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सेंट्रल रेलवे ने दिवाली और छठ पूजा के लिए 1126 स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है। मुंबई, पुणे से यूपी, बिहार, राजस्थान और तेलंगाना तक कनेक्टिविटी मिलेगी।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और पुणे से सफर करने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी है। सेंट्रल रेलवे ने इस बार दिवाली और छठ पूजा की भीड़ को देखते हुए 1126 स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। इसमें पहले से तय 944 ट्रेनों के अलावा शुक्रवार को 182 नई स्पेशल ट्रेनें और जोड़ी गईं।
किन-किन राज्यों तक मिलेगी सुविधा
ये ट्रेनें मुंबई, पुणे और महाराष्ट्र के अन्य शहरों को उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और तेलंगाना जैसे राज्यों से जोड़ेंगी। सभी ट्रेनें सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच चलेंगी।
त्योहारों पर भारी भीड़ को देखते हुए, रेलवे का ये कदम यात्रियों को भीड़भाड़ से राहत देने और आसान यात्रा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। खासकर यूपी-बिहार लौटने वाले प्रवासी यात्रियों को इसका सबसे ज्यादा फायदा होगा।
उत्तर प्रदेश में कथित तौर पर हुए बलात्कार की घटना में पालघर जिले के विरार पुलिस ने 21 वर्षीय युवक के खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है, कि पीड़िता को तस्वीरें वायरल करने की धमकी भी दी। 16 year old girl raped, 21 year old youth arrested
डिजिटल डेस्क पालघर: विरार पुलिस ने उत्तर प्रदेश की एक घटना में 21 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। 16 वर्षीय लड़की के परिवार ने इसके खिलाफ शिकायत की थी। युवक पर आरोप है कि उसने 16 वर्षीय लड़की पर उत्तर प्रदेश के अमेठी में कथित तौर पर बलात्कार किया। इसमें विरार पुलिस ने बलात्कार और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम पोक्सो के तहत मुकदमा दर्ज किया है। घटना तब हुईं जब पीड़िता उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित पैतृक गाँव कुड़वा देहरा गाँव गई हुई थी। 16 year old girl raped, 21 year old youth arrested
कब हुई थी घटना?
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक नाबालिग के साथ उत्तर प्रदेश में अमेठी जिले के कुड़वा देहरा गाँव के 21 वर्षीय निवासी ने नाबालिग लड़की से दोस्ती की। लड़की का पैतृक गांव होने के कारण वह मुंबई से गई हुई थी। शिकायत में कहा गया है कि 17 मई, 2025 की रात, आरोपी ने अपने पुराने घर पर पीड़िता के साथ कथित तौर पर जबरन शारीरिक संबंध बनाया। 16 year old girl raped, 21 year old youth arrested
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने पहले लड़की इच्छा के विरुद्ध कथित तौर पर उसकी छाती और कमर को दबाया। जब लड़की ने इसका विरोध किया तो, कथित कृत्य के बाद, आरोपी ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने विरोध किया और उसे रोका तो वह उसके साथ ली गई लड़की की तस्वीरें उसके रिश्तेदारों को दिखाकर उसे बदनाम कर देगा। 16 year old girl raped, 21 year old youth arrested
दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।
लोकतंत्र का हिस्सा
संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?
संसद में होती है गुंडो की भाषा
पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।
मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।
कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा
अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।
यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?
सरकार ने दिया सेना को धोखा
इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”
आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।
टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार
दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।
सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।
विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?
दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?
ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?
दुनिया की निगाहों में भारत?
भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।
एक नाबालिग बच्ची के शोषण के आरोप में जब फरार 55 वर्षीय आरोपी को मुंबई पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो आरोपी दरवाजा बंद कर आत्महत्या की धमकी देता रहा। जब पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई तबतक आरोपी फंदे से लटक चुका था।
मुंबई: मंगलवार की रात को 55 वर्षीय एक व्यक्ति ने उस समय दरवाजा बंद कर आत्महत्या करने का प्रयास किया जब मुंबई पुलिस की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गई थी। पुलिस उसे एक नाबालिग बच्ची के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार करने गई थी। लकवे से पीड़ित एक व्यक्ति के देखभाल के लिए उसे नियुक्त किया गया था। उसी दौरान पीड़ित की नाबालिग बच्ची पर उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
पुलिस ने क्या कहा?
