Category: Corruption

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  • कनाडा वर्क वीज़ा के नाम पर 1.63 करोड़ की ठगी, मालाड से पति-पत्नी गिरफ्तार

    कनाडा वर्क वीज़ा के नाम पर 1.63 करोड़ की ठगी, मालाड से पति-पत्नी गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड में कनाडा वर्क वीज़ा दिलाने के नाम पर 37 लोगों से 1.63 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले पति-पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी डेढ़ साल से फरार थे।

    मुंबई: कनाडा में नौकरी और वर्क वीज़ा दिलाने का सपना दिखाकर 37 लोगों से करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपये की ठगी करने वाले पति-पत्नी को मालाड पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी खुद को वीज़ा कंसल्टेंट बताकर लोगों को फंसाते थे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए रकम ऐंठते थे। पुलिस को शक है कि इस गिरोह से जुड़े और भी मामले सामने आ सकते हैं।

    डेढ़ साल से फरार थे आरोपी

    गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रीना गौरव शाह और गौरव शाह के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने से पहले ही दोनों फरार हो गए थे और करीब डेढ़ साल से पुलिस को चकमा दे रहे थे। हाल ही में मालाड पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर दोनों को दबोच लिया।

    कैसे हुआ ठगी का खुलासा

    इस मामले की शिकायतकर्ता सारिका हैं, जो मालवणी इलाके में अपनी मां के साथ रहती हैं। करीब दो साल पहले वह बोरीवली स्थित एक निजी कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर काम कर रही थीं और कनाडा में नौकरी की तलाश में थीं।

    इसी दौरान उन्होंने मालाड के काचपाड़ा इलाके में स्थित ‘द वीज़ा मेंशन’ नामक कंपनी का विज्ञापन देखा। संपर्क करने पर उन्हें ऑफिस बुलाया गया, जहां उनकी मुलाकात कंपनी की मालकिन बताई जा रही रीना शाह और गौरव शाह से कराई गई।

    7 लाख में वर्क वीज़ा का लालच

    आरोपियों ने सारिका को भरोसा दिलाया कि वे 7 लाख रुपये में कनाडा वर्क वीज़ा दिलवा देंगे। उन्हें कंपनी का ई-मेल आईडी भी दिया गया और कुछ दिनों बाद कथित तौर पर कनाडा की एक कंपनी से जॉब ऑफर भेजा गया।

    सारिका को पहला ऑफर संदिग्ध लगा, लेकिन बाद में दूसरा ऑफर भेजा गया, जिस पर भरोसा कर उन्होंने वीज़ा प्रक्रिया के लिए किस्तों में 7.16 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

    वर्क वीज़ा की जगह मिला विज़िटर वीज़ा

    11 जून 2024 को आरोपियों ने बताया कि सारिका का कनाडा वर्क वीज़ा मंजूर हो गया है। जब वह मुंबई के महालक्ष्मी स्थित कनाडा कांसुलेट पहुंचीं, तो वहां पता चला कि दिया गया वीज़ा वर्क नहीं बल्कि विज़िटर वीज़ा है।

    इसके बाद वह जब मालाड स्थित ‘द वीज़ा मेंशन’ के ऑफिस पहुंचीं, तो वह बंद मिला। फोन कॉल और मैसेज का भी कोई जवाब नहीं मिला।

    37 लोगों से 1.56 करोड़ से ज्यादा की ठगी

    जांच में सामने आया कि सारिका अकेली पीड़िता नहीं थीं। ठीक इसी तरह 36 अन्य लोगों को भी कनाडा वर्क वीज़ा का झांसा देकर ठगा गया था।
    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कुल ₹1,56,70,400 की रकम वसूल की और उसे हड़प लिया।

    मालाड पुलिस की कार्रवाई

    सभी सबूत जुटाने के बाद मालाड पुलिस ने रीना और गौरव शाह के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। लंबे समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस का कहना है कि:

    • आरोपियों के बैंक खातों और लेन-देन की जांच की जा रही है
    • अन्य पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है
    • इस रैकेट से जुड़े और लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है

    FAQ

    Q1. यह ठगी किस इलाके में हुई?
    👉 मुंबई के मालाड इलाके में।

    Q2. कुल कितने लोग ठगी का शिकार हुए?
    👉 37 लोग।

    Q3. ठगी की कुल रकम कितनी है?
    👉 करीब 1.63 करोड़ रुपये।

    Q4. आरोपी कौन हैं?
    👉 रीना गौरव शाह और गौरव शाह।

    Q5. पुलिस आगे क्या जांच कर रही है?
    👉 अन्य पीड़ितों, बैंक ट्रांजैक्शन और इस रैकेट से जुड़े लोगों की जांच।

  • मालाड में 25 लाख की नकली सोने की ठगी, इंटर-स्टेट गैंग गिरफ्तार

    मालाड में 25 लाख की नकली सोने की ठगी, इंटर-स्टेट गैंग गिरफ्तार

    मालाड (वेस्ट) में खुदाई के दौरान सोना मिलने का झांसा देकर 25 लाख रुपये की ठगी करने वाले इंटर-स्टेट गैंग को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया। गुजरात और पालघर से आरोपियों की धरपकड़, 15.45 लाख रुपये बरामद।

    मुंबई: जमीन की खुदाई के दौरान सोने के आभूषण मिलने का झांसा देकर मालाड इलाके में 25 लाख रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर इंटर-स्टेट गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। मुंबई पुलिस ने गुजरात और पालघर से इस गैंग के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार है। मामले में अब तक 15.45 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। यह ठगी नवंबर के अंत से दिसंबर की शुरुआत के बीच की गई थी।

