर्फ यह सवाल नहीं है कि करीब ₹4 करोड़ के diamonds का payment क्यों नहीं हुआ, बल्कि यह भी जांच का विषय है कि आरोपी ने दूसरे कारोबारियों के साथ कितने ऐसे transactions किए और उन transactions का बाद में क्या हुआ।
Diamond Memo/Jangad व्यवस्था भी महत्वपूर्ण कड़ी
इस मामले को समझने के लिए diamond industry में इस्तेमाल होने वाली Memo या Jangad व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। B2B diamond trade में कई बार supplier दूसरे trader को diamonds बिक्री के लिए देता है। इसे memorandum या consignment arrangement के तहत किया जा सकता है। माल बिकने के बाद settlement हो सकता है और तय शर्तों के अनुसार unsold stock वापस किया जा सकता है।
Gem & Jewellery Export Promotion Council (GJEPC) के Code of Ethics में memorandum transactions के लिए consignment records, stock register, receiving confirmation और insurance जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।
इसी वजह से इस मामले की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि Stellar Gems और आरोपी की firm के बीच diamonds किस कारोबारी arrangement के तहत दिए गए थे, delivery और receiving का रिकॉर्ड क्या था तथा payment और return की शर्तें क्या तय थीं।
हालांकि, इन specific agreements या documents की पूरी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
जांच अब सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं
इस मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि पुलिस की शुरुआती जांच में BDB के अन्य कारोबारियों से भी diamonds लेने की बात सामने आई है। अगर इन transactions की पुष्टि होती है, तो मामले का दायरा एक कंपनी के कथित ₹4 करोड़ के नुकसान से आगे बढ़ सकता है।
पुलिस को अब अलग-अलग transactions की कड़ियों को जोड़ना होगा। इसमें यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी ने किन कारोबारियों से diamonds लिए, कब लिए, किस value के लिये लिए, payment या return की क्या शर्तें थीं और संबंधित stock की स्थिति क्या है।
फिलहाल दूसरे कारोबारियों से जुड़े कथित transactions की कुल value सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए करीब ₹4 करोड़ को पूरे मामले का अंतिम financial loss मानना जल्दबाजी होगी।
‘फर्जी कंपनी’ बनाने का भी आरोप
शिकायत में Smit Shah पर diamond traders को कथित तौर पर धोखा देने के लिए bogus company बनाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, यह शिकायत में लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
Police investigation में इस आरोप के साथ-साथ आरोपी की firm, उसके कारोबारी transactions और दूसरे traders के साथ हुए लेन-देन की भी जांच की जा सकती है। जब तक जांच में इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
BKC Police ने मामले में cheating और criminal misappropriation के आरोपों के तहत कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
अब जांच का फोकस आरोपी से जुड़े कारोबारी transactions, दूसरे traders से लिए गए diamonds और उनके payment या return की स्थिति पर रहेगा। साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि 983 कैरेट diamonds में से कोई हिस्सा बरामद हुआ है या नहीं।
फिलहाल diamonds की recovery या ₹4 करोड़ की रकम वापस मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
एक कारोबारी विवाद से बड़े जांच दायरे तक पहुंचा मामला
मुंबई के diamond business से जुड़े इस मामले में शुरुआत एक कंपनी के करीब ₹4 करोड़ के कथित payment dispute से हुई, लेकिन BDB के अन्य कारोबारियों से भी diamonds लिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा अब बढ़ गया है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सभी transactions सामान्य कारोबारी व्यवस्था के तहत हुए थे और बाद में payment dispute पैदा हुआ, या जांच में कई कारोबारियों से जुड़े transactions में कोई समान pattern सामने आता है।
इसका जवाब पुलिस की आगे की जांच और संबंधित कारोबारी रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल Smit Alpeshbhai Shah पर लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। अदालत की ओर से उनकी दोषसिद्धि नहीं हुई है।