नाबालिग बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि “व्यक्ति को तुरंत पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह लगभग 36 घंटे तक बेहोश पड़ा रहा और बाद में उसे होश आया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।” Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
नाबालिग बच्ची का यौन शोषण
नाबालिग लड़की के पिता को पिछले साल लकवा का दौरा पड़ा था। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी जिसे मई महीने में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक नाबालिग लड़की के पिता की देखभाल के लिए रखा गया था। शिकायत के मुताबिक नाबालिग की मां जब काम पर चले जाती थी तब हर रोज बच्ची का यौन शोषण और अश्लील टिप्पणियां करता था। यहां तक कि लड़की की शिकायत पर उसकी मां ने आरोपी को चेतावनी भी दी उसके बावजूद आरोपी उसे परेशान करता रहा।
शिकायत के मुताबिक, 28 जुलाई को आरोपी ने लड़की के बेडरूम में घुसकर कथित तौर पर परेशान किया। जिसके बाद लड़की की मां ने पुलिस मे शिकायत करने का फैसला लिया। पुलिस ने 29 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही, आरोपी मुंबई से फरार हो गया। पहले उत्तर प्रदेश और बाद में कर्नाटक भाग गया। Tried to commit suicide to avoid arrest, case registered under POCSO Act
आत्महत्या की कोशिश
मंगलवार को पुलिस को जब पता चला कि आरोपी बदलापुर में है तो दो सहायक पुलिस निरीक्षक और तीन से चार कांस्टेबल की एक टीम वहां पहुंची। रात करीब 10 बजे, आरोपी ने अपने घर का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और आत्महत्या की धमकी देने लगा। हालांकि, पुलिस ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसने आत्महत्या का प्रयास किया। जांच में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने दरवाज़ा तोड़कर उसे बचाया और अस्पताल पहुंचाया।
एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी एटीएस ने यूपी के अमरोहा और महाराष्ट्र के ठाणे जिले से अजमल अली और उसामा माज को गिरफ्तार किया है। दोनों ‘Reviving Islam’ नामक सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे इस ग्रुप के 3 एडमिन सहित 400 पाकिस्तानी सदस्य बताए जा रहे हैं।
न्यूज़ डेस्क मुंबई: एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी ATS ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। यूपी के अमरोहा और महाराष्ट्र के ठाणे जिले से अजमल अली और उसामा माज नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि ये दोनों ‘Reviving Islam‘ नामक एक सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे, जिसमें 400 से ज्यादा पाकिस्तानी मेंबरों में 3 एडमिन शामिल हैं। इस ग्रुप के जरिए दोनों युवक राष्ट्र विरोधी बातें और गैर-मुस्लिमों के खिलाफ कट्टरपंथी सोच फैलाते थे।
एटीएस कर रही है जांच
एटीएस की जांच में पता चला है कि ये युवक पाकिस्तान के नागरिकों से सोशल मीडिया के जरिए लगातार कॉन्टैक्ट में थे। इस ग्रुप में चुनी हुई सरकार को गिराने और देश में शरिया कानून लागू करने जैसी बातें होती थीं। फिलहाल, एटीएस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
इससे पहले एटीएस ने 2 जून को ठाणे के पडघा और बोरीवली में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। ATS ने मुंबई, ठाणे, भिवंडी और अन्य जिलों में 15 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन सिमी (SIMI) के पूर्व पदाधिकारी और ISIS महाराष्ट्र मॉड्यूल केस के मेन एक्यूज्ड साकिब नाचन के ठिकानों समेत उसके कॉन्टैक्ट में रहे कई अन्य संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। छापेमारी सिर्फ साकिब नाचन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके कॉन्टैक्ट में रहे या उससे जुड़े अन्य संदिग्धों पर भी एजेंसी की नजर है।
तिहाड़ जेल में कैद
नाचन कुख्यात आतंकी अबू सुलेमान, अबू सुल्तान और मोहम्मद भाई जैसे दहशतगर्दों के सीधे कॉन्टैक्ट में था। रिपोर्ट के मुताबिक, नाचन ने ही अन्य सदस्यों को बाकी आतंकियों को शपथ दिलाई और साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई थी। फिलहाल, साकिब नाचन तिहाड़ जेल में कैद है।
Free Computer Training Scheme: डिजिटल भारत मिशन के तहत भारत सरकार ने फ्रि कंप्यूटर कोर्स के साथ 15 हजार रुपये के आर्थिक मदद देने ऐलान कर दिया है। यह स्कॉलरशिप 12वीं पास युवाओं के लिए आरक्षित कर दी गई है। आईये जानते हैं कैसे और कहां करें आवेदन?
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: भारत सरकार ने डिजिटल भारत मिशन को आगे बढ़ाते हुए 12वीं पास युवाओं के लिए एक बेहद लाभकारी योजना की शुरुआत की है। फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना 2025 के अंतर्गत अब युवाओं को मुफ्त में कंप्यूटर कोर्स करने का अवसर मिलेगा, साथ ही 15000 रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
बेसिक से एडवांस
इस योजना के माध्यम से छात्र न केवल बेसिक से लेकर एडवांस कंप्यूटर स्किल्स सीख सकेंगे, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। यह मदद सीधे छात्र के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाऐंगे ताकि वे कोर्स के दौरान आर्थिक बोझ से मुक्त रह सकें।
किन्हें मिलेगा योजना का लाभ?
फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना का लाभ केवल उन्हीं युवाओं को मिलेगा जो भारत के नागरिक होंगे। जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है और जिनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होगी। इसके साथ ही, परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आवेदक ने पहले से किसी संस्थान से कंप्यूटर कोर्स नहीं किया होना चाहिए।
इस योजना के अंतर्गत युवाओं को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, इंटरनेट का उपयोग, डिजिटल लेन-देन, साइबर सुरक्षा, टाइपिंग, ईमेलिंग और सरकारी पोर्टल्स पर कार्य करना सिखाया जाएगा। कोर्स की अवधि 3 से 6 महीने की होगी और यह पूरी तरह से सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा कराया जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया कैसे करें?
इच्छुक उम्मीदवार अपने राज्य की स्किल डेवलपमेंट या श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर “Free Computer Training Scheme” दर्शाया गया होगा। उसी पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन करें। इसी के साथ जरूरी दस्तावेज जैसे – आधार कार्ड, 12वीं की मार्कशीट, फोटो, बैंक पासबुक आदि अपलोड करें और आवेदन सबमिट कर दें। कुछ राज्यों में यह सुविधा CSC केंद्रों पर भी उपलब्ध हो चुकी है।
योजना के प्रमुख लाभ
योजना के तहत युवाओं को न केवल मुफ्त कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाएगी, बल्कि कोर्स पूरा करने के बाद एक सरकारी प्रमाणपत्र भी मिलेगा। साथ ही 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट भी मुहैया कराया जाएगा, जिससे युवाओं को करियर की दिशा में बेहतर अवसर मिल सकें।
यह योजना उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में लागू हो चुकी है। अन्य राज्यों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है।
युवाओं को रोजगार में लाभ
इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली ट्रेनिंग से छात्र सरकारी और प्राइवेट सेक्टर दोनों में रोजगार के लिए तैयार होंगे। डिजिटल इंडिया, CSC केंद्र, बैंकिंग, बीमा, डेटा एंट्री और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में इन युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।
युवाओं का अनुभव और आत्मविश्वास
कई युवाओं ने बताया कि इस कोर्स के माध्यम से उन्हें न केवल टेक्निकल स्किल्स मिलीं बल्कि नौकरी पाने में भी आसानी हुई। कुछ छात्रों को स्थानीय कंपनियों में 10000 रुपये से 15000 रुपये प्रति माह की शुरुआती नौकरी भी मिली है।
क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में अपराधियों का खात्मा हो गया है? या अपराधों का राज्य स्थापित हो गया है? या हंटर सिर्फ विरोधियों पर चला?
न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली: सत्ता जब मदान्ध हो जाती है तो वह जनसरोकार से दूर हो जाती है। भले ही उत्तरप्रदेश की योगी सरकार लाख दावे करती रहे कि उसने माफिया राज खत्म कर दिया है। अब अपराधी गुंडे गले में तख्ती लगाए कि वे सरेंडर करने आ रहे। गोली मत मारिए कहा जाए लेकिन सच तो यह है कि जाति विशेष के माफियाओं के ऊपर हाथ ही नहीं डाला गया कभी। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.
जनता के पैसों की बर्बादी
हां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विरुद्ध सारे आपराधिक मामले वापस जरूर ले लिए। शासन का हंटर केवल विरोधियों पर चला। घर बुलडोजर से केवल विरोधियों के गिराए गए। उत्तर प्रदेश में शासन और प्रशासन का अपराधियों में तनिक भी भय नहीं है, क्योंकि सत्ता चुनावी फायदे के लिए कांवड़ यात्रियों पर जनता के पैसे बर्बाद करके हेलीकॉप्टर से फूल बरसा रही है। जिसमे प्रशासन भी शामिल है।
कांवड़ियों के द्वारा उत्पात मचाए गए। ऑटो तोड़े, कार तोड़े, ड्राइवरों को पीटा, ढाबे में खाना खाकर पैसे देने के बदले तोड़फोड़ की गई। पुलिस मूक दर्शक बनी रही। शायद ऊपर से आदेश आया था। यहां तक कि खाकी वर्दी में पुलिस अधिकारी कांवड़ उठाते देखे गए। आईएएस भी अपनी आस्था का प्रदर्शन करते दिखाई दिए ताकि मुख्यमंत्री की कृपा बनी रहे।
महिलाओं के बाथरूम मे लगे कैमरे
शासन प्रशासन की जन उपेक्षा का ही परिणाम हुआ कि यूपी में अपराधों में वृद्धि देखी गई।यहां तक कि योगी जी के चुनाव क्षेत्र गृह जिले गोरखपुर में ही तीन सौ की जगह छः सौ पुलिस ट्रेनी महिलाओं को नरकीय स्थिति में रहने को बाध्य किया गया। उनके बाथरूम में सीसीटीवी कैमरे लगाकर वीडियो बनाए जाते रहे जिस कारण ट्रेनी लड़कियों को विरोध करने को वाद्य होना पड़ा। नीचता की हद तो तब हो गई जब कुंवारी लड़कियों के प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए गए। गोरखपुर में ही अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया कि पुलिस वाले को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया।
अराजकता की हद
इसी में चंद अपराधों की फेहरिस्त देखिए। लखनऊ में एक लाडले को पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। मृत समझ कर मरने के लिए छोड़ दिया गया। तहसील के अंदर ही पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। संत कबीर नगर में सात साल की बेटी के सामने मां की हत्या हुई। महिला की अंतड़िया निकालने वाले का हाफ एनकाउंटर किया गया। दरोगा की पिस्टल छीनकर आरोपी ने फायरिंग की।
कानपुर पिटाई के डर से छठी के छात्र ने खुद को फांसी लगा ली। कानपुर के टीचर ने उसकी चेन छीन ली थी। धर्मपरिवर्तन करने वाले छांगुर ने कहा जब्त की गई संपत्ति उसकी नहीं नसरीन से पूछो। लखनऊ के अंटास मॉल में पुलिस के संरक्षण में रेस्टोरेंट के लाइसेंस पर चलाया जाता है हुक्का बार। पुलिस नीचे बैठी रहती है। सीसीटीवी से 24 घंटे होती रहती है निगरानी। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.
अराजकता की दूसरी तस्वीर
बाराबंकी में 28 साल की महिला सिपाही की हत्या कर दी गई। चेहरा जलाया गया। कौवे नोच रहे थे शव। आधी रात को घर में घुसकर किसान की लखनऊ में ही गला रेत कर हत्या की गई। डिम्पल के ड्रेस पर बोलने वाले मौलाना को अखिलेश के योद्धाओं ने कूट दिया। बीजेपी पोस्टर लगवा कर पूछ चुकी थी कि जो अपनी पत्नी की इज्जत नहीं बचा सका दूसरे की इज्जत कैसे बचाएगा?
पुलिस का आम जनता में खौफ
बीजेपी के संगीत सोम ने मंदिर का गेट तुड़वा दिया। अब दारोगा हेलीकॉप्टर में बैठकर की एंट्री पुलिस ने धड़पकड़ की शूटिंग की। देवरिया में नौ साल के बच्चे की तंत्र मंत्र के चक्कर में हत्या कर बगीचे में दफन किया गया इस मामले में पुलिस कांस्टेबल सहित तीन हुए गिरफ्तार। पति के साथ झगड़े के बाद पत्नी ने बुलाई पुलिस तो पति तीन मंजिले से कूद गया। पुलिस के हाथ पांव फूले। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने पैर पकड़ कर मांगी माफी
बुलंदशहर हिंसा में बीजेपी विधायक सहित 38 लोगों को दोषी ठहराया गया। इंस्पेक्टर की हत्या कर चौकी फूंक दी गई थी। मुकदमा रामवीर पर सजा राजवीर को। मैनपुरी में दरोगा ने पैर पकड़कर मांगी माफी क्यों कि 17 साल बाद बेगुनाह छुटे थे राजवीर। यह है यूपी की पुलिस। बेकसूरों को भेजती है जेल और यूपी के योगी आदित्यनाथ सरकार कहतीं है अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.
