Read the latest North India news and top headlines from Delhi, Uttar Pradesh, Punjab, Haryana, Rajasthan, Himachal Pradesh, Uttarakhand and Jammu & Kashmir. Stay informed with coverage on politics, crime, business, education, weather, culture and major regional developments, only on Indian FastTrack.
एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी एटीएस ने यूपी के अमरोहा और महाराष्ट्र के ठाणे जिले से अजमल अली और उसामा माज को गिरफ्तार किया है। दोनों ‘Reviving Islam’ नामक सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे इस ग्रुप के 3 एडमिन सहित 400 पाकिस्तानी सदस्य बताए जा रहे हैं।
न्यूज़ डेस्क मुंबई: एंटी टेररिस्ट स्क्वाड यानी ATS ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। यूपी के अमरोहा और महाराष्ट्र के ठाणे जिले से अजमल अली और उसामा माज नामक दो युवकों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि ये दोनों ‘Reviving Islam‘ नामक एक सोशल मीडिया ग्रुप से जुड़े थे, जिसमें 400 से ज्यादा पाकिस्तानी मेंबरों में 3 एडमिन शामिल हैं। इस ग्रुप के जरिए दोनों युवक राष्ट्र विरोधी बातें और गैर-मुस्लिमों के खिलाफ कट्टरपंथी सोच फैलाते थे।
एटीएस कर रही है जांच
एटीएस की जांच में पता चला है कि ये युवक पाकिस्तान के नागरिकों से सोशल मीडिया के जरिए लगातार कॉन्टैक्ट में थे। इस ग्रुप में चुनी हुई सरकार को गिराने और देश में शरिया कानून लागू करने जैसी बातें होती थीं। फिलहाल, एटीएस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
इससे पहले एटीएस ने 2 जून को ठाणे के पडघा और बोरीवली में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। ATS ने मुंबई, ठाणे, भिवंडी और अन्य जिलों में 15 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई प्रतिबंधित संगठन सिमी (SIMI) के पूर्व पदाधिकारी और ISIS महाराष्ट्र मॉड्यूल केस के मेन एक्यूज्ड साकिब नाचन के ठिकानों समेत उसके कॉन्टैक्ट में रहे कई अन्य संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। छापेमारी सिर्फ साकिब नाचन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके कॉन्टैक्ट में रहे या उससे जुड़े अन्य संदिग्धों पर भी एजेंसी की नजर है।
तिहाड़ जेल में कैद
नाचन कुख्यात आतंकी अबू सुलेमान, अबू सुल्तान और मोहम्मद भाई जैसे दहशतगर्दों के सीधे कॉन्टैक्ट में था। रिपोर्ट के मुताबिक, नाचन ने ही अन्य सदस्यों को बाकी आतंकियों को शपथ दिलाई और साजिश को अंजाम देने की योजना बनाई थी। फिलहाल, साकिब नाचन तिहाड़ जेल में कैद है।
Free Computer Training Scheme: डिजिटल भारत मिशन के तहत भारत सरकार ने फ्रि कंप्यूटर कोर्स के साथ 15 हजार रुपये के आर्थिक मदद देने ऐलान कर दिया है। यह स्कॉलरशिप 12वीं पास युवाओं के लिए आरक्षित कर दी गई है। आईये जानते हैं कैसे और कहां करें आवेदन?
डिजिटल डेस्क नई दिल्ली: भारत सरकार ने डिजिटल भारत मिशन को आगे बढ़ाते हुए 12वीं पास युवाओं के लिए एक बेहद लाभकारी योजना की शुरुआत की है। फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना 2025 के अंतर्गत अब युवाओं को मुफ्त में कंप्यूटर कोर्स करने का अवसर मिलेगा, साथ ही 15000 रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। यह पहल विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
बेसिक से एडवांस
इस योजना के माध्यम से छात्र न केवल बेसिक से लेकर एडवांस कंप्यूटर स्किल्स सीख सकेंगे, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। यह मदद सीधे छात्र के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाऐंगे ताकि वे कोर्स के दौरान आर्थिक बोझ से मुक्त रह सकें।
किन्हें मिलेगा योजना का लाभ?
फ्री कंप्यूटर ट्रेनिंग योजना का लाभ केवल उन्हीं युवाओं को मिलेगा जो भारत के नागरिक होंगे। जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है और जिनकी उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच होगी। इसके साथ ही, परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और आवेदक ने पहले से किसी संस्थान से कंप्यूटर कोर्स नहीं किया होना चाहिए।
इस योजना के अंतर्गत युवाओं को माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस, इंटरनेट का उपयोग, डिजिटल लेन-देन, साइबर सुरक्षा, टाइपिंग, ईमेलिंग और सरकारी पोर्टल्स पर कार्य करना सिखाया जाएगा। कोर्स की अवधि 3 से 6 महीने की होगी और यह पूरी तरह से सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा कराया जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया कैसे करें?
