अपनादल के विधायक विनय कुमार वर्मा स्वर्णकार समाज की लुटिया डूबा रहे है और समाज के कथित ठेकेदार वर्मा की जय जय कार कर रहे है।
वी बी माणिक लखनऊ- उत्तरप्रदेश के शोहरतगढ़ से अपनादल अनुप्रिया पटेल गुट के विधायक विनय कुमार वर्मा ने अपने स्वर्णकार समाज के कई लोगो से चुनाव लड़ने के नाम पर उधारी के तौर पर लिए गए करोड़ो रूपये का घपला कर दिया है। जिन-जिन लोगो ने पैसा दिया है, वह अपना पैसा मांगते है, तो वर्मा धमकी देकर सीधा कहता है, “मैं पैसा नही दूंगा। जो करते बने कर लो।”
इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान अपनादल के वर्मा ने जिससे अपने लिए चार बॉडी गार्ड लिया था। उसका भी लाखों रुपये डकार गया है। उन सभी चारो बॉडी गार्डो का भी पैसा नही दिया है। कुल 4 महीना इक्कीस दिन तक बॉडीगार्डों ने चौबीसों घंटे अपनादल के वर्मा की सुरक्षा में तैनात थे। सभी बॉडीगार्ड अपने मालिक से पैसे के लिए झगड़ा कर रहे है। मालिक ने समाज के ठेकेदारों से इसकी शिकायत किया, कि ऐसे समाज के नेता जो गरीबो का ही खून पीकर विधायक बने है।
अब सुरक्षा गार्ड कंपनी का मालिक दर-दर भटक कर समाज के ठेकेदारों के सामने गुहार लगा रहा है। ऐसे विधायक को चुल्लूभर पानी मे डूब मरना चाहिए। विनय कुमार वर्मा स्वर्णकार समाज की लुटिया डूबा रहे है और समाज के कथित ठेकेदार वर्मा की जय जय कार कर रहे है।
क्या ऐसे लोग समाज के लिए योग्य है? क्या समाज ऐसे लोगो का सामाजिक बहिष्कार करेगा? या ऐसे विधायको का सत्कार करेगा और अवैध कारोबार को बढ़ावा देगा? इस पर समाज को विचार करना है। समाज के अंदर काफी तोश व्याप्त है। लोग अपनादल के विधायक के नाम से डर रहे है। क्या अनुप्रिया पटेल इस विधायक पर कार्रवाई करेंगी या ऐसे विधायको का सत्कार करेंगी? जो लूटपाट, बेईमानी, ठगी में माहिर हो खबर लिखने के बाद क्या कार्रवाई होगी? ये नागरिकों और समाज को जानकारी मिलनी चाहिए सुर सभी गरीबो का पैसा वापस मिलना चाहिए।
गैंगरेप की घटना ने फिर एक बार रिश्तो को तार-तार कर दिया है। शराब और डेढ़ हजार के लिए पति ने पत्नी को किया दोस्तों के हवाले..
डिजिटल डेस्क (Indian fasttrack News Network) उत्तर प्रदेश- रिश्तो को तार-तार करता एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। एक युवक ने शराब और डेढ़ हजार रुपए के लिए अपनी पत्नी को दोस्तों के हवाले कर दिया। इसके बाद उसके तीन दोस्त ने महिला के साथ गैंगरेप किया। पीड़िता ने अपने पति और उसके तीन दोस्तों के खिलाफ गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराया है।
देश में एक बार फिर गैंगरेप की घटना..
पति-पत्नी के रिश्ते को तार-तार कर देने वाला मामला संभल जिले का है। नखासा पुलिस थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला का आरोप है कि 1 जून को देर रात उसका पति शराब के नशे में घर पहुंचा। पति ने कहा, कि उसके साथियों ने उसे शराब पिलाई है और एक हजार पांच सौ रुपए भी दिए हैं। मेरे दोस्तों को खुश कर दो।
इसके बाद आरोप है कि पति ने अपने पत्नी को तीनों दोस्तों के हवाले कर दिया। बाद में तीनों ने महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। उसके बाद तीनों आरोपी आए दिन महिला के घर पहुंच जाते हैं और महिला के साथ जबरन संबंध बनाते हैं। महिला ने पति व उसके तीनों दोस्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
इस आर्टिकल को पढ़कर आप भी घर बैठे इलेक्शन कार्ड (Election Card) में अपना फोटो, पता और बाकी जानकारियों में बदलाव कर सकेंगे। हम खास आपके लिए महत्वपूर्ण जानकारियां लेकर आए हैं।
डिजिटल डेस्क (Indian Fasttrack News Network) एक मतदाता पहचान पत्र आपके भारतीय होने और पते के प्रमाण के लिए एक आवश्यक दस्तावेज के रूप में कार्य करता है। इसलिए, भविष्य में असुविधा से बचने के लिए, आपका नाम, पता, जन्म पत्र आदि जैसी जानकारी में किसी भी गड़बड़ी को ठीक करना आवश्यक है। अगर आप भी ऑनलाइन और ऑफलाइन वोटर आईडी (Election Card) में सुधार करना चाहते हैं तो इसकी प्रक्रियाओं की जांच के लिए पढ़ना जारी रखें।
Election Card सुधार के लिए आवेदन कैसे करें
संभावित मतदाता पहचान पत्र में अपना नाम, पता और अन्य जानकारी बदलने के लिए ऑनलाइन मतदाता पहचान पत्र सुधार का विकल्प चुन सकते हैं। आवेदक का नाम, पता और जन्म तिथि बदलने के लिए प्रत्येक चरण को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। जो निम्नलिखित हैं।
Election Card पर ऑनलाइन नाम बदलने के तरीके के बारे में निम्नलिखित चरणों पर एक नज़र डालें:-
Step 1:एनवीएसपी की आधिकारिक वेबसाइट या राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल पर जाएं। अपना यूजर नेम और पासवर्ड डालकर पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करें। यदि आप मौजूदा सदस्य हैं तो लॉगिन करें। Step 2: “निर्वाचक विवरण में सुधार” चुनें और फॉर्म 8 पर क्लिक करें। Step 3: आपको दूसरे पृष्ठ पर भेज दिया जाएगा और निम्नलिखित विवरण दर्ज करें
आपका संसदीय क्षेत्र या राज्य विधानसभा।
अपना नाम, उम्र, लिंग और मतदाता सूची का भाग संख्या टाइप करें।
अपने परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी दर्ज करें, जैसे पति या पत्नी, पिता या माता।
अपना आवासीय पता लिखें।
Step 4: आवश्यक दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि अपलोड करें। Step 5: अपना गलत या गलत वर्तनी वाला नाम बदलने या संपादित करने के लिए “My Name” टैब चुनें। अपना आवासीय शहर, तिथि और संपर्क विवरण जैसे – ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करें। Step 6: सभी विवरणों को सत्यापित करें और चुनाव कार्ड को अपडेट करने के लिए सबमिट करें।
एक बार जब आपका आवेदन संसाधित और सत्यापित हो जाता है, तो आपको अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक सूचना (Massage) प्राप्त होगा। तदनुसार, इसे अपने निकटतम निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त करें।
Voter ID Card में पता बदलना..
क्या आप एक नए निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं और सोच रहे हैं कि मतदाता पहचान पत्र ( Election Card) में पता कैसे बदला जाए, तो चिंता न करें। नीचे दिए गए सरल चरणों का पालन करें:-
Step 1: एनवीएसपी पोर्टल पर लॉग इन करें। टैब “नए मतदाता के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करें/एसी से स्थानांतरित होने के कारण” का चयन करें और यदि आप वर्तमान में एक नए निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हुए हैं तो Form 6 चुनें। Step 2: यदि आप एक ही निर्वाचन क्षेत्र के भीतर एक आवासीय क्षेत्र से दूसरे में स्थानांतरित हो गए हैं तो Form 8A चुनें। Step 3: आवश्यक जानकारी जैसे नाम, निर्वाचन क्षेत्र, राज्य, जन्म तिथि आदि के साथ संबंधित फॉर्म भरें। अपना संपर्क विवरण जैसे मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि प्रदान करें। Step 4: प्रासंगिक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि अपलोड करें। संबंधित दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा करें। Step 5: घोषणा विकल्प का चयन करें। कैप्चर टाइप करें और सबमिट करें।
यहां बताया गया है कि आप NVSP पोर्टल पर पहुंचकर voter ID पर अपनी जन्मतिथि ऑनलाइन कैसे बदल सकते हैं।
Step 1: पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद, Form 8 चुनें। Step 2: अपना नाम, संसदीय क्षेत्र या राज्य या जिला विधानसभा से संबंधित जानकारी दर्ज करें। अन्य जानकारी में शामिल हैं:
एपिक या मतदाता का फोटो पहचान पत्र संख्या।
उस विकल्प का चयन करें जिसे आप अपडेट करना चाहते हैं, इस मामले में, आपकी जन्म तिथि।
अपनी सही जन्मतिथि दर्ज करें और आयु प्रमाण के लिए आधार कार्ड जैसे दस्तावेज प्रदान करें।
Step 3: घोषणा विकल्प का चयन करें और सबमिट करें।
इसके अतिरिक्त, आप वोटर पोर्टल के माध्यम से voter ID सुधार का विकल्प भी चुन सकते हैं। यह एक सरकारी पोर्टल है जहां आवेदक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं या मतदाता पहचान पत्र पर जानकारी बदल सकते हैं। इसे एक्सेस करने के लिए आपको एक अकाउंट बनाना होगा। लॉग इन करने के बाद, “voter ID में सुधार” का विकल्प चुनें। अन्य चरण ऊपर बताए गए चरणों के समान हैं।
Voter ID सुधार ऑफलाइन कैसे करें?
