यात्रियों की सुरक्षा को लेकर मध्यरेल की जीआरपी कटिबद्ध। कहा, किसी भी प्रकार की कोई घटना घटित नही होने देंगे। मुंबई मंडल में पंद्रह चौकिया होगा निर्माण।
वी बी माणिक मुंबई- मध्यरेल के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के प्लेटफार्म क्रमांक 18 के ठीक बाहर लौहमार्ग पुलिस की चौकी का पुलिस आयुक्त रविन्द्र शिसवे के कर कमलों द्वारा आज उद्घाटन किया गया।
मौके पर पुलिस उपायुक्त मनोज नवले पाटील, सहायक आयुक्त सुनील गांवकर, यातायात निरीक्षक विजय खेड़कर, निरीक्षक विजय तायड़े, निरीक्षक अरशद शेख, निरीक्षक प्रदीप सालुंखे, रेल सुरक्षा बल के निरीक्षक प्रताप भान सिंह अपने दल बल के साथ उपस्थित थे।
साथ ही जीपी मीना वरिष्ठ स्टेशन प्रबंधक भी उपस्थित थे सभी पुलिस आधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षा के कटिबद्धता दिखाया। कहा कि किसी भी प्रकार की कोई घटना घटित नही होने देंगे इसीलिए इस चौकी का स्थापना किया है। मिली जानकारी के मुताबिक पूरे मुंबई मंडल में पंद्रह चौकिया बनाई जाएगी।
इसके बाद लोकमान्य तिलक मार्ग रेलवे स्टेशन पर भी चौकी का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसकी जानकारी उपायुक्त पाटील ने मौखिक रूप से दी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, निरीक्षक विजय तायड़े के अथक प्रयासों से इस चौकी का काम किया गया है। इसके साथ ही आरपीएफ ने भी पूरा सहयोग देने का निर्णय लिया है।
वी बी माणिक मुंबई- गुरूवार, मध्यरेल की CPDS ‘A’ टीम ने 272 ग्राम सोने की चोरी मामले में अंबरनाथ के 62 वर्षीय रिक्शा चालक एवं आरोपी अख्तर हुसैन मुस्तफा हुसैन शेख को गैवानशाह बाबा दरगाह के सामने, कमलानगर की झुग्गी बस्ती से हिरासत में लेकर जीआरपी के हवाले किया।
मिली जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के साथ सहायक सुरक्षा आयुक्त मुंबई प्रथम के मार्गदर्शन में गठित सीपीडीएस (CPDS) टीम में कार्यरत सहायक पुलिस निरीक्षक एकनाथ गदाधे और प्रदीप गीते, सतीश पावरा, डी के यादव एडीएम पोस्ट पर एकत्र होकर सीएसएमटी के जीआरपी पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया। जिसकी एफआईआर क्र.926/2023 धारा 379 आईपीसी के अनुसार 03.11.2023 को 00:00 बजे दर्ज की गई थी। दिनांक 08.11.2023 को जीआरपी थाने के डीबी स्टॉफ के साथ समन्वय कर उक्त अपराध की जांच शुरू की CPDS टीम के साथ उपनिरीक्षक अर्जुन सांगले, नाइक/2249 अव्हाड, पोशी/576 भरुद, पोशी/1124 रणवारे, पोशी/1526 चव्हाण द्वारा संयुक्त टीम गठित कर उपरोक्त दर्ज अपराध के तथ्यों को समझाते हुए कहा कि उक्त अपराध के अनुसार, हमें गुप्त मुखबिर के माध्यम से आरोपी के बारे में सूचना मिली।
तुरंत टीम के साथ दिनांक 08.11.2023 को 00.41 बजे सरकारी वाहन में मुखबीर को लेकर अंबरनाथ के लिऐ रवाना हुए। बाद में जब हम लोग अंबरनाथ के कमलानगर झुग्गी में पहुंचे तो गैबनशाह दरगाह के नीचे बाई ओर मुखबीर ने एक दरवाजे की ओर इशारा किया। इसके बाद हम लोग घर के अंदर घुसे और उसे कब्जे में ले लिया।’ और जब हमने उसे अपराध के तथ्य बताकर, एक पुलिसकर्मी के रूप में पहचानकर उससे पूछताछ की, तो उसने हमें अस्पष्ट उत्तर दिए। वहीं से उसे हिरासत में ले लिया गया. 08.11.2023 को प्रातः 07.15 बजे। थाने के अमलदार कक्ष में पेश किया गया।
