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कोलाबा न्यूनतम तापमान 21 सांताक्रूज 23.2 डिग्री सेल्सियस
मौसम विभाग के कोलाबा केंद्र में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
इस्माईल शेख मुंबई– सर्द मौसम के लिए मुंबईकरों को अभी और इंतजार करना होगा। इसके अलावा मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले दो दिनों तक मुंबई शहर में बादल छाए रहेंगे। नतीजतन, मुंबईकरों को ठंड के मौसम के लिए कुछ और दिन इंतजार करना होगा। कोलाबा न्यूनतम तापमान 21 सांताक्रूज 23.2 डिग्री सेल्सियस। (Cloudy weather in Mumbai for the next two days)
मौसम विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वातावरण में उमस महसूस होगी, इसलिए मुंबईवासियों को अभी कुछ दिनों तक ठंड का अनुभव नहीं हो पाएगा। मौसम विभाग के कोलाबा केंद्र में गुरुवार को न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। जबकि सांताक्रूज केंद्र में न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। (Mumbai weather news)
कोलाबा न्यूनतम तापमान 21 सांताक्रूज 23.2 डिग्री सेल्सियस
औसत न्यूनतम तापमान 2.5 और 3 डिग्री अधिक है। इस बीच जलवायु परिवर्तन के कारण न्यूनतम तापमान बढ़ सकता है और अधिकतम तापमान घट सकता है। मौसम विभाग के कोलाबा केंद्र ने गुरुवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस जबकि सांताक्रूज केंद्र ने अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। कोलाबा में 24 घंटे में तापमान 1.2 डिग्री बढ़ गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि दो दिनों में तापमान में कमी आएगी।
लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू का कारोबार शहर में कैसे हो रहा है?
इस्माईल शेख मुंबई- बोरीवली (पश्चिम) की एमएचबी कॉलोनी पुलिस ने प्रतिबंधित गुटखा तस्करी मामले में, एक महिंद्रा बुलैरो जीप के साथ कुल 12 लाख 24 हज़ार रुपये का माल जप्त कर भिवंडी के रहने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गुजरात से मुंबई गुटखा सप्लाई मामले में एक भंगार वाला फरार बताया जा रहा है।
कैसे पहुंचा मुंबई में प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू ?
गुजरात से मुंबई आने में कितने ही चेक पोस्ट हैं। जहां तैनात सुरक्षाकर्मी, पुलिस विभाग और ट्रैफिक पुलिस क्या सोते रहते है ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं। यह तो साफ है कि बिना लेनदेन किए इतना बड़ा कारोबार कानून की आंखों में धूल झोंक कर नहीं किया जा सकता। मुंबई में प्रतिबंधित गुटखा बिकता भी है और लोग खरीदते भी हैं। फिलहाल लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले इस कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को कुछ और सोचने की जरूरत है।
बोरीवली पश्चिम के एमएचबी कॉलोनी पुलिस ने बड़ी ही ईमानदारी के साथ अपना कर्तव्य निभाया है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सुधीर कुडाळकर से मिली जानकारी के मुताबिक, मुखबिरों के जरिए इसकी जानकारी मिली की भिवंडी के रास्ते मुंबई में प्रतिबंधित गुटखा लाया जा रहा है। क्राईम डिटेक्शन सहायक पुलिस निरीक्षक सूर्यकांत पवार ने गोराई डंपिंग ग्राउंड के पीछे पुलिसिया जाल बिछाकर महिंद्रा बोलेरो जीप क्रमांक MH 04 LQ 3716 को रोका और तलाशी ली तो, टेंपो में प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू बरामद किया गया। जिसमें विमल पान मसाला की 8 गोनी जिसका बाजार मूल्यांकन 3 लाख 47 हज़ार रुपये और व्ही-1 तंबाकू की 2 गोनी जिसका बाजार मूल्यांकन 39 हजार रुपये बताया जा रहा है। इसके साथ ही पुलिस ने टेंपो को भी जप्त कर लिया है जिसकी बाजार मूल्यांकन 8 लाख 50 हज़ार रुपये बताई जा रही है।
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बता जा रहा है कि किसी को बेचने के लिए यहां माल सप्लाई किया गया था। मामले में झा नामक भंगार वाला फरार बताया जा रहा है। एमएचबी कॉलोनी पुलिस ने गुनाह रजिस्टर्ड क्रमांक. 613/1023 में 29 वर्षीय टेंपो चालक राघवेंद्र शिवदुलारे और 19 वर्षीय सौरभ गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। जो दोनों ही भिवंडी के रहने वाले हैं। मिली जानकारी के मुताबिक गुजरात के गोदाम से माल उठाकर पहले भिवंडी लाया गया वहां कुछ लोगों को बेचने के बाद यह टेंपो मुंबई के बोरीवली इलाके में सप्लाई करने के लिए रवाना हुआ था। फिलहाल पुलिस मामले की और अधिक तहकीकात कर रही है।
मुंबई के मालाड़ पश्चिम मालवनी इलाके में एक दुखद घटना की खबर है। यहां एक 16 वर्षीय लड़के ने अपने पिता द्वारा उसका स्मार्टफोन जब्त करने से नाराज होकर अपनी जान दे दी। मोबाइल फोन की लत से कैसे निपटा जाए?
