कुछ महीने पहले करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद BMC ने मुंबई महापौर के आधिकारिक हेरिटेज बंगले के लिए फिर करीब ₹3 करोड़ का नया टेंडर जारी किया है। आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? जानिए पूरा मामला।
मुंबई: मुंबई में सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मुंबई महापौर के आधिकारिक हेरिटेज बंगले के लिए करीब ₹2.9 करोड़ (लगभग ₹3 करोड़) का नया टेंडर जारी किया है। हैरानी की बात यह है कि इसी बंगले पर कुछ महीने पहले ही करोड़ों रुपये खर्च कर व्यापक मरम्मत और नवीनीकरण का काम कराया गया था। ऐसे में नया टेंडर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम मुंबईकरों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतने कम समय में दोबारा करोड़ों रुपये खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ गई।
BMC का कहना है कि यह कोई साधारण सरकारी आवास नहीं, बल्कि एक संरक्षित हेरिटेज इमारत है। इसलिए इसके संरक्षण, संरचनात्मक मजबूती और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त तकनीकी कार्य जरूरी हैं। दूसरी ओर विपक्षी दल, RTI कार्यकर्ता और कई नागरिक इस पूरे खर्च की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि हाल ही में बड़े पैमाने पर रेनोवेशन किया गया था, तो अब नए टेंडर की आवश्यकता और उसके दायरे को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
आखिर कौन-सा है यह महापौर बंगला?
इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर एक भ्रम भी देखने को मिला। कई लोग इसे दादर के शिवाजी पार्क स्थित पुराने महापौर बंगले से जोड़ रहे हैं, जबकि नया टेंडर भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान (रानी बाग) परिसर में मौजूद BMC के आधिकारिक हेरिटेज बंगले से संबंधित है।

यह इमारत ब्रिटिश काल की विरासत संरचनाओं में गिनी जाती है और वर्षों तक खाली पड़ी रही। हाल ही में इसे मुंबई महापौर के आधिकारिक निवास के रूप में तैयार करने का निर्णय लिया गया। चूंकि यह हेरिटेज भवन है, इसलिए यहां किसी भी निर्माण या मरम्मत का कार्य सामान्य सरकारी इमारतों की तुलना में अधिक तकनीकी प्रक्रिया और संरक्षण मानकों के तहत किया जाता है।
यही कारण है कि BMC इस पूरे रेनोवेशन को “हेरिटेज कंजर्वेशन” का हिस्सा बता रही है। हालांकि इसी दलील के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुछ महीने पहले किए गए कार्य और अब प्रस्तावित नए कार्यों में वास्तविक अंतर क्या है।
कैसे बढ़ती गई लागत? पूरी टाइमलाइन समझिए
इस पूरे मामले को समझने के लिए पिछले कुछ महीनों की घटनाओं पर नजर डालना जरूरी है।
मार्च 2026
महापौर के आधिकारिक बंगले के व्यापक नवीनीकरण का पहला प्रस्ताव सामने आया। शुरुआती अनुमान करीब ₹1.5 करोड़ का था। उस समय कहा गया कि लंबे समय से खाली पड़े हेरिटेज भवन को रहने योग्य बनाने और उसकी मूल संरचना को सुरक्षित रखने के लिए विशेष मरम्मत आवश्यक है।
अप्रैल 2026
रेनोवेशन का दायरा बढ़ा और प्रस्तावित लागत में भी वृद्धि हुई। इसके बाद व्यापक मरम्मत, इंटीरियर अपग्रेड और हेरिटेज संरक्षण के कार्यों को मंजूरी मिली। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी चरण में करोड़ों रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए।
अगले कुछ महीने
करीब ₹2.4 करोड़ की लागत से पहले चरण का कार्य पूरा होने की जानकारी सामने आई। इस दौरान भवन की संरचना मजबूत करने, इंटीरियर सुधारने और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने का काम किया गया।
अगस्त 2026
काम पूरा होने के कुछ ही महीने बाद BMC ने करीब ₹2.9 करोड़ का नया टेंडर जारी कर दिया। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। विपक्ष और RTI कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि आखिर पहले चरण में कौन-कौन से काम पूरे हुए थे और अब किन नए कार्यों के लिए दोबारा इतनी बड़ी राशि खर्च की जा रही है।
पहले चरण में क्या-क्या काम किए गए थे?
उपलब्ध जानकारी और प्रस्तावों के अनुसार पहले रेनोवेशन में केवल पेंटिंग या सामान्य मरम्मत नहीं हुई थी, बल्कि कई बड़े कार्य शामिल थे। इनमें—
- भवन की संरचनात्मक मजबूती
- लकड़ी के हिस्सों की मरम्मत
- आधुनिक किचन का निर्माण
- अतिरिक्त बेडरूम और बाथरूम
- मीटिंग रूम का विकास
- इटालियन मार्बल फ्लोरिंग
- एंटीक झूमर (Chandeliers)
- वेनेशियन ब्लाइंड्स
- इलेक्ट्रिकल सिस्टम का अपग्रेड
- हेरिटेज इंटीरियर का संरक्षण
जैसे काम शामिल बताए गए थे।
इन कार्यों को देखते हुए अब सबसे बड़ा सवाल यही बनता है कि यदि इतने व्यापक स्तर पर रेनोवेशन हो चुका था, तो नए टेंडर में ऐसा कौन-सा अतिरिक्त काम शामिल है, जिसकी वजह से फिर करीब ₹3 करोड़ खर्च करने की आवश्यकता पड़ रही है।
नए टेंडर में क्या प्रस्तावित है?
BMC के ताजा टेंडर के अनुसार इस चरण में मुख्य रूप से—
- संरचनात्मक मरम्मत (Structural Repairs)
- हेरिटेज बहाली (Heritage Restoration)
- आंतरिक सुधार (Interior Improvements)
- रखरखाव से जुड़े अतिरिक्त कार्य
- सिविल और संरचनात्मक अपग्रेड
जैसे कार्य प्रस्तावित हैं।
हालांकि अभी तक BMC ने सार्वजनिक रूप से दोनों चरणों के कार्यों की विस्तृत तुलना जारी नहीं की है। इसी वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पहले किए गए कार्यों से अलग इस बार कौन-कौन से नए काम प्रस्तावित हैं और कितनी लागत किस मद में खर्च की जाएगी।
यहीं से शुरू होता है सबसे बड़ा सवाल
सार्वजनिक धन से होने वाले किसी भी बड़े सरकारी खर्च में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होती है। यही वजह है कि इस पूरे मामले में नागरिकों का ध्यान अब केवल ₹3 करोड़ के नए टेंडर पर नहीं, बल्कि पहले और दूसरे चरण के बीच अंतर पर है।
यदि पहले चरण में भवन की संरचनात्मक मरम्मत, इंटीरियर विकास और हेरिटेज संरक्षण का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका था, तो क्या नए टेंडर में वास्तव में ऐसे अतिरिक्त कार्य शामिल हैं जो पहले नहीं किए गए थे? या फिर यह पहले से स्वीकृत कार्यों का ही विस्तार है?
इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं हुए हैं। यही कारण है कि अब इस पूरे मामले की चर्चा केवल एक सरकारी टेंडर तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देखी जा रही है।
BMC का पक्ष: “हेरिटेज भवन है, इसलिए अतिरिक्त काम जरूरी”
नए टेंडर पर उठ रहे सवालों के बीच BMC अधिकारियों का कहना है कि महापौर का यह बंगला एक संरक्षित हेरिटेज भवन है। ऐसे भवनों की मरम्मत सामान्य सरकारी इमारतों की तरह नहीं की जा सकती। हर चरण में विशेषज्ञों की सलाह, संरचनात्मक जांच और हेरिटेज संरक्षण के नियमों का पालन करना पड़ता है।
अधिकारियों के अनुसार, नए टेंडर का उद्देश्य भवन की मूल पहचान को सुरक्षित रखते हुए उसकी संरचनात्मक मजबूती बढ़ाना, संरक्षण संबंधी अतिरिक्त कार्य करना और लंबे समय तक भवन को सुरक्षित रखना है।
हालांकि अब तक BMC ने यह विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है कि पहले चरण में पूरा हुआ काम और नए टेंडर में प्रस्तावित कार्य एक-दूसरे से किस प्रकार अलग हैं। यही वजह है कि पारदर्शिता को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
विपक्ष ने क्यों घेरा BMC?
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
विपक्षी दलों का कहना है कि यदि कुछ महीने पहले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रेनोवेशन पूरा हो चुका था, तो अब नए टेंडर की आवश्यकता का विस्तृत तकनीकी आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने आरोप लगाया कि बंगला वर्षों तक खाली पड़ा रहा और समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण अब एक साथ करोड़ों रुपये खर्च करने की नौबत आई है।
वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि हेरिटेज भवनों के संरक्षण में कई बार चरणबद्ध तरीके से काम करना पड़ता है और अतिरिक्त तकनीकी आवश्यकताओं के कारण लागत बढ़ सकती है।
यानी इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बहस का केंद्र सरकारी खर्च और उसकी आवश्यकता ही बनी हुई है।
RTI कार्यकर्ताओं ने किन सवालों की मांग उठाई?
इस पूरे मामले में RTI कार्यकर्ता अनिल गलगली ने भी कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि—
- पहले चरण में किन-किन कार्यों पर कितना खर्च हुआ?
- कौन-सा ठेकेदार नियुक्त किया गया?
- कार्य पूरा होने का प्रमाणपत्र (Completion Certificate) कब जारी हुआ?
- क्या तकनीकी निरीक्षण के बाद ही नया टेंडर निकाला गया?
- नए टेंडर में ऐसा क्या अतिरिक्त है जो पहले नहीं था?
RTI कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि ये दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएं, तो पूरा मामला स्वतः स्पष्ट हो जाएगा।
क्या दोनों टेंडरों में एक जैसे काम हैं?
यही इस पूरी मुद्दे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि दोनों टेंडरों में शामिल कार्य पूरी तरह समान हैं या नहीं।
इसके पीछे कारण भी स्पष्ट है।
BMC ने अभी तक दोनों टेंडरों का Bill of Quantities (BOQ), विस्तृत कार्य सूची और तुलना सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई है।
ऐसे में यह दावा करना कि दोनों टेंडरों में एक ही काम दोबारा कराया जा रहा है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
लेकिन यह सवाल जरूर उठ रहा है कि—
यदि पहले चरण में—
- संरचनात्मक मरम्मत,
- लकड़ी का संरक्षण,
- इंटीरियर सुधार,
- इलेक्ट्रिकल अपग्रेड,
- हेरिटेज रिस्टोरेशन
जैसे कार्य हो चुके थे, तो नए टेंडर में इनसे अलग कौन-से अतिरिक्त कार्य शामिल हैं?
यही वह जानकारी है जिसका इंतजार राजनीतिक दलों, RTI कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को है।
सोशल मीडिया पर हंगामा
इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बहस तेज हो गई।
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि—
- “क्या कुछ महीने पहले किया गया काम पर्याप्त नहीं था?”
- “क्या सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग हो सकता था?”
- “क्या BMC दोनों टेंडरों का पूरा विवरण सार्वजनिक करेगी?”
हालांकि सोशल मीडिया पर व्यक्त की गई राय व्यक्तिगत विचार हैं। इन्हें आधिकारिक तथ्य नहीं माना जा सकता, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि इस मुद्दे को लेकर लोगों में जिज्ञासा और सवाल दोनों मौजूद हैं।
पहली नजर में यह केवल महापौर के सरकारी आवास का मामला लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ा विषय है।
मुंबई जैसे शहर में हर साल हजारों करोड़ रुपये नागरिक सुविधाओं पर खर्च किए जाते हैं।
ऐसे में जब किसी सरकारी भवन पर कम समय में दो बार करोड़ों रुपये खर्च होने की खबर सामने आती है, तो स्वाभाविक रूप से नागरिक यह जानना चाहते हैं कि—
- क्या यह खर्च पूरी तरह आवश्यक था?
- क्या इसका तकनीकी आधार मौजूद है?
- क्या पहले चरण में किए गए कार्य पर्याप्त नहीं थे?
इन्हीं सवालों के जवाब पारदर्शिता तय करते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ होंगे—
- नए टेंडर का विस्तृत BOQ
- पहले रेनोवेशन का BOQ
- Work Order
- Completion Certificate
- Final Measurement Book
- तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट
यदि ये दस्तावेज़ सार्वजनिक होते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि नया टेंडर पहले किए गए कार्यों का विस्तार है या पूरी तरह अलग कार्यों के लिए जारी किया गया है।
यही दस्तावेज़ आगे किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक बहस का आधार बन सकते हैं।
Indian Fasttrack Analysis
इस पूरे मामले में फिलहाल दो बातें एक साथ सच हैं।
पहली—BMC का कहना है कि यह एक हेरिटेज भवन है और उसके संरक्षण के लिए अतिरिक्त कार्य आवश्यक हैं।
दूसरी—कुछ महीने पहले करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद फिर नया टेंडर जारी होने से नागरिकों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
इन दोनों बातों के बीच अंतिम निष्कर्ष तभी निकलेगा, जब BMC दोनों चरणों के कार्यों का विस्तृत तकनीकी विवरण सार्वजनिक करेगी।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी यही बताती है कि नया टेंडर जारी हो चुका है, लेकिन यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि पहले हुए कार्यों की तुलना में इस बार क्या नया किया जाएगा।
FAQ
Q1. BMC ने महापौर बंगले के लिए नया टेंडर कितने रुपये का जारी किया है?
BMC ने महापौर के आधिकारिक हेरिटेज बंगले के लिए करीब ₹2.9 करोड़ (लगभग ₹3 करोड़) का नया टेंडर जारी किया है।
Q2. यह महापौर बंगला कहाँ स्थित है?
यह बंगला भायखला स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले उद्यान (रानी बाग) परिसर में स्थित BMC की एक हेरिटेज इमारत है, जिसे आधिकारिक महापौर निवास के रूप में विकसित किया जा रहा है।
Q3. विवाद की वजह क्या है?
कुछ महीने पहले ही इसी बंगले पर करोड़ों रुपये खर्च कर रेनोवेशन कराया गया था। अब दोबारा करीब ₹3 करोड़ का नया टेंडर जारी होने से सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और खर्च की आवश्यकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
Q4. BMC इस खर्च को कैसे सही ठहरा रही है?
BMC का कहना है कि यह एक संरक्षित हेरिटेज भवन है। इसकी संरचनात्मक मजबूती, संरक्षण और रखरखाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अतिरिक्त कार्य आवश्यक हैं।
Q5. क्या यह साबित हो गया है कि पहले वाला काम दोबारा कराया जा रहा है?
नहीं। फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं है जिससे यह साबित हो कि पहले किए गए कार्यों को ही दोबारा कराया जा रहा है। दोनों टेंडरों के विस्तृत BOQ और तकनीकी दस्तावेज़ सामने आने के बाद ही इसकी स्पष्ट तस्वीर मिलेगी।4
Official Sources
Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC)
https://portal.mcgm.gov.inMaharashtra e-Tender Portal
https://mahatenders.gov.inIndian Fasttrack Exclusive | दस्तावेज़ों से खुलेगा पूरा सच
हमारी टीम BMC से निम्न दस्तावेज़ हासिल करने का प्रयास कर रही है:
- अप्रैल 2026 का Work Order
- पहले रेनोवेशन का BOQ
- Completion Certificate
- Final Bill
- नए टेंडर का BOQ
- Heritage Committee की मंजूरी
- तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट
इन दस्तावेज़ों के सार्वजनिक होने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि नया टेंडर पहले हुए कार्यों का विस्तार है या पूरी तरह अलग कार्यों के लिए जारी किया गया है। Indian Fasttrack इस मामले से जुड़े हर आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए हुए है।

