Category: Corruption

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  • मुंबई में बड़ा घोटाला: लोखंडवाला बिल्डर और SRA इंजीनियर पर BMC की FIR, STP जमीन हड़पने का आरोप

    मुंबई में बड़ा घोटाला: लोखंडवाला बिल्डर और SRA इंजीनियर पर BMC की FIR, STP जमीन हड़पने का आरोप

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने STP परियोजना के लिए आरक्षित जमीन पर अवैध ट्रांजिट कैंप बनाने और आर्थिक फर्जीवाड़े के मामले में मुंबई के प्रसिद्ध लोखंडवाला बिल्डर समूह और SRA के कार्यकारी अभियंता डी.बी. पाटील के खिलाफ FIR दर्ज की है। सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत के बाद बड़ी कार्रवाई।

    मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में एक बड़े जमीन घोटाले का खुलासा हुआ है। BMC ने STP यानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण और आर्थिक फर्जीवाड़े के आरोप में लोखंडवाला इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, लोखंडवाला डीबी रियल्टी और SRA के कार्यकारी अभियंता डी.बी. पाटील के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत और RTI से सामने आई जानकारी के बाद की गई है। यह पहली बार हुआ है कि झोपडपट्ट पुनर्वसन प्राधिकरण के किसी अधिकारी के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है।

    🏙️ मुंबई में BMC की बड़ी कार्रवाई

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने शहर के रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मचा देने वाली कार्रवाई की है। प्रसिद्ध लोखंडवाला बिल्डर समूह और स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के एक वरिष्ठ अधिकारी पर सरकारी जमीन के दुरुपयोग और आर्थिक धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगा है।

    BMC के अनुसार, जिस जमीन पर अवैध रूप से ट्रांजिट कैंप बनाया जा रहा था, वह जमीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के लिए आरक्षित थी, जो मुंबई जैसे महानगर के लिए बेहद जरूरी बुनियादी परियोजना है।

    🏗️ STP जमीन पर कैसे हुआ अवैध निर्माण?

    जांच में सामने आया कि STP परियोजना के लिए सुरक्षित की गई जमीन पर बिना महापालिका की अनुमति के ट्रांजिट कैंप और अस्थायी संरचनाएं खड़ी कर दी गईं। यह काम नियमों के खिलाफ था और इसके लिए जरूरी मंजूरी भी नहीं ली गई थी।

    आरोप है कि बिल्डर को SRA के कार्यकारी अभियंता द्वारा नियमों को ताक पर रखकर अनुमति दी गई, जिससे महापालिका को आर्थिक नुकसान हुआ और सरकारी परियोजना बाधित हुई।

    ⚠️ सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश का आरोप

    BMC अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ नियम उल्लंघन नहीं बल्कि सरकारी जमीन हड़पने की सुनियोजित कोशिश थी। STP प्लांट के लिए आरक्षित जमीन पर निर्माण होने से शहर की सीवरेज व्यवस्था और पर्यावरण दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता था।

    इस पूरे मामले को आर्थिक फर्जीवाड़ा और अधिकारों के दुरुपयोग की श्रेणी में रखा गया है।

    🧑‍⚖️ SRA इंजीनियर की भूमिका सवालों के घेरे में

    इस मामले में SRA के कार्यकारी अभियंता डी.बी. पाटील की भूमिका सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। आरोप है कि उन्होंने बिना अधिकार और नियमों के खिलाफ जाकर बिल्डर को अनुमति दी।

    बृहन्मुंबई महापालिका ने इसे आंतरिक मिलीभगत (Collusion) का मामला मानते हुए पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। साथ ही, संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

    🧾 सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत से खुला मामला

    इस पूरे घोटाले का खुलासा सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दौंडकर की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने लगातार इस प्रोजेक्ट को लेकर शिकायतें कीं और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज हासिल कर बृहन्मुंबई महापालिका के सामने तथ्य रखे।

    लगातार फॉलो-अप और सबूतों के आधार पर आखिरकार BMC को कार्रवाई करनी पड़ी।

    🚓 क्या होगी आगे की कार्रवाई?

    ✔️ पुलिस जांच और सबूत जुटाने की प्रक्रिया शुरू
    ✔️ अवैध निर्माण पर स्टॉप-वर्क नोटिस
    ✔️ संबंधित बिल्डर कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई
    ✔️ SRA अधिकारी के खिलाफ विभागीय और आपराधिक केस
    ✔️ जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी और चार्जशीट

    आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

    🔍 STP क्यों है मुंबई के लिए जरूरी?

    सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शहर के गंदे पानी को साफ करने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में STP परियोजनाओं में देरी या जमीन विवाद सीधे तौर पर स्वास्थ्य, पर्यावरण और समुद्री प्रदूषण से जुड़ा मुद्दा बन जाता है।


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. FIR किसके खिलाफ दर्ज हुई है?
    लोखंडवाला इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि., लोखंडवाला डीबी रियल्टी और SRA के कार्यकारी अभियंता डी.बी. पाटील के खिलाफ।

    Q2. मामला किस जमीन से जुड़ा है?
    सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के लिए आरक्षित महापालिका की जमीन से।

    Q3. शिकायत किसने की थी?
    सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दौंडकर ने।

    Q4. आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?
    गिरफ्तारी, चार्जशीट, अवैध निर्माण हटाना और विभागीय कार्रवाई।

  • Borivali: बिल्डर-बाप बेटे पर करोड़ों की ठगी, कई FIR दर्ज

    Borivali: बिल्डर-बाप बेटे पर करोड़ों की ठगी, कई FIR दर्ज

    मुंबई के Borivali में रियल एस्टेट डेवलपर अशोक जेठवा और बेटे मिहिर पर करीब 3 करोड़ की ठगी का आरोप। फर्जी दस्तावेज, फ्लैट का झांसा, कई केस दर्ज।

