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  • Mumbai News: अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रा पर ED की बड़ी रेड, मुंबई और इंदौर के ठिकानों पर छापा

    Mumbai News: अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रा पर ED की बड़ी रेड, मुंबई और इंदौर के ठिकानों पर छापा

    अनिल अंबानी की Reliance Infrastructure Ltd पर ED की बड़ी कार्रवाई। मुंबई और इंदौर में 6 ठिकानों पर छापेमारी, विदेशी मुद्रा कानून उल्लंघन (FEMA) मामले में जांच जारी।

    मुंबई: कारोबारी जगत में आज एक बार फिर से हलचल मच गई जब एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने इंडस्ट्रियलिस्ट अनिल अंबानी की Reliance Infrastructure Limited (R-Infra) के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की। मुंबई और इंदौर में एक साथ 6 जगहों पर छापेमारी की जा रही है। यह पूरा मामला कथित रूप से विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन और विदेश में अवैध धन भेजने से जुड़ा बताया जा रहा है।

    ED की छापेमारी से मचा हड़कंप

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    ED अधिकारियों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने मंगलवार सुबह से ही मुंबई और इंदौर के 6 ठिकानों पर रेड शुरू की। इनमें से कुछ दफ्तरों से लेकर निजी प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं। जांच का फोकस इस बात पर है कि रिलायंस इंफ्रा के जरिए विदेशों में अवैध तरीके से धन ट्रांसफर तो नहीं किया गया।

    मामला क्या है?

    ED की ये कार्रवाई दरअसल FEMA यानी Foreign Exchange Management Act के उल्लंघन से जुड़ी है। आरोप है कि रिलायंस इंफ्रा के जरिए करोड़ों रुपए की रकम विदेशों में भेजी गई और उसकी जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या संबंधित एजेंसियों को ठीक तरीके से नहीं दी गई। इस मामले में पहले से ही कुछ वित्तीय अनियमितताओं की रिपोर्ट्स सामने आ चुकी थीं। अब ED ने कार्रवाई करते हुए छापेमारी शुरू कर दी है।

    अनिल अंबानी और उनकी कंपनी पर सवाल

    अनिल अंबानी की Reliance Group बीते कई सालों से आर्थिक मुश्किलों में फंसी रही है। खासकर रिलायंस कम्युनिकेशंस और उससे जुड़ी कंपनियों के कर्ज के मामले पहले ही काफी सुर्खियों में रह चुके हैं। अब Reliance Infrastructure पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ED यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर कंपनी ने अपनी फॉरेन डीलिंग्स में किस तरह के नियम तोड़े और कितना पैसा विदेश भेजा गया।

    छापेमारी के दौरान क्या मिला?

    हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी कोई बड़ा खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, ED टीम ने कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डेटा जब्त किया है। इसमें कंपनी के अकाउंट्स, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और ईमेल्स शामिल हो सकते हैं। जानकारी ये भी मिल रही है कि एजेंसी कुछ शेल कंपनियों और विदेशी खातों की भी जांच कर रही है जिनके जरिए कथित रूप से पैसे ट्रांसफर किए गए।

    अनिल अंबानी का बयान क्या है?

    फिलहाल अनिल अंबानी या Reliance Infrastructure की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कंपनी ED की जांच में पूरा सहयोग कर रही है।

    ED की जांच का दायरा और बढ़ सकता है

    ED की इस रेड को सिर्फ शुरुआत माना जा रहा है। अगर छापेमारी में पुख्ता सबूत मिलते हैं तो आने वाले दिनों में अनिल अंबानी समेत कंपनी के कई टॉप एग्जीक्यूटिव्स से पूछताछ की जा सकती है। इसके अलावा, मामला कोर्ट तक भी पहुंच सकता है।

    अनिल अंबानी और विवादों का पुराना रिश्ता

    अनिल अंबानी का नाम इससे पहले भी कई विवादों में आ चुका है।

    • राफेल डील विवाद के दौरान उनका नाम काफी चर्चा में रहा।
    • उनकी कंपनियों पर भारी-भरकम कर्ज चढ़ा और कई बार उन्हें कोर्ट में भी पेश होना पड़ा।
    • अनिल अंबानी को 2019 में लंदन कोर्ट ने भी संपत्ति और कर्ज मामले में तलब किया था।

    अब Reliance Infrastructure पर यह नई कार्रवाई उनके लिए एक और बड़ा झटका मानी जा रही है।

    क्या है FEMA कानून?

    Foreign Exchange Management Act (FEMA) भारत का वो कानून है जिसके जरिए विदेशों में पैसे भेजने और वहां से पैसे लाने पर निगरानी रखी जाती है। अगर कोई कंपनी या व्यक्ति बिना नियमों का पालन किए विदेशी करेंसी में ट्रांजेक्शन करता है, तो ये गंभीर अपराध माना जाता है और ED जैसी एजेंसियां सीधे जांच में उतर जाती हैं।

    आर्थिक जगत में चर्चा का माहौल

    इस खबर के सामने आने के बाद मुंबई के बिजनेस सर्कल में खलबली मच गई है। कई लोग मान रहे हैं कि अगर यह मामला गंभीर साबित हुआ तो अनिल अंबानी की कंपनियों की स्थिति और खराब हो सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस कार्रवाई का असर स्टॉक मार्केट और खासकर रिलायंस इंफ्रा के शेयरों पर भी दिख सकता है।

    मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा

    जैसे ही खबर आई, सोशल मीडिया पर #AnilAmbani और #EDRaid ट्रेंड करने लगे। लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे बिजनेस फ्रॉड पर सख्त कार्रवाई बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक एंगल से भी जोड़ रहे हैं।


    FAQ

    Q1. ED ने छापेमारी कहां की?
    मुंबई और इंदौर में कुल 6 ठिकानों पर।

    Q2. मामला किससे जुड़ा है?
    अनिल अंबानी की Reliance Infrastructure Limited और कथित FEMA उल्लंघन से।

    Q3. क्या अनिल अंबानी से पूछताछ होगी?
    अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई, लेकिन सबूत मिलने पर संभव है कि उन्हें बुलाया जाए।

    Q4. FEMA कानून क्या है?
    यह विदेशी मुद्रा लेन-देन को नियंत्रित करने वाला भारतीय कानून है।

    Q5. क्या पहले भी अनिल अंबानी विवादों में रहे हैं?
    हां, राफेल डील, कर्ज मामले और लंदन कोर्ट में पेशी जैसे विवादों में उनका नाम रहा है।

