Category: Court Cases

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  • वक्फ संशोधन विधेयक में क्या है सेक्शन 40, जिसे खत्म करने का किया ऐलान

    वक्फ संशोधन विधेयक में क्या है सेक्शन 40, जिसे खत्म करने का किया ऐलान

    लोकसभा में केंद्रीय मंत्री वक्फ एक्ट के सेक्शन 40 खत्म करने का ऐलान कर दिया है। वक्फ बोर्ड अधिनियम 40 के तहत वक्त बोर्ड को वक्फ संपत्तियों के फैसले का अधिकार दिया गया था। लेकिन अब इसे हटाने का प्रस्ताव किया गया है, जिससे बोर्ड की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

    Waqf Amendment Bill 2024: 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किए गए ‘वक्फ संशोधन बिल 2024’ में सबसे बड़ा बदलाव है सेक्शन 40 को खत्म करना। ये सेक्शन ही इस बोर्ड को किसी भी भूमि को वक्फ संपत्ति में बदलने की अनुमति देता था। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को संसद में एक बहस के दौरान इसे वक्फ अधिनियम का सबसे कठोर प्रावधान बताया था। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    रिजिजू ने चर्चा के दौरान कहा कि, ‘अधिनियम में सबसे कठोर प्रावधान सेक्शव 40 है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता था, लेकिन संशोधन के तहत हमने उस प्रावधान को हटा दिया है।” ऐसे में, दूसरी तरफ सवाल उठता है कि आखिर ये सेक्शन 40 है क्या? और इसे हटाने के बाद किस तरीके के बदलाव आ सकते हैं? (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    वक्फ कानून अधिनियम 40

    वक्फ कानून का अधिनियम 40 वक्फ संपत्तियों के बारे में फैसला करने से जुड़ा हुआ है। इसका मतलब है कि अगर किसी संपत्ति के बारे में यह सवाल उठता है कि क्या वह संपत्ति वक्फ है या नहीं ? तो वक्फ बोर्ड इस सवाल का फैसला खुद कर सकता था। इस फैसले को चुनौती देने का अधिकार किसी के भी पास नहीं था। अगर किसी को आपत्ति होती भी थी तो वह, वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता था। जिसपर फैसले का अधिकार भी वक्फ बोर्ड के ही पास था। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    इस सेक्शन के तहत, अगर वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति मानता है, तो उसका यह फैसला अंतिम होता है। इसका मतलब है कि सरकार या कोई और संस्थान इस फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अगर किसी को बोर्ड के फैसले से आपत्ति होती, तो वह वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता था। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    यह सेक्शन वक्फ बोर्ड को एक तरह से स्वतंत्रता देता था कि वह बिना किसी बाहरी दबाव के यह तय कर सके कि कोई संपत्ति वक्फ बोर्ड की संपत्ति है या नही? साथ ही, अगर कोई अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी की संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकरण कराने की आवश्यकता होती, तो बोर्ड उसे ऐसा करने का निर्देश दे सकता था। अब, वक्फ संशोधन बिल में इस सेक्शन को हटाने के प्रस्ताव से वक्फ बोर्ड की ताकत और स्वतंत्रता पर सवाल उठने लगे हैं। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    सरकारी हस्तक्षेप नहीं

    सेक्शन 40 के तहत, बोर्ड के फैसले पर सरकार या किसी अन्य सरकारी संस्थान का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता था। इसका मतलब है कि वक्फ संपत्तियों के मामलों में बोर्ड का फैसला ही सर्वोपरि होता था। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    इस सेक्शन के तहत अगर कोई संपत्ति किसी अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी के तहत पंजीकृत होती, लेकिन वक्फ बोर्ड को लगता कि वह संपत्ति वक्फ संपत्ति हो सकती है, तो बोर्ड उसकी जांच कर सकता था। अगर बोर्ड ने यह फैसला लिया कि वह संपत्ति वक्फ संपत्ति है, तो उस ट्रस्ट या सोसाइटी को उसे वक्फ एक्ट के तहत पंजीकरण करने के लिए कहा जाता था। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    सेक्शन 40 को लागू नहीं किया जाएगा

    वक्फ (संशोधन) बिल 2025 में इस सेक्शन को हटा दिया गया है। इस बदलाव को लेकर केंद्रीय मंत्री ने संसद में ऐलान किया कि सेक्शन 40 को अब लागू नहीं किया जाएगा। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    इस बदलाव के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कालन बैनर्जी ने संसद में कहा कि अगर सेक्शन 40 को हटा दिया गया, तो वक्फ बोर्ड महज एक ‘गुड़िया’ बनकर रह जाएगा, जिसकी कोई ताकत नहीं होगी। उनका कहना था कि अगर इस सेक्शन को हटा दिया जाता है, तो वक्फ बोर्ड को बनाए रखने का कोई मतलब नहीं है और इसकी शक्तियां सीधे तौर पर मंत्री को दे दी जानी चाहिए। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    केंद्र सरकार का तर्क

    केंद्र सरकार का कहना है कि इस बदलाव से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता आएगी। उनका मानना है कि अब वक्फ संपत्तियों के मामलों में कोई भ्रम नहीं होगा और यह प्रक्रिया ज्यादा सरल और सुचारू होगी। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