भाजपा सरकार देश भर में शिक्षा का भगवाकरण करते हुए सरकारी स्कूलों को क्यों बंद कर रही है? इसके पीछे का राज साफ है। भले ही देश की उन्नति खत्म हो जाय। लेकिन सवाल नही पूछना चाहिए।
मुंबई: शिक्षा ही परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के द्वार खोलती है। जो देश जितना ही शिक्षित है उतना ही संपन्न और खुशहाल है। शिक्षा ही विकास का मूल है। अशिक्षित समाज भीड़ बन जाता है जिसका धर्म अराजकता अंधविश्वास होता है। अनियंत्रित भीड़ विनाश का कारण बनती है। किसी ने बिल्कुल ठीक ही कहा है, देश की बर्बादी के लिए हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं।
देश में शिक्षा का भगवाकरण
विपक्ष बीजेपी सत्ता पर आरोप लगाता है कि देश में सरकार शिक्षा का भगवाकरण कर रही है जिसमें सामाजिक आर्थिक मुद्दे गायब कर दिए जा रहे। इसका प्रमाण हैं कि राजस्थान में स्कूली किताबों से महात्मा गांधी के परिवार को हटाया जा रहा है।
शिक्षा और परीक्षा का सौदा
सुप्रसिद्ध आई ए एस कोचिंग के शिक्षक विकास दिव्यकृति का कथन है, कि सत्ता में जब अनपढ़ लोग बढ़ जाते हैं तो शिक्षा और परीक्षा बिकने लगती है। देश की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर तीस से चालीस लाख में बेचे गए धनवानों को ताकि गरीब प्रतियोगी परीक्षा से बाहर चले जाएं और सरकार परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलकर डकार जाती है और जब छात्र पुनः परीक्षा की मांग करते है तो गुलाम पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसवाई जाती हैं।
उन्होंने यह भी कहा, कि शिक्षा का प्राइवेटीकरण करके माफियाओं को सौंपी जा रही जो मनमानी फीस और अन्य वस्तुएं छात्रों को बेचकर दौलत कमा रहे। आज स्कूल कॉलेज खोलना सबसे बड़ा व्यापार माना जाता है। सरकार खुद गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर रखने के लिए शिक्षा पर 18% जीएसटी लगाकर शिक्षा को महंगी कर चुकी है। सरकार ने 350 ऐसे लोगों को ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष बनाए जो पद आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को ही मिलते हैं लेकिन बिना आईएएस परीक्षा पास किए विशिष्ट विचारधारा के लोगों को आईएएस पोस्ट पर बिठा दिया गया।
विश्वविद्यालयों पर भगवा कब्जा
इतना ही नहीं आरएसएस की विचारधारा के लोगों को विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर और प्रोफेसर नियुक्त कर शिक्षा का भगवाकरण कर दिया है। ऐसे लोग यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठकर गैर विचारधारा वाले लोगों को पीएचडी में प्रवेश देने से मना कर दिया, लेकिन आंदोलन के कारण प्रवेश देने को मजबूर हो गए। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया बी एच यू या काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रोफेसर के रूप में एक सुयोग्य मुस्लिम को नियुक्त किया गया तो बीजेपी से संलग्न छात्र संघ के विरोध के कारण उन्हें हटा दिया गया या हटने को मजबूर कर दिया गया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति पढ़ाने की योजना प्रबल विरोध के चलते पीछे हटने को बाध्य कर दिया। जिससे वी सी जो घोषणा करनी पड़ी कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति नहीं पढ़ाई जाएगी। यह बहुत बड़ा प्रमाण है शिक्षा के भगवाकरण का। BJP governments saffronising and destroying education
शिक्षा के भगवाकरण के कारण ही उच्च पदों पर विशेषधारा के बैठे लोग जाति को लेकर भेदभाव किया जाता है जिस कारण बंगलुरु यूनिवर्सिटी में दस दलित प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किए जाने से सभी दलितों ने इस्तीफा दे दिया। जब शिक्षित लोग भी जाति के कारण अपमानित किए जा रहे हों, अर्थात शिक्षा क्षेत्र में जाति का बोलबाला हो जाए तो सिस्टम हिलाना जरूरी हो जाता है। दस दलित प्रोफेसरों का इस्तीफा देने की बाध्यता शिक्षा के भगवाकरण की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। जिसका अर्थ है शिक्षा पाने आने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
