Category: Mumbai Crime

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  • 15 साल की देरी पर MahaRERA सख्त, शेठ डेवलपर्स को ब्याज देने का आदेश

    15 साल की देरी पर MahaRERA सख्त, शेठ डेवलपर्स को ब्याज देने का आदेश

    मालाड ईस्ट के शेठ ब्लू आइवी प्रोजेक्ट में 15 साल की देरी पर MahaRERA ने शेठ डेवलपर्स को 15 फ्लैट खरीदारों को ब्याज देने और बिक्री समझौता रजिस्टर करने का आदेश दिया।

    मुंबई: मालाड ईस्ट में शेठ डेवलपर्स की आवासीय परियोजना शेठ ब्लू आइवी में करीब 15 साल की देरी को गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (MahaRERA) ने बड़ा फैसला सुनाया है। MahaRERA ने बिल्डर को आदेश दिया है कि वह 15 फ्लैट खरीदारों को जुलाई 2022 से फ्लैट का कब्जा मिलने तक ब्याज दे और साल 2010 से लंबित बिक्री समझौतों को तुरंत निष्पादित कर रजिस्टर करे।

    क्या है पूरा मामला

    शेठ ब्लू आइवी प्रोजेक्ट, जिसे शुरुआत में वसंत पर्ल नाम से बेचा गया था, उसमें 2010 से 2012 के बीच 15 लोगों ने फ्लैट बुक किए थे। उस समय बिल्डर ने 36 महीने में निर्माण पूरा करने और 42 महीने में कब्जा देने का वादा किया था। लेकिन सालों बीतने के बावजूद खरीदारों को न तो फ्लैट मिले और न ही पक्का जवाब।

    लंबे इंतजार और परेशानी के बाद इन सभी खरीदारों ने 2023 से 2025 के बीच MahaRERA का दरवाजा खटखटाया।

    खरीदारों की शिकायत क्या थी

    खरीदारों की ओर से पेश वकीलों गिरीश केडिया और हर्षद भडभडे ने बताया कि बिल्डर ने सिर्फ अलॉटमेंट लेटर दिया था, लेकिन बिक्री का एग्रीमेंट कभी रजिस्टर नहीं किया।
    इस बीच प्रोजेक्ट का लेआउट बदला गया, फ्लैट नंबर बदले गए और कब्जे की तारीख का कोई जिक्र नहीं किया गया।

    खरीदारों का कहना था कि

    • 2013 से 2023 तक उन्होंने कई बार जानकारी मांगी
    • साइट पर लंबे समय तक काम बंद रहा
    • कई खरीदार किराए के मकानों में रहने को मजबूर हुए
    • आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव झेलना पड़ा

    इसी आधार पर उन्होंने 42.8 लाख रुपये से लेकर 2.28 करोड़ रुपये तक मुआवजे की मांग की थी।

    बिल्डर का पक्ष

    MahaRERA में शेठ डेवलपर्स ने सफाई देते हुए कहा कि प्रोजेक्ट बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले की वजह से करीब छह साल तक अटका रहा। कोर्ट के आदेश के चलते न तो निर्माण हो सका और न ही एग्रीमेंट रजिस्टर हो पाए।
    बिल्डर के मुताबिक अप्रैल 2024 में काम दोबारा शुरू हुआ।

    कंपनी ने यह भी कहा कि उसने सभी खरीदारों को रिफंड का विकल्प दिया था, लेकिन शिकायतकर्ताओं ने प्रोजेक्ट में बने रहने का फैसला किया।

    प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति

    MahaRERA की वेबसाइट के अनुसार

    • पहले प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीख: 30 जून 2022
    • संशोधित तारीख: 30 जून 2023
    • अब नई डेडलाइन: 28 नवंबर 2027

    यानी खरीदारों को अभी भी और इंतजार करना होगा।

    MahaRERA का फैसला

    MahaRERA के अध्यक्ष मनोज सौनिक ने 11 दिसंबर को आदेश दिया कि

    • बिल्डर को जुलाई 2022 से कब्जा मिलने तक खरीदारों को ब्याज देना होगा
    • जितनी रकम खरीदारों ने दी है, उस पर ब्याज लागू होगा
    • सभी लंबित बिक्री समझौतों को तुरंत निष्पादित और रजिस्टर करना होगा

    हालांकि, MahaRERA ने देरी के लिए अलग से मुआवजा और बढ़ी हुई स्टांप ड्यूटी की भरपाई की मांग को खारिज कर दिया।

    क्यों अहम है यह फैसला

    यह आदेश उन हजारों घर खरीदारों के लिए अहम माना जा रहा है, जो सालों से अटके प्रोजेक्ट्स में फंसे हैं। इससे यह साफ संदेश गया है कि लंबी देरी पर बिल्डरों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।


    FAQ

    Q1. MahaRERA ने बिल्डर को क्या आदेश दिया है?
    बिल्डर को जुलाई 2022 से कब्जा मिलने तक ब्याज देने और बिक्री समझौते रजिस्टर करने का आदेश दिया गया है।

    Q2. कितने खरीदारों को राहत मिली है?
    कुल 15 फ्लैट खरीदारों को यह राहत मिली है।

    Q3. क्या खरीदारों को मुआवजा मिलेगा?
    नहीं, MahaRERA ने अलग से मुआवजे और स्टांप ड्यूटी की मांग खारिज कर दी है।

    Q4. प्रोजेक्ट कब तक पूरा होना है?
    नई समयसीमा के अनुसार 28 नवंबर 2027 तक।

  • मालाड के होटल रूम में मिला छुपा कैमरा, कपल ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

    मालाड के होटल रूम में मिला छुपा कैमरा, कपल ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

    मुंबई के मालाड ईस्ट स्थित एक होटल के कमरे में इलेक्ट्रिक सॉकेट के अंदर छुपा कैमरा मिलने से हड़कंप मच गया। कपल की शिकायत पर दिंडोशी पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की है।