इंटरनेट एक्सेस के बिना आवेदक निर्वाचन कार्यालय में जाकर ऊपर उल्लिखित सभी सूचनाओं को बदल सकते हैं। Form 8, 8A या 6 के लिए पूछें। आप इसे NVSP की आधिकारिक वेबसाइट से भी डाउनलोड कर सकते हैं। आप इसे कैसे डाउनलोड कर सकते हैं, इसके चरण यहां दिए गए हैं।
NVSP पोर्टल पर जाएं। “फॉर्म” पर क्लिक करें।
राज्य चुनें”। अब “डाउनलोड” अनुभाग पर नेविगेट करें और “फ़ॉर्म” चुनें।
आवश्यक फॉर्म डाउनलोड करें – Form 6, 8, या 8A
अपना नाम, आयु, निर्वाचन क्षेत्र इत्यादि जैसे अनिवार्य क्षेत्रों को भरें। इसे सहायक दस्तावेजों के साथ संबंधित निर्वाचन कार्यालय में जमा करें। इसमें आधार कार्ड, पासपोर्ट आदि शामिल हैं।
आपको Voter ID सुधार का विकल्प क्यों और कब चाहिए?
एक मतदाता पहचान पत्र चुनाव के दौरान आपके वोट डालने की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त, जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, यह एक आवश्यक पहचान प्रमाण भी है। इसलिए, इसमें कोई भी गड़बड़ी असुविधा का कारण बन सकती है। उदाहरण के लिए, यदि आप अपने काम के लिए एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं, तो अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन मतदाता पहचान पत्र सुधार का विकल्प चुनें।
मतदाता पहचान पत्र सुधार स्थिति की जांच कैसे करें?
एक बार जब आप Voter Id सुधार के लिए आवेदन कर देते हैं, तो आपको एक संदर्भ संख्या प्राप्त होगी। वोटर आईडी सुधार के लिए अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक करने के लिए इसका इस्तेमाल करें।
Step 1: एनवीएसपी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। नीचे उल्लिखित “ट्रैक एप्लिकेशन स्थिति” पर क्लिक करें। Step 2: संदर्भ आईडी दर्ज करें और आवेदन की स्थिति देखने के लिए “ट्रैक स्थिति” चुनें।
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आवेदक 1950 पर कॉल करके भी मतदाता पहचान पत्र सुधार के लिए आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। आप दो आसान चरणों के साथ वोटर पोर्टल के माध्यम से भी स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं पंजीकृत सदस्य “Track Status” का चयन करके स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं।
आवेदन की स्थिति देखने के लिए संदर्भ संख्या दर्ज करें।
इस प्रकार, यह सब वोटर आईडी सुधार के बारे में है। फॉर्म जमा करने से पहले सभी विवरणों को सत्यापित करना सुनिश्चित करें। इसके अतिरिक्त, एक सुगम आवेदन प्रक्रिया के लिए दस्तावेजों को संभाल कर रखें।
देश में महिला की सुरक्षा को लेकर लगातार लोगों में खौफ का माहौल बढ़ता जा रहा है। इस पर केंद्र सरकार को अंकुश लगाने की जरूरत है। India
वी बी माणिक मुंबई- आजकल अधिकांश राज्यो में महिलाओं लडकियो पर बलात्कार दुराचार की घटनाओं में दिन पर दिन बाढ़ सी आ गयी है। जिस पर राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे है। राजस्थान, छतीसगढ़ मणिपुर, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यो में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। (India)
मणिपुर की घटना.. India
राज्य सरकारें क्या कर रही है? महिलाओं को बलात्कार कर उनको जिंदा जला दिया जा रहा है। देश में इतना बड़ा पाप हो रहा। लेकिन इस पर राजनीतिक दलों के लोग अपनी रोटिया सेक रहे है। पिछले 80 दिनों से मणिपुर जल रहा है। मणिपुर के मुख्यमंन्त्री कान में तेल डालकर कुम्भकर्ण की नींद सो रहा है। उनको पता ही नही चल रहा है कि राज्य में क्या हो रहा है। ये बड़े शर्म का विषय है।
Indian fasttrack newsमहिला सुरक्षा पर प्रतिकारात्मक तस्वीर
राजस्थान की घटना..
