Read the latest North India news and top headlines from Delhi, Uttar Pradesh, Punjab, Haryana, Rajasthan, Himachal Pradesh, Uttarakhand and Jammu & Kashmir. Stay informed with coverage on politics, crime, business, education, weather, culture and major regional developments, only on Indian FastTrack.
नेशनल डेस्क उत्तर प्रदेश के ललितपुर के शहजाद बांध के पास भराव क्षेत्र में बोरी में बंद मिली थी मृतक महिला। अवैध संबंध के शक में उसी के प्रेमी ने हत्या कर दी। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कोल्ड्रिंक मे कीटनाशक दवा मिला कर पिला दिया था। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने यूट्यूब और गूगल से हत्या के तरीके सीखकर हत्या को अंजाम दिया। हत्या का कारण पुलिस ने बताया कि मृतक महिला आरोपी के साथ अवैध संबंध मे रहते एक और युवक के साथ नजदीकी चला रही थी। जिसके साथ उसका इंस्ट्राग्राम के जरिए दोस्ती हो गई थी। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram
मृतका के परिजनों के मुताबिक रानी जून 2024 में जगदीश निवासी ग्राम करमई के साथ प्रेम-प्रसंग में चली गई थी। पुलिस की टीमों ने शुक्रवार को जगदीश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में जगदीश ने बताया कि उसके गांव करमई का रहने वाला नरेंद्र रैकवार की पत्नी रानी से उसका प्रेम प्रसंग था और वह एक साल से दोनों साथ में रह रहे थे।
कुछ समय पूर्व उसकी भी शादी कहीं और तय हुई तो उसमें और रानी में मन-मुटाव रहने लगा। इसी बीच रानी इंस्टाग्राम के माध्यम से दोस्त बने एक युवक के साथ रहने को चली गई थी। 6 जुलाई 2025 को रानी उसके पास कोतवाली सदर अंतर्गत शहर के मोहल्ला नईबस्ती में किराए के मकान में वापस आ कर रहने लगी थी। लेकिन उन दोनों के बीच विवाद होता रहता था। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram
इस पर उसने रानी की हत्या करने का षड्यंत्र रचा। इसके लिए उसने यूट्यूब वीडियो और गूगल से हत्या करने और पुलिस से बचने के तरीके सीखा। इसके बाद वह कीटनाशक दवा बाजार से खरीदकर लाया और 7 जुलाई 2025 को उसने कोल्डड्रिंक में कीटनाशक दवा मिलाकर रानी को पिला दिया। जिससे रानी की मौत हो गई।
रात के समय उसने रानी के शव के हाथ और पैर बांधकर एक बोरी में रखा और शव को बाइक पर रखकर ग्राम चीरा के पास शहजाद नदी में फेंक आया था। पुलिस ने आरोपी के पास से एक बाइक और कीटनाशक दवा की शीशी बरामद की है। आरोपी के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram
पुलिस से बचने के लिए इंस्टाग्राम का इस्तेमाल
आरोपी जगदीश ने बताया कि रानी को मार डालने और शव को ठिकाने लगाने के बाद पुलिस से बचने के लिए उसने 8 जुलाई को रानी के फोन से रानी और उसके इंस्टाग्राम दोस्त की रील इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दी थी। जिससे ऐसा प्रतीत हो कि रानी अपने इंस्टाग्राम दोस्त के साथ है और रानी की पहचान हो जाए तो पुलिस को लगे कि रानी की हत्या यशवंत ने ही की है। रानी के शव को ठिकाने लगाने के बाद वह ग्राम करमई अपने गांव में आकर रहने लगा था। लेकिन उसके षड्यंत्र का पर्दाफाश हो गया।
दो बच्चों और पति को छोड़कर बनाया अवैध संबंध
मृतक का पति नरेंद्र जगदीश का ही दोस्त था। इस वजह से जगदीश का नरेंद्र के घर आना जाना था। इस बीच नरेंद्र की पत्नी रानी और जगदीश के बीच प्रेम-प्रसंग हो गया। जिसकी जानकारी नरेंद्र को होने पर वह रानी से झगड़ा करने लगा। जिसके बाद जून 2024 में रानी अपने पति और दो बच्चों को छोड़कर अपने प्रेमी जगदीश के पास चली गई थी और उसके साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगी थी। लेकिन एक साल बाद ही रानी के प्रेमी जगदीश ने उसे धोखे से कीटनाशक दवा पिलाकर हत्या कर दी।
कैसे हुई मृतक की पहचान?