इस्माईल शेख मुंबई – एक दुखद घटना में, मुंबई के एक 16 वर्षीय लड़के ने अपने पिता द्वारा उसका स्मार्टफोन जब्त करने से नाराज होकर अपनी जान दे दी। इस घटना ने युवाओं में मोबाइल फोन की लत की बढ़ती समस्या और इस व्यापक समस्या से निपटने के बारे में चिंताएं पैदा कर दी हैं। यहां वह सब कुछ है जो आपको जानना आवश्यक है।
खबर के मुताबिक, ज्यादा गेम खेलने के कारण उसके पिता ने उसका फोन जब्त कर लिया था, जिसके बाद मालवानी में लड़के ने दुखद रूप से अपनी जान दे दी। लड़का, जिसकी पहचान नाबालिग होने के कारण गोपनीय रखी गई है। बताया जाता है कि वह अपने फोन से अलग होने पर परेशानी व्यक्त कर रहा था। मालवणी में अपने माता-पिता के साथ रहने वाले किशोर की 16 नवंबर की रात को अपने पिता के साथ तीखी बहस भी हुई।
लगातार गेम खेलने से परेशान पिता ने लड़के का सेलफोन छीन लिया और उसे बिस्तर पर आराम करने का निर्देश दिया। परेशान होकर, लड़का, जिसने पहले भी इसी तरह की स्थितियों में खुद को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी, 17 नवंबर को रसोई में दुपट्टे का उपयोग करके टिन के हुक से लटका हुआ पाया गया था। उसे बचाने के लिए उसके पिता के प्रयासों के बावजूद, एक निजी अस्पताल में प्रवेश से पहले ही मृत घोषित कर दिया गया। मालवानी पुलिस ने मामले को आकस्मिक मौत के रूप में दर्ज किया है, और दिल दहला देने वाली घटना की आगे की जांच के लिए शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया है।
मोबाइल फोन की लत से कैसे निपटें..
मोबाइल फोन की लत से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जिसमें माता-पिता का मार्गदर्शन, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिक्षा शामिल है। माता-पिता से मोबाइल फोन के उपयोग पर समय पर उचित सीमा निर्धारित करने, बाहरी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग के बारे में खुली चर्चा में शामिल होने का आग्रह किया जाता है।
माता-पिता फोन के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित कर सकते हैं। भोजन, पारिवारिक समय और सोने के समय जैसी डिवाइस-मुक्त गतिविधियों के लिए विशिष्ट अवधि निर्धारित करें।
ज़िम्मेदारीपूर्ण उपयोग का अनुकरण करके फ़ोन की स्वस्थ आदतें प्रदर्शित करें। यदि किशोर माता-पिता को निरंतर स्क्रीन समय के बजाय आमने-सामने की बातचीत को प्राथमिकता देते हुए देखते हैं, तो उनके इन व्यवहारों का अनुकरण करने की अधिक संभावना है।
व्यक्ति को शारीरिक गतिविधियों और बाहरी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। माता-पिता खेल, शौक या सामुदायिक गतिविधियों में भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकते हैं जिनमें स्क्रीन शामिल नहीं है।
वयस्क किशोरों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अत्यधिक स्क्रीन समय के संभावित नकारात्मक प्रभावों के बारे में सूचित कर सकते हैं। नींद में खलल, आंखों पर तनाव और पारस्परिक संबंधों पर प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा करें।
माता-पिता ऐप के उपयोग और स्क्रीन समय को प्रबंधित और मॉनिटर करने के लिए स्मार्टफ़ोन पर अभिभावक नियंत्रण सुविधाओं को लागू कर सकते हैं। इससे माता-पिता को स्थापित सीमाएं लागू करने में मदद मिल सकती है।
किशोरों के साथ खुला और गैर-निर्णयात्मक संचार बनाए रखें। उन्हें सजा के डर के बिना फोन के उपयोग से संबंधित अपने अनुभवों, चुनौतियों और चिंताओं को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
किशोरों को जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता और ऑनलाइन गतिविधियों के संभावित परिणामों के बारे में शिक्षित करना हमेशा बेहतर होता है। इसमें सोशल मीडिया, साइबरबुलिंग के प्रभाव को समझना और एक स्वस्थ ऑनलाइन उपस्थिति बनाए रखने के महत्व को समझना शामिल है।
मिलावट खोर मावा की मिठाई, दही, पनीर यहां तक की किराने के आइटमों में भी मिलावट करने से नहीं चूकते है। जिसका उपयोग करने से शरीर पर प्रभाव पड़ता है। मिलावटी पदार्थ से बचने के लिए खाद्य मिश्रण की पहचान के लिए जागरूक होना अति आवश्यक है। आपकी दीपावली शुभ हो ..