दूसरी ओर राजस्थान में रात में जिंदा एक 6 महीने की बच्ची को जला दिया गया। जिस पर मुख्यमंन्त्री गहलोत ने एक शब्द नही बोला। अब अपराधी ही नेता बने है। इस पर चुनाव आगोग को कड़ा नियम लागू करना चाहिए कि जिस नेता पर एक भी छोटा केस हो तो उसको चुनाव लड़ने का अधिकार समाप्त कर देना चाहिए। लोक सभा और कुछ राज्यो के विधानसभा चुनाव करीब है। क्या अपराध की घटनाओं को बढ़ाकर चुनाव का पूर्वाभ्यास किया जा रहा है? India
अब निर्दोष नागरिकों, महिलाओ की हत्या, बलात्कार, लूट, चोरी, डकैती, राहजनी और अन्य घटनाओ की बाढ़ लाकर नेता अपनी ताकत बता रहे है। प्रधानमंत्री को आज वीडियो दिखाई पड़ा अभी तक मणिपुर की घटना की जानकारी नही थी। ये कबतक चलेगा पुलिस कब सुधरेगी नेताओ की चमचागिरी पुलिस कब बन्द करेगी। आजकल महाराष्ट्र में पुलिस की हफ्ता उगाही जोरो पर चल रही है। क्योंकि इनके आका सत्ता में और विपक्ष में बैठे है। इन पुलिस वालों का कोई कुछ नही कर सकता। India
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अब तो पुलिस स्टेशनों में महिलाओं की शिकायत तक नही ली जाती है। ये छोड़िये आम नागरिकों की शिकायत नही ली जाती है। पुलिस की मानसिकता दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। केवल अपने आकाओं के आगे पीछे मंडराते रहते है। अगर पुलिस के विरुद्ध किसी ने खबर लगा दिया। तो पुलिस हनुमान जी बनकर पत्रकार के पीछे लग जाती है। ये अपने देश का दुर्भाग्य है। दिल्ली में जब निर्भया कांड हुआ था। तो महिलाओ के लिए लोकसभा में कई कानून का इम्पलीमेंट (IMPLEMENT) किया गया था। पर उसपर आजतक अमल नही किया गया। कब होगी बहन बेटियों माताओ की सुरक्षा ये जबाब जनता पूछ रही है। India
मुंबई पुलिस को फोन कर पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर के अपने देश नहीं लौटने पर 26/11 जैसे आतंकी मुंबई हमले की चेतावनी एक अज्ञात व्यक्ति ने दी है। पुलिस धमकी की जांच कर रही है।
इस्माईल शेख मुंबई- ताज़ा ख़बर के मुताबिक, एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया, कि ‘एक अज्ञात व्यक्ति ने मुंबई पुलिस के ट्रैफिक कंट्रोल रूम को फोन किया और पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर के अपने देश नहीं लौटने पर 26 जैसे आतंकवादी मुंबई हमले की चेतावनी दी है।’
पुलिस अधिकारी ने कहा, 12 जुलाई को फोन आया था। फोन करने वाले ने उर्दू में बात करते हुए कहा, कि “26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए हमले की तरह एक आतंकवादी हमला होगा और इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार जिम्मेदार होगी।”
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया, कि मुंबई पुलिस धमकी भरे कॉल की जांच कर रही है और मुंबई क्राईम ब्रांच की एक टीम को भी इस जांच में शामिल किया गया है। अधिकारी ने कहा कि कॉल एक ऐप के जरिए की गई थी और पुलिस कॉल करने वाले के आईपी पते को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है।
Indian fasttrack newsपाकिस्तानी महिला सीमा हैदर और हिंदुस्तानी सचिन की फाइल तस्वीर
मुंबई हमले की चेतावनी..
