Category: Corruption

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  • मुंबई का P/North वार्ड: बढ़ते तापमान और घटती हरियाली का संकट

    मुंबई का P/North वार्ड: बढ़ते तापमान और घटती हरियाली का संकट

    मुंबई का पी/नॉर्थ वार्ड तेजी से गर्म हो रहा है। 2015 से 2024 के बीच तापमान 5°C से ज्यादा बढ़ गया है। अवैध निर्माण और हरियाली की कमी ने संकट गहरा दिया है।

    📍 P/North वार्ड कहाँ है और क्यों अहम है?

    मुंबई का पी/नॉर्थ वार्ड (P/North Ward) 46.67 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसके पूर्व में संजय गांधी नेशनल पार्क और पश्चिम में मढ़-मनोरी के मैंग्रोव जंगल हैं। इसमें मलाड, मालवनी, माढ़ और अक्सा जैसे प्रमुख इलाके आते हैं।
    यह मुंबई का सबसे ज्यादा आबादी वाला वार्ड है। 13 वर्ष पहले यानी 2011 की जनगणना के अनुसार यहां करीब 10 लाख लोगों की आबादी रिकार्ड की गई थी। इतनी घनी आबादी के बीच हर डिग्री तापमान का बढ़ना लाखों लोगों को प्रभावित करता है। Mumbai’s P/North ward: The crisis of rising temperatures and decreasing greenery

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    🌳 हरियाली के बावजूद बढ़ता तापमान

    मानचित्र पर यह इलाका हरा-भरा दिखता है, लेकिन हकीकत अलग है।

    • 2015 से 2024 के बीच तापमान 5°C से ज्यादा बढ़ा
    • 42.24°C (2015) से बढ़कर 50°C (2024) तक पहुंच गया
    • सबसे ज्यादा असर झोपड़पट्टी और घनी आबादी वाले इलाकों में
    • कंक्रीट, डामर और टिन की छतों ने प्राकृतिक ठंडक देने वाले पेड़ों और खुली जमीन की जगह ले ली
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    🔥 सबसे ज्यादा खतरे में कौन हैं?

    पी/नॉर्थ वार्ड की अनौपचारिक बस्तियां (झोपड़पट्टियां) इस संकट का सबसे बड़ा शिकार हैं।

    • 26% घरों की छतें एस्बेस्टस और टिन की, जो तेजी से गर्म होती हैं
    • 25% घरों में अब भी पारंपरिक ईंधन (लकड़ी आदि) से खाना बनता है
    • केवल 25% लोग ही अपने घरों के मालिक, बाकी किरायेदार हैं
    • स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली और साफ पानी तक सीमित पहुंच

    👉 इन सभी कारणों से यह इलाका जलवायु संकट (Climate Crisis) का हॉटस्पॉट बन चुका है।

    📊 आंकड़े और सैटेलाइट डेटा क्या कहते हैं?

    • 60% इलाके का तापमान 5°C से ज्यादा बढ़ा
    • दत्तवाडी, महाराष्ट्र नगर और कलेक्टर कंपाउंड सबसे गर्म इलाकों में शामिल
    • मैंग्रोव इलाकों में मलबा डालकर और अवैध निर्माण कर ठंडी और नम जमीन को गर्म और बंजर बनाया गया

    📌 निष्कर्ष: जितनी तेजी से हरियाली और खुली जगहें कम हो रही हैं, उतनी ही तेजी से यहां की जमीन गर्म हो रही है। Mumbai’s P/North ward: The crisis of rising temperatures and decreasing greenery

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    ✅ समाधान: मुंबई को क्या कदम उठाने चाहिए?

    1. प्राकृतिक इलाकों की सुरक्षा

    • मैंग्रोव और जंगलों की कानूनी सुरक्षा और पुनर्वनीकरण
    • अवैध निर्माण और मलबा डालने पर कड़ी रोकथाम

    2. गर्मी-संवेदनशील विकास

    • नई इमारतों और SRA प्रोजेक्ट्स में पेड़, वेंटिलेशन और ग्रीन स्पेस अनिवार्य
    • झोपड़पट्टियों में रिफ्लेक्टिव पेंट और शेड नेट्स का इस्तेमाल

    3. कमजोर आबादी की सुरक्षा

    • रिफ्लेक्टिव रूफ और ठंडी छतें सभी घरों में लागू हों
    • स्वच्छ पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं की 100% कवरेज
    • हीटवेव जागरूकता अभियान, खासकर महिलाओं के लिए

    4. पेड़ और हरियाली बढ़ाना

    • सड़क किनारे, फुटपाथ और सरकारी जमीन पर पेड़ लगाना
    • छायादार पैदल मार्ग और साइकिल ट्रैक विकसित करना
  • मुंबई के दहिसर में मिलावटखोरी के खिलाफ फूड एंड ड्रग्स की कार्रवाई

    मुंबई के दहिसर में मिलावटखोरी के खिलाफ फूड एंड ड्रग्स की कार्रवाई

    मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 12 की टीम ने दहिसर पूर्व इलाके में फूड एंड ड्रग्स ऑफिसर की मदद से छापामारी कर 39,917 रुपये के माल जब्त किया है। गिरफ्तार 38 वर्षीय आरोपी अमूल, गोकुल और नंदिनी दूध में मिलावटखोरी कर बिक्री कर रहा था।

    मुंबई: दहिसर (पूर्व), रूम नं. 07, मनुभाई चाळ, एस.पी.रोड, घरटनपाडा, नितीन इंडस्ट्रीज के कमरे में तडके सुबह के लगभग 5 बजे जब मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 12 की टीम ने छापेमारी की तो वहां 38 वर्षीय सैदुल नरसिम्हा कावेरी नामक व्यक्ति अमूल, गोकुल और नंदिनी ब्रांड के दूध के पैकेट में अस्वच्छ पानी मिला कर पैकिंग करता हुआ पकड़ा गया। इसकी गुप्त सूचना पहले से मिली थी इसलिए पुलिस ने मुंबई शहर की अन्न सुरक्षा अधिकारी श्रीमती अर्चना रामभाऊ वानरे को भी साथ ले गई थी। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह दहिसर पश्चिम के आईसी कॉलोनी झोपडपट्टी इलाके और चाय की टपरी चलाने वालों को यह मिलावटी दूध का पैकेट वितरित करता था। Food and Drugs action against adulteration in Dahisar, Mumbai

    दूध में मिलावटखोरी

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    दूध हमारे जीवन का इतना महत्वपूर्ण आहार है। जिसे हमारे शारिरीक पोषक तत्व के लिए इस्तेमाल करते है। खासकर हम अपने बच्चों को एक भरोसे के आधार पर कंपनी के ब्रांड को देखते हुए खरीद कर पिला देते हैं। ऐसे में मिलावट खोरी के कारण बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कितना महंगा पड़ सकता है। इस बारे में सोचना भी कोई नही चाहेगा। लेकिन कुछ लोग मुनाफे के चक्कर में मिलावटी दूध बेचकर हमारे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे ही एक सूचना पर मुंबई क्राईम ब्रांच युनिट 12 की टीम ने सतर्कता दिखाई और सीधे फूड एंड ड्रग्स ऑफिसर को साथ लेकर छापामारी कर दी।

    पुलिस ने क्या कहा?