इस्माईल शेख मुंबई- त्यौहारी सीजन के नजदीक आते ही दूध से बने कई उत्पादों में मिलावट खोर मिलावट करने लगते हैं। जिनकी शिकायत खाद्य विभाग के पास पहुंचती है। मिलावट खोर मावा की मिठाई, दही, पनीर यहां तक की किराने के आइटमों में भी मिलावट करने से नहीं चूकते हैं। जिसका उपयोग करने से शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मिलावटी पदार्थ से बचने के लिए खाद्य मिश्रण की पहचान के लिए जागरूक होना अति आवश्यक है। ऐसे में हम आपको कुछ तरीके बताएंगे जिन्हे अपना कर आप भी मिलावटी चीजों की स्वंय ही जांच कर सकते है।
एफडीए (FDA) के एक अधिकारी ने बताया कि त्यौहार आते ही मिलावट खोर सक्रिय हो जाते हैं और ज्यादा मुनाफे के चक्कर में खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट कर देते हैं। जिससे शरीर को नुकसान होता है। ऐसे में मिठाई, मावा की दूध, दही, पनीर में अगर मिलावट है या नहीं। उसे पहचानने के लिए कुछ आयोडीन या टिंचर आयोडीन की बूंदे डालने पर उसका रंग नीला या बैंगनी हो जाएगा तो आप समझ जाए कि वह मिलावटी वस्तु है, उसे मत खरीदे। इसके साथ ही, मिठाइयों पर लगाने वाला चांदी का वर्क एल्युमिनियम का फॉयल भी हो सकता है अगर पहचान करनी है तो उसे उंगलियों से मसले फॉयल के छोटे-छोटे टुकड़े हो जाएंगे तो वह मिलावटी है।
मिठाई खरीदने जाएं तो उसका कलर देखें, मिठाई का कलर ज्यादा गहरा है तो उसे ना ले। खाद्य विभाग के अनुसार फूड सेफ्टी के अंतर्गत अगर कोई भी वस्तु खरीदें तो तीन चीज देखी जाती है जिसका खास तौर से ध्यान रखें। पहले मिठाई को अच्छे से देखकर, दूसरा सूंघकर और तीसरा उसे खाकर उसका पता लगा सकते हैं. कि इसमें मिलावट है या नहीं।
नकली और मिलावटी मावा..
मावे की पहचान कैसे करें कि वह असली है या नकली, तो मावे को थोड़ा सा हाथ के उंगलियों पर ले और उसे अपनी उंगलियों पर मसले अगर मावे में चिकनाहट है तो वह सही है। या फिर दूसरा आयोडीन की एक-दो बूंद मावे में डालने पर मावे का बैंगनी कलर हो जाता है तो मावे में मिलावट है तो उसे ना खरीदें।
दूध अगर खरीदना है तो उसे पहले हीलाकर देखें अगर उसमें झाग आ रहे हैं तो ऐसे दूध को भी ना खरीदें। पनीर है उसमें भी टिंचर आयोडीन की एक-दो बूंद डालकर देखें, अगर उसका कलर भी बैंगनी हो जाता है तो उसे भी ना खरीदें उसमें भी मिलावट हो सकती है। इस तरह से बाजार की खाद्य सामग्रियों में मिलावट होने से हम बच सकते हैं।
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चुनाव आयोग मौनी बाबा की तरह या “गाँधी जी” तीन बंदरो की तरह “माल मत देखो, माल मत पकड़ो, शिकायत मत सुनो” की तर्ज पर चल रहा है।
वी बी माणिक मुंबई- पांच राज्यो में चुनावी बिगुल बज गया है। अखाड़े में बड़े बड़े पहलवानो की नूरा कुश्ती देखने को मिलेगा। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, मिजोरम में सभी प्रमुख राजनिगिक दलों ने अपने पहलवानो की घोषणा कर दिय है। रेफरी के रूप में जनता तैयार है। पर अब प्रश्न ये उठता है, कि सभी उम्मीदवारो और नेताओं के सम्पत्ति की निष्पक्ष जांच क्यों नही करता है चुनाव आयोग।
चुनाव आयोग के कार्य ..