जब बांध के भराव क्षेत्र में महिला का सड़ा गला बोरी में बंद शव मिला तो उसके हाथ पर आर जगदीश नाम गुदा था। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। तब ग्राम करमई निवासी एक परिवार ने हाथ पर गुदे नाम के चलते शव की पहचान नरेंद्र की पत्नी रानी रैकवार के रूप में करने का दावा किया था। पहचान के दावे को पुख्ता करने के लिए रानी के पिता लल्लू रैकवार निवासी ग्राम कारीकंचनपुरा टीकमगढ़ मध्य प्रदेश जोकि दिल्ली में था उन्हें को बुलाया गया। लल्लू रैकवार ने भी शव की पहचान रानी के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने जगदीश को गिरफ्तार कर घटना के रहस्य से पर्दा फाश किया। Illegal relationship led to woman’s death, she fell in love with Instagram
महाराष्ट्र/पालघर: वसई-विरार इलाके में ट्रैफिक पुलिस पर हमलों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहीं नालासोपारा में हुई एक चौंकाने वाली घटना इन दिनों सुर्खियाँ बटोर रही है। प्रगति नगर इलाके के एक व्यस्त चौराहे पर पिता और पुत्र दोनों ने मिलकर दो ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की लात-घूंसों से बेरहमी से पिटाई कर दी। इस घटना का रोमांचक वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और हर जगह हलचल मचा दिया है।
दिनदहाड़े सड़क पर हमला
जब ट्रैफ़िक पुलिस प्रगति नगर के पास एक गोलचक्कर पर अपनी नियमित ड्यूटी कर रही थे, तभी मंगेश नारकर और उसके बेटे पार्थ नारकर ने अचानक दो ट्रैफ़िक पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। पुलिसकर्मी हनुमंत सांगले और शेष नारायण अत्रे को बीच सड़क पर पीट-पीटकर मारा गया। पिता ने पुलिसकर्मी को पकड़कर सड़क पर लिटा दिया, जिसके बाद बेटे ने उसके पेट और सीने पर लात-घूंसों से वार करना शुरू कर दिया। Father and son beat up a traffic policeman at a busy intersection
जैसे ही यह आम लोगों के लिए रोमांचक घटना घटी, कई नागरिक घटनास्थल पर जमा हो गए। कुछ ने पूरी घटना को अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना लिया, जबकि कुछ ने बीच-बचाव करके स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। आखिरकार, एक अन्य पुलिस अधिकारी के दौड़कर आने पर आरोपियों को रोका गया। Father and son beat up a traffic policeman at a busy intersection
हालाँकि घटना के पीछे का असली कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि वाहन निरीक्षण के दौरान हुई बहस ने हमले का रूप ले लिया होगा। हालाँकि, पुलिस आगे की जाँच कर रही है और जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई शुरू
इस घटना के बाद, नालासोपारा के तुलिंज पुलिस स्टेशन में मंगेश नारकर और पार्थ नारकर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दोनों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, मारपीट समेत अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।
नागरिकों का आक्रोशित, सख्त कार्रवाई की मांग
इस घटना से स्थानीय नागरिकों में रोष व्याप्त है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो के बाद लोग पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ लोगों ने तो यह सवाल भी उठाया है कि, “यदि यातायात पुलिस के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिकों के बारे में क्या?”
नेशनल डेस्क मुंबई: भारतीय नौसेना के खेमें में फरवरी 2026 में अत्याधुनिक हथियारों, सेंसरों और प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणालियों से लैस नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट-17 अल्फा) का चौथा युद्धपोत महेंद्रगिरी शामिल हो जाएगा। पहले युद्घपोत नीलगिरि को जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में कमीशन किया गया था। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) में बन रहा दूसरा युद्धपोत उदयगिरि 1 जुलाई को नौसेना को सौंपा गया था।
हर खतरे से निपटने मे परिपक्व
रक्षा मंत्रालय ने कहा, कि ये युद्घपोत भारत के समुद्री सीमा क्षेत्र में पारंपरिक और गैर पारंपरिक दोनों तरह के खतरों से निपटने में सक्षम हैं। मंत्रालय ने सोमवार को मुंबई स्थित एमडीएल में बन रहे महेंद्रगिरि का एक वीडियो साझा किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, महेंद्रगिरि, प्रोजेक्ट 17ए का सातवां और सबसे उन्नत युद्घपोत है। यह भारत की नौसैनिक विरासत और भविष्य को दर्शाता है। यह आत्मनिर्भर भारत का एक सच्चा प्रतीक है। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के अतिरिक्त महाप्रबंधक जय वर्गीस ने वीडियो में कहा, यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की शक्ति को बढ़ाने वाला होगा। सात युद्घपोत में से चार एमडीएल, मुंबई द्वारा और शेष गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा दिए जाएंगे।