    मुंबई: बोरीवली इलाके में एक बड़े रियल एस्टेट फ्रॉड का खुलासा हुआ है। रिटायर्ड शिपिंग कर्मचारी और अन्य निवेशकों से करोड़ों रुपये लेकर फ्लैट न देने के आरोप में डेवलपर अशोक जेठवा (55) और उसका बेटा मिहिर जेठवा (35) पुलिस के शिकंजे में आ गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने फर्जी दस्तावेज, झूठे वादे और रेरा रजिस्ट्रेशन का हवाला देकर कई लोगों को ठगा।

    क्या है पूरा मामला

    कस्तूरबा मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के अनुसार, शिकायतकर्ता प्रज्योत डाभोलकर (60), जो कांदिवली ईस्ट के निवासी और रिटायर्ड शिपिंग कर्मचारी हैं, वर्ष 2015 में एक फ्लैट खरीदने की तलाश में थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात ब्रोकर नवीनचंद्र बरखड़ा से हुई, जिसने उन्हें मिहिर जेठवा से मिलवाया।

    मिहिर ने खुद को और अपने पिता अशोक जेठवा को बोरीवली इलाके का नामी रियल एस्टेट डेवलपर बताते हुए कई प्रोजेक्ट्स की जानकारी दी।

    फ्लैट नहीं पसंद आए, निवेश का लालच दिया

    डाभोलकर को शुरू में दिखाए गए फ्लैट्स पसंद नहीं आए। इसके बाद मिहिर ने उन्हें “आने वाले प्रोजेक्ट्स” में निवेश करने का सुझाव दिया और भरोसा दिलाया कि बदले में उन्हें बोरीवली वेस्ट में पांच फ्लैट मिलेंगे।

    अक्टूबर 2015 से दिसंबर 2019 के बीच डाभोलकर ने अलग-अलग किश्तों में ₹2.12 करोड़ निवेश कर दिए। वहीं उनकी सास से भी ₹85 लाख लिए गए।

    पैसे गए, न फ्लैट मिला न रिफंड

    पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने यह रकम प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय निजी इस्तेमाल में लगा दी। न तो फ्लैट दिए गए और न ही पैसे लौटाए गए। जब शिकायतकर्ता ने दबाव बनाया तो टालमटोल शुरू हो गई।

    Borivali दूसरा निवेशक भी ठगा गया

    इसी तरह खार वेस्ट के रहने वाले एक 50 वर्षीय निवेशक ने भी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि जेठवा पिता-पुत्र ने उन्हें बोरीवली ईस्ट के नील आकाश को-ऑप हाउसिंग सोसायटी प्रोजेक्ट में तीन फ्लैट देने का झांसा दिया।

    उन्हें बताया गया कि:

    • इमारत को 10 मंज़िलों की मंज़ूरी है
    • 3 अतिरिक्त मंज़िलों का प्रस्ताव BMC में लंबित है
    • प्रोजेक्ट RERA रजिस्टर्ड है
    • 31 दिसंबर 2018 तक कब्ज़ा मिलेगा

    इन बातों पर भरोसा कर उन्होंने ₹1.74 करोड़ ट्रांसफर कर दिए।

    साइट पर सिर्फ 6 मंज़िल, काम बंद

    जब निवेशक ने दिसंबर 2018 में साइट देखी, तो केवल 6 मंज़िलें बनी थीं और निर्माण पूरी तरह बंद था। बाद में आरोपियों ने कांदिवली में फ्लैट देने का वादा किया, जो कभी नहीं मिला। पैसे वापस मांगने पर कथित तौर पर जवाब मिला –
    “जो करना है कर लो।”

    केरल से गिरफ्तारी, फर्जी पहचान का खुलासा

    पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर अलग-अलग राज्यों में छिपते फिर रहे थे।
    जोन-12 की स्पेशल टीम ने उन्हें केरल के एर्नाकुलम स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया और मुंबई लाया गया।

    एक नहीं, कई मामले दर्ज

    पुलिस के अनुसार, जेठवा पिता-पुत्र के खिलाफ 6 से अधिक केस दर्ज हैं।

    प्रमुख केस डिटेल्स

    • Cr No. 177/25 – ₹1.17 करोड़
    • Cr No. 488/25 – ₹1.51 करोड़
    • Cr No. 351/25 – ₹1.74 करोड़
    • Cr No. 852/23 (MPID) – ₹13.52 करोड़
    • Cr No. 288/23 – ₹75 लाख
    • Cr No. 108/23 – ₹1.20 करोड़
    • बोरीवली: Cr No. 75/21, 464/24
    • MHB कॉलोनी: Cr No. 356/23

    पुलिस की अपील

    पुलिस ने आशंका जताई है कि और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। ऐसे किसी भी व्यक्ति से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।


    FAQ

    Q1. आरोपी कौन हैं?
    अशोक जेठवा और उनका बेटा मिहिर जेठवा, दोनों रियल एस्टेट डेवलपर बताए जा रहे हैं।

    Q2. कुल कितनी रकम की ठगी का आरोप है?
    अलग-अलग मामलों में ₹20 करोड़ से ज्यादा की ठगी का आरोप है।

    Q3. गिरफ्तारी कहां से हुई?
    केरल के एर्नाकुलम से, जहां वे फर्जी पहचान के साथ रह रहे थे।

    Q4. क्या और पीड़ित सामने आ सकते हैं?
    पुलिस के मुताबिक, संभावना है कि और निवेशक भी ठगे गए हों।

  • P North Ward में CRZ-1 पर खुलेआम अवैध निर्माण, BMC की चुप्पी पर गंभीर सवाल

    P North Ward में CRZ-1 पर खुलेआम अवैध निर्माण, BMC की चुप्पी पर गंभीर सवाल

    मालाड़ के P North Ward में CRZ-1 क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध निर्माण पर BMC प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। यह न सिर्फ कोस्टल नियमों का उल्लंघन है बल्कि IPC और नए BNS कानून के तहत दंडनीय अपराध भी है।

    मुंबई: मालाड़ स्थित P North Ward में हालात बेहद चिंताजनक हैं। CRZ-1 (Coastal Regulation Zone-1) जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में खुलेआम अवैध और अनधिकृत निर्माण चल रहे हैं, लेकिन BMC प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। आरोप है कि आधुनिक “कुंभकर्ण” बने अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं, जबकि यह निर्माण न केवल कोस्टल रेगुलेटरी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि IPC और नए BNS Act के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

    CRZ-1 क्या है और यह इलाका इतना संवेदनशील क्यों?

    CRZ-1 वह क्षेत्र होता है जहां

    • मैंग्रोव
    • समुद्री तट
    • इको-सेंसिटिव ज़ोन
      शामिल होते हैं।

    यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कलेक्टर, MSD और राज्य सरकार की सख़्त अनुमति के बिना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद मालाड़ इलाके में बिना अनुमति इमारतें, शेड, स्लैब और स्ट्रक्चर खड़े किए जा रहे हैं।

    अवैध निर्माण जारी, कार्रवाई नदारद

    स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि

    • निर्माण दिन-दहाड़े चल रहा है
    • भारी मशीनरी का इस्तेमाल हो रहा है
    • शिकायतों के बावजूद कोई तोड़क कार्रवाई नहीं

    सवाल यह है कि अगर यह सब गैरकानूनी है, तो BMC की नजर क्यों नहीं पड़ती?

    “नेल्सन की आंख” और आधुनिक कुंभकर्ण

    स्थानीय लोग P North Ward कार्यालय पर तंज कसते हुए कहते हैं कि

    “यहां बैठे अधिकारी आधुनिक कुंभकर्ण हैं, जिन्हें सब दिखता है लेकिन दिखाना नहीं चाहते।”

    आरोप है कि

    • फाइलें दबा दी जाती हैं
    • निरीक्षण रिपोर्ट तैयार नहीं होती
    • शिकायतों को जानबूझकर लंबित रखा जाता है

    कानून साफ, फिर भी डर किस बात का?

    CRZ-1 में अवैध निर्माण

    • IPC के तहत अपराध
    • और नए संशोधित BNS Act के तहत कठोर दंड को आमंत्रित करता है

    इसके अलावा यह

    • राज्य सरकार के आदेशों की अवहेलना
    • कलेक्टर MSD के निर्देशों की अनदेखी
    • और पर्यावरण कानूनों का सीधा उल्लंघन है

    इसके बावजूद कार्रवाई न होना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

    भ्रष्टाचार का शक और संरक्षण का खेल

    स्थानीय सूत्रों का दावा है कि

    • कुछ निर्माणकर्ताओं को अंदरूनी संरक्षण मिला हुआ है
    • “मैनेजमेंट” के नाम पर कार्रवाई रोकी जाती है
    • छोटे अवैध कामों पर तुरंत हथौड़ा, बड़े पर खामोशी

    यह दोहरा मापदंड BMC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    पर्यावरण को अपूरणीय नुकसान

    CRZ-1 क्षेत्र में अवैध निर्माण से

    • समुद्री जैव विविधता नष्ट होती है
    • बाढ़ और समुद्र जलस्तर का खतरा बढ़ता है
    • आने वाली पीढ़ियों का भविष्य खतरे में पड़ता है

    यह सिर्फ कानून का नहीं, मानवता और पर्यावरण का अपराध है।

    नागरिकों की मांग

    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि

    • तत्काल अवैध निर्माण रोके जाएं
    • जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो
    • BNS Act के तहत केस दर्ज किए जाएं
    • CRZ-1 क्षेत्र की स्वतंत्र जांच कराई जाए

    FAQ

    Q1. CRZ-1 क्षेत्र में निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है क्या?
    हाँ, बिना विशेष अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह अवैध है।

    Q2. इस मामले में कौन-कौन से कानून लागू होते हैं?
    IPC, पर्यावरण कानून और नया संशोधित BNS Act लागू होता है।

    Q3. BMC की भूमिका पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
    क्योंकि शिकायतों और स्पष्ट उल्लंघन के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

    Q4. नागरिक क्या कर सकते हैं?
    शिकायत, RTI, पर्यावरण प्राधिकरण और न्यायालय का सहारा लिया जा सकता है।

  • कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में पांच लैब टेक्नीशियन बिना महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के काम करते पाए गए. शिकायत के बाद MPC ने कार्रवाई के निर्देश दिए. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल (शताब्दी अस्पताल) में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल में कम से कम पांच लैब टेक्नीशियन ऐसे पाए गए हैं, जो महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल (MPC) में रजिस्टर्ड नहीं हैं, इसके बावजूद वे इमरजेंसी लैब में भी सेवाएं दे रहे थे. एक शिकायत के बाद MPC ने संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है.

    कैसे सामने आया पूरा मामला?

    यह मामला तब उजागर हुआ जब स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अधिवक्ता तुषार भोसले ने “आपले सरकार” पोर्टल के जरिए महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि शताब्दी अस्पताल में बिना वैध रजिस्ट्रेशन वाले लैब टेक्नीशियन मरीजों के सैंपल, जांच और इमरजेंसी मामलों को संभाल रहे हैं, जो कानून और मरीजों की सुरक्षा—दोनों के खिलाफ है.

    शिकायत मिलने के बाद MPC ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

    MPC के निर्देश के बाद अस्पताल का आदेश

    पैरामेडिकल काउंसिल के निर्देश के बाद शताब्दी अस्पताल प्रशासन ने एक आंतरिक आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि सभी लैब टेक्नीशियन के लिए MPC रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा.

    हालांकि, इस आदेश का विरोध अस्पताल के कुछ स्थायी और वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जो वर्षों से सेवा में हैं लेकिन जरूरी योग्यता और मान्यता प्राप्त डिग्री के अभाव में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे.

    अस्पताल प्रशासन की दुविधा

    अस्पताल प्रशासन इस समय असमंजस में है. एक ओर कानून का पालन करना जरूरी है, तो दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों का भविष्य भी सवालों में है.

    इस मुद्दे पर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में कुल 18 लैब टेक्नीशियन कार्यरत हैं, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ भी शामिल है. इनमें से पांच टेक्नीशियन फिलहाल महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड नहीं हैं.

    पांच टेक्नीशियन ने किया आवेदन, फिर भी अड़चन

    डॉ. अजय गुप्ता के अनुसार,

    • सभी पांच टेक्नीशियन ने MPC रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया है
    • प्रत्येक ने ₹2,000 की निर्धारित फीस जमा की है
    • आवेदन की रसीद भी उन्हें मिल चुकी है

    लेकिन समस्या यह है कि इनमें से कुछ के पास BSc माइक्रोबायोलॉजी की डिग्री है या वे ऐसे संस्थानों से पासआउट हैं, जो MPC की मान्यता सूची में शामिल नहीं हैं. इसी वजह से उनके रजिस्ट्रेशन पर अंतिम फैसला अटका हुआ है.

    DMLT अनिवार्य, कानून साफ

    स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के मुताबिक,
    ब्लड बैंक टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी) अनिवार्य है.

    अतीत में कई भर्तियां इन नियमों को दरकिनार कर की गईं, जिसका खामियाजा अब कर्मचारियों और अस्पताल—दोनों को भुगतना पड़ रहा है.

    कानूनी चेतावनी: अपराध है बिना रजिस्ट्रेशन काम करना

    इस मामले पर शिकायतकर्ता अधिवक्ता तुषार भोसले ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:

    “कानून के मुताबिक लैब टेक्नीशियन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, भले ही इसके लिए उन्हें अब DMLT करना पड़े. बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है. महाराष्ट्र स्टेट पैरामेडिकल एक्ट पूरे राज्य में लागू है, जिसमें BMC भी शामिल है. इस पर कोई भ्रम नहीं है.”

    उन्होंने बताया कि MPC ने इस बाबत BMC आयुक्त को भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और CMS ने भी समर्थन में सर्कुलर जारी किया है.

    मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

    बिना रजिस्टर्ड टेक्नीशियन द्वारा इमरजेंसी लैब सेवाएं संभालना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ माना जा रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में जरा-सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है.


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. शताब्दी अस्पताल में कितने लैब टेक्नीशियन बिना रजिस्ट्रेशन के पाए गए?
    👉 कुल पांच लैब टेक्नीशियन MPC में रजिस्टर्ड नहीं थे.

    Q2. क्या वे इमरजेंसी सेवाओं में काम कर रहे थे?
    👉 हां, आरोप है कि वे इमरजेंसी लैब में भी कार्यरत थे.

    Q3. लैब टेक्नीशियन के लिए कौन-सी योग्यता जरूरी है?
    👉 सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT अनिवार्य है.

    Q4. क्या बिना रजिस्ट्रेशन काम करना अपराध है?
    👉 हां, यह संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है.

    Q5. अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
    👉 MPC के निर्देश पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है और सभी पांच टेक्नीशियन ने आवेदन किया है.

  • UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC नियमों पर देशभर में सवर्ण विरोध, सरकार की मंशा पर उठे सवाल

    UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में सवर्ण समाज का विरोध तेज़। शिक्षण संस्थानों में भेदभाव, सरकार की नीयत और राजनीति पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    मुंबई: UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो गई हैं। खासतौर पर सवर्ण समाज के छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह नियम शिक्षा व्यवस्था में संतुलन के बजाय टकराव और भेदभाव को बढ़ावा देगा। देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया है।

    UGC नियमों पर क्यों भड़का विरोध

    नए यूजीसी नियमों को लेकर आरोप है कि इससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रशासनिक निर्णयों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे शैक्षणिक स्वायत्तता प्रभावित होगी और छात्रों के बीच अविश्वास का माहौल बनेगा।
    सवर्ण संगठनों का दावा है कि नियमों की भाषा और संरचना ऐसी है, जिससे एक विशेष वर्ग को निशाना बनाए जाने की आशंका बढ़ जाती है।

    हिंदू एकता बनाम राजनीतिक ध्रुवीकरण

    आलोचकों का कहना है कि “हिंदू एकता” जैसे नारों का इस्तेमाल सामाजिक एकजुटता के बजाय वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है। उनका आरोप है कि वास्तविक मुद्दों—जैसे शिक्षा, रोजगार, महंगाई और स्वास्थ्य—से ध्यान हटाकर समाज को आपस में बांटा जा रहा है।

    शिक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण का आरोप

    लेखक सुरेंद्र राजभर का कहना है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और नीतियों के जरिए शिक्षा पर वैचारिक नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। उनका सवाल है कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन स्वतंत्र रूप से निर्णय ले पाएगा या फिर हर फैसले में सरकारी दखल बढ़ेगा।

    कानूनों के दुरुपयोग की आशंका

    विरोध करने वालों ने यह भी चिंता जताई कि यदि शिकायतों की जांच और झूठी शिकायत करने वालों पर कार्रवाई की व्यवस्था कमजोर हुई, तो इसका दुरुपयोग हो सकता है। उनका कहना है कि इससे छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है और शिक्षा का माहौल डर का बन सकता है।

    सरकार से जवाबदेही की मांग

    यूजीसी नियमों के खिलाफ उठ रही आवाज़ें अब केवल सवर्ण समाज तक सीमित नहीं हैं। कई शिक्षाविद, छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार से पारदर्शिता और संवाद की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी बदलाव से पहले सभी पक्षों से चर्चा जरूरी है।


    FAQ

    Q1. यूजीसी के नए नियमों का विरोध क्यों हो रहा है?
    नियमों से शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    Q2. विरोध कौन कर रहा है?
    मुख्य रूप से सवर्ण समाज के छात्र, शिक्षाविद और कुछ सामाजिक संगठन।

    Q3. सरकार पर क्या आरोप हैं?
    आरोप है कि शिक्षा नीतियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और सामाजिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।

    Q4. आगे क्या मांग की जा रही है?
    नियमों पर पुनर्विचार, सभी वर्गों से संवाद और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग।