  • कटनी में निकलेगा 7 लाख टन सोना, मुंबई की कंपनी को 50 साल की लीज – जिले को मिलेगा 100 करोड़ का फायदा

    कटनी में निकलेगा 7 लाख टन सोना, मुंबई की कंपनी को 50 साल की लीज – जिले को मिलेगा 100 करोड़ का फायदा

    मध्य प्रदेश के कटनी जिले में सोना-चांदी और मिनरल्स की नई खदान शुरू होने जा रही है। मुंबई की कंपनी प्रोस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स को 50 साल की लीज मिली है। इस प्रोजेक्ट से जिले को 100 करोड़ से ज्यादा का राजस्व और हजारों रोजगार मिलने की उम्मीद है।

    मध्य प्रदेश: एमपी के कई जिले अब मिनरल हब बनते जा रहे हैं। पन्ना हीरों के लिए पहले से मशहूर सिंगरौली में 18 हजार टन सोना मिलने की पुष्टि हो चुकी है। अब बारी है कटनी की, जहां इमलिया गांव की जमीन के नीचे सोना-चांदी और अन्य खनिज का खजाना मिला है। यहां करीब 7 लाख टन सोना-चांदी और मिनरल्स निकाले जाएंगे।

    मुंबई की कंपनी को मिला 50 साल का ठेका

    इस खदान की जिम्मेदारी मुंबई की प्राइवेट कंपनी प्रोस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। कंपनी को 50 साल की लीज मिल चुकी है। अगले 6 महीनों में खनन का काम शुरू कर दिया जाएगा।

    जिले को मिलेगा 100 करोड़ का फायदा

    इस प्रोजेक्ट से कटनी जिले को बड़ा राजस्व मिलेगा। कंपनी आने वाले सालों में टैक्स के रूप में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा देगी। इसके साथ ही जिला प्रशासन को लंबे समय तक लगातार फायदा होता रहेगा।

    रोजगार और ज्वेलरी हब बनने की संभावना

    खनन के साथ ही भविष्य में कटनी में ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की योजना है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
    मार्च 2026 तक यहां जमीन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं और मशीनरी इंस्टॉलेशन पूरा करने का टारगेट रखा गया है।

    एयरपोर्ट निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी

    खनन प्रोजेक्ट के बाद कटनी जिले में इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा मिलेगा। यहां एयरपोर्ट निर्माण की भी संभावना तेज हो गई है, जिससे पर्यटन और इंडस्ट्री दोनों को फायदा होगा।


    FAQ

    Q1. कटनी जिले में कितनी मात्रा में सोना-चांदी मिलने की उम्मीद है?
    यहां करीब 7 लाख टन सोना-चांदी और अन्य मिनरल्स निकाले जाएंगे।

    Q2. किस कंपनी को खदान का ठेका मिला है?
    मुंबई की प्राइवेट कंपनी प्रोस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड को 50 साल की लीज मिली है।

    Q3. जिले को इससे कितना फायदा होगा?
    टैक्स और रॉयल्टी के रूप में जिले को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व मिलेगा।

    Q4. इस प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों को क्या लाभ होगा?
    रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और भविष्य में ज्वेलरी यूनिट्स खुलने की संभावना है।

    Q5. खनन का काम कब शुरू होगा?
    अगले 6 महीनों में खनन का काम शुरू हो जाएगा और मार्च 2026 तक पूरी तैयारी हो जाएगी।

  • Bigg Boss के नाम पर 10 लाख रुपये की ठगी, मुंबई पुलिस ने किया FIR दर्ज

    Bigg Boss के नाम पर 10 लाख रुपये की ठगी, मुंबई पुलिस ने किया FIR दर्ज

    Bigg Boss 19 सीजन विवादों में घिर गया है। एक डॉक्टर से शो का हिस्सा बनने को लेकर 10 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगा है। मुंबई पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने के बाद इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    देश का सबसे चर्चित टेलिविजन रियलिटी शो बिग बॉस सीज़न 19 शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया है। हालांकि फैंस शो को लेकर बेहद एक्साइटेड नजर आ रहे हैं, लेकिन शुरू होने से पहले ही शो में भाग लेने को लेकर पैसों के लेन-देन और ठगी का मामला प्रकाश में आ रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो पिछले 2 दिनों से वायरल हो रहा है। इसमें एक डॉक्टर ने बिग बॉस कंटेस्टेंट सिलेक्शन को लेकर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने दावा किया, कि बिग बॉस में आने के नाम पर उनसे पैसे लेकर धोखा दिया गया है।

    बिग बॉस पर लगे आरोप

    बिग बॉस में कंटेस्टेंट बनकर भेजने के नाम पर जिस व्यक्ति ने ठगी का आरोप लगाया है वह मध्य प्रदेश के भोपाल के रहने वाले पेशे से डॉक्टर हैं। डॉक्टर अभिनीत गुप्ता पेशे से एक स्किन स्पेशलिस्ट यानी डर्माटॉलॉजिस्ट हैं। 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी के बाद उन्होंने पहले भोपाल में शिकायत दर्ज कराई और उसके बाद मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करवाया।

    पहले की थी 1 करोड़ रुपये की मांग

    हाल ही में मुंबई के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर भोपाल के रहने वाले हैं डॉक्टर अभिनीत गुप्ता ने इस पूरी ठगी का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ये मामला साल 2022 का है। उस दौरान किसी करण सिंह नामक व्यक्ति का उन्हें फोन आया था और उसने बिग बॉस में एंट्री दिलाने के लिए उन्हें लालच दिया था। उस दौरान करण सिंह ने उन्हें कहा था कि बिग बॉस के मेकर्स से उनकी अच्छी पहचान है वो उनकी एंट्री बिग बॉस में करा देगा लेकिन उसके लिए 1 करोड़ रुपये देने होंगे।