वर्गीस ने महेंद्रगिरि के बारे में कहा, हमें उम्मीद है कि यह फरवरी 2026 तक भारतीय नौसेना को मिल जाएगा। किसी भी युद्धपोत निर्माण परियोजना की तरह एक जहाज के आसपास कई सहायक उद्योग विकसित होते हैं। हम कई ओईएम से उपकरण ले रहे हैं और इन सभी को जहाज में एकीकृत किया गया है, इसलिए इनमें से हर ओईएम अपने आप में एमडीएल का भागीदार रहा है और स्वदेशीकरण सामग्री में भी सुधार हुआ है, जिससे भारत के आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।
एमडीएल ने वीडियो साझा कर झलक दिखाई। एमडीएल अधिकारी ने बताया कि इस श्रेणी के जहाजों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। इन जहाजों की विविध विशेषताएं हैं। जहाज का आकार ऐसा है कि दुश्मन के रडार में काफी छोटा दिखेगा। वीडियो में एमडीएल में बन रहे दूसरे युद्धपोत की भी झलक दिखाई गई। उन्होंने कहा, यह एक ऐसी संरचना है, जो जहाज को एक मछली पकड़ने वाली नाव जैसा आकार देता है, न कि इस आकार का एक युद्घपोत हो सकता है। इसकी आवाज भी काफी कम है।
युद्धपोत के मिसाइल
प्रोजेक्ट 17ए जहाज का पतवार प्रोजेक्ट-17 की तुलना में भू-सममितीय रूप से 4.54 प्रतिशत बड़ा है। इसके अलावा इन जहाजों में प्रोजेक्ट-17 श्रेणी की तुलना में उन्नत चिकने और गुप्त विशेषताओं वाला एक उन्नत हथियार और सेंसर सूट लगा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली और एक मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली शामिल है।
पूर्व कमांडो प्रवीण कुमार तेवतिया उन कुछ गैर-राजनीतिक आवाजों में से एक हैं जो महाराष्ट्र की राजनीति के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सामने आए हैं।
मुंबई: 26/11 के आतंकवाद के खिलाफ अभियान में शामिल एक पूर्व कमांडो ने मराठी भाषा विवाद को लेकर ठाकरे परिवार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया, कि 2008 में जब मुंबई में आतंकवाद हमला हुआ था, तब राज ठाकरे के समर्थक छिपे हुए थे। उस वक्त आतंकवाद से लड़ने वाले वीर योद्धा कहीं और के नहीं बल्कि यूपी बिहार के सैन्यकर्मी थे।
प्रवीण कुमार तेवतिया उन कुछ गैर-राजनीतिक आवाजों में से एक हैं जो महाराष्ट्र की राजनीति के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सामने आकर सवाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, भाषा विवाद को लेकर राजनीति करना अच्छी बात नही है। इसके अलावा भी राज्य और देश के हितों पर विचार किया जाना चाहिए।
मरीन कमांडो फ़ोर्स (MCF), जिसे संक्षेप में MARCOS कहा जाता है, भारतीय नौसेना का एक विशेष बल है। भारतीय नौसेना के पूर्व कमांडो प्रवीण कुमार तेवतिया उन 26/11 आतंकवादी हमले में आतंकवादीयों की गोलियों के बीच सामना करने वाले एक बहादुर सैनिक है।
मैने महाराष्ट्र के लिए खून बहाया
’26/11 ब्रेवहार्ट: माई एनकाउंटर विद टेररिस्ट्स दैट नाइट’ नामक पुस्तक के लेखक श्री तेवतिया ने कहा, “मैंने 26/11 को मुंबई हमले के दौरान उस वक्त आतंकवादियों का सामना किया था जब हमलावर लोगों को गोलियों से छन्नी कर रहे थे। मैं महाराष्ट्र के लिए खून बहाता हूं और उत्तर प्रदेश से हूं। मैंने ताज होटल को बचाया। राज ठाकरे के तथाकथित योद्धा उस वक्त कहां थे? देश को मत बांटो। मुस्कुराहट के लिए किसी भाषा की जरूरत नहीं होती।”
कहां थे राज और उद्धव?
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने अपने दावों को फिर से एक बार दोहराया और कहा कि 26/11 के दौरान आतंकवादियों से लड़ने वाले राज और उद्धव ठाकरे नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के सैन्यकर्मी थे।
उन्होंने कहा, “वह (राज ठाकरे) खुद, उद्धव ठाकरे और उनका परिवार भी उस वक्त उनसे नहीं मिल पाया। जिन लोगों ने दूसरों को बचाया था, जैसे कि सेना के जवान, वे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार से थे। मैं वहां था, मैंने स्थिति को संभाला और आतंकवादियों का सामना किया। मैं भी उत्तर प्रदेश से हूं और (पूर्व प्रधानमंत्री) चौधरी चरण सिंह के गांव से आता हूं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह मराठी विरोधी नहीं हैं और कहा कि भाषा को लेकर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मराठी और मराठा योद्धाओं पर गर्व
उन्होंने कहा, “मुझे मराठी और मराठा योद्धाओं पर गर्व है। ऐसे हारे हुए लोगों को हमें बांटने की इजाजत न दें। भाषा को राजनीति का हिस्सा नहीं होना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि बेरोजगारी, गरीबी, विकास, उत्पादन, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बलात्कार, लंबित अदालती मामले और आतंकवाद हमारे लिए बड़े मुद्दे हैं जिन पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