    दहिसर (पूर्व) क्राईम ब्रांच युनिट 12 के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सचिन गवस ने बताया कि युनिट की महिला पुलिस हवलदार पडवळ को इसकी गुप्त सूचना मिली थी। उन्होंने बताया, कि हमने अन्न व औषध प्रशासन से संपर्क किया और मुंबई शहर अन्न सुरक्षा अधिकारी के साथ सहायक पुलिस निरीक्षक रासकर, पुलिस हवलदार बिचकर, गोमे, गोरूले, महिला पुलिस हवलदार पडवळ, पुलिस सिपाही के साथ एक टीम बनाकर घटना स्थल पर छापामारी की जहां से आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा गया। घटना स्थल से (1) अमुल, गोकुळ व नंदिनी नामांकीत कंपनी के 29,917/- रू किमत के कुल 488 लिटर दुध, (2) अमुल ताजा, अमुल गोल्ड व अमुल बफेलो के 1350 बनावट खाली प्लास्टिक की थैलियां (3) दूध में मिलावटखोरी के लिए आवश्यक साधन सामुग्री (4) मोबाईल फोन तकरिबन 10,000/- रू कुल मिलाकर लगभग 39,917/- रुपये का माल जब्त किया गया।

    पहले भी यही करता था और हुआ था गिरफ्तार

    पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ दहिसर पुलिस थाने में पहले से इसी तरह का अपराध दर्ज है। दहिसर पुलिस ठाणे गुरक्र. 175/2021 भारतीय दंड संहिता की धारा  272, 482, 486, 420, 468, 34 एवं अन्न सुरक्षा व मानदे अधिनियम 2006 व नियमन 2011 की धारा 26, 27, 31 में भी इसी तरह के अपराध में इसकी गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस ने बताया कि फिलहाल वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में आरोपी को दहिसर पुलिस थाने के हवाले कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 274, 345(3), 347(1), 318(4), 336(3), 3(5) के साथ-साथ  26, 27, 31, शिक्षा कलम 59 व 63 अन्न सुरक्षा व मानदे कायदा 2006 नियम व नियमन 2011 के तहत गिरफ्तार किया गया है। मामले की और अधिक तहकीकात दहिसर पुलिस कर रही है। Food and Drugs action against adulteration in Dahisar, Mumbai

  • अवैध निर्माण पर ईडी का शिकंजा, पूर्व आयुक्त समेत नगरसेवक और बिल्डर गिरफ्तार

    अवैध निर्माण पर ईडी का शिकंजा, पूर्व आयुक्त समेत नगरसेवक और बिल्डर गिरफ्तार

    वसई-विरार शहर महानगर पालिका के पूर्व आयुक्त एवं महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दादा भुसे के रिश्तेदार आईएएस अनिल कुमार पवार के साथ कई बड़े लोगों को ईडी ने गैरकानूनी काला धन को लेकर धन शोधन (Money Laundering) के मामले में गिरफ्तार किया है।

    डिजिटल डेस्क
    महाराष्ट्र/ पालघर:
    महाराष्ट्र के पालघर जिले में वसई-विरार महानगर पालिका (VVMC) अंतर्गत एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व आयुक्त आईएएस अनिल पवार, बहुजन विकास आघाडी के पूर्व नगरसेवक एवं बिल्डर सीताराम गुप्ता के साथ बिल्डर अरुण गुप्ता और निलंबित उप नगर नियोजन अधिकारी वाईएस रेड्डी को गिरफ्तार किया है। ED tightens its grip on illegal construction, corporator and builder arrested including former commissioner

    क्या है मामला?

    जांच में सामने आया कि कुछ बिल्डरों ने मुंबई के बाहरी इलाके में स्थित ट्विन सिटी वसई-विरार में 41 अवैध इमारतों का निर्माण किया गया था। इन अवैध इमारतों में भोली भाली जनता और निवेशकों को फ्लैट बेच दिए गए थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ये सभी अवैध इमारतों को प्रशासन ने तोड़कर ध्वस्त कर दिया। फलस्वरूप सभी खरीददार बेघर हो गए। महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दादा भुसे के रिश्तेदार आईएएस अनिल कुमार पवार ने हाल ही में एकनाथ शिंदे की सरकार में वसई-विरार महानगर पालिका के कमिश्नर के रुप में पदभार संभाला था।

    ईडी ने क्या कहा?

    ईडी अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, बुधवार 13 अगस्त को सभी आरोपियों को एक साथ हिरासत में लेकर गुरुवार को मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां सभी आरोपियों से पूछताछ और जांच पड़ताल के लिए रिमांड की मांग की गई और कोर्ट ने 20 अगस्त तक की कस्टडी सुनाई है। ED tightens its grip on illegal construction, corporator and builder arrested including former commissioner

    शिक्षा मंत्री दादा भुसे के रिश्तेदार

    प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री रहते महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दादा भुसे के रिश्तेदार आईएएस अनिल कुमार पवार को ठाणे का अपर जिला कलेक्टर और वसई-विरार महानगर पालिका का आयुक्त नियुक्त किया गया था। वसई-विरार में अनधिकृत निर्माण घोटाला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाराजगी जताई और उन्हें पद से हटा दिया। ED tightens its grip on illegal construction, corporator and builder arrested including former commissioner

    16 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी

    पिछले महीने महाराष्ट्र के वसई-विरार शहर में ईडी ने इसी कथित अवैध निर्माण सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। यह छापेमारी वसई-विरार महानगरपालिका के नगर रचना विभाग के उपसंचालक वाईएस रेड्डी से जुड़े मामले में आर्किटेक्ट, इंजीनियर और एजेंटों के ठिकानों पर की गई थी।