    मुंबई: मालाड ईस्ट इलाके में एक होटल के कमरे में छुपा कैमरा मिलने से मेहमानों की सुरक्षा और निजता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक युवा कपल ने इलेक्ट्रिक सॉकेट के अंदर लगे मिनी स्पाई कैमरे को देखकर तुरंत पुलिस को सूचना दी। दिंडोशी पुलिस ने डिवाइस जब्त कर फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए हैं और मामले की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।

    मालाड ईस्ट के होटल में चौंकाने वाली घटना

    यह घटना दफ्तरी रोड, मालाड ईस्ट स्थित प्रगति शॉपिंग सेंटर की तीसरी मंज़िल पर मौजूद A1 होटल की है। शिकायतकर्ता 21 वर्षीय युवती अपने मंगेतर के साथ 27 दिसंबर की रात करीब 9:40 बजे होटल में चेक-इन कर रूम नंबर A-3 में ठहरी थी।

    अगली सुबह करीब 9 बजे, युवती की नज़र कमरे के दरवाज़े के पास एक ऐसे इलेक्ट्रिक सॉकेट पर पड़ी, जो इस्तेमाल में नहीं था। वहां से एक पतली वायर बाहर निकली हुई दिखाई दी।

    इलेक्ट्रिक प्लग के अंदर छुपा था मिनी कैमरा

    सॉकेट की बारीकी से जांच करने पर कपल को उसके अंदर मिनी स्पाई कैमरा छुपा हुआ मिला। यह देखते ही दोनों घबरा गए और तुरंत 103 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी।

    दिंडोशी पुलिस मौके पर पहुंची और कैमरे को जब्त कर लिया।

    होटल मालिक और स्टाफ पर गंभीर आरोप

    पुलिस अधिकारी के मुताबिक, युवती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि
    होटल मालिक, मैनेजर और अन्य संबंधित लोगों ने जानबूझकर कैमरा लगाया, ताकि होटल में ठहरने वाले मेहमानों की बिना अनुमति गुप्त रूप से रिकॉर्डिंग की जा सके।

    आईटी एक्ट और बीएनएस के तहत केस दर्ज

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
    जब्त किए गए कैमरे को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

    फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पुलिस यह जांच कर रही है कि

    • क्या होटल के अन्य कमरों में भी ऐसे कैमरे लगे हैं?
    • क्या पहले भी मेहमानों की रिकॉर्डिंग की गई है?

    होटल मैनेजमेंट से संपर्क नहीं

    मामले पर होटल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन होटल स्टाफ ने मैनेजर का संपर्क नंबर देने से इनकार कर दिया।

    स्पाई कैमरा कैसे पहचानें? (Safety Tips)

    साइबर और सुरक्षा विशेषज्ञ दीप मेहता (Ernst & Young LLP) ने कुछ आसान उपाय बताए हैं:

    • 📱 फोन कॉल टेस्ट: संदिग्ध जगह के पास कॉल करें, अगर आवाज़ में रुकावट आए तो डिवाइस हो सकता है
    • 📻 FM रेडियो: फोन का FM रेडियो चालू कर सॉकेट, बाथरूम या दीवारों के पास रखें
    • 🔍 बग डिटेक्टर डिवाइस: अक्सर यात्रा करने वालों को पोर्टेबल डिटेक्टर साथ रखना चाहिए
    • इलेक्ट्रिक टेस्टर: सॉकेट के पास लगाने से नकली या डमी फिटिंग का पता चलता है

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. घटना कहां हुई?
    मालाड ईस्ट, दफ्तरी रोड स्थित A1 होटल में।

    Q2. कैमरा कहां छुपाया गया था?
    कमरे के दरवाज़े के पास एक अनयूज्ड इलेक्ट्रिक सॉकेट के अंदर।

    Q3. पुलिस ने कौन-सी कार्रवाई की?
    कैमरा जब्त कर फॉरेंसिक जांच भेजा गया और केस दर्ज किया गया।

    Q4. क्या कोई गिरफ्तारी हुई है?
    फिलहाल नहीं, जांच जारी है।

    Q5. होटल में ठहरते समय क्या सावधानी रखें?
    कमरे के सॉकेट, बाथरूम, दीवारों और लाइट फिटिंग की जांच ज़रूर करें।

  • वसई किले में शूटिंग के दौरान चूल्हा जलाने पर प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज

    वसई किले में शूटिंग के दौरान चूल्हा जलाने पर प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज

    महाराष्ट्र के ऐतिहासिक वसई किले में फिल्म शूटिंग के दौरान चूल्हा जलाने का मामला सामने आया है। ASI के नियमों के उल्लंघन पर वसई पुलिस ने प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया है। जांच जारी है।

    वसई (पालघर): ऐतिहासिक वसई किले में फिल्म शूटिंग के दौरान लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक निजी प्रोडक्शन कंपनी द्वारा फ्रांसिस्कन चर्च के अंदर चूल्हा जलाने के आरोप में वसई पुलिस ने केस दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि चूल्हा उन पत्थरों पर जलाया गया, जिन पर सैकड़ों साल पुराने शिलालेख मौजूद हैं। इस घटना से पुरातत्व प्रेमियों और स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी है।

    ASI के नियमों का उल्लंघन

    पुलिस के मुताबिक, मुंबई के मालाड स्थित ‘आरंभ एंटरटेनमेंट’ नाम की प्रोडक्शन कंपनी को 18 और 19 दिसंबर को वसई किले में शूटिंग की अनुमति दी गई थी। यह अनुमति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सख्त शर्तों के साथ दी गई थी।
    इसके बावजूद शूटिंग के दौरान फ्रांसिस्कन चर्च के भीतर चूल्हा जलाया गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन माना गया है।

    संरक्षित स्मारक को खतरा

    पुरातत्व विभाग ने अपनी शिकायत में कहा है कि यह कृत्य प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 का उल्लंघन है। जिस स्थान पर चूल्हा जलाया गया, वह ऐतिहासिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
    यही वह स्थान बताया जाता है, जहां मराठों और पुर्तगालियों के बीच ऐतिहासिक संधि वार्ता हुई थी।

    वसई किले का ऐतिहासिक महत्व

    1536 में पुर्तगालियों द्वारा निर्मित वसई किला 109 एकड़ में फैला हुआ है। तीन तरफ से समुद्र और दलदली इलाके से घिरा यह किला करीब 30 फीट ऊंची दीवारों से सुरक्षित है।
    बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापति चिमाजी अप्पा ने इसे जीतकर मराठा शौर्य का प्रतीक बना दिया। किले में फ्रांसिस्कन चर्च समेत कई रोमन कैथोलिक मिशनों के अवशेष मौजूद हैं।

    पहले भी हो चुकी है लापरवाही

    स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि इससे पहले भी फिल्म ‘कांतारा 2’ की शूटिंग के दौरान किले के भीतर जलती मशालें फेंके जाने का आरोप लगा था। उस समय भी शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    विरासत प्रेमियों का आरोप

    हेरिटेज एक्टिविस्ट्स का आरोप है कि शूटिंग फीस के बदले नियमों की अनदेखी की जाती है।
    एक स्थानीय इतिहास प्रेमी ने कहा,

    “अगर ऐसे ही लापरवाही चलती रही, तो वसई किले की ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी।”

    पुलिस जांच जारी

    वसई पुलिस ने पुष्टि की है कि प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ संरक्षित स्मारक को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    FAQ

    Q1. वसई किले में क्या घटना हुई?
    फिल्म शूटिंग के दौरान फ्रांसिस्कन चर्च के अंदर चूल्हा जलाया गया।

    Q2. किसके खिलाफ केस दर्ज हुआ है?
    मुंबई की आरंभ एंटरटेनमेंट नामक प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ।

    Q3. किस कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है?
    प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत।

    Q4. पुलिस जांच की स्थिति क्या है?
    मामले की जांच जारी है।

  • फर्जी पुलिस बनकर 99 लाख की वसूली, मालाड के कारोबारी को आत्महत्या तक पहुंचाया

    फर्जी पुलिस बनकर 99 लाख की वसूली, मालाड के कारोबारी को आत्महत्या तक पहुंचाया

    मुंबई के मालाड में फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर 99 लाख रुपये की उगाही करने वाले तीन ठगों को दिंडोशी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पीड़ित गैस एजेंसी मालिक डर के कारण आत्महत्या करने दहाणू स्टेशन तक पहुंच गया था।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में फर्जी पुलिस अधिकारियों का आतंक एक बार फिर सामने आया है। मालाड के एक एलपीजी एजेंसी मालिक से 99 लाख रुपये की उगाही करने वाले तीन ठगों को दिंडोशी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन ठगों की धमकियों से इतना डर फैल गया कि 39 वर्षीय पीड़ित घर छोड़कर दहाणू रेलवे स्टेशन पर आत्महत्या करने की सोच रहा था, जहां पुलिस ने समय रहते उसकी जान बचा ली।

    पत्नी की शिकायत से खुला पूरा मामला

    यह मामला तब सामने आया जब 15 दिसंबर को पीड़ित की पत्नी ने दिंडोशी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनके पति अचानक घर छोड़कर चले गए हैं। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वह गंभीर मानसिक दबाव में था और खुद को फर्जी केस में फंसाया जाने से डर रहा था।

    गणपति पंडाल से शुरू हुई ठगी की कहानी

    पुलिस के मुताबिक, ठगी की शुरुआत सितंबर में हुई थी। पीड़ित ने अपने परिचित प्रवीण खेडेकर को गणपति पंडाल के लिए करीब ₹10,500 उधार दिए थे। कुछ समय बाद खेडेकर ने उससे ₹50,000 और मांगा जिसमें उसने मोबाइल ट्रांसफर एक अन्य नंबर पर करवाया।

    यहीं से शुरू हुआ फर्जी पुलिस कॉल का खेल

    “तुम पर मर्डर का शक है” – फर्जी जॉइंट सीपी की धमकी

    पैसे ट्रांसफर करने के बाद पीड़ित को एक कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस बताया और कहा कि
    ₹10,500 की रकम सुपारी देकर हत्या कराने की एडवांस पेमेंट है।
    इस धमकी से पीड़ित पूरी तरह डर गया।

    “तुम्हें बचाने के लिए हत्या कर दी” – फिर मांगे 2 लाख

    कुछ दिन बाद एक और कॉल आया, जिसमें ठग ने कहा कि खेडेकर को पीड़ित को बचाने के लिए मार दिया गया है, और अब इसके बदले ₹2 लाख देने होंगे
    इसके बाद लगातार कॉल आने लगे। हर बार रकम बढ़ती गई —
    ₹50,000 से शुरू होकर ₹7 लाख तक

    मुंबई पुलिस कमिश्नर बनकर मांगे 20 लाख

    ठगों में से एक ने खुद को “अविनाश शिंदे” नाम का पुलिस अधिकारी बताया। बाद में तो हद तब हो गई जब एक आरोपी ने खुद को मुंबई पुलिस कमिश्नर बताते हुए तुरंत गिरफ्तारी रोकने के लिए ₹20 लाख की मांग कर डाली।

    बुजुर्ग के जरिए होती थी नकद वसूली

    पीड़ित ने पुलिस को बताया कि जब भी वह नकद पैसे देता था, तो एक बुजुर्ग व्यक्ति सार्वजनिक गार्डन में आकर पैसे ले जाता था
    जांच में पता चला कि कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन उसी बुजुर्ग के मोबाइल से किए गए थे।