ठाकरे परिवार मराठी विवाद में सबसे आगे रहा है, जिसे राज्य सरकार की स्कूलों के लिए तीन-भाषा शिक्षा नीति ने फिर से हवा दे दी है। ठाकरे परिवार की आलोचना के बाद शिक्षा नीति को वापस ले लिया गया, जिसके बाद एक बड़े सार्वजनिक मिलन समारोह में दोनों नेताओं ने राज्य के मूल मराठी भाषियों पर हिंदी थोपने के लिए भाजपा सरकार की आलोचना की।
गैर मराठी भाषियों पर हमला
दोनों चचेरे भाइयों में से छोटे राज ठाकरे को भाषा विवाद पर कट्टरपंथी रुख अपनाने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके समर्थक मुंबई में गैर-मराठी भाषियों पर हमला और धमकियाँ देते देखे गए हैं। “गुंडागिरी” के आरोपों से घिरे राज ठाकरे का समर्थन उनके चचेरे भाई उद्धव ने किया है, जिन्होंने कहा है कि मराठी लोगों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ते हुए गुंडा बनना बेहतर है।
Railway News : सेंट्रल रेलवे ने उत्तर प्रदेश के यात्रियों की सुविधा के लिए मुंबई से चलने वाली विशेष सुपरफास्ट ट्रेन की अतिरिक्त 52 सेवाएं शुरू की हैं, इसमें यात्रियों को और भी ज्यादा आरामदायक सुविधाएं मिलने वाली है।
मुंबई: उत्तर प्रदेश के रेल यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आ रही है। सेंट्रल रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए मुंबई स्थित कुर्ला के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) और कानपुर के बीच चलने वाली साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन को अब 52 अतिरिक्त फेरे चलाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि अब यह स्पेशल ट्रेन संशोधित कोच स्ट्रक्चर के साथ चलेगी। इससे यात्रियों को और भी ज्यादा आरामदायक सफर की सुविधा मिलने वाली है। Good news! 52 additional trips have been increased from Mumbai to Uttar Pradesh
मुंबई से कानपुर
सेंट्रल रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रेन संख्या 04152 जो मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) से कानपुर के लिए चलाई जाती है, अब हर शनिवार शाम 5:15 बजे रवाना होकर अगले दिन दोपहर 3:45 बजे कानपुर पहुंचेगी। यह ट्रेन अब 27 दिसंबर 2025 से कुल 26 सेवाएं तक चलाई जाएगी।
इसी तरह, ट्रेन संख्या 04151 हर शुक्रवार दोपहर 1:00 बजे कानपुर से रवाना होकर अगले दिन दोपहर 2:55 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी। यह ट्रेन 26 दिसंबर 2025 तक यात्रियों को कुल 26 सेवाएं देगी।
यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन में कोचों की संरचना भी बदली गई है। अब इसमें एक एसी टू-टियर, चार एसी थ्री-टियर, पांच स्लीपर कोच, आठ सामान्य द्वितीय श्रेणी और दो सामान्य श्रेणी सह गार्ड ब्रेक वैन लगाए जाएंगे।
आगामी त्योहारों और छुट्टियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई ये सेवाएं न सिर्फ यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करेंगी, बल्कि मुंबई से उत्तर भारत जाने वाले यात्रियों की यात्रा को भी सुगम बनाएंगी।
मुंबई: Baba Siddiqui Murder Case Delhi Connection: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अजित पवार गुट के नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या की जांच के दौरान मुंबई पुलिस को दिल्ली कनेक्शन सामने आने की जानकारी प्राप्त हो रही है। पिछले साल लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुंडों ने बांद्रा इलाके में बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया था। बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद मुंबई पुलिस ने कुछ हत्यारों को गिरफ्तार भी किया। लेकिन हत्या के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है? इसका अभी तक पूरी तरह पता नहीं चल पाया है। इस बीच मुंबई पुलिस की जांच में एक बड़ी जानकारी सामने आई है। Baba Siddiqui Murder Case: Delhi connection in Baba Siddiqui murder case; Big update
दिल्ली के बुराड़ी से गिरफ्तारी
बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद उनके मोबाइल नंबर को दूसरे सिम कार्ड पर एक्टिवेट करने की कोशिश की गई है। इस मामले में बांद्रा पुलिस ने दिल्ली से एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है। आरोपी दिल्ली के बुराड़ी इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। उसके खिलाफ पहले भी साइबर अपराध के मामले दर्ज हैं। आरोप है कि बाबा सिद्दीकी के मोबाइल नंबर को दूसरे सिम कार्ड में एक्टिवेट कर के एक कंपनी को ठगने की कोशिश की। Baba Siddiqui Murder Case: Delhi connection in Baba Siddiqui murder case; Big update
जमानत पर हुआ था रिहा