    वक्फ कानून मे संशोधन का असर

    विपक्ष का कहना है कि इस बदलाव से वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी और सरकार को वक्फ संपत्तियों के मामलों में ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बदलाव वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को और बेहतर बनाएगा। अब यह देखना होगा कि इस बिल को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और इसका वक्फ बोर्ड पर क्या प्रभाव पड़ेगा। (What is section 40 in the Wakf Amendment Bill, which was announced to be abolished)

  • रमजान के बाद मस्जिद को तोड़ने का आदेश

    रमजान के बाद मस्जिद को तोड़ने का आदेश

    रमजान के खत्म होने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाणे के एक मस्जिद और प्रार्थना गृह को तोड़ने का आदेश दे दिया है। पीछले कुछ दिनों से ठाणे नगर निगम और ट्रस्टियों के बीच विवाद चल रहा था।

    ठाणे: बॉम्बे हाई कोर्ट ने ठाणे नगर निगम (TMC) को एक अवैध मस्जिद को ध्वस्त करने में असफल रहने पर चेतावनी दी है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों के लिए नागरिकों के बीच कानून का पालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खता की खंडपीठ ने लोकतांत्रिक राज्य में कानून के प्रवर्तन की अनिवार्यता पर जोर दिया। (Order to demolish the mosque after Ramzan)

    14 अप्रैल को होगा ध्वस्त

    10 मार्च को जारी किए गए निर्देश में कहा गया है कि रमजान के पवित्र महीने के समाप्त होते ही अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया गया है, जिसकी अंतिम तिथि 14 अप्रैल रखी गई है। यह निर्णय न्यू श्री स्वामी समर्थ बोरिवडे नामक एक निजी आवास कंपनी की याचिका के जवाब में लिया गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि ठाणे जिले में उनकी संपत्ति पर मस्जिद और उससे संबंधित प्रार्थना कक्ष अवैध रूप से बनाए गए हैं। (Order to demolish the mosque after Ramzan)

    जनवरी में दिया नोटिस

    याचिकाकर्ता के मुताबिक, गाजी सलाउद्दीन रहमतुल्ला अलेह उर्फ परदेशी बाबा ट्रस्ट ने 18,122 वर्ग मीटर की जमीन पर 2013 से अतिक्रमण कर रखा था। ट्रस्ट ने एक ग्राउंड-प्लस-वन बिल्डिंग बनाई थी, जिसमें मस्जिद और प्रार्थना कक्ष दोनों शामिल थे। जनवरी में, टीएमसी ने ट्रस्ट को 15 दिनों के अंदर इस संरचना को तोड़ने का आदेश दिया था और चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो नगर निगम कार्रवाई करेगा। (Order to demolish the mosque after Ramzan)

    इसके पहले कुछ हिस्सा किया ध्वस्त

    इस महीने की शुरुआत में, टीएमसी ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि कुछ हिस्सों का ध्वस्तीकरण किया गया था। हालांकि, भक्तों के विरोध ने आगे की कार्रवाई में रुकावट उत्पन्न की। टीएमसी के वकील राम आप्टे ने बताया कि अनुयायियों की एक बड़ी संख्या ने अनधिकृत संरचना को पूरी तरह से नष्ट करने में बाधा डाली। (Order to demolish the mosque after Ramzan)

    नगर निगम की लापरवाही

    हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में नगर निगम की प्रारंभिक लापरवाही की निंदा की, जिसने इतनी विशाल अवैध संरचना के निर्माण की अनुमति दी। न्यायाधीशों ने टिप्पणी की, “एक लोकतांत्रिक राज्य में, किसी व्यक्ति या समूह को यह कहने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि वह देश के कानूनों का पालन नहीं करेगा और किसी भी कारण से इसका विरोध करेगा।” (Order to demolish the mosque after Ramzan)

    टीएमसी को अदालत का निर्देश

    अदालत ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए नागरिकों में कानूनी अनुपालन के प्रति सम्मान उत्पन्न करने की आवश्यकता पर बल दिया और स्पष्ट किया कि राज्य द्वारा कानून का उल्लंघन और इसके प्रवर्तन में बाधा सहन नहीं की जाएगी। ट्रस्ट द्वारा विध्वंस के खिलाफ कोई आपत्ति न उठाने के संकेत देने के बाद, अदालत ने टीएमसी को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करे कि शेष विध्वंस कार्य रमजान के तुरंत बाद 14 अप्रैल की निर्धारित समय सीमा के अनुसार पूरा किया जाए। (Order to demolish the mosque after Ramzan)

  • बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब मां की जाति के आधार पर भी मिलेगा जाति प्रमाण पत्र.?

    बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब मां की जाति के आधार पर भी मिलेगा जाति प्रमाण पत्र.?

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को ‘आपले सरकार’ पोर्टल में संशोधन पर विचार करने को कहा है, जिससे असाधारण परिस्थितियों में मां की जाति के आधार पर ओबीसी जाति प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा।

    मुम्बई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि असाधारण परिस्थितियों में मां की जाति के आधार पर जाति प्रमाण पत्र और ओबीसी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए ‘आपले सरकार’ पोर्टल में जरूरी बदलाव पर विचार करे। अदालत ने सरकार से एक समिति गठित करने को भी कहा है, जो इस संशोधन की संभावनाओं पर विचार करेगी।

    किसने की थी याचिका?