    60 लाख में सौदा तय 10 लाख की ठगी

    कॉन्फ़्रेंस के दौरान डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने 1 करोड़ रुपये देने से मना किया, तो सिंह ने उनसे 60 लाख रुपयों की मांग करते हुए उनकी मीटिंग एंडेमोल कंपनी के अध्यक्ष के साथ तय कर दी। मुंबई में बिकेसी स्थित बिग बॉस के ऑफिस में मिटिंग के दौरान कंपनी के सीईओ ने भी करण के बैंक अकाउंट में 10 लाख रुपयों का भुगतान करने को कहा, जबकि डॉक्टर ने बिग बॉस के बैंक अकाउंट में पैसा जमा करना चाहते थे तो, कंपनी के लोगों ने बताया कि उन्हें लोगों को पैसे देने पडते हैं जब कंपनी पेमेंट कर देगी तो उसका भुगतान आप को हो जाएगा। इस वजह से उन्होंने सिंह के बैंक अकाउंट में 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए। यह पूरी प्रक्रिया बिग बॉस सीज़न 16 के लिए चल रहा था। लेकिन सीजन 16 के कंटेस्टेंट्स की लिस्ट जब सामने आई तो उसमें उनका नाम नहीं था।

    लगातार देता रहा झांसा

    अभिनीत ने आगे बताते हुए कहा कि जब मैंने करण से पूछा कि लिस्ट में मेरा नाम क्यों नहीं है? तो उसने कहा कि वाइल्ड कार्ड के तौर पर आपकी एंट्री होगी, लेकिन सीजन खत्म हो गया और मेरी एंट्री नहीं हुई। इसके बाद जब मैंने दोबारा पूछा तो वो मुझे फिर से गुमराह करता रहा और उसने कहा कि 17वें सीजन में एंट्री होगी। 17वें सीजन के खत्म होने के बाद भी एंट्री नहीं हुई तब मैंने उससे पैसे वापस मांगे तो उसने नहीं दिए। मैंने पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज की। आप को बता दें, कि साल 2025 में सीजन 19वां आ रहा है। जो 24 अगस्त से जियो हॉटस्टार पर और कलर्स पर देखने को मिलेगा। उससे पहले ही शो को लेकर पैसों की लेनदेन और ठगी के कारण विवादित चर्चा में बना हुआ है।

  • ड्रग्स फैक्ट्री का भांडाफोड़, डी-कंपनी से लिंक होने का अनुमान

    ड्रग्स फैक्ट्री का भांडाफोड़, डी-कंपनी से लिंक होने का अनुमान

    कर्नाटक के मैसूर में 434 करोड़ रुपये की ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। इसमें डी-कंपनी की फंडिग सोर्स का अनुमान लगाया जा रहा है। मैसूर से बेंगलूर और फिर मुंबई होती थी ड्रग्स की तस्करी। मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया कि ड्रग्स की तस्करी के लिए ‘शर्ट की फोटो’ को कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    मुंबई: कर्नाटक के मैसूर में 434 करोड़ रुपए की ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। यह ड्रग तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। केस की जांच शुरू हुई तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। मुंबई की साकीनाका पुलिस ने जांच के दौरान खुलासा किया कि किस तरह ड्रग्स की तस्करी का रैकेट काम करता था। कर्नाटक से महाराष्ट्र तक ड्रग्स की तस्करी और इंटरनेशनल स्तर तक इसकी सप्लाई होती थी। ड्रग्स सप्लायर इसके लिए अनोखा और बेहद गुप्त तरीका अपनाते थे। इस मामले को लेकर जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के डी-कंपनी का पैसा लगा हो सकता है। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    कौन है मास्टरमाइंड?

    मुंबई पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क में ‘शर्ट की फोटो’ को कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। जांच में सामने आया कि ड्रग्स की सप्लाई और प्रोडक्शन की प्रक्रिया दो अलग-अलग गिरोह करते थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन दोनों ही गैंग के सदस्यों को एक-दूसरे के बारे में कुछ भी पता नहीं होता था। मुंबई पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसी अब इस ऑपरेशन के पीछे की पूरी चैन, फंडिंग सोर्स, मास्टरमाइंड और सप्लायर्स नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    पुलिस के लिए मुश्किलें

    यह ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री और इसके सप्लाई की चैन पूरे ऑपरेशन की सबसे खतरनाक और शातिर ‘मॉडस ओपेरेंडी’ अपनाती थी। पुलिस ने बताया कि इस तरह की व्यवस्था से नेटवर्क की परतें खोलना बेहद मुश्किल हो गया था। हालांकि मुंबई पुलिस की हाईटेक टीम ने इसकी पर्तें खोल ही लीं। लेकिन अब भी बहोत सारे राज खुलने की आशंका जताई जा रही है। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    बेंगलुरु में क्या होता था?

    अंधेरी पूर्व की साकीनाका पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मैसूर की फैक्ट्री में एमडी नामक ड्रग्स तैयार होती थी। यहां काम करने वालों को नहीं पता होता था कि गाड़ी में लोड करने के बाद ड्रग्स को कहां लेकर जाया जाएगा। खेप को एक दूसरे गैंग के जरिए सबसे पहले कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु पहुंचाया जाता था। बेंगलुरु में मुंबई के गैंग का एक मेंबर पहले से मौजूद होता था। ड्रग्स सप्लाई करने और उसे लेने आने वालों को एक दूसरे को एक कोड दिखाना होता था।

    कैसे होती थी ड्रग्स की डिलीवरी?

    पुलिस ने बताया यह कोड एक टीशर्ट होती थी। जो हर बार सप्लाई के लिए अलग-अलग यूज की जाती थी। दोनों के पास सेम टीशर्ट का फोटो वॉट्सऐप किया जाता था। फिर वे एक दूसरे को वह दिखाकर खेप की सप्लाई करते थे। इस तरह खेप को बेंगलुरु से मुंबई तक लाया जाता था। मुंबई लाने के बाद इसे मुंबई के विभिन्न इलाकों में स्थानीय सप्लायर्स के जरिए सप्लाई होती थी। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

    कैसे होता था ट्रांसपोर्टेशन?