संदिग्ध के खिलाफ मुंबई में पहले से ही दो मामले दर्ज हैं। एक मामला चीफ मजिस्ट्रेट कोर्ट में और दूसरा बोरीवली कोर्ट में लंबित है। बोरीवली मामले में कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी थी। जिसके बाद वह अब दिल्ली से बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के सिलसिले में गिरफ्तार हुआ है। Baba Siddiqui Murder Case: Delhi connection in Baba Siddiqui murder case; Big update
बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद आरोपियों ने मोबाइल को दूसरे सिम कार्ड पर एक्टिवेट कर धोखाधड़ी की साजिश रची। इस मामले में कंपनी ने संबंधित व्यक्ति को ई-मेल के जरिए सूचना दी थी कि उसे आवेदन मिल गया है। कंपनी ने ईमेल की सीसी में बाबा सिद्दीकी की बेटी डॉ. अर्शिया का नाम भी डाल दिया था। इससे परिवार को अहसास हुआ कि यह धोखाधड़ी है। डॉ. अर्शिया ने इस संबंध में बांद्रा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। फिलहाल मुंबई पुलिस फिर से हत्याकांड की जांच शुरू कर दी है। Baba Siddiqui Murder Case: Delhi connection in Baba Siddiqui murder case; Big update
मिराभायंदर के दर्दनाक हत्याकांड में 13 सालों से फरार गोविंद कुमार जगतनारायण चौधरी को पुलिस ने दिल्ली के नया बाजार से गिरफ्तार किया है। खुद की पहचान बदल कल रह रहा था और उसने दूसरी शादी भी कर ली थी। लेकिन एक फोन कॉल ने सारा राज खोल दिया।
मुंबई: एक दशक से अधिक समय तक फरार रहने के बाद, मुंबई पुलिस ने आखिरकार शहर की सबसे भीषण अनसुलझी हत्याओं में से एक के संदिग्ध को पकड़ लिया। 30 जून को मीरा-भयंदर-वसई-विरार (MBVV) अपराध शाखा के अधिकारियों ने 34 वर्षीय गोविंद कुमार जगतनारायण चौधरी को दिल्ली के नया बाजार से गिरफ्तार किया है। इसने रिश्तेदार की हत्या तो की साथ ही उसके गुप्तांग भी कांटकर फरार हो गया था। 13 years long search for the horrific Bhayander murder case ends, man arrested from Delhi
क्रुर हत्या
चौधरी मई 2012 से अपने करीबी रिश्तेदार, 35 वर्षीय सुरेशकुमार सूर्यनारायण चौधरी की भयंदर (ठाणे) में क्रूर हत्या के लिए वांटेड चल रहा था। पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित 28 मई, 2012 को अपने घर में मृत पाया गया था, उसके शरीर पर कई चाकू के घाव थे – जांचकर्ताओं ने कहा, “हत्या इतनी क्रूरता से की गई थी कि आरोपी चाकू घोंपने तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि उसके गुप्तांग को भी कांट दिया था।” 13 years long search for the horrific Bhayander murder case ends, man arrested from Delhi
पुलिस ने क्या कहा?
चौधरी की गिरफ़्तारी पुलिस के लिए एक चौंकाने वाली सफलता है। पुलिस का कहना है कि हत्या के तुरंत बाद चौधरी मौके से भाग गया और 13 साल तक पुलिस की पकड़ से बचता रहा। वहां, वह एक नकली पहचान के साथ रह रहा था और यहाँ तक कि उसने दोबारा शादी भी कर ली। एक विशेष MBVV इकाई ने आखिरकार सोमवार को उसे दिल्ली के नया बाज़ार में ट्रैक किया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, कि “मीरा-भयंदर वसई-विरार पुलिस की एक टीम ने 2012 की हत्या के मामले में नई दिल्ली से गोविंद कुमार जगतनारायण चौधरी को पकड़ लिया है।” हिरासत में, चौधरी को अब नई भारतीय न्याय संहिता के तहत हत्या और अंग-भंग करने के आरोपों का सामना करना पड़ सकता है।” 13 years long search for the horrific Bhayander murder case ends, man arrested from Delhi
जांचकर्ताओं ने इस बात की जांच की कि इतने सालों बाद चौधरी की पहचान कैसे हुई? उनका कहना है कि यह सफलता एक नियमित सूचना से मिली: चौधरी की पूर्व पत्नी (जो तब से बिहार चली गई थी) को दिल्ली के एक नंबर से लगातार कॉल आ रही थी। तकनीकी खुफिया जानकारी के माध्यम से इन कॉलों का पता लगाकर जासूसों ने उस पर ध्यान केंद्रित किया। 13 years long search for the horrific Bhayander murder case ends, man arrested from Delhi
अवैध संबंध में हुई हत्या
क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया, कि “हमें तब पता चला कि उसे दिल्ली से कॉल आ रही थी… हमने आरोपी गोविंदकुमार जगतनारायण चौधरी की पहचान एक दुकान से की।” एक बार घेर लिए जाने के बाद, चौधरी ने कथित तौर पर कबूल किया कि उसे लगता था कि सुरेशकुमार का उसकी पत्नी के साथ संबंध था – एक ऐसा मकसद जिस पर लंबे समय से संदेह था। पुलिस सूत्रों ने पुष्टि की है कि हत्या इस कथित अवैध संबंध को लेकर ईर्ष्या के कारण की गई थी। 13 years long search for the horrific Bhayander murder case ends, man arrested from Delhi
पुलिस की दृढ़ता का प्रमाण
अब चौधरी सलाखों के पीछे सुरक्षित हैं और उसे लंबे समय से बंद पड़े मामले में सजा का सामना करना पड़ रहा है। कानूनी कार्यवाही लंबित रहने तक उसे हिरासत में रखा गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी “तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण खुफिया सूचनाओं सहित लगातार प्रयासों” का परिणाम है – ठंडे मामलों को सुलझाने में मुंबई पुलिस की दृढ़ता का प्रमाण भी है। 13 years long search for the horrific Bhayander murder case ends, man arrested from Delhi
