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  • 15 साल की देरी पर MahaRERA सख्त, शेठ डेवलपर्स को ब्याज देने का आदेश

    15 साल की देरी पर MahaRERA सख्त, शेठ डेवलपर्स को ब्याज देने का आदेश

    मालाड ईस्ट के शेठ ब्लू आइवी प्रोजेक्ट में 15 साल की देरी पर MahaRERA ने शेठ डेवलपर्स को 15 फ्लैट खरीदारों को ब्याज देने और बिक्री समझौता रजिस्टर करने का आदेश दिया।

    मुंबई: मालाड ईस्ट में शेठ डेवलपर्स की आवासीय परियोजना शेठ ब्लू आइवी में करीब 15 साल की देरी को गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (MahaRERA) ने बड़ा फैसला सुनाया है। MahaRERA ने बिल्डर को आदेश दिया है कि वह 15 फ्लैट खरीदारों को जुलाई 2022 से फ्लैट का कब्जा मिलने तक ब्याज दे और साल 2010 से लंबित बिक्री समझौतों को तुरंत निष्पादित कर रजिस्टर करे।

    क्या है पूरा मामला

    शेठ ब्लू आइवी प्रोजेक्ट, जिसे शुरुआत में वसंत पर्ल नाम से बेचा गया था, उसमें 2010 से 2012 के बीच 15 लोगों ने फ्लैट बुक किए थे। उस समय बिल्डर ने 36 महीने में निर्माण पूरा करने और 42 महीने में कब्जा देने का वादा किया था। लेकिन सालों बीतने के बावजूद खरीदारों को न तो फ्लैट मिले और न ही पक्का जवाब।

    लंबे इंतजार और परेशानी के बाद इन सभी खरीदारों ने 2023 से 2025 के बीच MahaRERA का दरवाजा खटखटाया।

    खरीदारों की शिकायत क्या थी

    खरीदारों की ओर से पेश वकीलों गिरीश केडिया और हर्षद भडभडे ने बताया कि बिल्डर ने सिर्फ अलॉटमेंट लेटर दिया था, लेकिन बिक्री का एग्रीमेंट कभी रजिस्टर नहीं किया।
    इस बीच प्रोजेक्ट का लेआउट बदला गया, फ्लैट नंबर बदले गए और कब्जे की तारीख का कोई जिक्र नहीं किया गया।

    खरीदारों का कहना था कि

    • 2013 से 2023 तक उन्होंने कई बार जानकारी मांगी
    • साइट पर लंबे समय तक काम बंद रहा
    • कई खरीदार किराए के मकानों में रहने को मजबूर हुए
    • आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव झेलना पड़ा

    इसी आधार पर उन्होंने 42.8 लाख रुपये से लेकर 2.28 करोड़ रुपये तक मुआवजे की मांग की थी।

    बिल्डर का पक्ष

    MahaRERA में शेठ डेवलपर्स ने सफाई देते हुए कहा कि प्रोजेक्ट बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले की वजह से करीब छह साल तक अटका रहा। कोर्ट के आदेश के चलते न तो निर्माण हो सका और न ही एग्रीमेंट रजिस्टर हो पाए।
    बिल्डर के मुताबिक अप्रैल 2024 में काम दोबारा शुरू हुआ।

    कंपनी ने यह भी कहा कि उसने सभी खरीदारों को रिफंड का विकल्प दिया था, लेकिन शिकायतकर्ताओं ने प्रोजेक्ट में बने रहने का फैसला किया।

    प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति

    MahaRERA की वेबसाइट के अनुसार

    • पहले प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीख: 30 जून 2022
    • संशोधित तारीख: 30 जून 2023
    • अब नई डेडलाइन: 28 नवंबर 2027

    यानी खरीदारों को अभी भी और इंतजार करना होगा।

    MahaRERA का फैसला

    MahaRERA के अध्यक्ष मनोज सौनिक ने 11 दिसंबर को आदेश दिया कि

    • बिल्डर को जुलाई 2022 से कब्जा मिलने तक खरीदारों को ब्याज देना होगा
    • जितनी रकम खरीदारों ने दी है, उस पर ब्याज लागू होगा
    • सभी लंबित बिक्री समझौतों को तुरंत निष्पादित और रजिस्टर करना होगा

    हालांकि, MahaRERA ने देरी के लिए अलग से मुआवजा और बढ़ी हुई स्टांप ड्यूटी की भरपाई की मांग को खारिज कर दिया।

    क्यों अहम है यह फैसला

    यह आदेश उन हजारों घर खरीदारों के लिए अहम माना जा रहा है, जो सालों से अटके प्रोजेक्ट्स में फंसे हैं। इससे यह साफ संदेश गया है कि लंबी देरी पर बिल्डरों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।


    FAQ

    Q1. MahaRERA ने बिल्डर को क्या आदेश दिया है?
    बिल्डर को जुलाई 2022 से कब्जा मिलने तक ब्याज देने और बिक्री समझौते रजिस्टर करने का आदेश दिया गया है।

    Q2. कितने खरीदारों को राहत मिली है?
    कुल 15 फ्लैट खरीदारों को यह राहत मिली है।

    Q3. क्या खरीदारों को मुआवजा मिलेगा?
    नहीं, MahaRERA ने अलग से मुआवजे और स्टांप ड्यूटी की मांग खारिज कर दी है।

    Q4. प्रोजेक्ट कब तक पूरा होना है?
    नई समयसीमा के अनुसार 28 नवंबर 2027 तक।

  • दहिसर में ऑर्केस्ट्रा बार से उगाही, महिला समेत दो आरोपी गिरफ्तार

    दहिसर में ऑर्केस्ट्रा बार से उगाही, महिला समेत दो आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई के दहिसर ईस्ट में ऑर्केस्ट्रा बार संचालक से फर्जी शिकायतों की धमकी देकर उगाही करने के मामले में पुलिस ने एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी हर महीने पैसे मांगकर कारोबार में रुकावट डालने की धमकी दे रहे थे।

    मुंबई: दहिसर ईस्ट इलाके में एक ऑर्केस्ट्रा बार और रेस्टोरेंट संचालक से लगातार उगाही करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने फर्जी शिकायतों की धमकी देकर पैसे वसूलने के आरोप में एक महिला और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और बीएमसी में झूठी शिकायतें करने का डर दिखाकर बार संचालक से हजारों रुपये ऐंठने का आरोप है।

    🧑‍💼 शिकायतकर्ता और कारोबार की पृष्ठभूमि

    इस मामले में शिकायतकर्ता चंद्रशेखर गुरुनाथ शेट्टी (47) हैं, जो दहिसर ईस्ट के रावलपाड़ा इलाके में रहते हैं।
    वह अपने चचेरे भाई के ऑर्केस्ट्रा बार और रेस्टोरेंट का संचालन संभालते हैं, जो दहिसर चेक पोस्ट के पास प्रभात इंडस्ट्रियल एस्टेट में स्थित है।

    शेट्टी के अनुसार, उनका ऑर्केस्ट्रा बार पूरी तरह से वैध है और उसके पास FL-III लाइसेंस समेत सभी जरूरी सरकारी अनुमति मौजूद हैं। बार में काम करने वाले स्टाफ और महिला कलाकारों से जुड़े सभी नियमों का भी पालन किया जाता है।

    💰 उगाही की शुरुआत और धमकियां

    शिकायत में बताया गया है कि मई 2025 में एक महिला रीमा राजेश मोहिते और उसका साथी अनिल यादव बार में पहुंचे।
    दोनों ने कथित तौर पर बार को “शांतिपूर्वक चलाने” के बदले हर महीने एक तय रकम देने की मांग की।

    आरोप है कि उन्होंने साफ धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए, तो वे पुलिस कंट्रोल रूम, फायर ब्रिगेड और नगर निगम (BMC) में बार के खिलाफ बार-बार शिकायतें दर्ज कराएंगे और उसे अवैध गतिविधियों में फंसाएंगे।

    🔁 फर्जी शिकायतों से परेशान करने का आरोप

    शेट्टी ने बताया कि बाद में उन्हें इलाके के अन्य बार मालिकों से जानकारी मिली कि यही आरोपी पहले भी कई बार और रेस्टोरेंट्स को इसी तरह फर्जी शिकायतों के जरिए परेशान कर चुके हैं।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने अपने नए कारोबार को परेशान न करने की विनती भी की, लेकिन इसके बावजूद आरोपी लगातार दबाव बनाते रहे और पैसे की मांग जारी रखी।

    🚨 फर्जी इमरजेंसी कॉल से मचा हड़कंप

    19 मई 2025 की रात एक फर्जी इमरजेंसी कॉल के बाद हालात और बिगड़ गए।
    शिकायत के अनुसार, देर रात पुलिस, फायर ब्रिगेड और अडानी इलेक्ट्रिसिटी के अधिकारी अचानक होटल पहुंच गए। इससे बार में अफरा-तफरी मच गई और कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ।

    इस घटना के बाद आरोपियों ने अपनी धमकियां और तेज कर दीं और रकम बढ़ाने का दबाव बनाने लगे।

    📲 दबाव में किए गए भुगतान

    शेट्टी का आरोप है कि अपने व्यवसाय को बचाने के लिए उन्होंने मई से दिसंबर 2025 के बीच कई बार पैसे दिए।

    • शुरुआत में ₹2,000 प्रति माह
    • बाद में रकम बढ़ाकर ₹3,000 की गई
    • फिर ₹10,000 प्रति माह की मांग की जाने लगी

    पैसे UPI ट्रांजैक्शन और नकद दोनों माध्यमों से दिए गए। कुल मिलाकर करीब ₹22,000 की उगाही की गई।

    🚓 दहिसर पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

    शिकायत और डिजिटल पेमेंट के सबूतों के आधार पर दहिसर पुलिस ने रीमा राजेश मोहिते और अनिल यादव के खिलाफ

    • उगाही
    • आपराधिक धमकी
    • अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है।

    दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन्होंने इलाके के अन्य बार और रेस्टोरेंट संचालकों को भी इसी तरह निशाना बनाया था।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. यह मामला कहां का है?
    👉 मुंबई के दहिसर ईस्ट इलाके का।

    Q2. आरोपी कौन हैं?
    👉 रीमा राजेश मोहिते और अनिल यादव।

    Q3. उगाही किस तरह की जा रही थी?
    👉 फर्जी पुलिस, फायर ब्रिगेड और BMC शिकायतों की धमकी देकर।

    Q4. कितनी रकम वसूली गई?
    👉 कुल ₹22,000।

    Q5. पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
    👉 दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू की गई है।

  • कनाडा वर्क वीज़ा के नाम पर 1.63 करोड़ की ठगी, मालाड से पति-पत्नी गिरफ्तार

    कनाडा वर्क वीज़ा के नाम पर 1.63 करोड़ की ठगी, मालाड से पति-पत्नी गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड में कनाडा वर्क वीज़ा दिलाने के नाम पर 37 लोगों से 1.63 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले पति-पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी डेढ़ साल से फरार थे।

    मुंबई: कनाडा में नौकरी और वर्क वीज़ा दिलाने का सपना दिखाकर 37 लोगों से करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपये की ठगी करने वाले पति-पत्नी को मालाड पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी खुद को वीज़ा कंसल्टेंट बताकर लोगों को फंसाते थे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए रकम ऐंठते थे। पुलिस को शक है कि इस गिरोह से जुड़े और भी मामले सामने आ सकते हैं।

    डेढ़ साल से फरार थे आरोपी

    गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रीना गौरव शाह और गौरव शाह के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने से पहले ही दोनों फरार हो गए थे और करीब डेढ़ साल से पुलिस को चकमा दे रहे थे। हाल ही में मालाड पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर दोनों को दबोच लिया।