इच्छुक उम्मीदवार अपने राज्य की स्किल डेवलपमेंट या श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर “Free Computer Training Scheme” दर्शाया गया होगा। उसी पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन करें। इसी के साथ जरूरी दस्तावेज जैसे – आधार कार्ड, 12वीं की मार्कशीट, फोटो, बैंक पासबुक आदि अपलोड करें और आवेदन सबमिट कर दें। कुछ राज्यों में यह सुविधा CSC केंद्रों पर भी उपलब्ध हो चुकी है।
योजना के प्रमुख लाभ
योजना के तहत युवाओं को न केवल मुफ्त कंप्यूटर ट्रेनिंग दी जाएगी, बल्कि कोर्स पूरा करने के बाद एक सरकारी प्रमाणपत्र भी मिलेगा। साथ ही 15000 रुपये तक की स्कॉलरशिप और प्लेसमेंट सपोर्ट भी मुहैया कराया जाएगा, जिससे युवाओं को करियर की दिशा में बेहतर अवसर मिल सकें।
यह योजना उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में लागू हो चुकी है। अन्य राज्यों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है।
युवाओं को रोजगार में लाभ
इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली ट्रेनिंग से छात्र सरकारी और प्राइवेट सेक्टर दोनों में रोजगार के लिए तैयार होंगे। डिजिटल इंडिया, CSC केंद्र, बैंकिंग, बीमा, डेटा एंट्री और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में इन युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।
युवाओं का अनुभव और आत्मविश्वास
कई युवाओं ने बताया कि इस कोर्स के माध्यम से उन्हें न केवल टेक्निकल स्किल्स मिलीं बल्कि नौकरी पाने में भी आसानी हुई। कुछ छात्रों को स्थानीय कंपनियों में 10000 रुपये से 15000 रुपये प्रति माह की शुरुआती नौकरी भी मिली है।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिक अनिल अंबानी के खिलाफ 17 हजार करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने समन जारी कर दिया है। अंबानी को सुनवाई के लिए 5 अगस्त नई दिल्ली ईडी मुख्यालय मे हाज़िर होना होगा।
न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली: रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17 हजार करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में समन जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक अनिल अंबानी को 5 अगस्त को दिल्ली में ईडी के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
35 ठिकानों पर छापेमारी
दरअसल, पिछले हफ्ते, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 50 व्यावसायिक संस्थाओं और 25 व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये छापे मुंबई में कम से कम 35 जगहों पर मारे गए थे। यह छापेमारी 24 जुलाई को कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस के अलावा कुछ कंपनियों द्वारा करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के कई अन्य आरोपों के तहत की गई थी।
इससे जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने ईडी और दो अन्य एजेंसियों को एक रिपोर्ट दी है। यह रिपोर्ट रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा 10 हजार करोड़ के कथित डायवर्जन की जांच से जुड़ी है। सेबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने इंटरकॉर्पोरेट डिपॉजिट (ICD) के रूप में एक बड़ी रकम रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को भेजी। यह रकम CLE Pvt Ltd के जरिए भेजी गई जो एक अनडिस्क्लोज्ड रिलेटेड पार्टी कंपनी है।
मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी
जांच के दौरान CLE कंपनी के बारे में पता चला था। इस कंपनी के बारे में बहुत अटकलें लगाई जा रही थीं। यह इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। इसका ऑफिस नेहरू रोड, वाकोला, सांताक्रूज (पूर्व), मुंबई में है। रिलायंस ग्रुप के एक करीबी व्यक्ति ने सेबी की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इस मामले को 9 फरवरी को सार्वजनिक किया था। सेबी ने कोई नई खोज नहीं की है। रिलायंस इन्फ्रा का एक्सपोजर 6,500 करोड़ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 हजार करोड़ डाइवर्ट किए गए। यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है और यह तथ्यों पर आधारित नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब एक्सपोजर 6,500 करोड़ था, तो डायवर्जन 10,000 करोड़ कैसे हो सकता है? रिलायंस इन्फ्रा ने इस मामले में अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए पूरी कोशिश की। रिलायंस इन्फ्रा के करीबी व्यक्ति ने बताया कि कंपनी ने 6,500 करोड़ की पूरी राशि वसूलने के लिए समझौता किया है। यह समझौता सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज द्वारा कराई गई मध्यस्थता के जरिए हुआ। इस समझौते को बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश किया गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में अपराधियों का खात्मा हो गया है? या अपराधों का राज्य स्थापित हो गया है? या हंटर सिर्फ विरोधियों पर चला?
न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली: सत्ता जब मदान्ध हो जाती है तो वह जनसरोकार से दूर हो जाती है। भले ही उत्तरप्रदेश की योगी सरकार लाख दावे करती रहे कि उसने माफिया राज खत्म कर दिया है। अब अपराधी गुंडे गले में तख्ती लगाए कि वे सरेंडर करने आ रहे। गोली मत मारिए कहा जाए लेकिन सच तो यह है कि जाति विशेष के माफियाओं के ऊपर हाथ ही नहीं डाला गया कभी। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.