    Inter-state-gang-arrested-for-fake-gold-fraud-worth-Rs-25-lakh-in-Malad-news

    खुदाई में सोना मिलने का झांसा देकर ठगी

    पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता दिनेश मेहता (51), जो मालाड (वेस्ट) के सोमवारी बाजार स्थित अंकुर बिल्डिंग में रहते हैं, उनसे मुख्य आरोपी बाबूलाल भालाराम वाघेला (55) ने संपर्क साधा।
    आरोपी ने खुद को राजस्थान से जुड़ा बताते हुए राजस्थानी भाषा में बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे भरोसा जीत लिया। उसने दावा किया कि नासिक में एक मंदिर के पीछे खुदाई के दौरान करीब 900 ग्राम सोने के आभूषण मिले हैं।

    नमूना दिखाकर बनाया विश्वास

    आरोपी ने या तो आभूषण बेचने में मदद करने या सीधे बेचने का प्रस्ताव दिया। भरोसा दिलाने के लिए उसने कुछ पीले धातु के मोती नमूने के तौर पर दिए, जो जांच में असली सोना निकले। इसी भरोसे में आकर दिनेश मेहता ने 25 लाख रुपये नकद दे दिए और आभूषण अपने पास ले लिए।

    जौहरी की जांच में निकला नकली सोना

    कुछ समय बाद जब इन आभूषणों को जौहरी को दिखाया गया, तो वे पूरी तरह नकली पाए गए। ठगी का अहसास होते ही शिकायतकर्ता ने मालाड पुलिस से संपर्क किया।
    इसके बाद 5 दिसंबर 2025 को मालाड पुलिस स्टेशन में क्राइम रजिस्टर नंबर 883/25 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    कानूनी धाराएं और जांच

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 318(4) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है।
    जांच के दौरान क्राइम डिटेक्शन टीम ने मालाड और कांदिवली (ईस्ट) सहित कई इलाकों के 100 से ज्यादा सरकारी और निजी CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली।

    CCTV, कॉल डिटेल और चाल-ढाल से पहचान

    हालांकि CCTV फुटेज साफ नहीं थी, लेकिन पुलिस ने

    • शरीर की बनावट
    • चलने की चाल (gait analysis)
    • कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल डंप डेटा

    के आधार पर आरोपियों की पहचान की। लगातार तीन दिनों की मेहनत के बाद पुलिस को सफलता मिली।

    गुजरात और विरार से गिरफ्तारियां

    जांच में कुल पांच आरोपियों की पहचान हुई।

    • मुख्य आरोपी बाबूलाल वाघेला को कालोल, गांधीनगर (गुजरात) से गिरफ्तार किया गया।
    • उसके घर की तलाशी में 15.45 लाख रुपये नकद और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।
    • उसकी पत्नी कोकुबाई वाघेला (50) की भूमिका सामने आने पर उन्हें BNS की धारा 35(3) के तहत नोटिस दिया गया है।

    इसके बाद विरार (ईस्ट) से तीन अन्य आरोपी—
    मंगलाराम वागरी, केसराराम वागरी और भवरलाल वागरी—को गिरफ्तार किया गया।

    राजस्थान से जुड़े, पेशे से फोटो फ्रेम बनाने वाले आरोपी

    पुलिस के मुताबिक सभी आरोपी मूल रूप से राजस्थान के जालोर जिले के रहने वाले हैं और अलग-अलग राज्यों में घूम-घूमकर ऐसी ठगी करते हैं।
    गिरफ्तार आरोपी पेशे से फोटो फ्रेम बनाने का काम करते हैं। मुख्य आरोपी बाबूलाल वाघेला के खिलाफ गुजरात के कालोल तालुका और साबरमती पुलिस स्टेशन में पहले से भी ठगी के मामले दर्ज हैं।

    एक आरोपी फरार, तलाश जारी

    इस केस में गोविंद (उम्र करीब 30 वर्ष) नाम का एक आरोपी अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
    बरामद रकम के अलावा बाकी पैसे और अन्य संपत्ति की रिकवरी की प्रक्रिया जारी है।

    पुलिस अधिकारियों की भूमिका

    इस पूरे मामले की जांच एपीआई अभिजीत काले और दीपक रैवाडे कर रहे हैं, जो वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दुष्यंत चव्हाण के मार्गदर्शन में काम कर रहे हैं।


    FAQ सेक्शन

    Q1. ठगी की रकम कितनी थी?
    25 लाख रुपये नकद।

    Q2. अब तक कितनी रकम बरामद हुई है?
    15.45 लाख रुपये।

    Q3. मुख्य आरोपी कहां से गिरफ्तार हुआ?
    कालोल, गांधीनगर (गुजरात) से।

    Q4. कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
    चार आरोपी गिरफ्तार, एक फरार।

    Q5. कौन-सी धाराओं में केस दर्ज है?
    BNS की धारा 316(2), 318(4) और 3(5)।

  • मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    मालवनी पर महायुति की नज़र, 641 एकड़ जमीन के पुनर्विकास पर सियासी घमासान

    धारावी की तर्ज पर मालवणी के 641 एकड़ इलाके के पुनर्विकास की तैयारी शुरू। क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल, सर्वे और विस्थापन को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

    महाराष्ट्र/नागपुर: धारावी पुनर्विकास योजना के बाद अब मुंबई के मालाड स्थित मालवनी इलाके के 641 एकड़ भूखंड पर महायुति सरकार की नजर टिक गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे इलाके के क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकास के लिए सर्वे और योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार इसे झोपड़पट्टी-मुक्त करने की पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की साजिश करार दे रहा है।

    धारावी मॉडल पर मालवणी पुनर्विकास की तैयारी

    देश की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी को अडानी ग्रुप को सौंपे जाने के बाद अब सरकार ने मालवनी क्षेत्र के पुनर्विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में 641 एकड़ क्षेत्र के सर्वेक्षण और क्लस्टर डेवलपमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लस्टर मॉडल के जरिए पूरे मालवनी इलाके का कम समय में पुनर्विकास संभव है और इसे एक बड़े झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।

