नेपाल में 11 दिन बाद मलबे से 64 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठ जिंदा मिलीं। परिवार अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर चुका था। जानिए पूरा रेस्क्यू।
नेपाल: 26 अगस्त की भीषण बाढ़ और भूस्खलन के 11वें दिन नेपाल में ऐसा रेस्क्यू हुआ, जिसने तबाही के बीच उम्मीद जगा दी। नुवाकोट जिले के बेत्रावती बाजार में 64 साल की चंडिका श्रेष्ठ अपने मलबे में दबे घर से जिंदा मिलीं। परिवार उन्हें मृत मान चुका था और अंतिम संस्कार की रस्में भी शुरू कर दी थीं।
मलबे के अंदर से अचानक आई आवाज
5 सितंबर को सशस्त्र पुलिस बल की एक टीम बेत्रावती में मलबा हटाने और सड़क से जुड़े काम में लगी थी। इसी दौरान जवानों को एक दबे हुए मकान की तरफ से बेहद धीमी आवाज सुनाई दी।
बचाव दल ने पहले भी इसी जगह तलाश की थी, लेकिन तब कोई आवाज नहीं मिली थी। इस बार आवाज मिलने के बाद जवानों ने मलबे के बीच रास्ता बनाया और खिड़की तोड़कर घर के अंदर पहुंचे। जैसे-जैसे वे महिला के करीब पहुंचे, आवाज साफ होती गई।
अंदर 64 वर्षीय चंडिका जिंदा थीं। उन्हें मलबे से बाहर निकालने के बाद नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर से काठमांडू के छाउनी स्थित बीरेंद्र अस्पताल ले जाया गया। बचाव अभियान का नेतृत्व इंस्पेक्टर सुमन बीके की टीम कर रही थी।
बाढ़ में घर करीब 100 मीटर खिसक गया था
चंडिका जिस मकान में फंसी थीं, वह बाढ़ के तेज बहाव और मलबे के साथ अपनी मूल जगह से करीब 100 मीटर ऊपर की ओर खिसक गया था। घर की साढ़े तीन मंजिलें पूरी तरह मलबे में दब गई थीं, जबकि चौथी मंजिल का एक हिस्सा कीचड़ में फंसा था। इसी हिस्से में चंडिका के जिंदा होने का पता चला।
चंडिका 26 अगस्त से लापता थीं। उनके साथ घर में मौजूद परिवार के चार अन्य सदस्यों का अभी तक पता नहीं चला है। आठवें दिन परिवार ने उन्हें मृत मानकर अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर दी थीं और कुश से प्रतीकात्मक पुतला भी तैयार किया था।
11 दिन तक कैसे जिंदा रहीं?
चंडिका के 11 दिनों तक मलबे के अंदर जीवित रहने की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि इस दौरान उन्हें पानी या भोजन कैसे मिला। इसलिए उनके जीवित रहने को लेकर किसी खास कारण का दावा नहीं किया गया है।
ऐसे मामलों में मलबे के अंदर सांस लेने लायक हवा और पानी तक पहुंच सबसे अहम होती है। चंडिका के मामले में वास्तविक परिस्थितियां आगे की जानकारी से ही स्पष्ट होंगी।
नेपाल में दूसरे लोगों को भी जिंदा बचाया गया
चंडिका के रेस्क्यू से एक दिन पहले ऊपरी त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में करीब 170 मीटर अंदर फंसे दो नेपाली कर्मचारियों को जिंदा निकाला गया था।
इसके बाद ऊपरी त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग में करीब 225 मीटर अंदर फंसे चीनी नागरिक लू हाईताओ को भी बचाया गया। इन अभियानों में नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ सुरंग-बचाव टीमें काम कर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया की टीमें भी नेपाल पहुंच चुकी हैं।
करीब 5 हजार लोग अब भी लापता
नेपाल के विदेश मंत्रालय के 5 सितंबर के आधिकारिक अपडेट के मुताबिक, आपदा के 11वें दिन तक 13,098 लोगों को बचाया जा चुका था, जबकि करीब 5,000 लोग अब भी लापता थे। इनमें 35 देशों के करीब 600 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अब तक 1,344 शव बरामद किए जा चुके थे।
कई लापता लोगों का संबंध जलविद्युत परियोजनाओं से है। बेत्रावती के आसपास भी ड्रोन की मदद से शवों की लोकेशन तलाशने और उन्हें निकालने का काम किया गया है। पूरे बचाव अभियान में नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के करीब 21,465 जवान लगाए गए हैं।
घर, सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाढ़ और भूस्खलन से 7,570 घर प्रभावित हुए हैं और करीब 32,933 लोग प्रभावित आबादी में शामिल हैं। 48 सरकारी कार्यालय, 55 किलोमीटर सड़क, 37 मोटर योग्य पुल और 68 झूला पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
करीब 1,806 हेक्टेयर कृषि भूमि के अलावा 13 जलविद्युत परियोजनाएं, एक सौर ऊर्जा संयंत्र और दो ट्रांसमिशन लाइनें प्रभावित हुई हैं। प्रभावित जलविद्युत क्षमता करीब 783 मेगावाट बताई गई है।
नेपाल की इस आपदा में हजारों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे समय में चंडिका श्रेष्ठ का 11वें दिन मलबे से जिंदा मिलना एक असाधारण रेस्क्यू के साथ उन परिवारों के लिए भी उम्मीद बना है, जिन्हें अभी अपने लोगों के मिलने का इंतजार है।