जनता के पैसों की बर्बादी
हां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने विरुद्ध सारे आपराधिक मामले वापस जरूर ले लिए। शासन का हंटर केवल विरोधियों पर चला। घर बुलडोजर से केवल विरोधियों के गिराए गए। उत्तर प्रदेश में शासन और प्रशासन का अपराधियों में तनिक भी भय नहीं है, क्योंकि सत्ता चुनावी फायदे के लिए कांवड़ यात्रियों पर जनता के पैसे बर्बाद करके हेलीकॉप्टर से फूल बरसा रही है। जिसमे प्रशासन भी शामिल है।
कांवड़ियों के द्वारा उत्पात मचाए गए। ऑटो तोड़े, कार तोड़े, ड्राइवरों को पीटा, ढाबे में खाना खाकर पैसे देने के बदले तोड़फोड़ की गई। पुलिस मूक दर्शक बनी रही। शायद ऊपर से आदेश आया था। यहां तक कि खाकी वर्दी में पुलिस अधिकारी कांवड़ उठाते देखे गए। आईएएस भी अपनी आस्था का प्रदर्शन करते दिखाई दिए ताकि मुख्यमंत्री की कृपा बनी रहे।
महिलाओं के बाथरूम मे लगे कैमरे
शासन प्रशासन की जन उपेक्षा का ही परिणाम हुआ कि यूपी में अपराधों में वृद्धि देखी गई।यहां तक कि योगी जी के चुनाव क्षेत्र गृह जिले गोरखपुर में ही तीन सौ की जगह छः सौ पुलिस ट्रेनी महिलाओं को नरकीय स्थिति में रहने को बाध्य किया गया। उनके बाथरूम में सीसीटीवी कैमरे लगाकर वीडियो बनाए जाते रहे जिस कारण ट्रेनी लड़कियों को विरोध करने को वाद्य होना पड़ा। नीचता की हद तो तब हो गई जब कुंवारी लड़कियों के प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए गए। गोरखपुर में ही अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया कि पुलिस वाले को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया।
अराजकता की हद
इसी में चंद अपराधों की फेहरिस्त देखिए। लखनऊ में एक लाडले को पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। मृत समझ कर मरने के लिए छोड़ दिया गया। तहसील के अंदर ही पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। संत कबीर नगर में सात साल की बेटी के सामने मां की हत्या हुई। महिला की अंतड़िया निकालने वाले का हाफ एनकाउंटर किया गया। दरोगा की पिस्टल छीनकर आरोपी ने फायरिंग की।
कानपुर पिटाई के डर से छठी के छात्र ने खुद को फांसी लगा ली। कानपुर के टीचर ने उसकी चेन छीन ली थी। धर्मपरिवर्तन करने वाले छांगुर ने कहा जब्त की गई संपत्ति उसकी नहीं नसरीन से पूछो। लखनऊ के अंटास मॉल में पुलिस के संरक्षण में रेस्टोरेंट के लाइसेंस पर चलाया जाता है हुक्का बार। पुलिस नीचे बैठी रहती है। सीसीटीवी से 24 घंटे होती रहती है निगरानी। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.
अराजकता की दूसरी तस्वीर
बाराबंकी में 28 साल की महिला सिपाही की हत्या कर दी गई। चेहरा जलाया गया। कौवे नोच रहे थे शव। आधी रात को घर में घुसकर किसान की लखनऊ में ही गला रेत कर हत्या की गई। डिम्पल के ड्रेस पर बोलने वाले मौलाना को अखिलेश के योद्धाओं ने कूट दिया। बीजेपी पोस्टर लगवा कर पूछ चुकी थी कि जो अपनी पत्नी की इज्जत नहीं बचा सका दूसरे की इज्जत कैसे बचाएगा?
पुलिस का आम जनता में खौफ
बीजेपी के संगीत सोम ने मंदिर का गेट तुड़वा दिया। अब दारोगा हेलीकॉप्टर में बैठकर की एंट्री पुलिस ने धड़पकड़ की शूटिंग की। देवरिया में नौ साल के बच्चे की तंत्र मंत्र के चक्कर में हत्या कर बगीचे में दफन किया गया इस मामले में पुलिस कांस्टेबल सहित तीन हुए गिरफ्तार। पति के साथ झगड़े के बाद पत्नी ने बुलाई पुलिस तो पति तीन मंजिले से कूद गया। पुलिस के हाथ पांव फूले। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने पैर पकड़ कर मांगी माफी
बुलंदशहर हिंसा में बीजेपी विधायक सहित 38 लोगों को दोषी ठहराया गया। इंस्पेक्टर की हत्या कर चौकी फूंक दी गई थी। मुकदमा रामवीर पर सजा राजवीर को। मैनपुरी में दरोगा ने पैर पकड़कर मांगी माफी क्यों कि 17 साल बाद बेगुनाह छुटे थे राजवीर। यह है यूपी की पुलिस। बेकसूरों को भेजती है जेल और यूपी के योगी आदित्यनाथ सरकार कहतीं है अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Uttar Pradesh has become a state of crime. There is no rule of law anywhere.
