Category: Court Cases

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  • Bombay HC का बड़ा आदेश: MSRTC को देना होगा ₹50 लाख मुआवज़ा

    Bombay HC का बड़ा आदेश: MSRTC को देना होगा ₹50 लाख मुआवज़ा

    Bombay High Court ने MSRTC को आदेश दिया कि COVID-19 से ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारी की पत्नी को ₹50 लाख compensation दे। कोर्ट ने कहा – महामारी के समय “narrow view” लेकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।

    मुंबई: Bombay High Court ने एक अहम फैसले में Maharashtra State Road Transport Corporation (MSRTC) को निर्देश दिया है कि वह COVID-19 के दौरान ड्यूटी करते हुए संक्रमित होकर जान गंवाने वाले अपने कर्मचारी की पत्नी को ₹50 लाख का compensation अदा करे। कोर्ट ने साफ कहा कि महामारी के समय निगम ने अपनी जिम्मेदारी को लेकर “narrow view” अपनाया, जो स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    🔹 Compensation Claim खारिज करने को दी थी चुनौती

    याचिकाकर्ता सुनीता बापू जगताप ने MSRTC के जनवरी 2022 और मार्च 2023 के उन फैसलों को कोर्ट में चुनौती दी थी, जिनमें उनके मुआवज़े का दावा यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि उनके पति “essential services” में तैनात नहीं थे और वे interstate transport के ड्राइवर भी नहीं थे।

    सुनीता जगताप के पति बापू जगताप की अप्रैल 2021 में COVID-19 से मौत हो गई थी। पत्नी का कहना था कि उनके पति ने महामारी के सबसे खतरनाक दौर में ड्यूटी की और उसी दौरान संक्रमण की चपेट में आए।

    🔹 HC का आदेश: 8 हफ्ते में भुगतान, नहीं तो 6% ब्याज

    24 फरवरी को जस्टिस मकरंद कर्णिक और जस्टिस श्रीराम मोडक की बेंच ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि MSRTC कुल ₹50 लाख में से ₹45 लाख आठ हफ्तों के भीतर अदा करे और पहले से दिए गए ₹5 लाख को adjust किया जाए।

    अगर आठ हफ्तों में भुगतान नहीं किया गया, तो 6% per annum की दर से interest भी देना होगा। कोर्ट ने कहा कि यह widow compensation का मामला है और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    🔹 कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “Pandemic में Narrow View क्यों?”

    बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि MSRTC ने महामारी के दौरान अपनी जिम्मेदारी को लेकर बेहद संकीर्ण नजरिया अपनाया। कोर्ट ने कहा:

    “Pandemic के समय हालात ऐसे थे कि लोग घर से बाहर निकलने से डर रहे थे। ऐसे में जो कर्मचारी ड्यूटी कर रहे थे, वे अपनी जान जोखिम में डालकर public service निभा रहे थे।”

    कोर्ट ने यह भी माना कि भले ही मृतक सीधे interstate buses नहीं चला रहे थे, लेकिन वे ड्राइवरों और कंडक्टरों के संपर्क में आते थे, जिससे उन्हें भी समान खतरा था।

    🔹 Pandemic की भयावह स्थिति पर कोर्ट की टिप्पणी

    कोर्ट ने कहा कि वह judicial notice ले सकती है कि उस समय पूरा देश ठप था, public transport limited services के साथ चल रही थी और दवाइयों की भारी किल्लत थी।

    बेंच ने स्पष्ट किया कि सरकारों ने उस समय Disaster Management Act, 2005 और Epidemic Diseases Act, 1897 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया था। ऐसे हालात में कोई भी सरकारी संस्था अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती।

    🔹 Wadala Depot में ड्यूटी और संक्रमण की कहानी

    बापू जगताप को मार्च 24 से 28, 2021 के बीच BEST Bus Depot, वडाला में ट्रैफिक सुपरविजन की ड्यूटी दी गई थी। वहां वे बस ड्राइवरों और स्टाफ के लगातार संपर्क में रहे।

    29 से 31 मार्च तक तबीयत खराब होने के कारण उन्होंने छुट्टी ली और नाशिक जिले के मनमाड लौट गए। 5 अप्रैल 2021 को उनकी COVID-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इलाज के दौरान 7 अप्रैल 2021 को येवला के सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में COVID-related pneumonia से उनका निधन हो गया।

    🔹 Widow Compensation और Employee Rights पर बड़ा संदेश

    इस फैसले को employee rights, COVID compensation policy और government liability के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। High Court ने साफ किया कि महामारी जैसे संकट के समय ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को “essential service” की संकीर्ण परिभाषा में बांधकर उनके परिवार को मुआवज़े से वंचित नहीं किया जा सकता।

    यह निर्णय भविष्य में Pandemic Death Compensation मामलों में एक मजबूत मिसाल बन सकता है।


    ❓ FAQ Section

    1. Bombay High Court ने MSRTC को कितना मुआवज़ा देने का आदेश दिया?

    कोर्ट ने कुल ₹50 लाख compensation देने का आदेश दिया, जिसमें ₹45 लाख आठ हफ्तों में देने होंगे और ₹5 लाख पहले से दिए गए हैं।

    2. यह मामला किस वर्ष की घटना से जुड़ा है?

    यह मामला अप्रैल 2021 में COVID-19 से हुई कर्मचारी की मौत से जुड़ा है।

    3. कोर्ट ने MSRTC पर क्या टिप्पणी की?

    कोर्ट ने कहा कि निगम ने महामारी के दौरान “narrow view” अपनाया और अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की।

    4. अगर MSRTC तय समय में भुगतान नहीं करती तो क्या होगा?

    आठ हफ्तों में भुगतान न होने पर 6% per annum interest देना होगा।

    5. कर्मचारी की ड्यूटी कहाँ लगी थी?

    उन्हें मार्च 2021 में वडाला स्थित BEST Bus Depot में ट्रैफिक सुपरविजन के लिए तैनात किया गया था।

  • Maharashtra: 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द, हाई कोर्ट में चुनौती

    Maharashtra: 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द, हाई कोर्ट में चुनौती

    महाराष्ट्र सरकार ने 5% मुस्लिम आरक्षण खत्म करने का GR जारी किया। फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में सिविल रिट पिटिशन 5063/2026 दायर। जानिए पूरा कानूनी और राजनीतिक अपडेट।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में दिया जा रहा 5% मुस्लिम आरक्षण रद्द करने के फैसले ने सियासी और कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है। 17 फरवरी 2026 को जारी एक Government Resolution (GR 181) के जरिए यह निर्णय लागू किया गया। अब इस फैसले को Bombay High Court में चुनौती दी गई है।

    क्या है पूरा मामला?

    मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक एवं विशेष न्याय विभाग ने एक GR जारी कर 5% मुस्लिम आरक्षण को खत्म करने की घोषणा की।

    यह आरक्षण 2014 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार के दौरान लागू किया गया था, जिसमें मराठा समुदाय को 16% और मुस्लिम समुदाय को 5% आरक्षण “Special Backward Class” कैटेगरी में दिया गया था।

    बाद में मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां मराठा आरक्षण रद्द कर दिया गया, लेकिन मुस्लिम आरक्षण को शिक्षा क्षेत्र में आंशिक राहत मिली थी।

    हाई कोर्ट में कानूनी चुनौती

    सरकार के इस ताजा फैसले के खिलाफ Civil Writ Petition No. 5063/2026 दायर की गई है।

    याचिकाकर्ता हैं Syed Ejaz Abbas Naqvi, जिन्होंने इस GR को “असंवैधानिक और सामुदायिक विभाजन बढ़ाने वाला कदम” बताया है।

    यह याचिका 23 फरवरी 2026 को जस्टिस Riyaz I. Chagla की बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होने की संभावना है।

    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता Nitin Satpute और Ejaj Naqvi पेश होंगे।

    सियासी प्रतिक्रिया

    विपक्षी दलों ने इस फैसले का विरोध किया है।

    • कांग्रेस ने इसे “लोकतंत्र के लिए हानिकारक” बताया।
    • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) ने भी इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ कदम कहा।

    सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार का तर्क है कि यह फैसला “कानूनी और संवैधानिक समीक्षा” के आधार पर लिया गया है।

    2014 का इतिहास क्या कहता है?

    2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने अध्यादेश जारी कर मराठा और मुस्लिम समुदाय को आरक्षण दिया था।

    मामला अदालत में गया और बॉम्बे हाई कोर्ट ने:

    • मराठा आरक्षण को निरस्त किया
    • मुस्लिम आरक्षण को शिक्षा क्षेत्र तक सीमित राहत दी

    बाद में सत्ता में आई बीजेपी-शिवसेना सरकार ने मुस्लिम आरक्षण का विरोध किया था।

    अब आगे क्या?

    23 फरवरी की सुनवाई में यह तय होगा कि:

    • क्या GR 181 पर अंतरिम रोक लगेगी?
    • क्या सरकार से जवाब तलब किया जाएगा?
    • क्या आरक्षण फिलहाल बहाल रहेगा या रद्द ही रहेगा?

    इस मामले का असर हजारों छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं पर पड़ सकता है।


    FAQ Section

    Q1: मुस्लिम आरक्षण कब रद्द किया गया?
    17 फरवरी 2026 को जारी GR 181 के जरिए।

    Q2: किसने हाई कोर्ट में याचिका दायर की?
    एडवोकेट सैयद एजाज़ अब्बास नक़वी ने सिविल रिट पिटिशन 5063/2026 दायर की।

    Q3: सुनवाई कब है?
    23 फरवरी 2026 को जस्टिस रियाज़ चागला की बेंच के सामने संभावित सुनवाई।

    Q4: क्या आरक्षण फिलहाल लागू है?
    यह कोर्ट के अंतरिम आदेश पर निर्भर करेगा।

  • Mumbai Traffic Police में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले सिपाही को धमकियाँ और हाई कोर्ट का संरक्षण

    Mumbai Traffic Police में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले सिपाही को धमकियाँ और हाई कोर्ट का संरक्षण

    मुंबई ट्रैफिक पुलिस में भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले कॉन्स्टेबल सुनील टोके को मिली हाई कोर्ट से राहत। विभागीय उत्पीड़न, निलंबन की धमकियों और “रिश्वत रेट-कार्ड” के आरोपों का पूरा सच पढ़ें।

    मुंबई: मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेबल Sunil Toke (सुनील टोके) ने जब अपने ही विभाग में चल रहे कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और “रिश्वत रेट-कार्ड” का खुलासा किया, तो उन्हें लगातार विभागीय दबाव, ट्रांसफर की धमकी और सस्पेंशन की चेतावनी का सामना करना पड़ा। मामला इतना बढ़ा कि आखिरकार उन्हें Bombay High Court का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।

    🔎 क्या है पूरा मामला?

    मुंबई ट्रैफिक विभाग के अंदर कथित तौर पर अलग-अलग उल्लंघनों के लिए “फिक्स रेट” पर रिश्वत वसूली का आरोप सामने आया था। सुनील टोके ने दावा किया कि यह वसूली संगठित तरीके से हो रही थी और आम जनता से नकद लेन-देन के जरिए चालान से बचाने का खेल चल रहा था।

    जब उन्होंने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई, तो कार्रवाई के बजाय उन्हें ही निशाना बनाया गया।

    ⚠️ शिकायत के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न

    सूत्रों के मुताबिक शिकायत के बाद:

    • बार-बार स्पष्टीकरण नोटिस
    • अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
    • ड्यूटी में बदलाव
    • निलंबन की धमकी

    जैसी कार्रवाइयाँ शुरू हो गईं। टोके ने इसे “व्हिसलब्लोअर के खिलाफ प्रतिशोध” बताया।

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    ⚖️ हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

    मामला जब बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने यह साफ कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीरता से जांचना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि शिकायतकर्ता के खिलाफ प्रताड़ना या दंडात्मक कार्रवाई न्यायसंगत नहीं मानी जाएगी जब तक निष्पक्ष जांच पूरी न हो।

    इस आदेश के बाद विभाग को अपनी कार्रवाई पर पुनर्विचार करना पड़ा।

    📊 क्यों अहम है यह मामला?

    • पुलिस विभाग के अंदर से भ्रष्टाचार का खुलासा
    • व्हिसलब्लोअर सुरक्षा पर बड़ा सवाल
    • न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका
    • ट्रैफिक चालान और वसूली सिस्टम पर बहस

    यह मामला सिर्फ एक कॉन्स्टेबल का नहीं, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बन गया है।


    ❓ FAQ Section

    Q1: सुनील टोके कौन हैं?
    वे मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेबल हैं जिन्होंने विभाग में कथित भ्रष्टाचार का खुलासा किया।

    Q2: उन्होंने क्या आरोप लगाए?
    उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रैफिक उल्लंघनों के लिए “रिश्वत रेट-कार्ड” चल रहा था।

    Q3: हाई कोर्ट ने क्या कहा?
    कोर्ट ने कहा कि शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और शिकायतकर्ता के खिलाफ प्रताड़ना न की जाए।

    Q4: क्या जांच अभी जारी है?
    मामला जांच प्रक्रिया में है और विभागीय स्तर पर समीक्षा चल रही है।

  • Maharashtra: बार काउंसिल चुनाव पर हाईकोर्ट में याचिका, वोटर लिस्ट पर सवाल

    Maharashtra: बार काउंसिल चुनाव पर हाईकोर्ट में याचिका, वोटर लिस्ट पर सवाल

    बार काउंसिल ऑफ Maharashtra चुनाव 2026 की तारीख बढ़ाने की मांग को लेकर एडवोकेट नितिन सतपुते की याचिका, 2.70 लाख वकीलों का सत्यापन बाकी।

    मुंबई: महाराष्ट्र बार काउंसिल चुनाव 2026 को लेकर बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है। एडवोकेट नितिन शिवराम सतपुते ने बॉम्बे हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर 24 मार्च 2026 को प्रस्तावित चुनाव की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है। याचिका में दावा किया गया है कि करीब 2 लाख 70 हजार वकीलों का अभी तक सत्यापन नहीं हुआ, जिससे वे आगामी चुनाव में मतदान से वंचित रह जाएंगे।

    ⚖️ किसके खिलाफ दायर हुई याचिका

    Petition-in-High-Court-on-Maharashtra-Bar-Council-elections-question-on-voter-list

    यह रिट याचिका
    Adv. Nitin Shivram Satpute & Others बनाम Bar Council of Maharashtra एवं संबंधित प्राधिकरणों के खिलाफ दायर की गई है।

    याचिका का मुख्य तर्क है कि मौजूदा वोटर लिस्ट में गंभीर विसंगतियां हैं और बड़ी संख्या में पात्र वकीलों को मतदाता सूची से बाहर रखा गया है।

    📋 Maharashtra कितने वकील अब भी वेरिफाई नहीं

    याचिका के अनुसार, महाराष्ट्र भर में
    👉 2,70,000 से अधिक वकीलों का सत्यापन अभी अधूरा है
    👉 ये वकील फिलहाल वोटर नहीं हैं
    👉 चुनाव तय तारीख पर हुए तो हजारों अधिवक्ताओं का मताधिकार खत्म हो जाएगा

    याचिकाकर्ता का कहना है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया और वकीलों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

    🧾 वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों का आरोप

    याचिका में यह भी कहा गया है कि:

    • वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम हैं
    • कई सक्रिय वकीलों के नाम गायब हैं
    • कुछ अयोग्य नाम सूची में शामिल हैं

    इन खामियों को दूर किए बिना चुनाव कराना अन्यायपूर्ण और अवैध होगा।

    🏛️ किस बेंच में होगी सुनवाई

    यह मामला
    सीनियर नंबर 912
    WPL/3468/2026
    कोर्ट रूम नंबर 52 में सूचीबद्ध है।