आप को बता दें, कि पाकिस्तानी नागरिक सीमा हैदर हाल ही में ग्रेटर नोएडा निवासी अपने प्रेमी सचिन मीना से शादी करने के लिए अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई है। ऑनलाइन गेम पबजी खेलने के दौरान दोनों की दोस्ती हुई थी।
लगभग 30 वर्षीय पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर और 25 वर्षीय भारतीय साथी सचिन को पिछले दिनों भारत में अवैध रूप से रहने के सिलसिले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन पिछले सप्ताह ही उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा की एक अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।
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4 जुलाई को, सचिन और सीमा दोनों ने मीडिया और पुलिस के सामने एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार का इज़हार किया और सरकार से उन्हें शादी करने और भारत में एक साथ रहने की अनुमति देने का आग्रह किया है।
और अधिक जानकारी देते हुए आप को बता दें, कि मुंबई पुलिस को पिछले साल शहर में 26/11 जैसे हमले की चेतावनी वाले टेक्स्ट मेसेज भी मिले थे। मुंबई पुलिस की ट्रैफिक विभाग को उसके हेल्पलाइन नंबर पर कई टेक्स्ट मेसेज मिले, जिसमें धमकी दी गई थी कि शहर में छह लोगों द्वारा “26/11 जैसा” हमला किया जाएगा और उसमें यह भी लिखा था, कि महानगर को “उड़ाने की तैयारी” की जा रही है।
Monsoon in Mumbai पूरे देश को मौसम ने उलटफेर कर रख दिया है। उत्तर भारत में लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं तो वहीं पूर्वोत्तर में बाढ़ आ गई है। जबकि मुंबई के लोगों के इंतजार पर ब्रेक लग गया है। शनिवार सुबह मानसून ने दस्तक दे दी है।
इस्माईल शेख मुंबई- देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में लोगों की आज की सुबह काफी खुशनुमा रही। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद मानसून ने मुंबई में दस्तक दे दी है। इससे पहले, मौसम विभाग ने 24 जून के आसपास मुंबई और कोकन के कई इलाकों में मानसून पहुंचने की भविष्यवाणी की थी। मौसम विभाग द्वारा यलो अलर्ट जारी किया गया है। (Mumbai Happy Monsoon)
Indian fasttrack newsमुंबई में मानसून की ताजा तस्वीर
Mumbai Monsoon: दो दिन का अलर्ट
पूरे देश को मौसम ने उलटफेर कर रख दिया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कोई बारिश के इंतजार में है तो कोई बारिश के बंद होने के इंतजार में है। उत्तर भारत में लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं तो वहीं पूर्वोत्तर में बाढ़ आ गई है। जबकि मुंबई के लोगों के इंतजार पर ब्रेक लग चुका है। मुंबई में मानसून पहुंच गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मुंबई में दो दिन का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही, 26-27 जून को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का संकेत दिया है। (Mumbai Happy Monsoon)
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कितनी मि.मी. हुई बारिश?
मुंबई में मानसून के पहुंचते ही झमाझम बारिश हुई। आईएमडी के अनुसार, सोमवार को मुंबई में 64.5 मिमी से 115.5 मिमी बारिश हुई है और मंगलवार को 54.5 मिमी से 94.5 मिमी बारिश होने का अनुमान जताया जा रहा है। शहर में पिछले 24 घंटों में 10.5 मिमी बारिश अब तक हो चुकी है। आईएमडी ने दोनों दिनों में बिजली के साथ आंधी और तूफान की भी भविष्यवाणी की है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और भारी बारिश के दौरान घर से बाहर निकलने से बचने को कहा है। (Mumbai Happy Monsoon)
कुकी, नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति होगी अत्यंत भयंकर।
गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के सांसद, मंत्री चुप।
आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- मणिपुर की हिंसा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथ पांव फूला देने के लिए काफी है। पीएम नरेंद्र मोदी मणिपुर जलता छोड़ विदेश चले गए। जो उन्हें देश की नहीं अपनी छवि बनाने की चिंता है। लेकिन छवि बनाते-बनाते कब मटिया मेट हो गई पता नहीं चला। दरअसल झूठ की भी हद होती है। महिला पहलवान अब उनकी और देश की बेटियां नहीं रही। वे अपने बाहुबली आरोपी सांसद को बचाने में लगे रहे इसी बीच विदेशों में भी उनकी छवि धूमिल हो गई।
ये राहुल गांधी हैं कि अमेरिका में जाकर मोदी की यात्रा के पहले सारा गुड गोबर कर दिए। बीजेपी की ऐसी तैसी कर दी। दूसरी तरफ गुजरात लॉबी द्वारा महिला पहलवानों की उपेक्षा से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और माफियाओं बलात्कारियों को मटियामेट करने का एलान करने वाले यूपी से सीएम योगी आदित्यनाथ की पेशानी पर बल पड़ गए हैं। उन्हे लगता है गुजरात लॉबी बीजेपी का सत्यानाश कर देगी।
बाहुबली को पीएम, गृहमंत्री द्वारा दिल्ली पुलिस द्वारा नाबालिग पहलवान के यौनशोषण मामले में क्लीन चिट देकर पॉक्सो कानून से हटाने का असर देश की आधी आबादी यानी महिलाओं पर पड़ेगा। यदि उन्होंने बीजेपी को वोट नहीं दिया तो बीजेपी को खत्म होने से कोई रोक नहीं पाएगा।
मणिपुर हिंसा बीजेपी की ही बोई गई है। मैती समुदाय को आरक्षण देने का वादा गुजरात लॉबी का था। तो मणिपुर हिंसा आगजनी का श्रेय भी इन्ही के माथे जाएगा। गृहमंत्री अमित शाह मणिपुर दौरा कर चुके हैं। लेकिन हासिल कुछ नहीं हुआ। बीजेपी मंत्री एवं बीजेपी सचिव के घर की आगजनी बीजेपी के वादे से मुकरने का नतीजा है। आरक्षण का पेच कुछ इस तरह फंस गया है, कि अमित शाह के सम्मुख एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। अगर बीजेपी मैती समुदाय को आरक्षण देती है तो यह कुकी, नगा और अन्य आदिवासियों के लिए निर्धारित कोटे में से दिया जाएगा जिसे ये अपने हक पर डाका डालना समझेंगे।
मणिपुर घटना में अमित शाह लाचार।
अभी तो मैती समुदाय आक्रामक भूमिका में है। कल कुकी नगा और आदिवासी उतर गए तो स्थिति अत्यंत भयंकर होगी। गृहयुद्ध भीषण रूप से फैलेगा। अमित शाह को शायद इसी बात की चिंता हो। उनकी समझ में नहीं आ रहा, कि करें तो क्या करें? मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। जिसमे खुद अब बीजेपी के घर भी जद में आ गए हैं। अमित शाह के बूते का नहीं रहा मणिपुर। पीएम तो विदेश यात्रा के द्वारा अपनी नष्ट हो चुकी छवि को सुधारने में लगे हैं।
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आरएसएस के सामने अब नही तो कभी नहीं की विकट स्थिति।
आश्चर्य नहीं होगा कि आज गुजरात लॉबी की तानाशाही के भय से बीजेपी के जो सांसद, मंत्री चुप हैं। मूक दर्शक बने हुए हैं कल सारे के सारे गुजरात लॉबी के विरुद्ध उठ खड़े हों। आसार तो यही नजर आते है, कि बीजेपी आत्मघात के रास्ते पर बहुत आगे निकल गई है जहां से लौटना असंभव है। आरएसएस के सामने अब नहीं तो कभी नहीं की विकट स्थिति आ खड़ी हुई है। देखना मजेदार होगा कि क्या आरएसएस गुजरात लॉबी को बीजेपी से अलग-थलग करेगी या बीजेपी को नष्ट होने देती है।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- केंद्र की बीजेपी सरकार में पीएम मोदी की कृपा पाने के लिए मंत्री तक हमेशा मोदी के बचाव में अनर्गल प्रलाप करते देखे सुने जाते हैं। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी एक ऐसे व्यक्तित्व हैं। जिन पर कभी कोई लांछन नहीं लगा। सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते हैं। इसी कारण वे यदा-कदा अपनी ही सरकार की नीतियों का प्रेस के सामने मुखर विरोध करते हैं। तभी उनके पास भारी और खास मंत्रालयों की भरमार है। उनका कद छोटा करने के लिए उनसे अन्य मंत्रालय छीन लिए गए लेकिन परिवहन मंत्रालय का भारी भरकम मंत्रालय आज भी उनके हाथ में है।
अन्य मंत्रालय छीन लिए जाने का कारण है। उनकी साफ गोई का स्वभाव। वे अपनी ही सरकार के प्रबल आलोचक हैं। जिस कारण गुजरात लॉबी को वे फूटी आंखों में सुझाते हैं। अगर बस चलता तो कभी का उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया होता। केंद्र सरकार में एकमात्र मंत्री नितिन गडकरी हैं। जो कार्य करने में नंबर वन बन कर आज भी स्थिर हैं। पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पहले थोड़ा मनमौजी स्वभाव के थे। लेकिन मंत्रालय में जगह नहीं मिलने से अब बेवजह प्रेस के सामने आकर बेवजह विलाप करते हुए विपक्षियों पर आरोप मढ़ते रहते हैं। उन्हे याद रखना होगा कि कितनी भी चाटुकारिता कर लें मंत्री पद नही मिलेगी।
