मालवणी के 14 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों को 31 मार्च 2027 तक हाई कोर्ट की राहत

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मालवणी के 14 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों को 31 मार्च 2027 तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी। जानिए सभी स्कूलों के नाम और बीएमसी की कार्रवाई।

मुंबई: मलाड पश्चिम के मालवणी इलाके में संचालित 14 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों को बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने इन संस्थानों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंत यानी 31 मार्च 2027 तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी है। इससे पहली से चौथी कक्षा में पढ़ने वाले एक हजार से अधिक बच्चों को फिलहाल स्कूल बदलने की मजबूरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, अदालत ने साफ किया है कि स्कूलों को इस दौरान जरूरी सरकारी मान्यता और निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।

मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम सेठना की पीठ ने 4 नवंबर को सुनवाई के दौरान कहा कि कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को रातोंरात उनके स्कूलों से नहीं हटाया जा सकता। अदालत की प्राथमिक चिंता बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित रखना है। स्कूलों को राहत देने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें बिना मान्यता के स्थायी रूप से संचालन की अनुमति मिल गई है।

मालवणी के 14 स्कूलों के मामले में हाई कोर्ट ने दी राहत

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत में जिन 14 स्कूलों को लेकर सुनवाई हुई, उनमें अलग-अलग संस्थान शामिल हैं। ये सभी स्कूल मालाड पश्चिम के मालवणी इलाके में संचालित बताए गए हैं। अदालत में पेश बीएमसी के हलफनामे के अनुसार इन संस्थानों के पास आवश्यक सरकारी मान्यता नहीं थी।

स्कूलों को बंद करने के बजाय बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे पहली से चौथी कक्षा तक के हैं। इतनी कम उम्र में उन्हें अचानक दूसरे स्कूलों में भेजना उचित नहीं होगा। खासकर उन परिवारों के लिए यह स्थिति मुश्किल पैदा कर सकती है, जिनके पास सीमित आर्थिक संसाधन हैं और जो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए आसपास के स्कूलों पर निर्भर हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि गरीब और वंचित परिवारों के अभिभावक कई बार यह जांच नहीं कर पाते कि स्कूल को सरकारी मान्यता प्राप्त है या नहीं। वे यह देखते हैं कि स्कूल में शिक्षक हैं और उनके बच्चों को बुनियादी शिक्षा मिल रही है। अदालत ने कहा कि इन बच्चों के भविष्य को अंधकार में नहीं डाला जा सकता।

पीठ ने बीएमसी को यह भी निर्देश दिया कि वह कानूनी रूप से संभव होने पर संबंधित संस्थानों को आवश्यक मान्यता दिलाने का प्रयास करे। यदि स्कूल निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर पाते, तो बच्चों के लिए आसपास के दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिले की व्यवस्था पर विचार करना होगा।

2017 से जारी थे नोटिस, फिर भी नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई

बीएमसी के हलफनामे की जांच के दौरान अदालत के सामने यह बात आई कि मालवणी पश्चिम के इन 14 स्कूलों को वर्ष 2017 से नोटिस जारी किए जा रहे थे। इसके बावजूद उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रशासन को इतने वर्षों से स्कूलों की स्थिति की जानकारी थी, तो समय रहते उचित कदम क्यों नहीं उठाए गए। इन संस्थानों का संचालन वर्ष 2009 से होने की जानकारी भी सुनवाई के दौरान सामने आई।

पीठ ने कहा कि वर्षों तक स्कूलों को संचालित होने देने के बाद अचानक उन्हें बंद करना बच्चों के हित में नहीं होगा। बदलाव धीरे-धीरे होना चाहिए और किसी को रातोंरात हटाने जैसा कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।

स्कूलों के खिलाफ प्राथमिकी और जनहित याचिका

यह मामला मालवणी निवासी नाजिर बशीर खान की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में बीएमसी की ओर से 14 स्कूलों को बंद करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि बच्चों के लिए वैकल्पिक शिक्षा की व्यवस्था किए बिना स्कूल बंद करने से हजारों गरीब परिवार प्रभावित हो सकते हैं।

इन स्कूलों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधन के खिलाफ जून 2026 में मालवणी पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई थी। याचिका में प्रशासन की कार्रवाई और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ उठाए गए कदमों को चुनौती दी गई थी।

इससे पहले भाजपा नेता किरीट सोमैया ने भी जून 2026 में मालवणी का दौरा कर कुछ स्कूलों पर सरकारी और बीएमसी की जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप लगाए थे।

हमारी पिछली रिपोर्ट में मालवणी के 14 स्कूलों के खिलाफ बीएमसी की कार्रवाई, स्कूलों की सूची, प्राथमिकी और बच्चों की वैकल्पिक शिक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

उस रिपोर्ट में स्कूलों के नाम और उनके पते भी प्रकाशित किए गए थे। साथ ही मुंबई और आसपास के इलाकों में गैरमान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या और प्रशासन की कार्रवाई पर भी जानकारी दी गई थी।