    60 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा

    ईडी को इस गोरखधंधे से जुड़े वित्तीय लेन-देन, कैश रुपये और संपत्ति की जानकारी मिली है। जांच एजेंसी को शक है कि यह सिंडिकेट करीब 60 एकड़ सरकारी जमीन पर 41 अवैध रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों के निर्माण में शामिल है। बताया जा रहा है कि ये निर्माण फर्जी दस्तावेज और भ्रष्टाचार के दम पर किए गए थे। अवैध निर्माण के लिए जरूरी फाइलों को मंजूरी दिलाने के बदले भारी भरकम रिश्वत दी गई थी। यह लेन-देन आर्किटेक्ट्स और एजेंटों के माध्यम से किया गया था। ED tightens its grip on illegal construction, corporator and builder arrested including former commissioner

  • Bigg Boss के नाम पर 10 लाख रुपये की ठगी, मुंबई पुलिस ने किया FIR दर्ज

    Bigg Boss के नाम पर 10 लाख रुपये की ठगी, मुंबई पुलिस ने किया FIR दर्ज

    Bigg Boss 19 सीजन विवादों में घिर गया है। एक डॉक्टर से शो का हिस्सा बनने को लेकर 10 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगा है। मुंबई पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने के बाद इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।

    डिजिटल डेस्क
    मुंबई:
    देश का सबसे चर्चित टेलिविजन रियलिटी शो बिग बॉस सीज़न 19 शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया है। हालांकि फैंस शो को लेकर बेहद एक्साइटेड नजर आ रहे हैं, लेकिन शुरू होने से पहले ही शो में भाग लेने को लेकर पैसों के लेन-देन और ठगी का मामला प्रकाश में आ रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो पिछले 2 दिनों से वायरल हो रहा है। इसमें एक डॉक्टर ने बिग बॉस कंटेस्टेंट सिलेक्शन को लेकर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने दावा किया, कि बिग बॉस में आने के नाम पर उनसे पैसे लेकर धोखा दिया गया है।

    बिग बॉस पर लगे आरोप

    बिग बॉस में कंटेस्टेंट बनकर भेजने के नाम पर जिस व्यक्ति ने ठगी का आरोप लगाया है वह मध्य प्रदेश के भोपाल के रहने वाले पेशे से डॉक्टर हैं। डॉक्टर अभिनीत गुप्ता पेशे से एक स्किन स्पेशलिस्ट यानी डर्माटॉलॉजिस्ट हैं। 10 लाख रुपये की धोखाधड़ी के बाद उन्होंने पहले भोपाल में शिकायत दर्ज कराई और उसके बाद मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करवाया।

    पहले की थी 1 करोड़ रुपये की मांग

    हाल ही में मुंबई के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होकर भोपाल के रहने वाले हैं डॉक्टर अभिनीत गुप्ता ने इस पूरी ठगी का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ये मामला साल 2022 का है। उस दौरान किसी करण सिंह नामक व्यक्ति का उन्हें फोन आया था और उसने बिग बॉस में एंट्री दिलाने के लिए उन्हें लालच दिया था। उस दौरान करण सिंह ने उन्हें कहा था कि बिग बॉस के मेकर्स से उनकी अच्छी पहचान है वो उनकी एंट्री बिग बॉस में करा देगा लेकिन उसके लिए 1 करोड़ रुपये देने होंगे।

    60 लाख में सौदा तय 10 लाख की ठगी

    कॉन्फ़्रेंस के दौरान डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने 1 करोड़ रुपये देने से मना किया, तो सिंह ने उनसे 60 लाख रुपयों की मांग करते हुए उनकी मीटिंग एंडेमोल कंपनी के अध्यक्ष के साथ तय कर दी। मुंबई में बिकेसी स्थित बिग बॉस के ऑफिस में मिटिंग के दौरान कंपनी के सीईओ ने भी करण के बैंक अकाउंट में 10 लाख रुपयों का भुगतान करने को कहा, जबकि डॉक्टर ने बिग बॉस के बैंक अकाउंट में पैसा जमा करना चाहते थे तो, कंपनी के लोगों ने बताया कि उन्हें लोगों को पैसे देने पडते हैं जब कंपनी पेमेंट कर देगी तो उसका भुगतान आप को हो जाएगा। इस वजह से उन्होंने सिंह के बैंक अकाउंट में 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए। यह पूरी प्रक्रिया बिग बॉस सीज़न 16 के लिए चल रहा था। लेकिन सीजन 16 के कंटेस्टेंट्स की लिस्ट जब सामने आई तो उसमें उनका नाम नहीं था।

    लगातार देता रहा झांसा

    अभिनीत ने आगे बताते हुए कहा कि जब मैंने करण से पूछा कि लिस्ट में मेरा नाम क्यों नहीं है? तो उसने कहा कि वाइल्ड कार्ड के तौर पर आपकी एंट्री होगी, लेकिन सीजन खत्म हो गया और मेरी एंट्री नहीं हुई। इसके बाद जब मैंने दोबारा पूछा तो वो मुझे फिर से गुमराह करता रहा और उसने कहा कि 17वें सीजन में एंट्री होगी। 17वें सीजन के खत्म होने के बाद भी एंट्री नहीं हुई तब मैंने उससे पैसे वापस मांगे तो उसने नहीं दिए। मैंने पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज की। आप को बता दें, कि साल 2025 में सीजन 19वां आ रहा है। जो 24 अगस्त से जियो हॉटस्टार पर और कलर्स पर देखने को मिलेगा। उससे पहले ही शो को लेकर पैसों की लेनदेन और ठगी के कारण विवादित चर्चा में बना हुआ है।

  • कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    कांग्रेस के सामने संसद में मोदी सरकार की बोलती हुई बंद।

    दुनिया की निगाहों में भारत की गवाही और भारत के बीच हुए लगातार आतंकी हमलों पर विदेश नीति और संसद में खड़े होकर छपरी और टपरी जैसे भाषण कि “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” और पाकिस्तानी हमले पर ट्रम्प का सीजफायर। भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत ही नहीं दे पा रहा।