  • मालाड में अवैध निर्माण का खेल, BMC की नाक के नीचे चल रहा धंधा

    मालाड में अवैध निर्माण का खेल, BMC की नाक के नीचे चल रहा धंधा

    मालाड पश्चिम के मास्टरजी कंपाउंड और मार्वे रोड इलाके में BMC की अनुमति बिना अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। ठेकेदारों की मनमानी और अधिकारियों की चुप्पी ने भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुंबई के मालाड (पश्चिम) इलाके में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की नाक के नीचे खुलेआम अवैध निर्माण चल रहा है। मास्टरजी कंपाउंड, मार्वे रोड और आसपास के इलाकों में बिना किसी मंजूरी, नक्शा या अनुमति के G+1 निर्माण और कमर्शियल गाला बनाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना, बीएमसी के कामकाज और संभावित भ्रष्टाचार पर बड़े सवाल खड़े करता है।

    कहां-कहां हो रहा है अवैध निर्माण

    प्राप्त जानकारी के अनुसार,

    • वार्ड नंबर 32, CTS नंबर 2108
    • अनिश्का बंगले के पास, मास्टरजी कंपाउंड रोड नंबर 3
    • मालवणी चर्च के नजदीक, मार्वे रोड, मालाड (पश्चिम)

    इन इलाकों में खुले प्लॉट पर बिना किसी वैध अनुमति के निर्माण कार्य तेज़ी से जारी है।

    2000 स्क्वायर फीट का G+1 निर्माण

    स्थानीय सूत्रों के मुताबिक,
    ठेकेदार मुरुगन द्वारा करीब 2000 वर्ग फीट में G+1 अवैध निर्माण किया जा रहा है। इस निर्माण के लिए MCGM से कोई स्वीकृत प्लान या अनुमति नहीं ली गई है। इसके बावजूद काम बेरोकटोक जारी है।

    5 कमर्शियल गालों का अवैध निर्माण

    इतना ही नहीं,
    ठेकेदार अलगु तिवारी द्वारा उसी इलाके में करीब 500-500 वर्ग फीट के 5 कमर्शियल गाले बनाए जा रहे हैं। यह निर्माण सीधे तौर पर मुंबई महानगरपालिका अधिनियम और निर्माण नियमों का उल्लंघन है।

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    BMC अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

    सबसे गंभीर सवाल यह है कि

    • अवैध निर्माण इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है
    • मशीनें, मजदूर, मटेरियल खुलेआम मौजूद हैं
    • फिर भी P/North Ward के संबंधित अधिकारी अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जब तक “सेटिंग” रहती है, तब तक कार्रवाई नहीं होती।

    नागरिकों की मांग – तुरंत कार्रवाई हो

    इलाके के रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि

    • तत्काल साइट इंस्पेक्शन हो
    • अवैध निर्माण पर स्टॉप वर्क नोटिस जारी किया जाए
    • संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो
    • अवैध निर्माण को तुरंत ध्वस्त किया जाए

    क्यों खतरनाक है यह अवैध निर्माण

    • भविष्य में इमारत गिरने का खतरा
    • फायर सेफ्टी और ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह नजरअंदाज
    • ट्रैफिक, पानी और बिजली पर अतिरिक्त दबाव
    • कानून मानने वाले नागरिकों के साथ अन्याय

    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. अवैध निर्माण कहां हो रहा है?
    ➡️ मालाड (पश्चिम) के मास्टरजी कंपाउंड, मार्वे रोड और आसपास के इलाकों में।

    Q2. कौन-कौन से निर्माण अवैध हैं?
    ➡️ 2000 स्क्वायर फीट का G+1 निर्माण और 5 कमर्शियल गाले।

    Q3. क्या BMC ने कोई कार्रवाई की है?
    ➡️ अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    Q4. नागरिक क्या कर सकते हैं?
    ➡️ लिखित शिकायत, RTI, मीडिया और उच्च अधिकारियों से शिकायत।

  • कांदिवली में फ्लैट कब्ज़े को लेकर हंगामा, डेवलपर के दफ्तर के बाहर खरीदारों का प्रदर्शन

    कांदिवली में फ्लैट कब्ज़े को लेकर हंगामा, डेवलपर के दफ्तर के बाहर खरीदारों का प्रदर्शन

    मुंबई के कांदिवली में एस.डी. कॉर्पोरेशन (शापूरजी) द्वारा तीन साल बाद भी फ्लैट का कब्ज़ा न देने से नाराज़ खरीदार सड़कों पर उतरे। बैंक EMI और किराए के बोझ से परेशान नागरिकों ने RERA से हस्तक्षेप की मांग की।

    मुंबई: घर का सपना लेकर लाखों रुपये चुकाने वाले कांदिवली के फ्लैट खरीदार आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। शनिवार को कांदिवली स्थित एस.डी. कॉर्पोरेशन (शापूरजी) के कार्यालय के बाहर दर्जनों नाराज़ नागरिकों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया। आरोप है कि फ्लैट का रजिस्ट्रेशन हुए तीन साल से ज़्यादा वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक घर का कब्ज़ा नहीं दिया गया। इस दौरान खरीदारों को बैंक की भारी EMI के साथ किराए का दोहरा बोझ उठाना पड़ रहा है।

    बुकिंग के समय लिए लाखों, कब्ज़ा आज तक नहीं

    कांदिवली पूर्व के समता नगर, ठाकुर विलेज इलाके में एस.डी. कॉर्पोरेशन द्वारा ‘सियाना’ नामक टॉवर प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि बुकिंग के वक्त डेवलपर ने तय समय में फ्लैट सौंपने का वादा किया था और इसके बदले लाखों रुपये एडवांस के रूप में लिए गए।
    लेकिन तीन साल से ज्यादा वक्त गुजरने के बावजूद निर्माण अधूरा है और कब्ज़े की कोई ठोस तारीख नहीं बताई जा रही।

    EMI और किराया, दोनों का बोझ

    फ्लैट न मिलने से खरीदारों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।

    • एक ओर बैंक की EMI हर महीने समय पर चुकानी पड़ रही है
    • दूसरी ओर रहने के लिए अलग से किराए का खर्च उठाना पड़ रहा है

    कई खरीदारों का कहना है कि उनकी आर्थिक हालत पूरी तरह बिगड़ चुकी है, फिर भी डेवलपर की ओर से सिर्फ टालमटोल की जा रही है।