indian fasttrack newsभाजपा परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की फाइल तस्वीर
नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है।
गडकरी महाराष्ट्र के निर्विवाद सबसे बड़े नेता हैं। पक्ष-विपक्ष का कोई भी नेता इनसे किसी भी समय मिल सकता है। वे दूसरे नेताओं को आगे बढ़ाते रहते हैं। इसी कारण वे जहां जनता के लाडले हैं वहीं नेताओं द्वारा समापुजित भी हैं। जब मोदी और शाह आरोपी बाहुबली से भयभीत हैं जो मुश्किल से चार या पांच सीटों पर प्रभाव रखता है तो नितिन गडकरी का प्रभाव पूरे महाराष्ट्र में है। महाराष्ट्र के सभी नेता इनकी प्रशंसा करते हैं। जिसके उलट फड़नवीस विदेशी शिक्षा लेकर एलिट बने हुए हैं। उनसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है। सभी से तो मिलते भी नहीं। उनकी शिवसेना पार्टी को तोड़ने में बड़ा हाथ रहा। केंद्र की नजदीकियां इन पर भारी पड़ी।
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सादगी के लिए विख्यात गडकरी सच बोलते है।
शाह नहीं चाहते कि महाराष्ट्र या किसी राज्य में कोई नेता ऐसा हो पाए जो उनकी पीएम पद की राह में रोड़ा बनें। मोदी के बाद अमित शाह खुद को नंबर दो बनाने पर लगे हुए हैं। यूपी के सीएम योगी की राह में कांटे उनके बिछाए हुए हैं। लेकिन योगी आज भी मोदी के लिए चैलेंज बने हुए है। लगभग बीस लोकसभा सीटों पर उनकी मजबूत पकड़ है। इसलिए अमित शाह उन्हे अपने जाल में कैद नहीं कर पाए हैं। इन सबसे अलग नितिन गडकरी सुयोग्य शासक बनने के गुणों से भरपुर हैं। भाजपा में यदि पीएम पोस्ट के लिए कोई योग्य व्यक्ति है तो नितिन गडकरी हैं। इसीलिए अमित शाह के लिए उनका पत्ता साफ कर पाना बूते से बाहर है। हर नेता गडकरी नहीं बन पाएगा।
चाणक्य भूल जाते हैं कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था।
महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी।
सुरेंद्र राजभर मुंबई- महाराष्ट्र सरकार में यहां भूचाल मचा हुआ है। दो पक्षों की साझेदारी में धीरे-धीरे तनाव उत्पन्न हो रहा है। शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। यह साझेदारी कब तक चलेगी यह कहा नहीं जा सकता।
दिल्ली बड़ी बेरहम है। जो कोई सत्ता में आता है, खुद को सम्राट समझने लगता है। वहां का सत्ताधारी कभी भी बर्दास्त नहीं करता, कि उसके साम्राज्य में किसी प्रांत का नेता शक्तिशाली बनकर उसे चुनौती देने की स्थिति में आए। इसीलिए यूपी में भाजपा के स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ के पर कतर दिए गए। बिना दांत और नाखून के सीएम बना दिए गए। मजबूरी थी केंद्र की क्योंकि योगी आरएसएस के बेहद करीब हैं। सरकार में उनके दाहिने बाएं तो महावत के रूप में उपमुख्यमंत्री रख दिए गए। संगठन में प्रांतीय अध्यक्ष और प्रभारी दिल्ली ने नियुक्त कर योगी को रोक दिया। लेकिन योगी के बगावती तेवर ने उन्हें शक्तिशाली सीएम बना दिया।
Indian fasttrack newsमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की फाइल तस्वीर
महाराष्ट्र सरकार की राजनीति ..
महाराष्ट्र में बकौल पूर्व सीएम फड़णवीस ने ही शिवसेना तोड़ने, शिंदे के साथ अपनी मित्रता निभाने और खुद मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब पाले थे। किंतु चाणक्य ने सस्पेंस रखते हुए एकनाथ शिंदे को सीएम बना दिया। फड़नवीस को बेइज्जत करने के लिए उन्हें डिप्टी सीएम बनने को मजबूर कर दिया। अब शिंदे और फडणवीस के बीच तलवारें खिंच चुकी हैं। क्योंकि फडणवीस गृहमंत्री होते हुए भी ठाणे जिले के आईपीएस को हटा नहीं सकते। जबकि भाजपा के स्थानीय बड़े नेता का सिर फोड़ दिया गया। शिंदे के प्रभाव के कारण एफआईआर भी नहीं लिखी गई। कितने असहज हो चुके हैं फडणवीस?