आप को यह भी बता दें, कि 62 वर्षीय आरोपी ने अब तक अपना आधार कार्ड बनाया ही नहीं है। जब उससे आधार कार्ड के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि उसके पास आधार कार्ड नहीं है। साथ ही दो पंचों की मौजूदगी में उनसे अपराध की सामग्री के बारे में पूछताछ की गई तो उसने कहा कि, 02.11.2023 को मुझे अप सीएसएमटी फास्ट लोकल ट्रेन में एक बैग मिला, जिसके बारे में बताया कि मैंने इसे उठाया लिया। और अपने लाभ के लिए इसे चुरा लिया। आरोपी द्वारा दी गई जानकारी से, उक्त अपराध में उसकी संलिप्तता देखी जा सकती है। तो जीआरपी सीएसटी द्वारा उसे दिनांक 08.11.2023 को 09.00 बजे गिरफ्तार कर लिया है।
जब तलाशी ली तो पैसे या नोट जैसी कोई भी कीमती चीज़ नहीं मिली। जांच में यह पाया गया कि उक्त अपराध उसके द्वारा किया गया था, इसलिए निम्नलिखित कारणों से सीएसएमटी, जीआरपी में केस रिकॉर्ड संख्या 926/2023 आपराधिक संहिता की धारा 379 के तहत उसे गिरफ्तार किया गया और माननीय रेलवे कोर्ट में पेश करने पर 02 दिन की पुलिस कस्टडी मिली। दिनांक 9/11/2023 को उक्त आरोपी से बुद्धिकौशल्य से अधिक पूछताछ करने पर उसने अपना गुनाह कबूल किया और बताया कि मैंने चोरी की बैग मेरे घर पर रखी है बाद उक्त आरोपी के निवेदन पर संयुक्त टीम उसके अंबरनाथ के घर पर दो पंचों को ले गईं और दो पंचों के समक्ष उक्त बैग का पंचनामा किया गया उक्त बैग में निम्न प्रकार का सामान मिला उसका विवरण निम्न प्रकार से है।
02 कान की बालियाँ 1.520 ग्राम, 70%,6,500/—- 03 कान के टॉप्स चेन के साथ 02 नग, 2.400 ग्राम, 72%, 10,500/—-
कुल 159.760 ग्राम 9,25,800 यानी कुल 272.020 ग्राम 15,16,800 रूपये किमत के विषय वस्तु पर जीआरपी द्वारा दो पंचायतों के समक्ष उक्त पीली धातु की जांच के बाद उक्त आरोपी के साथ सही सलामत अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए जीआरपी के सुपूर्द किया।
रेल अधिकारी की पत्नी ने जो रौब दिखाया। शर्मसार करने के लिए काफी है। बाकी अधिकारियों को सिखाने लगी शिष्टाचार। पत्नी की हरकत पर हुई कार्रवाई की मांग।
वी बी माणिक मुंबई- मध्यरेल के नाशिक ट्रेनिग सेंटर में आयोजित रेल सुरक्षा बल के खेल प्रतियोगिता में फाइनल के दौरान भुसावल मंडल की डीआरएम इति पांडेय को मंच पर पहली लाइन में बैठने के लिए स्थान न मिलने पर मिसेज पांडेय काफी नाराज हो गयीं और डीएससी एच श्रींनिवास राव को अपना रौब दिखाते हुए वहीं पर कड़ी फटकार लगाने लगी। कहा कि तुम को थोड़ा भी अक्कल नही है, कि डीआरएम को कहा बैठाया जाता है और व्यवस्था कैसे की जाती है। इसके साथ ही और भी खरी-खोटी सुनाई जिससे राव नाराज होकर अपना त्यागपत्र दे दिया।
रेल अधिकारी की पत्नी की धौंस..