    कांदिवली के निवासियों के आरोप: अभद्र जवाब और अनदेखी

    प्रदर्शन कर रहे नागरिकों का आरोप है कि जब वे निर्माण में देरी को लेकर सवाल पूछते हैं, तो उन्हें अभद्र और गैर-जिम्मेदाराना जवाब दिए जाते हैं।
    यही वजह है कि मजबूर होकर खरीदारों को सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा।

    250 फ्लैट्स का प्रोजेक्ट, लेकिन कई खामियां

    निवासियों के मुताबिक,

    • सियाना प्रोजेक्ट में कुल 250 फ्लैट्स हैं
    • इसमें 22 मंज़िला 5 इमारतें और 50 मंज़िला एक इमारत शामिल है

    आरोप है कि निर्माण दिखाए गए प्लान के मुताबिक नहीं किया गया।
    कई फ्लैट्स में पानी का रिसाव है,
    एंट्री गेट बेहद संकरा है
    और बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है।

    RERA में शिकायत, फिर भी राहत नहीं

    नागरिकों ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) में भी शिकायत दर्ज कराई है।
    आरोप है कि RERA में होने वाली बैठकों में भी कई बार शिकायतकर्ताओं को शामिल होने से रोका जाता है, जिससे खरीदारों में और नाराज़गी बढ़ गई है।

    पीड़ित खरीदार की आपबीती

    स्वाति गावडे, निवासी ने बताया,
    “मैंने 2022 में 1.5 BHK फ्लैट बुक किया था। बुकिंग के समय कहा गया था कि 2023 में कब्ज़ा मिल जाएगा। मैंने 3 लाख रुपये दिए। आज 2025 खत्म हो गया है, लेकिन घर अब तक नहीं मिला। मैं किराए के मकान में रह रही हूं, हर महीने 40 हजार रुपये किराया और 75 हजार रुपये EMI दे रही हूं। ये बहुत मानसिक तनाव देने वाला है।”

    नागरिकों की मांग

    प्रदर्शन कर रहे खरीदारों की साफ मांग है कि—

    • डेवलपर तुरंत कब्ज़े की स्पष्ट तारीख घोषित करे
    • निर्माण की गुणवत्ता की जांच हो
    • RERA और संबंधित सरकारी विभाग इस मामले में सख्ती से कार्रवाई करें

    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. मामला किस इलाके का है?
    👉 मुंबई के कांदिवली पूर्व, समता नगर-ठाकुर गांव इलाके का।

    Q2. किस डेवलपर के खिलाफ प्रदर्शन हुआ?
    👉 एस.डी. कॉर्पोरेशन (शापूरजी) के खिलाफ।

    Q3. कितने समय से खरीदार इंतज़ार कर रहे हैं?
    👉 करीब तीन साल से अधिक समय से।

    Q4. खरीदारों की मुख्य परेशानी क्या है?
    👉 फ्लैट कब्ज़ा न मिलना, EMI और किराए का दोहरा बोझ।

    Q5. खरीदारों ने किससे मदद मांगी है?
    👉 RERA प्रशासन और संबंधित सरकारी विभागों से।

  • BMC चुनाव ड्यूटी से गायब 6,871 कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई

    BMC चुनाव ड्यूटी से गायब 6,871 कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई

    BMC चुनाव 2026 से पहले चुनाव ड्यूटी में गैरहाजिर 6,871 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस, 4,521 पर 12 जनवरी से पुलिस कार्रवाई के आदेश।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (Bmc) चुनाव 2025-26 से पहले प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। चुनाव ड्यूटी में गैरहाजिर रहने वाले 6,871 अधिकारी और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें से 4,521 कर्मचारी अब भी ड्यूटी पर नहीं लौटे हैं, जिनके खिलाफ 12 जनवरी 2026 से पुलिस कार्रवाई की जाएगी। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) डॉ. अश्विनी जोशी ने साफ कहा है कि चुनावी जिम्मेदारी से बचने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

    🏛️ BMC चुनाव प्रक्रिया में लापरवाही पर प्रशासन का कड़ा रुख

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओर से स्पष्ट किया गया है कि चुनाव प्रक्रिया संविधानिक और कानूनी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद कई अधिकारी और कर्मचारी प्रशिक्षण, मतदान ड्यूटी और अन्य जिम्मेदारियों से लगातार गैरहाजिर पाए गए। बार-बार निर्देश देने और अंतिम मौका देने के बावजूद जब हाजिरी नहीं लगी, तब प्रशासन को कड़ा फैसला लेना पड़ा।

    📄 6,871 कर्मचारियों को नोटिस, 2,350 लौटे ड्यूटी पर

    प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 6,871 अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस भेजी गई थी। इनमें से 2,350 कर्मचारी नोटिस के बाद चुनाव कार्य में शामिल हो गए हैं। लेकिन 4,521 कर्मचारी अब भी अनुपस्थित हैं, जिन पर अब सीधी पुलिस कार्रवाई की जाएगी।

    🚨 12 जनवरी से पुलिस कार्रवाई शुरू

    अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. अश्विनी जोशी के निर्देशानुसार सोमवार, 12 जनवरी 2026 से संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस के जरिए कार्रवाई की जाएगी। इसमें उनके कार्यालय जाकर नोटिस तामील कराना, मामला दर्ज करना, जुर्माना और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल होगी।

    🧑‍💼 कई विभागों के कर्मचारी कार्रवाई की जद में

    इस कार्रवाई में केवल महानगरपालिका ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीयकृत बैंक, बेस्ट उपक्रम, दूरसंचार विभाग, तेल कंपनी, बीमा कंपनियां, जीवन बीमा निगम, म्हाडा, डाक विभाग, रेलवे, उर्वरक कंपनी और अन्य सरकारी व अर्धसरकारी संस्थाओं के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हैं।

    🗳️ 15 जनवरी को मतदान, कर्मचारियों की भारी जरूरत

    महानगरपालिका चुनाव के लिए 15 जनवरी 2026 को मतदान और 16 जनवरी को मतगणना होनी है। मुंबई में करीब 1 करोड़ 3 लाख से अधिक मतदाता हैं। इतने बड़े चुनाव के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होती है, लेकिन कर्मचारियों की कमी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।