    पुलिस ने बताया कि ड्रग्स का पूरा ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम सड़क मार्ग पर आधारित था। तस्कर हवाई या ट्रेन मार्गों में होने वाली जांच से बचने के लिए रोड का इस्तेमाल करते थे। पुलिस जांच में सामने आया, कि यह नेटवर्क ड्रग्स को बसों और निजी वाहनों के माध्यम से ट्रांसपोर्ट करता था। मैसूर से बेंगलुरु और फिर मुंबई तक का सफर तय कर ड्रग्स को लगेज के भीतर छिपाकर पहुंचाया जाता था। इस तरह की रणनीति से सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने में तस्वीरों को काफी हद तक सफलता भी मिली।

    आईबी के अधिकारी कर रहे हैं पूछताछ

    इस मामले में अब इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की भी एंट्री कर चुकी है। सोमवार को आईबी अधिकारियों ने गिरफ्तार आरोपियों से लंबी पूछताछ की। जांच एजेंसियों को शक है कि यह ड्रग्स फैक्ट्री सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है। साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि इसका लिंक अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से भी हो सकता है। साकीनाका पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां अब इस ऑपरेशन के पीछे की पूरी चैन, फंडिंग सोर्स, मास्टरमाइंड और सप्लायर्स नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं। Drugs factory busted, suspected to be linked to D-company

  • 12वीं पास युवाओं को मिलेगा फ्री कंप्यूटर कोर्स और 15 हजार रुपये की स्कॉलरशिप

    12वीं पास युवाओं को मिलेगा फ्री कंप्यूटर कोर्स और 15 हजार रुपये की स्कॉलरशिप

    Free Computer Training Scheme: डिजिटल भारत मिशन के तहत भारत सरकार ने फ्रि कंप्यूटर कोर्स के साथ 15 हजार रुपये के आर्थिक मदद देने ऐलान कर दिया है। यह स्कॉलरशिप 12वीं पास युवाओं के लिए आरक्षित कर दी गई है। आईये जानते हैं कैसे और कहां करें आवेदन?

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    भारत सरकार ने डिजिटल भारत मिशन को आगे बढ़ाते हुए 12वीं पास युवाओं के लिए एक बेहद लाभकारी योजना की शुरुआत की है। फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना 2025 के अंतर्गत अब युवाओं को मुफ्त में कंप्यूटर कोर्स करने का अवसर मिलेगा, साथ ही 15000 रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

    बेसिक से एडवांस

    इस योजना के माध्यम से छात्र न केवल बेसिक से लेकर एडवांस कंप्यूटर स्किल्स सीख सकेंगे, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। यह मदद सीधे छात्र के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाऐंगे ताकि वे कोर्स के दौरान आर्थिक बोझ से मुक्त रह सकें।

    किन्हें मिलेगा योजना का लाभ?

    फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना का लाभ केवल उन्हीं युवाओं को मिलेगा जो भारत के नागरिक होंगे। जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है और जिनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होगी। इसके साथ ही, परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आवेदक ने पहले से किसी संस्थान से कंप्यूटर कोर्स नहीं किया होना चाहिए।

    कोर्स में क्या-क्या सिखाया जाएगा?

    इस योजना के अंतर्गत युवाओं को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, इंटरनेट का उपयोग, डिजिटल लेन-देन, साइबर सुरक्षा, टाइपिंग, ईमेलिंग और सरकारी पोर्टल्स पर कार्य करना सिखाया जाएगा। कोर्स की अवधि 3 से 6 महीने की होगी और यह पूरी तरह से सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा कराया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया कैसे करें?

    इच्छुक उम्मीदवार अपने राज्य की स्किल डेवलपमेंट या श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर “Free Computer Training Scheme” दर्शाया गया होगा। उसी पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन करें। इसी के साथ जरूरी दस्तावेज जैसे – आधार कार्ड, 12वीं की मार्कशीट, फोटो, बैंक पासबुक आदि अपलोड करें और आवेदन सबमिट कर दें। कुछ राज्यों में यह सुविधा CSC केंद्रों पर भी उपलब्ध हो चुकी है।

    योजना के प्रमुख लाभ

    योजना के तहत युवाओं को न केवल मुफ्त कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाएगी, बल्कि कोर्स पूरा करने के बाद एक सरकारी प्रमाणपत्र भी मिलेगा। साथ ही 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट भी मुहैया कराया जाएगा, जिससे युवाओं को करियर की दिशा में बेहतर अवसर मिल सकें।

    किन राज्यों में शुरू हुई यह योजना?

    यह योजना उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में लागू हो चुकी है। अन्य राज्यों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है।

    युवाओं को रोजगार में लाभ

    इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली ट्रेनिंग से छात्र सरकारी और प्राइवेट सेक्टर दोनों में रोजगार के लिए तैयार होंगे। डिजिटल इंडिया, CSC केंद्र, बैंकिंग, बीमा, डेटा एंट्री और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में इन युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    युवाओं का अनुभव और आत्मविश्वास

    कई युवाओं ने बताया कि इस कोर्स के माध्यम से उन्हें न केवल टेक्निकल स्किल्स मिलीं बल्कि नौकरी पाने में भी आसानी हुई। कुछ छात्रों को स्थानीय कंपनियों में 10000 रुपये से 15000 रुपये प्रति माह की शुरुआती नौकरी भी मिली है।

  • शिक्षा का भगवाकरण और सत्यानाश करती बीजेपी सरकारें

    शिक्षा का भगवाकरण और सत्यानाश करती बीजेपी सरकारें

    भाजपा सरकार देश भर में शिक्षा का भगवाकरण करते हुए सरकारी स्कूलों को क्यों बंद कर रही है? इसके पीछे का राज साफ है। भले ही देश की उन्नति खत्म हो जाय। लेकिन सवाल नही पूछना चाहिए।

    मुंबई: शिक्षा ही परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के द्वार खोलती है। जो देश जितना ही शिक्षित है उतना ही संपन्न और खुशहाल है। शिक्षा ही विकास का मूल है। अशिक्षित समाज भीड़ बन जाता है जिसका धर्म अराजकता अंधविश्वास होता है। अनियंत्रित भीड़ विनाश का कारण बनती है। किसी ने बिल्कुल ठीक ही कहा है, देश की बर्बादी के लिए हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं।

    देश में शिक्षा का भगवाकरण

    विपक्ष बीजेपी सत्ता पर आरोप लगाता है कि देश में सरकार शिक्षा का भगवाकरण कर रही है जिसमें सामाजिक आर्थिक मुद्दे गायब कर दिए जा रहे। इसका प्रमाण हैं कि राजस्थान में स्कूली किताबों से महात्मा गांधी के परिवार को हटाया जा रहा है।

    India-BJP-government-education-system

    शिक्षा और परीक्षा का सौदा

    सुप्रसिद्ध आई ए एस कोचिंग के शिक्षक विकास दिव्यकृति का कथन है, कि सत्ता में जब अनपढ़ लोग बढ़ जाते हैं तो शिक्षा और परीक्षा बिकने लगती है। देश की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर तीस से चालीस लाख में बेचे गए धनवानों को ताकि गरीब प्रतियोगी परीक्षा से बाहर चले जाएं और सरकार परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलकर डकार जाती है और जब छात्र पुनः परीक्षा की मांग करते है तो गुलाम पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसवाई जाती हैं।