    कर्ज लेकर दिए 99 लाख रुपये

    डर और धमकियों के चलते पीड़ित ने

    • करीब ₹80 लाख नकद
    • और ₹19 लाख ऑनलाइन ट्रांसफर
      किए। इसके लिए उसने फाइनेंस कंपनियों से कर्ज भी लिया। फिर भी उसे लगने लगा कि उसकी गिरफ्तारी तय है।

    आत्महत्या के इरादे से दहाणू पहुंचा पीड़ित

    15 दिसंबर को वह घर छोड़कर चला गया। पुलिस ने उसे दहाणू रेलवे स्टेशन पर पाया, जहां वह आत्महत्या करने की हिम्मत जुटा रहा था
    एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, “वह इतना डर चुका था कि उसे मरना ही एकमात्र रास्ता लग रहा था।”

    CDR जांच से तीनों आरोपी गिरफ्तार

    पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले, जिससे

    • प्रवीण खेडेकर,
    • प्रवीण काटे
      और एक अन्य साथी का नाम सामने आया।
      तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बुजुर्ग ने दावा किया कि उसे ठगी की जानकारी नहीं थी और उसने सिर्फ अपना फोन इस्तेमाल करने दिया था।

    कानूनी कार्रवाई

    दिंडोशी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 (उगाही) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच जारी है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: पीड़ित कौन है?
    A: मालाड का 39 वर्षीय एलपीजी गैस एजेंसी मालिक।

    Q2: ठगों ने कितनी रकम वसूली?
    A: कुल ₹99 लाख।

    Q3: पुलिस ने कितने लोगों को गिरफ्तार किया?
    A: तीन आरोपियों को।

    Q4: मामला किस थाने में दर्ज है?
    A: दिंडोशी पुलिस थाना।

  • महाभारत के युधिष्ठिर साइबर ठगी के शिकार, मुंबई पुलिस ने बचाए ₹98 हजार

    महाभारत के युधिष्ठिर साइबर ठगी के शिकार, मुंबई पुलिस ने बचाए ₹98 हजार

    महाभारत फेम अभिनेता गजेंद्र चौहान साइबर फ्रॉड का शिकार हुए। फेसबुक विज्ञापन के जरिए ₹98 हजार की ठगी हुई, लेकिन मुंबई पुलिस की तत्परता से पूरी रकम वापस मिली।

    मुंबई: टीवी धारावाहिक महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाले अभिनेता गजेंद्र सिंह चौहान साइबर ठगी का शिकार हो गए। फेसबुक पर दिखे एक फर्जी विज्ञापन के झांसे में आकर उनके बैंक खाते से ₹98,000 कट गए। हालांकि, ओशिवारा पुलिस की साइबर सेल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरी रकम कुछ ही समय में अभिनेता के खाते में वापस करा दी।

    📍 कैसे हुआ साइबर फ्रॉड?

    69 वर्षीय गजेंद्र चौहान अंधेरी वेस्ट के लोखंडवाला-ओशिवारा इलाके में रहते हैं।
    10 दिसंबर को उन्होंने फेसबुक पर
    👉 डी-मार्ट के नाम से ड्राई फ्रूट्स पर भारी छूट का एक विज्ञापन देखा

    • लिंक पर क्लिक कर ऑर्डर किया
    • मोबाइल पर OTP आया
    • कुछ ही देर बाद मैसेज मिला कि
      👉 HDFC बैंक अकाउंट से ₹98,000 डेबिट हो गए

    तभी उन्हें समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

    🚨 तुरंत की पुलिस से शिकायत

    धोखाधड़ी का एहसास होते ही
    👉 गजेंद्र चौहान ने 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज की
    👉 साथ ही ओशिवारा पुलिस से संपर्क किया

    पुलिस ने बिना देरी किए केस की जांच शुरू कर दी।

    👮‍♂️ मुंबई पुलिस की फुर्ती लाई रंग

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय चव्हाण और पुलिस निरीक्षक आनंद पगारे के मार्गदर्शन में
    ओशिवारा पुलिस की साइबर टीम ने तेजी से कार्रवाई की।

    इस टीम में शामिल थे:

    • साइबर सब-इंस्पेक्टर शरद देवरे
    • एपीआई अशोक कोंडे
    • कॉन्स्टेबल विक्रम सरनोबत

    जांच में सामने आया कि
    👉 ठगी की रकम Razorpay के जरिए Croma से जुड़े एक अकाउंट में ट्रांसफर हुई थी।

    💰 ऐसे वापस मिले पूरे ₹98,000

    पुलिस ने तुरंत
    👉 HDFC बैंक
    👉 Razorpay
    👉 Croma

    के नोडल अधिकारियों से ई-मेल के जरिए संपर्क किया।
    समय रहते ट्रांजैक्शन होल्ड कराया गया और
    👉 पूरी रकम अभिनेता के अकाउंट में वापस ट्रांसफर कर दी गई।

    🙏 अभिनेता ने पुलिस को कहा धन्यवाद

    गजेंद्र चौहान ने
    👉 मुंबई पुलिस
    👉 ओशिवारा पुलिस की साइबर टीम

    की तारीफ करते हुए कहा कि
    “अगर समय पर कार्रवाई न होती तो पैसा वापस मिलना मुश्किल था।”

    🎭 गजेंद्र सिंह चौहान के बारे में

    • जन्म: 10 अक्टूबर 1956, दिल्ली
    • शिक्षा:
    • रामजस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, दिल्ली
    • AIIMS से रेडियोग्राफी में डिप्लोमा
    • अभिनय प्रशिक्षण: रोशन तनेजा एक्टिंग स्कूल, मुंबई

    करियर:

    • टीवी डेब्यू: Paying Guest (1983)
    • चर्चित सीरियल: राजनी, एयर होस्टेस, अदालत
    • फिल्म डेब्यू: मैं चुप नहीं रहूंगी (1986)
    • सबसे बड़ी पहचान: बी.आर. चोपड़ा की महाभारत में युधिष्ठिर