    ⚠️ डॉ. अश्विनी जोशी की सख्त चेतावनी

    डॉ. अश्विनी जोशी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चुनाव ड्यूटी में लापरवाही गंभीर अपराध है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से आदेशों की अनदेखी, देरी या गैरजिम्मेदारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी को तुरंत अपनी ड्यूटी संभालनी होगी, अन्यथा कानूनी और प्रशासकीय कार्रवाई तय है।


    ❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

    प्रश्न 1: कितने कर्मचारियों को नोटिस दी गई है?
    उत्तर: कुल 6,871 अधिकारी और कर्मचारियों को नोटिस दी गई है।

    प्रश्न 2: पुलिस कार्रवाई कब से शुरू होगी?
    उत्तर: 12 जनवरी 2026 से।

    प्रश्न 3: किन विभागों के कर्मचारी शामिल हैं?
    उत्तर: महानगरपालिका, बैंक, बेस्ट, बीमा कंपनियां, रेलवे, डाक विभाग सहित कई सरकारी संस्थान।

    प्रश्न 4: मतदान और मतगणना कब है?
    उत्तर: मतदान 15 जनवरी और मतगणना 16 जनवरी 2026 को होगी।

  • 15 साल की देरी पर MahaRERA सख्त, शेठ डेवलपर्स को ब्याज देने का आदेश

    15 साल की देरी पर MahaRERA सख्त, शेठ डेवलपर्स को ब्याज देने का आदेश

    मालाड ईस्ट के शेठ ब्लू आइवी प्रोजेक्ट में 15 साल की देरी पर MahaRERA ने शेठ डेवलपर्स को 15 फ्लैट खरीदारों को ब्याज देने और बिक्री समझौता रजिस्टर करने का आदेश दिया।

    मुंबई: मालाड ईस्ट में शेठ डेवलपर्स की आवासीय परियोजना शेठ ब्लू आइवी में करीब 15 साल की देरी को गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (MahaRERA) ने बड़ा फैसला सुनाया है। MahaRERA ने बिल्डर को आदेश दिया है कि वह 15 फ्लैट खरीदारों को जुलाई 2022 से फ्लैट का कब्जा मिलने तक ब्याज दे और साल 2010 से लंबित बिक्री समझौतों को तुरंत निष्पादित कर रजिस्टर करे।

    क्या है पूरा मामला

    शेठ ब्लू आइवी प्रोजेक्ट, जिसे शुरुआत में वसंत पर्ल नाम से बेचा गया था, उसमें 2010 से 2012 के बीच 15 लोगों ने फ्लैट बुक किए थे। उस समय बिल्डर ने 36 महीने में निर्माण पूरा करने और 42 महीने में कब्जा देने का वादा किया था। लेकिन सालों बीतने के बावजूद खरीदारों को न तो फ्लैट मिले और न ही पक्का जवाब।

    लंबे इंतजार और परेशानी के बाद इन सभी खरीदारों ने 2023 से 2025 के बीच MahaRERA का दरवाजा खटखटाया।

    खरीदारों की शिकायत क्या थी

    खरीदारों की ओर से पेश वकीलों गिरीश केडिया और हर्षद भडभडे ने बताया कि बिल्डर ने सिर्फ अलॉटमेंट लेटर दिया था, लेकिन बिक्री का एग्रीमेंट कभी रजिस्टर नहीं किया।
    इस बीच प्रोजेक्ट का लेआउट बदला गया, फ्लैट नंबर बदले गए और कब्जे की तारीख का कोई जिक्र नहीं किया गया।

    खरीदारों का कहना था कि

    • 2013 से 2023 तक उन्होंने कई बार जानकारी मांगी
    • साइट पर लंबे समय तक काम बंद रहा
    • कई खरीदार किराए के मकानों में रहने को मजबूर हुए
    • आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव झेलना पड़ा

    इसी आधार पर उन्होंने 42.8 लाख रुपये से लेकर 2.28 करोड़ रुपये तक मुआवजे की मांग की थी।

    बिल्डर का पक्ष

    MahaRERA में शेठ डेवलपर्स ने सफाई देते हुए कहा कि प्रोजेक्ट बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले की वजह से करीब छह साल तक अटका रहा। कोर्ट के आदेश के चलते न तो निर्माण हो सका और न ही एग्रीमेंट रजिस्टर हो पाए।
    बिल्डर के मुताबिक अप्रैल 2024 में काम दोबारा शुरू हुआ।

    कंपनी ने यह भी कहा कि उसने सभी खरीदारों को रिफंड का विकल्प दिया था, लेकिन शिकायतकर्ताओं ने प्रोजेक्ट में बने रहने का फैसला किया।

    प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति

    MahaRERA की वेबसाइट के अनुसार

    • पहले प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीख: 30 जून 2022
    • संशोधित तारीख: 30 जून 2023
    • अब नई डेडलाइन: 28 नवंबर 2027

    यानी खरीदारों को अभी भी और इंतजार करना होगा।

    MahaRERA का फैसला

    MahaRERA के अध्यक्ष मनोज सौनिक ने 11 दिसंबर को आदेश दिया कि

    • बिल्डर को जुलाई 2022 से कब्जा मिलने तक खरीदारों को ब्याज देना होगा
    • जितनी रकम खरीदारों ने दी है, उस पर ब्याज लागू होगा
    • सभी लंबित बिक्री समझौतों को तुरंत निष्पादित और रजिस्टर करना होगा

    हालांकि, MahaRERA ने देरी के लिए अलग से मुआवजा और बढ़ी हुई स्टांप ड्यूटी की भरपाई की मांग को खारिज कर दिया।

    क्यों अहम है यह फैसला

    यह आदेश उन हजारों घर खरीदारों के लिए अहम माना जा रहा है, जो सालों से अटके प्रोजेक्ट्स में फंसे हैं। इससे यह साफ संदेश गया है कि लंबी देरी पर बिल्डरों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।


