Category: Mumbai Crime

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  • Mumbai: ओशिवारा पुलिस स्टेशन में हंगामा — 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, 5 पर जांच शुरू

    Mumbai: ओशिवारा पुलिस स्टेशन में हंगामा — 2 पुलिसकर्मी सस्पेंड, 5 पर जांच शुरू

    मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में 4 नवंबर को बजरंग दल कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सस्पेंड कर दिए गए हैं, जबकि पांच पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू की गई है। मामला अब जांच के घेरे में है।

    मुंबई: जोगेश्वरी पश्चिम के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों के कथित “अशोभनीय व्यवहार” के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि पांच अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की गई है। यह कार्रवाई 4 नवंबर को बजरंग दल कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद की गई है।

    ओशिवारा थाने में तनाव: क्या हुआ था उस दिन

    4 नवंबर की शाम को बजरंग दल के जिला अधिकारी शंकर उर्फ़ वृशभ जाधव करीब 10–15 कार्यकर्ताओं के साथ ओशिवारा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जोगेश्वरी (पश्चिम) के गुप्ता किराना स्टोर के पास एक परिवार पर दूसरे परिवार ने हमला किया है। उसी वक्त एक नाबालिग लड़की और उसकी मां भी छेड़छाड़ की शिकायत लेकर थाने पहुंचीं।

    पुलिस अधिकारियों ने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी, लेकिन माहौल अचानक गरम हो गया। इसी दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों पर “गलत व्यवहार” और “कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने” के आरोप लगे।

    दो पुलिस अधिकारी सस्पेंड, पांच पर जांच आदेश

    घटना के बाद डीसीपी (ज़ोन 9) दिक्षित गेडाम ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है, हालांकि उनके नाम फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। साथ ही, पांच अन्य पुलिसकर्मियों —
    एपीआई रमेश केंगर, एपीआई गणेश गायके, पीएसआई बाबू तोत्रे, पीएसआई दीपक बारवे और कॉन्स्टेबल अज़ीम ज़री — पर जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

    सात दिन में स्पष्टीकरण रिपोर्ट देनी होगी

    सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे सात दिनों के अंदर स्पष्टीकरण रिपोर्ट (Self-Explanatory Report) जमा करें। अगर जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ अशोभनीय व्यवहार किया और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिससे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई।

    प्रशासन सख्त, जांच जारी

    घटना के बाद से ही ओशिवारा पुलिस स्टेशन में माहौल तनावपूर्ण है। वरिष्ठ अधिकारी मामले की निगरानी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह जांच केवल व्यवहारिक नहीं बल्कि प्रक्रियात्मक लापरवाही पर भी केंद्रित है — यानी क्या पुलिस ने शिकायत दर्ज करने और कार्रवाई करने में देरी की थी या नहीं।


    FAQ

    Q1. ओशिवारा पुलिस स्टेशन में क्या हुआ था?
    4 नवंबर की शाम बजरंग दल कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद पुलिस पर अशोभनीय व्यवहार का आरोप लगा।
    Q2. कितने पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए हैं?
    दो असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड किया गया है और पांच पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू है।
    Q3. जांच की निगरानी कौन कर रहा है?
    डीसीपी (ज़ोन 9) दिक्षित गेडाम पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।
    Q4. क्या पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए हैं?
    हां, पांच पुलिसकर्मियों के नाम जांच आदेश में दर्ज हैं — रमेश केंगर, गणेश गायके, बाबू तोत्रे, दीपक बारवे और अज़ीम ज़री।

  • मालाड आर्मी कैंप में चोरी: क्राइम ब्रांच ने तीन चोरों को पकड़ा, बंदूक और 9 जिंदा कारतूस बरामद

    मालाड आर्मी कैंप में चोरी: क्राइम ब्रांच ने तीन चोरों को पकड़ा, बंदूक और 9 जिंदा कारतूस बरामद

    मालाड के आर्मी कैंप में चोरी के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 ने तीन चोरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से एक बंदूक, 9 जिंदा कारतूस, 450 ग्राम चांदी के गहने और नकद रकम बरामद हुई है। एक नाबालिग भी शामिल है।

    मुंबई: मालाड पूर्व इलाके में स्थित सीओडी (Central Ordnance Depot) आर्मी कैंप में हुई चोरी के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 ने तीन चोरों को गिरफ्तार किया है।
    गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस ने इनके पास से एक पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस, 450 ग्राम चांदी के गहने बरामद किए हैं। हालांकि नगदी भी चोरी हुआ था लेकिन पुलिस को गिरफ्तारी में नगद बरामद नहीं हुए हैं।

    🔹 कैसे हुई थी चोरी

    यह वारदात 1 नवंबर की दोपहर की है, जब मालाड पूर्व के आर्मी कैंप में स्थित एक बंद क्वार्टर की कुंडी तोड़कर चोरी की गई।
    कमरा कुछ समय से बंद था, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने अंदर घुसकर गहने, नकद और हथियार उड़ा लिए।
    घटना सामने आने के बाद दिंडोशी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

    🔹 पुलिस ने ऐसे पकड़ा गिरोह

    मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 12 के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सचिन गवस के नेतृत्व में जांच शुरू की गई।
    पुलिस टीम ने घटनास्थल की जांच, CCTV कैमरों की पड़ताल, और तकनीकी विश्लेषण (technical analysis) की मदद से संदिग्धों की पहचान की।
    मुखबिरों की जानकारी के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।