    ⚠️ साइबर सेफ्टी पर पुलिस की सलाह

    • सोशल मीडिया विज्ञापनों पर आंख बंद कर भरोसा न करें
    • अनजान लिंक पर क्लिक न करें
    • OTP किसी से साझा न करें
    • ठगी होते ही 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें

    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. गजेंद्र चौहान के साथ कितनी रकम की ठगी हुई?
    👉 ₹98,000

    Q2. ठगी किस माध्यम से हुई?
    👉 फेसबुक पर फर्जी विज्ञापन के जरिए

    Q3. पैसा वापस कैसे मिला?
    👉 ओशिवारा पुलिस की साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से

    Q4. शिकायत कहां की गई थी?
    👉 1930 साइबर हेल्पलाइन और ओशिवारा पुलिस स्टेशन

  • Nude Video Blackmailing: मुंबई में चार उभरते अभिनेता गिरफ्तार

    Nude Video Blackmailing: मुंबई में चार उभरते अभिनेता गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड में चार aspiring actors ने एक कारोबारी को उसका Nude Video वायरल करने की धमकी देकर 6 लाख रुपये ऐंठने की कोशिश की। पुलिस ने जाल बिछाकर सभी को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: मायानगरी मुंबई शहर में ब्लैकमेलिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां चार उभरते कलाकारों (aspiring actors) ने एक कारोबारी को उसके न्यूड वीडियो के जरिए ब्लैकमेल कर लाखों रुपये वसूलने की कोशिश की। पीड़ित की शिकायत पर मालाड पुलिस ने गोराई इलाके में जाल बिछाकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है।

    🚨 क्या है Nude Video का पूरा मामला?

    मालाड पुलिस के मुताबिक,

    • पीड़ित कारोबारी की उम्र 37 साल है
    • सोमवार को उसे अचानक उसके न्यूड वीडियो भेजे गए
    • साथ ही सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई

    आरोपियों ने पहले
    👉 9 लाख रुपये की मांग की
    बाद में रकम घटाकर
    👉 6 लाख रुपये कर दी

    घबराए कारोबारी ने पैसे देने के बजाय सीधे पुलिस से संपर्क किया।

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    👥 कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

    पुलिस ने जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम हैं:

    • अनमोल राज अरोड़ा
    • लकी संतोष वर्मा
    • हिमांशु योगेश कुमार
    • दीपाली विनोद सिंह

    पुलिस के अनुसार, ये सभी
    👉 फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में काम पाने की कोशिश कर रहे aspiring actors हैं।

    🎥 कैसे रिकॉर्ड हुआ न्यूड वीडियो?

    जांच में सामने आया कि:

    • आरोपी अनमोल अरोड़ा पीड़ित का परिचित था
    • दोनों साथ में पार्टी किया करते थे
    • इसी दौरान अनमोल ने चुपचाप न्यूड वीडियो रिकॉर्ड कर लिया

    बाद में उसी वीडियो का इस्तेमाल कर
    👉 कारोबारी को ब्लैकमेल किया गया।

    🚔 पुलिस ने कैसे पकड़ा आरोपियों को?

    मालाड पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद
    👉 पीड़ित को निर्देश दिया कि वह आरोपियों को
    👉 गोराई इलाके में पैसे लेने के लिए बुलाए

    जैसे ही चारों आरोपी तय जगह पर पहुंचे,
    👉 पुलिस ने जाल बिछाकर सभी को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

    ⚖️ किन धाराओं में केस दर्ज?

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ

    • भारतीय न्याय संहिता (BNS)
    • आईटी एक्ट (Information Technology Act)

    के तहत
    👉 ब्लैकमेलिंग
    👉 जबरन वसूली
    👉 साइबर अपराध
    जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।

    🔍 आगे की जांच जारी

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि:

    • क्या आरोपियों ने पहले भी किसी और को ब्लैकमेल किया है?
    • वीडियो कहां-कहां शेयर किया गया?
    • क्या इसमें कोई और भी शामिल है?

    डिजिटल सबूतों और मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

    ⚠️ पुलिस की अपील

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि
    👉 निजी पलों के वीडियो/फोटो को लेकर सतर्क रहें
    👉 ब्लैकमेलिंग की स्थिति में डरें नहीं
    👉 तुरंत पुलिस से संपर्क करें


    ❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. यह मामला कहां का है?
    👉 मुंबई के मालाड इलाके का।

    Q2. कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
    👉 चार आरोपी।

    Q3. कितनी रकम की मांग की गई थी?
    👉 पहले 9 लाख, बाद में 6 लाख रुपये।

    Q4. आरोपी कौन हैं?
    👉 सभी उभरते अभिनेता (aspiring actors) हैं।

  • मुंबई में एग्जाम पेपर लीक, फर्जी पहचान पत्र देकर छात्र को परीक्षा में बैठाने का आरोप

    मुंबई में एग्जाम पेपर लीक, फर्जी पहचान पत्र देकर छात्र को परीक्षा में बैठाने का आरोप

    मुंबई के बोरीवली में एग्जाम पेपर लीक का मामला सामने आया है। एक ट्यूशन टीचर ने 14 साल के छात्र को फर्जी पहचान से गणित की परीक्षा में बैठाया। पुलिस ने FIR दर्ज की है।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी में परीक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक सामने आई है। बोरीवली की एक ट्यूशन टीचर पर आरोप है कि उसने 14 साल के छात्र को फर्जी पहचान के साथ परीक्षा में बैठाया और उससे गणित का प्रश्नपत्र लीक करवाया। मामला सामने आने के बाद बोरीवली पुलिस ने टीचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    किस परीक्षा में हुआ फर्जीवाड़ा?