    कैसे हुआ ठगी का खुलासा

    इस मामले की शिकायतकर्ता सारिका हैं, जो मालवणी इलाके में अपनी मां के साथ रहती हैं। करीब दो साल पहले वह बोरीवली स्थित एक निजी कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर काम कर रही थीं और कनाडा में नौकरी की तलाश में थीं।

    इसी दौरान उन्होंने मालाड के काचपाड़ा इलाके में स्थित ‘द वीज़ा मेंशन’ नामक कंपनी का विज्ञापन देखा। संपर्क करने पर उन्हें ऑफिस बुलाया गया, जहां उनकी मुलाकात कंपनी की मालकिन बताई जा रही रीना शाह और गौरव शाह से कराई गई।

    7 लाख में वर्क वीज़ा का लालच

    आरोपियों ने सारिका को भरोसा दिलाया कि वे 7 लाख रुपये में कनाडा वर्क वीज़ा दिलवा देंगे। उन्हें कंपनी का ई-मेल आईडी भी दिया गया और कुछ दिनों बाद कथित तौर पर कनाडा की एक कंपनी से जॉब ऑफर भेजा गया।

    सारिका को पहला ऑफर संदिग्ध लगा, लेकिन बाद में दूसरा ऑफर भेजा गया, जिस पर भरोसा कर उन्होंने वीज़ा प्रक्रिया के लिए किस्तों में 7.16 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

    वर्क वीज़ा की जगह मिला विज़िटर वीज़ा

    11 जून 2024 को आरोपियों ने बताया कि सारिका का कनाडा वर्क वीज़ा मंजूर हो गया है। जब वह मुंबई के महालक्ष्मी स्थित कनाडा कांसुलेट पहुंचीं, तो वहां पता चला कि दिया गया वीज़ा वर्क नहीं बल्कि विज़िटर वीज़ा है।

    इसके बाद वह जब मालाड स्थित ‘द वीज़ा मेंशन’ के ऑफिस पहुंचीं, तो वह बंद मिला। फोन कॉल और मैसेज का भी कोई जवाब नहीं मिला।

    37 लोगों से 1.56 करोड़ से ज्यादा की ठगी

    जांच में सामने आया कि सारिका अकेली पीड़िता नहीं थीं। ठीक इसी तरह 36 अन्य लोगों को भी कनाडा वर्क वीज़ा का झांसा देकर ठगा गया था।
    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कुल ₹1,56,70,400 की रकम वसूल की और उसे हड़प लिया।

    मालाड पुलिस की कार्रवाई

    सभी सबूत जुटाने के बाद मालाड पुलिस ने रीना और गौरव शाह के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। लंबे समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस का कहना है कि:

    • आरोपियों के बैंक खातों और लेन-देन की जांच की जा रही है
    • अन्य पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है
    • इस रैकेट से जुड़े और लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है

    FAQ

    Q1. यह ठगी किस इलाके में हुई?
    👉 मुंबई के मालाड इलाके में।

    Q2. कुल कितने लोग ठगी का शिकार हुए?
    👉 37 लोग।

    Q3. ठगी की कुल रकम कितनी है?
    👉 करीब 1.63 करोड़ रुपये।

    Q4. आरोपी कौन हैं?
    👉 रीना गौरव शाह और गौरव शाह।

    Q5. पुलिस आगे क्या जांच कर रही है?
    👉 अन्य पीड़ितों, बैंक ट्रांजैक्शन और इस रैकेट से जुड़े लोगों की जांच।

  • मालाड में 25 लाख की नकली सोने की ठगी, इंटर-स्टेट गैंग गिरफ्तार

    मालाड में 25 लाख की नकली सोने की ठगी, इंटर-स्टेट गैंग गिरफ्तार

    मालाड (वेस्ट) में खुदाई के दौरान सोना मिलने का झांसा देकर 25 लाख रुपये की ठगी करने वाले इंटर-स्टेट गैंग को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया। गुजरात और पालघर से आरोपियों की धरपकड़, 15.45 लाख रुपये बरामद।

    मुंबई: जमीन की खुदाई के दौरान सोने के आभूषण मिलने का झांसा देकर मालाड इलाके में 25 लाख रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर इंटर-स्टेट गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। मुंबई पुलिस ने गुजरात और पालघर से इस गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार है। मामले में अब तक 15.45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। यह ठगी नवंबर के अंत से दिसंबर की शुरुआत के बीच की गई थी।

    Inter-state-gang-arrested-for-fake-gold-fraud-worth-Rs-25-lakh-in-Malad-news

    खुदाई में सोना मिलने का झांसा देकर ठगी

    पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता दिनेश मेहता (51), जो मालाड (वेस्ट) के सोमवारी बाजार स्थित अंकुर बिल्डिंग में रहते हैं, उनसे मुख्य आरोपी बाबूलाल भालाराम वाघेला (55) ने संपर्क साधा।
    आरोपी ने खुद को राजस्थान से जुड़ा बताते हुए राजस्थानी भाषा में बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे भरोसा जीत लिया। उसने दावा किया कि नासिक में एक मंदिर के पीछे खुदाई के दौरान करीब 900 ग्राम सोने के आभूषण मिले हैं

    नमूना दिखाकर बनाया विश्वास

    आरोपी ने या तो आभूषण बेचने में मदद करने या सीधे बेचने का प्रस्ताव दिया। भरोसा दिलाने के लिए उसने कुछ पीले धातु के मोती नमूने के तौर पर दिए, जो जांच में असली सोना निकले। इसी भरोसे में आकर दिनेश मेहता ने 25 लाख रुपये नकद दे दिए और आभूषण अपने पास ले लिए।