पिछली रिपोर्ट में शामिल 14 संस्थानों के नाम इस प्रकार थे:

  1. Little World English School
  2. Zeel English School
  3. Al-Farooquia Islamic English School
  4. Father Abraham English School
  5. A.M. English School
  6. Kala Vidyalaya
  7. God Angel Primary School
  8. Rose Mary English School
  9. M.H. English School
  10. Little Angel English Primary School
  11. Padmashree Annasaheb Jadhav Bharatiya Samaj Unnati Mandal School
  12. Sahayog Welfare Society School
  13. Crescent English School
  14. Kavi Bharati English School

पूरी पिछली रिपोर्ट यहां पढ़ें: मालवणी के 14 स्कूलों पर बॉम्बे हाई कोर्ट और बीएमसी की कार्रवाई

मुंबई में 164 गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों पर बीएमसी की कार्रवाई

मालवणी का यह मामला मुंबई में गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ चल रही व्यापक कार्रवाई का भी हिस्सा है। अप्रैल 2026 में बीएमसी ने मुंबई में 164 ऐसे स्कूलों को बंद करने के नोटिस जारी किए थे।

इनमें मालाड-मालवणी इलाके के 18 स्कूलों का उल्लेख किया गया था। वहीं गोवंडी और मानखुर्द क्षेत्र में 57 स्कूलों की जानकारी सामने आई थी। बीएमसी की इस कार्रवाई के तहत कई संस्थानों के खिलाफ कानूनी कदम भी उठाए गए।

नवंबर 2026 की शुरुआत में सामने आई प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इन 164 स्कूलों में पढ़ने वाले 1,200 से अधिक बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में स्थानांतरित किया जा चुका था। इनमें लगभग 690 बच्चों को बीएमसी स्कूलों और करीब 550 बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाया गया था। पहले इन संस्थानों में लगभग 5,000 विद्यार्थी पढ़ रहे थे।

इससे स्पष्ट है कि गैरमान्यता प्राप्त स्कूलों का मुद्दा केवल मालवणी तक सीमित नहीं है। मुंबई के कई इलाकों में ऐसे संस्थानों की स्थिति और उनमें पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।

स्कूलों को मान्यता के लिए किन शर्तों को पूरा करना होगा?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पढ़ाई जारी रखने की अस्थायी अनुमति मिलने से स्कूल कानूनी जरूरतों से मुक्त नहीं हो गए हैं। सभी संस्थानों को निर्धारित न्यूनतम मानकों और शैक्षणिक पात्रता को पूरा करना होगा।

स्कूल प्रबंधन को आवश्यक मान्यता और अनुमति के लिए आवेदन करना होगा तथा निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। अदालत ने शिक्षकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पर भी जोर दिया है। प्रत्येक शिक्षक के पास निर्धारित योग्यता होनी चाहिए और उसे बच्चों की शिक्षा तथा उनकी जरूरतों की समझ होनी चाहिए।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 18 के अनुसार बिना मान्यता प्रमाणपत्र के स्कूल संचालित करना प्रतिबंधित है। इसके उल्लंघन पर एक लाख रुपये तक जुर्माना और उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन 10,000 रुपये तक अतिरिक्त जुर्माने का प्रावधान है।

स्कूल बंद हुए तो बच्चों की पढ़ाई का क्या होगा?

अदालत के सामने बच्चों को दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने का विकल्प भी रखा गया। बीएमसी ने आसपास के महानगरपालिका स्कूलों में विद्यार्थियों को समायोजित करने की व्यवस्था होने की बात कही। हालांकि, याचिकाकर्ता पक्ष ने इस पर सवाल उठाए और कहा कि मालवणी जैसे घनी आबादी वाले इलाके में सभी बच्चों के लिए पर्याप्त वैकल्पिक सीटें उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा।

इस मामले में बच्चों के पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड, स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र और अगली कक्षा में प्रवेश की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी स्कूल को मान्यता नहीं मिलती और उसे बंद करना पड़ता है, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन को समय रहते व्यवस्था करनी होगी।

अदालत ने फिलहाल बच्चों को मौजूदा शैक्षणिक सत्र पूरा करने का अवसर दिया है। लेकिन स्कूलों का भविष्य उनकी मान्यता और कानूनी पात्रता पर निर्भर करेगा।

15 जनवरी 2027 को फिर होगी सुनवाई

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 14 स्कूलों को 31 मार्च 2027 तक पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया है कि कानून के अनुसार आवश्यक मान्यता हासिल करना अनिवार्य होगा। यदि संबंधित संस्थान निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते और उन्हें मान्यता नहीं मिलती, तो उनके संचालन पर रोक लग सकती है।

इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2027 को होगी। अब सबकी नजर बीएमसी की ओर से की जाने वाली कार्रवाई, स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया और उन बच्चों के भविष्य पर है, जिनकी पढ़ाई इस पूरे विवाद के केंद्र में है।

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