    इसे भी पढ़े:- Mumbai BMC: अब शमशान और दफन भूमि की होगी ऑनलाइन बुकिंग

    शिक्षा पर 18% की जीएसटी

    उन्होंने यह भी कहा, कि शिक्षा का प्राइवेटीकरण करके माफियाओं को सौंपी जा रही जो मनमानी फीस और अन्य वस्तुएं छात्रों को बेचकर दौलत कमा रहे। आज स्कूल कॉलेज खोलना सबसे बड़ा व्यापार माना जाता है। सरकार खुद गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर रखने के लिए शिक्षा पर 18% जीएसटी लगाकर शिक्षा को महंगी कर चुकी है। सरकार ने 350 ऐसे लोगों को ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष बनाए जो पद आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को ही मिलते हैं लेकिन बिना आईएएस परीक्षा पास किए विशिष्ट विचारधारा के लोगों को आईएएस पोस्ट पर बिठा दिया गया।

    विश्वविद्यालयों पर भगवा कब्जा

    इतना ही नहीं आरएसएस की विचारधारा के लोगों को विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर और प्रोफेसर नियुक्त कर शिक्षा का भगवाकरण कर दिया है। ऐसे लोग यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठकर गैर विचारधारा वाले लोगों को पीएचडी में प्रवेश देने से मना कर दिया, लेकिन आंदोलन के कारण प्रवेश देने को मजबूर हो गए। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया बी एच यू या काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रोफेसर के रूप में एक सुयोग्य मुस्लिम को नियुक्त किया गया तो बीजेपी से संलग्न छात्र संघ के विरोध के कारण उन्हें हटा दिया गया या हटने को मजबूर कर दिया गया।

    BJP-governments-saffronising-and-destroying-education-system

    दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति पढ़ाने की योजना प्रबल विरोध के चलते पीछे हटने को बाध्य कर दिया। जिससे वी सी जो घोषणा करनी पड़ी कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति नहीं पढ़ाई जाएगी। यह बहुत बड़ा प्रमाण है शिक्षा के भगवाकरण का। BJP governments saffronising and destroying education

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    शिक्षा क्षेत्र मे भेदभाव

    शिक्षा के भगवाकरण के कारण ही उच्च पदों पर विशेषधारा के बैठे लोग जाति को लेकर भेदभाव किया जाता है जिस कारण बंगलुरु यूनिवर्सिटी में दस दलित प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किए जाने से सभी दलितों ने इस्तीफा दे दिया। जब शिक्षित लोग भी जाति के कारण अपमानित किए जा रहे हों, अर्थात शिक्षा क्षेत्र में जाति का बोलबाला हो जाए तो सिस्टम हिलाना जरूरी हो जाता है। दस दलित प्रोफेसरों का इस्तीफा देने की बाध्यता शिक्षा के भगवाकरण की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। जिसका अर्थ है शिक्षा पाने आने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

    धर्म की राजनीति

    हमारे देश में जितना संघर्ष धार्मिक स्थलों के लिए किया जा रहा है उतना ही संघर्ष यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता तो देश की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाती। बीजेपी सरकार धर्म की राजनीति के द्वारा वोट बैंक बनाने में लगी है देश समाज से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी आरएसएस और उसके एजेंट धूर्त, अज्ञानी और ढोंगी बाबा जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर धन और शरीर शोषण करते हैं। आशा राम और रामरहीम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।

    मानसिक गुलामी

    सरकार जानती है कि देश में जितने अधिक अशिक्षित रहेंगे उनसे कांवड़ उठवाना, मस्जिद के सामने नाचना, गालीया देना, सोशल मीडिया में गालियां लिखने के लिए मानसिक गुलाम बनाना और पांच किलो मुफ्त अनाज और चंद सिक्के भीख में देकर वोट पाना सरल हो जाता है। BJP governments saffronising and destroying education

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    मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं

    जबकि शिक्षित जो स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों से शिक्षा ज्ञान पाकर निकलते हैं वे संविधान पढ़ते हैं। अपने मौलिक अधिकार जानते हैं। सरकार के दायित्व क्या-क्या है की जानकारी रखते हैं। वे सत्ता से सवाल पूछने लगते हैं। सरकार की असफलता तानाशाही नफरती राजनीति जानते हैं। अपने अधिकार मांगने के लिए आंदोलन करते हैं। इसलिए “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” सीधे-सीधे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। क्योंकि स्कूल कॉलेज बंद किए जाने से मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं। उन्हें धर्म के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काना सरल होता है।

    मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार

    तेलंगाना जो भारत का छोटा सा नवनिर्मित राज्य हैं वहां की सरकार शिक्षा का महत्व समझती है इसलिए सिर्फ एक छात्रा के लिए ही स्कूल खोला जाता है। इसके विपरीत हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। जबकि संविधान में चौदह साल के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद करने में लगी हैं।

    कितनी सरकारी स्कूलें हुई बंद ?

    एक तरफ गैर बीजेपी सरकार की सोच कि एक बच्ची के लिए नियमित स्कूल खोला और पढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर 334 शिक्षकों की भर्ती आरम्भ कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्यों में पिछले दस वर्षों में लगभग नब्बे हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। मध्यप्रदेश में 29000 और उत्तर प्रदेश में 25000 स्कूल बंद किए जा चुके हैं।

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    स्कूलें बंद मधुशालाओं का उद्घाटन

    राम कृष्ण का प्रदेश है उत्तर प्रदेश जहां पहले 50 छात्रों से कम होने पर स्कूल बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज करने की बात कही गई है उसका दायरा बढ़ाकर अब 70 छात्र होने पर भी सरकारी स्कूल बंद कर मर्ज किए जाने की मंशा है। यहां सवाल उठता है पांच मिल दूर तक स्कूल में लड़कियां कैसे जाएंगी? उनके अलावा गरीब लड़के भी शिक्षा बंद कर देंगे। योगी सरकार ने स्कूल बंद करने और 27308 नई मधुशाला खोलने का निर्णय किया है।