वैसे भी जून 24 में राव का रिटायरमेंट का समह है। इस कार्यक्रम में मध्यरेल के जीएम नरेश लालवानी और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। मिली जानकारी के अनुसार डीआरएम पांडेय का रिकार्ड पहले से भी ठीक नही है। आजकल भुसावल मंडल के आरपीएफ अधिकारियों की लापरवाही काफी बढ़ गई है। अब उनकी पत्नी का उनके सरकारी कामों में दखलअंदाजी को क्या कहा जाएगा यह सोचने का विषय है।
फिलहाल राव छुट्टी पर चले गए है राव ने मांग किया है, कि जब तक डीआरएम को नही हटाया जाएगा तब तक वो ड्यूटी पर नई आएंगे। अगर ऐसे ही रेल सुरक्षा बल और रेल प्रशासन में पहलवानी चलती रही तो आने वाले दिनों के भविष्य खराब दिखाई दे रहे है। कहा जाता है एक तो पहले से ही आरपीएफ, जीआरपी और रेल अधिकारियों में तालमेल नही है। ये ऐसा लगता है, कि मानो जैसे मजबूरी में नौकरी कर रहे है।
कितनी भी खबर लग जाये ये सुधरने वाले नही है अब देखना है कि राव क्या करते हैं। बीच बचाव करने के लिए आईजी सादानी और जीएम ने समझौता करवाया तब जाकर डीएससी राव ड्यूटी करने के लिए तैयार हो गए है। पर कोई भी आरपीएफ अधिकारी अपना मुँह खोलने को तैयार नही है, घटना दुर्भाग्यपूर्ण है।
रेलवे प्रशासन के भ्रष्टाचार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लेकिन भ्रष्टाचार के इन सवालों को लेकर जीएम लालवानी का कोई व्यक्तव्य नही आता है।
वी बी माणिक मुंबई– मध्यरेल के पूना और सोलापुर मंडल का चेकिंग स्टाफ वसूली पर अपनी जिंदगी बसर कर रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूना और सोलापुर के टिकट चेकिंग स्टाफ मेल एक्सप्रेस गाड़ियों में बड़े पैमाने पर हफ्ता लेकर अवैध हॉकरों से मोटी रकम लेकर गाड़ियों में फालतू खाना, चाय, चिक्की, पानी, समोसा, वड़ापाव बिकवाते है। घटिया किस्म की सामग्री से परेशान यात्रियों के शिकायत के बावजूद इन पर कार्रवाई नही की जाती है। उल्टा यात्रियों को ही धमकाते है।
ये टीसी नही गुंडे हैं। इस पर जीएम नरेश लालवानी का कोई व्यक्तव्य नही आता है। रेलवे स्टाफ फर्जी तरीके से यात्रा करता है। न तो उसके पास यात्रा करने की टिकट या पास कुछ नही होता हैं। यात्रियों को गाड़ी खाली रहने के बाद भी सीट नही मिलता है। रेलवे को लूटने का पूरा धंधा यही टीसी करते है। इनका इंचार्ज महीने का लाखो रुपये का टेंडर लेता है। जिसका हिस्से के तौर पर हफ्ता एसीएम और डीसीएम तक जाता है।
रेलवे प्रशासन के भ्रष्टाचार पर सवाल ?
सिर्फ पूना से सोलापूर के बीच यात्रा पर रेलवे प्रशासन के भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूना से सोलापुर के बीच अवैध रूप से 300 से 500 रुपये में ऐसी की सीटें बेचने का कारोबार करते है। प्रति ट्रिप में कितने अवैध यात्रियों से पैसे लिए जाते है? क्या करता है इनका विजिलेंस विभाग? कितनी कार्रवाई करता है ऐसे टीसीओ पर ? पूना और सोलापुर मंडल भ्रष्टाचार में अव्वल है इसका रिवार्ड जीएम कब घोषित करेंगे ?
मनपा आयुक्त के रूप में सबसे ज्यादा अयोग्य अभ्यर्थी नियुक्त करने का चहल का रिकार्ड
मनपा आयुक्त चहल के कैरेक्टर रोल की जांच सीबीआई व ईडी से कराने की मुंबईकरों की मांग।
सुरेंद्र राय मुंबई- बृहन्मुंबई महानगर पालिका के आयुक्त इकबाल सिंह चहल को एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाना जाता रहा है। किंतु किसी को क्या मालूम था की इकबाल सिंह चहल अपने निजी लाभ के लिए सहायक आयुक्तों की होने वाली नई भर्ती पर ध्यान नहीं देंगे तथा वह कभी भी राज्य संघ लोक सेवा आयोग से सहायक आयुक्त की भर्ती के लिए कोई मांग नहीं करेंगे। इन दोनों ने ऐसा किया है जिसके कारण मनपा में सहायक आयुक्त का कार्य भी प्रभारी सहायक आयुक्त से लिया जा रहा है। सहायक आयुक्त की जगह अपेक्षित काम ना कर पाने के कारण प्रभारी सहायक आयुक्त जनता की अनेक समस्याएं दूर नहीं कर पा रहे हैं।
मनपा आयुक्त द्वारा प्रभारी सहायक आयुक्तों की नियुक्ति ..