बिना किसी आई डी और बिना किसी मतदाता से मिले ही blo द्वारा कार्यालय में बैठकर खुद ही वोटर फॉर्म भरने का कार्य कराया जाना कत्तई उचित नहीं। वेरिफिकेशन के लिए blo को हर घर जाकर वोटरों से मिलने और उनसे भारत में रहने, उनके पिता की जन्मतिथि मांगने की बात चुनाव आयोग ने की थी। जब blo किसी मतदाता से मिलेगा ही नहीं तो सत्यापन किस बात का करेगा? बहुत ही सीनियर पत्रकार अजीत अंजुम को पता था, कि किसी भी कार्यालय में बिना अनुमति लिए कैमरामैन और माइक लेकर जाने पर उन पर सरकारी कार्यवाही में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया जा सकता है। इसीलिए वे बिना कैमरामैन और बिना माइक लिए उस कमरे में गए, जहां तमाम blo बैठे हुए मतदाताओं के सिंगल फॉर्म भर रहे थे। मजेदार बात यह हुई, कि blo फॉर्म पर सिर्फ नाम लिख रहे थे। मतदाता के पिता या पति का नाम नहीं लिख रहे थे। फिर कैसे पहचान होगी कि वोट देने वाला सही है या नही? इससे भी बड़ी मजेदार बात यह, कि जेडीएस के बड़े नेता और नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके लालू यादव के बेटे की पत्नी का नाम काट दिया गया है। एक महिला के नाम पर बने वोटर आईडी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फोटो लगा दी है। पत्नी शादी होने के बाद जब ससुराल आती है तो ससुराल की सदस्य बन जाती है। नाम इसलिए काटा गया कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। दिल्ली भारत की राजधानी और लालू यादव का पूरा परिवार बिहार के पटना में रहता है। बात वोटर लिस्ट बनाने की तो blo बिना किसी आई डी के सिंगल फॉर्म भरे और उसमें केवल मतदाता का नाम हो पिता या पति का नाम नहीं हो तो वह व्यक्ति वोट कैसे देगा? अब यही सच पुराने ख्यात पत्रकार अजीत अंजुम ने अपनी मोबाइल में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल दी। जिस पर देश भर से प्रतिक्रिया आनी स्वाभाविक है। चुनाव आयोग की तरह बिहार पुलिस भी सरकारी दबाव में है जिसने बेवजह पत्रकार अजीत अंजुम द्वारा मतदाता सूची को ऑफिस में भरे जाने का सच दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज कर दी। यानी सरकार कुछ भी कराए उसे अधिकार है। लेकिन अगर पत्रकार गलतियों को देश की जनता के सामने लाए तो गुनहगार हो गया। चुनाव आयुक्त बदल देने से कुछ नहीं होगा। क्योंकि सरकार यदि जिसे आयुक्त बनाएगी तो इसी शर्त के साथ कि वह सरकार के कहे अनुसार कार्य करे। पिछले दस साल से चुनाव आयोग के द्वारा पक्षपाती रवैया अपनाए जाने का विरोध देश भर में हो रहा है। क्योंकि चुनाव खत्म होने के बाद प्रसाइडिंग ऑफिसर फॉर्म 17 भरता है जिसमें कुल मतदाता स्त्री पुरुष और कुल पड़े हुए मत की गिनती स्त्री पुरुष अलग अलग बताना पड़ता है। बैलेट बॉक्स था या अब ई वी एम दोनों में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। उसी शाम या रात जिला मुख्यालय पर बॉक्स और फॉर्म के साथ तीनों वोटर लिस्ट लिफाफे में भरकर जमा करना होता है। दूसरे दिन ही केंद्रीय चुनाव आयोग पड़े हुए मतों का प्रतिशत बता सकता है। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में प्रथम चरण के मतदान प्रतिशत तीन अन्य चरण के मतदान होने के बाद बताने में तेरह दिन लगाए। फिर दस दिनों में क्या क्या करता रहा चुनाव आयोग? आयोग की गड़बड़ी छुपाने के लिए जल्द ही सारे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज डिलीट करने का नियम मनमाने ढंग से बना दिया गया ताकि कोर्ट में सबूत पेश करना नहीं पड़े । बीजेपी को चुनाव जीताने के लिए चुनाव आयोग बेशक बेइमानी करता है। एक ही वोटर आईडी का यूनिक नंबर कई कई राज्यों में वोटर कैसे बनाया जाता है यह तो चुनाव आयोग ही बता सकता है। चुनाव के दिन शाम पांच बजे मेन गेट बंद कर पीछे से शुरू करके कूपन नंबर एक से दिए जाने का नियम है मगर महाराष्ट्र चुनावों में इस नियम का पालन नहीं किया गया और ‘अंतिम घंटे में बीस प्रतिशत वोट पड़े’ ऐसा बता दिया गया। लाखों वोट अंतिम घंटे में पढ़ने के टोकन नंबर ही सुरक्षित नहीं किए गए। जहां तक ई वी एम हैक होने की बात है वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के सीएम थे बार बार हैकिंग और बेइमानी की बातें कहते थे। यह भी कहा कि विदेशों में जहां पढ़े लिखे लोग होते है बैलेट पेपर पर नाम पढ़कर वोट देते हैं। ईवीएम हैक करने का सच चिप बनाने वाला जापान और ईवीएम बनाने वाला अमेरिका ई वीं एम से चुनाव नहीं करता। सुप्रसिद्ध अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने भी कहा है ईवीएम सरलता से हैक किया जा सकता है। चिप लगे होने से मोबाइल फीचर्स खत्म होते ही नेट प्रोवाइडर कंपनिया ऑफिस में बैठे बैठे सिम बैन कर देते हैं जिससे नेट तो क्या आउट गोइंग और इन कमिंग कॉल बंद कर दी जाती है। चिप लगे होने से ही इसरो अपने चंद्रयान को धरती पर बैठे कंट्रोल करता है। चिप के कारण हीं अभी हाल में अंतरिक्ष में यान भेजा और सकुशल धरती पर उतारा गया। अहम प्रश्न है कि विपक्षी सवाल चुनाव आयोग से पूछते हैं तो जवाब केंद्र सरकार क्यों देने लगती है जैसे चैनल पर ज्यों हि विपक्षी नेता किसी विषय पर सरकार को कटघरे में खड़ा करता है तो एंकर तमतमा जाते हैं और सरकार की तरफ से वकालत करने लगते हैं। अरे भाई लोकतंत्र में हर किसी सरकारी विभाग की जवाबदेही होती है तो दूसरा विभाग उत्तर कैसे दे सकता है। बिहार की जनता भले नीतीश कुमार और बीजेपी को वोट नहीं दे लेकिन इतनी गारंटी ली ही जा सकती है जब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती रहेगी चुनाव में पक्षपात कर आयोग सत्ता के पक्ष में करता रहेगा।