Malad Road Accident में महिला की मौत के बाद 65 वर्षीय ड्राइवर गिरफ्तार हुआ। पुलिस स्टेशन में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों ने मामले को और गरमा दिया है।
मुंबई: मालाड वेस्ट में 30 अगस्त की रात हुए सड़क हादसे के मामले में 65 वर्षीय कार ड्राइवर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, मामलतदार वाडी जंक्शन पर कार ने एक स्कूटर और इसके बाद तीन ऑटो रिक्शा को टक्कर मारी, जिसमें प्रियंका शाह की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। वहीं, आरोपी को पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर VIP सुविधाएं दिए जाने के आरोपों ने अब हादसे के साथ-साथ पुलिस के रवैये पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामलेदार वाडी जंक्शन पर कैसे हुआ हादसा?
पुलिस के मुताबिक, हादसा 30 अगस्त की रात करीब 8 बजे मालाड वेस्ट के मामलेदार वाडी जंक्शन पर हुआ। उस वक्त Mayank Satra अपनी पत्नी Priyanka Satra के साथ Activa स्कूटर पर थे और दोनों ट्रैफिक सिग्नल पर रुके हुए थे।
पुलिस का आरोप है कि कृष्ण चमनाकर नाम के 65 वर्षीय ड्राइवर ने कथित तौर पर तेज और लापरवाही से कार चलाते हुए स्कूटर को टक्कर मारी। इसके बाद कार तीन अन्य ऑटो रिक्शा से भी जा टकराई। हादसे में कई लोग घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई। प्रियंका सातरा को गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मौत हो गई।
आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार, इन धाराओं में केस
प्रियंका सातरा के परिवार की शिकायत के आधार पर मालाड पुलिस ने आरोपी कृष्ण चमनाकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार उस पर BNS की धारा 106(1), 281 और 125(A)(B) के साथ Motor Vehicles Act की धारा 184 के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया गया और उसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। मामले की आगे की जांच जारी है।
अब पुलिस स्टेशन में ‘VIP ट्रीटमेंट’ के आरोप क्यों?
हादसे के बाद मृतका के परिजनों और स्थानीय लोगों की तरफ से मालाड पुलिस स्टेशन में आरोपी के साथ कथित तौर पर विशेष व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
आरोपों में कहा गया है कि आरोपी को लॉकअप में मोबाइल इस्तेमाल करने दिया गया, बैठने के लिए कुर्सी दी गई और बाद में उसे पुलिस स्टेशन के पीछे एक AC कमरे में बैठाए जाने की बात सामने आई। यह भी दावा किया गया कि मेडिकल जांच के नाम पर आरोपी को लॉकअप से बाहर ले जाया गया और परिजनों को उसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध पुलिस बयान से नहीं हुई है। इसलिए इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इस मामले में पुलिस की ओर से कथित VIP सुविधाओं पर कोई स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने तक इन दावों को पुख्ता तथ्य मानना सही नहीं होगा।
‘20 लोगों को रौंदने’ के दावे पर क्या सामने आया?
इस घटना को लेकर अब तक की जानकारी में 20 लोगों के चपेट में आने और दो लोगों की मौत का दावा किया गया है। हालांकि, उपलब्ध पुलिस-आधारित रिपोर्ट में हादसे में एक महिला की मौत, स्कूटर और तीन ऑटो रिक्शा के क्षतिग्रस्त होने तथा कई लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। पुलिस जांच के बाद मामला साफ होने की गुंजाइश जताई जा रहीं है।
अब नजर पुलिस की जांच पर
फिलहाल सबसे अहम दो पहलू हैं—हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच और पुलिस स्टेशन में आरोपी के साथ कथित विशेष व्यवहार की शिकायतों की जांच।
सड़क हादसे के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर केस दर्ज कर लिया है। वहीं, अगर पुलिस स्टेशन में मोबाइल, AC कमरे या अन्य विशेष सुविधाएं दिए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज समेत उपलब्ध सबूतों की जांच की जाए। अब आगे की कार्रवाई और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया से यह साफ होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।