सभी के पास कितने काले धन है? उम्मीदवारो ने सम्पत्ति की कितनी जानकारी दिया है और इनके नेता के पास कितना धन है। इस विषय पर चुनाव आयोग मौनी बाबा की तरह या “गाँधी जी” तीन बंदरो की तरह “माल मत देखो, माल मत पकड़ो, शिकायत मत सुनो” की तर्ज पर चल रहा है। ये कितने बड़े अपराधी है? कितने केस है? कितने विचाराधीन है? इसकी जानकारी न रखता है न ही जानकारी देता है।
इसी बीच चुनाव आयोग की ओर से घोषणा की गई है, कि राजनीतिक दलों और अभ्यर्थियों द्वारा मतदान बूथों के पास लगाए गई शिविरों के निकट अनावश्यक भीड़ इकट्ठा नहीं होने देंगे ताकि दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों और अभ्यर्थियों के मध्य टकराव और तनाव से बचा जा सके। आचार संहिता की धाराओं प्रशासन भरपूर इस्तेमाल करने जा रहा है।
लेकिन, आप को बता दें, दिन पर दिन भ्रष्टाचार बढ़ता ही जा रहा है। कितना भी पत्रकार लिखता है। फिर भी नेताओ, मंत्रियों और चुनाव आयोग को कोई फर्क नही पड़ता है। चुनाव में धन-बल की आजमाइस जोरो पर चलती है। हत्याएं होती है। अपहरण होते है। इस पर भी चुनाव के पास समय नही होता है। देश का दुर्भाग्य है, देश की सभी सरकारी मशीनरी पूरी तरह भ्र्ष्टाचार में लिप्त हो गयी है।
शोहरतगढ़ को शोहरत की बुलंद उंचाईयों तक लेजाने की इच्छा जाहिर करने वाले अपना दल पार्टी के विधायक हकीकत में अपने समर्थकों को ही चूना लगा रहे हैं।
वी बी माणिक लखनऊ– उत्तर प्रदेश, सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ निर्वाचित अपनादल के विधायक सुधरने को तैयार नही है। योगी आदित्यनाथ की सरकार में जगह हासिल करने के बाद से ही इनके तेवर बदल गए हैं। गरीबों का पैसा चुनाव के समय डकार कर बैठे विनय आज तक देने को तैयार नही है। जिन लोगो ने अपना खून पसीना बहाकर और नगद उधारी के तौर पर पैसे दिए हैं वो त्राहि-त्राहि कर रहे है। एक ग्राम प्रधान का भी करीब पच्चीस लाख लेकर बैठे है।
योगी आदित्यनाथ की सरकार ..
समाजवादी पार्टी से हाथ झटक कर भाजपा के सहारे उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में जगह हासिल करने वाली अपनादल की सुप्रीमो एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी क्या बेईमानो, लुटेरों की पार्टी है? जो गरीबों का खून पीने का काम करती है। बड़ा दुर्भाग्य है ये गरीब पुलिस में शिकायत भी दर्ज नही करवा पा रहे है। विनय वर्मा द्वारा इनको खुली धमकी दी जाती है, कि तुमको जो करते बने कर लो हम पैसा नही देंगे। पत्रकार ने अनुप्रिया पटेल से संपर्क करने का प्रयास किया। उनसे मुलाकात नही हो सका है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपना दल पार्टी की मुखिया अनुप्रिया पटेल की तस्वीर
राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐसी पार्टीयो के समर्थन से सरकार चला रहे है। योगी जी घोषणाएं अच्छी-अच्छी कर रहे है पर जो उनकी सरकार में कुछ लुटेरे विधायक बैठे है। उन पर कार्रवाई कब होगी ? कब गरीबो का पैसा मिलेगा ? यही कारण है ठग लुटेरे नेता योगी जी से सहयोग माँगकर चुनाव जीतकर जनता को गुमराह करए है। इससे बड़े शर्म की बात और क्या हो सकता है।
वैसे भी अपना दल पार्टी का नारा है ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिसदारी’ इसका विधायक विनय वर्मा भरपूर फायदा उठा रहे हैं। लोगों को इनके इरादों को समझने में समय लग गया। नहीं तो धोखा और नुकसान नहीं होता। बता दें कि लोग कहते हैं, कि ये विनय वर्मा अपनी जरूरत के वक़्त हाथ जोड़कर मदद मांग रहे थे। अभी वही उधार के पैसे वापस करने के बजाय सत्ता का रौब झाड़ते हुए धमका रहे हैं। ये राजनीति का गंदा चहरा है। जो इनसे धोखा खाने वालों को देखने को मिल रहा है।