गुलामी बजाता रहेगा। ऐसे में सरकार द्वारा चुने गए चुनाव आयुक्तों और ईवीएम के रहते बीजेपी को हरा पाना जनता के लिए असंभव है। वोट मत दे जनता भले ही जीतेगी तो बीजेपी ही।
भाजपा सरकार देश भर में शिक्षा का भगवाकरण करते हुए सरकारी स्कूलों को क्यों बंद कर रही है? इसके पीछे का राज साफ है। भले ही देश की उन्नति खत्म हो जाय। लेकिन सवाल नही पूछना चाहिए।
मुंबई: शिक्षा ही परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के द्वार खोलती है। जो देश जितना ही शिक्षित है उतना ही संपन्न और खुशहाल है। शिक्षा ही विकास का मूल है। अशिक्षित समाज भीड़ बन जाता है जिसका धर्म अराजकता अंधविश्वास होता है। अनियंत्रित भीड़ विनाश का कारण बनती है। किसी ने बिल्कुल ठीक ही कहा है, देश की बर्बादी के लिए हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं।
देश में शिक्षा का भगवाकरण
विपक्ष बीजेपी सत्ता पर आरोप लगाता है कि देश में सरकार शिक्षा का भगवाकरण कर रही है जिसमें सामाजिक आर्थिक मुद्दे गायब कर दिए जा रहे। इसका प्रमाण हैं कि राजस्थान में स्कूली किताबों से महात्मा गांधी के परिवार को हटाया जा रहा है।
शिक्षा और परीक्षा का सौदा
सुप्रसिद्ध आई ए एस कोचिंग के शिक्षक विकास दिव्यकृति का कथन है, कि सत्ता में जब अनपढ़ लोग बढ़ जाते हैं तो शिक्षा और परीक्षा बिकने लगती है। देश की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर तीस से चालीस लाख में बेचे गए धनवानों को ताकि गरीब प्रतियोगी परीक्षा से बाहर चले जाएं और सरकार परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलकर डकार जाती है और जब छात्र पुनः परीक्षा की मांग करते है तो गुलाम पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसवाई जाती हैं।
उन्होंने यह भी कहा, कि शिक्षा का प्राइवेटीकरण करके माफियाओं को सौंपी जा रही जो मनमानी फीस और अन्य वस्तुएं छात्रों को बेचकर दौलत कमा रहे। आज स्कूल कॉलेज खोलना सबसे बड़ा व्यापार माना जाता है। सरकार खुद गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर रखने के लिए शिक्षा पर 18% जीएसटी लगाकर शिक्षा को महंगी कर चुकी है। सरकार ने 350 ऐसे लोगों को ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष बनाए जो पद आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को ही मिलते हैं लेकिन बिना आईएएस परीक्षा पास किए विशिष्ट विचारधारा के लोगों को आईएएस पोस्ट पर बिठा दिया गया।
विश्वविद्यालयों पर भगवा कब्जा
इतना ही नहीं आरएसएस की विचारधारा के लोगों को विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर और प्रोफेसर नियुक्त कर शिक्षा का भगवाकरण कर दिया है। ऐसे लोग यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठकर गैर विचारधारा वाले लोगों को पीएचडी में प्रवेश देने से मना कर दिया, लेकिन आंदोलन के कारण प्रवेश देने को मजबूर हो गए। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया बी एच यू या काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रोफेसर के रूप में एक सुयोग्य मुस्लिम को नियुक्त किया गया तो बीजेपी से संलग्न छात्र संघ के विरोध के कारण उन्हें हटा दिया गया या हटने को मजबूर कर दिया गया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति पढ़ाने की योजना प्रबल विरोध के चलते पीछे हटने को बाध्य कर दिया। जिससे वी सी जो घोषणा करनी पड़ी कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति नहीं पढ़ाई जाएगी। यह बहुत बड़ा प्रमाण है शिक्षा के भगवाकरण का। BJP governments saffronising and destroying education
शिक्षा के भगवाकरण के कारण ही उच्च पदों पर विशेषधारा के बैठे लोग जाति को लेकर भेदभाव किया जाता है जिस कारण बंगलुरु यूनिवर्सिटी में दस दलित प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किए जाने से सभी दलितों ने इस्तीफा दे दिया। जब शिक्षित लोग भी जाति के कारण अपमानित किए जा रहे हों, अर्थात शिक्षा क्षेत्र में जाति का बोलबाला हो जाए तो सिस्टम हिलाना जरूरी हो जाता है। दस दलित प्रोफेसरों का इस्तीफा देने की बाध्यता शिक्षा के भगवाकरण की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। जिसका अर्थ है शिक्षा पाने आने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