बिल्डर लॉबी,कॉरपोरेट भी दो घड़े में बंट गए हैं। कुछ को शिंदे तो कुछ को फडणवीस का वरद हस्त प्राप्त है। बीजेपी के कार्यकर्ता पीटे जाय। फडणवीस उसके पक्ष में खड़े भी हो जाएं लेकिन शिंदे द्वारा यह कहा जाए कि ठाणे जिले के किसी पुलिस अधिकारी का फडणवीस ट्रांसफर या पोस्टिंग, प्रमोशन नहीं कर सकते। क्योंकि बॉस शिंदे हैं और फडणवीस उनके अधीन हैं। उन्हे शिंदे का आदेश मानना ही पड़ेगा। बेचारे शिंदे करते भी तो क्या ? क्योंकि निरंतर उनका अपमान चाणक्य के फोन आने के बाद किया जाता है।
आज हालत ऐसे हैं कि कभी अभिन्न मित्र आज आंख में आंख मिलाकर बात तक नहीं करते। जिसका खामियाजा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को ही भुगतना पड़ेगा। यूपी में लोकसभा की 64 सीटें 2019 में बीजेपी जीती थी। वहां योगी को नीचा दिखाया जा रहा और महाराष्ट्र में कुल 41 लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा आगामी चुनाव में दहाई तक का आंकड़ा भी नहीं छूने की स्थिति में रह गई है। जिस बालासाहेब ठाकरे ने 2001 के गुजरात दंगे में सीएम मोदी का साथ दिया था। उन्हीं के बेटे उद्धव ठाकरे को चाणक्य ने लहूलुहान कर मोदी के विजय रथ को रोक दिया है। संभव है चाणक्य खुद पीएम की कुर्सी पाना चाहते हों और मोदी को डोमिनेट करने की महत्त्वाकांक्षा रखते हों।
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महाराष्ट्र के मामले में चाणक्य भूल जाते हैं, कि लोकसभा की 41 सीटें जीतने में शिवसेना गठबंधन का हाथ था और यह भी भूल गए कि महाराष्ट्र में बीजेपी दोयम दर्जे से कभी आगे नहीं बढ़ी। शिवसेना के प्रभुत्व का लाभ बीजेपी को मिलता रहा है। लेकिन उद्धव ठाकरे को चोटिल कर चाणक्य ने भाजपा का महाराष्ट्र में सर्वनाश करने का जुगाड कर लिया है। इससे, सबसे बड़ा नुकसान पीएम मोदी का ही होगा और विधानसभा चुनाव में आने वाले समय में बीजेपी को 288 सीटों में बमुश्किल 20 सीटें ही मिलेंगी। शरद पवार, कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की ही आगामी सरकार बनेगी। उसी तरह जैसे यूपी की लोकसभा चुनाव में 40 सीटों पर पेंच फसने से आरएसएस चिंतित है।
मणिपुर में लोगों ने केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर को फूंका दिया।
संविधान और लोकतंत्र को कुचलना स्वभाव बन गया है।
यह कमाल केवल कमल कर सकता है।
सुरेंद्र राजभर वाराणसी- मणिपुर में लोगों ने केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर को फूंका है। मंत्री उस वक्त घर में नहीं थे। बीजेपी चाहे जितने दावे करे लेकिन सच तो यह है, कि शासन करना इसके बूते का नहीं है। झूठ पर खड़ी ताश की इमारत कभी न तो ठोस धरातल बना पाती है न ठोस इमारत। फितरत जिसकी रग-रग में भरा हो। ईर्ष्या जिसका भाव हो। बदला जिसकी प्रकृति हो। दंभ जिसका स्वभाव हो। ऐसा व्यक्ति गांव के मुखिया का भी पदभार सम्हाल नहीं सकता तो देश कैसे सम्हालेगा?
झूठ सिर्फ झूठ, वादे कोरे, जिन्हें पूरे नहीं किए जाएं। लोकलुभावन नारे,विज्ञापन पर अरबों खरबों अपव्यय कर अपनी सफलता का झूठा प्रचार करना। पांच ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था जिसका फितूर हो। समस्या का समाधान नहीं कर सके। समस्या पर चुप्पी साध ले। शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में छिपा ले। प्रश्न पूछने पर चुप रहे क्योंकि जवाब नहीं और फिर प्रश्न कर्ता को जेल भेज दे। विपक्षी नेताओं के घर कभी सीबीआई तो कभी ईडी भेजकर डराए।
किसान आंदोलन चलता रहे कुछ न बोले अंत में माफी मांग ले।महिला पहलवानों की यौनशोषण आरोप पर चुप्पी साध ले फिर दिल्ली पुलिस पर दबाव डालकर आरोपी को क्लीन चिट दिला दे। कभी देश की बेटियां कहे तो कभी पुलिस द्वारा जबरन उन्हें उठाकर फेंकवा दे। पीड़िताओं से पुलिस कितनी बेहयाई के साथ सबूत मांगे और धमकी देकर, परिवार को खत्म करने का भय दिखाकर बयान बदलवाए। बस यही तो किया है। कभी नोट बंदी कर आम जनता को परेशान करे तो कानून बनाकर जनता को दंडित करे। अच्छे दिन के ख्वाब दिखाए। इसी का नाम है बीजेपी।
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मंत्री का घर फूंका..
संविधान और लोकतंत्र को कुचलना स्वभाव बन गया हो। मणिपुर में मैती को आरक्षण का वादा करे दूसरी तरफ विरोधियों को विरोध के लिए उकसाए। जिस तरह रोम को जलते देख अनदेखा कर नीरो बंसी बजाता रहा वैसे ही अपने मंत्री का घर फूंके जाने पर छवि निर्माण हेतु, विदेश पलायन कर जाए। यह कमाल केवल कमल ही कर सकता है। मत भूले कि हमेशा के लिये सत्ता नही मिली है। राज्यों की तरह सिमटता साम्राज्य खत्म होते देख भी सम्राट समझने की भ्रांति पालने वाले का हश्र अगले चुनाव में मालूम पड़ेगा।