    641 एकड़ में फैला मालवनी, 14 हजार झोपड़ियां

    मालवनी इलाके का कुल क्षेत्रफल 641 एकड़ है, जिसमें

    • राज्य सरकार
    • म्हाडा
    • बृहन्मुंबई महानगरपालिका
    • निजी भूखंड

    शामिल हैं।
    इसमें से 565.98 एकड़ क्षेत्र में झोपड़पट्टियां हैं, जबकि 75.02 एकड़ खुली जमीन है। इस पूरे इलाके में करीब 14 हजार झोपड़ियां बसी हुई हैं। सरकार का दावा है कि पुनर्विकास के बाद यह इलाका पूरी तरह झोपड़पट्टी-मुक्त हो जाएगा।

    13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका

    विपक्ष का आरोप है कि इस योजना के नाम पर मालवनी में रहने वाले करीब 13 लाख लोगों को विस्थापित किया जाएगा। धारावी पुनर्विकास को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मुंबई में विकास के नाम पर लगातार बड़े भूखंड बिल्डरों की झोली में डाले जा रहे हैं, जबकि स्थानीय निवासियों के पुनर्वास और अधिकारों को लेकर स्पष्टता नहीं है।

    कौन करेगा सर्वे और रिपोर्ट?

    बैठक में तय किया गया कि

    • म्हाडा और
    • झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA)

    अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वे करेंगे।
    सभी झोपड़पट्टियों का सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसियां संयुक्त रिपोर्ट तैयार करेंगी।
    जहां कानूनी अड़चनें होंगी, वहां अलग से कार्रवाई की जाएगी, और जहां विकास संभव होगा, उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद

    इस अहम बैठक में

    • आवास राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर
    • विधायक असलम शेख
    • अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता
    • म्हाडा अधिकारी मिलिंद बोरीकर
    • SRA CEO डॉ. महेंद्र कल्याणकर

    मौजूद रहे।
    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुंबई मनपा आयुक्त भूषण गगरानी भी बैठक में शामिल हुए।

    दागी बिल्डर को ठेका मिलने की चर्चा

    सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्विकास परियोजना को लेकर पहले ही एक दागी बिल्डर को ठेका दिए जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आरोप है कि यह वही बिल्डर है, जिसने चेंबूर के माहुल इलाके में प्रोजेक्ट-अफेक्टेड लोगों के लिए इमारतें बनाई थीं, जहां करीब 9 हजार करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे थे। बताया जाता है कि वह आपराधिक मामले में जेल भी जा चुका है।

    अब उसी बिल्डर को एक भाजपा नेता के माध्यम से मालवनी की बड़ी पुनर्विकास योजना में शामिल करने की कोशिश हो रही है।


    FAQ

    Q1. मालवणी पुनर्विकास योजना क्या है?
    मालवणी इलाके को क्लस्टर डेवलपमेंट मॉडल के तहत पुनर्विकसित करने की सरकारी योजना।

    Q2. कुल कितनी जमीन शामिल है?
    करीब 641 एकड़ भूमि।

    Q3. कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं?
    करीब 13 लाख लोगों के विस्थापन की आशंका जताई जा रही है।

    Q4. विवाद क्यों हो रहा है?
    विपक्ष का आरोप है कि योजना का फायदा बिल्डरों को दिया जा रहा है।

  • Malad में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशियों को बैन दवाइयां बेचने वाले 5 गिरफ्तार

    Malad में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, विदेशियों को बैन दवाइयां बेचने वाले 5 गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड स्थित चिनचोली बंदर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापा मारकर पाँच लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपी विदेशों में बैन दवाओं की सप्लाई का झांसा देकर भारी रकम वसूल रहे थे। पुलिस ने IT Act, BNS और टेलीग्राफ एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

    मुंबई: मालाड इलाके में बांगुर नगर पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी एक अवैध कॉल सेंटर चलाकर अमेरिका सहित कई देशों के ग्राहकों को बैन दवाइयां भेजने का दावा करते थे और उनसे भारी रकम वसूलते थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ IT Act और नई दंड संहिता (BNS) की कई धाराओं में केस दर्ज किया है।

    Malad में चल रहा था अवैध कॉल सेंटर, विदेशी ग्राहकों को बनाया जा रहा था निशाना

    मुंबई के चिंचोली बंदर, मालाड स्थित एक ऑफिस में यह फर्जी कॉल सेंटर ऑपरेट किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपी खुद को विदेशी ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर विदेशी ग्राहकों से संपर्क करते थे।

    वे ग्राहक को कहते थे कि उनके लिए ऐसी दवाइयां उपलब्ध हैं जो आमतौर पर बैन हैं या ऑनलाइन बेचना गैरकानूनी है। इसी बहाने उनसे डॉलर में भुगतान भी ले लिया जाता था।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

    पुलिस के अनुसार पकड़े गए पाँच आरोपी—

    • अयूब शेख (30)
    • फैजान भलीम (27)
    • फारुख शेख (29)
    • मोइन अहमद शेख (32)
    • ज़ीशान नासिर अंसारी (22)

    ये सभी मिलकर लंबे समय से ये फर्जीवाड़ा चला रहे थे।
    ये सभी मिलकर अमेरिका सहित कई देशों के लोगों को फंसाकर लाखों की ठगी कर रहे थे।

    कैसे करते थे ठगी? पुलिस ने खोला पूरा खेल

    • संदिग्ध वेबसाइट या डेटा के जरिए विदेशी ग्राहकों तक पहुँच बनाना
    • खुद को इंटरनेशनल ऑनलाइन फार्मेसी का अधिकारी बताना
    • मेडिकल कंसल्टेशन का झांसा देना
    • “बैन मेडिसिन उपलब्ध” कहकर ऑनलाइन पेमेंट वसूलना
    • पैसे लेने के बाद उत्पाद न भेजना

    यह पूरा नेटवर्क फार्मा से जुड़े अवैध कारोबार + साइबर फ्रॉड का कॉम्बिनेशन था।

    कौन-कौन सी धाराओं में केस दर्ज?