अपराध की भयावह प्रकृति ने लोगों में फिर से खौफ पैदा कर दिया है। स्थानीय निवासी क्रूरता को याद करते हैं और मीडिया आउटलेट कहानी को फिर से दिखा रहे हैं, यह रेखांकित करते हुए कि कैसे एक पुरानी हत्या भी शहर की अंतरात्मा को झकझोर सकती है। फिलहाल, मुंबई केवल यह देख सकता है कि कैसे कानूनी व्यवस्था एक ऐसे व्यक्ति के खिलाफ खुलती है जो बहुत लंबे समय तक न्याय से बचता रहा हो। 13 years long search for the horrific Bhayander murder case ends, man arrested from Delhi
दिल्ली-मुंबई हाईवे के कॉरिडोर पर चार अपना घर बन चुके हैं। हर 30 किलोमीटर पर हाईवे के किनारे पेट्रोल पंप, टॉयलेट, ईवी चार्जिंग स्टेशन और अपना घर विश्राम केंद्र बनाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने दिल्ली मुंबई हाईवे पर आपको कई जगहों पर ‘अपना घर’ नाम से इमारतों का निर्माण कर रही है। इन इमारतों को हाईवे पर चलने वाली गाड़ियों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल लंबी दूरी के हाईवे पर नींद आने की वजह से सड़क दुर्घटना बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब ट्रक ड्राइवरों को ढाबे के पीछे या सड़क के किनारे सोने की जरूरत न पड़े, इसलिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ‘अपना घर’ नाम से आधुनिक और सुरक्षित रेस्ट एरिया तैयार किया गया है। यहां उन्हें आराम करने, नहाने, खाना बनाने और नींद पूरी करने के लिए घर जैसा माहौल मिलेगा। हालांकि इसके लिए किमत अदा करनी पडेगी। लेकिन इसका किराया बहोत ही ज्यादा कम होने वाला है।
नींद की वजह से होती हैं दुर्घटना
भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें से लगभग 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। 70% हादसे ड्राइवर की थकान और नींद पूरी न होने की वजह से होते हैं। लंबी दूरी पर चलने वाले ट्रक ड्राइवर अक्सर बिना आराम किए चलते रहते हैं। इसकी वजह से उनकी सेहत पर असर पड़ता है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। NHAI कोटा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया, कि “ट्रक ड्राइवर लगातार सफर करते हैं और ठीक से सो नहीं पाते। इसके कारण सड़क दुर्घटना होती है। इसी के कारण अपना घर योजना की शुरुआत की गई, ताकि वे सुरक्षित जगह पर आराम कर सकें और हादसे से बच सकें।”
बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ
शिक्षा को व्यापार की तरह चलाया जा रहा माफियाओं के हाथों
पचास हजार के ऊपर सरकारी स्कूल बंद
हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां
निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें
दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार
सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..
18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित
गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक
उत्तर प्रदेश के 70 प्रतिशत इंजीनियर बेकार
देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के…!
धर्म की सियासत चमकाने में व्यस्त बीजेपी सरकार
बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद
पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की बूंद जैसा
मुफ्त राशन प्रचार में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन का खर्च
विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार
95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र
मुंबई: बीजेपी के कथित चाणक्य अमित शाह ने अंग्रेजी नहीं पढ़ने की वकालत की है। लेकिन सबसे पहले उन्हें अपने बेटे को जिसे बीसीसीआई का सेक्रेटरी दबाव में बनाया है, इससे कहें कि अंग्रेजी न बोले। इसके साथ ही अपनी सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को पार्टी से बाहर करें जो विदेश से पढ़कर आए हैं क्योंकि वहां अंग्रेजी ही पढ़ाई जाती है। साथ ही उन मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को भी जिनके बेटे, बेटियां विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे और जो वहां सेटल्ड हो चुके हैं।
देश के सारे कॉन्वेंट स्कूल बंद कर दें। सीबीएससी जिसमें अंग्रेजी मीडियम से शिक्षा दी जाती है उसकी मान्यताएं खत्म कर दें। संसद में अंग्रेजी बोलने, सेक्रेटरियो द्वारा अंग्रेजी बोलने लिखने की मनाही कर दें। यहां तक कि संसद में अंग्रेजी बोलने वालों को बरखास्त कर दें। तब आम गरीब आदमी या देशवासियों से अंग्रेजी पढ़ने को मना करें। लेकिन अब कोई छात्र किस मीडियम में पढ़ेगा। किस भाषा में बात करेगा सरकार इस पर रोक कैसे लगा सकती है?