    यह मामला एक प्रतिष्ठित मैथ्स फोरम द्वारा आयोजित की जाने वाली मैथ्स प्रॉफिशिएंसी एग्जाम से जुड़ा है।
    यह परीक्षा हर साल
    कक्षा 5, 7 और 8 के छात्रों के लिए आयोजित की जाती है।

    परीक्षा के लिए:

    • ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है
    • फीस जमा करनी होती है
    • उम्मीदवार को हॉल टिकट दिया जाता है

    गोराई परीक्षा केंद्र पर कैसे खुला राज?

    रविवार को बोरीवली के गोराई स्थित परीक्षा केंद्र पर

    • दोपहर 12 से 2 बजे तक परीक्षा थी
    • चार कमरों में 139 छात्र परीक्षा दे रहे थे

    करीब 1:30 बजे एक कमरे के सुपरवाइजर को
    एक छात्र की हरकतें संदिग्ध लगीं
    वह बार-बार प्रश्नपत्र लेकर वॉशरूम जा रहा था

    तलाशी लेने पर:

    • छात्र के पास मोबाइल फोन मिला
    • मोबाइल में व्हाट्सएप ग्रुप पर दोपहर 12 बजे से प्रश्नपत्र भेजे जा रहे थे

    “राखी बहन” को भेज रहा था पेपर!

    फोन चेक करने पर छात्र ने दावा किया कि
    वह प्रश्नपत्र अपनी “राखी बहन” को भेज रहा है

    लेकिन जब उसकी जानकारी ली गई तो:

    • हॉल टिकट पर नाम फर्जी निकला
    • माता-पिता के फोन नंबर गलत थे
    • स्कूल का नाम भी झूठा बताया
    • जन्मतिथि बताने से इनकार कर दिया

    इसके बाद केंद्र के प्रिंसिपल छात्र को लेकर सीधे बोरीवली पुलिस स्टेशन पहुंचे।

    पुलिस स्टेशन पहुंची ‘मां’, निकली ट्यूशन टीचर

    पुलिस स्टेशन में एक महिला पहुंची और
    खुद को छात्र की मां बताने लगी

    लेकिन जब पुलिस ने

    • आधार कार्ड या पहचान पत्र मांगा
      तो वह कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सकी।

    जांच में खुलासा हुआ कि:

    • छात्र मालाड के एक स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ता है
    • महिला उसकी ट्यूशन टीचर है
    • वह गणित और अंग्रेजी पढ़ाती थी

    टीचर ने रची पूरी साजिश

    पुलिस के मुताबिक:
    ट्यूशन टीचर ने ही छात्र को
    फर्जी पहचान से परीक्षा में बैठने को कहा
    और प्रश्नपत्र बाहर भेजने की योजना बनाई

    चौंकाने वाली बात यह है कि
    छात्र के माता-पिता को इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं थी

    पुलिस की कार्रवाई

    बोरीवली पुलिस ने

    • परीक्षा में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज किया है
    • मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है
    • व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड की जांच जारी है

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि
    क्या पहले भी इस तरह से परीक्षा में धांधली की गई है।

    शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

    इस घटना ने

    • परीक्षा केंद्र की सुरक्षा
    • पहचान जांच की प्रक्रिया
      पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि
    ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई
    और तकनीकी निगरानी जरूरी है।


    FAQ

    Q1. मामला कहां का है?
    मुंबई के बोरीवली इलाके का।

    Q2. छात्र की उम्र कितनी है?
    14 साल।

    Q3. किस परीक्षा का पेपर लीक हुआ?
    मैथ्स प्रॉफिशिएंसी एग्जाम।

    Q4. आरोपी कौन है?
    छात्र की ट्यूशन टीचर।

  • Borivali के ज्वेलर से ₹1.60 करोड़ की ठगी, नकली गोल्ड बार देकर आरोपी फरार

    Borivali के ज्वेलर से ₹1.60 करोड़ की ठगी, नकली गोल्ड बार देकर आरोपी फरार

    मुंबई के Borivali में एक ज्वेलर से नकली सोने की ईंटें देकर ₹1.60 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है। एलटी मार्ग पुलिस ने हैदराबाद के ज्वेलर समेत दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

    मुंबई: बोरीवली इलाके में रहने वाले एक ज्वेलर के साथ ₹1.60 करोड़ की बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। नकली गोल्ड बार देकर असली सोना हड़पने वाले दो आरोपी फिलहाल फरार हैं। एलटी मार्ग पुलिस ने धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    💎 Borivali के ज्वेलर के साथ कैसे हुई ठगी?

    पीड़ित ज्वेलर का नाम अजय धरमजी वाया है, जो बोरीवली में “कृषा आर्ट” नाम से ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग का कारोबार करते हैं।
    अजय लंबे समय से सुरेश वैष्णव नाम के सप्लायर से सोना खरीदते थे, जो हैदराबाद का रहने वाला बताया जा रहा है।

    🤝 भरोसे का खेल और नई पहचान

    पिछले साल अक्टूबर महीने में सुरेश वैष्णव ने अजय वाया की पहचान रामलाल गुर्जर से करवाई।
    गुर्जर ने सस्ते और फायदे वाले गोल्ड डील्स का लालच दिया।

    शुरुआत में:

    • एक लेन-देन सही तरीके से हुआ
    • असली गोल्ड बार दिए गए
    • भरोसा मजबूत हो गया

    इसी भरोसे के चलते आगे बड़ा सौदा किया गया।

    📦 21 अक्टूबर का सौदा, फिर 25 दिसंबर की ठगी

    • 21 अक्टूबर को अजय ने
      👉 1.8 किलो सोने के मंगलसूत्र रामलाल को भेजे
      👉 बदले में असली गोल्ड बार मिले
    • लेकिन 25 दिसंबर को
      👉 अजय ने 2,045 ग्राम सोने के गहने, कीमत करीब ₹1.60 करोड़,
      👉 सुरेश वैष्णव के जरिए होटल में एक्सचेंज के लिए भेजे