    दरअसल, 30 वर्षीय स्वानुभूति जैन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर थी, उन्होंने अपनी याचिका में मां की जाति के आधार पर ओबीसी प्रमाण पत्र की मांग की थी। लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि जैन यह साबित नहीं कर सकीं कि उनका पालन-पोषण केवल मां ने किया था। अदालत ने पाया कि जैन के पिता, जो एक बैंक अधिकारी हैं, उनकी परवरिश में पूरी तरह शामिल रहे और उनकी मां ने 2022 में ही अपना ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाया था।

    नियमों का दुरुपयोग नही होना चाहिए

    कोर्ट ने सरकार से मां की सामाजिक स्थिति के दस्तावेज अपलोड करने की अनुमति देने के लिए पोर्टल में संशोधन की संभावना पर विचार करने को कहा है। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जाति प्रमाण पत्र के नियमों का दुरुपयोग रोकने के लिए कड़ी जांच जरूरी होगी।

    नाम से पता चलेगा उसकी जाति

    कोई भी व्यक्ति अपने नाम से जाति प्रमाण पत्र की जांच या तो संबंधित प्राधिकरण में जाकर या संबंधित राज्य की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं, हालांकि यह प्रक्रिया राज्य के आधार पर अलग-अलग होती है।

  • Mumbai- समुद्री तट पर प्रॉपर्टी लीगल करने के लिए सरकारी दस्तावेजों से हेरफेर, 4 गिरफ्तार 18 अधिकारियों से पूछताछ

    Mumbai- समुद्री तट पर प्रॉपर्टी लीगल करने के लिए सरकारी दस्तावेजों से हेरफेर, 4 गिरफ्तार 18 अधिकारियों से पूछताछ

    मुंबई समुद्र तटीय क्षेत्र में बड़े जमीन घोटाले का खुलासा हुआ है। 102 फर्जी प्रॉपर्टी नकशे के आधार पर अवैध निर्माण किए गए। चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बीएमसी तथा भूमि रिकॉर्ड विभाग के 18 अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया था। एसआईटी ने जांच में खुलासा किया है कि उसने मुंबई समुद्र तटरेखा के किनारे मालाड़ पश्चिम के मार्वे, मढ़ आइलैंड और वर्सोवा के तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) और नो डेवलपमेंट जोन (NDZ) की जमीन पर बड़े स्तर पर कंस्ट्रक्शन पाया। इतना ही नहीं जमीन में निर्माण के लिए संपत्ति रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई। जांच के बाद सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी के साथ बड़े स्तर पर जमीन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र तट के किनारे कम से कम 102 प्रॉपर्टी नकशे से जुड़े घोटाले के लिए पिछले सप्ताह दो पूर्व सरकारी कर्मचारियों सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा कुल मिलाकर, बीएमसी और भूमि रिकॉर्ड अनुभाग के 18 सरकारी कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    कहाँ हुआ जमीन घोटाला

    इस घोटाले में कथित तौर पर एस्टेट एजेंट, सरकारी कर्मचारी और ठेकेदार शामिल हैं, जिन्होंने मालाड़ पश्चिम के मार्वे, मढ़ आइलैंड, वर्सोवा और अन्य पर्यावरण के लिए संवेदनशील स्थानों में भूमि रिकॉर्ड में बदलाव किया। मालाड़ पश्चिम एरंगल के एक किसान वैभव ठाकुर ने सबसे पहले इस हेराफेरी के मामले को उजागर किया। वैभव एक खानदानी किसान है और एक खेती की जमीन के मालिक भी हैं। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    एफआईआर पर गिरफ्तारी नही हुई

    वैभव ठाकुर ने 2021 में अपने प्लॉट और आस-पास की जमीनों पर अवैध निर्माण के खिलाफ गोरेगांव पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। ठाकुर ने पाया कि CRZ और NDZ भूखंडों को बनाने के लिए क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में जालसाजी की गई थी। हालांकि, BMC और गोरेगांव पुलिस सहित अन्य अधिकारियों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    फिर से उछला मामला

    कुछ समय के बाद भूमि अभिलेख उपाधीक्षक नितिन सालुंखे ने 2021 में एक और FIR दर्ज कराइ। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए 2012 और 2020 के बीच नक्शे और दस्तावेजों में जालसाजी की गई है। यह मामला 2022 में विधानसभा में गूंजा और सरकार को एक जांच समिति गठित करनी पड़ी। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    कैसे हुई गिरफ्तारी?