    FAQ

    Q1. MahaRERA ने बिल्डर को क्या आदेश दिया है?
    बिल्डर को जुलाई 2022 से कब्जा मिलने तक ब्याज देने और बिक्री समझौते रजिस्टर करने का आदेश दिया गया है।

    Q2. कितने खरीदारों को राहत मिली है?
    कुल 15 फ्लैट खरीदारों को यह राहत मिली है।

    Q3. क्या खरीदारों को मुआवजा मिलेगा?
    नहीं, MahaRERA ने अलग से मुआवजे और स्टांप ड्यूटी की मांग खारिज कर दी है।

    Q4. प्रोजेक्ट कब तक पूरा होना है?
    नई समयसीमा के अनुसार 28 नवंबर 2027 तक।

  • दहिसर में ऑर्केस्ट्रा बार से उगाही, महिला समेत दो आरोपी गिरफ्तार

    दहिसर में ऑर्केस्ट्रा बार से उगाही, महिला समेत दो आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई के दहिसर ईस्ट में ऑर्केस्ट्रा बार संचालक से फर्जी शिकायतों की धमकी देकर उगाही करने के मामले में पुलिस ने एक महिला समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी हर महीने पैसे मांगकर कारोबार में रुकावट डालने की धमकी दे रहे थे।

    मुंबई: दहिसर ईस्ट इलाके में एक ऑर्केस्ट्रा बार और रेस्टोरेंट संचालक से लगातार उगाही करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने फर्जी शिकायतों की धमकी देकर पैसे वसूलने के आरोप में एक महिला और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और बीएमसी में झूठी शिकायतें करने का डर दिखाकर बार संचालक से हजारों रुपये ऐंठने का आरोप है।

    🧑‍💼 शिकायतकर्ता और कारोबार की पृष्ठभूमि

    इस मामले में शिकायतकर्ता चंद्रशेखर गुरुनाथ शेट्टी (47) हैं, जो दहिसर ईस्ट के रावलपाड़ा इलाके में रहते हैं।
    वह अपने चचेरे भाई के ऑर्केस्ट्रा बार और रेस्टोरेंट का संचालन संभालते हैं, जो दहिसर चेक पोस्ट के पास प्रभात इंडस्ट्रियल एस्टेट में स्थित है।

    शेट्टी के अनुसार, उनका ऑर्केस्ट्रा बार पूरी तरह से वैध है और उसके पास FL-III लाइसेंस समेत सभी जरूरी सरकारी अनुमति मौजूद हैं। बार में काम करने वाले स्टाफ और महिला कलाकारों से जुड़े सभी नियमों का भी पालन किया जाता है।

    💰 उगाही की शुरुआत और धमकियां

    शिकायत में बताया गया है कि मई 2025 में एक महिला रीमा राजेश मोहिते और उसका साथी अनिल यादव बार में पहुंचे।
    दोनों ने कथित तौर पर बार को “शांतिपूर्वक चलाने” के बदले हर महीने एक तय रकम देने की मांग की।

    आरोप है कि उन्होंने साफ धमकी दी कि अगर पैसे नहीं दिए गए, तो वे पुलिस कंट्रोल रूम, फायर ब्रिगेड और नगर निगम (BMC) में बार के खिलाफ बार-बार शिकायतें दर्ज कराएंगे और उसे अवैध गतिविधियों में फंसाएंगे।

    🔁 फर्जी शिकायतों से परेशान करने का आरोप

    शेट्टी ने बताया कि बाद में उन्हें इलाके के अन्य बार मालिकों से जानकारी मिली कि यही आरोपी पहले भी कई बार और रेस्टोरेंट्स को इसी तरह फर्जी शिकायतों के जरिए परेशान कर चुके हैं।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने अपने नए कारोबार को परेशान न करने की विनती भी की, लेकिन इसके बावजूद आरोपी लगातार दबाव बनाते रहे और पैसे की मांग जारी रखी।

    🚨 फर्जी इमरजेंसी कॉल से मचा हड़कंप

    19 मई 2025 की रात एक फर्जी इमरजेंसी कॉल के बाद हालात और बिगड़ गए।
    शिकायत के अनुसार, देर रात पुलिस, फायर ब्रिगेड और अडानी इलेक्ट्रिसिटी के अधिकारी अचानक होटल पहुंच गए। इससे बार में अफरा-तफरी मच गई और कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ।

    इस घटना के बाद आरोपियों ने अपनी धमकियां और तेज कर दीं और रकम बढ़ाने का दबाव बनाने लगे।

    📲 दबाव में किए गए भुगतान

    शेट्टी का आरोप है कि अपने व्यवसाय को बचाने के लिए उन्होंने मई से दिसंबर 2025 के बीच कई बार पैसे दिए।

    • शुरुआत में ₹2,000 प्रति माह
    • बाद में रकम बढ़ाकर ₹3,000 की गई
    • फिर ₹10,000 प्रति माह की मांग की जाने लगी

    पैसे UPI ट्रांजैक्शन और नकद दोनों माध्यमों से दिए गए। कुल मिलाकर करीब ₹22,000 की उगाही की गई।

    🚓 दहिसर पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

    शिकायत और डिजिटल पेमेंट के सबूतों के आधार पर दहिसर पुलिस ने रीमा राजेश मोहिते और अनिल यादव के खिलाफ

    • उगाही
    • आपराधिक धमकी
    • अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है।

    दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन्होंने इलाके के अन्य बार और रेस्टोरेंट संचालकों को भी इसी तरह निशाना बनाया था।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. यह मामला कहां का है?
    👉 मुंबई के दहिसर ईस्ट इलाके का।

    Q2. आरोपी कौन हैं?
    👉 रीमा राजेश मोहिते और अनिल यादव।

    Q3. उगाही किस तरह की जा रही थी?
    👉 फर्जी पुलिस, फायर ब्रिगेड और BMC शिकायतों की धमकी देकर।

    Q4. कितनी रकम वसूली गई?
    👉 कुल ₹22,000।

    Q5. पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
    👉 दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू की गई है।