    सरकारी स्कूलें बंद कराने का सरकारी फरमान

    दूसरी तरफ हरियाणा सरकार का अनोखा आदेश है, कि जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे उन्हें 500 रुपए महीने फीस देनी होगी लेकिन जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाएंगे उन्हें 1100 रुपए महीने दिए जाएंगे। जिसका अर्थ है सभी सरकारी स्कूल बंद करना। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना। सब मिलाकर बीजेपी सरकारें गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। ताकि पांच किलो मुफ्त अनाज देकर वोट लिया जा सके साथ ही कांवड़ उठाने वाले की संख्या में 21% वृद्धि की संभावना है। जितने लोग कांवड़ उठाएंगे उनपर सरकार फूल बरसाकर तृप्त करेगी। प्रोत्साहित करेगी ताकि मानसिक गुलाम बने रहकर बीजेपी को वोट देते रहें।

    मुफ्त शिक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला

    दुखद प्रसंग यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जज ने 51 गरीब छात्रों की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। यहां सवाल उठता है कि माननीय जज को छात्रों की नहीं सरकार की चिंता अधिक है। क्या कोर्ट सरकार से सवाल नहीं कर सकती थी? कि सब कुछ मुफ्त देने के बावजूद क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्र पढ़ना ही नहीं चाहते? सरकार पता करे और गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करे।

  • अनैतिक संबंध ने महिला को मौत के घाट उतारा, इंस्टाग्राम से हुआ प्यार

    अनैतिक संबंध ने महिला को मौत के घाट उतारा, इंस्टाग्राम से हुआ प्यार

    हत्या के बाद प्रेमी ने रात के समय रानी के शव के हाथ पैर बांधकर एक बोरी में रखा और बाइक पर ग्राम चीरा के पास शहजाद नदी में फेंक आया। विवाहिता महिला अनैतिक संबंध में थी जबकि प्रेमी और एक अनैतिक संबंध से खफा था। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram

    नेशनल डेस्क
    उत्तर प्रदेश के ललितपुर के शहजाद बांध के पास भराव क्षेत्र में बोरी में बंद मिली थी मृतक महिला। अवैध संबंध के शक में उसी के प्रेमी ने हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कोल्ड्रिंक मे कीटनाशक दवा मिला कर पिला दिया था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने यूट्यूब और गूगल से हत्या के तरीके सीखकर हत्या को अंजाम दिया। हत्या का कारण पुलिस ने बताया कि मृतक महिला आरोपी के साथ अवैध संबंध मे रहते एक और युवक के साथ नजदीकी चला रही थी। जिसके साथ उसका इंस्ट्राग्राम के जरिए दोस्ती हो गई थी। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram

    पुलिस ने क्या बताया ?

    पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मुश्ताक के मुताबिक थाना बार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बसतगुवां और मथुरा के बीच शहजाद बांध के भराव क्षेत्र में 16 जुलाई को बोरी में बंद एक महिला का शव मिला था। शव की पहचान रानी रैकवार के रूप में हुई जिसकी शादी नरेंद्र निवासी ग्राम करमई से हुई थी। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram

    मृतका के परिजनों के मुताबिक रानी जून 2024 में जगदीश निवासी ग्राम करमई के साथ प्रेम-प्रसंग में चली गई थी। पुलिस की टीमों ने शुक्रवार को जगदीश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में जगदीश ने बताया कि उसके गांव करमई का रहने वाला नरेंद्र रैकवार की पत्नी रानी से उसका प्रेम प्रसंग था और वह एक साल से दोनों साथ में रह रहे थे।

    कुछ समय पूर्व उसकी भी शादी कहीं और तय हुई तो उसमें और रानी में मन-मुटाव रहने लगा। इसी बीच रानी इंस्टाग्राम के माध्यम से दोस्त बने एक युवक के साथ रहने को चली गई थी। 6 जुलाई 2025 को रानी उसके पास कोतवाली सदर अंतर्गत शहर के मोहल्ला नईबस्ती में किराए के मकान में वापस आ कर रहने लगी थी। लेकिन उन दोनों के बीच विवाद होता रहता था। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram

    इस पर उसने रानी की हत्या करने का षड्यंत्र रचा। इसके लिए उसने यूट्यूब वीडियो और गूगल से हत्या करने और पुलिस से बचने के तरीके सीखा। इसके बाद वह कीटनाशक दवा बाजार से खरीदकर लाया और 7 जुलाई 2025 को उसने कोल्डड्रिंक में कीटनाशक दवा मिलाकर रानी को पिला दिया। जिससे रानी की मौत हो गई।

    रात के समय उसने रानी के शव के हाथ और पैर बांधकर एक बोरी में रखा और शव को बाइक पर रखकर ग्राम चीरा के पास शहजाद नदी में फेंक आया था। पुलिस ने आरोपी के पास से एक बाइक और कीटनाशक दवा की शीशी बरामद की है। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram

    पुलिस से बचने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल

    आरोपी जगदीश ने बताया कि रानी को मार डालने और शव को ठिकाने लगाने के बाद पुलिस से बचने के लिए उसने 8 जुलाई को रानी के फोन से रानी और उसके इंस्टाग्राम दोस्त की रील इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दी थी। जिससे ऐसा प्रतीत हो कि रानी अपने इंस्टाग्राम दोस्त के साथ है और रानी की पहचान हो जाए तो पुलिस को लगे कि रानी की हत्या यशवंत ने ही की है। रानी के शव को ठिकाने लगाने के बाद वह ग्राम करमई अपने गांव में आकर रहने लगा था। लेकिन उसके षड्यंत्र का पर्दाफाश हो गया।

    दो बच्चों और पति को छोड़कर बनाया अवैध संबंध

    मृतक का पति नरेंद्र जगदीश का ही दोस्त था। इस वजह से जगदीश का नरेंद्र के घर आना जाना था। इस बीच नरेंद्र की पत्नी रानी और जगदीश के बीच प्रेम-प्रसंग हो गया। जिसकी जानकारी नरेंद्र को होने पर वह रानी से झगड़ा करने लगा। जिसके बाद जून 2024 में रानी अपने पति और दो बच्चों को छोड़कर अपने प्रेमी जगदीश के पास चली गई थी और उसके साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी थी। लेकिन एक साल बाद ही रानी के प्रेमी जगदीश ने उसे धोखे से कीटनाशक दवा पिलाकर हत्या कर दी।

    कैसे हुई मृतक की पहचान?