देश के पांच राज्यों में 7 नवंबर से शुरू होकर 30 नवंबर तक कुल चार चरणों में मतदान होंगे। छत्तीसगढ़ में दो चरणों में, जबकि बाकी राज्यों में एक ही दिन वोट डाले जाएंगे। नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे। साल के ये आखिरी चुनाव सेमीफाइनल तो नहीं, लेकिन 2024 के आम चुनाव के लिए रिहर्सल जैसे जरूर हैं।
वी बी माणिक नई दिल्ली– देश की राजनीति में सेमीफाइनल मैच का बिगुल बज चुका है। इसके तहत देश के पाँच राज्यो में सभी दलों के रण बाकुरो की टोली ताल ठोकना शुरू कर दिया है। इस चुनावी खेल में कौन पहलवान जीतेगा? कौन हारेगा? ये समय बतायेगा। इस समय जाति गणना की माँग जोरो पर चल रही है। पर अधिकांश नेता अपनी जाति के बारे में कुछ नही बोल रहे है।
देश में महिलाओ के साथ बलात्कार की घटना में काफी बढ़ोतरी हुई है। जिस पर राज्य सरकारें चुप्पी साध कर बैठी है। सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह समाप्ति की ओर बढ़ती जा रही है। रणबाँकुरों की ओर से टिकट के लिये जोर आजमाइश की जा रही है। चाहे वह कितना बड़ा अपराधी हो, इसको पार्टियां नही देख रही है। जितने दोषी राजनीतिक पार्टियां है उससे ज्यादा दोषी चुनाव आयोग है।
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार से देश की जनता कई माध्यमों सवाल करती आ रही है, कि क्योंकि चुनाव आयोग इस बात की जाँच क्यों नही करता कि जो भी नेता चुनाव लड़ रहा है उस के खिलाफ आपराधिक कितने केस दर्ज है? न्यायालय में कितने में दोषी पाया गया है और कितने केस विचाराधीन है? अगर है तो चुनाव लड़ने के योग्य नही है। चुनाव आयोग एकदम निष्पक्ष नही है क्योंकि चुनाव आयोग से रिटायर्ड होने के बाद ये भी किसी राजनीतिक पार्टी से चुनाव लड़कर या पीछे के रास्ते से लोकसभा-राज्यसभा में पहुँच जाते है। और आजीवन मलाई खाते है।
चुनावी समीकरण को दर्शाती हुई तस्वीर
पांचो राज्यों में कुल चार चरणों में वोटिंग होगी। सिर्फ छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान होंगे बाकी राज्यों में एक ही चरण में वोट डाले जाएंगे। शुरुआत मिजोरम से 7 नवंबर को होगी, जबकि आखिरी चरण में तेलंगाना विधानसभा के लिए 30 नवंबर को वोट डाले जाएंगे – सभी राज्यों में मतगणना 3 नवंबर को होगी।
अब राजीनीतिक पार्टीयो के पहलवानो मे से ये पहलवान चुनाव जीतने के बाद पाँच वर्ष तक अपने एरिया में अपने चमचो के साथ केवल दहशत पैदा करना। पुलिस थानों को अपनी रखैल बनाकर रखना। दुकानदारों व्यापारियों और अन्य कारोबारियों से अवैध धन उगाही का काम करते है और ठेकेदारों से हर कार्य का कमीशन लेना, सरकारी दफ्तरों में वसूली करना, कर्मचारियों को धमकी देना, यही काम करते है। चुनाव आयोग इसकी जाँच क्यों नही करवाता है? बहुत गरीब वर्ग इन विधायकों द्वारा ठगी के शिकार हुए होते है इस पर कोई कार्रवाई नही होती है। अब देखना है, कि 3 दिसंबर को इस सेमीफाइनल मुकाबले का क्या रिजल्ट आता है।
चुनाव तारीखों की घोषणा तो अब हुई है, लेकिन राजनीतिक पार्टियां काफी पहले से ही चुनाव कैंपेन शुरू कर चुकी हैं। अब तक का हाल तो यही बता रहा है कि 3 राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है, जबकि तेलंगाना और मिजोरम में क्षेत्रीय दलों का दबदबा है।
देश की सरकार पत्रकारों को संरक्षण देने से रही। लेकिन देश के नेताओं ने राजनीति का अपराधीकरण जरूर कर दिया है। कहीं इनके खिलाफ जागरुकता ना फैल जाए, इसी को लेकर पत्रकारों की आवाज कुचली जा रही है।