धर्म की राजनीति
हमारे देश में जितना संघर्ष धार्मिक स्थलों के लिए किया जा रहा है उतना ही संघर्ष यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता तो देश की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाती। बीजेपी सरकार धर्म की राजनीति के द्वारा वोट बैंक बनाने में लगी है देश समाज से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी आरएसएस और उसके एजेंट धूर्त, अज्ञानी और ढोंगी बाबा जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर धन और शरीर शोषण करते हैं। आशा राम और रामरहीम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।
सरकार जानती है कि देश में जितने अधिक अशिक्षित रहेंगे उनसे कांवड़ उठवाना, मस्जिद के सामने नाचना, गालीया देना, सोशल मीडिया में गालियां लिखने के लिए मानसिक गुलाम बनाना और पांच किलो मुफ्त अनाज और चंद सिक्के भीख में देकर वोट पाना सरल हो जाता है। BJP governments saffronising and destroying education
जबकि शिक्षित जो स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों से शिक्षा ज्ञान पाकर निकलते हैं वे संविधान पढ़ते हैं। अपने मौलिक अधिकार जानते हैं। सरकार के दायित्व क्या-क्या है की जानकारी रखते हैं। वे सत्ता से सवाल पूछने लगते हैं। सरकार की असफलता तानाशाही नफरती राजनीति जानते हैं। अपने अधिकार मांगने के लिए आंदोलन करते हैं। इसलिए “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” सीधे-सीधे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। क्योंकि स्कूल कॉलेज बंद किए जाने से मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं। उन्हें धर्म के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काना सरल होता है।
मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार
तेलंगाना जो भारत का छोटा सा नवनिर्मित राज्य हैं वहां की सरकार शिक्षा का महत्व समझती है इसलिए सिर्फ एक छात्रा के लिए ही स्कूल खोला जाता है। इसके विपरीत हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। जबकि संविधान में चौदह साल के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद करने में लगी हैं।
एक तरफ गैर बीजेपी सरकार की सोच कि एक बच्ची के लिए नियमित स्कूल खोला और पढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर 334 शिक्षकों की भर्ती आरम्भ कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्यों में पिछले दस वर्षों में लगभग नब्बे हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। मध्यप्रदेश में 29000 और उत्तर प्रदेश में 25000 स्कूल बंद किए जा चुके हैं।
राम कृष्ण का प्रदेश है उत्तर प्रदेश जहां पहले 50 छात्रों से कम होने पर स्कूल बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज करने की बात कही गई है उसका दायरा बढ़ाकर अब 70 छात्र होने पर भी सरकारी स्कूल बंद कर मर्ज किए जाने की मंशा है। यहां सवाल उठता है पांच मिल दूर तक स्कूल में लड़कियां कैसे जाएंगी? उनके अलावा गरीब लड़के भी शिक्षा बंद कर देंगे। योगी सरकार ने स्कूल बंद करने और 27308 नई मधुशाला खोलने का निर्णय किया है।
दूसरी तरफ हरियाणा सरकार का अनोखा आदेश है, कि जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे उन्हें 500 रुपए महीने फीस देनी होगी लेकिन जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाएंगे उन्हें 1100 रुपए महीने दिए जाएंगे। जिसका अर्थ है सभी सरकारी स्कूल बंद करना। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना। सब मिलाकर बीजेपी सरकारें गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। ताकि पांच किलो मुफ्त अनाज देकर वोट लिया जा सके साथ ही कांवड़ उठाने वाले की संख्या में 21% वृद्धि की संभावना है। जितने लोग कांवड़ उठाएंगे उनपर सरकार फूल बरसाकर तृप्त करेगी। प्रोत्साहित करेगी ताकि मानसिक गुलाम बने रहकर बीजेपी को वोट देते रहें।