    जब बांध के भराव क्षेत्र में महिला का सड़ा गला बोरी में बंद शव मिला तो उसके हाथ पर आर जगदीश नाम गुदा था। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। तब ग्राम करमई निवासी एक परिवार ने हाथ पर गुदे नाम के चलते शव की पहचान नरेंद्र की पत्नी रानी रैकवार के रूप में करने का दावा किया था। पहचान के दावे को पुख्ता करने के लिए रानी के पिता लल्लू रैकवार निवासी ग्राम कारीकंचनपुरा टीकमगढ़ मध्य प्रदेश जोकि दिल्ली में था उन्हें को बुलाया गया। लल्लू रैकवार ने भी शव की पहचान रानी के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने जगदीश को गिरफ्तार कर घटना के रहस्य से पर्दा फाश किया। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram

  • मुंबई में ‘डब्बा ट्रेडिंग’ और ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट पर छापा, करोड़ों की नकदी बरामद

    मुंबई में ‘डब्बा ट्रेडिंग’ और ऑनलाइन सट्टेबाजी रैकेट पर छापा, करोड़ों की नकदी बरामद

    मुंबई में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध सट्टेबाजी रैकेट पर ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों की बेहिसाब नकदी, विदेशी मुद्रा, लग्जरी गाड़ियां और कीमती सामान जब्त किए हैं। मामले में डब्बा ट्रेडिंग जैसे अवैध नेटवर्क के जरिए करोड़ों का लेन-देन हो रहा था।

    मुंबई: देश में एक बार फिर मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर घपलेबाजों का एक रैकेट सामने आया है। इंदौर के एक मामले में ईडी को मुंबई से कनेक्शन प्राप्त हुआ है। जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का एक बड़ा एक्शन सामने आया है। इसके तहत ईडी ने मंगलवार को मुंबई में अवैध डब्बा ट्रेडिंग और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े नेटवर्क पर छापेमारी की, जिसके जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया जा रहा था।

    चार जगहों पर छापेमारी

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    अधिकारियों ने बताया कि जांच एजेंसी ने चार जगहों से करीब 3.3 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी, कीमती घड़ियां, गहने, विदेशी मुद्रा और महंगी गाड़ियां जब्त की हैं। साथ ही ये अधिकारियों ने ये भी बताया कि छापेमारी अभी भी जारी है। बता दें कि डब्बा ट्रेडिंग शेयर बाजार में एक अवैध और बिना लाइसेंस वाली ट्रेडिंग प्रणाली है, जिसमें लेन-देन का कोई रिकॉर्ड स्टॉक एक्सचेंज में दर्ज नहीं होता।

    किन-किन प्लेटफॉर्म्स पर है शक?

    अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान सामने आया है कि वीमनी, वीएम ट्रेडिंग, स्टैंडर्ड ट्रेड्स लिमिटेड, आईबुल कैपिटल लिमिटेड, लोटसबुक, 11स्टार्स और गेमबेटलीग जैसे कई ऑनलाइन ट्रेडिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म इस रैकेट में शामिल हो सकते हैं। इनमें से कई ऐप्स व्हाइट-लेबल तरीके से चलाए जा रहे थे यानी अलग-अलग लोगों को इन ऐप्स के प्रशासनिक अधिकार देकर मुनाफे में हिस्सेदारी दी जा रही थी।

    मध्यप्रदेश के इंदौर मे मामला दर्ज

    गौरतलब है कि यह मामला मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित लसूड़िया थाने में दर्ज एक एआईआर पर आधारित है। हालांकि ईडी को कुछ हवाला ऑपरेटर्स और पैसों के लेन-देन से जुड़े लोगों की पहचान हुई है। उनके डिजिटल और वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

  • Shocking: बिना ड्यूटी के 12 सालों तक लेता रहा पुलिस विभाग से वेतन

    Shocking: बिना ड्यूटी के 12 सालों तक लेता रहा पुलिस विभाग से वेतन

    भोपाल के एक पुलिस कांस्टेबल ने न तो कभी विभागीय अनिवार्य प्रशिक्षण ली और ना कभी ड्यूटी ज्वाईन किया, फिर भी पुलिसकर्मी को 12 साल में 35 लाख रुपये का वेतन मिला।

    मध्यप्रदेश: भोपाल से एक विचित्र और चौकादेने वाली घटना प्रकाश में आ रही है। यहां एक पुलिस कांस्टेबल ने 2011-2012 में भर्ती होने के बाद न तो ड्यूटी पर रिपोर्ट किया और न ही अनिवार्य प्रशिक्षण लिया, जबकि उसने 12 सालों में लगभग 35 लाख रुपये का वेतन प्राप्त किया। ड्यूटी से अपनी पूरी अनुपस्थिति के दौरान, अभिषेक ने न तो विभाग को इसकी सूचना दी और न ही कभी छुट्टी के लिए आवेदन किया, फिर भी वह 12 साल तक मासिक वेतन पाने में कामयाब रहा।

    प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था

    मध्य मध्य प्रदेश के विदिशा ज़िले के मूल निवासी, अभिषेक 2011-12 में राज्य पुलिस में कांस्टेबल के रूप में भर्ती होने वालों में से एक था। वह अपने बैच के अन्य कांस्टेबलों की तुलना में काफ़ी देर से भोपाल ज़िला लाइन्स में उपस्थित हुआ था। पुलिस बल में भर्ती होने के बाद, उसे सागर ज़िले के पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में अनिवार्य प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।

    प्रशिक्षण के बजाय घर चला गया

    लेकिन, प्रशिक्षण के लिए जाने के बजाय अभिषेक पड़ोस के अपने विदिशा जिले में अपने घर चला गया और 12 सालों तक न तो प्रशिक्षण लिया और न ही ड्यूटी पर आया। इसी बीच ड्यूटी से गैर हाजिरी की पूरी अवधि के दौरान उसने न तो विभाग को इसकी जानकारी दी और न ही कभी छुट्टी के लिए आवेदन किया, फिर भी वह 12 सालों तक मासिक वेतन पाने में कामयाब रहा।

    कैसे खेल रचाये?