    🔹 बरामदगी और आगे की जांच

    पुलिस की पूछताछ में आरोपियों से एक पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस और लगभग 450 ग्राम चांदी के गहने बरामद हुए हैं।
    दोनों वयस्क आरोपियों को दिंडोशी पुलिस के हवाले किया गया है, जबकि नाबालिग को उसके माता-पिता के सुपुर्द किया गया है।
    फिलहाल दिंडोशी पुलिस आगे की जांच कर रही है कि क्या ये गिरोह किसी और चोरी में भी शामिल था।

    🔹 वरिष्ठ अधिकारी का बयान

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सचिन गवस ने बताया —

    “यह मामला संवेदनशील था क्योंकि चोरी आर्मी कैंप क्षेत्र में हुई थी। हमारी टीम ने तेजी और प्रोफेशनल अंदाज़ में काम करते हुए आरोपी पकड़ लिए।”

    🔹 कानूनी कार्रवाई

    इस मामले में दिंडोशी पुलिस ने गुनाह रजिस्टर क्रमांक 699/2025 के तहत
    भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305(अ) और 331(3) के तहत अपराध दर्ज किया है।


    FAQ सेक्शन

    1. चोरी कब और कहां हुई थी?
    → चोरी 1 नवंबर को मालाड पूर्व के सीओडी आर्मी कैंप के बंद कमरे में हुई थी।
    2. पुलिस ने क्या बरामद किया?
    → पुलिस ने एक पिस्तौल, 9 जिंदा कारतूस, 450 ग्राम चांदी के गहने और नकद रकम बरामद की है।
    3. कितने आरोपी पकड़े गए हैं?
    → तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।
    4. आगे की जांच कौन कर रहा है?
    → आगे की जांच दिंडोशी पुलिस कर रही है।

  • दहिसर का रिटायर्ड पुलिस अधिकारी पासपोर्ट फर्जीवाड़े में गिरफ्तार

    दहिसर का रिटायर्ड पुलिस अधिकारी पासपोर्ट फर्जीवाड़े में गिरफ्तार

    मुंबई के दहिसर पुलिस स्टेशन में दर्ज पासपोर्ट फर्जीवाड़े के मामले में एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट की मंजूरी दी।

    मुंबई: दहिसर पुलिस ने एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी संजय जगताप को पासपोर्ट से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है। दहिसर पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले मे गिरफ्तार आरोपी पर यह आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति से पासपोर्ट प्रक्रिया में मदद का झांसा देकर धोखाधड़ी की।

    शिकायत के अनुसार, आरोपी ने बिना उचित दस्तावेजों की जांच किए पासपोर्ट आवेदन को स्वीकृत कर दिया। बाद में जब जांच हुई तो जमा किए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई।

    एफआईआर में गंभीर धाराएं

    जांच के बाद 26 मार्च 2025 को आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465, 467, 468, 471, 120(B) के तहत दर्ज हुआ है। इसके अलावा, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12 भी इसमें जोड़ी गई है।

    रिटायर्ड पुलिसकर्मी का नाम आया सामने

    जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी हेड कॉन्स्टेबल संजय जगताप थे, जो उस समय दहिसर पुलिस स्टेशन में तैनात थे। बाद में उनकी मालाड पुलिस स्टेशन में बदली हो गई। महत्वपूर्ण बात यह है कि जगताप 31 अक्टूबर 2025 को सेवानिवृत्त हुए, और सेवानिवृत्ति के कुछ ही दिनों बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    जमानत याचिका खारिज, पुलिस हिरासत में भेजा गया

    आरोपी ने गिरफ्तारी से पहले हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
    इसके बाद 4 नवंबर 2025 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और अदालत में पेश किया।
    कोर्ट ने आरोपी को पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

    पुलिस कर रही है आगे की जांच

    मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और पासपोर्ट प्राधिकरण मिलकर यह जांच कर रहे हैं कि क्या इस घोटाले में अन्य लोग भी शामिल हैं।
    साथ ही, पासपोर्ट जारी करने में इस्तेमाल किए गए फर्जी दस्तावेजों की तकनीकी जांच भी की जा रही है।


    FAQ

    Q1. यह मामला कब दर्ज किया गया था?
    यह मामला 26 मार्च 2025 को दहिसर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया।
    Q2. आरोपी कौन है?
    सेवानिवृत्त पुलिस हेड कॉन्स्टेबल संजय जगताप, जो पहले दहिसर थाने में तैनात थे।
    Q3. किस आधार पर गिरफ्तारी हुई?
    आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट आवेदन मंजूर किया था।
    Q4. कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
    कोर्ट ने आरोपी को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा है।
    Q5. क्या आरोपी को जमानत मिली?
    नहीं, उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी।

  • लोकल ट्रेन में झगड़ा, यात्री को लगे 6 टांके; कोर्ट ने दो आरोपियों की जमानत ठुकराई

    लोकल ट्रेन में झगड़ा, यात्री को लगे 6 टांके; कोर्ट ने दो आरोपियों की जमानत ठुकराई

    मुंबई की भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में झगड़े के दौरान एक यात्री के सिर पर चोट लगने से उसे छह टांके लगे। सेशंस कोर्ट ने कहा — “चोटिल व्यक्ति का अस्पताल से डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं।

    मुंबई: लोकल ट्रेन मे मार पीट को लेकर एक मुकदमे में मुंबई की सेशंस कोर्ट ने दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिन्होंने लोकल ट्रेन में झगड़े के दौरान एक यात्री को घायल कर दिया।
    कोर्ट ने साफ कहा कि “घायल का अस्पताल से डिस्चार्ज होना, जमानत देने का आधार नहीं हो सकता।”

    यह मामला 4 अक्टूबर का है, जब शिकायतकर्ता ने दादर से गोरेगांव स्लो लोकल ट्रेन पकड़ी थी और उसे सांताक्रूज़ स्टेशन पर उतरना था। भीड़ के कारण जब यात्री उतर नहीं पाए, तो दो लोगों में झगड़ा हुआ, जिससे एक व्यक्ति के सिर पर गंभीर चोट लगी और उसे 6 टांके लगाने पड़े।

    🚨 कौन हैं आरोपी और क्या हैं आरोप

    पुलिस ने इस मामले में दो यात्रियों — नौशाद अहमद (20) और रामसूरत राय (35) — को गिरफ्तार किया है।
    दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा

    • 115 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और
    • 118 (खतरनाक हथियार या साधन से चोट या गंभीर चोट पहुंचाना)
      के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    दोनों आरोपी पिछले एक महीने से जेल में बंद हैं।

    🧾 “हम निर्दोष हैं”, आरोपियों की दलील

    आरोपियों के वकील ने कोर्ट में कहा कि दोनों गरीब मजदूर हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है
    उनका कहना था कि शिकायतकर्ता को साधारण चोट लगी थी और वह पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुका है।

    लेकिन अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और शिकायतकर्ता को सिर पर गंभीर चोट आई थी।

    🧑‍⚖️ जज का सख्त रुख — ‘घायल का डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं’

    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत सी. काले ने 1 नवंबर को अपने आदेश में कहा:

    “आरोपियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। घायल व्यक्ति का डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं हो सकता। पुलिस के कागज़ों के अनुसार, शिकायतकर्ता को लगी चोट सिर के अहम हिस्से पर गंभीर चोट है।”

    कोर्ट ने यह भी बताया कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद किया गया है।
    इसी वजह से अदालत ने कहा कि जांच अधूरी है, इसलिए इस चरण में जमानत नहीं दी जा सकती।

    🚉 मुंबई लोकल में बढ़ रहे विवाद

    मुंबई की लोकल ट्रेनें “शहर की लाइफ़लाइन” कही जाती हैं, लेकिन रोज़ाना की भीड़ और तनाव के बीच झगड़ों के मामले बढ़ रहे हैं।
    रेलवे पुलिस (GRP) के अनुसार, हर महीने दर्जनों झगड़ों और धक्कामुक्की की शिकायतें मिलती हैं, जिनमें कई बार यात्रियों को चोटें भी लगती हैं।


    FAQ सेक्शन

    Q1. यह घटना कब और कहां हुई थी?
    👉 यह घटना 4 अक्टूबर को दादर-सांताक्रूज़ लोकल ट्रेन में हुई थी।
    Q2. कितने लोग गिरफ्तार किए गए हैं?
    👉 दो आरोपी — नौशाद अहमद और रामसूरत राय — को गिरफ्तार किया गया है।
    Q3. शिकायतकर्ता को क्या चोटें आईं?
    👉 शिकायतकर्ता के सिर पर चोट लगी और 6 टांके लगाने पड़े।
    Q4. कोर्ट ने जमानत क्यों नहीं दी?
    👉 कोर्ट ने कहा कि घायल का डिस्चार्ज होना जमानत का आधार नहीं, क्योंकि मामला अभी शुरुआती जांच में है।
    Q5. आरोपियों पर कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
    👉 धारा 115 और 118 (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मामला दर्ज हुआ है।

  • मालाड में 7 साल के बच्चे को कार से कुचला, महिला की गिरफ्तारी को लेकर उठे सवाल

    मालाड में 7 साल के बच्चे को कार से कुचला, महिला की गिरफ्तारी को लेकर उठे सवाल

    मालाड वेस्ट के इंटरफेस हाइट्स सोसाइटी में 7 साल के बच्चे को कार से कुचलने के मामले में पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दिया। वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अभा सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला गैर-जमानती अपराध के तहत आता है।

    मुंबई: मालाड वेस्ट इलाके में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जहाँ एक सात वर्षीय बच्चा अपनी सोसाइटी के अंदर खेलते समय एक महिला की कार की चपेट में आ गया। बच्चे का पैर बुरी तरह टूट गया। पुलिस ने आरोपी महिला श्वेता शेट्टी-राठौड़ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, लेकिन गिरफ्तारी के बजाय सिर्फ नोटिस जारी किया। इस पर सामाजिक कार्यकर्ता और एडवोकेट अभा सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि मामला गैर-जमानती अपराध के अंतर्गत आता है।