    डिजिटल डेस्क
    नई दिल्ली:
    संसद का मानसून सत्र चल रहा। बिहार में वोट काटने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा। रोहिंग्या बांग्लादेश और नेपाली के नाम पर लाखों नाम काट डाले गए। blo लोगों के घर जाकर सत्यापन करने की जगह ऑफिस में बैठकर फॉर्म में नाम लिखकर खुद ही वोटर के हस्ताक्षर कर रहे। विपक्षी उनके वोटरों के नाम काटने के आरोप लगाए। पत्रकार अजीत अंजुम ने मोबाइल द्वारा चुनाव आयोग के खेल को सबूत सहित सार्वजनिक किया तो उनपर एफआईआर कर दी गई यानी सच दिखाने का दंड दिया गया।

    लोकतंत्र का हिस्सा

    संसद में ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में सत्ता विपक्ष में वाक्युद्ध चल ही रहा था, कि सीजफायर की भी बात हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 25 बार कहे गये वक्तव्य, कि “हमने ट्रेड की धमकी देकर युद्ध रुकवा दी।” पर विपक्ष ने हमला बोला। यही जीवंत लोकतंत्र है। ट्रंप ने खुद अपने एक्स हैंडल पर शाम 5.35 पर सीजफायर की घोषणा की। भारत की तरफ से नहीं। संसद में सत्ता ने उत्तर नहीं दिया। विपक्ष मांग करता रहा कि पीएम आकर कहें कि ट्रंप ने वॉर नहीं रुकवाई। रक्षामंत्री ने कहा पीओके लेना हमारा मकसद नहीं फिर भाजपा ने बार बार कांग्रेस और नेहरू पर आरोप क्यों लगाए?

    संसद में होती है गुंडो की भाषा

    पहलगाम में कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी आए और धर्म पूछकर मारा जिसके प्रमाण नहीं। संसद के मानसून सत्र के समय ही  सेना ने घोषित किया कि मुठभेड़ में सारे आतंकी मारे गए। इससे पूर्व जिन कथित आतंकियों के स्क्रेच जारी किए गए गवाह ने उसे गलत कहा। अहम बात यह कि सत्ता के दंभ में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पहले मुझसे निपटो फिर मोदीजी का नाम लो।” क्या ऐसे स्पीकर और राज्यसभा के सभापति सदन की मर्यादा बचाने की कोशिश करेंगे? “मुझसे निपट लो।” क्यों भाई पीएम हो क्या? ऐसी भाषा किसी गली का गुंडा या फिर माफिया ही बोल सकता है। लेकिन विपक्ष को टोकने वाले सत्ता की असंसदीय भाषा की अनसुनी करते हुए पद की गरिमा खो चुके हैं।

    जवाब देने से क्यों भागती है मोदी सरकार?

    मोदी सरकार वर्तमान में अपने से संबंधित बात पर चर्चा करने से भागती है। मोदी दिल्ली में ही है लेकिन सदन में आ नहीं सकते। ऐसा मणिपुर मामले में किया था। अंतिम समय में आए भी तो क्या कुछ कहा दुनिया जानती है। प्रधानमंत्री होने के नाते कभी मणिपुर गए ही नहीं। इसी तरह उरी, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम भी नहीं गए। यह सही है कि पहलगाम में आतंकी हमला हुआ। 27 भारतीयों को जान गंवानी पड़ी। विपक्ष सवाल पूछता रहा, सवा सौ किलोमीटर दूर पाकिस्तानी आतंकवादी कैसे आए? लोगों से कथित रूप से धर्म पूछा। पेंट खुलवाकर देखा कौन सा धर्म है। बीजेपी के मंत्रियों में तनिक भी विधवा हुई महिलाओं के प्रति सम्मान भाव नहीं देखा गया। बड़ी बेशर्मी से कहा गया, महिलाओं में वीरांगना भाव नहीं था। एक ने तो कर्नल सोफिया के लिए आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। यही है इनका सेना के प्रति सम्मान भाव।

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    कांग्रेस पर सवाल उठाने का नतीजा

    अब सेशन में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल जवाब हो रहे हैं। इसी बीच उन दरिंदे आतंकवादियों को सेना द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने की बात कही गई। यहां टाइमिंग का सवाल जरूर उठता है। विपक्ष के प्रधान की पुलवामा में उपयुक्त आरडीएक्स कहां से आया सत्ता के पास कोई उत्तर है ही नहीं। कांग्रेस फोबिया से पीड़ित बीजेपी सरकार ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया। मुंबई आतंकी हमले का आरोप लगाकर अपने आरोप ढकने और जायज़ ठहराने की नाकाम कोशिश की। जिस पर प्रियंका गांधी ने आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया। मुंबई हमले के सारे आतंकियों को भून दिया गया। एक जीवित आतंकी कसाब को पकड़कर फांसी दी गई। जिसे दुनिया ने देखा और भारत के साथ पूरी दुनिया खड़ी दिखाई दी। आतंकवाद की सर्वत्र आलोचना की गई।

    इस्तीफे देने का दायित्व

    यही नहीं कांग्रेस में दायित्वबोध जवाबदेही होने के कारण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और गृहमंत्री ने खुद को दोषी समझकर इस्तीफा दे दिया। लेकिन यह भूल गई प्रियंका कि बीजेपी में दायित्व बोध जवाबदेही और इस्तीफा देने की समझ है ही नही। अगर  नैतिकता होती तो मणिपुर मामले में इस्तीफा दिया गया होता। उरी, पठानकोट और पुलवामा की असफलता पर इस्तीफे की झड़ी लग गई होती। प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन से इस्तीफा मांगने वाले क्यों नहीं अपने गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से इस्तीफा देने की मांग करते?

    सरकार ने दिया सेना को धोखा

    इस्तीफा तो विदेश मंत्री को भी देना चाहिए था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के पूर्व पाकिस्तान को सूचना दे दी, जिससे हमारे विमान मार गिराए गए। पीएम मोदी से इस गलत बयानी और प्रचार पर इस्तीफा मांगते कि उन्होंने दावा किया था सेना को खुली छूट दी है समय और स्थान सेना तय करे जबकि फौजी अधिकारियों ने बार बार मोदी के दावे की पोल खोली है। यही नहीं एयर मार्शल भी कह चुके हैं कि “जब समय पर सप्लाई नहीं कर सकते तो वादा क्यों करते हो?”

    कांग्रेस और मोदी में अंतर?