बीजेपी सरकार ने सौंप दिया शिक्षा को माफियाओं के हाथ
एक तो वैसे ही बीजेपी सरकार ने शिक्षा को माफियाओं के हाथों में सौप दिया है, जिसे व्यापार की तरह चलाया जा रहा है। मनमानी फीस की वसूली की जा रही है। स्कूल बैग, जूता, मोजा और किताबें वह भी प्राइवेट स्कूलों की जिनका मूल्य चार सौ से कम नहीं है। उसमें भी कमीशन मिलता है। तमाम प्राइवेट स्कूलों में न लाइब्रेरी है, न कंप्यूटर हाल और ना ही साइंस लैब।
फिर भी स्कूलों को दो चार लाख रुपए लेकर मान्यताएं दी जा रही है, जहां शिक्षा के नाम पर नील बटा सन्नाटा है। ट्यूशन पढ़ने के लिए बच्चों पर दबाव डाला जाता है। सरकार जिसका दायित्व है कि निःशुल्क शिक्षा देना।नहीं दे रही। तमाम सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। स्कूलों को मर्च किया जा रहा दूर के स्कूलों में।
हाईकोर्ट ने रद्द की शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां
शिक्षक आंदोलन रत हैं। बिजली कर्मचारी आंदोलन रत हैं, लेकिन बीजेपी सरकारें दो कार्य कर रही। अब तक पचास हजार से ऊपर तक के सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। शिक्षकों की मनमानी नियुक्तियां किए जाने पर हाईकोर्ट ने सारी नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। वहीं शिक्षा निःशुल्क देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें। प्राइवेट स्कूलों की सालाना फीस लाखों में रखी गई है।
उसके अलावा हर वर्ष एडमिशन फीस और तमाम तरह की फीस की वसूली की जा रही है। यहां तक कि फीस जमा नहीं कर पाने वाले छात्रों को गेट से ही घर लौटाया जा रहा। केंद्र सरकार की नाक के नीचे दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल द्वारा तीन साल में हजारों रुपए बढ़ा दिए जाने और छात्रों के घर लौटाए जाने के कारण अभिभावकों को आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा था।
दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के शासन में बच्चों को दिया गया शिक्षा का अधिकार
दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासन में बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिया गया। अगर पांच दस वर्ष जीवित रहते तो शिक्षा को समवर्ती सूची से निकालकर समूचे देश में एक ही शिक्षा पद्धति लागू कर देते। पाठ्यक्रम भी एक होते ताकि असमय स्थल परिवर्तन का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। छः से चौदह वर्ष आयु तक शिक्षा का अधिकार देने के बाद उनकी योजना कॉलेज और विश्वविद्यालयों में भी निःशुल्क शिक्षा का अधिकार दे देते। लेकिन देश का दुर्भाग्य उनकी मृत्यु की साजिश रची गई।जिससे उनका शिक्षा को लेकर सारी योजना ही बंद हो गई।
सरकारों का लोकलुभावन नारा ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ ..
अब तो सरकारें सारे के सारे सरकारी स्कूल बंद करने पर तुली हुई हैं। हमारी सरकारों ने नारे बड़े लोकलुभावन दिए थे, कि “पड़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया” लेकिन कार्य उसके ठीक विपरित किए जा रहे हैं। भारी भरकम फीस के कारण लाखों छात्र पांचवीं और आठवी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ने के लिए बाध्य हो जाते हैं। प्राइवेट स्कूलों कॉलेजों में पढ़ा पाना देश के नब्बे प्रतिशत लोगों के बूते में नहीं है।
18℅ की GST लगाकर सरकार ने किया आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित
शिक्षा पर 18% की जीएसटी लगाकर सरकार ने आम आदमी के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर दिया है। कैसे पड़ेगा इंडिया और कैसे बढ़ेगा इंडिया? देश में एक भी कॉलेज और विश्वविद्यालय ऐसा नहीं है जो दुनिया के टॉप दो सौ विश्वविद्यालयों में स्थान पा सके। इसका कारण है शिक्षा मद में केंद्र सरकार द्वारा कटौती।
गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी न पढाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक
अंग्रेजी भाषा अंतरराष्ट्रीय भाषा है। अंग्रेजी पढ़े लिखे छात्रों को ही खुद अपने ही देश में प्राइवेट जॉब मिल पाता है। बिना अंग्रेजी के कहीं भी कोई पूछता तक नहीं है। विदेश जाने, उच्च शिक्षा प्राप्ति अथवा जॉब पाने के लिए अंग्रेजी टेस्ट अनिवार्य है। ज्ञान विज्ञान की समस्त पुस्तकें अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है। भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए अरबों खरबों रूपये व्यय करने होंगे। बिना अंग्रेजी ज्ञान के कोई भी विदेश जाकर उच्च शिक्षा या नौकरी या व्यवसाय कर ही नहीं सकता। ऐसे में गृहमंत्री अमित शाह का अंग्रेजी नहीं पढ़ाने का बयान देश की तरक्की के लिए बाधक है।केंद्रीय मंत्री को ऐसे बयान देने से बचना चाहिए।
निःशुल्क शिक्षा देने के अपने दायित्व से भाग रही सरकारें
जबकि शिक्षा को व्यापार करने की छूट कदापि नहीं दी जानी चाहिए। सरकार का दायित्व है, कि सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करना। लेकिन सरकार अपने दायित्व पालन से भाग रही है। निःशुल्क शिक्षा प्रशिक्षण देकर प्रति परिवार एक रोजगार के संसाधन जुटाना सरकार का दायित्व है। जब नब्बे प्रतिशत बच्चे पढ़ेंगे नहीं तो आगे कैसे बढ़ेंगे। शिक्षा का स्तर इतना नीचे गिर चुका है कि उत्तर प्रदेश के सत्तर प्रतिशत इंजीनियर बेकार हैं। उन्हें ज्ञान ही नहीं है कि प्राइवेट शिक्षा संस्थान प्रैक्टिकल कहां करते हैं? बिना प्रेक्टिकल के ज्ञान कैसे आयेगा?