    मालाड वेस्ट की इंटरफेस हाइट्स सोसाइटी में हादसा

    यह हादसा 19 अक्टूबर को मालाड वेस्ट स्थित इंटरफेस हाइट्स सोसाइटी में हुआ। सात साल का अन्वय मजूमदार अपने भाई और दोस्तों के साथ सोसाइटी के परिसर में खेल रहा था, जब आरोपी महिला श्वेता शेट्टी-राठौड़ ने अपनी कार तेज गति से परिसर में चलाई और अन्वय के पैर पर चढ़ा दी।
    CCTV फुटेज में घटना साफ कैद हुई है। बच्चे की मां महुआ मजूमदार (45) ने पुलिस को बताया कि शाम करीब 5:30 बजे उनके दूसरे बेटे ने इंटरकॉम से कॉल कर कहा – “माँ, अन्वय का पैर कुचल गया।”

    बच्चे की हालत गंभीर, सर्जरी जरूरी

    घटना के बाद अन्वय को तुरंत एवर्शाइन नगर के एक नर्सिंग होम ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे कोकिलाबेन अस्पताल, अंधेरी रेफर कर दिया। जांच में पता चला कि बच्चे के टखने और पिंडली की हड्डी टूट गई है और सर्जरी करनी पड़ी।
    डॉक्टरों के अनुसार, चोटें गंभीर हैं लेकिन बच्चे की स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।

    पुलिस की कार्रवाई पर सवाल – क्यों नहीं की गई गिरफ्तारी?

    बांगुर नगर पुलिस ने शुरुआत में आरोपी के खिलाफ रैश ड्राइविंग (धारा 281 BNS) और जीवन को खतरे में डालने (125b BNS) के तहत मामला दर्ज किया। बाद में इसमें धारा 110 BNS (attempt to commit culpable homicide) जोड़ी गई, जो गैर-जमानती अपराध है।
    इसके बावजूद पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार करने के बजाय सिर्फ नोटिस जारी कर छोड़ दिया

    इस पर एडवोकेट अभा सिंह ने कहा —

    “धारा 110 BNS के तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती है। जब सीसीटीवी फुटेज में सबूत साफ हैं, तो पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार करने का पूरा अधिकार था। सिर्फ नोटिस देकर छोड़ना कानूनी रूप से उचित नहीं है।”

    आरोपी महिला कौन है?

    आरोपी श्वेता शेट्टी-राठौड़ एक एचआर कंसल्टेंट हैं और इंटरफेस हाइट्स सोसाइटी के सचिव संजय राठौड़ की पत्नी हैं। पुलिस के अनुसार, वह घटना के समय अपनी कार चला रही थीं जब यह दुर्घटना हुई।

    एफआईआर में दर्ज धाराएं

    मजूमदार परिवार की शिकायत पर पुलिस ने इन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:

    • धारा 281 (लापरवाह ड्राइविंग)
    • धारा 125(b) (दूसरों के जीवन को खतरे में डालना)
    • धारा 110 (गैर-जमानती अपराध – हत्या के प्रयास जैसा अपराध)
    • मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184, 134(a), 134(b) — (खतरनाक ड्राइविंग, मदद न देना, घटना की रिपोर्ट न करना)

    कानूनी नजरिया – अभा सिंह का बयान

    अभा सिंह ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110 के तहत यदि किसी व्यक्ति के कार्य से मृत्यु की संभावना होती है, तो यह अपराध ‘culpable homicide not amounting to murder’ की श्रेणी में आता है।
    उन्होंने कहा —

    “इस मामले में बच्चा बहुत छोटा था और उसकी जान को गंभीर खतरा हुआ। सीसीटीवी फुटेज में पूरी घटना दिख रही है, इसलिए आरोपी की गिरफ्तारी बनती है।”

    पुलिस की सफाई

    बांगुर नगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक रविंद्र अव्हाड ने बताया कि जांच अभी जारी है और सभी साक्ष्यों को देखने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल आरोपी महिला से पूछताछ चल रही है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

    Q1. यह घटना कहाँ हुई थी?
    A1. यह हादसा मालाड वेस्ट के इंटरफेस हाइट्स सोसाइटी में हुआ।
    Q2. आरोपी महिला कौन हैं?
    A2. आरोपी श्वेता शेट्टी-राठौड़, जो सोसाइटी सचिव की पत्नी और एक HR कंसल्टेंट हैं।
    Q3. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
    A3. पुलिस ने एफआईआर दर्ज की लेकिन गिरफ्तारी के बजाय आरोपी को नोटिस देकर छोड़ दिया।
    Q4. बच्चा अभी कहाँ इलाज करवा रहा है?
    A4. बच्चा कोकिलाबेन अस्पताल, अंधेरी में भर्ती है और उसकी सर्जरी हो चुकी है।
    Q5. क्या आरोपी पर गैर-जमानती धारा लगी है?
    A5. हाँ, धारा 110 BNS गैर-जमानती अपराध के अंतर्गत आती है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं की गई।

  • दिंडोशी सत्र न्यायालय ने पॉक्सो आरोपी फरहान खान को 20 साल सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई

    दिंडोशी सत्र न्यायालय ने पॉक्सो आरोपी फरहान खान को 20 साल सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई

    एमएचबी कॉलोनी पुलिस थाने के पॉक्सो केस में आरोपी फरहान साकिब खान (27) को दिंडोशी सत्र न्यायालय ने 20 साल सश्रम कारावास और जुर्माने की सज़ा सुनाई। केस की जांच एमएचबी पुलिस टीम ने की थी।