    समिति के निष्कर्ष बॉम्बे हाई कोर्ट में तब प्रस्तुत किए गए जब मूल शिकायतकर्ता वैभव ठाकुर ने सरकार के निष्कर्षों के बावजूद निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की। अक्टूबर 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर गठित SIT को कुल चार FIR की जांच करने का काम सौंपा गया था। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम के नेतृत्व में चार गिरफ्तारियां की हैं। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    आरटीआइ के आड़ मे घोटाले

    एसआईटी के अनुसार, चारों आरोपियों ने सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर पिछले कुछ वर्षों में 102 प्रॉपर्टी नकशे और अभिलेखों में हेराफेरी की। इसमें फर्जी सिटी सर्वे नंबर, गैर-मौजूद निर्माण और बदली हुई सीमाएं जैसे गलत विवरण शामिल थे। आरटीआई अनुरोध दाखिल करने की आड़ में जाली मानचित्र वितरित किए गए। बीएमसी अधिकारियों ने कथित तौर पर इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निर्माण और बिक्री को मंजूरी दी, इन सरकारी विभाग मे भ्रष्ट अधिकारियों के कारण सरकार को काफी हद तक राजस्व का नुकसान और पर्यावरण को क्षति पहुंचाने का काम हुआ है। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    1955 से 1984 के दस्तावेजों में हेरफेर

    जांच में पाया गया कि उप अधीक्षक के कार्यालय में रखे गए 1955-1984 के 884 स्थायी गणना मानचित्रों में से 102 फर्जी थे। इन मानचित्रों के आधार पर निर्माण किया गया, जो 1964 से पहले अस्तित्व में ही नहीं थे। महाराष्ट्र सरकार ने एसआईटी के निष्कर्षों के बाद, शहरी विकास के प्रमुख सचिव और पुणे में भूमि अभिलेखों के निदेशक को सार्वजनिक अभिलेखों में हेराफेरी करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    नागपुर से मूल मानचित्र जब्त

    एसआईटी ने नागपुर में महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर से सभी 884 मूल मानचित्र और उनकी डिजिटल प्रतियां जब्त कर ली हैं। आगे की जांच में अतिरिक्त संदिग्धों की पहचान करने और सभी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पिछले गुरुवार को, एसआईटी ने 50 वर्षीय अवैध ठेकेदार नरशिम पुत्तवल्लू को गिरफ्तार किया, जो सभी चार एफआईआर में आरोपी है, साथ ही सिटी सर्वे ऑफिस के दो सेवानिवृत्त अधिकारियों देवदास जाधव और मरडे और रियल एस्टेट एजेंट इमाम शेख को भी गिरफ्तार किया है। उन पर बीएमसी और भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से रिकॉर्ड में जालसाजी करने का मामला दर्ज किया गया था। (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

    पुलिस ने क्या कहा?

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘सीआरजेड और एनडीजेड भूमि पर अवैध निर्माण ने पारिस्थितिकी संतुलन (ecological balance) को बुरी तरह प्रभावित किया है। राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। बीएमसी और भूमि अभिलेख विभाग के कुल 18 अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया के कारण जांच में देरी हुई।’ (Mumbai- Manipulation of government documents to legalize property on sea coast, 4 arrested, 18 officials interrogated)

  • Maharashtra: कैदियों के लिए बड़ी खबर जमानत याचिका पर जल्द होगी सुनवाई

    Maharashtra: कैदियों के लिए बड़ी खबर जमानत याचिका पर जल्द होगी सुनवाई

    बॉम्बे हाईकोर्ट में अरुण भेलके द्वारा दायर की गई याचिका में उसकी पत्नी कंचन नानावरे को 2014 में गिरफ्तार किया गया था। नानावरे को 2020 में एक गंभीर बीमारी का पता चला, लेकिन उसे जमानत नहीं दी गई और उसकी मौत हो गई।

    इस्माईल शेख
    मुंबई
    बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर बीमारी से ग्रस्त कैदियों के जेल में बंद रहने पर चिंता जताई है। इन कैदियों को चिकित्सा के लिए जमानत दी जाए या उन्हें नजरबंदी में रखा जाए इसको लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से विचार करने को कहा है। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)

    कैदियों से मुलाकात

    न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि वे रविवार को पुणे की यरवदा केंद्रीय कारागार गए थे और वहां के कैदियों में खासकर महिलाओं से मुलाकात की और हालात का जायजा लिया। अदालत ने अगस्त 2010 में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई एक सलाहकार रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसमें गंभीर बीमार कैदियों के इलाज की नीति पर चर्चा की गई थी।

    केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में क्या है?

    केंद्रीय गृह मंत्रालय की सलाहकार रिपोर्ट के अनुसार, कोई भी कैदी जो किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त पाया जाता है, उसे चिकित्सा कारणों से जमानत, पैरोल, फर्लो (अवकाश), या घर में नजरबंदी या परिवार के सदस्यों की निगरानी में रखा जा सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में, ऐसे कैदियों को जेल में ही विशेष चिकित्सा देखभाल दी जा सकती है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से इस मुद्दे पर और सलाहकार रिपोर्ट के कार्यान्वयन पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। 

    क्या है मामला?

    यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में अरुण भेलके द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया है, जिनकी पत्नी कंचन नानावरे के साथ 2014 में गंभीर कानून विरोधी गतिविधियों के तहत गिरफ्तार किया गया था और उन्हें यरवदा जेल में बंद किया गया था। याचिका के अनुसार, नानावरे को 2020 में एक गंभीर बीमारी का पता चला, लेकिन उन्हें जमानत नहीं दी गई। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)

    जब उन्होंने चिकित्सा कारणों से जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया, तो उन्हें मेडिकल बोर्ड के पास भेज दिया गया, जिसने ‘हृदय और फेफड़े’ का प्रत्यारोपण करने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, किसी भी आदेश के पारित होने से पहले ही, जनवरी 2021 में उनकी पत्नी की मौत हो गई, जबकि उन्होंने जेल में लगभग सात साल बिताए थे। इसके बाद उनके पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें राज्य से 2010 की सलाहकार रिपोर्ट और महाराष्ट्र प्रोविजन (सजा की समीक्षा) नियमों के तहत दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की मांग की,

    अगली सुनवाई कब है ?

    भेलके की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गायत्री सिंह ने अदालत को बताया कि नियमों के तहत जेल अधीक्षक को एक गंभीर रूप से बीमार कैदी को उसके रिश्तेदारों के पास सौंपने का अधिकार होता है, ताकि वह अपने अंतिम दिन अपने परिवार के साथ बिता सके। उनकी दलालों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि याचिका की अगली सुनवाई जनवरी 2025 में होगी। (Maharashtra Big news for prisoners, bail petition will be heard soon)

  • ‘परिसर में हिजाब, टोपी और नकाब’.., कोर्ट ने कॉलेज में लड़कियों के बुर्का पहनने पर सुनाया फैसला, तिलक, बिंदी को लेकर पूछा ये सवाल

    ‘परिसर में हिजाब, टोपी और नकाब’.., कोर्ट ने कॉलेज में लड़कियों के बुर्का पहनने पर सुनाया फैसला, तिलक, बिंदी को लेकर पूछा ये सवाल

    कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बुर्का, हिजाब’ के संबंध में उसके अंतरिम आदेश का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए तथा मुम्बई के कॉलेज को दुरुपयोग की स्थिति में अदालत का रुख करने की छूट दी गई है।

    मुम्बई- सुप्रीम कोर्ट ने मुम्बई कॉलेज बुर्का मामले में फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा कि लड़कियों को कक्षा में बुर्का पहनने और परिसर में कोई भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बुर्का, हिजाब’ के संबंध में उसके अंतरिम आदेश का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

    मामले में मुम्बई कॉलेज को दुरुपयोग की स्थिति में अदालत का रुख करने की छूट दी गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने मुम्बई के एक कॉलेज के उस आदेश पर आंशिक रोक लगाई जिसमें परिसर में ‘हिजाब, बुर्का, टोपी और नकाब’ पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके साथ ही कॉलेज में ‘हिजाब’, ‘बुर्का’ पहनने पर प्रतिबंध संबंधी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुम्बई की ‘एजुकेशनल सोसाइटी’ से जवाब मांगा।

    क्या है मामला?

    बता दें कि मुम्बई के एक निजी कॉलेज में छात्रों के कैंपस में हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी आदि पहनने पर लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई।

    यह मामला मुम्बई के एन. जी. आचार्य और डी. के. मराठे. कॉलेज का है, जहां के कॉलेज प्रशासन ने “हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल और टोपी” पहनने पर बैन लगाया हुआ था। इसके खिलाफ 9 लड़कियों ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की गई थी।

    कॉलेज प्रशासन का भेदभाव ..

    सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कॉलेज प्रशासन से कहा, “छात्रों को यह चुनने की आजादी होनी चाहिए कि वे क्या पहन सकती हैं। कॉलेज उन पर दबाव नहीं डाल सकता… यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको अचानक पता चलता है कि देश में कई धर्म हैं।” कोर्ट ने पूछा, कि “क्या आप यह कह सकते हैं कि किसी शख्स को तिलक लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी?”

  • Global Warming: धरती केवल मनुष्यों के लिए नहीं है–सुप्रीमकोर्ट

    Global Warming: धरती केवल मनुष्यों के लिए नहीं है–सुप्रीमकोर्ट

    • जंगल बचाने केवल आदिवासी ही क्यों? पुरा देश क्यों नहीं?
    • Global Warming पर सरकारों में सकारात्मक दृष्टिकोण कहाँ ?
    • अवैध निर्माण के लिए शासन प्रशासन ही है जिम्मेदार..
    • क्या हर बात के लिए न्यायालयों पर ही आश्रित रहें?
    • शासन प्रशासन का कोई दायित्व नहीं ?

    सुरेंद्र राजभर
    मुंबई-
    Global Warming आज धरती, पर्यावरण खतरे में है।ग्लोबल वार्मिंग के खतरे वैज्ञानिकों की चेतावनी के बावजूद जंगल काटे जा रहे हैं। हसदेव जंगल बचाने केवल आदिवासी ही क्यों आंदोलित हैं। पूरा देश क्यों नहीं? हसदेव के लाखों पेड़ मात्र एक व्यक्ति के लिए काटे जा रहे हैं, जो पूरे देश के लिए खतरे की घंटी है। मुंबई में समुद्र तट से 500 मीटर दूर ही निर्माण का कानून बना है, लेकिन महानगर पालिका के भ्रष्ट अधिकारियों को मुंबई और मुंबईकरों की तनिक भी चिंता नहीं है। बीएमसी के उच्च जिम्मेदार अधिकारी और राज्य सरकार आंखें मूंदे हुए हैं।

