महाराष्ट्र सरकार ने ‘शक्ति ऑन व्हील्स’ पहल शुरू की है। इसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद मोबाइल वैन के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंचाए जाएंगे। इस योजना से महिलाओं को नया बाजार और रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।
(मंत्रालय प्रतिनिधि)
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उनके उत्पादों को नया बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘शक्ति ऑन व्हील्स‘ पहल शुरू की है। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने मुंबई के सचिवालय जिमखाना में इस अभियान की शुरुआत की। इस पहल के तहत महिलाओं द्वारा तैयार किए गए खाद्य पदार्थ, घरेलू सामान और जैविक उत्पाद अब मोबाइल बिक्री वैन के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंचाए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी।
क्या है ‘शक्ति ऑन व्हील्स’ पहल?
‘शक्ति ऑन व्हील्स’ एक मोबाइल मार्केटिंग और बिक्री मॉडल है, जिसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को विशेष वैन के माध्यम से शहरों और कस्बों तक पहुंचाया जाएगा। इन वैन को सरकारी कार्यालयों, मेट्रो स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों, हॉस्टलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर तैनात किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को बिचौलियों पर निर्भर रहने से बचाना और उन्हें सीधे ग्राहकों से जोड़ना है।
किन उत्पादों की होगी बिक्री?
मोबाइल वैन के जरिए कई तरह के घरेलू और खाद्य उत्पाद बेचे जाएंगे, जिनमें शामिल हैं—
- पापड़ और अचार
- देसी घी और मसाले
- मिलेट (श्री अन्न) उत्पाद
- विभिन्न प्रकार के आटे
- रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ
- घरेलू उपयोग की वस्तुएं
- हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पाद
सरकार का दावा है कि इन उत्पादों को प्राकृतिक और पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया है।
कामकाजी महिलाओं को कैसे मिलेगा फायदा?
महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे के अनुसार, अगर ऐसी बिक्री वैन सरकारी कार्यालयों, तहसील कार्यालयों और मेट्रो स्टेशनों के बाहर उपलब्ध होंगी, तो कामकाजी महिलाओं को रेडी-टू-ईट भोजन, घरेलू सामान और अन्य जरूरी चीजें एक ही जगह पर आसानी से मिल सकेंगी।
इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि स्थानीय महिला उद्यमियों की आय भी बढ़ेगी।
महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
महाराष्ट्र में हजारों महिला स्वयं सहायता समूह छोटे उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, हस्तशिल्प और कृषि आधारित व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। इनमें से कई समूहों को अपने उत्पाद बेचने के लिए उचित बाजार नहीं मिल पाता था।
‘शक्ति ऑन व्हील्स’ के जरिए सरकार इन समस्याओं को दूर करना चाहती है।
इस पहल से महिलाओं को मिलने वाले संभावित फायदे—
- उत्पादों के लिए नया बाजार
- आय में वृद्धि
- स्वरोजगार को बढ़ावा
- बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी
- स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलेगी
‘उमेद’ और ‘लखपति दीदी’ अभियान से क्या है संबंध?
पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई पहल शुरू की हैं। राज्य सरकार ने 13 जिलों में ‘उमेद मॉल’ स्थापित करने की घोषणा की थी, जहां स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद बेच सकें।
इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें उद्यमिता से जोड़ने पर काम कर रही हैं। ‘शक्ति ऑन व्हील्स’ को इसी रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है।
राज्यभर में 100 मोबाइल वैन शुरू करने की तैयारी
फिलहाल इस पहल की शुरुआत मुंबई से की गई है, लेकिन सरकार इसे पूरे महाराष्ट्र में विस्तार देने की योजना बना रही है। आने वाले समय में राज्यभर में कम से कम 100 मोबाइल बिक्री वैन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महिला स्वयं सहायता समूहों को स्थायी बाजार मिल जाता है, तो इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय उद्योगों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता को भी नई ताकत मिलेगी।
‘शक्ति ऑन व्हील्स’ केवल एक मोबाइल वैन योजना नहीं है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम है। अगर यह पहल सफल रहती है, तो लाखों महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए नया बाजार मिलेगा और राज्य में महिला उद्यमिता को नई पहचान मिल सकती है।