    आज तक सत्ता का कोई भी उन मारे गए पर्यटकों के घर जाने की जरूरत नहीं समझी जब कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जाकर उनके जख्मों पर मरहम लगा चुके हैं। राहुल गांधी की राजनीति सर्व ग्राही है। इसीलिए वे मणिपुर जाकर पीड़ितों के ज़ख्म सहला चुके हैं उनके विपरीत पीएम मोदी शहीदों के नाम पर वोट ही नहीं मांगे बल्कि कानून नियम के विरुद्ध सेना की वर्दी पहनकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय लेते हुए अपनी फोटो डालकर पोस्टर चिपकवा चुके हैं। पाकिस्तान के दो टुकड़े करने और 95 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश इंदिरा गांधी ने कभी भी नहीं की।

    टैक्स का बोझ सुविधा के नाम पर भ्रष्टाचार

    दरअसल हिंदू-मुस्लिम कर चुनाव आयोग द्वारा छल कपट और गलत काम कराकर चुनाव जीतना ही मोदी का एकमात्र लक्ष्य है। फर्जी वोटर बढ़वाकर हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली चुनाव जीतने के बाद बिहार में वोटरों को बाहर करने का खेल चुनाव आयोग खेल रहा है। मोदी सरकार अपने 11 साल के शासन में किए गए कार्य पर वोट मांगने की हिम्मत कर ही नहीं सकते। क्योंकि किसान, मजदूर, युवाओं, छात्रों, गृहिणियों के जीवन को दूभर बना दिया है। टैक्स का इतना भार दुनिया के किसी भी देश में नहीं है। सुविधा के नाम पर सर्वत्र भ्रष्टाचार ही हुआ है।

    प्रशासन का गलत इस्तेमाल

    सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे ताकि गरीबों के बच्चे पढ़ न सकें। परीक्षा में अनियमितता के विरोध में छात्र हितों के खातिर जब शिक्षक दिल्ली में रैली कर रहे थे तब पुलिस द्वारा शिक्षकों को घसीट कर बस में जबरन बिठाकर दूर ले जाकर छोड़ा गया। इस कार्य में दिल्ली पुलिस सिद्धहस्त है, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी से न्याय मांगने महिला पहलवान जब दिल्ली के जंतर मंतर पर रैली निकाले हुए धरने पर बैठी थी तब भी अमित शाह के आदेश पर उन्हें घसीटा और बसों में जबरन लादकर दूर ले जाकर छोड़ा गया था।

    विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने दावा?

    दिल्ली पुलिस वही है जो हाईकोर्ट के जस्टिस वर्मा के घर आग लगने से जली झुलसी नोटो की गाड़ियों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कर सकी। जांच करना तो बड़ी दूर की बात, जिस राष्ट्र में शिक्षकों को अपमानित किया जाए। उन्हें घसीटकर बसों में ठूंसा जाए। प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर चालीस पचास लाख रुपयों में बेचा जाए। सड़कें पहली ही बरसात में बहने लगें। पुल बनते समय या उदघाटन के पहले ही जल समाधि लेने लगें। ये सारे करतूतें भ्रष्टाचार सामने दिखता ही नहीं बल्कि चीख-चीख कर बोलता भी है। उस देश को वहां की सरकार जो विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था होने का दावा करे, जहां की अस्सी करोड़ जनता को गरीबी रेखा से नीचे रखने का षडयंत्र रचा जाए, क्या कहा जा सकता है?

    विदेशनीति पर सवाल?

    ऐसी विदेशनीति को क्या कहा जाए कि अरबों रुपए जनता के पैसे फूंककर विश्व की यात्रा की जाए। लेकिन पाकिस्तान युद्ध के समय दुनिया का एक भी देश खुलकर भारत के साथ नहीं आए। अमेरिका का राष्ट्रपति धमकी देता रहे। राष्ट्र को अपमानित करता रहे लेकिन सत्ता में हिम्मत नहीं जो कह सके ट्रंप झूठ बोल रहा है। उसी ट्रंप ने रूस से तेल खरीदना बंद करा दे जबकि हमारा पड़ोसी चीन अमेरिका के आंखों में आँखें डालकर जवाब देता हो। सबसे विश्वसनीय देश रूस को भी दूर कर दे ऐसी विदेशनीति जो अमेरिका की गोद में बैठी हो क्या कहा जाएगा?

    दुनिया की निगाहों में भारत?

    भारत ने डेलिगेशन भेजे बताने के लिए कि पाकिस्तान ने पहलगाम में आतंकी हमला करके 27 बेकसूरों को गोली मारकर हत्या कर दी, जिसके लिए जीरो टॉलरेंस अपनाकर हमने पाकिस्तानी आतंकवादियों के अड्डों पर सीमित हमले कर सौ आतंकियों को मार गिराया। लेकिन कोई राष्ट्र यकीन नहीं कर रहा। क्योंकि हमारे पास कोई सबूत नहीं जैसा कि मणिशंकर ने कहा है जिसका अर्थ दुनिया समझती है भारत ने स्वार्थवश खुद हमला कराया होगा जिससे सबूत नहीं दे पा रहा। मुंबई हमले में कसाब को जिंदा सबूत दिखाया गया था। यानी पाकिस्तानी आतंकवाद की गुहार कोई सुनने के लिए तैयार नहीं उलटे ट्रंप हम पर 25% टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 100% पेनल्टी लगाने की घोषणा कर दी। संसद में भले दावा किया गया हो कि पाकिस्तानी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। दुनिया की निगाहों में भारत झूठ बोल रहा।

  • भ्रष्ट आचरण की पहचान है मनपा का आर/ दक्षिण विभाग…!

    भ्रष्ट आचरण की पहचान है मनपा का आर/ दक्षिण विभाग…!

    • कौन करेगा गलत कार्यों की जांच?
    • जल विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने दुकान मालिक पर मेहरबानी कर भ्रष्टाचार पूर्वक जोड़ा नल कनेक्शन।
    • क्या उच्चअधिकारी करेंगे पानी पुरवठा विभाग की गैर कानूनी जल जोड़नी की जाँच?