वी बी माणिक मुंबई– भारत सरकार ने पत्रकरो के लिए कानून तो बना दिया है पर उसका अनुपालन कब से होगा? नेता,मंत्री, सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, खाकी वर्दी जब धन उगाही करती है तब तो उनको भी संरक्षण प्रदान किया जाता है। इसके अलावा न्यायपालिका में खुलेआम फाइल को इधर-उधर करने के लिए वसूली किया जाता है। तब कहाँ चली जाती है नियम कानून जब इन मामलों की हकीकत देश के सामने उजागर करने वाले पत्रकार वर्ग सुरक्षा पर बात आती तो सांप सूंघ जाता है।
जनता का हक और सरकारी संरक्षण
सरकार और नेताओं की तनख्वाह जनता अदा करती है। जिसके फलस्वरूप देश की जनता वास्तविकता की जानकारी रखने की हकदार हैं और इस जनता जनार्दन के हक को अदा करने वाला पत्रकार वर्ग इनसे न सरकार से अपना मेहनताना मांगता है। मीडिया वर्ग को अपने कर्तव्यों को पूरा करने में जानमाल का जोखिम रहता है। ऐसे में पत्रकारों को संरक्षण नहीं मिलना सच्चाई का गला घोटने जैसा ही है। इसमें कोई एक हो तो सुनवाई हो चुकी होती पर पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचार में लिप्त होता जा रहा है।
पत्रकार संरक्षण कानून को लेकर बेसबरी से इंतजार करता मीडिया वर्ग की प्रतिकारात्मक फाइल तस्वीर
पत्रकारों को संरक्षण ..
आज देश मे अधिकांश नेता अपराधी है जिनके ऊपर केस चल रहे है और वो खुलेआम छुट्टे सांड की तरह घूम रहे गरीबो की जमीनों पर अपने गुर्गो द्वारा जब्ती, कब्जा कर रहे है। मकानों पर अवैध कब्जा कर रहे है। मामला न्यायालय में दो तीन पीढ़ी तक चलता है। इस पर कोई पत्रकार खबर लिखता है, तो उसको धमकी दिया या आजाती है। पुलिस कुछ नही करती धमकी देने वाले गुंडों का स्वागत लोग भी करते है।
देश को मिल रही खुली झूठ ..
आज पत्रकार सबसे कमजोर वर्ग बन गया है। सच्चाई लिखना जुर्म बन गया है। नेताओ का स्वाभिमान पूरी तरह खत्म हो गया है। कुछ पत्रकार तो विधायको, मंत्रियों, सांसदों के पिए और चाटुकार बन गए है। दिन पर दिन पत्रकारिता समाप्ति की ओर बढ़ने लगी है। अब नेता टीवी पर बैठकर सीधा झूठ बोलते हैं।
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चुनाव आयोग भी गुमराह ..
इस पर चुनाव आयोग कब संज्ञान लेगा की जिस नेता पर एक भी केस हो उसको चुनाव लड़ने का अधिकार नही होना चाहिए। अगर वो झूठ बोलकर चुनाव लड़ता है, तो उसकी मान्यता रदद् कर देना चाहिए। चुनाव आयोग किन कामों में ग़ुम है। इसका देश की जनता को कोई जानकारी नहीं है। सवाल करने वाले पूछ तो रहें हैं जवाब देना जरूरी नहीं। आने वाला दिन भारत का अंधकार मय दिखाई पड़ रहा है।
इस्माईल शेख मुंबई- Mumbai Tunnal: देश की आर्थिक राजधानी के साथ-साथ सभी को बराबरी का दर्जा दिलाने वाली मुंबई अब और भी बदल रही है। मुंबई की घनी बढ़ती आबादी के कारण शहर और उसके उपनगरों की परिवहन व्यवस्था में भी काफी परिवर्तन हो रहे हैं। परिणामस्वरूप, यात्रियों के लिए उपनगरों में पूर्व और पश्चिम के बीच यात्रा करना कठिन हो गया। समाधान के तौर पर मुंबई को सात सुरंगों के जरिए पूर्व-पश्चिम से जोड़ा जा रहा है और मेट्रो का जाल भी बिछाया जा रहा है। मुंबई को कभी फ्लाईओवरों का शहर कहा जाता था। अब इसे सुरंगों के शहर के नाम से जाना जाएगा।
मुंबई बनने जा रहा है अब सुरंगों का शहर
मुंबई महानगरीय क्षेत्र में प्रस्तावित ‘मरीन ड्राइव टू बांद्रा-वर्ली सी-लिंक’ तटीय सड़क (Coastal Road) मुंबई में यातायात की भीड़ को कम करने के लिए महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही महत्वाकांक्षी परियोजना ‘शिवाडी-न्हावा शेवा ट्रांस हार्बर लिंक’ भी जोर-शोर से चल रही है। यह लिंक रोड मुंबई को रायगढ़ जिले से सीधे जोड़ता है।
