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मुंबई में एक महिला ने अपने बैंक कर्मचारी दोस्तों के साथ मिलकर अपने एक्स-ब्वॉयफ्रेंड से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। इसमें निजी डेटा की चोरी कर धमकाया गया, नौकरी छीन ली गई और बदनाम करने की कोशिश से परेशान पीड़ित जब कोर्ट पहुंचा। तब जाकर पुलिस ने किया 6 लोगों पर केस दर्ज.. Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
मुंबई: कांदीवली पश्चिम के चारकोप इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने उसके एक्स ब्वॉयफ्रेंड से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। आरोपी महिला ने धमकी दी कि अगर पैसा नहीं दिए तो वह उसे जेल भिजवा देगी। पीड़ित ने डर के साये में कई दिनों तक यह सब झेला, लेकिन आखिरकार हिम्मत जुटाकर पुलिस को आप बीती सुनाई। लेकिन पुलिस ने भी जब फरियाद नहीं सूनी तब उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार पुलिस ने भरोरे को तार तार कर मानसिक प्रताड़ित कर रही ब्लैकमेलर एक्स गर्लफ्रेंड को गिरफ्तार कर लिया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
बदनाम कर जेल में सड़ाने की धमकी
दरअसल, चारकोप पुलिस ने डॉली कोटक नाम की एक प्राइवेट बैंक में काम करने वाली महिला को गिरफ्तार किया है। उस पर अपने एक्स-बॉयफ्रेंड से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगने का आरोप है। पीड़ित एक आईटी सेक्टर में काम करता था। लेकिन वह पहले से ही एक झूठे केस में फंसा हुआ था और हाल ही में जमानत पर बाहर आया। तभी कोर्ट के बाहर डॉली ने उसकी बहन को पकड़ लिया और कहा, “भाई को बचाना है तो 1 करोड़ रुपये दो, वरना मैं मीडिया में उसका नाम खराब कर दूंगी और जेल में सड़ने दूंगी।” Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
डिजिटल डाटा की चोरी
खबरों के मुताबिक, डॉली कोटक यहीं नहीं रुकी, उसने तीन अन्य बैंक कर्मचारियों की मदद से पीड़ित के निजी और डिजिटल डाटा तक अपनी पहुंच बनाई। इसमें एचडीएफसी बैंक के हर्ष श्रीवास्तव और अनंत रुइया तथा आईसीआईसीआई बैंक के जयेश गायकवाड़ का नाम भी शामिल है। जिन लोगों ने डॉली की मदद की। इनकी मदद से डॉली ने पीड़ित के ईमेल से लेकर बैंक खाते, लोकेशन और निजी फोटोज तक एक्सेस पा लिया। यहां तक कि पीड़ित के ईमेल से अपना नंबर भी लिंक करा लिया गया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
नौकरी से निकालवा दिया
मई 2024 में पीड़ित को डॉली के नंबर से एक धमकी भरा मैसेज आया कि “पैसे दे दो या जेल में मरो, तुम कभी नहीं जीत पाओगे।” इसके कुछ दिन बाद उसने पीड़ित के ईमेल आईडी से कंपनी के एचआर को कई बदनाम करने वाले मेल भेज दिए, जिससे उसकी नौकरी चली गई। पुलिस में शिकायत के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने आखिरकार बोरिवली मजिस्ट्रेट कोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश पर चारकोप पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 175(3) के तहत मामला दर्ज किया। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
एफआईआर में डॉली कोटक, उसके भाई सागर कोटक, दोस्त प्रमिला वाज़ और तीन बैंक कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है। इन सभी पर आईटी एक्ट, आइपीसी की कई धाराओं और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि वह और डॉली पहले रिलेशनशिप में थे। यह मामला न केवल ब्लैकमेलिंग और निजी रिश्तों के खतरनाक मोड़ की तरफ इशारा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि डिजिटल जानकारी का दुरुपयोग कितना घातक हो सकता है। Case filed against 6 people in 1 crore ransom case, high profile Dolly arrested
हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार सलमान खान ने 2017 में जिस सार्वजनिक शौचालय का उद्घाटन किया था उसे एक परिवार ने कब्जा कर लिया है। घटना मुंबई के गोरेगांव (पूर्व) आरे मिल्क कॉलोनी की है।
मुंबई: गोरेगांव (पूर्व) के आरे मिल्क कॉलोनी के यूनिट क्रमांक 30 का सार्वजनिक शौचालय कब्जा हो चुका है। साल 2017 में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने यहां दो सार्वजानिक शौचालयों का उद्घाटन किया था। जिसमें से एक जो फिल्म सिटी के पिछले गेट के पास यूनिट क्रमांक 30 में स्थित है उसकी हालत खस्ता हो गई है। इस सार्वजनिक शौचालय के एक हिस्से पर एक परिवार ने अतिक्रमण कर लिया है, जिसका दावा है कि उसे शौचालय की देखभाल के लिए नियुक्त किया गया था। Family takes over public toilet: Administration also remains silent
जमीनी हकीकत
जब पत्रकार ने घटनास्थल का दौरा किया, तो ललिता राणे नामक एक महिला यहां कपड़े धोती हुई दिखाई दीं, जबकि उनकी एक और रिश्तेदार जानकी नामक वृद्ध महिला शौचालय के महिला खंड में सो रही थीं, जिसे रहने के लिए जगह और सामान रखने के लिए स्टोरेज रुम में बदल दिया गया है। Family takes over public toilet: Administration also remains silent
कब्ज़ेदारों ने क्या कहा?