    मुंबई में मनपा की खाली जमीनों का अधिकारी और नेता सौदा कर अपनी जेबें भर रहे हैं। चुनाव का पर्व भूमाफियाओं और बीएमसी अधिकारियों के लिए अवैध निर्माण का सुनहरा मौका देता है कालाधन अर्जित करने का। पत्रकार अपनी भूमिका निभाते हैं। फोटो सहित गैरकानूनी निर्माण की घटना प्रकाशित करते हैं। बीएमसी आयुक्त, शहरी विकास मंत्री सहित सभी जिम्मेदार चुप रहते हैं। कोई कार्रवाई नहीं होती। अवैध निर्माण में पुलिस, विधायक, सांसद और कार्पोरेटरों का भी सहयोग होता है। सभी अपने हिस्से का कमीशन लेकर अनदेखा अनसुना कर देते हैं। Global Warming

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    Global Warming News

    अहमदाबाद से लेकर सुदूर साउथ में भी अवैध रूप से जंगल, सरकारी जमीन, चारागाह, तालाब सब पर कब्जा किया जाता है। कुछ समय पूर्व रामटेक की घटना का स्मरण होगा ही। उत्तराखंड में खुद सरकार प्रकृति के विरुद्ध निर्माण कर रही है, जिससे जोशी मठ को खतरा हो गया है। उसका अस्तित्व मिटने की कगार पर है। उत्तराखंड की त्रासदी याद होगी जब नदी की सीमा में चार चार महल के होटल ताश के पत्तों की तरह ढहकर नदी की धार में बह गए थे। Global Warming

    अवैध निर्माण मात्र ग्रामप्रधानों, विधायकों, सांसदों और पुलिस जवाबदेह होती है। उत्तर प्रदेश में जिन माफियाओं के होटल रेस्टोरेंट भव्य अट्टालिकाएं योगी ने बुलडोज कराई उसके गैर कानूनी तरीके से निर्माण के समय कौन कौन अधिकारी, विधायक, सांसद थे उनका पता लगाकर साथ में उनके घर भी बुलडोजर से गिराना चाहिए था लेकिन सरकारें ऐसा नहीं करेंगी। जब कोई संपत्ति ढहाई या तोड़ी जाती है तो देश की संपत्ति का नुकसान होता है। Global Warming

    गैरकानूनी निर्माण ढहाने या तोड़ने की जगह गरीबों का आशियाना और सरकारी दफ्तर बैंक को दे देना चाहिए। सारे बैंक की अपनी बिल्डिंग नहीं है। उनसे भाड़ा सरकार ले सकती थी। यह सकारात्मकता होती लेकिन हमारी सरकारों में सकारात्मक दृष्टिकोण कहां? अवैध निर्माण के लिए शासन प्रशासन ही जिम्मेदार होता है। अवैध निर्माण न गिराकर अधिकारियों विधायकों सांसदों के शीश महल जब्त कर सरकारी उपक्रमों और निर्धन बिना पक्की छत वाले गरीबों को दे देना ही सकारात्मक कदम होगा। Global Warming

    Global Warming,

    धरती के पर्यावरण की रक्षा वृक्ष ही करते हैं।अब अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए वहां झोपड़ियां बनाकर सदियों से रहने और जंगल से ही अपनी रोजी रोटी कमाने वाले गरीबों को क्यों उजाड़ा जाए, एक धनवान के लिए जैसा कि हसदेव जंगल के लाखों पेड़ों को काटकर खत्म किया जा रहा है। याद रहे सुप्रीमकोर्ट ने सही कहा, धरती सिर्फ मनुष्यों के लिए नहीं हैं। यहां विभिन्न तरह के पशु पक्षी और अन्य जीव भी रहते हैं। वे जंगल और खाली जमीन पर ही आश्रित रहते हैं। पहले लोग अपने धोर लेकर सुबह जंगल जाते थे। पशुओं को जंगल में चारा मिलता है। चारागाह खत्म पशुओं का चारा खत्म। Global Warming

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    क्या हर बात के लिए हम न्यायालयों पर ही आश्रित रहें? शासन प्रशासन का कोई दायित्व नहीं है। अवैध निर्माण के लिए राजनीति का वोट बैंक प्रमुख होता है। इसीलिए जासंबिखकार अवैध निर्माण कराए जाते हैं।जैसे लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होते ही बीएमसी के जिम्मेदार भूमाफियाओं से साठ गांठ कर उनसे करोड़ों रुपए वसूली कर अपने सरकारी आकाओं तक पहुंचाते रहते हैं जिससे कभी अवैध बांधकाम नहीं टूटते।

  • जमानत के लिए न्यायालय में नकली दस्तावेजों का खुलासा

    जमानत के लिए न्यायालय में नकली दस्तावेजों का खुलासा

    मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 6 के पुलिस अधिकारियों ने मानखुर्द के महात्मा फुले नगर से विभिन्न पुलिस थानों में गिरफ्तार आरोपियों के न्यायालयीक जमानत के लिए नकली सरकारी दस्तावेजों के इस्तेमाल का खुलासा किया है। मामले में 5 आरोपी गिरफ्तार ..

    इस्माईल शेख
    मुंबई-
    मानखुर्द के महात्मा फुले नगर में मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 6 के पुलिस अधिकारियों ने छापामारी कर सरकारी और निजी कार्यालयों के नकली दस्तावेजों के साथ सरकारी रबर स्टैंप बरामद किया है। जो मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई जैसे आसपास के जिलों के विभिन्न पुलिस थानों में गिरफ्तार अपराधिक मामलों के आरोपी को न्यायालय से जमानत पाने के लिए सरकारी नकली दस्तावेज बनाने का काम करते थे। मौके पर से दो आरोपी 44 वर्षीय अमित नारायण गिजे और 44 वर्षीय बंडु वामन कोरडे को हिरासत में लेकर पूछताछ में पुलिस के सामने और तीन आरोपियों का खुलासा हुआ है। (Use of fake government documents to get bail from court in Mumbai)

    जमानत के लिए नकली दस्तावेज ..

    मुंबई क्राईम ब्रांच प्रकटीकरण 1 के पुलिस उपायुक्त विशाल सिंह ठाकुर ने बताया, कि क्राईम ब्रांच युनिट 6 के प्रभारी पुलिस निरीक्षक रवींद्र साळुंखे को मानखुर्द में जमानत के लिए लगने वाले विभिन्न जमींदारों के विभिन्न नकली दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वेतन स्लिप, राशनकार्ड, बैंक पासबुक और अन्य सरकारी कागज़ात बनाने और सरकारी मुहर का इस्तेमाल किए जाने की गुप्त सूचना मिली थी। इसकी जांच और गिरफ्तारी के लिए पुलिस निरीक्षक पवार और ननावरे, सहायक पुलिस निरीक्षक गावडे, पुलिस उपनिरीक्षक मुठे, रहाणे, बेळनेकर, सावंत, सकपाळ, आव्हाड, महिला पुलिस उपनिरीक्षक माशेरे, सहायक फौजदार कुरडे, देसाई, पुलिस हवलदार पारकर, तुपे, वानखेडे, शिंदे, गायकवाड़, मोरे, पुलिस सिपाही घेरडे, माळवेकर, कोळेकर, पवार, डाळे, पाटील और महिला पुलिस सिपाही अभंग, सुतार को साथ लेकर एक टीम का गठन किया गया। (Use of fake government documents to get bail from court in Mumbai)

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    पुलिस ने बताया कि छापामारी में नकली आधार कार्ड, राशनकार्ड, विभिन्न कंपनियों के पहचान पत्र, पेनकार्ड, महानगर पालिका की टैक्स पावती, एक लैपटॉप, एक मल्टी प्रिंटर, एक मिनी लेमिनेटर, एक ही व्यक्ति के अलग-अलग नामों से बने नकली आधार कार्ड, राशनकार्ड, पेनकार्ड, बैंक स्टेटमेंट, सालव्हनसी, विभिन्न कंपनियों के नकली पहचान पत्र बरामद कर आरोपी अमित नारायण गिजे और बंडु वामन कोरडे को हिरासत में लेकर पूछताछ किया तो और भी अपराधियों का खुलासा हुआ। (Use of fake government documents to get bail from court in Mumbai)

    नकली,
    पुलिस उपायुक्त विशाल सिंह ठाकुर द्वारा प्रेस कॉन्फ़्रेंस की तस्वीर

    पुलिस ने 44 वर्षीय अहमद कासिम शेख को छेडा नगर से, 34 वर्षीय संजीव सोहनलाल गुप्ता को ठाणे शहर के भिवंडी से, 48 वर्षीय उमेश अर्जुन कावळे को ठाणे शहर के कल्याण से हिरासत में लेकर कुल 5 आरोपियों के खिलाफ मानखुर्द पुलिस थाने में गुनाह रजिस्टर्ड क्रमांक 125/2024 एवं मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 6 में गुनाह रजिस्टर्ड क्रमांक 36/2024 में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 465, 467, 468, 471, 473, 474, 475, 476, 120 (ब) तहत मुकदमा दर्ज कर मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 6 के पुलिस अधिकारी मामले की अभी और अधिक तहकीकात कर रहे हैं। (Use of fake government documents to get bail from court in Mumbai)

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  • इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल।

    इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल।

    • इलेक्टोरल बॉन्ड का झोल सामने आते शुरू हुआ देश में राजनैतिक भूचाल।
    • कौन से दल ने कितना किया झोल?
    • रिपोर्ट अभी और बाकी है..
    • Electoral Bond Indian Government Political News

    सुरेन्द्र राय
    मुंबई-
    हम भारतीय अपने जहन में कई वर्षो से लगातार एक जटिल समस्या का हल ढूंढ रहे है और वह जटिल समस्या यह है, कि इंसान अंततः भ्रस्ट क्यों हो रहा है? जबकि हमारे भारतीय समाज में भ्रस्टाचार के वर्चस्व का एक नया स्तंभ स्थापित हो चुका है और हमने इसमें ज्ञान, दौलत और हिंसा की एक ऐसी मिसाल इलेक्टोरल बॉन्ड जैसे को खड़ी कर दी है, जो भ्रस्टाचार और सत्ता के मध्य अटुट और अतरंग संबंध स्थापित करती नजर आ रही है।

    हालांकि यह सत्ता विमर्श एक गंभीर जिरह की मांग करता है, जो सामाजिक विकास कार्य में अवरुद्ध करने वाला घटक के रूप में साबित हो रहा है, जो एक भ्रस्ट आचरण की पहचान है। जिसकी हमें घोर निंदा की जानी चाहिए।
    अब ऐसे में पिछले पांच वर्षों में कंपनियों ने अपने फ़ायदे के लिए सरकार को इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए कितना पैसा दिया यह पूरी तरह से अभी खुला नहीं है। घाघ लोगों का खुलासा एस बी आई ने नहीं किया। पांच वर्षों में किस कंपनी ने कितना चंदा दिया?