    जौहरी की जांच में निकला नकली सोना

    कुछ समय बाद जब इन आभूषणों को जौहरी को दिखाया गया, तो वे पूरी तरह नकली पाए गए। ठगी का अहसास होते ही शिकायतकर्ता ने मालाड पुलिस से संपर्क किया।
    इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को मालाड पुलिस स्टेशन में क्राइम रजिस्टर नंबर 883/25 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    कानूनी धाराएं और जांच

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 318(4) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है।
    जांच के दौरान क्राइम डिटेक्शन टीम ने मालाड और कांदिवली (ईस्ट) सहित कई इलाकों के 100 से ज्यादा सरकारी और निजी CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली।

    CCTV, कॉल डिटेल और चाल-ढाल से पहचान

    हालांकि CCTV फुटेज साफ नहीं थी, लेकिन पुलिस ने

    • शरीर की बनावट
    • चलने की चाल (gait analysis)
    • कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल डंप डेटा

    के आधार पर आरोपियों की पहचान की। लगातार तीन दिनों की मेहनत के बाद पुलिस को सफलता मिली।

    गुजरात और विरार से गिरफ्तारियां

    जांच में कुल पांच आरोपियों की पहचान हुई।

    • मुख्य आरोपी बाबूलाल वाघेला को कालोल, गांधीनगर (गुजरात) से गिरफ्तार किया गया।
    • उसके घर की तलाशी में 15.45 लाख रुपये नकद और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।
    • उसकी पत्नी कोकुबाई वाघेला (50) की भूमिका सामने आने पर उन्हें BNS की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिया गया है।

    इसके बाद विरार (ईस्ट) से तीन अन्य आरोपी—
    मंगलाराम वागरी, केसराराम वागरी और भवरलाल वागरी—को गिरफ्तार किया गया।

    राजस्थान से जुड़े, पेशे से फोटो फ्रेम बनाने वाले आरोपी

    पुलिस के मुताबिक सभी आरोपी मूल रूप से राजस्थान के जालोर जिले के रहने वाले हैं और अलग-अलग राज्यों में घूम-घूमकर ऐसी ठगी करते हैं।
    गिरफ्तार आरोपी पेशे से फोटो फ्रेम बनाने का काम करते हैं। मुख्य आरोपी बाबूलाल वाघेला के खिलाफ गुजरात के कालोल तालुका और साबरमती पुलिस स्टेशन में पहले से भी ठगी के मामले दर्ज हैं।

    एक आरोपी फरार, तलाश जारी

    इस केस में गोविंद (उम्र करीब 30 वर्ष) नाम का एक आरोपी अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
    बरामद रकम के अलावा बाकी पैसे और अन्य संपत्ति की रिकवरी की प्रक्रिया जारी है।

    पुलिस अधिकारियों की भूमिका

    इस पूरे मामले की जांच एपीआई अभिजीत काले और दीपक रैवाडे कर रहे हैं, जो वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दुष्यंत चव्हाण के मार्गदर्शन में काम कर रहे हैं।


    FAQ सेक्शन

    Q1. ठगी की रकम कितनी थी?
    25 लाख रुपये नकद।

    Q2. अब तक कितनी रकम बरामद हुई है?
    15.45 लाख रुपये।

    Q3. मुख्य आरोपी कहां से गिरफ्तार हुआ?
    कालोल, गांधीनगर (गुजरात) से।

    Q4. कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
    चार आरोपी गिरफ्तार, एक फरार।

    Q5. कौन-सी धाराओं में केस दर्ज है?
    BNS की धारा 316(2), 318(4) और 3(5)।

  • मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    धारावी की तर्ज पर मालवणी के 641 एकड़ इलाके के पुनर्विकास की तैयारी शुरू। क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल, सर्वे और विस्थापन को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

    महाराष्ट्र/नागपुर: धारावी पुनर्विकास योजना के बाद अब मुंबई के मालाड स्थित मालवनी इलाके के 641 एकड़ भूखंड पर महायुति सरकार की नजर टिक गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे इलाके के क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए सर्वे और योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसे झोपड़पट्टी-मुक्त करने की पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दे रहा है।

    धारावी मॉडल पर मालवणी पुनर्विकास की तैयारी

    देश की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी को अडानी ग्रुप को सौंपे जाने के बाद अब सरकार ने मालवनी क्षेत्र के पुनर्विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में 641 एकड़ क्षेत्र के सर्वेक्षण और क्लस्टर डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लस्टर मॉडल के जरिए पूरे मालवनी इलाके का कम समय में पुनर्विकास संभव है और इसे एक बड़े झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    641 एकड़ में फैला मालवनी, 14 हजार झोपड़ियां

    मालवनी इलाके का कुल क्षेत्रफल 641 एकड़ है, जिसमें

    • राज्य सरकार
    • म्हाडा
    • बृहन्मुंबई महानगरपालिका
    • निजी भूखंड

    शामिल हैं।
    इसमें से 565.98 एकड़ क्षेत्र में झोपड़पट्टियां हैं, जबकि 75.02 एकड़ खुली जमीन है। इस पूरे इलाके में करीब 14 हजार झोपड़ियां बसी हुई हैं। सरकार का दावा है कि पुनर्विकास के बाद यह इलाका पूरी तरह झोपड़पट्टी-मुक्त हो जाएगा।

    13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका

    विपक्ष का आरोप है कि इस योजना के नाम पर मालवनी में रहने वाले करीब 13 लाख लोगों को विस्थापित किया जाएगा। धारावी पुनर्विकास को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मुंबई में विकास के नाम पर लगातार बड़े भूखंड बिल्डरों की झोली में डाले जा रहे हैं, जबकि स्थानीय निवासियों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

    कौन करेगा सर्वे और रिपोर्ट?