धर्म की राजनीति
हमारे देश में जितना संघर्ष धार्मिक स्थलों के लिए किया जा रहा है उतना ही संघर्ष यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता तो देश की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाती। बीजेपी सरकार धर्म की राजनीति के द्वारा वोट बैंक बनाने में लगी है देश समाज से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी आरएसएस और उसके एजेंट धूर्त, अज्ञानी और ढोंगी बाबा जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर धन और शरीर शोषण करते हैं। आशा राम और रामरहीम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।
सरकार जानती है कि देश में जितने अधिक अशिक्षित रहेंगे उनसे कांवड़ उठवाना, मस्जिद के सामने नाचना, गालीया देना, सोशल मीडिया में गालियां लिखने के लिए मानसिक गुलाम बनाना और पांच किलो मुफ्त अनाज और चंद सिक्के भीख में देकर वोट पाना सरल हो जाता है। BJP governments saffronising and destroying education
जबकि शिक्षित जो स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों से शिक्षा ज्ञान पाकर निकलते हैं वे संविधान पढ़ते हैं। अपने मौलिक अधिकार जानते हैं। सरकार के दायित्व क्या-क्या है की जानकारी रखते हैं। वे सत्ता से सवाल पूछने लगते हैं। सरकार की असफलता तानाशाही नफरती राजनीति जानते हैं। अपने अधिकार मांगने के लिए आंदोलन करते हैं। इसलिए “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” सीधे-सीधे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। क्योंकि स्कूल कॉलेज बंद किए जाने से मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं। उन्हें धर्म के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काना सरल होता है।
मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार
तेलंगाना जो भारत का छोटा सा नवनिर्मित राज्य हैं वहां की सरकार शिक्षा का महत्व समझती है इसलिए सिर्फ एक छात्रा के लिए ही स्कूल खोला जाता है। इसके विपरीत हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। जबकि संविधान में चौदह साल के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद करने में लगी हैं।
एक तरफ गैर बीजेपी सरकार की सोच कि एक बच्ची के लिए नियमित स्कूल खोला और पढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर 334 शिक्षकों की भर्ती आरम्भ कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्यों में पिछले दस वर्षों में लगभग नब्बे हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। मध्यप्रदेश में 29000 और उत्तर प्रदेश में 25000 स्कूल बंद किए जा चुके हैं।
राम कृष्ण का प्रदेश है उत्तर प्रदेश जहां पहले 50 छात्रों से कम होने पर स्कूल बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज करने की बात कही गई है उसका दायरा बढ़ाकर अब 70 छात्र होने पर भी सरकारी स्कूल बंद कर मर्ज किए जाने की मंशा है। यहां सवाल उठता है पांच मिल दूर तक स्कूल में लड़कियां कैसे जाएंगी? उनके अलावा गरीब लड़के भी शिक्षा बंद कर देंगे। योगी सरकार ने स्कूल बंद करने और 27308 नई मधुशाला खोलने का निर्णय किया है।
दूसरी तरफ हरियाणा सरकार का अनोखा आदेश है, कि जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे उन्हें 500 रुपए महीने फीस देनी होगी लेकिन जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाएंगे उन्हें 1100 रुपए महीने दिए जाएंगे। जिसका अर्थ है सभी सरकारी स्कूल बंद करना। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना। सब मिलाकर बीजेपी सरकारें गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। ताकि पांच किलो मुफ्त अनाज देकर वोट लिया जा सके साथ ही कांवड़ उठाने वाले की संख्या में 21% वृद्धि की संभावना है। जितने लोग कांवड़ उठाएंगे उनपर सरकार फूल बरसाकर तृप्त करेगी। प्रोत्साहित करेगी ताकि मानसिक गुलाम बने रहकर बीजेपी को वोट देते रहें।
मुफ्त शिक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला
दुखद प्रसंग यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जज ने 51 गरीब छात्रों की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। यहां सवाल उठता है कि माननीय जज को छात्रों की नहीं सरकार की चिंता अधिक है। क्या कोर्ट सरकार से सवाल नहीं कर सकती थी? कि सब कुछ मुफ्त देने के बावजूद क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्र पढ़ना ही नहीं चाहते? सरकार पता करे और गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करे।
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को पति- पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद में गुजारे- भत्ते को लेकर एक हाई प्रोफाइल केस आया। पत्नी के गुजारे भत्ते की डिमांड सूनकर कोर्ट भी हैरान, कहा तुम नौकरी कर अपना गुजारा क्यों नही कर सकती पति पर आश्रित क्यों रहना है?