    होटल में वैष्णव ने दो गोल्ड बार दिए,
    लेकिन जांच में वे पूरी तरह नकली निकले।

    📵 ठगी का खुलासा और आरोपियों का फरार होना

    जैसे ही अजय वाया को ठगी का एहसास हुआ,
    उन्होंने सुरेश वैष्णव और रामलाल गुर्जर से संपर्क करने की कोशिश की।

    लेकिन:

    • दोनों के मोबाइल फोन बंद थे
    • दोनों गायब हो चुके थे

    इसके बाद अजय ने तुरंत एलटी मार्ग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

    👮 पुलिस की कार्रवाई और जांच

    एलटी मार्ग पुलिस ने

    • धोखाधड़ी और गबन का मामला दर्ज किया है
    • दोनों आरोपी फरार हैं
    • पुलिस यह भी जांच कर रही है कि
      👉 कहीं इसी तरह से अन्य ज्वेलर्स को भी निशाना तो नहीं बनाया गया

    ⚠️ ज्वेलर्स कारोबारियों के लिए चेतावनी

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक,
    इस तरह के मामलों में आरोपी पहले

    • छोटी और सही डील करते हैं
    • भरोसा जीतते हैं
    • फिर बड़ी रकम या सोने पर हाथ साफ करते हैं

    ज्वेलर्स को लेन-देन के दौरान
    👉 सोने की तुरंत जांच
    👉 लिखित समझौते
    👉 भरोसेमंद चैनल का ही इस्तेमाल
    करने की सलाह दी गई है।


    ❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. ठगी की रकम कितनी है?
    👉 करीब ₹1.60 करोड़ (2,045 ग्राम सोना)।

    Q2. आरोपी कौन हैं?
    👉 सुरेश वैष्णव (ज्वेलर/सप्लायर) और रामलाल गुर्जर।

    Q3. मामला कहां दर्ज हुआ है?
    👉 एलटी मार्ग पुलिस स्टेशन, मुंबई।

    Q4. क्या आरोपी पकड़े गए हैं?
    👉 नहीं, दोनों फिलहाल फरार हैं।

  • 2025 में खरीदा कार लेकिन 2023 का कैसे मिला चालान? मुंबई के ई-चालान सिस्टम पर सवाल

    2025 में खरीदा कार लेकिन 2023 का कैसे मिला चालान? मुंबई के ई-चालान सिस्टम पर सवाल

    मुंबई के कांदीवली निवासी को 2025 में खरीदी कार पर 2023 का हेलमेट चालान मिला। इस अजीब मामले ने ट्रैफिक पुलिस के ई-चालान सिस्टम की बड़ी खामियों को उजागर किया।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी एवं मायानगरी मुंबई शहर में ई-चालान सिस्टम की एक चौंकाने वाली गलती सामने आई है। कांदीवली के रहने वाले एक स्कूल प्रिंसिपल को ऐसी कार पर हेलमेट न पहनने का चालान भेजा गया, जो उन्होंने चालान काटने के करीब दो साल बाद शो रूम से नई कार खरीदी की थी। मामला सामने आने के बाद अब ट्रैफिक पुलिस के डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    कार खरीदी 2025 में, चालान आया 2023 का

    कांदीवली निवासी राजेश यादव, जो पेशे से स्कूल प्रिंसिपल हैं, ने बताया कि उनके परिवार ने महिंद्रा XUV कार 14 फरवरी 2025 को खरीदी थी। लेकिन अक्टूबर 2025 में उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ई-चालान का मैसेज आया, जिसमें 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

    जब उन्होंने चालान की जानकारी खोली, तो हैरान रह गए। चालान की तारीख थी 5 जून 2023, यानी उस वक्त उनकी कार अस्तित्व में ही नहीं थी।

    Why-did-I-buy-a-car-in-2025-but-get-an-invoice-for-2023-Questions-about-Mumbai-e-challan-system-kandivali

    हेलमेट चालान और फोटो में दिखी बाइक

    राजेश यादव ने बताया कि चालान में लिखा था कि हेलमेट नहीं पहनने का अपराध किया गया है। उन्होंने मज़ाकिया लहजे में कहा,
    “एक पल के लिए मुझे लगा कि शायद अब कार चलाने वालों को भी हेलमेट पहनना पड़ेगा।”

    लेकिन जब उन्होंने चालान के साथ अटैच की गई तस्वीर देखी, तो उसमें साफ तौर पर दो लोगों की बाइक नजर आ रही थी, जिनमें से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था। तस्वीर में दिख रहा वाहन उनकी कार से बिल्कुल अलग था।

    स्पीडिंग चालान सही थे, लेकिन ये मामला अलग

    यादव ने बताया कि अगस्त 2025 में वह अपनी मां को कोस्टल रोड के रास्ते बॉम्बे हॉस्पिटल ले जा रहे थे। उस दौरान उन्हें ओवरस्पीडिंग के दो चालान मिले थे, जिन्हें उन्होंने बिना किसी विवाद के तुरंत भर दिया।

    लेकिन अक्टूबर में आया यह हेलमेट चालान न सिर्फ गलत था, बल्कि कार के रजिस्ट्रेशन से पहले का था, इसलिए उन्होंने इसे भरने से इनकार कर दिया।

    ट्रैफिक विभाग ने माना “मानवीय गलती”

    ट्रैफिक विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह चालान असल में एक दोपहिया वाहन चालक के खिलाफ जारी किया गया था।
    वाहन नंबर में समानता होने की वजह से यह चालान गलती से राजेश यादव के मोबाइल नंबर पर चला गया।

    अधिकारी के मुताबिक,
    “यह मानवीय त्रुटि है। वाहन मालिक MTP ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कर चालान रद्द करवा सकता है।”