    बैठक में तय किया गया कि

    • म्हाडा और
    • झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA)

    अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वे करेंगे।
    सभी झोपड़पट्टियों का सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसियां संयुक्त रिपोर्ट तैयार करेंगी।
    जहां कानूनी अड़चनें होंगी, वहां अलग से कार्रवाई की जाएगी, और जहां विकास संभव होगा, उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

    इस अहम बैठक में

    • आवास राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर
    • विधायक असलम शेख
    • अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता
    • म्हाडा अधिकारी मिलिंद बोरीकर
    • SRA CEO डॉ. महेंद्र कल्याणकर

    मौजूद रहे।
    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई मनपा आयुक्त भूषण गगरानी भी बैठक में शामिल हुए।

    दागी बिल्डर को ठेका मिलने की चर्चा

    सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्विकास परियोजना को लेकर पहले ही एक दागी बिल्डर को ठेका दिए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आरोप है कि यह वही बिल्डर है, जिसने चेंबूर के माहुल इलाके में प्रोजेक्ट-अफेक्टेड लोगों के लिए इमारतें बनाई थीं, जहां करीब 9 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि वह आपराधिक मामले में जेल भी जा चुका है।

    अब उसी बिल्डर को एक भाजपा नेता के माध्यम से मालवनी की बड़ी पुनर्विकास योजना में शामिल करने की कोशिश हो रही है।


    FAQ

    Q1. मालवणी पुनर्विकास योजना क्या है?
    मालवणी इलाके को क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकसित करने की सरकारी योजना।

    Q2. कुल कितनी जमीन शामिल है?
    करीब 641 एकड़ भूमि।

    Q3. कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
    करीब 13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।

    Q4. विवाद क्यों हो रहा है?
    विपक्ष का आरोप है कि योजना का फायदा बिल्डरों को दिया जा रहा है।

  • Malad में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशियों को बैन दवाइयां बेचने वाले 5 गिरफ्तार

    Malad में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशियों को बैन दवाइयां बेचने वाले 5 गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड स्थित चिनचोली बंदर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापा मारकर पाँच लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपी विदेशों में बैन दवाओं की सप्लाई का झांसा देकर भारी रकम वसूल रहे थे। पुलिस ने IT Act, BNS और टेलीग्राफ एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

    मुंबई: मालाड इलाके में बांगुर नगर पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी एक अवैध कॉल सेंटर चलाकर अमेरिका सहित कई देशों के ग्राहकों को बैन दवाइयां भेजने का दावा करते थे और उनसे भारी रकम वसूलते थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IT Act और नई दंड संहिता (BNS) की कई धाराओं में केस दर्ज किया है।

    Malad में चल रहा था अवैध कॉल सेंटर, विदेशी ग्राहकों को बनाया जा रहा था निशाना

    मुंबई के चिंचोली बंदर, मालाड स्थित एक ऑफिस में यह फर्जी कॉल सेंटर ऑपरेट किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपी खुद को विदेशी ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर विदेशी ग्राहकों से संपर्क करते थे।

    वे ग्राहक को कहते थे कि उनके लिए ऐसी दवाइयां उपलब्ध हैं जो आमतौर पर बैन हैं या ऑनलाइन बेचना गैरकानूनी है। इसी बहाने उनसे डॉलर में भुगतान भी ले लिया जाता था।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

    पुलिस के अनुसार पकड़े गए पाँच आरोपी—

    • अयूब शेख (30)
    • फैजान भलीम (27)
    • फारुख शेख (29)
    • मोइन अहमद शेख (32)
    • ज़ीशान नासिर अंसारी (22)

    ये सभी मिलकर लंबे समय से ये फर्जीवाड़ा चला रहे थे।
    ये सभी मिलकर अमेरिका सहित कई देशों के लोगों को फंसाकर लाखों की ठगी कर रहे थे।

    कैसे करते थे ठगी? पुलिस ने खोला पूरा खेल

    • संदिग्ध वेबसाइट या डेटा के जरिए विदेशी ग्राहकों तक पहुँच बनाना
    • खुद को इंटरनेशनल ऑनलाइन फार्मेसी का अधिकारी बताना
    • मेडिकल कंसल्टेशन का झांसा देना
    • “बैन मेडिसिन उपलब्ध” कहकर ऑनलाइन पेमेंट वसूलना
    • पैसे लेने के बाद उत्पाद न भेजना

    यह पूरा नेटवर्क फार्मा से जुड़े अवैध कारोबार + साइबर फ्रॉड का कॉम्बिनेशन था।

    कौन-कौन सी धाराओं में केस दर्ज?

    बांगुर नगर पुलिस ने मामला दर्ज किया है—

    • BNS की धाराएँ 318(4), 319(2), 3(5)
    • IT Act 2000 की धाराएँ 66(A), 66(D), 75
    • Indian Telegraph Act की धारा 20

    पाँचों आरोपियों को 15 दिसंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

    मालाड और मुंबई में बढ़ते साइबर फ्रॉड को लेकर पुलिस अलर्ट

    इस तरह के कॉल सेंटर लगातार मुंबई के कई इलाकों में पकड़े जा रहे हैं। विदेशी ग्राहकों को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि—

    • वे दवाओं की कीमत ज़्यादा चुकाते हैं
    • वे शिकायत भारत में दर्ज नहीं करा पाते
    • वेरिफिकेशन की प्रक्रिया मुश्किल होती है

    पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े और लोगों की तलाश कर रही है।


    FAQ सेक्शन

    1. क्या गिरफ्तार कॉल सेंटर वास्तव में दवाइयां सप्लाई करता था?

    नहीं, आरोपी सिर्फ भुगतान लेते थे और बाद में उत्पाद नहीं भेजते थे। यह पूरा रैकेट फर्जीवाड़ा था।

    2. क्या ग्राहकों को किसी तरह की मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन की सुविधा दी जाती थी?

    वे खुद को इंटरनेशनल फार्मेसी बताकर नकली कंसल्टेशन की बात करते थे, जो पूरी तरह अवैध था।

    3. क्या इस रैकेट में और लोग शामिल हो सकते हैं?

    पुलिस के अनुसार यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जिसकी जाँच जारी है।

    4. क्या विदेशी ग्राहक भारत में केस दर्ज कर सकते हैं?

    तकनीकी रूप से हाँ, लेकिन शिकायत प्रक्रिया जटिल होने के कारण अक्सर ठगी की रिपोर्ट नहीं होती।

  • PNB घोटाला: ईडी ने बोरीवली की चार संपत्तियां लिक्विडेटर के हवाले कीं

    PNB घोटाला: ईडी ने बोरीवली की चार संपत्तियां लिक्विडेटर के हवाले कीं

    मुंबई में पीएनबी घोटाले की जांच के तहत ईडी ने बोरीवली स्थित चार अटैच संपत्तियां लिक्विडेटर को सौंपीं। कुल ₹2,565 करोड़ से अधिक की संपत्तियों की जब्ती और नीलामी प्रक्रिया जारी।

    मुंबई: पीएनबी बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज करते हुए मुंबई के बोरीवली ईस्ट में स्थित चार अटैच संपत्तियों को कंपनी लिक्विडेटर के हवाले कर दिया है। यह कदम पीड़ित बैंकों, निवेशकों और अन्य दावेदारों को आर्थिक नुकसान की भरपाई दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है। यह कार्रवाई 21 नवंबर को ईडी की मुंबई जोनल यूनिट द्वारा की गई।

    🏷️ ईडी की कार्यवाही और उद्देश्य

    ईडी की ओर से बताया गया कि यह संपत्तियां पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले से जुड़ी जांच का हिस्सा हैं। एजेंसी ने अब तक मुंबई, कोलकाता और सूरत में स्थित करीब ₹310 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को लिक्विडेटर के अधीन सौंप दिया है, जो गितांजलि जेम्स लिमिटेड से जुड़ी हैं।

    🏷️ मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

    ईडी की जांच में पाया गया कि भगोड़ा कारोबारी मेहुल चोकसी ने अपने साथियों और PNB के कुछ अधिकारियों की मदद से 2014 से 2017 के बीच फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) और फॉरेन क्रेडिट लेटर्स के जरिए बैंक से ₹6,097.63 करोड़ का बड़ा वित्तीय घोटाला किया।

    इसके अलावा चोकसी ने आईसीआईसीआई बैंक से लिए गए लोन का भी भुगतान नहीं किया और जानबूझकर डिफॉल्ट किया।

    🏷️ जांच के दौरान जब्ती और सील की गई संपत्तियां

    जांच के दौरान ईडी ने देशभर में 136 से ज्यादा स्थानों पर छापे मारे और गितांजलि ग्रुप की करीब:

    • ₹597 करोड़ की ज्वेलरी और कीमती चीजें जब्त कीं
    • ₹1,968 करोड़ से अधिक की चल और अचल संपत्तियां अटैच कीं
    • जिनमें शामिल हैं:
      ✔️ देश और विदेश की प्रॉपर्टी
      ✔️ वाहन
      ✔️ बैंक खाते
      ✔️ सूचीबद्ध शेयर
      ✔️ फैक्ट्री परिसर

    कुल मिलाकर अब तक ₹2,565.90 करोड़ मूल्य की संपत्तियां जब्त की गई हैं।

    🏷️ आगे की कानूनी प्रक्रिया

    पीड़ित बैंकों को जल्द भुगतान दिलाने के लिए ईडी और बैंकों ने मिलकर मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में एक संयुक्त आवेदन दिया, जिसे मंजूरी मिल गई है।

    अब इन संपत्तियों की वैल्यूएशन और नीलामी की प्रक्रिया लिक्विडेटर और बैंक की निगरानी में होगी और बिक्री से प्राप्त राशि PNB और ICICI बैंक के खाते में फिक्स्ड डिपॉज़िट के रूप में जमा की जाएगी।

    ईडी ने बताया कि शेष अटैच संपत्तियों को भी जल्द ही इसी प्रक्रिया के तहत सुपुर्द किया जाएगा।


    🔹 FAQ सेक्शन

    📌 प्रश्न 1: यह कार्रवाई किस मामले से जुड़ी है?
    यह कार्रवाई पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी मामले से संबंधित है।

    📌 प्रश्न 2: कुल कितनी संपत्तियां बरामद या जब्त की गई हैं?
    अब तक लगभग ₹2,565.90 करोड़ की संपत्तियां जब्त या अटैच की जा चुकी हैं।

    📌 प्रश्न 3: इन संपत्तियों का क्या किया जाएगा?
    इनकी नीलामी कर राशि पीड़ित बैंकों को दी जाएगी।

    📌 प्रश्न 4: मेहुल चोकसी कहां है?
    चोकसी फिलहाल भगोड़ा घोषित है और विदेश में छिपा है।

  • Mumbai: तीन फर्जी पुलिस गिरफ्तार, 2 करोड़ 24 लाख का सोना बरामद

    Mumbai: तीन फर्जी पुलिस गिरफ्तार, 2 करोड़ 24 लाख का सोना बरामद

    मुंबई के मुलुंड में 71 वर्षीय बुजुर्ग से फर्जी पुलिस बनकर 2 करोड़ 24 लाख का सोना ठगने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार। CCTV और तकनीकी जांच से 24 घंटे में पूरा सोना बरामद।

    मुंबई: मुलुंड पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन ऐसे ठगों को गिरफ्तार किया है जो खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक 71 वर्षीय बुजुर्ग से ₹2,24,000 के सोने के गहने ठगकर फरार हो गए थे। पुलिस की तेजी से की गई कार्रवाई के चलते घटना के 24 घंटे के भीतर पूरा चोरी किया गया सोना बरामद कर लिया है

    🔍 घटना कैसे हुई?

    यह घटना 2 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक पीड़ित बुजुर्ग जटाशंकर डोसा रोड, मुलुंड वेस्ट के पास स्थित अतिथि होटल के पास अपने व्यक्तिगत काम से आए थे। इसी दौरान तीन अज्ञात लोग उनके पास पहुंचे और खुद को पुलिसकर्मी बताया।

    उन्होंने बुजुर्ग को “सुरक्षा जांच” के नाम पर गले की चेन और दो सोने की अंगूठियां हटाने को कहा और मौका देखकर वहां से फरार हो गए।

    🎥 CCTV फुटेज ने खोला राज

    शिकायत दर्ज होने के बाद मुलुंड पुलिस ने इलाके के CCTV फुटेज खंगाले। जांच में एक संदिग्ध की गतिविधि कैमरे में कैद मिली, जिसके आधार पर पुलिस ने उसकी पहचान की और जानकारी के लिए मरिन ड्राइव पुलिस स्टेशन से संपर्क किया, जहां आरोपी पहले भी ऐसी वारदात में पकड़ा जा चुका था।

    🚓 तकनीकी जांच और कमाल की तेजी में तीनों सलाखों के पीछे

    • सबसे पहले पुलिस की टीम मीरा रोड (ईस्ट) पहुंची, जहां पहला आरोपी तौफीक मोफिद सिद्दीकी (41) पकड़ा गया।
    • पूछताछ में उसने बताया कि चोरी किए गए गहने उसके साथी के पास हैं जो वसई (ईस्ट) में है।
    • पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस का इस्तेमाल करते हुए उसी रात दूसरे आरोपी सिमोन गैब्रियल गोंसाल्वेस (63) को गिरफ्तार किया।
    • इसके बाद टीम कुर्ला (ईस्ट) पहुंची और तीसरे आरोपी मोहम्मद शरीफ मुनिर अहमद सिद्दीकी (52) को भी हिरासत में लिया।

    पुलिस ने तीनों से 100% चोरी किया गया सोना बरामद कर लिया है।

    ⚖ कानूनी कार्रवाई

    तीनों आरोपियों पर धारा 318(4), 204 और 3(5) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया है। कोर्ट ने उन्हें 6 दिसंबर 2025 तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।

    🏷 मुख्य आरोपी और उनके पते:

    आरोपी का नामउम्रक्षेत्र
    तौफीक मोफिद सिद्दीकी41मीरा रोड (ईस्ट)
    सिमोन गैब्रियल गोंसाल्वेस63वसई (ईस्ट)
    मोहम्मद शरीफ मुनिर अहमद सिद्दीकी52कुर्ला (ईस्ट)

    ❓ FAQ SECTION

    Q1. क्या आरोपी पहले भी अपराध में शामिल थे?
    हाँ, एक आरोपी पर पहले भी मेरिन ड्राइव पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज है।

    Q2. क्या पूरा चोरी किया गया सोना वापस मिल गया?
    हाँ, पुलिस ने 24 घंटे में पूरा ₹2,24,000 का सोना बरामद कर लिया।

    Q3. क्या पीड़ित सुरक्षित हैं?
    हाँ, पीड़ित पूरी तरह सुरक्षित हैं और पुलिस आगे की जांच कर रही है।

    Q4. आरोपियों को कितने दिन की कस्टडी मिली है?
    कोर्ट ने तीनों को 6 दिसंबर 2025 तक पुलिस कस्टडी में भेजा है।

  • इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    इंडिगो की सर्विस ठप, यात्रियों की परेशानियों पर गरजीं सांसद वर्षा गायकवाड

    मुंबई एयरपोर्ट पर इंडिगो एयरलाइंस की सर्विस ठप होने से हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सांसद वर्षा गायकवाड ने एयरपोर्ट पहुंचकर स्थिति का जायज़ा लिया और सरकार व एयरलाइंस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    मुंबई: पिछले तीन दिनों से देशभर में IndiGo Airlines की फ्लाइट ऑपरेशन में बड़ा बवाल देखने को मिला। इस गड़बड़ी की वजह से हजारों यात्री एयरपोर्ट पर घंटों फंसे रहे, जिसमें बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    न पानी, न सही जानकारी और न स्टाफ की मदद, ऐसा माहौल बना रहा जैसे यात्री “ओलीस” बना दिए गए हों।
    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद प्रा. वर्षा एकनाथ गायकवाड ने इस स्थिति को सरकार की नाकामी बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

    🔹 सरकार और सिस्टम की बड़ी नाकामी: गायकवाड

    सांसद वर्षा गायकवाड ने मुंबई एयरपोर्ट का दौरा कर यात्रियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा:

    “तीन दिन तक देशभर में फ्लाइट सर्विस ठप रही लेकिन सरकार की तरफ से एक भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यात्रियों को छोड़ दिया गया जैसे उनकी कोई सुनने वाला नहीं। यह नागरी विमानन मंत्रालय की सीधी नाकामी है।”

    🔹 टिकटों के दाम 5 हजार से 60 हजार तक

    इसी दौरान कई यात्रियों ने शिकायत की कि कुछ एयरलाइंस ने हालात का फायदा उठाते हुए टिकटों के दामों में भारी बढ़ोतरी की।

    • जो टिकट पहले ₹5,000 में मिल रहा था
    • वही टिकट ₹50,000 से ₹60,000 तक बेचा गया।

    सांसद गायकवाड ने इसे “यात्रियों की खुली लूट” बताया।

    🔹 यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं

    एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्थिति बेहद खराब रही। कई घंटों तक इंतज़ार के बावजूद:

    • कोई जानकारी नहीं
    • पानी नहीं
    • फूड सप्लाई नहीं
    • हेल्प डेस्क नदारद

    यात्रियों का कहना था कि एयरलाइंस स्टाफ गायब था और कोई अपडेट नहीं दिया जा रहा था।

    🔹 इंडिगो और केंद्र सरकार कैसे भरेंगी भरपाई?

    सांसद वर्षा गायकवाड ने सवाल उठाया:

    “जो बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस अव्यवस्था में फंसे रहे, उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा? नुकसान की भरपाई सरकार और इंडिगो कैसे करेगी?”