कोलाबा से सिप्ज़ मेट्रो 3, जिस पर एमएमआरसीएल (MMRCL) द्वारा काम किया जा रहा है, पूरी तरह से भूमिगत है। इस रूट पर 26 स्टेशन भूमिगत और एक स्टेशन जमीन के ऊपर है। एमआरडीए द्वारा निर्माणाधीन लगभग 3.4 किमी लंबे मुंबई मेट्रो रूट 7ए परियोजना के मार्ग के तहत 2.49 किमी लंबी डबल सुरंग के लिए टी62 टनल बोरिंग मशीन की मदद से प्रारंभिक सुरंग निर्माण कार्य 1 सितंबर, 2023 से शुरू हो गया है।
गिरगांव से ब्रीच कैंडी पार्क भारत के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन का प्रयोग कुल लंबाई 10.58 किमी अनुमानित लागत 12,721 करोड़ रुपये
बीकेसी से शिलफाटा भारत की पहली समुद्री सुरंग. जिसमें खाड़ी के नीचे 7 किमी लंबी सुरंग भी शामिल है कुल लंबाई 21 किमी अनुमानित लागत 6,400 करोड़
ऑरेंज गेट से मरीन ड्राइव तक तटीय सड़क को सुरंग से जोड़ा जाएगा. दक्षिण मुंबई में ट्रैफिक जाम से छुटकारा मिलेगा। कुल लंबाई 3.5 किमी अनुमानित लागत 6,327 करोड़
तुर्भे से जुईनगर होते हुए खारघर सायन-पनवेल राजमार्ग पर यातायात की भीड़ कम हो जाएगी। कुल लंबाई 2.4 किमी अनुमानित लागत 2,195 करोड़
ऐरोली से कटाई नाका केवल नवी मुंबई-डोंबिवली यात्रा 15 मिनट में. 12.30 किमी एलिवेटेड रूट कुल लंबाई 1.69 किमी अनुमानित लागत 1,441 करोड़
टिकुजिनी वाडी से मगाथाने ठाणे से बोरीवली की दूरी 15 मिनट में पहुंचा जा सकता है। कुल लंबाई 11.84 किमी अनुमानित लागत 14,000 करोड़ रुपये
फिल्म सिटी से मुलुंड खिंडीपाड़ा एक से डेढ़ घंटे का सफर यह 15 मिनट में पूरा हो जाएगा। लंबाई 12.20 किमी खर्च 8,137 करोड़
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शहर की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करना, निवासियों का पुनर्वास करना महंगा हो गया है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान मुंबई में पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी के लिए एक बड़ी बाधा है। इसके लिए आवश्यक पर्यावरण विभाग के परमिट कानून की कसौटी पर समस्याग्रस्त साबित होता है। ऐसी कठिनाइयों को दूर करने के लिए भूमिगत सुरंगों के माध्यम से परिवहन प्रणाली का निर्माण एक सस्ता विकल्प है।
मुंबई पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के मद्दे नज़र मुंबई के मुसलामानों ने गुरुवार की जगह शुक्रवार को ईद मिलाद उन नबी का जलूस निकालने का फैसला किया है। हालांकि मुंबई पुलिस गुरुवार 28 सितंबर गणेश विसर्जन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बंदोबस्त में व्यस्त है।
ईस्माइल शेख मुंबई– 2023 भारत में इस्लामिक कलैंडर के मुताबिक, 28 सितंबर गुरुवार के दिन 12 रबी उल अव्वल का दिन है। जो हमेशा की तरह इस साल भी मुसलमान भाइयों द्वारा ईद मिलाद उन नबी का जलूस निकाला जाना है। लेकिन मुंबई में इस समय गणेशोत्सव का त्यौहार मनाया जा रहा है। ऐसे में मुंबई पुलिस के लिए सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम करना मुश्किल हो सकता था। इसको लेकर मुंबई पुलिस ने लोकल स्तर पर हर पुलिस स्टेशन में मोहल्ला कमिटी के जरिये मीटिंग बुलाई और जलूस के साथ गणेश विसर्जन में होनेवाली दिक्कतों को समझाने की कोशिश की। इसपर मुंबई भर के मुसलमान भाइयों ने 12 रबी उल अव्वल के बदले ईद मिलादुन नबी का जलूस 13 रबी उल अव्वल के दिन यानी 28 सितंबर गुरुवार की जगह 29 सितंबर शुक्रवार की नमाज़ के बाद निकालने का फैसला किया है।
ईद मिलाद उन नबी का जश्न ..