सूत्रों का कहना है, कि कितनों को तो आयुक्त चहल ने योग्यता न होने के बावजूद भी नियुक्त किया है, जिसे उनका निंदनीय भ्रष्टाचार माना जा रहा है। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के कारण बृहन्मुंबई महानगर पालिका में सहायक आयुक्तों की भर्ती बंद होने से निगम के 10 से 15 विभाग कार्यालयों का प्रभार सहायक आयुक्तों के पास है। इसके कारण विभाग में कई नागरिक समस्याएँ उत्पन्न हो गई हैं और देखा जा रहा है कि प्रभारी सहायक आयुक्त कभी-कभी उनका समाधान करने में विफल हो रहे हैं।
मुंबई महानगर में 24 नगरपालिका प्रभाग कार्यालय हैं। इनमें से प्रत्येक संभागीय कार्यालय का प्रबंधन एक अलग एमपीएससी से चयनित एक सहायक आयुक्त द्वारा किया जाता है। लेकिन चूंकि एमपीएससी द्वारा पिछले दो वर्षों से सहायक आयुक्त की भर्ती प्रक्रिया नहीं की गई है, इसलिए मनपा प्रशासन ने उन अधिकारियों को प्रभारी सहायक आयुक्त का प्रभार दिया है जो कुछ विभागीय कार्यालयों में घनकचरा व्यवस्थापन व परिरक्षण विभाग के कार्यकारी अभियंता हैं।
ऐसे में उनके लिए वार्ड का कार्यभार पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इसके कारण वार्ड में कूड़ा-कचरा, सड़क, अनाधिकृत निर्माण, रेहड़ी, फेरीवाले और प्रतिष्ठानों का आस्थापना विभाग सहित अन्य समस्याओं का समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। नतीजा, इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। गत वर्ष से मुंबई नगर निगम में नगरसेवकों का कार्यकाल समाप्त होने के कारण वे नगर पालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
नागरिकों को सीवरेज, फुटपाथ मरम्मत, जलापूर्ति, मलिन बस्तियों में सफाई जैसे बुनियादी कार्यों के लिए नगरसेवकों के कार्यालय तक पहुंचना पड़ता है। चूंकि नगरसेवकों का कार्यालय भी बंद है, इसलिए उनके कार्यालय जाने पर भी नागरिकों का काम नहीं हो पाता है। नागरिकों की यह भी शिकायत है कि नगर निगम सहायक आयुक्त द्वारा समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। इससे दिन-ब-दिन शहर में नागरिक समस्याएं बढ़ती जा रही है।
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मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल के कार्यकाल में फर्जी वार्ड ऑफिसर से मोटी रकम लेकर नियुक्ति की है ऐसा कहा जाता है। स्थानीय विधायक और सांसद की ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए इन वार्ड ऑफिसरों की मनपा आयुक्त से सांठ-गांठ कर नियुक्ति की है ऐसा भी कहा जाता है। जिसमे आयुक्त की प्रति माह ५०० करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय है। क्या इसकी जांच राज्य सरकार और केंद्र सरकार करेगी या ईडी सीबीआई करेगी।
मुंबई मध्यरेल के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर रात होते यात्रियों की सुरक्षा और रक्षा राम भरोसे, यात्रियों को रेलवे प्रशासन से मदद मांगने पर भरोसा करने में सावधानी बरतने की अपील …
वी बी माणिक मुंबई- कुर्ला स्थित, मध्यरेल के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) पर रात्रि 8 के बाद कोई भी रेल सुरक्षा बल का अधिकारी और सिपाही ड्यूटी पर दिखाई नही पड़ता है और प्लेटफार्म 2/3 पर स्टाल धारक यात्रियों से जमकर लूटपाट करते है और सामान लेने के बाद बिल मांगने पर देते भी नही है। इसके गुंडागर्दी मारपीट के लिए उतारू हो जाते है आरपीएफ से फोन पर शिकायत करने पर निरीक्षक कुंज बिहारी सिंह सीधे कहते है। ट्वीट करिये। कार्रवाई करने से सीधा मना कर देते है।
इस स्टेशन पर स्टेशन मास्टर, सीसीआई आरपीएफ सभी मिले हुए हैं। एक मोटी रकम की वसूली की जाती है। इस पर जीएम और डीआरएम किसी का भी ध्यान नही है। यात्रियों की कोई सुरक्षा नही है सारे डकैत स्टाल खोलकर खुलेआम यात्रियों की जेब पर डाका डाल रहे है। लेकिन जीएम नरेश लालवानी ईमानदारी का नारा लगा रहे है। जिसको ट्वीट करना नही आता, उसकी शिकायत नही ली जाती है।
मुंबई का कुर्ला स्थित लोकमान्य तिलक टर्मिनस की फाइल तस्वीर
क्या रेलवे प्रशासन सुधरेगा या केवल लूटने का ही काम करेगा? मुंबई के कंट्रोल रूम में फोन किया गया, तो पहले कांबले ने फोन उठाया और टीसी को शिकायत करने के लिए कहा गया। फिर कंट्रोल में ड्यूटी पर तैनात दिनेश ने कहा, कि आप टीसी से शिकायत पुस्तिका में शिकायत करिये। गाड़ी छूटने पर टीसी क्या करेगा ? शिकायत के मुताबिक, गाड़ी संख्या 18029 शालीमार एक्सप्रेस के एसी बोगी में अवैध पानी।
मुंबई से सटे ठाणा स्टेशन का अवैध वेंडर राजा अपने पालतू गुर्गो से 20 रुपये में पानी की बोतल बिकवाता है। इस गोरखधंधे में रेलवे सुरक्षा बल पर तैनात सुरक्षारक्षक इनका साथ देते हैं। इसी तरह रेल सुरक्षा बल रेलवे की सुरक्षा करती रही तो रेलवे बिकने में ज्यादा समय नही लगेगा। आरपीएफ जवानों को इतनी पगार मिलती है जिससे उनका परिवार अच्छी तरह से भरण पोषण किया जा सकता है। फिर भी रेल कर्मी और अधिकारियों का बिना वसूली के काम नही चलता है।
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मुंबई के मध्यरेल के कंट्रोल रूम में रात में लगता है फर्जी लोग बिठाए गए है। ट्रेन में कोई भी अप्रिय घटना घट जाए, इनसे कोई मतलब नही होता। सूत्रों से पता चला है, कि कंट्रोल में लगातार शिकायतों के चलते अब वहां भी इन अवैध वेंडरों ने रिश्वत का नजराना पेश करना शुरू कर दिया है। अब कंट्रोल रूम में तैनात सरकारी कर्मचारियों द्वारा भी अवैध वेंडरों से हफ्ता उगाही की जाती है इसीलिए शिकायत नही लिया जाता है।
शोहरतगढ़ को शोहरत की बुलंद उंचाईयों तक लेजाने की इच्छा जाहिर करने वाले अपना दल पार्टी के विधायक हकीकत में अपने समर्थकों को ही चूना लगा रहे हैं।
वी बी माणिक लखनऊ– उत्तर प्रदेश, सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ निर्वाचित अपनादल के विधायक सुधरने को तैयार नही है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में जगह हासिल करने के बाद से ही इनके तेवर बदल गए हैं। गरीबों का पैसा चुनाव के समय डकार कर बैठे विनय आज तक देने को तैयार नही है। जिन लोगो ने अपना खून पसीना बहाकर और नगद उधारी के तौर पर पैसे दिए हैं वो त्राहि-त्राहि कर रहे है। एक ग्राम प्रधान का भी करीब पच्चीस लाख लेकर बैठे है।
योगी आदित्यनाथ की सरकार ..
समाजवादी पार्टी से हाथ झटक कर भाजपा के सहारे उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में जगह हासिल करने वाली अपनादल की सुप्रीमो एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी क्या बेईमानो, लुटेरों की पार्टी है? जो गरीबों का खून पीने का काम करती है। बड़ा दुर्भाग्य है ये गरीब पुलिस में शिकायत भी दर्ज नही करवा पा रहे है। विनय वर्मा द्वारा इनको खुली धमकी दी जाती है, कि तुमको जो करते बने कर लो हम पैसा नही देंगे। पत्रकार ने अनुप्रिया पटेल से संपर्क करने का प्रयास किया। उनसे मुलाकात नही हो सका है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपना दल पार्टी की मुखिया अनुप्रिया पटेल की तस्वीर
राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसी पार्टीयो के समर्थन से सरकार चला रहे है। योगी जी घोषणाएं अच्छी-अच्छी कर रहे है पर जो उनकी सरकार में कुछ लुटेरे विधायक बैठे है। उन पर कार्रवाई कब होगी ? कब गरीबो का पैसा मिलेगा ? यही कारण है ठग लुटेरे नेता योगी जी से सहयोग माँगकर चुनाव जीतकर जनता को गुमराह करए है। इससे बड़े शर्म की बात और क्या हो सकता है।
वैसे भी अपना दल पार्टी का नारा है ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिसदारी’ इसका विधायक विनय वर्मा भरपूर फायदा उठा रहे हैं। लोगों को इनके इरादों को समझने में समय लग गया। नहीं तो धोखा और नुकसान नहीं होता। बता दें कि लोग कहते हैं, कि ये विनय वर्मा अपनी जरूरत के वक़्त हाथ जोड़कर मदद मांग रहे थे। अभी वही उधार के पैसे वापस करने के बजाय सत्ता का रौब झाड़ते हुए धमका रहे हैं। ये राजनीति का गंदा चहरा है। जो इनसे धोखा खाने वालों को देखने को मिल रहा है।
देश की सरकार पत्रकारों को संरक्षण देने से रही। लेकिन देश के नेताओं ने राजनीति का अपराधीकरण जरूर कर दिया है। कहीं इनके खिलाफ जागरुकता ना फैल जाए, इसी को लेकर पत्रकारों की आवाज कुचली जा रही है।
वी बी माणिक मुंबई– भारत सरकार ने पत्रकरो के लिए कानून तो बना दिया है पर उसका अनुपालन कब से होगा? नेता,मंत्री, सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, खाकी वर्दी जब धन उगाही करती है तब तो उनको भी संरक्षण प्रदान किया जाता है। इसके अलावा न्यायपालिका में खुलेआम फाइल को इधर-उधर करने के लिए वसूली किया जाता है। तब कहाँ चली जाती है नियम कानून जब इन मामलों की हकीकत देश के सामने उजागर करने वाले पत्रकार वर्ग सुरक्षा पर बात आती तो सांप सूंघ जाता है।
जनता का हक और सरकारी संरक्षण
सरकार और नेताओं की तनख्वाह जनता अदा करती है। जिसके फलस्वरूप देश की जनता वास्तविकता की जानकारी रखने की हकदार हैं और इस जनता जनार्दन के हक को अदा करने वाला पत्रकार वर्ग इनसे न सरकार से अपना मेहनताना मांगता है। मीडिया वर्ग को अपने कर्तव्यों को पूरा करने में जानमाल का जोखिम रहता है। ऐसे में पत्रकारों को संरक्षण नहीं मिलना सच्चाई का गला घोटने जैसा ही है। इसमें कोई एक हो तो सुनवाई हो चुकी होती पर पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचार में लिप्त होता जा रहा है।
पत्रकार संरक्षण कानून को लेकर बेसबरी से इंतजार करता मीडिया वर्ग की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर
पत्रकारों को संरक्षण ..
आज देश मे अधिकांश नेता अपराधी है जिनके ऊपर केस चल रहे है और वो खुलेआम छुट्टे सांड की तरह घूम रहे गरीबो की जमीनों पर अपने गुर्गो द्वारा जब्ती, कब्जा कर रहे है। मकानों पर अवैध कब्जा कर रहे है। मामला न्यायालय में दो तीन पीढ़ी तक चलता है। इस पर कोई पत्रकार खबर लिखता है, तो उसको धमकी दिया या आजाती है। पुलिस कुछ नही करती धमकी देने वाले गुंडों का स्वागत लोग भी करते है।
देश को मिल रही खुली झूठ ..
आज पत्रकार सबसे कमजोर वर्ग बन गया है। सच्चाई लिखना जुर्म बन गया है। नेताओ का स्वाभिमान पूरी तरह खत्म हो गया है। कुछ पत्रकार तो विधायको, मंत्रियों, सांसदों के पिए और चाटुकार बन गए है। दिन पर दिन पत्रकारिता समाप्ति की ओर बढ़ने लगी है। अब नेता टीवी पर बैठकर सीधा झूठ बोलते हैं।
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चुनाव आयोग भी गुमराह ..