    मुंबई: दिंडोशी सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में एम.एच.बी. कॉलोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज पॉक्सो अपराध के आरोपी फरहान साकिब खान (27 वर्ष) को 20 वर्ष सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई। आरोपी को अलग-अलग धाराओं के तहत कुल मिलाकर कई सजाएँ दी गईं, जिनमें धारा 363, 376(2)(n), 506(2) भारतीय दंड संहिता (IPC) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(1)(m) व 6 शामिल हैं।

    अदालत का फैसला

    माननीय सत्र न्यायाधीश श्रीमती एस.एन. सचदेव (कोर्ट नंबर 13) ने आदेश में कहा कि आरोपी ने नाबालिग पीड़िता के साथ गंभीर अपराध किया है, इसलिए उसे 20 वर्ष सश्रम कारावास और ₹1000 का आर्थिक दंड दिया जाता है। यदि दंड राशि अदा नहीं की गई, तो आरोपी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

    इसके अलावा, अन्य धाराओं के तहत —

    • धारा 363 (अपहरण) के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास और ₹1000 जुर्माना,
    • धारा 376(2)(n) (बलात्कार) के तहत 10 वर्ष सश्रम कारावास,
    • धारा 506(2) (धमकी देना) के तहत 1 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।

    सभी सजाएँ साथ-साथ चलेंगी (Concurrent Sentences)।

    पुलिस की प्रभावी कार्रवाई

    इस मामले में तत्कालीन जांच अधिकारी पुलिस निरीक्षक प्रकाश जाधव ने आरोपपत्र (Chargesheet) न्यायालय में प्रस्तुत किया था। मुकदमे के दौरान सरकारी अभियोक्ता देवतरसे साहब, चव्हाण मैडम और जाधव मैडम ने केस की पैरवी की।

    पूरी जांच और कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हरीश गवळी, पो. नि. अतुल आव्हाड (गुन्हे विभाग), और मा. पो. आ. घनवटे सर के मार्गदर्शन में की गई। न्यायालयीन कार्यवाही की निगरानी म. पो. ह. सातपुते ने की।

    मामले का पृष्ठभूमि (Case Background)

    यह मामला एम.एच.बी. कॉलोनी पुलिस थाने में गुन्हा क्रमांक 288/2019 के तहत दर्ज किया गया था। आरोपी फरहान खान पर नाबालिग बालिका के अपहरण और यौन शोषण का आरोप था। पुलिस ने जांच पूरी कर 2019 में ही न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। लगातार सुनवाई के बाद आज न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया और सख्त सजा सुनाई।

    Flip kart से चोरी Swiggy में डिलीवरी पुलिस ने किया गिरफ्तार।

    जनहित के नज़रिए से

    पॉक्सो (POCSO) अधिनियम का उद्देश्य नाबालिगों को यौन शोषण से सुरक्षा देना है। यह फैसला समाज को संदेश देता है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह सज़ा कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करेगी और भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगाएगी।


    FAQ सेक्शन:

    प्रश्न 1: आरोपी को कितनी सजा मिली है?
    👉 आरोपी को कुल 20 वर्ष सश्रम कारावास और ₹1000 का जुर्माना लगाया गया है।
    प्रश्न 2: केस किस पुलिस थाने में दर्ज था?
    👉 यह केस एम.एच.बी. कॉलोनी पुलिस थाने में दर्ज था।
    प्रश्न 3: जांच अधिकारी कौन थे?
    👉 तत्कालीन जांच अधिकारी पुलिस निरीक्षक प्रकाश जाधव थे।
    प्रश्न 4: फैसला किस न्यायाधीश ने सुनाया?
    👉 यह फैसला माननीय सत्र न्यायाधीश श्रीमती एस.एन. सचदेव (कोर्ट नं. 13) ने सुनाया।
    प्रश्न 5: पुलिस टीम में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे?
    👉 वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हरीश गवळी, पो.नि. अतुल आव्हाड, मा.पो.आ. घनवटे सर और म.पो.ह. सातपुते इस केस में शामिल थे।

  • भांजा ने मामा को उठाकर सीढ़ियों पर पटक कर मार डाला — CCTV में कैद हुई वारदात

    भांजा ने मामा को उठाकर सीढ़ियों पर पटक कर मार डाला — CCTV में कैद हुई वारदात

    मुंबई के गोरेगांव निवासी युवक ने अपने मामा की हत्या कर दी। दोनों ठाणे के एक अस्पताल गए थे, जहां बहस के बाद भतीजे ने मामा को उठाकर सीढ़ियों पर पटक दिया। CCTV फुटेज में पूरी वारदात कैद हुई। आरोपी गिरफ्तार।

    मुंबई: गोरेगांव में रहने वाले गणेश रमेश पुजारी (26) ने अपने मामा मारियप्पा राजू नायर (40) की ठाणे के एक अस्पताल में सीढ़ियों पर पटक कर हत्या कर दी।
    दोनों भांजा की पत्नी की डिलीवरी के लिए अस्पताल आए थे, लेकिन किसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हो गया। गुस्से में आकर गणेश ने अपने मामा का सिर सीढ़ियों पर दे मारा, फिर उसे उठाकर दोबारा सीढ़ियों पर पटक दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। यह पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई और पुलिस ने आरोपी को घटनास्थल से ही गिरफ्तार कर लिया।

    🧠 क्या था पूरा मामला?