    मुंबई: भ्रष्टाचार का घुन मनपा को खाने लगा है। लापरवाह अफसर अपने कर्तव्य निर्वहन के स्थान पर गैरकानूनी तरीके से जल विभाग द्वारा नल कनेक्शन दिया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी अछूता नहीं बचा, जिसने टी एंड कोल्ड्रिंक के नाम पर चल रहे शॉप को 394 का लाइसेंस देकर अपने भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण पेश कर दिया। जबकि टी की टपरी का स्टॉल फुटपाथ पर है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 394 का लाइसेंस किसकी अथॉरिटी पर दिया गया? मनपा आयुक्त या आर/ दक्षिण विभाग के डीएमसी या फिर MOH, वैद्यकीय आरोग्य अधिकारी की अथॉरिटी का इस्तेमाल हुआ है कुछ पता नही। R/South department of BMC is the identity of corrupt practices

    मनपा ने खोया अपना लक्ष्य

    यह सवाल आम जनता के बीच यक्ष प्रश्न की तरह मुहं बाये खड़ा है। जिस मनपा का गठन मुंबईकरों की सुविधा बढ़ाने के लिए लिए हुआ था। वहीं “असुविधा के लिए खेद है ” कि तर्ज पर मनपा अपना लक्ष्य खो चुकी है। एक ऐसा ही भ्रष्टाचार का मामला शॉप नियर आकांक्षा बिल्डिंग त्रिकम दास रोड पर 14 अगस्त 1993 में मालिक अब्दुल रहमान द्वारा 15/10 के झोपड़े को 90000 में सेवालाल रामलाल रामदेव मौर्या को रजिस्ट्री की गई। 1976 के सेंसस में भी 15गुने दस फीट दर्ज किया गया।

    कभी कुछ तो कहीं कुछ

    यहां जल विभाग द्वारा पानी के कनेक्शन की अनुमति 25/09/2017 को उसी पते पर दी गई है। इसकी जानकारी RTI के माध्यम से उजागर हुआ। जबकि उपर्युक्त व्यक्ति को बिजली का कनेक्शन नियर आकांक्षा आर्केड के पते पर दिया गया। जो आकांक्षा आर्केड सीएचएस वडा पाव त्रिकम दास रोड के पते का है। फर्जी तरीके से आकांक्षा सोसायटी द्वारा मौर्या फास्ट-फूड टी एंड कोल्ड्रिंक्स का प्रीमाइस में होने का पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण वार्ड को 12/03/2018 को लिखित दिया गया। बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 13/04/2018 को मौर्या फास्ट फूड को लेंथ ऑफ फ्रेंच 6.5 मीटर बताया गया है।

    लायसेंस विभाग की अनदेखी

    यह पत्र बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक को चाय बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को दो वर्षों के लिए दिया गया लेकिन शॉप आकांक्षा आर्केड का कैसे लिखा गया? जबकि शॉप आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग से अलग है। गुमास्ता लाइसेंस मौर्या फास्ट फूड सेंटर के नाम पर वड़ा पाव दर्ज है। सवाल यह है कि एक ही व्यक्ति को वड़ा पाव का लाइट आकांक्षा आर्केड और एप्लिकेशन फॉर्म में नियर आकांक्षा आर्केड कैसे लिखा जा सकता है? वड़ा पाव का लाइट बिल आकांक्षा आर्केड बिल्डिंग का है तो 394 का लाइसेंस मौर्या टी एंड कोल्ड्रिंक शॉप को कैसे सहमति दी गयी?

    कैसे मिला NOC ?

    वहीं नेचर ऑफ बिजनेस में सिर्फ चाय की दुकान है तो वड़ा पाव कैसे बिक रहा है? जब सेंसस में 150 वर्गफुट है तो गुमास्ता में 120 फूट कैसे है? जबकि झोपड़े की रजिस्ट्री में 150 फिट है। फार्म p आकांक्षा आर्केड लिखा है तो B/F विभाग की NOC जो केवल चाल में लिया जाता है तो बिल्डिंग में कैसे NOC जारी किया गया? आकांक्षा बिल्डिंग सेक्रेटरी का पत्र बीएमसी आर/ दक्षिण को 12/03/2018 में लिखा। लेकिन बीएमसी रोड ओपनिंग परमिशन 6.5 मीटर फूट लेंथ ऑफ फ्रेंच बीएमसी स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिर्फ टी एंड कोल्ड्रिंक बेचने का लाइसेंस 28/12/2017 को दिया गया।

    एंटी करप्शन से जांच का अनुरोध

    यहां पर कागजात में घपलेबाजी की गई है। लेकिन शिकायत पत्र पर कोई जांच नहीं की गई क्यों?
    स्पष्ट है बीएमसी की मिलीभगत से भ्रष्टाचार किया गया है। ज्ञात हो कि बीएमसी ने चंद सिक्के घूस लेकर कॉमर्शियल वाटर कनेक्शन पास कर दिया जिसका संज्ञान बीएमसी नही ले रही। डीएमसी और वार्ड ऑफिसर की मिलीभगत से धोख़ाधड़ी की गई है। बीएमसी स्वास्थ विभाग के द्वारा 394 एवं जल विभाग द्वारा नल कनेक्शन की अनियमितताओं के भ्रष्टाचार की जांच एंटी curruption विभाग से किये जाने का अनुरोध है। R/South department of BMC is the identity of corrupt practices

  • 1 करोड़ की फिरौती मामले में 6 लोगों पर मुकदमा दर्ज हाई प्रोफाइल डॉली गिरफ्तार

    1 करोड़ की फिरौती मामले में 6 लोगों पर मुकदमा दर्ज हाई प्रोफाइल डॉली गिरफ्तार

    मुंबई में एक महिला ने अपने बैंक कर्मचारी दोस्तों के साथ मिलकर अपने एक्स-ब्वॉयफ्रेंड से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। इसमें निजी डेटा की चोरी कर धमकाया गया, नौकरी छीन ली गई और बदनाम करने की कोशिश से परेशान पीड़ित जब कोर्ट पहुंचा। तब जाकर पुलिस ने किया 6 लोगों पर केस दर्ज.. Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested

    मुंबई: कांदीवली पश्चिम के चारकोप इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने उसके एक्स ब्वॉयफ्रेंड से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। आरोपी महिला ने धमकी दी कि अगर पैसा नहीं दिए तो वह उसे जेल भिजवा देगी। पीड़ित ने डर के साये में कई दिनों तक यह सब झेला, लेकिन आखिरकार हिम्मत जुटाकर पुलिस को आप बीती सुनाई। लेकिन पुलिस ने भी जब फरियाद नहीं सूनी तब उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार पुलिस ने भरोरे को तार तार कर मानसिक प्रताड़ित कर रही ब्लैकमेलर एक्स गर्लफ्रेंड को गिरफ्तार कर लिया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested

    बदनाम कर जेल में सड़ाने की धमकी

    दरअसल, चारकोप पुलिस ने डॉली कोटक नाम की एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली महिला को गिरफ्तार किया है। उस पर अपने एक्स-बॉयफ्रेंड से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगने का आरोप है। पीड़ित एक आईटी सेक्टर में काम करता था। लेकिन वह पहले से ही एक झूठे केस में फंसा हुआ था और हाल ही में जमानत पर बाहर आया। तभी कोर्ट के बाहर डॉली ने उसकी बहन को पकड़ लिया और कहा, “भाई को बचाना है तो 1 करोड़ रुपये दो, वरना मैं मीडिया में उसका नाम खराब कर दूंगी और जेल में सड़ने दूंगी।” Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested

    डिजिटल डाटा की चोरी

    खबरों के मुताबिक, डॉली कोटक यहीं नहीं रुकी, उसने तीन अन्य बैंक कर्मचारियों की मदद से पीड़ित के निजी और डिजिटल डाटा तक अपनी पहुंच बनाई। इसमें एचडीएफसी बैंक के हर्ष श्रीवास्तव और अनंत रुइया तथा आईसीआईसीआई बैंक के जयेश गायकवाड़ का नाम भी शामिल है। जिन लोगों ने डॉली की मदद की। इनकी मदद से डॉली ने पीड़ित के ईमेल से लेकर बैंक खाते, लोकेशन और निजी फोटोज तक एक्सेस पा लिया। यहां तक कि पीड़ित के ईमेल से अपना नंबर भी लिंक करा लिया गया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested

    नौकरी से निकालवा दिया

    मई 2024 में पीड़ित को डॉली के नंबर से एक धमकी भरा मैसेज आया कि “पैसे दे दो या जेल में मरो, तुम कभी नहीं जीत पाओगे।” इसके कुछ दिन बाद उसने पीड़ित के ईमेल आईडी से कंपनी के एचआर को कई बदनाम करने वाले मेल भेज दिए, जिससे उसकी नौकरी चली गई। पुलिस में शिकायत के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने आखिरकार बोरिवली मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश पर चारकोप पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 175(3) के तहत मामला दर्ज किया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested

    कुल 6 लोगों पर मुकदमा दर्ज

    एफआईआर में डॉली कोटक, उसके भाई सागर कोटक, दोस्त प्रमिला वाज़ और तीन बैंक कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर आईटी एक्ट, आइपीसी की कई धाराओं और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि वह और डॉली पहले रिलेशनशिप में थे। यह मामला न केवल ब्लैकमेलिंग और निजी रिश्तों के खतरनाक मोड़ की तरफ इशारा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि डिजिटल जानकारी का दुरुपयोग कितना घातक हो सकता है। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested

  • सार्वजनिक शौचालय पर परिवार का कब्जा: प्रशासन भी बना ख़ामोश

    सार्वजनिक शौचालय पर परिवार का कब्जा: प्रशासन भी बना ख़ामोश

    हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार सलमान खान ने 2017 में जिस सार्वजनिक शौचालय का उद्घाटन किया था उसे एक परिवार ने कब्जा कर लिया है। घटना मुंबई के गोरेगांव (पूर्व) आरे मिल्क कॉलोनी की है।

    मुंबई: गोरेगांव (पूर्व) के आरे मिल्क कॉलोनी के यूनिट क्रमांक 30 का सार्वजनिक शौचालय कब्जा हो चुका है। साल 2017 में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने यहां दो सार्वजानिक शौचालयों का उद्घाटन किया था। जिसमें से एक जो फिल्म सिटी के पिछले गेट के पास यूनिट क्रमांक 30 में स्थित है उसकी हालत खस्ता हो गई है। इस सार्वजनिक शौचालय के एक हिस्से पर एक परिवार ने अतिक्रमण कर लिया है, जिसका दावा है कि उसे शौचालय की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया था। Family takes over public toilet: Administration also remains silent

    जमीनी हकीकत

    जब पत्रकार ने घटनास्थल का दौरा किया, तो ललिता राणे नामक एक महिला यहां कपड़े धोती हुई दिखाई दीं, जबकि उनकी एक और रिश्तेदार जानकी नामक वृद्ध महिला शौचालय के महिला खंड में सो रही थीं, जिसे रहने के लिए जगह और सामान रखने के लिए स्टोरेज रुम में बदल दिया गया है। Family takes over public toilet: Administration also remains silent

    कब्ज़ेदारों ने क्या कहा?

    ललिता ने पत्रकार से बात करते हुए बताया, कि “मेरा जन्म यहीं आरे मिल्क कॉलोनी में हुआ है, और मेरी सास, कमलदेवी राणे, जो पहले शौचालय का रखरखाव संभालती थीं, वह भी इसी इलाके में जन्मी और पली-बढ़ी थीं। दो साल पहले उनका निधन हो गया। बीएमसी ने सालों पहले इस शौचालय का निर्माण कराया था, उसे तोड़ दिया और फिर से बनवाया। सलमान खान भी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। अब सालों से बीएमसी ने इसका रखरखाव नहीं किया है। इसलिए इसकी हालत खस्ता हो गई है।

    रखरखाव की समस्या

    उसने ये भी कहा, कि इसमें पानी का कनेक्शन नहीं है और इसे चालू रखने के लिए कोई धनराशि भी नहीं दी गई है। इस इलाके में अक्सर नशेड़ी देखे जाते हैं, जो हमारी जान के लिए खतरा बने रहते हैं। हमने पास में ही एक छोटा सा कुआँ खोदा है, जिसका इस्तेमाल हम नहाने और बर्तन धोने के लिए करते हैं। अगर बीएमसी पानी और रखरखाव के लिए धनराशि उपलब्ध करा दे, तो यह शौचालय फिर से लोगों की सेवा के लिए चालू किया जा सकता है।”

    टूट गये हैं सभी दरवाजे

    उनकी मौसी ने आगे कहा, “हम शौचालय के इस हिस्से का इस्तेमाल सोने और सामान रखने के लिए करते हैं। यहाँ बिजली या पानी का कनेक्शन नहीं है। महिलाओं का सेक्शन असुरक्षित है – सभी दरवाजे टूटे हुए हैं, इसलिए हमें इसे हमेशा के लिए बंद करना पड़ा। हम बीएमसी और सलमान खान से अनुरोध करते हैं कि वे इस मामले को देखें और हमारी मदद करें।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent

    मिडिया लेंस

    शौचालय ब्लॉक का वह हिस्सा, जिस पर अतिक्रमण नहीं हुआ था, बेहद खराब हालत में था, जहाँ बुनियादी स्वच्छता, पानी की आपूर्ति और यहाँ तक कि दरवाज़े भी नहीं थे। परिसर में गुटखे के पैकेट, शराब की बोतलें और सिगरेट के टुकड़ों से भरा पड़ा था। इसके अलावा, उद्घाटन और उसमें शामिल लोगों का विवरण देने वाली स्मारक टाइल भी गायब था।

    प्रशासन से मरम्मत की मांग

    आरे मिल्क कॉलोनी के शिवसेना (यूबीटी) शाखा प्रमुख संदीप गढ़वे ने कहा, “सलमान खान ने छह रूमों वाले दो सार्वजनिक शौचालयों का उद्घाटन किया था – एक मद्रासपाड़ा में और दूसरा यूनिट 30 में। दुर्भाग्य से, अधिकारियों की उपेक्षा के कारण यूनिट 30 की हालत बेहद खराब हो गई है। एक तरफ एक परिवार ने अतिक्रमण कर उसे घर बना लिया है। पानी, दरवाज़ों और रखरखाव की कमी के कारण दूसरा आधा हिस्सा अनुपयोगी है, जिससे लोगों को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आरे के सीईओ और बीएमसी को तत्काल इस शौचालय की मरम्मत करानी चाहिए।”

    रहिवासियों ने क्या कहा ?

    एक निवासी ने कहा, “रात में, फिल्म सिटी गेट के पास के इलाके में नशेड़ी और असामाजिक तत्व अक्सर आते हैं। कोई भी वहाँ जाना नहीं चाहता। एक परिवार ने शौचालय के एक हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है। लेकिन बीएमसी, आरे के सीईओ और पुलिस इसपर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करती।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent

    एक स्थानीय निवासी विनोद एकनाथ कांबले ने कहा, “शौचालय की सुविधा न होने के कारण हमें सड़क पर या जंगल में पेशाब करने को मजबूर होना पड़ता है। नशेड़ी रात में घूमते रहते हैं। यह हमारे परिवारों के लिए जोखिम भरा है, लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हम लाचार हैं और अपने घरों से दूर स्थित शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं।”

    बीएमसी अधिकारी ने क्या कहा?

    बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) उपआयुक्त किरण दिघावकर ने कहा, “आरे मिल्क कॉलोनी और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) के अंतर्गत आते हैं और इसका प्रशासन आरे के सीईओ द्वारा किया जाता है। मरम्मत या रखरखाव के लिए, सीईओ कार्यालय और ईएसजेड निगरानी समिति से अनुमति लेना आवश्यक होता है। 2017 में जब हमने सार्वजनिक उपयोग के लिए शौचालय ब्लॉक का विकास किया था, तब हमने आरे मिल्क कॉलोनी के सीईओ से अनुमति ली थी। सीईओ की स्वीकृति मिलने के बाद हम सार्वजनिक शौचालय की मरम्मत और रखरखाव कर पाएंगे।”

    शौचालय के बाहर ट्यूबवेल की व्यवस्था

    इस बीच, आई लव मुंबई फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के सदस्य राहुल कनाल ने कहा, “हमें उम्मीद है कि अधिकारी इस मुद्दे पर ध्यान देंगे और जल्द से जल्द इसका समाधान करेंगे। आरे सीईओ कार्यालय और वन विभाग से अनुमति संबंधी समस्याओं के कारण, बीएमसी पानी का कनेक्शन नहीं दे पा रही है। इस पर हमने सार्वजनिक शौचालय के बाहर एक ट्यूबवेल की व्यवस्था की थी।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent

  • 17 हजार करोड़ की हेराफेरी, ED ने जारी किया अनिल अंबानी के खिलाफ समन

    17 हजार करोड़ की हेराफेरी, ED ने जारी किया अनिल अंबानी के खिलाफ समन

    रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिक अनिल अंबानी के खिलाफ 17 हजार करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने समन जारी कर दिया है। अंबानी को सुनवाई के लिए 5 अगस्त नई दिल्ली ईडी मुख्यालय मे हाज़िर होना होगा।

    न्यूज़ डेस्क
    नई दिल्ली:
    रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17 हजार करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में समन जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक अनिल अंबानी को 5 अगस्त को दिल्ली में ईडी के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani

    35 ठिकानों पर छापेमारी

    दरअसल, पिछले हफ्ते, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 50 व्यावसायिक संस्थाओं और 25 व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये छापे मुंबई में कम से कम 35 जगहों पर मारे गए थे। यह छापेमारी 24 जुलाई को कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस के अलावा कुछ कंपनियों द्वारा करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के कई अन्य आरोपों के तहत की गई थी।

    10 हजार करोड़ का अनडिस्क्लोज्ड

    इससे जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने ईडी और दो अन्य एजेंसियों को एक रिपोर्ट दी है। यह रिपोर्ट रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा 10 हजार करोड़ के कथित डायवर्जन की जांच से जुड़ी है। सेबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने इंटरकॉर्पोरेट डिपॉजिट (ICD) के रूप में एक बड़ी रकम रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को भेजी। यह रकम CLE Pvt Ltd के जरिए भेजी गई जो एक अनडिस्क्लोज्ड रिलेटेड पार्टी कंपनी है।

    मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी

    जांच के दौरान CLE कंपनी के बारे में पता चला था। इस कंपनी के बारे में बहुत अटकलें लगाई जा रही थीं। यह इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। इसका ऑफिस नेहरू रोड, वाकोला, सांताक्रूज (पूर्व), मुंबई में है। रिलायंस ग्रुप के एक करीबी व्यक्ति ने सेबी की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं।

    उन्होंने कहा कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इस मामले को 9 फरवरी को सार्वजनिक किया था। सेबी ने कोई नई खोज नहीं की है। रिलायंस इन्फ्रा का एक्सपोजर 6,500 करोड़ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 हजार करोड़ डाइवर्ट किए गए। यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है और यह तथ्यों पर आधारित नहीं है।

    उन्होंने कहा कि जब एक्सपोजर 6,500 करोड़ था, तो डायवर्जन 10,000 करोड़ कैसे हो सकता है? रिलायंस इन्फ्रा ने इस मामले में अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए पूरी कोशिश की। रिलायंस इन्फ्रा के करीबी व्यक्ति ने बताया कि कंपनी ने 6,500 करोड़ की पूरी राशि वसूलने के लिए समझौता किया है। यह समझौता सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज द्वारा कराई गई मध्यस्थता के जरिए हुआ। इस समझौते को बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश किया गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani