मुंबई में SRA के PAP फ्लैट दिलाने के नाम पर 47 परिवारों से 5.57 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
मुंबई: मुंबई में SRA (Slum Rehabilitation Authority) के PAP (Project Affected Person) फ्लैट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 5.57 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोप में कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत में दावा किया गया है कि करीब 47 लोगों से फ्लैट दिलाने के नाम पर पैसे लिए गए, लेकिन बाद में दिए गए कई दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी पाए गए।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि FIR में जिन लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं, उनमें एक वर्तमान सांसद के पर्सनल असिस्टेंट (PA) और एक राजनीतिक दल से जुड़े पूर्व सहयोगी का भी नाम शामिल है। हालांकि, मामले की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस शिकायत के अनुसार, वर्ष 2017 में शिकायतकर्ता आकाश राधेश्याम सोनी और उनके कारोबारी साझेदार रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात शैलेश काकण और उसके सहयोगियों से हुई। आरोप है कि उन्होंने खुद को SRA अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए मुंबई में PAP फ्लैट उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
शिकायत के मुताबिक अंधेरी, सांताक्रूज, बांद्रा, कांदिवली और माटुंगा जैसे इलाकों में फ्लैट दिलाने का प्रस्ताव दिया गया। प्रत्येक फ्लैट के लिए 15 लाख से 28 लाख रुपये तक की राशि तय की गई।
47 ग्राहकों से जुटाए गए 5.57 करोड़ रुपये
शिकायत में कहा गया है कि भरोसा होने के बाद शिकायतकर्ता ने अपनी कंपनी के माध्यम से करीब 47 ग्राहकों से रकम एकत्र की। आरोप है कि आरोपियों ने पहले टोकन राशि और फिर किस्तों के रूप में लगातार भुगतान लिया।
दस्तावेजों के अनुसार, चेक और RTGS सहित विभिन्न माध्यमों से कुल 5,57,50,000 रुपये का भुगतान किया गया।
SRA के नाम पर कथित फर्जी दस्तावेज दिए गए
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने SRA के लेटरहेड पर कथित आवंटन पत्र, कलेक्टर कार्यालय से जुड़े दस्तावेज, सक्षम प्राधिकारी के पत्र, सोसायटी NOC, बिजली बिल और अन्य सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध कराए।
हालांकि, बाद में जब इन दस्तावेजों की SRA कार्यालय में जांच कराई गई तो शिकायतकर्ता को बताया गया कि दस्तावेज कथित रूप से सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।
2024 में अधिकारियों से मुलाकात के बाद दर्ज हुई शिकायत
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 में SRA के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के दौरान दस्तावेजों की सत्यता की जांच कराई गई। इसके बाद कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
किन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई?
FIR में शैलेश काकण, रूपेश वेलेंकर, अभिषेक गुजर और विश्वनाथ जाधव सहित कई अन्य लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सभी ने मिलकर PAP फ्लैट दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये लिए।
शिकायत के अनुसार, विश्वनाथ जाधव पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से जुड़े एक MLC के पर्सनल सेक्रेटरी रह चुके हैं और वर्तमान में एक कांग्रेस सांसद के पर्सनल असिस्टेंट (PA) के रूप में कार्यरत हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ भी FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह उल्लेख केवल शिकायत और FIR में दर्ज आरोपों के आधार पर है।
PAP फ्लैट क्या होते हैं?
PAP (Project Affected Person) फ्लैट उन लोगों के पुनर्वास के लिए दिए जाते हैं, जो सरकारी परियोजनाओं के कारण प्रभावित होते हैं। ऐसे फ्लैटों का आवंटन निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत किया जाता है। किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार का फ्लैट लेने से पहले संबंधित प्राधिकरण से दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए।
आम लोगों के लिए क्या सीख?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी योजना या पुनर्वास परियोजना के नाम पर फ्लैट देने का दावा करता है, तो भुगतान करने से पहले संबंधित विभाग से दस्तावेजों का सत्यापन करना बेहद जरूरी है। केवल निजी दस्तावेजों या मौखिक आश्वासन के आधार पर बड़ी रकम का भुगतान करना आर्थिक जोखिम पैदा कर सकता है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान बैंक लेन-देन, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।
Official Sources
FAQ
Q1. मुंबई SRA PAP फ्लैट घोटाला क्या है?
यह मामला PAP फ्लैट दिलाने के नाम पर कथित तौर पर 5.57 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।
Q2. इस मामले में कितनी रकम की कथित ठगी हुई?
शिकायत के अनुसार लगभग 5,57,50,000 रुपये की कथित ठगी हुई है।
Q3. कितने लोग प्रभावित बताए गए हैं?
FIR के अनुसार करीब 47 ग्राहकों से पैसे लिए जाने का आरोप है।
Q4. पुलिस अब क्या जांच कर रही है?
पुलिस बैंक ट्रांजैक्शन, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

