भारत की GDP ग्रोथ रेट दो साल में सबसे नीचे 5.4% पर आ गई है। यह पिछले अनुमानों क्रमशः 6.9 फीसदी और 5 फीसदी से कम है। राहुल गांधी ने इसके लिए सरकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। कहा, कि स्थिति में सुधार के लिए बिना समय गंवाए एक नई सोच और बिज़नेसेस के लिए एक नई डील की भारत को ज़रूरत है। (What is the reason for the decline in India’s GDP growth rate?)
उन्होंने कहा, बात साफ है, कि भारतीय अर्थव्यवस्था तब तक तरक्की नहीं कर सकती, जब तक इसका फ़ायदा सिर्फ़ गिने-चुने अरबपतियों को मिल रहा हो और किसान, मज़दूर, मध्यमवर्ग और ग़रीब तरह-तरह की आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हों। (What is the reason for the decline in India’s GDP growth rate?)
इन तथ्यों पर एक नज़र डालिए, देखिए स्थिति कितनी चिंताजनक है:
- खुदरा महंगाई दर बढ़कर 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.21% पर पहुंच गई है। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में इस वर्ष आलू और प्याज़ की क़ीमत लगभग 50% बढ़ गई है।
- रुपया 84.50 के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
- बेरोज़गारी पहले ही 45 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है।
- पिछले 5 सालों में मज़दूरों, कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों की आमदनी या तो ठहर गई है या काफी कम हो गई है।
- आमदनी कम होने से मांग में भी कमी आई है। 10 लाख से कम क़ीमत वाले कारों की बिक्री में हिस्सेदारी घटकर 50% से कम हो गई है, जो 2018-19 में 80% थी।
- सस्ते घरों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी घटकर क़रीब 22% रह गई है, जो पिछले साल 38% थी। FMCG प्रोडक्ट्स की मांग पहले से ही कम होती जा रही है।
- कॉरपोरेट टैक्स का हिस्सा पिछले 10 सालों में 7% कम हुआ है, जबकि इनकम टैक्स 11% बढ़ा है।
- नोटबंदी और GST की मार से अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा घटकर 50 वर्षों में सबसे कम सिर्फ़ 13% रह गया है। ऐसे में नई नौकरियों के अवसर कैसे बनेंगे?
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राहुल गांधी ने भारत सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा, कि भारत की अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए एक नई सोच चाहिए और बिज़नेसेस के लिए एक नई डील उसका अहम भाग है। सबको समान रूप से आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, तभी हमारी अर्थव्यवस्था का पहिया आगे बढ़ेगा।
अर्थव्यवस्था का बुरा हाल, जनता का हाल बेहाल – इस स्थिति में सुधार के लिए बिना समय गंवाए एक नई सोच और बिज़नेसेस के लिए एक नई डील की ज़रूरत है।
S&P ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 में जीडीपी ग्रोथ रेट 6.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 में जीडीपी ग्रोथ रेट 5 फीसदी रहेगी। (What is the reason for the decline in India’s GDP growth rate?)