    बांगुर नगर पुलिस ने मामला दर्ज किया है—

    • BNS की धाराएँ 318(4), 319(2), 3(5)
    • IT Act 2000 की धाराएँ 66(A), 66(D), 75
    • Indian Telegraph Act की धारा 20

    पाँचों आरोपियों को 15 दिसंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

    मालाड और मुंबई में बढ़ते साइबर फ्रॉड को लेकर पुलिस अलर्ट

    इस तरह के कॉल सेंटर लगातार मुंबई के कई इलाकों में पकड़े जा रहे हैं। विदेशी ग्राहकों को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि—

    • वे दवाओं की कीमत ज़्यादा चुकाते हैं
    • वे शिकायत भारत में दर्ज नहीं करा पाते
    • वेरिफिकेशन की प्रक्रिया मुश्किल होती है

    पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े और लोगों की तलाश कर रही है।


    FAQ

    1. क्या गिरफ्तार कॉल सेंटर वास्तव में दवाइयां सप्लाई करता था?

    नहीं, आरोपी सिर्फ भुगतान लेते थे और बाद में उत्पाद नहीं भेजते थे। यह पूरा रैकेट फर्जीवाड़ा था।

    2. क्या ग्राहकों को किसी तरह की मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन की सुविधा दी जाती थी?

    वे खुद को इंटरनेशनल फार्मेसी बताकर नकली कंसल्टेशन की बात करते थे, जो पूरी तरह अवैध था।

    3. क्या इस रैकेट में और लोग शामिल हो सकते हैं?

    पुलिस के अनुसार यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जिसकी जाँच जारी है।

    4. क्या विदेशी ग्राहक भारत में केस दर्ज कर सकते हैं?

    तकनीकी रूप से हाँ, लेकिन शिकायत प्रक्रिया जटिल होने के कारण अक्सर ठगी की रिपोर्ट नहीं होती।

  • मालवनी में अनधिकृत टर्फ पर रोक — नागरिकों के आंदोलन को बड़ी जीत

    मालवनी में अनधिकृत टर्फ पर रोक — नागरिकों के आंदोलन को बड़ी जीत

    मालाड–मालवनी के सार्वजनिक मैदान पर बनाए जा रहे अवैध टर्फ पर प्रशासन ने तत्काल रोक लगा दी है। यह फैसला स्थानीय नागरिकों, संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लंबे संघर्ष और आंदोलन के बाद आया।

    मुंबई: मालाड़ पश्चिम के मालवनी गेट नंबर 8 स्थित में बस डेपो के पास, म्हाडा के सार्वजनिक खेल मैदान पर बन रहे अनधिकृत टर्फ को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के संयुक्त आंदोलन को बड़ी सफलता मिली है। लगातार विरोध, शिकायतों और प्रशासनिक स्तर पर किए गए दबाव के बाद टर्फ निर्माण के कार्य को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। नागरिकों ने घोषणा की है कि मैदान पूरी तरह बच्चों, खिलाड़ियों और जनता के लिए खुला होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

    🔹 प्रदर्शन के बाद रोक — आंदोलन बना निर्णायक

    मालाड–मालवनी के खुले सार्वजनिक मैदान पर कुछ लोगों द्वारा चुपचाप टर्फ निर्माण शुरू किया गया था, जिसकी जानकारी मिलते ही नागरिकों ने विरोध दर्ज कराया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, म्हाडा, बीएमसी और सभी संबंधित विभागों को लिखित शिकायत देना शुरू किया और नियमित फ़ॉलोअप लिया।
    इसी फ़ॉलोअप के बाद सरकार ने विवादित टर्फ निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी किया।

    🔹 धमकियों के बावजूद संघर्ष जारी रखा

    सामाजिक कार्यकर्ताओं को आंदोलन रोकने के लिए कथित तौर पर झूठे फौजदारी मामलों में फंसाने की धमकियाँ भी दी गईं, लेकिन आंदोलनकारियों ने पीछे हटने से इंकार कर दिया। उनके साहस और नेतृत्व से स्थानीय युवाओं का मनोबल बढ़ा और आंदोलन व्यापक हो गया।

    🔹 राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन

    आंदोलन की ताकत लोगों के एकजुट होने से और बढ़ी।
    मुख्य रूप से— सामाजिक कार्यकर्ताओं ने म्हाडा कार्यालय और पुलिस स्टेशन में जाकर मजबूती से आपत्ति दर्ज की। संगठनों और नागरिकों के दबाव के बाद प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने पर मजबूर होना पड़ा।

    🔹 म्हाडा का सख्त संदेश — ‘एक ईंट भी रखी तो कार्रवाई’

    प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में मैदान पर एक ईंट भी रखी गई तो एमआरटीपी कानून लागू करके तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
    लेकिन इसी बीच नागरिकों ने स्पष्ट कहा है कि—
    📌 मैदान पूरी तरह बच्चों और खिलाड़ियों के लिए वापस खुलने तक संघर्ष जारी रहेगा।


    ❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1: मालवनी में टर्फ किस वजह से विवाद में था?
    टर्फ सार्वजनिक खेल मैदान पर बिना अनुमति और बिना नोटिस के बनाया जा रहा था, इसलिए स्थानीय लोगों ने उसे अवैध बताया।

    Q2: टर्फ निर्माण पर रोक क्यों लगाई गई?
    नागरिकों व सामाजिक संगठनों के विरोध, शिकायतों और आंदोलन के बाद प्रशासन ने कार्य रोकने का आदेश दिया।

    Q3: क्या यह मामला अब पूरी तरह खत्म हो गया है?
    प्रशासन ने रोक तो लगाई है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि मैदान पूरी तरह बच्चों और खिलाड़ियों के लिए खुलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