ललिता ने पत्रकार से बात करते हुए बताया, कि “मेरा जन्म यहीं आरे मिल्क कॉलोनी में हुआ है, और मेरी सास, कमलदेवी राणे, जो पहले शौचालय का रखरखाव संभालती थीं, वह भी इसी इलाके में जन्मी और पली-बढ़ी थीं। दो साल पहले उनका निधन हो गया। बीएमसी ने सालों पहले इस शौचालय का निर्माण कराया था, उसे तोड़ दिया और फिर से बनवाया। सलमान खान भी उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। अब सालों से बीएमसी ने इसका रखरखाव नहीं किया है। इसलिए इसकी हालत खस्ता हो गई है।
उसने ये भी कहा, कि इसमें पानी का कनेक्शन नहीं है और इसे चालू रखने के लिए कोई धनराशि भी नहीं दी गई है। इस इलाके में अक्सर नशेड़ी देखे जाते हैं, जो हमारी जान के लिए खतरा बने रहते हैं। हमने पास में ही एक छोटा सा कुआँ खोदा है, जिसका इस्तेमाल हम नहाने और बर्तन धोने के लिए करते हैं। अगर बीएमसी पानी और रखरखाव के लिए धनराशि उपलब्ध करा दे, तो यह शौचालय फिर से लोगों की सेवा के लिए चालू किया जा सकता है।”
टूट गये हैं सभी दरवाजे
उनकी मौसी ने आगे कहा, “हम शौचालय के इस हिस्से का इस्तेमाल सोने और सामान रखने के लिए करते हैं। यहाँ बिजली या पानी का कनेक्शन नहीं है। महिलाओं का सेक्शन असुरक्षित है – सभी दरवाजे टूटे हुए हैं, इसलिए हमें इसे हमेशा के लिए बंद करना पड़ा। हम बीएमसी और सलमान खान से अनुरोध करते हैं कि वे इस मामले को देखें और हमारी मदद करें।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent
शौचालय ब्लॉक का वह हिस्सा, जिस पर अतिक्रमण नहीं हुआ था, बेहद खराब हालत में था, जहाँ बुनियादी स्वच्छता, पानी की आपूर्ति और यहाँ तक कि दरवाज़े भी नहीं थे। परिसर में गुटखे के पैकेट, शराब की बोतलें और सिगरेट के टुकड़ों से भरा पड़ा था। इसके अलावा, उद्घाटन और उसमें शामिल लोगों का विवरण देने वाली स्मारक टाइल भी गायब था।
प्रशासन से मरम्मत की मांग
आरे मिल्क कॉलोनी के शिवसेना (यूबीटी) शाखा प्रमुख संदीप गढ़वे ने कहा, “सलमान खान ने छह रूमों वाले दो सार्वजनिक शौचालयों का उद्घाटन किया था – एक मद्रासपाड़ा में और दूसरा यूनिट 30 में। दुर्भाग्य से, अधिकारियों की उपेक्षा के कारण यूनिट 30 की हालत बेहद खराब हो गई है। एक तरफ एक परिवार ने अतिक्रमण कर उसे घर बना लिया है। पानी, दरवाज़ों और रखरखाव की कमी के कारण दूसरा आधा हिस्सा अनुपयोगी है, जिससे लोगों को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आरे के सीईओ और बीएमसी को तत्काल इस शौचालय की मरम्मत करानी चाहिए।”
रहिवासियों ने क्या कहा ?
एक निवासी ने कहा, “रात में, फिल्म सिटी गेट के पास के इलाके में नशेड़ी और असामाजिक तत्व अक्सर आते हैं। कोई भी वहाँ जाना नहीं चाहता। एक परिवार ने शौचालय के एक हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है। लेकिन बीएमसी, आरे के सीईओ और पुलिस इसपर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करती।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent
एक स्थानीय निवासी विनोद एकनाथ कांबले ने कहा, “शौचालय की सुविधा न होने के कारण हमें सड़क पर या जंगल में पेशाब करने को मजबूर होना पड़ता है। नशेड़ी रात में घूमते रहते हैं। यह हमारे परिवारों के लिए जोखिम भरा है, लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। हम लाचार हैं और अपने घरों से दूर स्थित शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं।”
बीएमसी अधिकारी ने क्या कहा?
बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) उपआयुक्त किरण दिघावकर ने कहा, “आरे मिल्क कॉलोनी और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) के अंतर्गत आते हैं और इसका प्रशासन आरे के सीईओ द्वारा किया जाता है। मरम्मत या रखरखाव के लिए, सीईओ कार्यालय और ईएसजेड निगरानी समिति से अनुमति लेना आवश्यक होता है। 2017 में जब हमने सार्वजनिक उपयोग के लिए शौचालय ब्लॉक का विकास किया था, तब हमने आरे मिल्क कॉलोनी के सीईओ से अनुमति ली थी। सीईओ की स्वीकृति मिलने के बाद हम सार्वजनिक शौचालय की मरम्मत और रखरखाव कर पाएंगे।”
शौचालय के बाहर ट्यूबवेल की व्यवस्था
इस बीच, आई लव मुंबई फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के सदस्य राहुल कनाल ने कहा, “हमें उम्मीद है कि अधिकारी इस मुद्दे पर ध्यान देंगे और जल्द से जल्द इसका समाधान करेंगे। आरे सीईओ कार्यालय और वन विभाग से अनुमति संबंधी समस्याओं के कारण, बीएमसी पानी का कनेक्शन नहीं दे पा रही है। इस पर हमने सार्वजनिक शौचालय के बाहर एक ट्यूबवेल की व्यवस्था की थी।” Family takes over public toilet: Administration also remains silent
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिक अनिल अंबानी के खिलाफ 17 हजार करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने समन जारी कर दिया है। अंबानी को सुनवाई के लिए 5 अगस्त नई दिल्ली ईडी मुख्यालय मे हाज़िर होना होगा।
न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली: रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17 हजार करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में समन जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक अनिल अंबानी को 5 अगस्त को दिल्ली में ईडी के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
35 ठिकानों पर छापेमारी
दरअसल, पिछले हफ्ते, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत रिलायंस ग्रुप से जुड़ी 50 व्यावसायिक संस्थाओं और 25 व्यक्तियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये छापे मुंबई में कम से कम 35 जगहों पर मारे गए थे। यह छापेमारी 24 जुलाई को कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग केस के अलावा कुछ कंपनियों द्वारा करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के कई अन्य आरोपों के तहत की गई थी।
इससे जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने ईडी और दो अन्य एजेंसियों को एक रिपोर्ट दी है। यह रिपोर्ट रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर द्वारा 10 हजार करोड़ के कथित डायवर्जन की जांच से जुड़ी है। सेबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने इंटरकॉर्पोरेट डिपॉजिट (ICD) के रूप में एक बड़ी रकम रिलायंस ग्रुप की कंपनियों को भेजी। यह रकम CLE Pvt Ltd के जरिए भेजी गई जो एक अनडिस्क्लोज्ड रिलेटेड पार्टी कंपनी है।
मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी
जांच के दौरान CLE कंपनी के बारे में पता चला था। इस कंपनी के बारे में बहुत अटकलें लगाई जा रही थीं। यह इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। इसका ऑफिस नेहरू रोड, वाकोला, सांताक्रूज (पूर्व), मुंबई में है। रिलायंस ग्रुप के एक करीबी व्यक्ति ने सेबी की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने इस मामले को 9 फरवरी को सार्वजनिक किया था। सेबी ने कोई नई खोज नहीं की है। रिलायंस इन्फ्रा का एक्सपोजर 6,500 करोड़ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 हजार करोड़ डाइवर्ट किए गए। यह सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए है और यह तथ्यों पर आधारित नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब एक्सपोजर 6,500 करोड़ था, तो डायवर्जन 10,000 करोड़ कैसे हो सकता है? रिलायंस इन्फ्रा ने इस मामले में अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए पूरी कोशिश की। रिलायंस इन्फ्रा के करीबी व्यक्ति ने बताया कि कंपनी ने 6,500 करोड़ की पूरी राशि वसूलने के लिए समझौता किया है। यह समझौता सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज द्वारा कराई गई मध्यस्थता के जरिए हुआ। इस समझौते को बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश किया गया है। 17 thousand crore fraud, ED issues summons against Anil Ambani
बिना किसी आई डी और बिना किसी मतदाता से मिले ही blo द्वारा कार्यालय में बैठकर खुद ही वोटर फॉर्म भरने का कार्य कराया जाना कत्तई उचित नहीं। वेरिफिकेशन के लिए blo को हर घर जाकर वोटरों से मिलने और उनसे भारत में रहने, उनके पिता की जन्मतिथि मांगने की बात चुनाव आयोग ने की थी। जब blo किसी मतदाता से मिलेगा ही नहीं तो सत्यापन किस बात का करेगा? बहुत ही सीनियर पत्रकार अजीत अंजुम को पता था, कि किसी भी कार्यालय में बिना अनुमति लिए कैमरामैन और माइक लेकर जाने पर उन पर सरकारी कार्यवाही में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया जा सकता है। इसीलिए वे बिना कैमरामैन और बिना माइक लिए उस कमरे में गए, जहां तमाम blo बैठे हुए मतदाताओं के सिंगल फॉर्म भर रहे थे। मजेदार बात यह हुई, कि blo फॉर्म पर सिर्फ नाम लिख रहे थे। मतदाता के पिता या पति का नाम नहीं लिख रहे थे। फिर कैसे पहचान होगी कि वोट देने वाला सही है या नही? इससे भी बड़ी मजेदार बात यह, कि जेडीएस के बड़े नेता और नीतीश कुमार सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके लालू यादव के बेटे की पत्नी का नाम काट दिया गया है। एक महिला के नाम पर बने वोटर आईडी पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की फोटो लगा दी है। पत्नी शादी होने के बाद जब ससुराल आती है तो ससुराल की सदस्य बन जाती है। नाम इसलिए काटा गया कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। दिल्ली भारत की राजधानी और लालू यादव का पूरा परिवार बिहार के पटना में रहता है। बात वोटर लिस्ट बनाने की तो blo बिना किसी आई डी के सिंगल फॉर्म भरे और उसमें केवल मतदाता का नाम हो पिता या पति का नाम नहीं हो तो वह व्यक्ति वोट कैसे देगा? अब यही सच पुराने ख्यात पत्रकार अजीत अंजुम ने अपनी मोबाइल में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में डाल दी। जिस पर देश भर से प्रतिक्रिया आनी स्वाभाविक है। चुनाव आयोग की तरह बिहार पुलिस भी सरकारी दबाव में है जिसने बेवजह पत्रकार अजीत अंजुम द्वारा मतदाता सूची को ऑफिस में भरे जाने का सच दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज कर दी। यानी सरकार कुछ भी कराए उसे अधिकार है। लेकिन अगर पत्रकार गलतियों को देश की जनता के सामने लाए तो गुनहगार हो गया। चुनाव आयुक्त बदल देने से कुछ नहीं होगा। क्योंकि सरकार यदि जिसे आयुक्त बनाएगी तो इसी शर्त के साथ कि वह सरकार के कहे अनुसार कार्य करे। पिछले दस साल से चुनाव आयोग के द्वारा पक्षपाती रवैया अपनाए जाने का विरोध देश भर में हो रहा है। क्योंकि चुनाव खत्म होने के बाद प्रसाइडिंग ऑफिसर फॉर्म 17 भरता है जिसमें कुल मतदाता स्त्री पुरुष और कुल पड़े हुए मत की गिनती स्त्री पुरुष अलग अलग बताना पड़ता है। बैलेट बॉक्स था या अब ई वी एम दोनों में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। उसी शाम या रात जिला मुख्यालय पर बॉक्स और फॉर्म के साथ तीनों वोटर लिस्ट लिफाफे में भरकर जमा करना होता है। दूसरे दिन ही केंद्रीय चुनाव आयोग पड़े हुए मतों का प्रतिशत बता सकता है। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में प्रथम चरण के मतदान प्रतिशत तीन अन्य चरण के मतदान होने के बाद बताने में तेरह दिन लगाए। फिर दस दिनों में क्या क्या करता रहा चुनाव आयोग? आयोग की गड़बड़ी छुपाने के लिए जल्द ही सारे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज डिलीट करने का नियम मनमाने ढंग से बना दिया गया ताकि कोर्ट में सबूत पेश करना नहीं पड़े । बीजेपी को चुनाव जीताने के लिए चुनाव आयोग बेशक बेइमानी करता है। एक ही वोटर आईडी का यूनिक नंबर कई कई राज्यों में वोटर कैसे बनाया जाता है यह तो चुनाव आयोग ही बता सकता है। चुनाव के दिन शाम पांच बजे मेन गेट बंद कर पीछे से शुरू करके कूपन नंबर एक से दिए जाने का नियम है मगर महाराष्ट्र चुनावों में इस नियम का पालन नहीं किया गया और ‘अंतिम घंटे में बीस प्रतिशत वोट पड़े’ ऐसा बता दिया गया। लाखों वोट अंतिम घंटे में पढ़ने के टोकन नंबर ही सुरक्षित नहीं किए गए। जहां तक ई वी एम हैक होने की बात है वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के सीएम थे बार बार हैकिंग और बेइमानी की बातें कहते थे। यह भी कहा कि विदेशों में जहां पढ़े लिखे लोग होते है बैलेट पेपर पर नाम पढ़कर वोट देते हैं। ईवीएम हैक करने का सच चिप बनाने वाला जापान और ईवीएम बनाने वाला अमेरिका ई वीं एम से चुनाव नहीं करता। सुप्रसिद्ध अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने भी कहा है ईवीएम सरलता से हैक किया जा सकता है। चिप लगे होने से मोबाइल फीचर्स खत्म होते ही नेट प्रोवाइडर कंपनिया ऑफिस में बैठे बैठे सिम बैन कर देते हैं जिससे नेट तो क्या आउट गोइंग और इन कमिंग कॉल बंद कर दी जाती है। चिप लगे होने से ही इसरो अपने चंद्रयान को धरती पर बैठे कंट्रोल करता है। चिप के कारण हीं अभी हाल में अंतरिक्ष में यान भेजा और सकुशल धरती पर उतारा गया। अहम प्रश्न है कि विपक्षी सवाल चुनाव आयोग से पूछते हैं तो जवाब केंद्र सरकार क्यों देने लगती है जैसे चैनल पर ज्यों हि विपक्षी नेता किसी विषय पर सरकार को कटघरे में खड़ा करता है तो एंकर तमतमा जाते हैं और सरकार की तरफ से वकालत करने लगते हैं। अरे भाई लोकतंत्र में हर किसी सरकारी विभाग की जवाबदेही होती है तो दूसरा विभाग उत्तर कैसे दे सकता है। बिहार की जनता भले नीतीश कुमार और बीजेपी को वोट नहीं दे लेकिन इतनी गारंटी ली ही जा सकती है जब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सरकार करती रहेगी चुनाव में पक्षपात कर आयोग सत्ता के पक्ष में करता रहेगा।गुलामी बजाता रहेगा। ऐसे में सरकार द्वारा चुने गए चुनाव आयुक्तों और ईवीएम के रहते बीजेपी को हरा पाना जनता के लिए असंभव है। वोट मत दे जनता भले ही जीतेगी तो बीजेपी ही।
भाजपा सरकार देश भर में शिक्षा का भगवाकरण करते हुए सरकारी स्कूलों को क्यों बंद कर रही है? इसके पीछे का राज साफ है। भले ही देश की उन्नति खत्म हो जाय। लेकिन सवाल नही पूछना चाहिए।
मुंबई: शिक्षा ही परिवार, समाज और राष्ट्र की उन्नति के द्वार खोलती है। जो देश जितना ही शिक्षित है उतना ही संपन्न और खुशहाल है। शिक्षा ही विकास का मूल है। अशिक्षित समाज भीड़ बन जाता है जिसका धर्म अराजकता अंधविश्वास होता है। अनियंत्रित भीड़ विनाश का कारण बनती है। किसी ने बिल्कुल ठीक ही कहा है, देश की बर्बादी के लिए हर वह व्यक्ति जिम्मेदार है जिसे लगता है कि शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार से ज्यादा महत्वपूर्ण धार्मिक मुद्दे हैं।
देश में शिक्षा का भगवाकरण
विपक्ष बीजेपी सत्ता पर आरोप लगाता है कि देश में सरकार शिक्षा का भगवाकरण कर रही है जिसमें सामाजिक आर्थिक मुद्दे गायब कर दिए जा रहे। इसका प्रमाण हैं कि राजस्थान में स्कूली किताबों से महात्मा गांधी के परिवार को हटाया जा रहा है।
शिक्षा और परीक्षा का सौदा
सुप्रसिद्ध आई ए एस कोचिंग के शिक्षक विकास दिव्यकृति का कथन है, कि सत्ता में जब अनपढ़ लोग बढ़ जाते हैं तो शिक्षा और परीक्षा बिकने लगती है। देश की लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक कर तीस से चालीस लाख में बेचे गए धनवानों को ताकि गरीब प्रतियोगी परीक्षा से बाहर चले जाएं और सरकार परीक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूलकर डकार जाती है और जब छात्र पुनः परीक्षा की मांग करते है तो गुलाम पुलिस द्वारा उन पर लाठियां बरसवाई जाती हैं।
उन्होंने यह भी कहा, कि शिक्षा का प्राइवेटीकरण करके माफियाओं को सौंपी जा रही जो मनमानी फीस और अन्य वस्तुएं छात्रों को बेचकर दौलत कमा रहे। आज स्कूल कॉलेज खोलना सबसे बड़ा व्यापार माना जाता है। सरकार खुद गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर रखने के लिए शिक्षा पर 18% जीएसटी लगाकर शिक्षा को महंगी कर चुकी है। सरकार ने 350 ऐसे लोगों को ज्वाइंट सेक्रेटरी और अध्यक्ष बनाए जो पद आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को ही मिलते हैं लेकिन बिना आईएएस परीक्षा पास किए विशिष्ट विचारधारा के लोगों को आईएएस पोस्ट पर बिठा दिया गया।
विश्वविद्यालयों पर भगवा कब्जा
इतना ही नहीं आरएसएस की विचारधारा के लोगों को विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर और प्रोफेसर नियुक्त कर शिक्षा का भगवाकरण कर दिया है। ऐसे लोग यूनिवर्सिटी में उच्च पदों पर बैठकर गैर विचारधारा वाले लोगों को पीएचडी में प्रवेश देने से मना कर दिया, लेकिन आंदोलन के कारण प्रवेश देने को मजबूर हो गए। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया बी एच यू या काशी हिंदू विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रोफेसर के रूप में एक सुयोग्य मुस्लिम को नियुक्त किया गया तो बीजेपी से संलग्न छात्र संघ के विरोध के कारण उन्हें हटा दिया गया या हटने को मजबूर कर दिया गया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनुस्मृति पढ़ाने की योजना प्रबल विरोध के चलते पीछे हटने को बाध्य कर दिया। जिससे वी सी जो घोषणा करनी पड़ी कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मनुस्मृति नहीं पढ़ाई जाएगी। यह बहुत बड़ा प्रमाण है शिक्षा के भगवाकरण का। BJP governments saffronising and destroying education
शिक्षा के भगवाकरण के कारण ही उच्च पदों पर विशेषधारा के बैठे लोग जाति को लेकर भेदभाव किया जाता है जिस कारण बंगलुरु यूनिवर्सिटी में दस दलित प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किए जाने से सभी दलितों ने इस्तीफा दे दिया। जब शिक्षित लोग भी जाति के कारण अपमानित किए जा रहे हों, अर्थात शिक्षा क्षेत्र में जाति का बोलबाला हो जाए तो सिस्टम हिलाना जरूरी हो जाता है। दस दलित प्रोफेसरों का इस्तीफा देने की बाध्यता शिक्षा के भगवाकरण की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। जिसका अर्थ है शिक्षा पाने आने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
धर्म की राजनीति
हमारे देश में जितना संघर्ष धार्मिक स्थलों के लिए किया जा रहा है उतना ही संघर्ष यदि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता तो देश की तस्वीर और तकदीर ही बदल जाती। बीजेपी सरकार धर्म की राजनीति के द्वारा वोट बैंक बनाने में लगी है देश समाज से कोई लेना देना नहीं है। बीजेपी आरएसएस और उसके एजेंट धूर्त, अज्ञानी और ढोंगी बाबा जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाकर धन और शरीर शोषण करते हैं। आशा राम और रामरहीम इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।
सरकार जानती है कि देश में जितने अधिक अशिक्षित रहेंगे उनसे कांवड़ उठवाना, मस्जिद के सामने नाचना, गालीया देना, सोशल मीडिया में गालियां लिखने के लिए मानसिक गुलाम बनाना और पांच किलो मुफ्त अनाज और चंद सिक्के भीख में देकर वोट पाना सरल हो जाता है। BJP governments saffronising and destroying education
जबकि शिक्षित जो स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालयों से शिक्षा ज्ञान पाकर निकलते हैं वे संविधान पढ़ते हैं। अपने मौलिक अधिकार जानते हैं। सरकार के दायित्व क्या-क्या है की जानकारी रखते हैं। वे सत्ता से सवाल पूछने लगते हैं। सरकार की असफलता तानाशाही नफरती राजनीति जानते हैं। अपने अधिकार मांगने के लिए आंदोलन करते हैं। इसलिए “न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” सीधे-सीधे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। क्योंकि स्कूल कॉलेज बंद किए जाने से मुर्दे ही पैदा होंगे जागरूक भारतीय नहीं। उन्हें धर्म के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काना सरल होता है।
मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार
तेलंगाना जो भारत का छोटा सा नवनिर्मित राज्य हैं वहां की सरकार शिक्षा का महत्व समझती है इसलिए सिर्फ एक छात्रा के लिए ही स्कूल खोला जाता है। इसके विपरीत हिन्दी भाषी राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। जबकि संविधान में चौदह साल के कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है, लेकिन बीजेपी सरकार सरकारी स्कूल बंद करने में लगी हैं।
एक तरफ गैर बीजेपी सरकार की सोच कि एक बच्ची के लिए नियमित स्कूल खोला और पढ़ाया जाता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर 334 शिक्षकों की भर्ती आरम्भ कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी शासित राज्यों में पिछले दस वर्षों में लगभग नब्बे हजार सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए। मध्यप्रदेश में 29000 और उत्तर प्रदेश में 25000 स्कूल बंद किए जा चुके हैं।
राम कृष्ण का प्रदेश है उत्तर प्रदेश जहां पहले 50 छात्रों से कम होने पर स्कूल बंद कर दूसरे स्कूल में मर्ज करने की बात कही गई है उसका दायरा बढ़ाकर अब 70 छात्र होने पर भी सरकारी स्कूल बंद कर मर्ज किए जाने की मंशा है। यहां सवाल उठता है पांच मिल दूर तक स्कूल में लड़कियां कैसे जाएंगी? उनके अलावा गरीब लड़के भी शिक्षा बंद कर देंगे। योगी सरकार ने स्कूल बंद करने और 27308 नई मधुशाला खोलने का निर्णय किया है।
दूसरी तरफ हरियाणा सरकार का अनोखा आदेश है, कि जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे उन्हें 500 रुपए महीने फीस देनी होगी लेकिन जो बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाएंगे उन्हें 1100 रुपए महीने दिए जाएंगे। जिसका अर्थ है सभी सरकारी स्कूल बंद करना। प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना। सब मिलाकर बीजेपी सरकारें गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। ताकि पांच किलो मुफ्त अनाज देकर वोट लिया जा सके साथ ही कांवड़ उठाने वाले की संख्या में 21% वृद्धि की संभावना है। जितने लोग कांवड़ उठाएंगे उनपर सरकार फूल बरसाकर तृप्त करेगी। प्रोत्साहित करेगी ताकि मानसिक गुलाम बने रहकर बीजेपी को वोट देते रहें।
मुफ्त शिक्षा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला
दुखद प्रसंग यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जज ने 51 गरीब छात्रों की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में निर्णय दिया है। यहां सवाल उठता है कि माननीय जज को छात्रों की नहीं सरकार की चिंता अधिक है। क्या कोर्ट सरकार से सवाल नहीं कर सकती थी? कि सब कुछ मुफ्त देने के बावजूद क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में छात्र पढ़ना ही नहीं चाहते? सरकार पता करे और गरीब बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए प्रेरित करे।