    यह घटना ठाणे के एक निजी अस्पताल में गुरुवार को हुई। पुलिस के अनुसार, दोनों रिश्तेदार इलाज के सिलसिले में वहां पहुंचे थे। अचानक किसी पारिवारिक विवाद को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि भतीजा आपा खो बैठा और अपने मामा पर टूट पड़ा।

    पुलिस अधिकारी ने बताया:

    “गणेश पुजारी ने पहले मामा को कॉलर पकड़कर खींचा और फिर सीढ़ियों पर पटक दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई।”

    📹 CCTV में दिखा खौफनाक नज़ारा

    इस वारदात का CCTV फुटेज सामने आया है जिसमें आरोपी को अपने मामा का कॉलर पकड़कर घसीटते और फिर सीढ़ियों की तरफ ले जाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया है। अस्पताल स्टाफ ने तुरंत ठाणे पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को पकड़ लिया।

    👮‍♂️ आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

    ठाणे पुलिस ने गणेश रमेश पुजारी को हत्या के आरोप (IPC 302) में गिरफ्तार किया है। पुलिस अब हत्या के पीछे की असली वजह जानने की कोशिश कर रही है —
    क्या यह सिर्फ गुस्से का मामला था या कोई पुराना पारिवारिक विवाद? आरोपी से पूछताछ जारी है।

    🏙️ मुंबई में बढ़ते फैमिली क्राइम के केस

    हाल के महीनों में मुंबई और आसपास के इलाकों में परिवार के अंदर हिंसा के कई मामले सामने आए हैं। कभी बेटा पिता पर हमला करता है, तो कभी पति पत्नी को नुकसान पहुंचाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, गुस्सा और मानसिक असंतुलन ऐसे मामलों की बड़ी वजह बन रहे हैं।


    FAQ सेक्शन:

    Q1: यह घटना कहाँ हुई?
    👉 ठाणे के एक निजी अस्पताल में, जो मुंबई के पास स्थित है।
    Q2: आरोपी और मृतक का रिश्ता क्या था?
    👉 आरोपी गणेश पुजारी मृतक मारियप्पा राजू नायर का भतीजा था।
    Q3: वारदात कैसे हुई?
    👉 दोनों में बहस के बाद गणेश ने मामा का सिर सीढ़ियों पर दे मारा और फिर उसे उठाकर पटक दिया।
    Q4: क्या घटना का वीडियो मौजूद है?
    👉 हाँ, CCTV में पूरा मामला कैद हुआ है जिसमें आरोपी अपने मामा को घसीटता दिख रहा है।
    Q5: पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
    👉 पुलिस ने आरोपी को घटनास्थल से ही गिरफ्तार कर लिया और हत्या का केस दर्ज कर लिया है।

  • मुंबई में बिज़नेसमैन से टैक्स कंसल्टेंट्स ने उड़ाए ₹31 लाख! GST भरने का वादा करके किया बड़ा घोटाला

    मुंबई में बिज़नेसमैन से टैक्स कंसल्टेंट्स ने उड़ाए ₹31 लाख! GST भरने का वादा करके किया बड़ा घोटाला

    गोरगांव के 56 वर्षीय बिज़नेसमैन को टैक्स कंसल्टेंट्स ने ₹31 लाख का चूना लगा दिया। GST और इनकम टैक्स भरने का वादा करके रकम गायब, अब नोटिस और पेनल्टी झेलनी पड़ी!

    मुंबई: गोरेगांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां गोरगांव के एक 56 वर्षीय फैब्रिकेशन बिज़नेसमैन को दो टैक्स कंसल्टेंट्स ने ₹31 लाख का चूना लगा दिया।
    पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि आरोपियों ने उनसे GST और इनकम टैक्स भरने के नाम पर ₹27.8 लाख लिए, लेकिन न तो टैक्स भरा गया और न ही पैसे लौटाए गए।

    नतीजा? बिज़नेसमैन को टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस, पेनल्टी और ब्याज तक देना पड़ा।

    💼 कैसे रचा गया ठगी का खेल

    दरअसल, शिकायतकर्ता एक छोटे स्तर पर फैब्रिकेशन बिज़नेस चलाते हैं। उनके एक दोस्त की फर्म ने पहले से ही आरोपी टैक्स कंसल्टेंट को हायर किया हुआ था।
    2018 में उन्होंने भी भरोसा करके उन्हीं को अपना टैक्स हैंडलर बना लिया।

    2019-2020 में जब कोविड लॉकडाउन आया, तो बिज़नेसमैन टैक्स भर नहीं पाए। तब कंसल्टेंट्स ने कहा,

    “आप हमें रकम दे दो, हम आपके लिए GST और इनकम टैक्स जमा कर देंगे।”

    उन्होंने भरोसा किया और ₹27.8 लाख उनके हाथ में थमा दिए। लेकिन हुआ उल्टा — न टैक्स जमा हुआ, न कोई अपडेट मिला।

    ⚠️ GST विभाग से आया झटका, फिर इनकम टैक्स का नोटिस!

    मई 2023 में बिज़नेसमैन को GST विभाग से नोटिस आया कि उनका टैक्स नहीं भरा गया है।
    फिर फरवरी 2024 में दूसरा नोटिस आया — 2020-21 के टैक्स का भी भुगतान नहीं हुआ!

    इसके बाद अगस्त 2023 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी शो कॉज नोटिस भेज दिया कि बिज़नेस प्रॉफिट पर टैक्स क्यों नहीं दिया गया।

    📵 “बस ₹1 लाख दो, सब सेट कर दूंगा” — और फिर गायब!