    अभिषेक ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए स्पीड पोस्ट के जरिए अपनी सर्विस फाइल भोपाल भेज दिया था। हैरानी की बात यह है कि भोपाल में संबंधित विभाग ने बिना किसी सत्यापन के उसकी सर्विस फाइल स्वीकार कर ली, जिसके परिणामस्वरूप अभिषेक को अगले 12 सालों तक 35 लाख रुपए वेतन के रूप में मिलते रहे। चौंकाने वाली यह अनियमितता 2023 में तब सामने आई, जब 2011-12 बैच के कांस्टेबलों के 10 वर्षीय समयमान वेतन ग्रेड के लिए अनिवार्य प्रक्रिया के तहत सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही थी।

    पैसे लौटाने का किया वादा

    मामले की जांच कर रही एसीपी-भोपाल अंकिता खाटेरकर ने कहा, “सेवा रिकॉर्ड की जांच में कोई पुरस्कार, कोई दंड और कोई ड्यूटी रिकॉर्ड नहीं मिला, जो कि अजीब था। उसे (अभिषेक को) विभाग की स्थापना शाखा ने बुलाया था, जिसके बाद वह आखिरकार पेश हुआ, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उसने एक दिन भी पुलिस की सेवा नहीं की है।” पुलिस के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि उन्होंने विभाग को एक लाख रुपए लौटा दिए हैं और वादा किया है कि 12 साल में मिलने वाला वेतन के पैसे किश्तों में लौटा देंगे। विभागीय जांच चल रही है।

  • मुंबई पुलिस ने ट्रक चोरी के अंतर्राष्ट्रीय गिरोह को किया गिरफ्तार

    मुंबई पुलिस ने ट्रक चोरी के अंतर्राष्ट्रीय गिरोह को किया गिरफ्तार

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    गोरेगांव पूर्व की वनराई पुलिस ने 6 चोरी के ट्रक समेत 2 लोगों को गुजरात और औरंगाबाद से गिरफ्तार किया है। ये गिरोह ट्रक और भारी वाहनों की चोरी कर बनावटी कागजातों के सहारे दूसरे राज्यों में बेच दिया करते थे।

    मुंबई: गोरेगांव पूर्व की वनराई पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ट्रक और भारी वाहनों की चोरी कर बनावटी कागजातों के सहारे दूसरे राज्यों में बेच दिया करते थे। हालही में इन लोगों ने 8 जून को रात के अंधेरे में एक 10 टायर टाटा कंपनी का ट्रक चूरा लिया था। जिसकी जांच में पुलिस को पता चला कि बदमाशों ने गुजरात के सुरत ग्रामीण में ट्रक को छुपाया हुआ है। मुंबई पुलिस जब गुजरात पहुची तो और भी घटनाओं का खुलासा पेश होता चला गया। जिसमें पुलिस मुंबई से गुजरता फिर औरंगाबाद से राजस्थान तक चली गई और अबतक 6 ट्रकों को मुंबई वापस ले आई। Mumbai police arrested international gang involved in truck theft

    कैसे हुआ खुलासा?

    वनराई पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक गिरिष बने ने बताया कि 8 जून को लगभग रात के 1 बजे गोरेगांव पूर्व के घास बाजार के पास सीमेंट गोदाम से 10 चक्का टाटा कंपनी का ट्रक क्रमांक MH50N2086 चोरी होने की शिकायत मिली थी। इसमें गु.र.क्र. 226/2025 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 303 (2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई तो हमें तकनीकी जांच से पता चला कि ट्रक सुरत के एक ग्रामीण भाग में खड़ा हुआ है। तुरंत हमने गुजरात पुलिस की सहायता ली जो वहां के जंखवाव पुलिस थाने से संपर्क करवाया। तुरंत हमने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लेकर पुलिस उपनिरीक्षक रंजित वनवे, बंकट तळेकर, पुलिस हवलदार येवले, पुलिस सिपाही पाटील की एक टीम तैयार की और गुजरात के लिए रवाना कर दिया। Mumbai police arrested international gang involved in truck theft

    गुजरात में क्या हुआ?

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    वनराई पुलिस थाने में क्राईम डिटेक्शन के पुलिस निरीक्षक सुभाषचंद्र पोस्टुरे ने बताया कि जब हमारी टीम गुजरात पहुची तो उनका संपर्क जंखवाव पुलिस थाने से कराया गया। जिनकी मदद से हमारी टीम सुरत के ग्रामीण इलाके में जाकर छापामारी की और वहां से 44 वर्षीय आरोपी नर्सिंग रामस्वरूप सिंह और चोरी के ट्रक को हिरासत में लिया और उसे मुंबई ले आई। उन्होंने यह भी बताया कि गिरफ्तार आरोपी इंदौर के मैकेनिक नगर का रहने वाला है। इससे हमे पता चला कि जब यह इंदौर का रहने वाला मुंबई और गुजरात में कनेक्शन बना सकता है तो यह अकेला नही होगा और इसने और भी कई कांड किए होंगे। हमने जब इसके रिकॉर्ड की पडताल की तो पूरे महाराष्ट्र मे और भी 7 अलग-अलग मामले का खुलासा हुआ और कड़ी पूछताछ में उसने गिरोह के मास्टर माइंड जावेद अब्दुल्ला शेख का पता बताया। Mumbai police arrested international gang involved in truck theft

    जावेद की हुई गिरफ्तारी

    पुलिस उपनिरीक्षक रंजित वनवे से मिली जानकारी के मुताबिक 10 जून को गिरोह का मास्टर माइंड जावेद अब्दुल्ला शेख को औरंगाबाद से गिरफ्तार किया गया। इनके खिलाफ अहमदनगर के तोफखाना पुलिस थाने में दो अपराध दर्ज हैं। इसके अलावा नाशिक के आडगांव पुलिस थाना और येवला शहर पुलिस थाना और धुळे के मोहाडी नगर पुलिस थाना, औरंगाबाद के सिटी चौक पुलिस थाना के साथ तळोजा पुलिस थाने में अपराध दर्ज है। Mumbai police arrested international gang involved in truck theft

    राजस्थान से मिले 5 ट्रक

    पुलिस ने बताया कि दोनों की गिरफ्तारी के बाद जांच मे पता चला कि इन लोगों ने और भी 5 ठिकानों पर ट्रक और भारी वाहनों को चोरी कर छिपाया हुआ है। फिर से वही पुलिस की टीम पुलिस उपनिरीक्षक रंजित वनवे की नेतृत्व में राजस्थान रवाना हुआ। राजस्थान के बांसवाडा जिला, डोंगरपुर जिला और सलुंम्बर जिला के अलग-अलग ठिकानों से पुलिस ने 5 वाहनों को हस्तगत किया और उसे मुंबई ले आए। वनराई पुलिस और अधिक मामले की तहकीकात कर रही है। Mumbai police arrested international gang involved in truck theft