भोपाल के एक पुलिस कांस्टेबल ने न तो कभी विभागीय अनिवार्य प्रशिक्षण ली और ना कभी ड्यूटी ज्वाईन किया, फिर भी पुलिसकर्मी को 12 साल में 35 लाख रुपये का वेतन मिला।
मध्यप्रदेश: भोपाल से एक विचित्र और चौकादेने वाली घटना प्रकाश में आ रही है। यहां एक पुलिस कांस्टेबल ने 2011-2012 में भर्ती होने के बाद न तो ड्यूटी पर रिपोर्ट किया और न ही अनिवार्य प्रशिक्षण लिया, जबकि उसने 12 सालों में लगभग 35 लाख रुपये का वेतन प्राप्त किया। ड्यूटी से अपनी पूरी अनुपस्थिति के दौरान, अभिषेक ने न तो विभाग को इसकी सूचना दी और न ही कभी छुट्टी के लिए आवेदन किया, फिर भी वह 12 साल तक मासिक वेतन पाने में कामयाब रहा।
प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था
मध्य मध्य प्रदेश के विदिशा ज़िले के मूल निवासी, अभिषेक 2011-12 में राज्य पुलिस में कांस्टेबल के रूप में भर्ती होने वालों में से एक था। वह अपने बैच के अन्य कांस्टेबलों की तुलना में काफ़ी देर से भोपाल ज़िला लाइन्स में उपस्थित हुआ था। पुलिस बल में भर्ती होने के बाद, उसे सागर ज़िले के पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में अनिवार्य प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।
प्रशिक्षण के बजाय घर चला गया
लेकिन, प्रशिक्षण के लिए जाने के बजाय अभिषेक पड़ोस के अपने विदिशा जिले में अपने घर चला गया और 12 सालों तक न तो प्रशिक्षण लिया और न ही ड्यूटी पर आया। इसी बीच ड्यूटी से गैर हाजिरी की पूरी अवधि के दौरान उसने न तो विभाग को इसकी जानकारी दी और न ही कभी छुट्टी के लिए आवेदन किया, फिर भी वह 12 सालों तक मासिक वेतन पाने में कामयाब रहा।
अभिषेक ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए स्पीड पोस्ट के जरिए अपनी सर्विस फाइल भोपाल भेज दिया था। हैरानी की बात यह है कि भोपाल में संबंधित विभाग ने बिना किसी सत्यापन के उसकी सर्विस फाइल स्वीकार कर ली, जिसके परिणामस्वरूप अभिषेक को अगले 12 सालों तक 35 लाख रुपए वेतन के रूप में मिलते रहे। चौंकाने वाली यह अनियमितता 2023 में तब सामने आई, जब 2011-12 बैच के कांस्टेबलों के 10 वर्षीय समयमान वेतन ग्रेड के लिए अनिवार्य प्रक्रिया के तहत सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही थी।
पैसे लौटाने का किया वादा
मामले की जांच कर रही एसीपी-भोपाल अंकिता खाटेरकर ने कहा, “सेवा रिकॉर्ड की जांच में कोई पुरस्कार, कोई दंड और कोई ड्यूटी रिकॉर्ड नहीं मिला, जो कि अजीब था। उसे (अभिषेक को) विभाग की स्थापना शाखा ने बुलाया था, जिसके बाद वह आखिरकार पेश हुआ, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उसने एक दिन भी पुलिस की सेवा नहीं की है।” पुलिस के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि उन्होंने विभाग को एक लाख रुपए लौटा दिए हैं और वादा किया है कि 12 साल में मिलने वाला वेतन के पैसे किश्तों में लौटा देंगे। विभागीय जांच चल रही है।
मुंबई के माहिम में एक ऐसे SRA घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जहां बिल्डर मनपा की आरक्षित खेल मैदान को ही हथियाने जा रहा था। बरसों की लडाई के बाद आखिरकार बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसपर रोक लगाते हुए नगर आयुक्त से हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिये हैं।
मुंबई: झोपडपट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) के तहत शहर को झोपड़ा मुक्त करने की सरकारी योजना बड़ी जोरों पर चल रही है। सरकार इसमें झोपड़े के बदले 300 से 322 वर्ग फिट का फ्लैट मुहैया कराती है। इसमें सरकारी मुनाफा कमाने के लिए कुछ बिल्डर धांधली और सरकारी अधिकारियों की कालाबाजारी भी हमेशा से उजागर होती रही है। जिसके वजह से शहर में कितने ही प्रोजेक्ट अधर में लटके हुए हैं और झोपड़ी धारक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन माहिम से तो अलग ही मामला सामने आ रहा है। Mumbai: A huge SRA scam exposed, Bombay High Court imposes stay
केवल 56 झोपड़ा का एसआरए प्रोजेक्ट
माहिम पश्चिम के नासरवानजी वाडी इलाके में एक बीएमसी के खेल मैदान पर ही बिल्डर ने एसआरए की योजना पेश कर दी। जिसकी शिकायत पर अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) के नगर आयुक्त को हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया हैं। यहां 3512.35 वर्ग मीटर में फैले झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग और BMC के किराएदारों सहित लगभग 56 किराएदार रहते हैं। उसी प्लॉट के बगल वाले हिस्से का इस्तेमाल पहले से ही खेल के मैदान के रूप में किया जा रहा है। कुल जमीन का क्षेत्रफल 7943.21 वर्ग मीटर है और इसका स्वामित्व BMC के पास है, जबकि विकास योजना के तहत पूरा क्षेत्र खेल के मैदान के उपयोग के लिए आरक्षित है।
मुंबई हाईकोर्ट में विचाराधीन प्लॉट क्रमांक 484 (ए) विशेष रूप से खेल के मैदान के रूप में आरक्षित है। शिकायतकर्ता उपासना फ्रांसिस फर्नांडीस, एक गृहिणी और स्थानीय निवासी है। इन्होंने एसआरए योजना के तहत पुनर्विकास परियोजना को रोकने के लिए 2023 में हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी। इसके बाद अदालत ने इस जमीन पर किसी भी एसआरए विकास पर रोक लगा दी है। Mumbai: A huge SRA scam exposed, Bombay High Court imposes stay
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें बीएमसी को स्पष्ट करने को कहा गया हैं कि क्या नगर निकाय स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) योजना के तहत माहिम में बीएमसी के स्वामित्व वाले प्लॉट के पुनर्विकास के साथ आगे बढ़ना चाहता है या भूमि को आरक्षित खेल के मैदान के रूप में बनाए रखना चाहता है?