मुफ्त शिक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला
दुखद प्रसंग यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जज ने 51 गरीब छात्रों की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। यहां सवाल उठता है कि माननीय जज को छात्रों की नहीं सरकार की चिंता अधिक है। क्या कोर्ट सरकार से सवाल नहीं कर सकती थी? कि सब कुछ मुफ्त देने के बावजूद क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्र पढ़ना ही नहीं चाहते? सरकार पता करे और गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करे।
नेशनल डेस्क उत्तर प्रदेश के ललितपुर के शहजाद बांध के पास भराव क्षेत्र में बोरी में बंद मिली थी मृतक महिला। अवैध संबंध के शक में उसी के प्रेमी ने हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कोल्ड्रिंक मे कीटनाशक दवा मिला कर पिला दिया था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने यूट्यूब और गूगल से हत्या के तरीके सीखकर हत्या को अंजाम दिया। हत्या का कारण पुलिस ने बताया कि मृतक महिला आरोपी के साथ अवैध संबंध मे रहते एक और युवक के साथ नजदीकी चला रही थी। जिसके साथ उसका इंस्ट्राग्राम के जरिए दोस्ती हो गई थी। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram
मृतका के परिजनों के मुताबिक रानी जून 2024 में जगदीश निवासी ग्राम करमई के साथ प्रेम-प्रसंग में चली गई थी। पुलिस की टीमों ने शुक्रवार को जगदीश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में जगदीश ने बताया कि उसके गांव करमई का रहने वाला नरेंद्र रैकवार की पत्नी रानी से उसका प्रेम प्रसंग था और वह एक साल से दोनों साथ में रह रहे थे।
कुछ समय पूर्व उसकी भी शादी कहीं और तय हुई तो उसमें और रानी में मन-मुटाव रहने लगा। इसी बीच रानी इंस्टाग्राम के माध्यम से दोस्त बने एक युवक के साथ रहने को चली गई थी। 6 जुलाई 2025 को रानी उसके पास कोतवाली सदर अंतर्गत शहर के मोहल्ला नईबस्ती में किराए के मकान में वापस आ कर रहने लगी थी। लेकिन उन दोनों के बीच विवाद होता रहता था। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram
इस पर उसने रानी की हत्या करने का षड्यंत्र रचा। इसके लिए उसने यूट्यूब वीडियो और गूगल से हत्या करने और पुलिस से बचने के तरीके सीखा। इसके बाद वह कीटनाशक दवा बाजार से खरीदकर लाया और 7 जुलाई 2025 को उसने कोल्डड्रिंक में कीटनाशक दवा मिलाकर रानी को पिला दिया। जिससे रानी की मौत हो गई।
रात के समय उसने रानी के शव के हाथ और पैर बांधकर एक बोरी में रखा और शव को बाइक पर रखकर ग्राम चीरा के पास शहजाद नदी में फेंक आया था। पुलिस ने आरोपी के पास से एक बाइक और कीटनाशक दवा की शीशी बरामद की है। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram
पुलिस से बचने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल
आरोपी जगदीश ने बताया कि रानी को मार डालने और शव को ठिकाने लगाने के बाद पुलिस से बचने के लिए उसने 8 जुलाई को रानी के फोन से रानी और उसके इंस्टाग्राम दोस्त की रील इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दी थी। जिससे ऐसा प्रतीत हो कि रानी अपने इंस्टाग्राम दोस्त के साथ है और रानी की पहचान हो जाए तो पुलिस को लगे कि रानी की हत्या यशवंत ने ही की है। रानी के शव को ठिकाने लगाने के बाद वह ग्राम करमई अपने गांव में आकर रहने लगा था। लेकिन उसके षड्यंत्र का पर्दाफाश हो गया।
दो बच्चों और पति को छोड़कर बनाया अवैध संबंध
मृतक का पति नरेंद्र जगदीश का ही दोस्त था। इस वजह से जगदीश का नरेंद्र के घर आना जाना था। इस बीच नरेंद्र की पत्नी रानी और जगदीश के बीच प्रेम-प्रसंग हो गया। जिसकी जानकारी नरेंद्र को होने पर वह रानी से झगड़ा करने लगा। जिसके बाद जून 2024 में रानी अपने पति और दो बच्चों को छोड़कर अपने प्रेमी जगदीश के पास चली गई थी और उसके साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी थी। लेकिन एक साल बाद ही रानी के प्रेमी जगदीश ने उसे धोखे से कीटनाशक दवा पिलाकर हत्या कर दी।
कैसे हुई मृतक की पहचान?