न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को पति- पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद में गुजारे- भत्ते को लेकर एक हाई प्रोफाइल केस आया। मुख्य न्यायधीश (CJI) भूषण आर. गवई की बेंच के सामने इस मुद्दे को लेकर दिलचस्प बहस हुई। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने कई बड़ी टिप्पणियां कर फैसला सुरक्षित रख लिया। इस दौरान CJI गवई ने महिला को नसीहत दी कि वो पढ़ी लिखी है तो उसे पति के गुजारे- भत्ते के भरोसे नहीं रहना चाहिए। खास बात ये है कि महिला अपने केस की खुद पैरवी कर रही है।
18 महीने की शादी में करोड़ों की डिमांड
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश बी.आर गवई ने महिला से पूछा, ‘आपकी क्या मांग है?’ इस पर महिला ने कहा कि बस मुंबई वाला घर और 12 करोड़ रुपये का गुजारा भत्ता चाहिए। इस पर CJI गवई ने कहा, ‘वह घर तो कल्पतरु में है। जो अच्छे बिल्डरों में से एक है और आप तो IT एक्सपर्ट हैं, आपने MBA किया है। जबकि बेंगलुरु, हैदराबाद नौकरी के क्षेत्र में आपकी डिमांड है! कभी भी आप नौकरी शुरू कर सकती हैं तो आप नौकरी भी क्यों नहीं करतीं?’ उन्होंने यह भी कहा, कि ‘आपकी शादी सिर्फ़ 18 महीने चली और अब आप एक BMW भी चाहती हैं? 18 महीने की शादी और आप हर महीने एक करोड़ चाहती हैं।’ महिला ने जवाब दिया, ‘लेकिन वो बहुत अमीर आदमी हैं। उसने मुझे सिजोफ्रेनिया का शिकार बताकर शादी रद्द करने की मांग की।’
कोर्ट ने मांगा आयटी रिटर्न
इस दौरान पति की ओर से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने कहा, ‘उसे भी काम करना पड़ता है। हर चीज की मांग ऐसे नहीं पूरी की जा सकती।’ महिला ने सवाल किया, ‘क्या मैं सिजोफ्रेनिया से पीड़ित दिखती हूं ?’ CJI गवई ने कहा, ‘आयटी रिटर्न दाखिल करें। लेकिन समझ लीजिए कि आप उसके पिता की संपत्ति पर भी दावा नहीं कर सकतीं’ लंच के बाद फिर सुनवाई शुरू हुई। CJI गवई की बेंच ने पति का आयटी रिटर्न देखा। Wife demands Rs 12 crore for a house worth crores for divorce, court is also surprised
वरिष्ठ वकील दीवान ने कहा, ‘कृपया पूरी कॉपी दें। 2015-16 में आय ज्यादा है क्योंकि उस समय वो नौकरी करते थे। 2 करोड़ 50 लाख और 1 करोड़ का बोनस, प्रॉक्सी बिजनेस के भी आरोप हैं। चलिए इसे भी उदाहरण के तौर पर लेते हैं। वो बैलेंस शीट भी है। जिस फ्लैट में वह रह रही हैं, उसके अलावा। दो कार पार्किंग भी हैं। वह उससे कमाई कर सकती है।’ इस पर मुख्य न्यायाधीश गवई ने हामी भरी, ‘हां हां, मुंबई में सभी जगहों से पैसा कमाया जा सकता है।’ दीवान ने आगे कहा, ‘जिस BMW का वह सपना देख रही हैं, वह 10 साल पुरानी है और बहुत पहले ही बंद हो चुकी है।’ Wife demands Rs 12 crore for a house worth crores for divorce, court is also surprised
खुद कमाकर खाइए
CJI गवई मे महिला से कहा, ‘या तो आपको बिना किसी बोझ के फ्लैट मिलेगा या कुछ भी नहीं मिलेगा। जब आप उच्च शिक्षित हों और अपनी इच्छा से काम न करने का फैसला करें।या तो आप वो 4 करोड़ रुपये ले लें, पुणे/हैदराबाद/बेंगलुरु में कोई अच्छी नौकरी ढूंढ लें। आईटी केंद्रों में आप जैसी होनहार लोगों की मांग है।’ इस पर याचिकाकर्ता महिला ने शिकायत की, ‘मेरी नौकरी भी इन्हीं ने छुड़वा दी। मुझ पर FIR भी दर्ज करा दी।’ इस पर मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, ‘आप FIR दे दीजिए, हम वो भी रद्द कर देंगे। हम निर्देश देंगे कि कोई भी पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं करेगा।’ इस पर पति की वकील ने बताया कि ये तो समझौते में है ही। फैसला सुरक्षित रखते हुए CJI गवई ने महिला से कहा, ‘आपको खुद मांगना नहीं चाहिए बल्कि, आपको खुदको कमाकर खाना चाहिए।’
न्यूज़ डेस्क महाराष्ट्र/पालघर: मुंबई से सटे विरार पश्चिम की एक रेसिडेंटल बिल्डिंग में ब्लिंकिट कंपनी के एक डिलीवरी एजेंट द्वारा लिफ्ट में पेशाब करने की शर्मनाक घटना सामने आई है। यह घटना पालघर जिले के विरार पश्चिम में सीडी गुरुदेव बिल्डिंग की है, जहां पूरी वारदात की घटना सोसायटी में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
सीसीटीवी कैमरे मे क्या देखा?
सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि डिलीवरी बॉय बाएं हाथ में एक पार्सल लेकर लिफ्ट के अंदर गया। इसके बाद वह कैमरे से बचने की कोशिश करते हुए पैंट की चेन खोला और लिफ्ट के सामने के गेट पर ही पेशाब करने लगा। दोपहर का समय होने के कारण सोसायटी में सन्नाटा छाया हुआ था। मौका पाकर डिलीवरी बॉय ने पार्सल दिया और वहां से निकल गया।
विरार पश्चिम स्थित तुलिंज पुलिस स्टेशन में इस मामले को लेकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की और आगे की जांच शुरू कर दी। फिलहाल इस मामले में ब्लिंकिट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जहां लोग इस असभ्य व्यवहार की कड़ी निंदा कर रहे हैं।
मुंबई से सटे नालासोपारा में एक पत्नी ने अपने प्रेमी संग मिलकर अपने ही पति को मौत के घाट उतार दिया है। और तो और पुलिस को चकमा देने के लिए पति को दफना कर उसके उपर टाइल्स लगवा दिया था। आरोपी फरार .. Husband murdered with lover, buried and covered with tiles
न्यूज़ डेस्क महाराष्ट्र/ पालघर: मुंबई से सटे नालासोपारा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड की मदद से अपने ही पति की बेरहमी से हत्या कर दी और उसके शव को घर में ही दफना दिया। यह चौंकाने वाली वारदात नालासोपारा पूर्व के गंगड़ीपाड़ा इलाके में स्थित साई वेल्फेयर सोसायटी के एक चॉल में हुई है। हत्या के बाद, महिला ने अपने देवर से ही उस जगह पर टाइल्स लगवाकर शव को छिपा दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
बताया जा रहा है कि मृतक विजय की पत्नी गुड़िया का मोनू से अफेयर चल रहा था और विजय, उन दोनों के अवैध रिश्ते में रुकावट बन रहा था, इसलिए दोनों ने मिलकर प्लान बनाया और बेरहमी से विजय की हत्या कर दी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने वारदात को छुपाने के लिए लाश को घर में ही गाड़ दिया। हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए महिला ने अपने देवर से उस जगह पर टाइल्स लगवाई, ताकि वे किसी की नजरों में न आए।
वहीं, इस घटना के बाद जब परिवार वालों ने विजय के बारे में पूछा तो गुड़िया ने अपने पति के बारे में उन्हें लगातार गुमराह किया। कई दिन गुजर जाने के बाद परिवार के लोगों ने विजय के घर का दरवाजा तोड़ा तो उन्हें घर से बदबू आने लगी। इसके बाद उन्होंने जमीन की खुदाई की तो विजय का शव बरामद किया गया।
मोबाइल के मैसेज ने खोला राज़
यह घटना करीब 15 दिन पहले घटी थी लेकिन दो दिन पहले महिला के मोबाइल में कुछ संदिग्ध मैसेज मिलने के बाद पुलिस को शक हुआ। पूछताछ के दौरान इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा हुआ। लेकिन महिला फरार होने में कामयाब हो गई। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने शव को बाहर निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल आरोपी महिला और उसका प्रेमी फरार है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों की तलाश के लिए टीमें गठित की गई हैं और जल्द ही गिरफ्तारी की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों के जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़। पूरे इलाके को घेरा। मौके पर अतिरिक्त जवानों को भेजा गया है। इंडियन आर्मी ने दी जानकारी
नेशनल डेस्क Encounter in Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में रविवार को सुरक्षा बलों के जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई है। बताया गया, कि घटना खानकू वन क्षेत्र की है। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना को गुप्त सूचना मिली थी कि दच्छन और नागसेनी क्षेत्रों के बीच आतंकवादियों की मौजूदगी है। इसके बाद इंडियन आर्मी और पुलिस सहित सुरक्षा बलों की टीम ने घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस बीच आतंकियों के साथ गोलिबारी शुरू हो गई।
बताया गया, कि सेना के जवानों को करीब आता हुआ देख आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने भी गोली चलाकर जवाब दिया। दोनों ओर से कुछ देर तक गोलीबारी चली। रविवार शाम तक किसी के मरने की खबर नहीं है। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर रखा है। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में अतिरिक्त बल भेज दिया गया है। आतंकवादियों की तलाश के लिए तलाशी अभियान जारी है।