देश में लाखों कॉलेज विश्वविद्यालय नेताओं या उनके रिश्तेदारों के हैं जिनका लक्ष्य दौलत अर्जित करना है। इसीलिए सरकार शिक्षा को माफियाओं के हाथों सौंप चुकी है। सरकार डरती है कि कहीं शिक्षा व्यवसाय पर नकेल कसी गई तो उसके लोग ही सरकार गिरा देंगे। सत्ता बचाने के लिए देश के एक सौ चालीस करोड़ लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना सरकार को शोभा नहीं देता। शायद यही वजह है, कि सरकार को चुनाव जीतने के लिए धर्म, नफरत का सहारा लेना पड़ रहा है। अपने वादों को जो कभी पूरे ही नहीं किए सरकार ने, वोट मांगने की हिम्मत ही नहीं है। इसलिए धर्म की सियासत चमकाने का कार्य कर रही सरकार।
बीजेपी शासित राज्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 60℅ सरकारी स्कूल बंद
सिर्फ़ दो बीजेपी शासित राज्यों मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में ही 60% सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। दोनों राज्यों के दो करोड़ बच्चे चौथी या आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। महंगाई इतनी बढ़ गई है, कि पांच किलो मुफ्त राशन गर्म तवे पर पानी की भी बूंद जैसा नहीं है। माता पिता मेहनत करते हैं। महीने में आठ से दस दिन मजदूरी मिलती है शेष दिन फांका कटता है। परिवार का पेट भरे कि बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में महंगी शिक्षा लेने भेजें?
95℅ जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र
दरअसल पांच किलो मुफ्त राशन का प्रचार करने में राशन खर्च से अधिक विज्ञापन खर्च आ जाता है। विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकारें नहीं चाहती कि अस्सी करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ पाएं। ऊपर से अंग्रेजी नहीं पढ़ाने की वकालत? यह वकालत वे लोग करते हैं जो कभी अंग्रेजों की दलाली करते और गांधी के आंदोलन को कुचलने के लिए वायसराय को खत लिखा करते थे। आज उन्हीं की औलादें सत्ता में आई हैं, तो देश को निरक्षर रखने के तमाम उपाय करते रहते हैं। विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था चंद पूंजीपतियों की है जबकि सच तो यह है कि देश की 95% आबादी बीजेपी शासन में हैंड टू माउथ हो चुकी है।
विज्ञापनों और कथित धर्म आस्था और हिंदुत्व के नाम पर टिकी बीजेपी सरकार
इतने टैक्स तो लुटेरे अंग्रेजों ने भी नहीं लगाए थे जितनी हिंदुत्ववादी सरकार टैक्स लगाकर 95% जनता को गरीबी रेखा के नीचे रखने का षडयंत्र करती है। गरीबी झेली है। गरीब मां का बेटा हूं। बर्तन माजती थी मां कहने वाले पीएम दिन में पांच ड्रेस वह भी लाखों के बदलते रहते हैं। नेहरू पर आरोप लगाने वाले सोचें कहां राजा भोज कहां गंगू तेली। नेहरू परिवार आजादी के पहले से ही संपन्न रहा था। उनकी बराबरी तो क्या पैरों की धूल बराबर आज कोई नेता नहीं। हर मोर्चे पर नाकाम सरकार केवल विज्ञापनों, व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के द्वारा ब्रेन वाश करके मूर्ख बनाती और धर्म आस्था के नाम पर वोट मांगती सरकार।
शिवसेना शिंदे गुट के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा ने योग दिवस पर योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया और लोगों से इसे अपने जीवन में उतारने की अपील की।
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: 21 जून 2025 अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के राष्ट्रीय समन्वयक एवं चुनाव प्रभारी डॉ. अभिषेक वर्मा के तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित उनके निजी आवास पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में 110 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें योग साधक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि भी शामिल थे।
योग का महत्व
डॉ. वर्मा, श्रीमती अंका वर्मा, राजकुमारी निकोल वर्मा एवं युवराज आदितेश्वर वर्मा सहित वर्मा परिवार के सभी सदस्यों ने पारंपरिक सनातनी विधि से योग, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। प्रतिष्ठित योगाचार्यों ने उपस्थितजनों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की महत्ता बताई।
योग की आवश्यकता
अपने संबोधन में डॉ. अभिषेक वर्मा ने कहा, “योग भारत की सनातन परंपरा की वैज्ञानिक देन है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने विश्व पटल पर स्थापित किया है। शिवसेना (NDA) के लोकप्रिय नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी योग को जन-जन तक पहुँचाने और इसे जनआंदोलन बनाने का कार्य कर रही है।” उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि “योग केवल एक दिन की क्रिया नहीं, बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना आज के युग की आवश्यकता है।”
श्रीमती अंका वर्मा ने कहा, “योग ने मुझे मातृत्व, व्यवसाय और अध्यात्म में संतुलन बनाना सिखाया—यह मेरे जीवन का आंतरिक मार्गदर्शक बन गया है।”
राजकुमारी निकोल वर्मा ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में योग मुझे मानसिक शांति और स्थिरता देता है—यह मेरा आत्मबल है।”
कार्यक्रम का समापन वैदिक मंत्रोच्चार, प्रसाद वितरण और योग को जीवन में अपनाने की प्रतिज्ञा के साथ हुआ। यह आयोजन राष्ट्रभक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जागरूकता का अद्भुत संगम साबित हुआ।