उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक व्यापारी के घर और दुकान से 106 बोरों में भरे 5,666 किलो सिक्के बरामद हुए। व्यापारी फरार है, पुलिस ने स्पेशल टीम गठित कर जांच शुरू कर दी है।
हाथरस (उत्तर प्रदेश): आमतौर पर पुलिस छापों में नकदी, सोना, हथियार या नशीले पदार्थ बरामद होने की खबरें सामने आती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई एक कार्रवाई ने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। यहां एक स्टेशनरी व्यापारी के घर और दुकान से 106 बोरों में भरे 5,666 किलोग्राम (करीब 6 टन) सिक्के बरामद हुए। छापेमारी शुरू होते ही व्यापारी फरार हो गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर सिक्के क्यों जमा किए गए थे और इनके पीछे पूरा खेल क्या था।
सूचना मिली और खुल गया करोड़ों के सिक्कों का रहस्य
प्रशासन को सूचना मिली थी कि नयागंज क्षेत्र में एक स्टेशनरी व्यापारी बड़ी मात्रा में सिक्के जमा कर रहा है। सूचना के आधार पर जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापारी की दुकान तथा हनुमान गली स्थित घर पर संयुक्त छापेमारी की।
शुरुआत में अधिकारियों को लगा कि मौके पर 70 से 80 बोरे मिलेंगे, लेकिन तलाशी बढ़ने पर 106 प्लास्टिक के बोरे बरामद हुए। सभी बोरों में अलग-अलग मूल्यवर्ग के सिक्के भरे हुए थे। सिक्कों की संख्या इतनी अधिक थी कि मौके पर उनकी गिनती करना संभव नहीं था। इसलिए उनका वजन कराया गया, जो 5,666 किलोग्राम निकला।
छापा पड़ते ही फरार हुआ व्यापारी
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई की भनक लगते ही व्यापारी मौके से फरार हो गया। उसके खिलाफ Coinage Act, 2011 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
आखिर 6 टन सिक्कों का क्या होने वाला था?
यही सवाल इस पूरे मामले को रहस्यमय बना रहा है।
जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि—
- इतने बड़े पैमाने पर सिक्के कहां से जुटाए गए?
- इन्हें किस उद्देश्य से जमा किया गया?
- क्या इन्हें दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा था?
- क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था?
- इस कारोबार से किसे आर्थिक फायदा पहुंच रहा था?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने स्पेशल जांच टीम का गठन किया है।
रिश्तेदार ने किया बड़ा दावा
छापेमारी के दौरान व्यापारी के एक रिश्तेदार ने अधिकारियों को बताया कि इस कारोबार में कथित तौर पर 3 से 4 प्रतिशत कमीशन पर सिक्कों का लेन-देन किया जाता था।
उसने दावा किया कि 500 और 1000 रुपये मूल्य के सिक्कों के पैकेट तैयार कर दिल्ली के मेट्रो स्टेशन और रेलवे स्टेशनों तक भेजे जाते थे। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की जांच की जा रही है और अभी इन्हें अंतिम सत्य नहीं माना गया है।
क्या इतने सिक्के रखना गैरकानूनी है?
पुलिस के अनुसार Coinage Act, 2011 के तहत सिक्कों का दुरुपयोग, उन्हें कानूनी मुद्रा के अलावा अन्य उद्देश्यों में इस्तेमाल करना या कानून के विपरीत परिस्थितियों में उनका संग्रह अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
इसी आधार पर पुलिस ने व्यापारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में कौन-कौन से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
एक नजर में पूरा मामला
- स्थान: नयागंज और हनुमान गली, हाथरस (उत्तर प्रदेश)
- बरामदगी: 106 प्लास्टिक के बोरे
- कुल वजन: 5,666 किलोग्राम (करीब 6 टन)
- आरोपी: स्टेशनरी व्यापारी, फिलहाल फरार
- कार्रवाई: Coinage Act, 2011 के तहत FIR
- जांच: स्पेशल पुलिस टीम गठित
पुलिस किन पहलुओं की जांच कर रही है?
इस मामले में पुलिस सिर्फ बरामद सिक्कों की गिनती तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
- सिक्कों का स्रोत क्या था?
- क्या बैंकों से बड़ी मात्रा में सिक्के निकाले गए थे?
- क्या अन्य राज्यों से भी कनेक्शन है?
- क्या इस कारोबार में और लोग शामिल हैं?
- बरामद सिक्कों की कुल कीमत कितनी है?
इन सभी बिंदुओं पर जांच जारी है।
आम लोगों के मन में उठ रहे सवाल
इस कार्रवाई के बाद लोगों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बन गए हैं। क्या बड़ी मात्रा में सिक्के रखना अपराध है? क्या कोई व्यापारी वैध तरीके से इतने सिक्के इकट्ठा कर सकता है? क्या यह मामला केवल अवैध कारोबार से जुड़ा है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है?
इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस फरार व्यापारी की गिरफ्तारी पर है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के बाद सिक्कों की सप्लाई चेन, उनके स्रोत और पूरे नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच पूरी होने तक इस मामले के कई पहलू रहस्य बने हुए हैं।