एसआरए की गडबडी
2 जुलाई को सुनवाई के दौरान, जस्टिस जीएस कुलकर्णी और आरिफ एस डॉक्टर ने कहा: “यह एक ऐसा मामला है, जिसमें नगरपालिका की जमीन, जिसमें सिर्फ 56 अतिक्रमणकारी और कुछ नगरपालिका के किरायेदार हैं, इन्हें एक झुग्गी योजना के तहत विकसित करने की मांग की गई है। बेशक, जैसा कि एसआरए ने हमें बताया, एक झुग्गी योजना को मंजूरी नहीं दी गई है। लेकिन एसआरए ने योजना को खारिज भी नही की है।” Mumbai: A huge SRA scam exposed, Bombay High Court imposes stay
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने आदेश देते हुए कहा, कि “हम नगर निगम आयुक्त को उपरोक्त निर्देशों के अनुसार एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं, और स्पष्ट करते हैं कि क्या नगर निगम इस आरक्षित भुमि को झुग्गी योजना के रूप में विकसित करने की स्वतंत्र रूप से अनुमति देने का प्रस्ताव करती है? हलफनामा केवल नगर निगम आयुक्त द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें अदालत द्वारा उठाई गई सभी चिंताओं को संबोधित किया जाएगा, और नगर निगम द्वारा अपने पिछले निर्देशों का पालन करने की पुष्टि की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई, 2025 को होगी।”
इस आदेश के बाद याचिकाकर्ता फर्नांडीस ने कहा, कि “मुझे बहुत खुशी है, कि अदालत ने न केवल पुनर्विकास योजना पर रोक लगाई है, बल्कि बीएमसी आयुक्त को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का भी आदेश दिया है। यह सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित खेल का मैदान है, और इसे ऐसे ही रहना चाहिए।” Mumbai: A huge SRA scam exposed, Bombay High Court imposes stay
मनपा प्रशासन ने जताई आपत्ति
2021 में, प्लॉट के निवासियों के एक समूह ने योजना के तहत पुनर्विकास के प्रस्ताव के साथ SRA से संपर्क किया था। हालाँकि, 2023 में, फर्नांडीस ने आपत्ति जताई और फोर्ट में BMC के एस्टेट विभाग को पत्र लिखा। BMC ने एक जाँच की और उनकी शिकायत के बाद, तत्कालीन नगर आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने औपचारिक रूप से SRA को सूचित किया कि भूमि खेल के मैदान के उपयोग के लिए आरक्षित है और किसी भी पुनर्विकास पर मनपा प्रशासन की आपत्ति है।
SRA ने BMC की आपत्ति के बाद डेवलपर को हटा दिया था। लेकिन उसने SRA योजना को रद्द नहीं किया। परिणामस्वरूप, फर्नांडीस ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की, जिसके कारण ताज़ा घटना की जानकारी प्रकाशक में आई। फर्नांडीस माहिम पश्चिम में नासरवानजी वाडी सहकारी आवास सोसायटी की निवासी हैं और एक गृहिणी होने के कारण उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंस सेकेंड ईयर एजुकेशन पूरा करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी। उनके पति फ्रांसिस एक स्वतंत्र कर्मचारी हैं। Mumbai: A huge SRA scam exposed, Bombay High Court imposes stay
सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की आमदनी तो बढ़ा दी गई। लेकिन अब भी ये लोग गरीबी रेखा का हवाला देकर लाभ कमा रहे हैं। इसके खिलाफ सख्त होते हुए बीएमसी ने एक सर्कुलर जारी कर दिया है।
मुबई: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) ने अपने स्थायी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक कड़ा निर्देश जारी किया है। इसके तहत, जिन भी कर्मचारियों या अधिकारियों के पास केसरी राशन कार्ड हैं, उन्हें अब उसे बदलकर सफेद राशन कार्ड बनवाना होगा। ऐसा नही करने पर उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।
क्यों की जा रही है सख्ती?
बीएमसी प्रशासन द्वारा जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारियों को अपने पास मौजूद राशन कार्ड के रंग की जानकारी अपने विभाग प्रमुख के पास जमा करनी होगी। यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केसरी राशन कार्ड आर्थिक रूप से कमजोर (EOW) तबके के परिवारों को जारी किया जाता है। इस कार्ड पर लाभार्थियों को गेहं, चावल, चीनी जैसे आवश्यक खाद्यान्न रियायती दरों पर मिलते हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और आयुष्मान भारत योजना का लाभ भी इन्हीं कार्ड धारकों को मिलता है। गौरतलब हैं कि पीले कार्ड गरीब परिवारों के लिए होते हैं, जबकि सफेद कार्ड उच्च आय वर्ग के लिए जारी किए जाते हैं।
सर्कुलर के अनुसार, राष्ट्रय खाद्य सूरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत सरकार केवल उन्हीं लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराती है। जिनकी वार्षिक आय 59.000 रुपये या उससे कम है। महाराष्टू राज्य में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद, बीएमसी के ग्रुप ‘सी’ और ग्रूप ‘डी’ श्रेणी के कर्मचारियों का न्यूनतम मासिक वेतन क्रमशः 18.000 रुपये और 15.000 रुपये है। इस आय-सीमा को देखते हुए, बीएमसी के ये कर्मचारी केसरी राशन कार्ड के लाभ के पात्र नहीं हैं।
म्यूनिसिपल मजदूर यूनियन के संयुक्त सचिव प्रदीप नारकर ने बीएमसी द्वारा सर्कुलर जारी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सर्कुलर में साफ लिखा है कि यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी केसरी राशन कार्ड नही बदलवाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नारकर ने यह भी कहा कि सभी कर्मचारी इस सर्कुलर का पालना करंगे।
महाराष्ट्र में जनता के पैसों को बर्बाद किए जाने को लेकर राजनैतिक गलियारों में हंगामा मच गया है। पिछले दिनों महाराष्ट्र विधान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चांदी की प्लेटों में खाना परोसा गया था। जिसका 27 लाख रुपये खर्च आया है।
नेशनल डेस्क: मुंबई के विधान भवन में बीते कुछ दिनों पहले संसद की अनुमान समिति की ‘हीरक जयंती’ पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन पर खाने-पीने को लेकर भारी-भरकम खर्च किया गया। जिसको लेकर घमासान बहस छिड़ गई है। इस आयोजन में परोसे गए भोजन की कीमत, आलिशान मेहमान नवाज़ी और जिस थाली में खाने को परोसा गया? इन सबके चलते आम लोगों के टैक्स के पैसों से 27 लाख रुपये का खर्च अब राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। Wastage of public money in Maharashtra, food worth Rs 27 lakh eaten in one go.
