Malad Digital Arrest Scam: 6 दिन की ‘ऑनलाइन नजरबंदी’, 67 साल की महिला से ₹12 लाख ठगे

मुंबई के मालाड में 67 वर्षीय महिला ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का शिकार, जालसाजों ने फर्जी कोर्ट ऑर्डर और पुलिस बनकर 6 दिन वीडियो कॉल पर रखकर ₹12 लाख RTGS से ट्रांसफर कराए। 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत, FIR दर्ज।

मुंबई: मालाड इलाके में 67 साल की एक गृहिणी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 12 लाख रुपये का चूना लगा दिया गया। जालसाज खुद को पुलिस और सेंट्रल एजेंसी अधिकारी बताकर छह दिन तक महिला को वीडियो कॉल पर “हाउस अरेस्ट” में रखते रहे। मामला तब खुला जब बेटी ने 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

🔎 कैसे बिछाया गया Malad में जाल?

पुलिस के मुताबिक महिला को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को Mumbai Police का अधिकारी बताया और प्रोफाइल फोटो में पुलिस का लोगो लगाया हुआ था। उसने कहा कि लखनऊ में महिला के नाम से खुला बैंक अकाउंट “जम्मू-कश्मीर में आतंकी फंडिंग” के लिए 17 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने में इस्तेमाल हुआ है।

उसे 10% कमीशन लेने और 10 साल तक की जेल की धमकी दी गई—यहीं से डर की शुरुआत हुई।

📄 फर्जी दस्तावेज़, असली डर

विश्वास जमाने के लिए आरोपियों ने कथित Supreme Court of India का आदेश, अरेस्ट वारंट और Reserve Bank of India (RBI) नोटिस के फर्जी कागज भेजे। महिला को कहा गया कि मामला “नेशनल सिक्योरिटी” से जुड़ा है, इसलिए परिवार को कुछ न बताएं।

साइबर पुलिस का कहना है—यही तरीका है जिससे ठग पहले डर पैदा करते हैं और फिर भरोसा जीतते हैं।

🏠 ‘डिजिटल हाउस अरेस्ट’ में 6 दिन

महिला को लगातार वीडियो कॉल पर रहने को कहा गया, रोज़ रिपोर्ट करने को बोला गया—“मैं सुरक्षित हूं।” घबराने पर आरोपी उसे शांत कराता और “मदद” का भरोसा देता। इसी दौरान उसने महिला से सारी बैंक डिटेल्स निकलवा लीं।

तीसरे दिन महिला से 12 लाख की FD तोड़कर “वेरिफिकेशन” के नाम पर कोयंबटूर के एक अकाउंट में RTGS से ट्रांसफर करा लिया गया।

📞 ऐसे खुला मामला

छह दिन बाद बेटी ने फोन चेक किया तो पूरा खेल समझ आया। तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संदिग्ध खातों की पड़ताल की जा रही है।

🛑 साइबर सेफ्टी एडवाइजरी (जरूर पढ़ें)

  • किसी भी साइबर फ्रॉड की तुरंत शिकायत 1930 पर करें
  • पुलिस कभी भी WhatsApp पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती
  • कोई भी सरकारी एजेंसी “वेरिफिकेशन” के नाम पर पैसे ट्रांसफर नहीं करवाती
  • कोर्ट वारंट/नोटिस मैसेजिंग ऐप से नहीं भेजे जाते

❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
👉 यह एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस/एजेंसी बताकर वीडियो कॉल पर “नजरबंद” रखते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

Q2. क्या पुलिस WhatsApp पर अरेस्ट करती है?
👉 नहीं। पुलिस कभी भी WhatsApp या वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती।

Q3. साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?
👉 तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

Q4. क्या पैसे वापस मिल सकते हैं?
👉 जल्दी शिकायत करने पर बैंक अकाउंट फ्रीज होने की संभावना रहती है, जिससे रिकवरी संभव हो सकती है।


Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading