Category: Corruption

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  • कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में पांच लैब टेक्नीशियन बिना महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के काम करते पाए गए. शिकायत के बाद MPC ने कार्रवाई के निर्देश दिए. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल (शताब्दी अस्पताल) में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल में कम से कम पांच लैब टेक्नीशियन ऐसे पाए गए हैं, जो महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल (MPC) में रजिस्टर्ड नहीं हैं, इसके बावजूद वे इमरजेंसी लैब में भी सेवाएं दे रहे थे. एक शिकायत के बाद MPC ने संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है.

    कैसे सामने आया पूरा मामला?

    यह मामला तब उजागर हुआ जब स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अधिवक्ता तुषार भोसले ने “आपले सरकार” पोर्टल के जरिए महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि शताब्दी अस्पताल में बिना वैध रजिस्ट्रेशन वाले लैब टेक्नीशियन मरीजों के सैंपल, जांच और इमरजेंसी मामलों को संभाल रहे हैं, जो कानून और मरीजों की सुरक्षा—दोनों के खिलाफ है.

    शिकायत मिलने के बाद MPC ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

    MPC के निर्देश के बाद अस्पताल का आदेश

    पैरामेडिकल काउंसिल के निर्देश के बाद शताब्दी अस्पताल प्रशासन ने एक आंतरिक आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि सभी लैब टेक्नीशियन के लिए MPC रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा.

    हालांकि, इस आदेश का विरोध अस्पताल के कुछ स्थायी और वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जो वर्षों से सेवा में हैं लेकिन जरूरी योग्यता और मान्यता प्राप्त डिग्री के अभाव में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे.

    अस्पताल प्रशासन की दुविधा

    अस्पताल प्रशासन इस समय असमंजस में है. एक ओर कानून का पालन करना जरूरी है, तो दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों का भविष्य भी सवालों में है.

    इस मुद्दे पर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में कुल 18 लैब टेक्नीशियन कार्यरत हैं, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ भी शामिल है. इनमें से पांच टेक्नीशियन फिलहाल महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड नहीं हैं.

    पांच टेक्नीशियन ने किया आवेदन, फिर भी अड़चन

    डॉ. अजय गुप्ता के अनुसार,

    • सभी पांच टेक्नीशियन ने MPC रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया है
    • प्रत्येक ने ₹2,000 की निर्धारित फीस जमा की है
    • आवेदन की रसीद भी उन्हें मिल चुकी है

    लेकिन समस्या यह है कि इनमें से कुछ के पास BSc माइक्रोबायोलॉजी की डिग्री है या वे ऐसे संस्थानों से पासआउट हैं, जो MPC की मान्यता सूची में शामिल नहीं हैं. इसी वजह से उनके रजिस्ट्रेशन पर अंतिम फैसला अटका हुआ है.

    DMLT अनिवार्य, कानून साफ

    स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के मुताबिक,
    ब्लड बैंक टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी) अनिवार्य है.

    अतीत में कई भर्तियां इन नियमों को दरकिनार कर की गईं, जिसका खामियाजा अब कर्मचारियों और अस्पताल—दोनों को भुगतना पड़ रहा है.

    कानूनी चेतावनी: अपराध है बिना रजिस्ट्रेशन काम करना

    इस मामले पर शिकायतकर्ता अधिवक्ता तुषार भोसले ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:

    “कानून के मुताबिक लैब टेक्नीशियन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, भले ही इसके लिए उन्हें अब DMLT करना पड़े. बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है. महाराष्ट्र स्टेट पैरामेडिकल एक्ट पूरे राज्य में लागू है, जिसमें BMC भी शामिल है. इस पर कोई भ्रम नहीं है.”

    उन्होंने बताया कि MPC ने इस बाबत BMC आयुक्त को भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और CMS ने भी समर्थन में सर्कुलर जारी किया है.

    मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

    बिना रजिस्टर्ड टेक्नीशियन द्वारा इमरजेंसी लैब सेवाएं संभालना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ माना जा रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में जरा-सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है.


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. शताब्दी अस्पताल में कितने लैब टेक्नीशियन बिना रजिस्ट्रेशन के पाए गए?
    👉 कुल पांच लैब टेक्नीशियन MPC में रजिस्टर्ड नहीं थे.

    Q2. क्या वे इमरजेंसी सेवाओं में काम कर रहे थे?
    👉 हां, आरोप है कि वे इमरजेंसी लैब में भी कार्यरत थे.

    Q3. लैब टेक्नीशियन के लिए कौन-सी योग्यता जरूरी है?
    👉 सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT अनिवार्य है.

    Q4. क्या बिना रजिस्ट्रेशन काम करना अपराध है?
    👉 हां, यह संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है.

    Q5. अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
    👉 MPC के निर्देश पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है और सभी पांच टेक्नीशियन ने आवेदन किया है.

  • UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में सवर्ण समाज का विरोध तेज़। शिक्षण संस्थानों में भेदभाव, सरकार की नीयत और राजनीति पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    मुंबई: UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो गई हैं। खासतौर पर सवर्ण समाज के छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था में संतुलन के बजाय टकराव और भेदभाव को बढ़ावा देगा। देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया है।

    UGC नियमों पर क्यों भड़का विरोध

    नए यूजीसी नियमों को लेकर आरोप है कि इससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रशासनिक निर्णयों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे शैक्षणिक स्वायत्तता प्रभावित होगी और छात्रों के बीच अविश्वास का माहौल बनेगा।
    सवर्ण संगठनों का दावा है कि नियमों की भाषा और संरचना ऐसी है, जिससे एक विशेष वर्ग को निशाना बनाए जाने की आशंका बढ़ जाती है।

    हिंदू एकता बनाम राजनीतिक ध्रुवीकरण

    आलोचकों का कहना है कि “हिंदू एकता” जैसे नारों का इस्तेमाल सामाजिक एकजुटता के बजाय वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। उनका आरोप है कि वास्तविक मुद्दों—जैसे शिक्षा, रोजगार, महंगाई और स्वास्थ्य—से ध्यान हटाकर समाज को आपस में बांटा जा रहा है।

    शिक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण का आरोप

    लेखक सुरेंद्र राजभर का कहना है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और नीतियों के जरिए शिक्षा पर वैचारिक नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। उनका सवाल है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन स्वतंत्र रूप से निर्णय ले पाएगा या फिर हर फैसले में सरकारी दखल बढ़ेगा।

    कानूनों के दुरुपयोग की आशंका

    विरोध करने वालों ने यह भी चिंता जताई कि यदि शिकायतों की जांच और झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की व्यवस्था कमजोर हुई, तो इसका दुरुपयोग हो सकता है। उनका कहना है कि इससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है और शिक्षा का माहौल डर का बन सकता है।

    सरकार से जवाबदेही की मांग

    यूजीसी नियमों के खिलाफ उठ रही आवाज़ें अब केवल सवर्ण समाज तक सीमित नहीं हैं। कई शिक्षाविद, छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार से पारदर्शिता और संवाद की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी बदलाव से पहले सभी पक्षों से चर्चा जरूरी है।


    FAQ

    Q1. यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?
    नियमों से शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    Q2. विरोध कौन कर रहा है?
    मुख्य रूप से सवर्ण समाज के छात्र, शिक्षाविद और कुछ सामाजिक संगठन।

    Q3. सरकार पर क्या आरोप हैं?
    आरोप है कि शिक्षा नीतियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और सामाजिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।

    Q4. आगे क्या मांग की जा रही है?
    नियमों पर पुनर्विचार, सभी वर्गों से संवाद और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग।

  • मालाड में अवैध निर्माण का खेल, BMC की नाक के नीचे चल रहा धंधा

    मालाड में अवैध निर्माण का खेल, BMC की नाक के नीचे चल रहा धंधा

    मालाड पश्चिम के मास्टरजी कंपाउंड और मार्वे रोड इलाके में BMC की अनुमति बिना अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। ठेकेदारों की मनमानी और अधिकारियों की चुप्पी ने भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुंबई के मालाड (पश्चिम) इलाके में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की नाक के नीचे खुलेआम अवैध निर्माण चल रहा है। मास्टरजी कंपाउंड, मार्वे रोड और आसपास के इलाकों में बिना किसी मंजूरी, नक्शा या अनुमति के G+1 निर्माण और कमर्शियल गाला बनाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना, बीएमसी के कामकाज और संभावित भ्रष्टाचार पर बड़े सवाल खड़े करता है।

    कहां-कहां हो रहा है अवैध निर्माण

    प्राप्त जानकारी के अनुसार,

    • वार्ड नंबर 32, CTS नंबर 2108
    • अनिश्का बंगले के पास, मास्टरजी कंपाउंड रोड नंबर 3
    • मालवणी चर्च के नजदीक, मार्वे रोड, मालाड (पश्चिम)

    इन इलाकों में खुले प्लॉट पर बिना किसी वैध अनुमति के निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है।

    2000 स्क्वायर फीट का G+1 निर्माण

    स्थानीय सूत्रों के मुताबिक,
    ठेकेदार मुरुगन द्वारा करीब 2000 वर्ग फीट में G+1 अवैध निर्माण किया जा रहा है। इस निर्माण के लिए MCGM से कोई स्वीकृत प्लान या अनुमति नहीं ली गई है। इसके बावजूद काम बेरोकटोक जारी है।

    5 कमर्शियल गालों का अवैध निर्माण

    इतना ही नहीं,
    ठेकेदार अलगु तिवारी द्वारा उसी इलाके में करीब 500-500 वर्ग फीट के 5 कमर्शियल गाले बनाए जा रहे हैं। यह निर्माण सीधे तौर पर मुंबई महानगरपालिका अधिनियम और निर्माण नियमों का उल्लंघन है।

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    BMC अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

    सबसे गंभीर सवाल यह है कि

    • अवैध निर्माण इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है
    • मशीनें, मजदूर, मटेरियल खुलेआम मौजूद हैं
    • फिर भी P/North Ward के संबंधित अधिकारी अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जब तक “सेटिंग” रहती है, तब तक कार्रवाई नहीं होती

    नागरिकों की मांग – तुरंत कार्रवाई हो

    इलाके के रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि

    • तत्काल साइट इंस्पेक्शन हो
    • अवैध निर्माण पर स्टॉप वर्क नोटिस जारी किया जाए
    • संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो
    • अवैध निर्माण को तुरंत ध्वस्त किया जाए

    क्यों खतरनाक है यह अवैध निर्माण

    • भविष्य में इमारत गिरने का खतरा
    • फायर सेफ्टी और ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह नजरअंदाज
    • ट्रैफिक, पानी और बिजली पर अतिरिक्त दबाव
    • कानून मानने वाले नागरिकों के साथ अन्याय

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. अवैध निर्माण कहां हो रहा है?
    ➡️ मालाड (पश्चिम) के मास्टरजी कंपाउंड, मार्वे रोड और आसपास के इलाकों में।

    Q2. कौन-कौन से निर्माण अवैध हैं?
    ➡️ 2000 स्क्वायर फीट का G+1 निर्माण और 5 कमर्शियल गाले।

    Q3. क्या BMC ने कोई कार्रवाई की है?
    ➡️ अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    Q4. नागरिक क्या कर सकते हैं?
    ➡️ लिखित शिकायत, RTI, मीडिया और उच्च अधिकारियों से शिकायत।

  • कांदिवली में फ्लैट कब्ज़े को लेकर हंगामा, डेवलपर के दफ्तर के बाहर खरीदारों का प्रदर्शन

    कांदिवली में फ्लैट कब्ज़े को लेकर हंगामा, डेवलपर के दफ्तर के बाहर खरीदारों का प्रदर्शन

    मुंबई के कांदिवली में एस.डी. कॉर्पोरेशन (शापूरजी) द्वारा तीन साल बाद भी फ्लैट का कब्ज़ा न देने से नाराज़ खरीदार सड़कों पर उतरे। बैंक EMI और किराए के बोझ से परेशान नागरिकों ने RERA से हस्तक्षेप की मांग की।

    मुंबई: घर का सपना लेकर लाखों रुपये चुकाने वाले कांदिवली के फ्लैट खरीदार आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। शनिवार को कांदिवली स्थित एस.डी. कॉर्पोरेशन (शापूरजी) के कार्यालय के बाहर दर्जनों नाराज़ नागरिकों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया। आरोप है कि फ्लैट का रजिस्ट्रेशन हुए तीन साल से ज़्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक घर का कब्ज़ा नहीं दिया गया। इस दौरान खरीदारों को बैंक की भारी EMI के साथ किराए का दोहरा बोझ उठाना पड़ रहा है।

    बुकिंग के समय लिए लाखों, कब्ज़ा आज तक नहीं

    कांदिवली पूर्व के समता नगर, ठाकुर विलेज इलाके में एस.डी. कॉर्पोरेशन द्वारा ‘सियाना’ नामक टॉवर प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि बुकिंग के वक्त डेवलपर ने तय समय में फ्लैट सौंपने का वादा किया था और इसके बदले लाखों रुपये एडवांस के रूप में लिए गए।
    लेकिन तीन साल से ज्यादा वक्त गुजरने के बावजूद निर्माण अधूरा है और कब्ज़े की कोई ठोस तारीख नहीं बताई जा रही।

    EMI और किराया, दोनों का बोझ

    फ्लैट न मिलने से खरीदारों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।

    • एक ओर बैंक की EMI हर महीने समय पर चुकानी पड़ रही है
    • दूसरी ओर रहने के लिए अलग से किराए का खर्च उठाना पड़ रहा है

    कई खरीदारों का कहना है कि उनकी आर्थिक हालत पूरी तरह बिगड़ चुकी है, फिर भी डेवलपर की ओर से सिर्फ टालमटोल की जा रही है।

    कांदिवली के निवासियों के आरोप: अभद्र जवाब और अनदेखी

    प्रदर्शन कर रहे नागरिकों का आरोप है कि जब वे निर्माण में देरी को लेकर सवाल पूछते हैं, तो उन्हें अभद्र और गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिए जाते हैं।
    यही वजह है कि मजबूर होकर खरीदारों को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा।

    250 फ्लैट्स का प्रोजेक्ट, लेकिन कई खामियां

    निवासियों के मुताबिक,

    • सियाना प्रोजेक्ट में कुल 250 फ्लैट्स हैं
    • इसमें 22 मंज़िला 5 इमारतें और 50 मंज़िला एक इमारत शामिल है

    आरोप है कि निर्माण दिखाए गए प्लान के मुताबिक नहीं किया गया।
    कई फ्लैट्स में पानी का रिसाव है,
    एंट्री गेट बेहद संकरा है
    और बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है।

    RERA में शिकायत, फिर भी राहत नहीं

    नागरिकों ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) में भी शिकायत दर्ज कराई है।
    आरोप है कि RERA में होने वाली बैठकों में भी कई बार शिकायतकर्ताओं को शामिल होने से रोका जाता है, जिससे खरीदारों में और नाराज़गी बढ़ गई है।

    पीड़ित खरीदार की आपबीती

    स्वाति गावडे, निवासी ने बताया,
    “मैंने 2022 में 1.5 BHK फ्लैट बुक किया था। बुकिंग के समय कहा गया था कि 2023 में कब्ज़ा मिल जाएगा। मैंने 3 लाख रुपये दिए। आज 2025 खत्म हो गया है, लेकिन घर अब तक नहीं मिला। मैं किराए के मकान में रह रही हूं, हर महीने 40 हजार रुपये किराया और 75 हजार रुपये EMI दे रही हूं। ये बहुत मानसिक तनाव देने वाला है।”

    नागरिकों की मांग

    प्रदर्शन कर रहे खरीदारों की साफ मांग है कि—

    • डेवलपर तुरंत कब्ज़े की स्पष्ट तारीख घोषित करे
    • निर्माण की गुणवत्ता की जांच हो
    • RERA और संबंधित सरकारी विभाग इस मामले में सख्ती से कार्रवाई करें

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. मामला किस इलाके का है?
    👉 मुंबई के कांदिवली पूर्व, समता नगर-ठाकुर गांव इलाके का।

    Q2. किस डेवलपर के खिलाफ प्रदर्शन हुआ?
    👉 एस.डी. कॉर्पोरेशन (शापूरजी) के खिलाफ।

    Q3. कितने समय से खरीदार इंतज़ार कर रहे हैं?
    👉 करीब तीन साल से अधिक समय से।

    Q4. खरीदारों की मुख्य परेशानी क्या है?
    👉 फ्लैट कब्ज़ा न मिलना, EMI और किराए का दोहरा बोझ।

    Q5. खरीदारों ने किससे मदद मांगी है?
    👉 RERA प्रशासन और संबंधित सरकारी विभागों से।

  • BMC चुनाव ड्यूटी से गायब 6,871 कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई

    BMC चुनाव ड्यूटी से गायब 6,871 कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई

    BMC चुनाव 2026 से पहले चुनाव ड्यूटी में गैरहाजिर 6,871 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस, 4,521 पर 12 जनवरी से पुलिस कार्रवाई के आदेश।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (Bmc) चुनाव 2025-26 से पहले प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। चुनाव ड्यूटी में गैरहाजिर रहने वाले 6,871 अधिकारी और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें से 4,521 कर्मचारी अब भी ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं, जिनके खिलाफ 12 जनवरी 2026 से पुलिस कार्रवाई की जाएगी। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) डॉ. अश्विनी जोशी ने साफ कहा है कि चुनावी जिम्मेदारी से बचने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

    🏛️ BMC चुनाव प्रक्रिया में लापरवाही पर प्रशासन का कड़ा रुख

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से स्पष्ट किया गया है कि चुनाव प्रक्रिया संविधानिक और कानूनी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद कई अधिकारी और कर्मचारी प्रशिक्षण, मतदान ड्यूटी और अन्य जिम्मेदारियों से लगातार गैरहाजिर पाए गए। बार-बार निर्देश देने और अंतिम मौका देने के बावजूद जब हाजिरी नहीं लगी, तब प्रशासन को कड़ा फैसला लेना पड़ा।

    📄 6,871 कर्मचारियों को नोटिस, 2,350 लौटे ड्यूटी पर

    प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 6,871 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस भेजी गई थी। इनमें से 2,350 कर्मचारी नोटिस के बाद चुनाव कार्य में शामिल हो गए हैं। लेकिन 4,521 कर्मचारी अब भी अनुपस्थित हैं, जिन पर अब सीधी पुलिस कार्रवाई की जाएगी।

    🚨 12 जनवरी से पुलिस कार्रवाई शुरू

    अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. अश्विनी जोशी के निर्देशानुसार सोमवार, 12 जनवरी 2026 से संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस के जरिए कार्रवाई की जाएगी। इसमें उनके कार्यालय जाकर नोटिस तामील कराना, मामला दर्ज करना, जुर्माना और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल होगी।

    🧑‍💼 कई विभागों के कर्मचारी कार्रवाई की जद में

    इस कार्रवाई में केवल महानगरपालिका ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीयकृत बैंक, बेस्ट उपक्रम, दूरसंचार विभाग, तेल कंपनी, बीमा कंपनियां, जीवन बीमा निगम, म्हाडा, डाक विभाग, रेलवे, उर्वरक कंपनी और अन्य सरकारी व अर्धसरकारी संस्थाओं के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हैं।

    🗳️ 15 जनवरी को मतदान, कर्मचारियों की भारी जरूरत

    महानगरपालिका चुनाव के लिए 15 जनवरी 2026 को मतदान और 16 जनवरी को मतगणना होनी है। मुंबई में करीब 1 करोड़ 3 लाख से अधिक मतदाता हैं। इतने बड़े चुनाव के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होती है, लेकिन कर्मचारियों की कमी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।

    ⚠️ डॉ. अश्विनी जोशी की सख्त चेतावनी

    डॉ. अश्विनी जोशी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चुनाव ड्यूटी में लापरवाही गंभीर अपराध है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से आदेशों की अनदेखी, देरी या गैरजिम्मेदारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी को तुरंत अपनी ड्यूटी संभालनी होगी, अन्यथा कानूनी और प्रशासकीय कार्रवाई तय है।


    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

    प्रश्न 1: कितने कर्मचारियों को नोटिस दी गई है?
    उत्तर: कुल 6,871 अधिकारी और कर्मचारियों को नोटिस दी गई है।

    प्रश्न 2: पुलिस कार्रवाई कब से शुरू होगी?
    उत्तर: 12 जनवरी 2026 से।

    प्रश्न 3: किन विभागों के कर्मचारी शामिल हैं?
    उत्तर: महानगरपालिका, बैंक, बेस्ट, बीमा कंपनियां, रेलवे, डाक विभाग सहित कई सरकारी संस्थान।

    प्रश्न 4: मतदान और मतगणना कब है?
    उत्तर: मतदान 15 जनवरी और मतगणना 16 जनवरी 2026 को होगी।

  • 15 साल की देरी पर MahaRERA सख्त, शेठ डेवलपर्स को ब्याज देने का आदेश

    15 साल की देरी पर MahaRERA सख्त, शेठ डेवलपर्स को ब्याज देने का आदेश

    मालाड ईस्ट के शेठ ब्लू आइवी प्रोजेक्ट में 15 साल की देरी पर MahaRERA ने शेठ डेवलपर्स को 15 फ्लैट खरीदारों को ब्याज देने और बिक्री समझौता रजिस्टर करने का आदेश दिया।

    मुंबई: मालाड ईस्ट में शेठ डेवलपर्स की आवासीय परियोजना शेठ ब्लू आइवी में करीब 15 साल की देरी को गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (MahaRERA) ने बड़ा फैसला सुनाया है। MahaRERA ने बिल्डर को आदेश दिया है कि वह 15 फ्लैट खरीदारों को जुलाई 2022 से फ्लैट का कब्जा मिलने तक ब्याज दे और साल 2010 से लंबित बिक्री समझौतों को तुरंत निष्पादित कर रजिस्टर करे।

    क्या है पूरा मामला

    शेठ ब्लू आइवी प्रोजेक्ट, जिसे शुरुआत में वसंत पर्ल नाम से बेचा गया था, उसमें 2010 से 2012 के बीच 15 लोगों ने फ्लैट बुक किए थे। उस समय बिल्डर ने 36 महीने में निर्माण पूरा करने और 42 महीने में कब्जा देने का वादा किया था। लेकिन सालों बीतने के बावजूद खरीदारों को न तो फ्लैट मिले और न ही पक्का जवाब।

    लंबे इंतजार और परेशानी के बाद इन सभी खरीदारों ने 2023 से 2025 के बीच MahaRERA का दरवाजा खटखटाया।

    खरीदारों की शिकायत क्या थी

    खरीदारों की ओर से पेश वकीलों गिरीश केडिया और हर्षद भडभडे ने बताया कि बिल्डर ने सिर्फ अलॉटमेंट लेटर दिया था, लेकिन बिक्री का एग्रीमेंट कभी रजिस्टर नहीं किया।
    इस बीच प्रोजेक्ट का लेआउट बदला गया, फ्लैट नंबर बदले गए और कब्जे की तारीख का कोई जिक्र नहीं किया गया।

    खरीदारों का कहना था कि

    • 2013 से 2023 तक उन्होंने कई बार जानकारी मांगी
    • साइट पर लंबे समय तक काम बंद रहा
    • कई खरीदार किराए के मकानों में रहने को मजबूर हुए
    • आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव झेलना पड़ा

    इसी आधार पर उन्होंने 42.8 लाख रुपये से लेकर 2.28 करोड़ रुपये तक मुआवजे की मांग की थी।

    बिल्डर का पक्ष

    MahaRERA में शेठ डेवलपर्स ने सफाई देते हुए कहा कि प्रोजेक्ट बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले की वजह से करीब छह साल तक अटका रहा। कोर्ट के आदेश के चलते न तो निर्माण हो सका और न ही एग्रीमेंट रजिस्टर हो पाए।
    बिल्डर के मुताबिक अप्रैल 2024 में काम दोबारा शुरू हुआ।

    कंपनी ने यह भी कहा कि उसने सभी खरीदारों को रिफंड का विकल्प दिया था, लेकिन शिकायतकर्ताओं ने प्रोजेक्ट में बने रहने का फैसला किया।

    प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति

    MahaRERA की वेबसाइट के अनुसार

    • पहले प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीख: 30 जून 2022
    • संशोधित तारीख: 30 जून 2023
    • अब नई डेडलाइन: 28 नवंबर 2027

    यानी खरीदारों को अभी भी और इंतजार करना होगा।

    MahaRERA का फैसला

    MahaRERA के अध्यक्ष मनोज सौनिक ने 11 दिसंबर को आदेश दिया कि

    • बिल्डर को जुलाई 2022 से कब्जा मिलने तक खरीदारों को ब्याज देना होगा
    • जितनी रकम खरीदारों ने दी है, उस पर ब्याज लागू होगा
    • सभी लंबित बिक्री समझौतों को तुरंत निष्पादित और रजिस्टर करना होगा

    हालांकि, MahaRERA ने देरी के लिए अलग से मुआवजा और बढ़ी हुई स्टांप ड्यूटी की भरपाई की मांग को खारिज कर दिया।

    क्यों अहम है यह फैसला

    यह आदेश उन हजारों घर खरीदारों के लिए अहम माना जा रहा है, जो सालों से अटके प्रोजेक्ट्स में फंसे हैं। इससे यह साफ संदेश गया है कि लंबी देरी पर बिल्डरों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।


    FAQ

    Q1. MahaRERA ने बिल्डर को क्या आदेश दिया है?
    बिल्डर को जुलाई 2022 से कब्जा मिलने तक ब्याज देने और बिक्री समझौते रजिस्टर करने का आदेश दिया गया है।

    Q2. कितने खरीदारों को राहत मिली है?
    कुल 15 फ्लैट खरीदारों को यह राहत मिली है।

    Q3. क्या खरीदारों को मुआवजा मिलेगा?
    नहीं, MahaRERA ने अलग से मुआवजे और स्टांप ड्यूटी की मांग खारिज कर दी है।

    Q4. प्रोजेक्ट कब तक पूरा होना है?
    नई समयसीमा के अनुसार 28 नवंबर 2027 तक।

  • दहिसर में ऑर्केस्ट्रा बार से उगाही, महिला समेत दो आरोपी गिरफ्तार

    दहिसर में ऑर्केस्ट्रा बार से उगाही, महिला समेत दो आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई के दहिसर ईस्ट में ऑर्केस्ट्रा बार संचालक से फर्जी शिकायतों की धमकी देकर उगाही करने के मामले में पुलिस ने एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी हर महीने पैसे मांगकर कारोबार में रुकावट डालने की धमकी दे रहे थे।

    मुंबई: दहिसर ईस्ट इलाके में एक ऑर्केस्ट्रा बार और रेस्टोरेंट संचालक से लगातार उगाही करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने फर्जी शिकायतों की धमकी देकर पैसे वसूलने के आरोप में एक महिला और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और बीएमसी में झूठी शिकायतें करने का डर दिखाकर बार संचालक से हजारों रुपये ऐंठने का आरोप है।

    🧑‍💼 शिकायतकर्ता और कारोबार की पृष्ठभूमि

    इस मामले में शिकायतकर्ता चंद्रशेखर गुरुनाथ शेट्टी (47) हैं, जो दहिसर ईस्ट के रावलपाड़ा इलाके में रहते हैं।
    वह अपने चचेरे भाई के ऑर्केस्ट्रा बार और रेस्टोरेंट का संचालन संभालते हैं, जो दहिसर चेक पोस्ट के पास प्रभात इंडस्ट्रियल एस्टेट में स्थित है।

    शेट्टी के अनुसार, उनका ऑर्केस्ट्रा बार पूरी तरह से वैध है और उसके पास FL-III लाइसेंस समेत सभी जरूरी सरकारी अनुमति मौजूद हैं। बार में काम करने वाले स्टाफ और महिला कलाकारों से जुड़े सभी नियमों का भी पालन किया जाता है।

    💰 उगाही की शुरुआत और धमकियां

    शिकायत में बताया गया है कि मई 2025 में एक महिला रीमा राजेश मोहिते और उसका साथी अनिल यादव बार में पहुंचे।
    दोनों ने कथित तौर पर बार को “शांतिपूर्वक चलाने” के बदले हर महीने एक तय रकम देने की मांग की।

    आरोप है कि उन्होंने साफ धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए, तो वे पुलिस कंट्रोल रूम, फायर ब्रिगेड और नगर निगम (BMC) में बार के खिलाफ बार-बार शिकायतें दर्ज कराएंगे और उसे अवैध गतिविधियों में फंसाएंगे।

    🔁 फर्जी शिकायतों से परेशान करने का आरोप

    शेट्टी ने बताया कि बाद में उन्हें इलाके के अन्य बार मालिकों से जानकारी मिली कि यही आरोपी पहले भी कई बार और रेस्टोरेंट्स को इसी तरह फर्जी शिकायतों के जरिए परेशान कर चुके हैं।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने अपने नए कारोबार को परेशान न करने की विनती भी की, लेकिन इसके बावजूद आरोपी लगातार दबाव बनाते रहे और पैसे की मांग जारी रखी।

    🚨 फर्जी इमरजेंसी कॉल से मचा हड़कंप

    19 मई 2025 की रात एक फर्जी इमरजेंसी कॉल के बाद हालात और बिगड़ गए।
    शिकायत के अनुसार, देर रात पुलिस, फायर ब्रिगेड और अडानी इलेक्ट्रिसिटी के अधिकारी अचानक होटल पहुंच गए। इससे बार में अफरा-तफरी मच गई और कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ।

    इस घटना के बाद आरोपियों ने अपनी धमकियां और तेज कर दीं और रकम बढ़ाने का दबाव बनाने लगे।

    📲 दबाव में किए गए भुगतान

    शेट्टी का आरोप है कि अपने व्यवसाय को बचाने के लिए उन्होंने मई से दिसंबर 2025 के बीच कई बार पैसे दिए।

    • शुरुआत में ₹2,000 प्रति माह
    • बाद में रकम बढ़ाकर ₹3,000 की गई
    • फिर ₹10,000 प्रति माह की मांग की जाने लगी

    पैसे UPI ट्रांजैक्शन और नकद दोनों माध्यमों से दिए गए। कुल मिलाकर करीब ₹22,000 की उगाही की गई।

    🚓 दहिसर पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

    शिकायत और डिजिटल पेमेंट के सबूतों के आधार पर दहिसर पुलिस ने रीमा राजेश मोहिते और अनिल यादव के खिलाफ

    • उगाही
    • आपराधिक धमकी
    • अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है।

    दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन्होंने इलाके के अन्य बार और रेस्टोरेंट संचालकों को भी इसी तरह निशाना बनाया था।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. यह मामला कहां का है?
    👉 मुंबई के दहिसर ईस्ट इलाके का।

    Q2. आरोपी कौन हैं?
    👉 रीमा राजेश मोहिते और अनिल यादव।

    Q3. उगाही किस तरह की जा रही थी?
    👉 फर्जी पुलिस, फायर ब्रिगेड और BMC शिकायतों की धमकी देकर।

    Q4. कितनी रकम वसूली गई?
    👉 कुल ₹22,000।

    Q5. पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
    👉 दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू की गई है।

  • कनाडा वर्क वीज़ा के नाम पर 1.63 करोड़ की ठगी, मालाड से पति-पत्नी गिरफ्तार

    कनाडा वर्क वीज़ा के नाम पर 1.63 करोड़ की ठगी, मालाड से पति-पत्नी गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड में कनाडा वर्क वीज़ा दिलाने के नाम पर 37 लोगों से 1.63 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले पति-पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी डेढ़ साल से फरार थे।

    मुंबई: कनाडा में नौकरी और वर्क वीज़ा दिलाने का सपना दिखाकर 37 लोगों से करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपये की ठगी करने वाले पति-पत्नी को मालाड पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी खुद को वीज़ा कंसल्टेंट बताकर लोगों को फंसाते थे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए रकम ऐंठते थे। पुलिस को शक है कि इस गिरोह से जुड़े और भी मामले सामने आ सकते हैं।

    डेढ़ साल से फरार थे आरोपी

    गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रीना गौरव शाह और गौरव शाह के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने से पहले ही दोनों फरार हो गए थे और करीब डेढ़ साल से पुलिस को चकमा दे रहे थे। हाल ही में मालाड पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर दोनों को दबोच लिया।

    कैसे हुआ ठगी का खुलासा

    इस मामले की शिकायतकर्ता सारिका हैं, जो मालवणी इलाके में अपनी मां के साथ रहती हैं। करीब दो साल पहले वह बोरीवली स्थित एक निजी कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर काम कर रही थीं और कनाडा में नौकरी की तलाश में थीं।

    इसी दौरान उन्होंने मालाड के काचपाड़ा इलाके में स्थित ‘द वीज़ा मेंशन’ नामक कंपनी का विज्ञापन देखा। संपर्क करने पर उन्हें ऑफिस बुलाया गया, जहां उनकी मुलाकात कंपनी की मालकिन बताई जा रही रीना शाह और गौरव शाह से कराई गई।

    7 लाख में वर्क वीज़ा का लालच

    आरोपियों ने सारिका को भरोसा दिलाया कि वे 7 लाख रुपये में कनाडा वर्क वीज़ा दिलवा देंगे। उन्हें कंपनी का ई-मेल आईडी भी दिया गया और कुछ दिनों बाद कथित तौर पर कनाडा की एक कंपनी से जॉब ऑफर भेजा गया।

    सारिका को पहला ऑफर संदिग्ध लगा, लेकिन बाद में दूसरा ऑफर भेजा गया, जिस पर भरोसा कर उन्होंने वीज़ा प्रक्रिया के लिए किस्तों में 7.16 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

    वर्क वीज़ा की जगह मिला विज़िटर वीज़ा

    11 जून 2024 को आरोपियों ने बताया कि सारिका का कनाडा वर्क वीज़ा मंजूर हो गया है। जब वह मुंबई के महालक्ष्मी स्थित कनाडा कांसुलेट पहुंचीं, तो वहां पता चला कि दिया गया वीज़ा वर्क नहीं बल्कि विज़िटर वीज़ा है।

    इसके बाद वह जब मालाड स्थित ‘द वीज़ा मेंशन’ के ऑफिस पहुंचीं, तो वह बंद मिला। फोन कॉल और मैसेज का भी कोई जवाब नहीं मिला।

    37 लोगों से 1.56 करोड़ से ज्यादा की ठगी

    जांच में सामने आया कि सारिका अकेली पीड़िता नहीं थीं। ठीक इसी तरह 36 अन्य लोगों को भी कनाडा वर्क वीज़ा का झांसा देकर ठगा गया था।
    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कुल ₹1,56,70,400 की रकम वसूल की और उसे हड़प लिया।

    मालाड पुलिस की कार्रवाई

    सभी सबूत जुटाने के बाद मालाड पुलिस ने रीना और गौरव शाह के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। लंबे समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस का कहना है कि:

    • आरोपियों के बैंक खातों और लेन-देन की जांच की जा रही है
    • अन्य पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है
    • इस रैकेट से जुड़े और लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है

    FAQ

    Q1. यह ठगी किस इलाके में हुई?
    👉 मुंबई के मालाड इलाके में।

    Q2. कुल कितने लोग ठगी का शिकार हुए?
    👉 37 लोग।

    Q3. ठगी की कुल रकम कितनी है?
    👉 करीब 1.63 करोड़ रुपये।

    Q4. आरोपी कौन हैं?
    👉 रीना गौरव शाह और गौरव शाह।

    Q5. पुलिस आगे क्या जांच कर रही है?
    👉 अन्य पीड़ितों, बैंक ट्रांजैक्शन और इस रैकेट से जुड़े लोगों की जांच।

  • मालाड में 25 लाख की नकली सोने की ठगी, इंटर-स्टेट गैंग गिरफ्तार

    मालाड में 25 लाख की नकली सोने की ठगी, इंटर-स्टेट गैंग गिरफ्तार

    मालाड (वेस्ट) में खुदाई के दौरान सोना मिलने का झांसा देकर 25 लाख रुपये की ठगी करने वाले इंटर-स्टेट गैंग को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया। गुजरात और पालघर से आरोपियों की धरपकड़, 15.45 लाख रुपये बरामद।

    मुंबई: जमीन की खुदाई के दौरान सोने के आभूषण मिलने का झांसा देकर मालाड इलाके में 25 लाख रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर इंटर-स्टेट गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। मुंबई पुलिस ने गुजरात और पालघर से इस गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार है। मामले में अब तक 15.45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। यह ठगी नवंबर के अंत से दिसंबर की शुरुआत के बीच की गई थी।

    Inter-state-gang-arrested-for-fake-gold-fraud-worth-Rs-25-lakh-in-Malad-news

    खुदाई में सोना मिलने का झांसा देकर ठगी

    पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता दिनेश मेहता (51), जो मालाड (वेस्ट) के सोमवारी बाजार स्थित अंकुर बिल्डिंग में रहते हैं, उनसे मुख्य आरोपी बाबूलाल भालाराम वाघेला (55) ने संपर्क साधा।
    आरोपी ने खुद को राजस्थान से जुड़ा बताते हुए राजस्थानी भाषा में बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे भरोसा जीत लिया। उसने दावा किया कि नासिक में एक मंदिर के पीछे खुदाई के दौरान करीब 900 ग्राम सोने के आभूषण मिले हैं

    नमूना दिखाकर बनाया विश्वास

    आरोपी ने या तो आभूषण बेचने में मदद करने या सीधे बेचने का प्रस्ताव दिया। भरोसा दिलाने के लिए उसने कुछ पीले धातु के मोती नमूने के तौर पर दिए, जो जांच में असली सोना निकले। इसी भरोसे में आकर दिनेश मेहता ने 25 लाख रुपये नकद दे दिए और आभूषण अपने पास ले लिए।

    जौहरी की जांच में निकला नकली सोना

    कुछ समय बाद जब इन आभूषणों को जौहरी को दिखाया गया, तो वे पूरी तरह नकली पाए गए। ठगी का अहसास होते ही शिकायतकर्ता ने मालाड पुलिस से संपर्क किया।
    इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को मालाड पुलिस स्टेशन में क्राइम रजिस्टर नंबर 883/25 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    कानूनी धाराएं और जांच

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 318(4) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है।
    जांच के दौरान क्राइम डिटेक्शन टीम ने मालाड और कांदिवली (ईस्ट) सहित कई इलाकों के 100 से ज्यादा सरकारी और निजी CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली।

    CCTV, कॉल डिटेल और चाल-ढाल से पहचान

    हालांकि CCTV फुटेज साफ नहीं थी, लेकिन पुलिस ने

    • शरीर की बनावट
    • चलने की चाल (gait analysis)
    • कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल डंप डेटा

    के आधार पर आरोपियों की पहचान की। लगातार तीन दिनों की मेहनत के बाद पुलिस को सफलता मिली।

    गुजरात और विरार से गिरफ्तारियां

    जांच में कुल पांच आरोपियों की पहचान हुई।

    • मुख्य आरोपी बाबूलाल वाघेला को कालोल, गांधीनगर (गुजरात) से गिरफ्तार किया गया।
    • उसके घर की तलाशी में 15.45 लाख रुपये नकद और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।
    • उसकी पत्नी कोकुबाई वाघेला (50) की भूमिका सामने आने पर उन्हें BNS की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिया गया है।

    इसके बाद विरार (ईस्ट) से तीन अन्य आरोपी—
    मंगलाराम वागरी, केसराराम वागरी और भवरलाल वागरी—को गिरफ्तार किया गया।

    राजस्थान से जुड़े, पेशे से फोटो फ्रेम बनाने वाले आरोपी

    पुलिस के मुताबिक सभी आरोपी मूल रूप से राजस्थान के जालोर जिले के रहने वाले हैं और अलग-अलग राज्यों में घूम-घूमकर ऐसी ठगी करते हैं।
    गिरफ्तार आरोपी पेशे से फोटो फ्रेम बनाने का काम करते हैं। मुख्य आरोपी बाबूलाल वाघेला के खिलाफ गुजरात के कालोल तालुका और साबरमती पुलिस स्टेशन में पहले से भी ठगी के मामले दर्ज हैं।

    एक आरोपी फरार, तलाश जारी

    इस केस में गोविंद (उम्र करीब 30 वर्ष) नाम का एक आरोपी अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
    बरामद रकम के अलावा बाकी पैसे और अन्य संपत्ति की रिकवरी की प्रक्रिया जारी है।

    पुलिस अधिकारियों की भूमिका

    इस पूरे मामले की जांच एपीआई अभिजीत काले और दीपक रैवाडे कर रहे हैं, जो वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दुष्यंत चव्हाण के मार्गदर्शन में काम कर रहे हैं।


    FAQ सेक्शन

    Q1. ठगी की रकम कितनी थी?
    25 लाख रुपये नकद।

    Q2. अब तक कितनी रकम बरामद हुई है?
    15.45 लाख रुपये।

    Q3. मुख्य आरोपी कहां से गिरफ्तार हुआ?
    कालोल, गांधीनगर (गुजरात) से।

    Q4. कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
    चार आरोपी गिरफ्तार, एक फरार।

    Q5. कौन-सी धाराओं में केस दर्ज है?
    BNS की धारा 316(2), 318(4) और 3(5)।

  • मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    धारावी की तर्ज पर मालवणी के 641 एकड़ इलाके के पुनर्विकास की तैयारी शुरू। क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल, सर्वे और विस्थापन को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

    महाराष्ट्र/नागपुर: धारावी पुनर्विकास योजना के बाद अब मुंबई के मालाड स्थित मालवनी इलाके के 641 एकड़ भूखंड पर महायुति सरकार की नजर टिक गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे इलाके के क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए सर्वे और योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसे झोपड़पट्टी-मुक्त करने की पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दे रहा है।

    धारावी मॉडल पर मालवणी पुनर्विकास की तैयारी

    देश की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी को अडानी ग्रुप को सौंपे जाने के बाद अब सरकार ने मालवनी क्षेत्र के पुनर्विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में 641 एकड़ क्षेत्र के सर्वेक्षण और क्लस्टर डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लस्टर मॉडल के जरिए पूरे मालवनी इलाके का कम समय में पुनर्विकास संभव है और इसे एक बड़े झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    641 एकड़ में फैला मालवनी, 14 हजार झोपड़ियां

    मालवनी इलाके का कुल क्षेत्रफल 641 एकड़ है, जिसमें

    • राज्य सरकार
    • म्हाडा
    • बृहन्मुंबई महानगरपालिका
    • निजी भूखंड

    शामिल हैं।
    इसमें से 565.98 एकड़ क्षेत्र में झोपड़पट्टियां हैं, जबकि 75.02 एकड़ खुली जमीन है। इस पूरे इलाके में करीब 14 हजार झोपड़ियां बसी हुई हैं। सरकार का दावा है कि पुनर्विकास के बाद यह इलाका पूरी तरह झोपड़पट्टी-मुक्त हो जाएगा।

    13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका

    विपक्ष का आरोप है कि इस योजना के नाम पर मालवनी में रहने वाले करीब 13 लाख लोगों को विस्थापित किया जाएगा। धारावी पुनर्विकास को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मुंबई में विकास के नाम पर लगातार बड़े भूखंड बिल्डरों की झोली में डाले जा रहे हैं, जबकि स्थानीय निवासियों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

    कौन करेगा सर्वे और रिपोर्ट?

    बैठक में तय किया गया कि

    • म्हाडा और
    • झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA)

    अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वे करेंगे।
    सभी झोपड़पट्टियों का सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसियां संयुक्त रिपोर्ट तैयार करेंगी।
    जहां कानूनी अड़चनें होंगी, वहां अलग से कार्रवाई की जाएगी, और जहां विकास संभव होगा, उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

    इस अहम बैठक में

    • आवास राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर
    • विधायक असलम शेख
    • अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता
    • म्हाडा अधिकारी मिलिंद बोरीकर
    • SRA CEO डॉ. महेंद्र कल्याणकर

    मौजूद रहे।
    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई मनपा आयुक्त भूषण गगरानी भी बैठक में शामिल हुए।

    दागी बिल्डर को ठेका मिलने की चर्चा

    सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्विकास परियोजना को लेकर पहले ही एक दागी बिल्डर को ठेका दिए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आरोप है कि यह वही बिल्डर है, जिसने चेंबूर के माहुल इलाके में प्रोजेक्ट-अफेक्टेड लोगों के लिए इमारतें बनाई थीं, जहां करीब 9 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि वह आपराधिक मामले में जेल भी जा चुका है।

    अब उसी बिल्डर को एक भाजपा नेता के माध्यम से मालवनी की बड़ी पुनर्विकास योजना में शामिल करने की कोशिश हो रही है।


    FAQ

    Q1. मालवणी पुनर्विकास योजना क्या है?
    मालवणी इलाके को क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकसित करने की सरकारी योजना।

    Q2. कुल कितनी जमीन शामिल है?
    करीब 641 एकड़ भूमि।

    Q3. कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
    करीब 13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।

    Q4. विवाद क्यों हो रहा है?
    विपक्ष का आरोप है कि योजना का फायदा बिल्डरों को दिया जा रहा है।