    Q4: टर्फ शुरू करने वालों पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी?
    प्रशासन के अनुसार, यदि अब मैदान पर कोई निर्माण कार्य शुरू हुआ तो एमआरटीपी कानून के तहत तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

  • एनयूएचएम कर्मचारियों को सीधे BMC में शामिल करने की मांग तेज

    एनयूएचएम कर्मचारियों को सीधे BMC में शामिल करने की मांग तेज

    मुंबई में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य अभियान (NUHM) के 1200 कर्मचारियों ने बीएमसी में सीधी नियुक्ति की मांग उठाई। ठेकेदार पर वेतन, सुविधाओं और भत्तों में लापरवाही के आरोप।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधीन राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य अभियान (NUHM) में 2016 से काम कर रहे करीब 1200 कर्मचारियों ने ठेकेदार डी.एस. इंटरप्रायज़ेस को हटाकर उन्हें सीधे बीएमसी के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट में शामिल करने की मांग की है। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें न वेतनवृद्धि, न पीएफ, न मेडिकल सुविधा और न ही कोरोना काल में मिला भत्ता नही दिया गया है।

    Demand-for-direct-inclusion-of-NUHM-employees-in-BMC-intensifies-1

    क्या है पूरा मामला?

    महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरे राज्य में एनयूएचएम चलाया जाता है। मुंबई में यह सभी कर्मचारी बीएमसी के अधीन स्वास्थ्य सेवाओं में तैनात हैं।

    लेकिन दूसरी महानगरपालिकाओं की तरह सीधे नियुक्ति करने की बजाय बीएमसी ने डी.एस. इंटरप्रायज़ेस नामक ठेकेदार को जिम्मेदारी दी, जिसने निविदा के अनुसार कर्मचारी रखे।

    कर्मचारियों का कहना है कि—

    • 2016 से लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान
    • कोरोना महामारी में राउंड द क्लॉक काम
    • कम वेतन में मुंबई जैसे महंगे शहर में गुज़ारा बेहद मुश्किल
    • ठेकेदार की ओर से किसी भी प्रकार की सहयोग सुविधा नहीं
    • मासिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई और चिकित्सा खर्च पूरा करना कठिन

    सुविधाओं को लेकर गंभीर आरोप

    कर्मचारियों ने बताया कि डी.एस. इंटरप्रायज़ेस ने श्रम कानून और कॉन्ट्रैक्ट शर्तों का पालन नहीं किया।

    कर्मचारियों को नहीं मिल रही ये सुविधाएँ—

    • वेतनवृद्धि
    • प्रसूति अवकाश
    • पीएफ (Provident Fund)
    • स्वास्थ्य बीमा योजना
    • कोरोना भत्ता (विशेषकर डेटा ऑपरेटरों के लिए)

    कर्मचारियों ने कहा कि कोरोना के दौरान कई साथी बीमार हुए, फिर भी प्रशासन और ठेकेदार की ओर से न कोई आर्थिक सहायता और न ही विशेष सुविधा दी गई।

    ‘मुंबई में इतने कम वेतन में जीना मुश्किल’

    कर्मचारियों का कहना है कि मुंबई जैसे महंगे शहर में इतनी कम तनख्वाह पर परिवार चलाना लगभग नामुमकिन हो रहा है। हर महीने—

    • घर किराया
    • बच्चों की फीस
    • मेडिकल खर्च
    • रोजमर्रा का खर्च

    इन सबके बीच गुज़ारा मुश्किल होता जा रहा है।

    यूनियन की मांग— बीएमसी में सीधी नियुक्ति

    म्युनिसिपल कर्मचारी कामगार सेना द्वारा उठाई गई मुख्य मांग—

    ➡ ठेकेदार हटाकर 1200 कर्मचारियों को बीएमसी के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में सीधे शामिल किया जाए।

    यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों ने हमेशा ईमानदारी से काम किया है, इसलिए उन्हें स्थाई या कम से कम सीधे नगरपालिका ढांचे में शामिल किया जाना चाहिए।


    FAQ

    Q1. एनयूएचएम कर्मचारी बीएमसी से क्या मांग कर रहे हैं?

    वे चाहते हैं कि ठेकेदार को हटाकर उन्हें सीधे बीएमसी के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट में शामिल किया जाए।

    Q2. कर्मचारियों की मुख्य शिकायतें क्या हैं?

    पीएफ, मेडिकल सुविधा, वेतनवृद्धि, प्रसूति अवकाश और कोरोना भत्ता जैसी मूलभूत सुविधाएँ न मिलना।

    Q3. कितने कर्मचारी इस अभियान के तहत काम करते हैं?

    करीब 1200 कर्मचारी 2016 से लगातार सेवा दे रहे हैं।

    Q4. कोरोना काल में उन्हें क्या दिक्कतें आईं?

    उन्होंने बिना रुके काम किया लेकिन कोरोना भत्ता नहीं मिला, और बीमारी के समय सहायता भी नहीं मिली।

  • कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    कांदिवली में मनपा अभियंता अभय जगताप पर सवाल — अवैध निर्माण पर कार्रवाई से क्यों कर रहे हैं इंकार?

    मुंबई के कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड में प्रभारी अभियंता अभय जगताप पर गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और विधायक के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने से लोग नाराज़ हैं। सवाल उठ रहा है — क्या कानून से ऊपर हैं कार्यकारी अभियंता एवं डी. ओ. अभय जगताप?