जब बांध के भराव क्षेत्र में महिला का सड़ा गला बोरी में बंद शव मिला तो उसके हाथ पर आर जगदीश नाम गुदा था। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। तब ग्राम करमई निवासी एक परिवार ने हाथ पर गुदे नाम के चलते शव की पहचान नरेंद्र की पत्नी रानी रैकवार के रूप में करने का दावा किया था। पहचान के दावे को पुख्ता करने के लिए रानी के पिता लल्लू रैकवार निवासी ग्राम कारीकंचनपुरा टीकमगढ़ मध्य प्रदेश जोकि दिल्ली में था उन्हें को बुलाया गया। लल्लू रैकवार ने भी शव की पहचान रानी के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने जगदीश को गिरफ्तार कर घटना के रहस्य से पर्दा फाश किया। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram
पूर्व कमांडो प्रवीण कुमार तेवतिया उन कुछ गैर-राजनीतिक आवाजों में से एक हैं जो महाराष्ट्र की राजनीति के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सामने आए हैं।
मुंबई: 26/11 के आतंकवाद के खिलाफ अभियान में शामिल एक पूर्व कमांडो ने मराठी भाषा विवाद को लेकर ठाकरे परिवार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया, कि 2008 में जब मुंबई में आतंकवाद हमला हुआ था, तब राज ठाकरे के समर्थक छिपे हुए थे। उस वक्त आतंकवाद से लड़ने वाले वीर योद्धा कहीं और के नहीं बल्कि यूपी बिहार के सैन्यकर्मी थे।
प्रवीण कुमार तेवतिया उन कुछ गैर-राजनीतिक आवाजों में से एक हैं जो महाराष्ट्र की राजनीति के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सामने आकर सवाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, भाषा विवाद को लेकर राजनीति करना अच्छी बात नही है। इसके अलावा भी राज्य और देश के हितों पर विचार किया जाना चाहिए।
मरीन कमांडो फ़ोर्स (MCF), जिसे संक्षेप में MARCOS कहा जाता है, भारतीय नौसेना का एक विशेष बल है। भारतीय नौसेना के पूर्व कमांडो प्रवीण कुमार तेवतिया उन 26/11 आतंकवादी हमले में आतंकवादीयों की गोलियों के बीच सामना करने वाले एक बहादुर सैनिक है।
मैने महाराष्ट्र के लिए खून बहाया
’26/11 ब्रेवहार्ट: माई एनकाउंटर विद टेररिस्ट्स दैट नाइट’ नामक पुस्तक के लेखक श्री तेवतिया ने कहा, “मैंने 26/11 को मुंबई हमले के दौरान उस वक्त आतंकवादियों का सामना किया था जब हमलावर लोगों को गोलियों से छन्नी कर रहे थे। मैं महाराष्ट्र के लिए खून बहाता हूं और उत्तर प्रदेश से हूं। मैंने ताज होटल को बचाया। राज ठाकरे के तथाकथित योद्धा उस वक्त कहां थे? देश को मत बांटो। मुस्कुराहट के लिए किसी भाषा की जरूरत नहीं होती।”
कहां थे राज और उद्धव?
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने अपने दावों को फिर से एक बार दोहराया और कहा कि 26/11 के दौरान आतंकवादियों से लड़ने वाले राज और उद्धव ठाकरे नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के सैन्यकर्मी थे।
उन्होंने कहा, “वह (राज ठाकरे) खुद, उद्धव ठाकरे और उनका परिवार भी उस वक्त उनसे नहीं मिल पाया। जिन लोगों ने दूसरों को बचाया था, जैसे कि सेना के जवान, वे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार से थे। मैं वहां था, मैंने स्थिति को संभाला और आतंकवादियों का सामना किया। मैं भी उत्तर प्रदेश से हूं और (पूर्व प्रधानमंत्री) चौधरी चरण सिंह के गांव से आता हूं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह मराठी विरोधी नहीं हैं और कहा कि भाषा को लेकर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मराठी और मराठा योद्धाओं पर गर्व
उन्होंने कहा, “मुझे मराठी और मराठा योद्धाओं पर गर्व है। ऐसे हारे हुए लोगों को हमें बांटने की इजाजत न दें। भाषा को राजनीति का हिस्सा नहीं होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि बेरोजगारी, गरीबी, विकास, उत्पादन, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बलात्कार, लंबित अदालती मामले और आतंकवाद हमारे लिए बड़े मुद्दे हैं जिन पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
ठाकरे परिवार मराठी विवाद में सबसे आगे रहा है, जिसे राज्य सरकार की स्कूलों के लिए तीन-भाषा शिक्षा नीति ने फिर से हवा दे दी है। ठाकरे परिवार की आलोचना के बाद शिक्षा नीति को वापस ले लिया गया, जिसके बाद एक बड़े सार्वजनिक मिलन समारोह में दोनों नेताओं ने राज्य के मूल मराठी भाषियों पर हिंदी थोपने के लिए भाजपा सरकार की आलोचना की।
गैर मराठी भाषियों पर हमला
दोनों चचेरे भाइयों में से छोटे राज ठाकरे को भाषा विवाद पर कट्टरपंथी रुख अपनाने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके समर्थक मुंबई में गैर-मराठी भाषियों पर हमला और धमकियाँ देते देखे गए हैं। “गुंडागिरी” के आरोपों से घिरे राज ठाकरे का समर्थन उनके चचेरे भाई उद्धव ने किया है, जिन्होंने कहा है कि मराठी लोगों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ते हुए गुंडा बनना बेहतर है।