    मामले की सुनवाई
    👉 जस्टिस रविंद्र वी. घुगे
    👉 एवं माननीय डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी।

    👨‍⚖️ याचिकाकर्ता की ओर से पेश होने वाले वकील

    एडवोकेट नितिन सतपुते की ओर से निम्न वरिष्ठ वकील पेश होंगे:

    • एडवोकेट श्रवण गिरी
    • एडवोकेट एजाज नकवी
    • एडवोकेट शोभा बुद्धिवंत
    • एडवोकेट रचित सिंह
    • एडवोकेट अभिषेक बांदेकर
    • एडवोकेट दयानंद उडबाले
    • एडवोकेट मानाली गवली
    • एडवोकेट दीपक जगदेव

    📌 क्यों अहम है यह मामला

    बार काउंसिल चुनाव केवल एक संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं बल्कि पूरे वकील समुदाय की लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा विषय है। अगर समय रहते सत्यापन और वोटर लिस्ट सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर चुनाव की वैधता पर पड़ सकता है।


    ❓ FAQ

    Q1. बार काउंसिल चुनाव कब होने हैं?
    24 मार्च 2026 को प्रस्तावित हैं।

    Q2. याचिका किसने दायर की है?
    एडवोकेट नितिन शिवराम सतपुते ने।

    Q3. मुख्य आपत्ति क्या है?
    2.70 लाख वकीलों का सत्यापन पूरा नहीं हुआ और वोटर लिस्ट में गड़बड़ियां हैं।

    Q4. मामला किस कोर्ट में है?
    बॉम्बे हाईकोर्ट, कोर्ट रूम नंबर 52।

  • अवैध संबंध के शक में पत्नी की हत्या, मालाड केस में आरोपी को उम्रकैद

    अवैध संबंध के शक में पत्नी की हत्या, मालाड केस में आरोपी को उम्रकैद

    मुंबई के मालाड इलाके में पत्नी की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अवैध संबंध के शक में हुए इस अपराध को कोर्ट ने ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानने से इनकार किया।

    मुंबई: मालाड इलाके में अवैध संबंध के शक में पत्नी की हत्या करने वाले 42 वर्षीय शख्स को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दिंडोशी सत्र न्यायालय ने इस मामले में मृत्युदंड की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता। घटना के वक्त दंपति की नाबालिग बेटी और एक पड़ोसी मौके पर मौजूद थे।

    क्या है मालाड पूरा मामला

    अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी श्रवणकुमार राउत को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था। इसी शक के चलते दोनों के बीच झगड़ा हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक हो गया।
    यह घटना मालाड स्थित उनकी दुकान में हुई, जहां आरोपी ने सब्जी काटने वाले चाकू से पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला की मौके पर ही मौत हो गई।

    बेटी और पड़ोसी के सामने हुई वारदात

    कोर्ट में पेश गवाहों के मुताबिक, घटना के समय दंपति की किशोर बेटी और पास में रहने वाला एक पड़ोसी वहां मौजूद था। दोनों ने झगड़े और हमले को अपनी आंखों से देखा।
    अभियोजन ने इन बयानों को अहम सबूत के तौर पर पेश किया, जिससे आरोपी के खिलाफ मामला मजबूत हुआ।

    मृत्युदंड की मांग, लेकिन कोर्ट ने किया इनकार

    सरकारी वकील रविंद्र सावल ने आरोपी के लिए फांसी की सजा की मांग की थी।
    हालांकि, दिंडोशी कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नंदकिशोर मोरे ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अपराध गंभीर जरूर है, लेकिन यह ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में शामिल नहीं किया जा सकता।
    इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

    कोर्ट का अहम संदेश

    अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि शक और घरेलू विवाद किसी की जान लेने का अधिकार नहीं देते।
    यह फैसला समाज के लिए एक सख्त संदेश है कि घरेलू हिंसा और चरित्र पर शक के नाम पर की गई हत्या को कानून किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।


    FAQ

    Q1. आरोपी को कौन-सी सजा सुनाई गई है?
    अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

    Q2. क्या कोर्ट ने मृत्युदंड दिया?
    नहीं, कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला नहीं मानते हुए मृत्युदंड से इनकार किया।

    Q3. घटना कहां हुई थी?
    यह वारदात मुंबई के मालाड इलाके में आरोपी की दुकान में हुई थी।

  • 2013 सिलेंडर अग्निकांड: कंदिवली के कबाड़ी को लापरवाही में एक साल की सजा

    2013 सिलेंडर अग्निकांड: कंदिवली के कबाड़ी को लापरवाही में एक साल की सजा

    मुंबई के कंदिवली में 2013 में हुए एलपीजी गैस सिलेंडर अग्निकांड मामले में सेशन कोर्ट ने कबाड़ी बाबलू पासवान को दोषी ठहराते हुए एक साल की जेल की सजा सुनाई। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हुई थी।

    मुंबई: करीब 12 साल पुराने कंदिवली गैस सिलेंडर अग्निकांड मामले में मुंबई की सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कबाड़ का व्यवसाय करने वाले बाबलू पासवान को लापरवाही का दोषी मानते हुए एक साल की सजा सुनाई है। यह हादसा मार्च 2013 में हुआ था, जिसमें पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए थे।

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    कबाड़ से गैस निकालते वक्त हुआ था भीषण हादसा

    अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 7 मार्च 2013 की शाम करीब 6 बजे, बाबलू पासवान अपने दो साथियों की मदद से एलपीजी सिलेंडरों से गैस निकाल रहा था। यह काम कंदिवली पूर्व के फ्रेंड्स शेजार कमेटी चॉल के पास एक खुले नाले में किया जा रहा था, जो पूरी तरह से रिहायशी इलाका था।

    जलती सिगरेट से भड़की आग

    शिकायतकर्ता सलीम शेख, जो कंदिवली पश्चिम की जन एकता वेलफेयर सोसायटी में रहते हैं, ने अदालत को बताया कि वह अपने दोस्तों के साथ वहां बैठकर बातचीत कर रहे थे और आसपास बच्चे खेल रहे थे। इसी दौरान, आरोप है कि पासवान के साथ मौजूद एक व्यक्ति ने जलती हुई सिगरेट नाले में फेंक दी, जहां गैस छोड़ी जा रही थी।
    इसके बाद अचानक भीषण आग भड़क उठी, जिसने पूरे इलाके को चपेट में ले लिया।


    बच्चे समेत कई लोग झुलसे

    हादसे में दो नाबालिग बच्चे और करीब 10 से 12 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत कपड़ों से आग बुझाने की कोशिश की और घायलों को अलग-अलग अस्पतालों — शिवम अस्पताल (चारकोप), चव्हाण अस्पताल, भगवती अस्पताल और ऑस्कर अस्पताल — में भर्ती कराया गया।

    पांच लोगों की गई जान

    इलाज के दौरान प्रीति यादव, मोहम्मद अफजल शेख, शरतूनिसा खान, सोफिया खातून और मोहम्मद हवेलदार की मौत हो गई। वहीं कई अन्य जैसे नदीम खान, अमन खान, आमिर खान और जीतू बुधाहांडी गंभीर रूप से घायल होकर किसी तरह बच पाए।

    सह-आरोपी बरी, कबाड़ी दोषी

    पुलिस ने इस मामले में अब्दुल सिद्दीक जब्बार खान को भी आरोपी बनाया था, जिस पर सिगरेट फेंकने का आरोप था। हालांकि, अदालत ने सबूतों के अभाव में उसे बरी कर दिया, लेकिन मुख्य आरोपी बाबलू पासवान को दोषी ठहराया

    अदालत की सख्त टिप्पणी

    अदालत ने फैसले में कहा कि बाबलू पासवान ने जानबूझकर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की।
    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ज्वलनशील गैस सिलेंडरों को खाली करना सुरक्षित और नियंत्रित स्थान पर किया जाना चाहिए, न कि रिहायशी इलाके के खुले नाले में। यह लापरवाही सीधे तौर पर लोगों की जान पर भारी पड़ी।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: यह हादसा कब और कहां हुआ था?
    A: 7 मार्च 2013 को कंदिवली पूर्व के एक रिहायशी इलाके में।

    Q2: हादसे में कितने लोगों की मौत हुई थी?
    A: कुल पांच लोगों की मौत हुई थी।

    Q3: कोर्ट ने आरोपी को क्या सजा दी?
    A: एक साल की जेल की सजा।

    Q4: आरोपी पर किस तरह की लापरवाही साबित हुई?
    A: रिहायशी इलाके में अवैध रूप से गैस सिलेंडर खाली करना।

  • ट्रैफिक पुलिस से बदसलूकी का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार

    ट्रैफिक पुलिस से बदसलूकी का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार

    अंधेरी में सीट बेल्ट चेक के दौरान ट्रैफिक कॉन्स्टेबल से गाली-गलौज और मारपीट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी परिवार को राहत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा— FIR रद्द हुई तो पुलिस का मनोबल टूटेगा।

    मुंबई: ट्रैफिक पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी और मारपीट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अंधेरी के एक बुजुर्ग दंपति और उनके बेटे के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग को अदालत ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि मामले में सबूत मौजूद हैं और ऐसी स्थिति में केस रद्द करना पुलिस बल का मनोबल तोड़ने जैसा होगा।

    ⚖️ हाईकोर्ट का अहम फैसला

    इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति संदीप डी. पाटिल की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का समर्थन करने वाले वीडियो सबूत और गवाहों के बयान मौजूद हैं। ऐसे में आरोपियों को ट्रायल का सामना करना ही होगा।

    अदालत ने टिप्पणी की कि
    👉 “अगर ऐसे मामलों में FIR रद्द की गई, तो यह समाज और पुलिस व्यवस्था के लिए गलत संदेश होगा।”

    🚦 कब और कहां हुआ था विवाद?

    यह घटना 13 अगस्त 2024 को
    📍 MHADA कॉलोनी जंक्शन, अंधेरी में हुई थी।

    उस समय ट्रैफिक पुलिस कांस्टेबल

    • गणेश सोनावणे
    • भारत चौधरी

    सीट बेल्ट चेकिंग की ड्यूटी पर तैनात थे।

    🚗 सीट बेल्ट न पहनने पर शुरू हुआ विवाद

    कांस्टेबल सोनावणे ने देखा कि एक कार में आगे की सीट पर बैठी महिला ने सीट बेल्ट नहीं पहनी थी। उन्होंने गाड़ी रोककर ई-चालान काटने की प्रक्रिया शुरू की।

    इसी दौरान पुलिस के अनुसार:

    • महिला और उसके पति ने गंदी गालियां देना शुरू कर दिया
    • ड्राइवर ने कांस्टेबल को जान से मारने की धमकी दी
    • महिला ने कथित तौर पर
      👉 कांस्टेबल को थप्पड़ मारा
      👉 सीने में मुक्का मारा

    👨‍👩‍👦 कौन हैं आरोपी?

    बाद में आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई:

    • कपिल भगवानप्रसाद आनंद (70)
    • साधना आनंद (60)
    • उनका बेटा अद्वैत आनंद (30)

    तीनों लोकhandwala कॉम्प्लेक्स, अंधेरी के निवासी हैं।

    📹 वीडियो बना मजबूत सबूत

    पुलिस ने अदालत को बताया कि
    👉 पूरी घटना कांस्टेबल भारत चौधरी ने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड की थी।
    यह वीडियो चार्जशीट का हिस्सा है।

    हाईकोर्ट ने वीडियो फुटेज और गवाहों के बयान देखने के बाद कहा कि
    👉 “यह ऐसा मामला है जिसमें आरोपियों को ट्रायल कोर्ट में मुकदमे का सामना करना होगा।”

    🛑 FIR रद्द करने की मांग खारिज

    परिवार की ओर से दलील दी गई थी कि

    • उन्हें झूठा फंसाया गया है
    • ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं

    लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि
    👉 सबूत साफ तौर पर आरोपों की पुष्टि करते हैं।

    👮‍♂️ पुलिस और समाज को लेकर कोर्ट की टिप्पणी

    हाईकोर्ट ने कहा कि
    👉 अगर पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों में नरमी बरती गई,
    👉 तो पुलिसकर्मी डर के माहौल में ड्यूटी करने को मजबूर होंगे,
    जो कानून-व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. यह मामला किस इलाके का है?
    👉 अंधेरी, MHADA कॉलोनी जंक्शन।

    Q2. FIR क्यों दर्ज की गई थी?
    👉 ट्रैफिक पुलिस से गाली-गलौज, मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में।

    Q3. हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
    👉 FIR रद्द करने से इनकार, ट्रायल जारी रखने का आदेश।

    Q4. पुलिस के पास क्या सबूत हैं?
    👉 मोबाइल वीडियो रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयान।

  • वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड को हाईकोर्ट की मंजूरी, BMC को मिली बड़ी राहत

    वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड को हाईकोर्ट की मंजूरी, BMC को मिली बड़ी राहत

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड परियोजना को हरी झंडी दे दी है। करीब 45 हजार मैंग्रोव कटेंगे, बदले में तीन गुना पौधारोपण और 10 साल की निगरानी अनिवार्य होगी।

    मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर को मिरा-भायंदर से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड परियोजना को आखिरकार बॉम्बे हाईकोर्ट की मंजूरी मिल गई है। अदालत ने बीएमसी को करीब 45 हजार मैंग्रोव काटने की सशर्त अनुमति दी है। इसके बदले बीएमसी को तीन गुना पौधारोपण, चंद्रपुर में 103 हेक्टेयर वनरोपण और अगले 10 वर्षों तक हर साल निगरानी रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस फैसले से मुंबई के उत्तरी हिस्से की ट्रैफिक समस्या कम होने की उम्मीद है।

    हाईकोर्ट का अहम फैसला

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी की याचिका पर सुनवाई करते हुए वर्सोवा–भायंदर डेवलपमेंट प्लान रोड (कोस्टल रोड नॉर्थ) को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
    हालांकि अदालत ने साफ किया कि—

    • परियोजना पर 10 साल तक निगरानी जरूरी होगी
    • हर साल कम्पनसेटरी प्लांटेशन की रिपोर्ट जमा करनी होगी

    अदालत का कहना है कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन भी उतना ही जरूरी है।

    कितने मैंग्रोव कटेंगे, कितना होगा पुनरोपण

    परियोजना के तहत—

    • कुल मैंग्रोव: करीब 60,000
    • प्रभावित होंगे: 45,675 मैंग्रोव
    • सड़क निर्माण के लिए सीधे कटेंगे: करीब 9,000 मैंग्रोव (10 हेक्टेयर)

    बीएमसी ने भरोसा दिलाया है कि—

    • तीन गुना मैंग्रोव पुनरोपण किया जाएगा
    • चंद्रपुर जिले में 103 हेक्टेयर क्षेत्र में अनिवार्य वनरोपण होगा

    वर्सोवा से भायंदर तक कैसा होगा रोड नेटवर्क

    यह कोस्टल रोड मुंबई के पश्चिमी किनारे पर एक बड़ा ट्रैफिक कॉरिडोर बनेगा।

    रूट डिटेल्स

    • शुरुआत: वर्सोवा
    • बीच के इलाके: मलाड, मालवनी, कांदिवली, बोरीवली, दहिसर
    • अंत: भायंदर (मिरा-भायंदर)

    संरचना

    • एलिवेटेड रोड
    • फ्लाईओवर और इंटरचेंज
    • टनल और ब्रिज
    • सतही ट्रैफिक कम करने की व्यवस्था