मुंबई के कांदिवली पुलिस थाने में मोहल्ला कमिटी की मीटिंग की तस्वीरकांदिवली पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संदीप विश्वासराव के साथ मीटिंग की तस्वीर
ईद मिलाद उन नबी को इस्लामी पैगंबर मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन के रूप में जाना जाता है। ईद मिलाद उन नबी हर साल रबी उल अव्वल 12 की इस्लामी तारीख के महीने में मनाया जाता है। हिजरी कैलेंडर में, रबी उल अव्वल तीसरे महीने का नाम ह। रबी उल अव्वल महीने के 12वें तारीख को मिलादुन्नबी का त्यौहार मनाया जाता ह।
रबी उल अव्वल महीने का चांद 16 सितंबर 2023 को देखा गया है. यानी कि 17 सितंबर 2023 को रबी उल अव्वल महीने की 1 तारीख थी। इस हिसाब से रबी उल अव्वल महीने का 12वीं तारीख 28 सितंबर 2023 को है। मीलाद उन-नबी अरबी शब्द है। भारत में उर्दू जानने वाले ईद मीलाद-उन-नबी भी कहते हैं। इस्लाम के आखरी पैगंबर हज़रत मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम (आपका) का जन्म से जुड़ा हुआ है। आपका जन्म 8 जून, 570 ईसवी को मक्काह (सऊदी अरब) में हुआ था। आपके पिता का नाम अब्दुल्लाह व माता का नाम बीबी आमिनाह है। आपका इंतकाल 62 साल की उम्र में 8 जून 632 ई। को मदीना, सऊदी अरब हुआ था। इसके साथ ही आप को यह भी बतादें कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार आपका जन्म और दुनिया से पर्दा फरमाने का दिन 8 ही जून को हुआ था।
मुसलमानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। जिसमें लोग पैगंबर के बताए गए रास्ते को याद करते हैं। इस्लाम का सबसे पवित्र ग्रंथ कुरान तिलावत किया जाता है और इस दिन खास दुआओं का भी हर घर में इंतज़ाम किया जाता है। इस समय इस्लामिक कलैंडर के मुताबिक 1445 हिजरी का तीसरा महीना रबी उल अव्वल चल रहा है। इस्लाम में कई ऐसी इस्लामिक घटनाएं हैं जिनका अपना-अपना महत्व है। हालाँकि, ईद मिलाद उन नबी भी इस्लाम में सबसे पवित्र आयोजन में से एक है। हर साल, भारत में मुसलमान इस आयोजन के संबंध में विशेष व्यवस्था करते हैं। वे भारत में 12 रबी उल अव्वल की निश्चित तारीख के बारे में जानने और उसके अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनाने के लिए चंद्रमा के दिखने का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
इस विशिष्ट दिन पर, लोग अपने पवित्र पैगंबर मुहम्मद के सम्मान में विशेष रैलियाँ और जुलूस आयोजित करते हैं। इस ख़ास जलूस में अक्सर पैगंबर की सुन्नत के अनुसार हरे रंग की पगड़ी पहनते हैं और हरे झंडे लेकर चलते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि पैगंबर मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हरा पसंदीदा रंग है। माना जाता है कि पैगंबर मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पहले की दुनिया गुमनामी में खो गई थी। लोगों के अपने-अपने निजी देवी-देवता थे और लोग पाप में थे। हालाँकि, पैगंबर आए और लोगों को इस्लाम धर्म दिया।
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मिलाद उन-नबी एक इस्लामी अवकाश है जो पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन को मनाता है। यह इस्लामिक महीने रबी अल-अव्वल के 12 वें दिन मनाया जाता है। पैगंबर मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मानवता का मार्गदर्शन करने के लिए ईश्वर द्वारा भेजे गए अंतिम पैगंबर थे। मिलाद उन-नबी उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करने का समय है। यह विशेष प्रार्थनाओं और उपदेशों के साथ-साथ भोजन और उपहारों के साथ मनाया जाता है। कई मुसलमानों के लिए मिलाद उन-नबी साल की सबसे महत्वपूर्ण छुट्टियों में से एक है। ईद मिलाद-उन-नबी मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए पैगंबर मुहम्मद के जीवन और उनके विचारों को याद करने और उनका सम्मान करने का एक अवसर है. माना जाता है कि यह उत्सव इस्लाम के शुरुआती दिनों में शुरू हुआ था जब लोग इकट्ठा होते थे और पैगंबर के सम्मान में कवितायें (नात शरीफ) पढ़ा करते थे जो आज भी जारी है।