    जब पीड़ित ने कंसल्टेंट से जवाब मांगा तो उसने कहा कि मामला सुलझ जाएगा, बस ₹1 लाख और दो।
    बिज़नेसमैन ने भरोसा कर फिर से पैसे दे दिए — लेकिन इसके बाद आरोपी ने फोन बंद कर दिया और गायब हो गया!

    उसका भाई बोला — “वो तो लापता है।”

    आख़िरकार बिज़नेसमैन ने गोरगांव पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अब आरोपियों के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी (Cheating) का केस दर्ज किया गया है।

    🧩 पीड़ित पर पड़ा दोहरा असर: पैसे गए, ऊपर से पेनल्टी भी!

    ₹27.8 लाख देने के बाद भी टैक्स जमा न होने से बिज़नेसमैन को ₹3.29 लाख का पेनल्टी और ब्याज भरना पड़ा।
    यानि कुल नुकसान करीब ₹31 लाख का हुआ।
    पुलिस का कहना है कि मामला जांच में है और आरोपियों की तलाश जारी है।


    FAQ सेक्शन

    Q1. मामला कहां का है?
    यह मामला मुंबई के गोरगांव इलाके का है।

    Q2. कितनी रकम की ठगी हुई?
    बिज़नेसमैन से कुल ₹31 लाख की ठगी की गई, जिसमें ₹27.8 लाख टैक्स भुगतान के नाम पर थे।

    Q3. आरोपियों ने कैसे झांसा दिया?
    उन्होंने कहा कि वे बिज़नेसमैन की ओर से GST और इनकम टैक्स भर देंगे, लेकिन रकम लेकर गायब हो गए।

    Q4. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
    गोरगांव पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है और आरोपियों की तलाश जारी है।

    Q5. पीड़ित को कितना नुकसान हुआ?
    ₹27.8 लाख की रकम तो गई ही, साथ में ₹3.29 लाख का पेनल्टी और ब्याज भी देना पड़ा

  • मुंबई पुलिस ने पालघर में MD ड्रग फैक्ट्री पकड़ी, एक गिरफ्तार; मास्टरमाइंड कर रहा था दुबई से ऑपरेट

    मुंबई पुलिस ने पालघर में MD ड्रग फैक्ट्री पकड़ी, एक गिरफ्तार; मास्टरमाइंड कर रहा था दुबई से ऑपरेट

    मुंबई पुलिस ने पालघर जिले के वसई में एमडी ड्रग फैक्ट्री पर छापा मारकर 7 किलो ड्रग और करोड़ों की केमिकल सामग्री जब्त की। मास्टरमाइंड दुबई में बैठा था।

    मुंबई: पालघर जिले के वसई इलाके में एक अवैध MD ड्रग (मेफेड्रोन) बनाने वाली फैक्ट्री का मुंबई पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।
    पुलिस ने मौके से करीब 7 किलो MD ड्रग और बड़ी मात्रा में केमिकल्स व कच्चा माल बरामद किया है, जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    यह कार्रवाई शनिवार देर रात मुंबई पुलिस की ज़ोन 6 एंटी-नारकोटिक्स सेल और तिलक नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने की।

    दुबई से चल रहा था रैकेट

    जांच में पुलिस को पता चला कि इस ड्रग फैक्ट्री के पीछे का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा था, जो वहीं से पूरी सप्लाई चेन और नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था।
    पुलिस ने एक आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया है और बाकी फरार लोगों की तलाश जारी है।

    रशीद कंपाउंड में चल रहा था गोरखधंधा

    यह ड्रग फैक्ट्री वसई के पेल्हार इलाके के रशीद कंपाउंड में चल रही थी। यहां पर मेफेड्रोन ड्रग को अवैध तरीके से तैयार किया जा रहा था।
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फैक्ट्री में रासायनिक मिश्रण और मिक्सिंग मशीनें लगी थीं, जिनका इस्तेमाल एमडी बनाने के लिए किया जाता था।

    एक अधिकारी ने बताया —

    “हमारी टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि पेल्हार में एक केमिकल यूनिट में एमडी ड्रग तैयार की जा रही है। छापा मारते ही पूरा सेटअप मिला — रिएक्टर, केमिकल्स, ड्रम्स और ड्रग तैयार अवस्था में।”

    जब्त की गई सामग्री की कीमत करोड़ों में

    पुलिस ने फैक्ट्री से 7 किलो मेफेड्रोन (MD ड्रग), भारी मात्रा में केमिकल्स और अन्य कच्चा माल जब्त किया है। बरामद माल की कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है।
    इस ऑपरेशन में पुलिस को अंदेशा है कि ड्रग्स मुंबई और आसपास के इलाकों में सप्लाई किए जा रहे थे, जिनका लिंक बड़े नेटवर्क से हो सकता है।

    जांच जारी, कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

    मुंबई पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस रैकेट का नेटवर्क कितने राज्यों और देशों तक फैला हुआ है।
    मास्टरमाइंड दुबई से व्हाट्सएप और इंटरनेट कॉल्स के जरिए नेटवर्क चलाता था।
    पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है और एनसीबी व अन्य एजेंसियों से भी संपर्क में है।

    मुंबई पुलिस की सख्त कार्रवाई

    पुलिस ने बताया कि इस साल अब तक मेफेड्रोन ड्रग से जुड़े कई केसों में कार्रवाई की जा चुकी है।
    मुंबई, ठाणे और पालघर इलाकों में ड्रग माफिया की सक्रियता बढ़ रही थी, जिसके चलते स्पेशल टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।