इस पर चुनाव आयोग कब संज्ञान लेगा की जिस नेता पर एक भी केस हो उसको चुनाव लड़ने का अधिकार नही होना चाहिए। अगर वो झूठ बोलकर चुनाव लड़ता है, तो उसकी मान्यता रदद् कर देना चाहिए। चुनाव आयोग किन कामों में ग़ुम है। इसका देश की जनता को कोई जानकारी नहीं है। सवाल करने वाले पूछ तो रहें हैं जवाब देना जरूरी नहीं। आने वाला दिन भारत का अंधकार मय दिखाई पड़ रहा है।
अपनादल के विधायक विनय कुमार वर्मा स्वर्णकार समाज की लुटिया डूबा रहे है और समाज के कथित ठेकेदार वर्मा की जय जय कार कर रहे है।
वी बी माणिक लखनऊ- उत्तरप्रदेश के शोहरतगढ़ से अपनादल अनुप्रिया पटेल गुट के विधायक विनय कुमार वर्मा ने अपने स्वर्णकार समाज के कई लोगो से चुनाव लड़ने के नाम पर उधारी के तौर पर लिए गए करोड़ो रूपये का घपला कर दिया है। जिन-जिन लोगो ने पैसा दिया है, वह अपना पैसा मांगते है, तो वर्मा धमकी देकर सीधा कहता है, “मैं पैसा नही दूंगा। जो करते बने कर लो।”
इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान अपनादल के वर्मा ने जिससे अपने लिए चार बॉडी गार्ड लिया था। उसका भी लाखों रुपये डकार गया है। उन सभी चारो बॉडी गार्डो का भी पैसा नही दिया है। कुल 4 महीना इक्कीस दिन तक बॉडीगार्डों ने चौबीसों घंटे अपनादल के वर्मा की सुरक्षा में तैनात थे। सभी बॉडीगार्ड अपने मालिक से पैसे के लिए झगड़ा कर रहे है। मालिक ने समाज के ठेकेदारों से इसकी शिकायत किया, कि ऐसे समाज के नेता जो गरीबो का ही खून पीकर विधायक बने है।
अब सुरक्षा गार्ड कंपनी का मालिक दर-दर भटक कर समाज के ठेकेदारों के सामने गुहार लगा रहा है। ऐसे विधायक को चुल्लूभर पानी मे डूब मरना चाहिए। विनय कुमार वर्मा स्वर्णकार समाज की लुटिया डूबा रहे है और समाज के कथित ठेकेदार वर्मा की जय जय कार कर रहे है।
क्या ऐसे लोग समाज के लिए योग्य है? क्या समाज ऐसे लोगो का सामाजिक बहिष्कार करेगा? या ऐसे विधायको का सत्कार करेगा और अवैध कारोबार को बढ़ावा देगा? इस पर समाज को विचार करना है। समाज के अंदर काफी तोश व्याप्त है। लोग अपनादल के विधायक के नाम से डर रहे है। क्या अनुप्रिया पटेल इस विधायक पर कार्रवाई करेंगी या ऐसे विधायको का सत्कार करेंगी? जो लूटपाट, बेईमानी, ठगी में माहिर हो खबर लिखने के बाद क्या कार्रवाई होगी? ये नागरिकों और समाज को जानकारी मिलनी चाहिए सुर सभी गरीबो का पैसा वापस मिलना चाहिए।
डीओ राजन प्रभु और वार्ड ऑफिसर किरण दिघावकर की लालच से अवैध निर्माणों को मिल रहा संरक्षण (BMC Corruption)
ठेकेदार नरसिम पुत्तावल्लू की गुलामी कर रहा मनपा का पी/ नॉर्थ,वार्ड का मुकादम विट्ठल राठौड़
क्या मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल पी/ नॉर्थ, वार्ड के जिम्मेदार अधिकारीयों पर आईपीसी १८६० की धारा २१७ एवं २१८ के तहत एफआईआर दर्ज करवाएंगे?
सुरेंद्र राय मुंबई- बृहन्मुंबई महानगरपालिका एशिया की सबसे बड़ी नगर पालिका मानी जाती है। किंतु वर्तमान में उसके अधिकारी और कर्मचारी ही काली कमाई की लालच में मनपा की साख में बट्टा लगा रहे हैं। जानकारी के अनुसार मुंबई मनपा के सभी वार्डो में अवैध निर्माणों के भ्रष्टाचारो (Corruption) का खेल जारी है। जिसमें अधिकारी और ठेकेदार मिलकर मलाई खा रहे हैं। लेकिन मालाड़ बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) का पी/ नॉर्थ, वार्ड इससे दो कदम और आगे निकल चुका है। यहां न केवल अभियंता (Engineer) बल्कि मुकादम भी डीओ (Designated Officer) और वार्ड के सहआयुक्त (Assistant Commissioner) के लिए अवैध निर्माण (Illegal construction) को बचाने के लिए बिचौलिए का काम करता है। इसी तरह का मामला वार्ड क्रमांक ३२ के अंतर्गत आने वाले चिकुवाड़ी का है।
भ्रष्ट BMC के उच्च अधिकारी ..
अवैध निर्माण की तस्वीर
वहीं मनपा पी/ नॉर्थ वार्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते उसके कार्यक्षेत्र में भूमाफियाओं और ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माणों का ग्राफ लगातार बड़ी ही तेजी से बढ़ रहा है। जिस पर अंकुश लगा पाना अब पी/ नॉर्थ, वार्ड के वश में नहीं है ऐसा माना जा रहा है। वहीं स्थानीय नागरिकों, समाजसेवको व शिकायतकर्ताओं की माने तो मनपा परिमंडल -४ के उपायुक्त (Deputy Municipal Commissioner) विश्वास शंकरवार की ईमानदार छवि अब नोटो के बंडलों पर बिक चुकी है। जबकि उपायुक्त विश्वास शंकरवार अवैध निर्माणों पर मनपा नियमों के तहत उसकी जांच कर कार्रवाई करने की बजाय स्वयं रिश्वत की आंच में अपनी नैतिकता को भुला बैठे हैं।
इसी तरह का मामला वार्ड क्रमांक ३२ के अंतर्गत आने वाले चिकुवाड़ी का है। यहां के गली नंबर -२, मालवणी चर्च, मालाड (पश्चिम) मुंबई ४०००९५. स्थित रिक्त भूखंड पर अधिकारियों से मिलीभगत कर ठेकेदार नरसिम पुत्तावल्लू ने १२ व्यापारिक गाले और मकान की चॉल बना डाली है। स्थानीय नागरिक बताते हैं, कि उपायुक्त विश्वास शंकरवार की इसी भ्रष्ट (Corrupt) और रिश्वतखोर वाली छवि के कारण ही पी/ नॉर्थ वार्ड में अवैध निर्माणों का ग्राफ लगातार बढ़ी ही तेजी से बढ़ रहा है। अब ऐसे में उपायुक्त विश्वास शंकरवार की तरफ से उक्त अवैध निर्माण पर कारवाई का न होना ही जिसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।
हालांकि ठेकेदार नरसिम पुत्तावल्लु द्वारा बिना किसी खौफ के धड़ल्ले से किए जा रहे अवैध निर्माण के मामले में डीओ. राजन प्रभु और सहाय्यक आयुक्त किरण दिघावकर की तरफ से बरती जा रही लापरवाही या सेटिंग उक्त अवैध निर्माणों के लिए अभयदान साबित हो रही है। वहीं इमारत व कारखाना विभाग में कार्यरत मुकादम विट्ठल राठौड़ की माने तो मनपा (BMC) का पी/नॉर्थ, वार्ड ठेकेदार नरसिम पुत्तावल्लू की गुलामी करने में व्यस्त नजर आ रहा है तथा उसके अवैध निर्माणों को संरक्षण देने में सक्षम अधिकारियों ने पूरी सहमति जताई है।
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स्थानीय नागरिकों की माने तो सहाय्यक अभियंता अनिल पुणतांबेकर की कार्यप्रणाली भी सिर्फ अवैध निर्माणों से मिलने वाली काली कमाई (Black Money) के हिस्सेदारी पर ही निर्भर है ना की अवैध निर्माणों के बढ़ते ग्राफ पर अंकुश लगाने में है। यदि लोकसेवक (Public Servant) होने के नाते जानबूझकर कानून के किसी भी निर्देश की अवज्ञा करता है तो वह लोकसेवक भारतीय दंड संहिता (IPC) १८६० की धारा २१७ एवं २१८ के अनुसार अपराधी होता है।मनपा पी/नार्थ वार्ड से विगत वर्षों मे अवैध निर्माण से कितनी काली कमाई किया होइसका अनुमान लगाया जाना यदि असंभव नहीं तो दुष्कर अवश्य है। क्या बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में एक भी जिम्मेदार व ईमानदार अधिकारी नही है? जो भ्रष्ट एवं रिश्वतखोर अधिकारियों के भ्रष्टाचार (Corruption) की जांच कराकर दंडित करने की कार्रवाई करा सकें?