    दो फेज़ में बनेगी कोस्टल रोड

    • फेज-1: वर्सोवा से दहिसर
    • लंबाई: लगभग 20–25 किमी
    • इसे कोस्टल रोड फेज-2 या वर्सोवा–दहिसर लिंक रोड भी कहा जाएगा
    • फेज-2: दहिसर से भायंदर
    • एलिवेटेड रोड
    • लंबाई: 5.6 किमी, चौड़ाई 45 मीटर

    कुल मिलाकर इंटरचेंज और कनेक्टर मिलाकर नेटवर्क 60 किलोमीटर से ज्यादा का होगा।

    ट्रैफिक और कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

    बीएमसी के अनुसार—

    • वेस्टर्न सबर्ब्स से मिरा-भायंदर का सफर तेज होगा
    • वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और लिंक रोड पर दबाव घटेगा
    • रोज़ाना लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी

    पर्यावरण बनाम विकास की बहस फिर तेज

    जहां एक तरफ इस प्रोजेक्ट को ट्रैफिक समस्या का स्थायी समाधान बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मैंग्रोव कटाई को लेकर पर्यावरणविदों की चिंता भी बनी हुई है।
    हाईकोर्ट ने इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए सख्त शर्तों के साथ मंजूरी दी है।


    FAQ सेक्शन

    Q1: वर्सोवा–भायंदर कोस्टल रोड क्या है?
    यह मुंबई को मिरा-भायंदर से जोड़ने वाली 26.3 किमी लंबी तटीय सड़क परियोजना है।

    Q2: कितने मैंग्रोव काटे जाएंगे?
    करीब 45,675 मैंग्रोव प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 9,000 सीधे कटेंगे।

    Q3: बदले में क्या किया जाएगा?
    तीन गुना पौधारोपण और चंद्रपुर में 103 हेक्टेयर वनरोपण किया जाएगा।

    Q4: कोर्ट ने क्या शर्त रखी है?
    10 साल तक निगरानी और हर साल रिपोर्ट दाखिल करना अनिवार्य होगा।

    Q5: इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?
    ट्रैफिक कम होगा और वेस्टर्न सबर्ब्स से भायंदर तक सफर तेज होगा।

  • शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी

    शिंदे सेना के नेता संजय निरुपम 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी

    शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता और पूर्व सांसद संजय निरुपम को 2018 के रेल रोको मामले में मुंबई की विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने बरी कर दिया। अदालत ने कहा — सबूतों में संदेह है, CCTV फुटेज स्पष्ट नहीं है।

    मुंबई: विशेष मजिस्ट्रेट अदालत ने शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता और पूर्व सांसद संजय निरुपम को 7 साल पुराने रेल रोको मामले में बरी कर दिया है। यह मामला 10 सितंबर 2018 का है, जब निरुपम ने कांग्रेस मुंबई अध्यक्ष के रूप में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ देशव्यापी बंद का हिस्सा बनकर अंधेरी स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन किया था।

    🚉 क्या था मामला?

    पुलिस के अनुसार, संजय निरुपम सुबह 9:30 बजे अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। वे 50–60 पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी कर रहे थे और विरोध के दौरान वे प्लेटफॉर्म 3 और 4 के बीच ट्रैक पर बैठ गए। रेलवे स्टाफ ने रोकने की कोशिश की, लेकिन इसके चलते बोरीवली स्लो लोकल को 7 मिनट की देरी हुई।
    अंधेरी पुलिस ने इस पर एफआईआर दर्ज कर ली और घटना की तस्वीरें व सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश किए।

    Shinde-Sena-leader-Sanjay-Nirupam-acquitted-in-7-year-old-rail-roko-case-news

    🧾 अदालत ने सबूतों पर उठाए सवाल

    न्यायाधीश वी.यू. मिसाल ने कहा कि पुलिस द्वारा पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरें स्पष्ट नहीं हैं और इनसे यह साबित नहीं होता कि निरुपम ने ही ट्रैक पर बैठकर ट्रेन रोकी थी।
    उन्होंने कहा —

    “केवल CCTV के प्रिंटआउट पेश करने से सबूत साबित नहीं होते। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के प्रावधान पूरे न होने तक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को मान्य नहीं माना जा सकता।”

    इसके अलावा, अदालत ने कहा कि ट्रेन में देरी को लेकर पुलिस के दावे पर भी उचित सबूत नहीं दिए गए हैं।

    “यह साबित नहीं किया जा सका कि बोरीवली स्लो लोकल की देरी सीधे तौर पर संजय निरुपम की वजह से हुई थी,” न्यायाधीश ने कहा।

    🧩 ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाए जाने का संकेत

    अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब उस दिन विरोध प्रदर्शन में कई वरिष्ठ नेता, जिनमें अशोक चव्हाण (अब बीजेपी में) भी मौजूद थे, तो सिर्फ निरुपम के खिलाफ ही केस क्यों दर्ज किया गया?
    न्यायाधीश ने कहा —

    “ऐसा प्रतीत होता है कि निरुपम को इस मामले में एक ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाकर फंसाया गया था।”

    🗣️ संजय निरुपम ने दी प्रतिक्रिया

    फैसले के बाद संजय निरुपम ने कहा —

    “सात साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार सच्चाई की जीत हुई। मैंने जनता की आवाज़ उठाई थी, कोई अपराध नहीं किया था।”

    उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित था।


    FAQ सेक्शन

    Q1. संजय निरुपम को किस मामले में बरी किया गया है?
    👉 उन्हें 2018 के रेल रोको आंदोलन के मामले में बरी किया गया है, जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ हुआ था।
    Q2. घटना कहां हुई थी?
    👉 यह घटना अंधेरी रेलवे स्टेशन, मुंबई पर हुई थी।
    Q3. पुलिस ने क्या आरोप लगाए थे?
    👉 पुलिस ने कहा था कि निरुपम ने ट्रैक पर बैठकर लोकल ट्रेन को सात मिनट रोका था।
    Q4. कोर्ट ने क्या कहा?
    👉 कोर्ट ने कहा कि सबूत अस्पष्ट हैं और CCTV फुटेज से निरुपम की उपस्थिति साबित नहीं होती।
    Q5. निरुपम ने क्या प्रतिक्रिया दी?
    👉 उन्होंने कहा कि यह फैसला न्याय की जीत है और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया था।

  • लोकल ट्रेन में झगड़ा, यात्री को लगे 6 टांके; कोर्ट ने दो आरोपियों की जमानत ठुकराई

    लोकल ट्रेन में झगड़ा, यात्री को लगे 6 टांके; कोर्ट ने दो आरोपियों की जमानत ठुकराई

    मुंबई की भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में झगड़े के दौरान एक यात्री के सिर पर चोट लगने से उसे छह टांके लगे। सेशंस कोर्ट ने कहा — “चोटिल व्यक्ति का अस्पताल से डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं।

    मुंबई: लोकल ट्रेन मे मार पीट को लेकर एक मुकदमे में मुंबई की सेशंस कोर्ट ने दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिन्होंने लोकल ट्रेन में झगड़े के दौरान एक यात्री को घायल कर दिया।
    कोर्ट ने साफ कहा कि “घायल का अस्पताल से डिस्चार्ज होना, जमानत देने का आधार नहीं हो सकता।”

    यह मामला 4 अक्टूबर का है, जब शिकायतकर्ता ने दादर से गोरेगांव स्लो लोकल ट्रेन पकड़ी थी और उसे सांताक्रूज़ स्टेशन पर उतरना था। भीड़ के कारण जब यात्री उतर नहीं पाए, तो दो लोगों में झगड़ा हुआ, जिससे एक व्यक्ति के सिर पर गंभीर चोट लगी और उसे 6 टांके लगाने पड़े।

    🚨 कौन हैं आरोपी और क्या हैं आरोप

    पुलिस ने इस मामले में दो यात्रियों — नौशाद अहमद (20) और रामसूरत राय (35) — को गिरफ्तार किया है।
    दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा

    • 115 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और
    • 118 (खतरनाक हथियार या साधन से चोट या गंभीर चोट पहुंचाना)
      के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    दोनों आरोपी पिछले एक महीने से जेल में बंद हैं।

    🧾 “हम निर्दोष हैं”, आरोपियों की दलील

    आरोपियों के वकील ने कोर्ट में कहा कि दोनों गरीब मजदूर हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है
    उनका कहना था कि शिकायतकर्ता को साधारण चोट लगी थी और वह पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है।

    लेकिन अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और शिकायतकर्ता को सिर पर गंभीर चोट आई थी।

    🧑‍⚖️ जज का सख्त रुख — ‘घायल का डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं’

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत सी. काले ने 1 नवंबर को अपने आदेश में कहा:

    “आरोपियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। घायल व्यक्ति का डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं हो सकता। पुलिस के कागज़ों के अनुसार, शिकायतकर्ता को लगी चोट सिर के अहम हिस्से पर गंभीर चोट है।”

    कोर्ट ने यह भी बताया कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद किया गया है।
    इसी वजह से अदालत ने कहा कि जांच अधूरी है, इसलिए इस चरण में जमानत नहीं दी जा सकती।

    🚉 मुंबई लोकल में बढ़ रहे विवाद

    मुंबई की लोकल ट्रेनें “शहर की लाइफ़लाइन” कही जाती हैं, लेकिन रोज़ाना की भीड़ और तनाव के बीच झगड़ों के मामले बढ़ रहे हैं।
    रेलवे पुलिस (GRP) के अनुसार, हर महीने दर्जनों झगड़ों और धक्कामुक्की की शिकायतें मिलती हैं, जिनमें कई बार यात्रियों को चोटें भी लगती हैं।


    FAQ सेक्शन

    Q1. यह घटना कब और कहां हुई थी?
    👉 यह घटना 4 अक्टूबर को दादर-सांताक्रूज़ लोकल ट्रेन में हुई थी।
    Q2. कितने लोग गिरफ्तार किए गए हैं?
    👉 दो आरोपी — नौशाद अहमद और रामसूरत राय — को गिरफ्तार किया गया है।
    Q3. शिकायतकर्ता को क्या चोटें आईं?
    👉 शिकायतकर्ता के सिर पर चोट लगी और 6 टांके लगाने पड़े।
    Q4. कोर्ट ने जमानत क्यों नहीं दी?
    👉 कोर्ट ने कहा कि घायल का डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं, क्योंकि मामला अभी शुरुआती जांच में है।
    Q5. आरोपियों पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
    👉 धारा 115 और 118 (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मामला दर्ज हुआ है।