    FAQ Section

    Q1. पल्पघर में कब और कहां ड्रग फैक्ट्री पकड़ी गई?
    A. शनिवार देर रात वसई के पेल्हार इलाके के रशीद कंपाउंड में ड्रग फैक्ट्री पर छापा मारा गया।

    Q2. कितनी मात्रा में ड्रग जब्त हुई है?
    A. पुलिस ने करीब 7 किलो एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग और करोड़ों की कीमत का कच्चा माल जब्त किया है।

    Q3. इस केस में कौन गिरफ्तार हुआ है?
    A. एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मास्टरमाइंड दुबई से इस नेटवर्क को चला रहा था।

    Q4. कार्रवाई किसने की?
    A. मुंबई पुलिस की ज़ोन 6 एंटी-नारकोटिक्स सेल और तिलक नगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की।

    Q5. क्या इस नेटवर्क के और लोग शामिल हैं?
    A. हां, पुलिस अन्य संदिग्धों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है।

  • बोरीवली में दर्दनाक हादसा: 7 साल की बच्ची को ऑटो ड्राइवर ने मारी टक्कर और फरार, पैर में फ्रैक्चर

    बोरीवली में दर्दनाक हादसा: 7 साल की बच्ची को ऑटो ड्राइवर ने मारी टक्कर और फरार, पैर में फ्रैक्चर

    मुंबई के बोरीवली वेस्ट इलाके में एक सात साल की बच्ची को तेज़ रफ्तार ऑटो ड्राइवर ने टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। बच्ची के पैर में फ्रैक्चर आया है, पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

    मुंबई: बोरीवली पश्चिम, शनिवार (11 अक्टूबर) की दोपहर एक दर्दनाक हादसा हुआ। 7 साल की त्रिशा नाम की बच्ची को एक अनजान ऑटो ड्राइवर ने टक्कर मार दी और बिना रुके फरार हो गया।
    घटना गोकुल शॉपिंग सेंटर के पास की है, जहाँ त्रिशा अपनी दादी के साथ थी। हादसे में बच्ची के पैर में गंभीर चोट आई है और उसका इलाज चल रहा है।

    🍲 दादी के भेल स्टॉल पर गई थी बच्ची

    त्रिशा की दादी शारदा बोरीवली वेस्ट इलाके में भेल का स्टॉल चलाती हैं। 11 अक्टूबर को त्रिशा अपनी दादी के साथ स्टॉल पर गई थी।
    करीब दोपहर 3:45 बजे, जब वह सड़क पार कर रही थी, तभी तेज़ रफ्तार से आ रहे एक ऑटो ने उसे टक्कर मारी और ड्राइवर बिना रुके भाग गया।

    🏥 कांदीवली के अस्पताल में भर्ती, पैर में फ्रैक्चर

    घायल त्रिशा को परिजनों ने तुरंत बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल, कांदीवली में भर्ती कराया।
    डॉक्टरों ने बताया कि उसके पैर में फ्रैक्चर हुआ है, लेकिन वह अब खतरे से बाहर है। परिजनों ने बताया कि हादसे के वक्त ऑटो बहुत तेज़ गति से आ रहा था और आसपास के लोग मदद के लिए तुरंत पहुंचे।

    🚔 पुलिस ने दर्ज किया मामला, आरोपी की तलाश जारी

    त्रिशा के पिता ने इस घटना की शिकायत बोरीवली पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है।
    पुलिस ने तेज़ और लापरवाह ड्राइविंग (rash driving) के तहत FIR दर्ज कर ली है और फरार ऑटो ड्राइवर की तलाश जारी है।
    CCTV फुटेज की जांच की जा रही है ताकि आरोपी का पता लगाया जा सके।

    ⚠️ मुंबई में बढ़ रहे हिट-एंड-रन मामले

    मुंबई में बीते कुछ महीनों में हिट एंड रन केसों में तेज़ी आई है।
    स्थानीय निवासियों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में ऑटो और बाइक चालकों की लापरवाही अक्सर हादसों का कारण बनती है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसे मामलों में तुरंत जानकारी दें ताकि दोषी को जल्द पकड़ा जा सके।


    ❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. हादसा कब और कहाँ हुआ था?
    👉 यह हादसा 11 अक्टूबर को बोरीवली वेस्ट के गोकुल शॉपिंग सेंटर के पास हुआ।

    Q2. घायल बच्ची की हालत कैसी है?
    👉 बच्ची के पैर में फ्रैक्चर है, फिलहाल वह बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल, कंधिवली में इलाजरत है।

    Q3. क्या पुलिस ने ऑटो ड्राइवर को पकड़ लिया है?
    👉 अभी नहीं, लेकिन पुलिस CCTV फुटेज के ज़रिए उसकी पहचान करने में जुटी है।

    Q4. बच्ची उस वक्त क्या कर रही थी?
    👉 वह अपनी दादी के भेल स्टॉल पर गई थी और सड़क पार करते वक्त हादसा हुआ।

    Q5. पुलिस ने कौन-कौन से चार्ज लगाए हैं?
    👉 पुलिस ने राश ड्राइविंग (Rash Driving) और लापरवाही से चोट पहुँचाने के तहत मामला दर्ज किया है।