    Indian Fasttrack Political News

    ‘बिजनेस टाइम्स’ मैगज़ीन में छपी खबर के अनुसार भारती एयरटेल में 241 करोड़, तता स्टील ने 175 करोड़, एल एन्ड टी ने 85 करोड़, महेंद्रा एन्ड महिंद्रा ने 39 करोड़, अल्ट्राटेक सीमेंट ने 23 करोड़, बजाज फाईनैंस ने 20 करोड़, मारुति सुज़ुकी ने 20 करोड़, टेक एम ने 15 करोड़ रुपए के बॉन्ड खरीदे। बीजेपी को पिछले दो वर्षों में यानी 2019 में 216.9 करोड़, 2023/24 में 296.12 करोड़ मिले। जबकि कांग्रेस को 2019 में मात्र 15.85 करोड़ और 2023/24 में 81.1 करोड़ मिले। इसके साथ ही दूसरे दलों को 2019 में 4.55 करोड़ और 2023/24 में 33 करोड़ मिले।

    किसने कितने खरीदे इलेक्टोरल बॉन्ड ?

    पिछले पांच साल इलेक्टोरल बॉन्ड में कितने पैसे मिले हैं इसपर नज़र डालें तो पता चलता है, कि 2019 में 237 करोड़ , 2020 में 46 करोड़, 2021 में 40 करोड़ रुपए मिले। जबकि 2022 में 563 करोड़ और 2023 में 347 करोड़ के साथ दो वर्षों का भारी उछाल देखने को मिला। 2024 में सिर्फ 65 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे गए।

    इलेक्टोरल बॉन्ड,

    कांग्रेस के चारों एकाउंट आई टी ने फ्रीज किए हैं। इसलिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा गैरकानूनी गैरसंवैधानिक बताए जाने पर बीजेपी के भी खाते सीज करने की मांग की ज़ा रही है। यही न्याय का तकाज़ा भी है।
    प्रकाशित खबर के मुताबिक, फ्यूचर जेमिंग कंपनी द्वारा 149 करोड़ 2020 में, 324 करोड़ 2021 में, 440 करोड़ 2022 में, 321 करोड़ 2023 में और 2024 में 63 करोड़ क्षेत्रीय दलो जिसमें डी एम के, टी एम सी, वाई एस आर कांग्रेस और अन्य को दिए।

    Electoral Bond News

    जबकि 2019 में बीजेपी को 125 करोड़ 2021 में, 33 करोड़ 2022 में, 129 करोड़ और 2023 में, 297 करोड़ रुपये मेघा इंजीनियरिंग ने दिए। क्विक ने भाजपा को 325 करोड़ 2022 में, शिवसेना को 25 करोड़, 2023 में बीजेपी को 50 करोड़ दिए।
    इसके साथ ही लिस्टेड कंपनियों से बीजेपी को 2019 और 2023/24 में 216.9 करोड़ और 298.12 करोड़ रुपए मिले, जबकि कांग्रेस को 15.85 और 81.1 करोड़, अन्य दलों को 4.55 और 33 करोड़ मिले।

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    टॉप 10 डोनर्स के 9.6 करोड़ मूल्य के इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गए। जिनमे फ्यूचर जेमिंग के 3, ई सी एल के 2, पैसिफिया इंडिया के 1.25, सिलवेनस बिल्डर के 1, सी मेकर्तिच के 0.4, वेदांता लिमिटेड के 0.3, सुधा कमर्शियल के 0.3, जुपिटर के 0.25, उत्कल अलमुनियम के 0.2 करोड़ रुपए का इलेक्टोरल बॉन्ड एकस्पायर हो गया। अकेले जालान ग्रुप की कंपनी केवेंटर फूडपार्क ने बीजेपी को 144.5, कांग्रेस को 20, अकाली दल को 0.5, यस पी को 10, टी एम सी को 20 करोड़ रुपये दिए।

    जबकि मदनलाल लिमिटेड ने बीजेपी को एकमुश्त 175 करोड़, कांग्रेस को 10 करोड़ और एम के जे ने कांग्रेस को 69.35, आप को 7, टी एम सी को 18.5, बी आर एस को 10, बीजेपी को 12.5, और बी जे डी को 10 करोड़ रुपए दिए। इसके साथ ही एम के जे ने कांग्रेस को 22.25, टी एम सी को 27.4, बीजेपी को 14.07 करोड़ दिए। सस्मल इंफ्रास्ट्रक्चर ने कांग्रेस को 39 करोड़ और बीजेपी को 5 करोड़ दिए।