जंतर-मंतर के प्रदर्शन पर राजपुरोहित का बड़ा बयान

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जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर समाजसेवक लालसिंह राजपुरोहित ने सरकार पर तीखा हमला बोला। भगत सिंह और लाला लाजपत राय का भी किया जिक्र।

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुंबई के समाजसेवक लालसिंह राजपुरोहित का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में वह प्रदर्शन के दृश्यों पर सरकार और पुलिस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और बच्चों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं और कहा कि ऐसे आंदोलनों से देश की युवा पीढ़ी और ज्यादा जागरूक होती है।

लालसिंह राजपुरोहित ने अपने बयान में जंतर-मंतर के प्रदर्शन की तुलना स्वतंत्रता आंदोलन के दौर के आंदोलनों से की। उन्होंने लाला लाजपत राय, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का जिक्र करते हुए कहा कि दमन के खिलाफ होने वाले आंदोलनों से क्रांतिकारी विचार पैदा होते हैं।

‘आज 56 इंच का सीना सिमट गया’

वीडियो में लालसिंह राजपुरोहित कहते हैं कि जंतर-मंतर पर दिखाई दिया दृश्य झकझोर देने वाला था। उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “आज 56 इंच का सीना सिमट गया।”

उन्होंने आगे दावा किया कि छात्रों और बच्चों से निपटने के लिए सरकार को कथित रूप से षड्यंत्र करने पड़ रहे हैं। राजपुरोहित ने कहा कि देश की तरुणाई को दबाने की कोशिशों का उल्टा असर हो सकता है।

हालांकि, यह बयान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर केंद्र सरकार या संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।

‘अंग्रेजों से भी ज्यादा सख्त निकले’

लालसिंह राजपुरोहित ने प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “ये तो अंग्रेजों से भी ज्यादा सख्त निकले” और आरोप लगाया कि बच्चों और छात्रों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई गईं।

जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन पिछले कई दिनों से परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में है। खबर के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का किया जिक्र

अपने बयान में मुंबई के सामाजिक नेता ने स्वतंत्रता आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि ऐसे ही आंदोलनों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को जन्म दिया था।

उन्होंने साइमन कमीशन के खिलाफ हुए आंदोलन और लाला लाजपत राय का जिक्र किया। राजपुरोहित ने कहा कि उस दौर में भी अंग्रेजों की कार्रवाई के खिलाफ लोगों में आक्रोश पैदा हुआ था और उसी संघर्ष ने आगे चलकर क्रांतिकारी आंदोलन को प्रभावित किया।

लाला लाजपत राय पर साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाठीचार्ज हुआ था और बाद में उनकी मृत्यु हो गई थी। भगत सिंह और उनके साथियों के क्रांतिकारी संघर्ष का यह ऐतिहासिक संदर्भ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल है।

‘आज फिर देश की तरुणाई झकझोर दी’

मुंबई के उत्तर मुंबई जिला से समाजसेवक लालसिंह राजपुरोहित ने अपने बयान में कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई ने देश की युवा पीढ़ी को झकझोर दिया है।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं पर बातचीत करनी चाहिए। उनके मुताबिक, छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में बढ़ती नाराजगी को नजरअंदाज करना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है।

जंतर-मंतर पर क्यों चल रहा है छात्र आंदोलन?

जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का मुख्य फोकस परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दे हैं। प्रदर्शनकारी NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों की समस्याओं को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है।

हाल के दिनों में प्रदर्शन का दायरा बढ़ा है और कई छात्र संगठनों, कार्यकर्ताओं तथा सार्वजनिक हस्तियों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया है। वहीं, प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में किसी भी वायरल वीडियो या राजनीतिक बयान को पूरे घटनाक्रम का स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता।

पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे

प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक नेताओं की ओर से कई आरोप लगाए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग और आंसू गैस के इस्तेमाल का उल्लेख है।

हालांकि, हर वायरल वीडियो की घटना और उसमें दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। लालसिंह राजपुरोहित के बयान में लगाए गए आरोपों पर पुलिस या सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच लालसिंह राजपुरोहित का बयान सामने आया है। उन्होंने सरकार और पुलिस कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए छात्रों के दमन का आरोप लगाया और अपने बयान को स्वतंत्रता आंदोलन के ऐतिहासिक संदर्भों से जोड़ा। हालांकि, उनके आरोप राजनीतिक बयान के तौर पर देखे जाने चाहिए और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

FAQ

जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन किस मुद्दे को लेकर है?

आंदोलन परीक्षा व्यवस्था, NEET से जुड़ी कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहा है।

लालसिंह राजपुरोहित ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर क्या कहा?

उन्होंने सरकार और पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि छात्रों और बच्चों के खिलाफ दमनकारी नीतियां अपनाई जा रही हैं। उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और लाला लाजपत राय का भी जिक्र किया।

क्या लालसिंह राजपुरोहित का बयान आधिकारिक सरकारी बयान है?

नहीं। यह एक राजनीतिक नेता की सार्वजनिक प्रतिक्रिया है। उनके आरोपों पर संबंधित सरकार या पुलिस विभाग का आधिकारिक पक्ष अलग से जरूरी है।


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