समाजसेवक विजय कुंभार ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसको लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पोस्ट में कहा, कि “यह वही समिति है, जो सादगी और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की बात करती है। लेकिन वही समिति खुद 27 लाख रुपये सिर्फ खाने पर खर्च कर दिए।” कुंभार ने इसे जनता के पैसों की बर्बादी बताया है।
गटक लिया जनता के पैसे
विजय कुंभार ने अपनी पोस्ट में विस्तार से लिखते हुए बताया, कि मुंबई के विधान भवन में पूरे देश से आए बजट समिति के सदस्यों के लिए “राजाओं जैसे दावत” का आयोजन किया गया। इस दावत में प्रति व्यक्ति लागत 4,500 रुपये बताई गई है। खाने को चांदी की प्लेटों में परोसा गया, जिनकी प्रति प्लेट कीमत 550 रुपये बताई जा रही है। करीब 600 मेहमानों के लिए कुल खर्च 27 लाख रुपये हो गया। कुंभार ने कटाक्ष करते हुए कहा, यह वही समिति है जो सादगी का पाठ पढ़ाती है लेकिन खुद जनता के पैसों की बर्बादी कर गटक रही है।
विजय कुंभार ने आगे कहा कि इस सम्मेलन में देशभर से 600 मेहमान (अध्यक्ष, सदस्य और अधिकारी) शामिल हुए थे। उनके स्वागत में विधान भवन के बाहर 40 फुट ऊंचा बोर्ड लगाया गया, मानो यह कोई शाही स्वागत समारोह मनाया जा रहा हो। अध्यक्षों और सदस्यों के लिए होटल ताज पैलेस में ठहरने की सुविधा की गई और बाकि अधिकारियों के लिए होटल ट्राइडेंट में व्यवस्था की गई थी। इतना ही नहीं विधान सभा परिसर में मलमल के कपड़े से डाइनिंग मंडप बनाए गया। बड़े-बड़े झूमर लगाए गए और हॉल से लेकर डाइनिंग एरिया तक लाल कालीन बिछाई गई।
कुंभार ने सवाल उठाया, कि इस शाही व्यवस्था को देखकर आम आदमी के टैक्स के पैसे को इस तरह लूटने वाले इन समूहों को शर्म कैसे नही आई? क्या जनता के पैसों को इस तरह बर्बाद करने वाले वाकई किफायत की भाषा समझते हैं? यह सवाल अब हर नागरिक के मन में पनपने लगा है। Wastage of public money in Maharashtra, food worth Rs 27 lakh eaten in one go.
महाराष्ट्र में दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला’
इस मुद्दे पर कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर सबसे बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए निशाना साधा है। कांग्रेस विधायक ने सरकार पर “दोहरे मानदंड” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास गरीबों के लिए कोई पैसा नहीं है लेकिन साथ ही सत्तारूढ़ गठबंधन राजनीतिक अभिजात वर्ग पर खर्च करने में कोई संयम नहीं दिखा रहा है। वहीं शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस भोज समारोह को लेकर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है, कि “महाराष्ट्र में हो रहे भ्रष्टाचार की तुलना दुनिया के किसी भी घोटाले से नहीं की जा सकती। यह बहुत ही उच्च स्तरीय घोटाला है।”
मुंबई हवाई अड्डे पर रविवार और शनिवार रात सोना और ड्रग्स की तस्करी मे थाइलैंड से आए भारतीय दो नागरिक सहित एयरपोर्ट के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें सीमा शुल्क विभाग ने 16 करोड़ रुपये के ड्रग्स और सोना बरामद किया है।
Mumbai Airport News: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराषट्ट्रीय हवाई अडे पर सीमा शुल्क विभाग ने 16 करोड़ रुपए मूल्य का मादक पदार्थ व सोना जब्त किया और हवाई अड्डे के 2 कर्मचारियों सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।
तस्करी की सूचना
अधिकारियों ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया, कि सीमा शुल्क विभाग की हवाई खुफिया इकाई (AIU) के अधिकारियों को पिछले कुछ दिनों में हवाई अड्डे के दो कर्मचारियों के तस्करी गतिविधियों में शामिल होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने दोनों को रोककर उनके थैलों में मोजों के अंदर छिपाकर रखे गए 24 कैरेट सोने के चूर्ण को बरामद किया। जब्त सोने की कीमत 4.24 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
सिंडीकेट की हो रही है जांच
उन्होंने बताया कि पुलिस ने दोनों को रोककर उनके थैलों में मोजों के अंदर छिपाकर रखे गए 24 कैरेट सोने के चूर्ण को बरामद किया। जब्त किए गए सोने का कुल शुद्ध वजन 4.44 किलोग्राम था, जिसका अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्यांकन लगभग 4.24 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों कर्मचारियों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया है, और सोने के स्रोत और सिंडिकेट की संलिप्तता का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।
एक अन्य मामले में सीमा शुल्क टीम ने शनिवार को बैंकॉक, थाईलैंड से यात्रा कर रहे दो भारतीय नागरिकों को रोका। अधिकारी ने बताया कि इनकी तलाशी के दौरान मादक पदार्थ जब्त किया गया। जब्त किए गए प्रतिबंधित ड्रग्स का वजन 11.881 किलोग्राम है और इसकी कीमत 11.88 करोड़ रुपए बताई गई है। उन्होंने बताया कि ड्रग्स को ट्रॉली बैग में रखे तकिए के खोल में छिपाकर रखा गया था। उन्होंने बताया कि दोनों को स्वापक औषधि और मन प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS) के तहत गिरफ्तार किया गया है।