    🔹 जांच, एक्शन और सुधार की मांग

    उन्होंने कहा कि यह केवल “तकनीकी गलती” नहीं बल्कि ऑपरेशनल फेल्योर है और इसकी:

    • सख्त जांच
    • जिम्मेदारी तय
    • और भविष्य में रोकथाम के लिए सिस्टम सुधार

    जरूरी है।


    FAQ Section


    Q1. इंडिगो फ्लाइट में समस्या क्यों आई?
    ✔ अभी आधिकारिक कारण अस्पष्ट बताया जा रहा है, लेकिन यह बड़ा ऑपरेशनल और मैनेजमेंट फेल्योर माना जा रहा है।


    Q2. क्या यात्रियों को रिफंड या मुआवज़ा मिलेगा?
    ✔ सांसद वर्षा गायकवाड ने इसकी मांग की है, लेकिन अब तक एयरलाइंस की तरफ से कोई ठोस घोषणा नहीं।


    Q3. क्या सरकार जांच करेगी?
    ✔ मांग की गई है, लेकिन सरकारी स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक इन्वेस्टिगेशन आदेश नहीं दिया गया है।


    Q4. क्या टिकटों की कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी हुई?
    ✔ हां, यात्रियों ने बताया कि 5 हजार के टिकट 50–60 हजार में बेचे गए।

  • शुक्ला कंपाउंड विवाद: MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप, 1962 की डेट ऑफ लाइन बदलने की मांग तेज

    शुक्ला कंपाउंड विवाद: MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री से मांगा हस्तक्षेप, 1962 की डेट ऑफ लाइन बदलने की मांग तेज

    मुंबई के दहिसर पूर्व स्थित शुक्ला कंपाउंड में 400 परिवारों का भविष्य अधर में लटका है। विकासक द्वारा 1962 से पहले के दस्तावेज़ मांगने पर दिंडोशी के MLA सुनील प्रभु ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस नियम में बदलाव की मांग की है। मामला अब शीतकालीन अधिवेशन में उठेगा।

    मंत्रालय प्रतिनिधि
    मुंबई: दहिसर पूर्व के रावलपाड़ा स्थित शुक्ला कंपाउंड में रहने वाले करीब 400 परिवारों का भविष्य संकट में पड़ गया है, क्योंकि प्रोजेक्ट डेवलपर ने इन सभी परिवारों से घर पुनर्विकास पात्रता के लिए 1962 से पहले के दस्तावेज़ देने की शर्त रखी है।

    इन दस्तावेज़ों को उपलब्ध न करा पाने के कारण सैकड़ों परिवार बेघर होने की चिंता में हैं। अब यह मामला राजनीतिक रूप से बड़ा रूप ले चुका है।

    🏘 45 साल से रहने वाले परिवारों पर बेघर होने का खतरा

    शुक्ला कंपाउंड में रहने वाले अधिकतर परिवार पिछले चार से पांच दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं। कई परिवार छोटे उद्योग और मजदूरी कर अपनी रोज़ी-रोटी चलाते हैं।

    इन निवासियों का कहना है कि उन्होंने बिजली बिल, राशन कार्ड, आधार कार्ड, पानी के बिल सहित कई सरकारी दस्तावेज़ जमा किए हैं, लेकिन डेवलपर केवल 1962 के पहले की ओनरशिप प्रूफ स्वीकार कर रहा है — जो लगभग असंभव है।

    🏗 डेवलपर पर स्वार्थी प्रोजेक्ट प्लानिंग का आरोप

    मौजूदा ज़मीन का असली मालिक गोविंद पाटिल ने यह प्लॉट साल 1920 में इकबाल मिर्ची से जुड़े नामों और शेलाजी इंफ्रास्ट्रक्चर के अशोक जैन को बेचा था।

    अब विकासक अशोक जैन इस जमीन पर हाई-राइज़ हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

    रहवासियों का आरोप है कि—

    “डेवलपर खुद का फायदा ज्यादा देख रहा है और पुराना डेट ऑफ लाइन दिखाकर लोगों को बाहर करने की कोशिश कर रहा है।”

    🧾 MLA सुनील प्रभु पैरवी में, मुख्यमंत्री को पत्र

    दिंडोशी विधानसभा के शिवसेना नेता एवं MLA सुनील प्रभु ने इस मामले में दखल देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है।

    प्रभु ने पत्र में लिखा कि—

    “मुंबई और महाराष्ट्र में किसी भी हाउसिंग स्कीम में पात्रता के लिए अधिकतर जगह 2012 से पहले का डॉक्यूमेंट पर्याप्त माना जाता है। ऐसे में शुक्ला कंपाउंड में 1962 की शर्त अन्यायपूर्ण है और इसे बदला जाना चाहिए।”

    उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वे इस मुद्दे को आगामी नागपुर में होने वाले शीतकालीन विधान सभा अधिवेशन में ‘ध्यान आकर्षण’ के रूप में उठाएँगे।

    🔍 इस बदलाव से अन्य प्रोजेक्ट भी होंगे प्रभावित

    यदि सरकार दस्तावेज़ की पात्रता 1962 से बदलकर 2012 या वर्तमान नियम के अनुसार करती है, तो उसका सीधा लाभ—

    ✔ मुंबई
    ✔ ठाणे
    ✔ पालघर
    ✔ नवी मुंबई

    में हो रहे हज़ारों पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को मिल सकता है।


    FAQ सेक्शन:

    प्रश्नउत्तर
    क्या नियम अभी बदले गए हैं?नहीं, नियम बदलने की मांग की गई है और मामला विधानसभा में उठेगा।
    क्या सभी रहवासियों को घर मिलेगा?फिलहाल स्थिति अनिश्चित है। नियम बदलने पर ही रास्ता स्पष्ट होगा।
    क्या यह मामला कानूनी रूप से कोर्ट में जा सकता है?हाँ, यदि समाधान न मिला तो रहवासी कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।