    मुंबई: कांदिवली (पश्चिम) में स्थित मनपा आर/दक्षिण वार्ड कार्यालय में तैनात (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
    निवासियों का आरोप है कि वार्ड के अंतर्गत आने वाले सागवाडी आदिवासी पाड़ा, समाज मंदिर के पास अवैध निर्माण होने के बावजूद, जगताप कार्रवाई से बच रहे हैं।

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    लोगों का कहना है कि उन्होंने सार्वजनिक शौचालय और बोरिंग के लिए मांग की थी, जिसको लेकर 10 लाख रुपये सरकारी फंड भी पास किया गया। लेकिन उस पर कुछ लोगों ने तीन अवैध कमरे बना लिए। विधायक और सहाय्यक आयुक्त के आदेश के बाद भी तोड़क कार्रवाई नहीं की गई, जिससे नागरिकों में नाराज़गी है।

    सार्वजनिक शौचालय के लिए दी गई भूमि पर हुआ कब्ज़ा

    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र में शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी होती है। इसी वजह से गुरुचरण की भूमि पर शौचालय निर्माण के लिए आवेदन किया गया था। लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने मौके का फायदा उठाकर वहाँ तीन अवैध रूम बना लिए।

    नागरिकों ने इस संबंध में तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे को पत्र लिखा और अवैध निर्माण हटाने की मांग की। इसके साथ ही, विधायक योगेश सागर ने भी मनपा को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया।

    अभय जगताप पर मिलीभगत के आरोप

    स्थानीय लोगों का कहना है कि (प्रभारी) कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है। आरोप है कि उन्होंने अवैध निर्माणकर्ताओं से पैसे लेकर कार्रवाई रोक दी है। स्थानीयों के अनुसार, जगताप का रवैया मनमाना है और वे कहते हैं —

    “मेरी मर्जी है, कोई काम करूं या न करूं। मेरा क्या बिगाड़ लेंगे अधिकारी या विधायक?”

    यह बात न केवल प्रशासनिक अनुशासनहीनता को दर्शाती है बल्कि मनपा की साख पर भी सवाल उठाती है।

    सहाय्यक आयुक्त और विधायक के आदेशों की अनदेखी

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    सूत्रों के मुताबिक, विधायक योगेश सागर ने खुद सहाय्यक आयुक्त से फोन पर बात कर कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
    अभय जगताप का कहना है कि यह मामला अब वर्तमान सहाय्यक अभियंता शिशिर खोखले या पूर्व अभियंता ब्रह्मणकार को देखना चाहिए। जबकि ब्रह्मणकर का तबादला हो चुका है।
    हालांकि जगताप का यह बयान जिम्मेदारी से बचने की कोशिश मानी जा रही है।

    स्थानीय समाज का विरोध — कार्रवाई की मांग

    इस पूरे मामले में आदिवासी समाज और स्थानीय महिलाएं खुलकर विरोध में उतर आई हैं।
    चंदू बंजारा, गोपाल, अजय, कमल काली, दिनेश और कई अन्य लोगों ने पत्रकार को बुलाकर आदिवासी समाज मंदिर के पास बने अवैध निर्माण के खिलाफ अपनी बात रखी।
    उनका कहना है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो वे मनपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे।
    इसी सिलसिले में अखिल भारतीय मानवाधिकार नागरिक विकल्प के मुंबई उपाध्यक्ष राजेश किसन मंजाळ से मुलाकात की तो उन्होंने और भी चौकाने वाला खुलासा किया मनपा आर/ दक्षिण विभाग के इमारत व कारखाना विभाग की ओर से शिकायत क्रमांक RS/022/14- 12 – 2024/333 से संबंधित राजेश पवार के खिलाफ नोटिस क्रमांक RS/DO1RS/022/351-MMC ACT/RS333NO1/16-12-2024 जारी किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप ने यहां रिश्वतखोरी की हुई है।

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    निवासियों ने मांग की है कि

    “सबसे पहले भ्रष्ट प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और फिर अवैध निर्माण पर बुलडोजर चले।”

    कनिष्ठ अभियंता पर भी सवाल — ‘जगताप से क्यों डरते हैं अधिकारी?’

    सूत्र बताते हैं कि जब से अभय जगताप प्रभारी डी.ओ. बने हैं, वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों को धमकाते और दबाव डालते हैं।
    कई अधिकारी उनके खिलाफ बोलने से डरते हैं।
    स्थानीयों का कहना है कि तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता नितिन ठाकुर ही इस मामले की सच्चाई बता सकते हैं कि आखिर “जगताप का डर” इतना क्यों है? लेकिन उनका भी तबादला हो गया है।


    FAQ

    Q1. मामला किस इलाके का है?
    A1. कांदिवली (पश्चिम) आर/दक्षिण वार्ड, पटेल नगर रोड नंबर 4 का मामला है।
    Q2. विवाद किस बात को लेकर है?
    A2. नागरिकों द्वारा दी गई भूमि पर अवैध निर्माण हुआ है, जिस पर कार्रवाई नहीं की गई।
    Q3. किस अधिकारी पर आरोप लगे हैं?
    A3. प्रभारी कार्यकारी अभियंता एवं डी.ओ. अभय जगताप पर।
    Q4. क्या विधायक और मनपा अधिकारी इस मामले में शामिल हुए?
    A4. हाँ, विधायक योगेश सागर और तत्कालीन सहाय्यक आयुक्त मनीष साल्वे दोनों ने कार्रवाई का आदेश दिया था।
    Q5. नागरिकों की क्या मांग है?
    A5. अभय जगताप के खिलाफ जांच और दंडात्मक कार्रवाई, साथ ही अवैध निर्माण का तुरंत तोड़फोड़ अभियान।

  • दहिसर का रिटायर्ड पुलिस अधिकारी पासपोर्ट फर्जीवाड़े में गिरफ्तार

    दहिसर का रिटायर्ड पुलिस अधिकारी पासपोर्ट फर्जीवाड़े में गिरफ्तार

    मुंबई के दहिसर पुलिस स्टेशन में दर्ज पासपोर्ट फर्जीवाड़े के मामले में एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट की मंजूरी दी।

    मुंबई: दहिसर पुलिस ने एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी संजय जगताप को पासपोर्ट से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है। दहिसर पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले मे गिरफ्तार आरोपी पर यह आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति से पासपोर्ट प्रक्रिया में मदद का झांसा देकर धोखाधड़ी की।

    शिकायत के अनुसार, आरोपी ने बिना उचित दस्तावेजों की जांच किए पासपोर्ट आवेदन को स्वीकृत कर दिया। बाद में जब जांच हुई तो जमा किए गए दस्तावेज फर्जी पाए गए, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई।

    एफआईआर में गंभीर धाराएं

    जांच के बाद 26 मार्च 2025 को आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465, 467, 468, 471, 120(B) के तहत दर्ज हुआ है। इसके अलावा, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12 भी इसमें जोड़ी गई है।

    रिटायर्ड पुलिसकर्मी का नाम आया सामने

    जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी हेड कॉन्स्टेबल संजय जगताप थे, जो उस समय दहिसर पुलिस स्टेशन में तैनात थे। बाद में उनकी मालाड पुलिस स्टेशन में बदली हो गई। महत्वपूर्ण बात यह है कि जगताप 31 अक्टूबर 2025 को सेवानिवृत्त हुए, और सेवानिवृत्ति के कुछ ही दिनों बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    जमानत याचिका खारिज, पुलिस हिरासत में भेजा गया

    आरोपी ने गिरफ्तारी से पहले हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
    इसके बाद 4 नवंबर 2025 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और अदालत में पेश किया।
    कोर्ट ने आरोपी को पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

    पुलिस कर रही है आगे की जांच

    मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और पासपोर्ट प्राधिकरण मिलकर यह जांच कर रहे हैं कि क्या इस घोटाले में अन्य लोग भी शामिल हैं।
    साथ ही, पासपोर्ट जारी करने में इस्तेमाल किए गए फर्जी दस्तावेजों की तकनीकी जांच भी की जा रही है।


    FAQ

    Q1. यह मामला कब दर्ज किया गया था?
    यह मामला 26 मार्च 2025 को दहिसर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया।
    Q2. आरोपी कौन है?
    सेवानिवृत्त पुलिस हेड कॉन्स्टेबल संजय जगताप, जो पहले दहिसर थाने में तैनात थे।
    Q3. किस आधार पर गिरफ्तारी हुई?
    आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट आवेदन मंजूर किया था।
    Q4. कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
    कोर्ट ने आरोपी को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा है।
    Q5. क्या आरोपी को जमानत मिली?
    नहीं, उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार का बयान: दिव्यांगों को दिए गए “खराब ई-रिक्शा” की होगी जांच

    महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि वह दिव्यांग व्यक्तियों को दिए गए ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी। कई लाभार्थियों ने आरोप लगाया था कि सरकार की योजना के तहत मिले वाहन “खराब” और “असुरक्षित” हैं।

    मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के समाज कल्याण विभाग की एक योजना के तहत दिव्यांग लोगों को ई-रिक्शा (e-rickshaw) दिए गए थे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    लेकिन अब इन वाहनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं।

    लगभग 115 दिव्यांग लाभार्थियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उन्हें जो ई-रिक्शे मिले हैं, वो “खराब हालत में” हैं और चलाने के लायक नहीं हैं।
    इन शिकायतों के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा — और अब सरकार ने कहा है कि वह तकनीकी जांच कराएगी और रिपोर्ट पेश करेगी।

    योजना की शुरुआत और खर्च

    इस योजना की शुरुआत 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग (Social Justice Department) के एक सरकारी निर्णय (GR) से हुई थी।
    इस योजना के तहत लगभग 800 ई-रिक्शे दिव्यांग व्यक्तियों को 20 करोड़ रुपये की लागत से बांटे गए थे।
    योजना का नाम था —
    “Green Energy Powered Environment-Friendly Mobile Shop for Disabled Persons to Become Self-Reliant”

    लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई वाहन तकनीकी रूप से दोषपूर्ण हैं और इनमें सुरक्षा संबंधी खामियां हैं।

    कोर्ट में क्या हुआ?

    15 अक्टूबर को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस संदीश डी. पाटिल की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
    याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील असीम सरोदे और श्रिय आळवे ने कहा कि सरकार ने उन्हें “डिफेक्टिव” यानी खराब वाहन देकर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

    उन्होंने यह भी मांग की कि

    • एक स्वतंत्र जांच एजेंसी नियुक्त की जाए,
    • और सरकारी खरीद प्रक्रिया (procurement process) की जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि क्या ई-रिक्शा की खरीद में गड़बड़ी हुई थी।

    सरकार और कंपनी का जवाब

    सरकार की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट प्लीडर भूपेश सामंत ने कोर्ट को बताया कि
    Maharashtra State Handicapped Finance and Development Corporation (MSHFDC) हर जिले में एक तकनीकी अधिकारी नियुक्त करेगी जो इन ई-रिक्शों की जांच करेगा।

    वहीं, सप्लायर कंपनी Mac Auto India ने भी कहा कि वह सिर्फ इन 115 याचिकाकर्ताओं के नहीं, बल्कि सभी लाभार्थियों के वाहनों की मरम्मत या जांच करेगी।

    कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह तकनीकी रिपोर्ट नवंबर 19, 2025 तक पेश करे और इस पूरी जांच में सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट पूरा सहयोग करे।

    आरोप क्या हैं?

    • याचिकाकर्ताओं ने कहा कि ई-रिक्शे कमज़ोर बॉडी और घटिया पार्ट्स से बने हैं।
    • कई वाहनों की बैटरी और मोटर कुछ ही महीनों में फेल हो गई।
    • सरकार ने बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीदारी की है।
    • कोई बाद की सर्विस या मेंटेनेंस सपोर्ट नहीं दिया गया।

    अदालत की टिप्पणी

    कोर्ट ने पहले ही 3 अक्टूबर को कहा था कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतें गंभीर और सटीक लगती हैं।
    अब अदालत इस बात पर नज़र रखेगी कि सरकार और कंपनी जांच में पारदर्शिता बरतती है या नहीं।

    दिव्यांगों की पीड़ा

    दिव्यांग लोगों का कहना है कि ये ई-रिक्शे आजीविका का एकमात्र साधन हैं।
    “खराब वाहन” मिलने की वजह से उनकी रोज़मर्रा की कमाई ठप पड़ गई है।
    कई लोगों को कर्ज चुकाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि उन्होंने वाहन पर लोन लिया था।


    FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. मामला किस बारे में है?
    ➡️ दिव्यांग लाभार्थियों को सरकार की योजना के तहत दिए गए ई-रिक्शे खराब निकले, जिस पर बॉम्बे हाईकोर्ट में मामला चल रहा है।

    Q2. कितने लोगों ने याचिका दायर की है?
    ➡️ लगभग 115 दिव्यांग व्यक्तियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

    Q3. योजना कब शुरू हुई थी?
    ➡️ यह योजना 10 जून 2019 को समाज न्याय विभाग के आदेश से शुरू की गई थी।

    Q4. क्या सरकार ने जांच के लिए हामी भरी है?
    ➡️ हां, महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह सभी ई-रिक्शों की तकनीकी जांच करवाएगी।

    Q5. अगली सुनवाई कब होगी?
    ➡️ अगली सुनवाई 19 नवंबर 2025 को निर्धारित की गई है।

  • गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव में पानी की किल्लत पर उद्धव सेना का ‘बाल्टी मोर्चा’, नगर निगम को दी चेतावनी

    गोरगांव पश्चिम में पानी की किल्लत से परेशान लोगों ने उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के साथ मिलकर ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। मोर्चे में बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया और BMC को चेतावनी दी कि अगर पानी की समस्या हल नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा।

    मुंबई: गोरगांव (पश्चिम) में लगातार बढ़ती पानी की किल्लत को लेकर उद्धव ठाकरे गट की शिवसेना (UBT) ने रविवार को एक ज़ोरदार ‘बाल्टी मोर्चा’ निकाला। यह मोर्चा प्रभाग क्रमांक 52 में पानी की कमी के विरोध में संदीप गाढवे की अगुवाई में आयोजित किया गया। इस दौरान नागरिकों ने खाली बाल्टियां लेकर BMC के खिलाफ नारे लगाए और प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं मिला, तो आंदोलन और उग्र होगा।

    💧 ‘पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा’ — नारों से गूंजा इलाका

    मोर्चे में शामिल नागरिकों ने “पानी आमचा हक्काचा, नाही कोणाच्या बापाचा!” और “आमच्या मागण्या पूर्ण करा!” जैसे नारे लगाते हुए विरोध जताया।
    आंदोलन के दौरान दीपक परब नामक नागरिक ने BMC के गेट के सामने प्रतीकात्मक रूप से नहा कर प्रशासन पर तंज कसा।

    मोर्चा खत्म होने के बाद संदीप गाढवे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और इलाके में चल रही पानी की समस्या पर चर्चा की।

    🏘️ नागरिकों की मुख्य मांगें क्या हैं?

    1. बंगाली कंपाउंड इलाके में कम दबाव से आने वाले पानी की समस्या का तुरंत समाधान किया जाए।
    2. पानी छोड़ने का समय घटाने का निर्णय वापस लिया जाए और पुरानी टाइमिंग बहाल की जाए।
    3. कन्यापाड़ा इलाके में दलालों के ज़रिए नल कनेक्शन के लिए वसूली की जा रही है — उसकी जांच की जाए।
    4. इलाके के बिल्डरों को कैसे और कितना पानी दिया जा रहा है, इसकी गहराई से जांच हो।
    5. आरे कॉलोनी यूनिट 32 का पंप शुरू किया जाए ताकि यूनिट 31 और 32 के नागरिकों को राहत मिल सके।
    6. साईबाबा कॉम्प्लेक्स की साई सदन इमारत में चल रही पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

    👥 मोर्चे में किसने लिया हिस्सा?

    इस आंदोलन में कई स्थानीय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें—
    पूर्व नगरसेविका सुगंधा शेट्टी, दीपक परब, निलाक्षी भाबळ, विनायक ताटे, स्वाती शिर्के, सचिन सावंत, सुभाष जाधव, विजय मांजळकर, कुबेर लाड, शांताराम सावंत, विरेंद्र सोनावने और वर्षा पवार समेत बड़ी संख्या में शिवसैनिक, युवासेना और महिला सेना की कार्यकर्ता मौजूद थीं।

    गोकुलधाम, बंगाली कंपाउंड, कन्यापाड़ा, साईबाबा कॉम्प्लेक्स, आरे कॉलोनी और बंजारी पाड़ा जैसे इलाकों के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

    🏛️ शिवसेना (UBT) का संदेश प्रशासन को

    संदीप गाढवे ने मीडिया से बातचीत में बताया

    “अब BMC को भी समझना चाहिए कि पानी कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि नागरिकों का हक है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो शिवसेना (UBT) सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।”


    ❓ FAQ सेक्शन

    Q1. गोरगांव में उद्धव सेना का बाल्टी मोर्चा क्यों निकाला गया?
    👉 पानी की किल्लत और कम दबाव से पानी आने की समस्या के विरोध में यह मोर्चा आयोजित किया गया।

    Q2. इस आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
    👉 प्रभाग 52 के शाखा प्रमुख संदीप गाढवे ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

    Q3. नागरिकों की मुख्य मांग क्या है?
    👉 नियमित और पर्याप्त पानी आपूर्ति शुरू करना और दलालों द्वारा नल कनेक्शन में की जा रही वसूली की जांच करना।

    Q4. प्रशासन से कौन मिला?
    👉 एक शिष्टमंडल ने सहायक आयुक्त अजय पाटणे से मुलाकात की और समस्या पर चर्चा की।