    ई-चालान सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

    इस घटना के बाद नागरिकों का कहना है कि कम से कम चालान भेजने से पहले यह तो जांच होनी चाहिए कि वाहन दोपहिया है या चारपहिया। बिना बुनियादी जांच के भेजे जा रहे चालान आम लोगों को मानसिक परेशानी और समय की बर्बादी का कारण बन रहे हैं।

    Timeline: पूरा मामला एक नज़र में

    • 📅 कथित अपराध की तारीख: 5 जून 2023
    • 🚗 कार खरीदने की तारीख: 14 फरवरी 2025
    • 📲 चालान मिलने की तारीख: 21 अक्टूबर 2025

    FAQ | अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1: क्या कार पर हेलमेट चालान लगाया जा सकता है?
    👉 नहीं, हेलमेट चालान केवल दोपहिया वाहनों पर लागू होता है।

    Q2: इस मामले में गलती किसकी थी?
    👉 ट्रैफिक विभाग के अनुसार, यह मानवीय गलती और नंबर मैचिंग की वजह से हुआ।

    Q3: गलत चालान मिलने पर क्या करें?
    👉 MTP ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कर चालान रद्द कराया जा सकता है।

    Q4: क्या चालान भरना जरूरी है?
    👉 नहीं, अगर चालान गलत है तो पहले स्पष्टीकरण लें।

  • Malad में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशियों को बैन दवाइयां बेचने वाले 5 गिरफ्तार

    Malad में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशियों को बैन दवाइयां बेचने वाले 5 गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड स्थित चिनचोली बंदर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापा मारकर पाँच लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपी विदेशों में बैन दवाओं की सप्लाई का झांसा देकर भारी रकम वसूल रहे थे। पुलिस ने IT Act, BNS और टेलीग्राफ एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

    मुंबई: मालाड इलाके में बांगुर नगर पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी एक अवैध कॉल सेंटर चलाकर अमेरिका सहित कई देशों के ग्राहकों को बैन दवाइयां भेजने का दावा करते थे और उनसे भारी रकम वसूलते थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IT Act और नई दंड संहिता (BNS) की कई धाराओं में केस दर्ज किया है।

    Malad में चल रहा था अवैध कॉल सेंटर, विदेशी ग्राहकों को बनाया जा रहा था निशाना

    मुंबई के चिंचोली बंदर, मालाड स्थित एक ऑफिस में यह फर्जी कॉल सेंटर ऑपरेट किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपी खुद को विदेशी ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर विदेशी ग्राहकों से संपर्क करते थे।

    वे ग्राहक को कहते थे कि उनके लिए ऐसी दवाइयां उपलब्ध हैं जो आमतौर पर बैन हैं या ऑनलाइन बेचना गैरकानूनी है। इसी बहाने उनसे डॉलर में भुगतान भी ले लिया जाता था।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

    पुलिस के अनुसार पकड़े गए पाँच आरोपी—

    • अयूब शेख (30)
    • फैजान भलीम (27)
    • फारुख शेख (29)
    • मोइन अहमद शेख (32)
    • ज़ीशान नासिर अंसारी (22)

    ये सभी मिलकर लंबे समय से ये फर्जीवाड़ा चला रहे थे।
    ये सभी मिलकर अमेरिका सहित कई देशों के लोगों को फंसाकर लाखों की ठगी कर रहे थे।

    कैसे करते थे ठगी? पुलिस ने खोला पूरा खेल

    • संदिग्ध वेबसाइट या डेटा के जरिए विदेशी ग्राहकों तक पहुँच बनाना
    • खुद को इंटरनेशनल ऑनलाइन फार्मेसी का अधिकारी बताना
    • मेडिकल कंसल्टेशन का झांसा देना
    • “बैन मेडिसिन उपलब्ध” कहकर ऑनलाइन पेमेंट वसूलना
    • पैसे लेने के बाद उत्पाद न भेजना

    यह पूरा नेटवर्क फार्मा से जुड़े अवैध कारोबार + साइबर फ्रॉड का कॉम्बिनेशन था।

    कौन-कौन सी धाराओं में केस दर्ज?

    बांगुर नगर पुलिस ने मामला दर्ज किया है—

    • BNS की धाराएँ 318(4), 319(2), 3(5)
    • IT Act 2000 की धाराएँ 66(A), 66(D), 75
    • Indian Telegraph Act की धारा 20

    पाँचों आरोपियों को 15 दिसंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

    मालाड और मुंबई में बढ़ते साइबर फ्रॉड को लेकर पुलिस अलर्ट

    इस तरह के कॉल सेंटर लगातार मुंबई के कई इलाकों में पकड़े जा रहे हैं। विदेशी ग्राहकों को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि—

    • वे दवाओं की कीमत ज़्यादा चुकाते हैं
    • वे शिकायत भारत में दर्ज नहीं करा पाते
    • वेरिफिकेशन की प्रक्रिया मुश्किल होती है

    पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े और लोगों की तलाश कर रही है।


    FAQ

    1. क्या गिरफ्तार कॉल सेंटर वास्तव में दवाइयां सप्लाई करता था?

    नहीं, आरोपी सिर्फ भुगतान लेते थे और बाद में उत्पाद नहीं भेजते थे। यह पूरा रैकेट फर्जीवाड़ा था।

    2. क्या ग्राहकों को किसी तरह की मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन की सुविधा दी जाती थी?

    वे खुद को इंटरनेशनल फार्मेसी बताकर नकली कंसल्टेशन की बात करते थे, जो पूरी तरह अवैध था।

    3. क्या इस रैकेट में और लोग शामिल हो सकते हैं?

    पुलिस के अनुसार यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जिसकी जाँच जारी है।

    4. क्या विदेशी ग्राहक भारत में केस दर्ज कर सकते हैं?

    तकनीकी रूप से हाँ, लेकिन शिकायत प्रक्रिया जटिल होने के कारण अक्सर ठगी की रिपोर्ट नहीं होती।